औद्योगिक अर्थशास्त्र में लघु व्यवसाय (Small Business) से अभिप्राय एक ऐसे स्वतंत्र स्वामित्व एवं संचालन वाले उद्यम से है, जिसकी विनियोजित पूंजी अपेक्षाकृत सीमित होती है, परिचालन का भौगोलिक दायरा स्थानीय अथवा क्षेत्रीय होता है, कार्यरत श्रमिकों की संख्या सीमित होती है तथा उत्पादन प्रक्रिया मुख्यतः श्रम-प्रधान होती है। वैधानिक दृष्टि से यह एकल स्वामित्व, साझेदारी अथवा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में गठित हो सकता है; किंतु इसका मूल स्वरूप इसके व्यक्तिगत प्रबंधन, त्वरित निर्णयों तथा स्थानीय बाजार की मांग से सीधे जुड़ाव में निहित होता है।
लघु व्यवसाय मुख्य रूप से दो श्रेणियों में संचालित होते हैं:
- आधुनिक लघु उद्योग (Modern SSIs / MSMEs): आधुनिक विद्युत शक्ति, परिष्कृत मशीनरी तथा मानकीकृत उत्पादन विधियों का उपयोग कर ऑटोमोबाइल कलपुर्जे, प्लास्टिक उत्पाद, रसायन, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण करने वाले उपक्रम।
- पारंपरिक, ग्रामीण एवं कुटीर उद्योग (Cottage & Village Industries): वंशानुगत कला एवं हुनर पर आधारित पारिवारिक इकाइयां, जो स्थानीय कच्चे माल तथा साधारण हस्तचालित उपकरणों से उत्पाद बनाती हैं। जैसे हथकरघा बुनाई, रेशम कीट पालन, मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा शिल्प, पीतल-कांसा शिल्प, जूट उत्पाद तथा डोकरा धातु कला।
पूर्व में लघु उद्योगों की परिभाषा केवल संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश की सीमा पर आधारित थी। वर्ष 2006 में भारतीय संसद ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (MSMED Act, 2006) पारित किया, जिसमें विनिर्माण एवं सेवा उद्यमों के लिए अलग-अलग सीमाएं निर्धारित थीं।
कालांतर में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की सीमाओं के धुंधले होने के कारण भारत सरकार ने 1 जुलाई, 2020 से एक ऐतिहासिक व युगांतरकारी संशोधन लागू किया। इस सुधार ने विनिर्माण व सेवा के कृत्रिम भेद को समाप्त कर दिया और दोनों के लिए एक समान समग्र मापदंड (Composite Criteria) प्रस्तुत किया, जो संयंत्र व मशीनरी/उपकरण में निवेश तथा वार्षिक टर्नओवर (Annual Turnover) दोनों के संयुक्त आधार पर निर्धारित होता है।
| उद्यम की श्रेणी | संयंत्र एवं मशीनरी / उपकरण में निवेश की अधिकतम सीमा | वार्षिक टर्नओवर (Turnover) की अधिकतम सीमा |
|---|---|---|
| सूक्ष्म उद्यम (Micro Enterprise) | ₹1 करोड़ (≤ ₹10 मिलियन) से अधिक नहीं | ₹5 करोड़ (≤ ₹50 मिलियन) से अधिक नहीं |
| लघु उद्यम (Small Enterprise) | ₹10 करोड़ (≤ ₹100 मिलियन) से अधिक नहीं | ₹50 करोड़ (≤ ₹500 मिलियन) से अधिक नहीं |
| मध्यम उद्यम (Medium Enterprise) | ₹50 करोड़ (≤ ₹500 मिलियन) से अधिक नहीं | ₹250 करोड़ (≤ ₹2,500 मिलियन) से अधिक नहीं |
- पारिवारिक श्रम की प्रधानता: बाहरी वेतनभोगी श्रमिकों के स्थान पर परिवार के सभी सदस्य (महिलाएं, युवा एवं वृद्ध) मिलजुलकर कार्य करते हैं।
- अल्प पूंजी निवेश: भारी स्वचालित मशीनों की आवश्यकता नहीं होती; साधारण हस्तचालित औजारों से बहुत कम खर्च में उत्पादन होता है।
- स्थानीय कच्चा माल एवं पारंपरिक कला: स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों (मिट्टी, जूट, शहतूत रेशम, बांस, पीतल) का उपयोग कर पीढ़ी-दर-पीढ़ी सीखी गई पारंपरिक कला का प्रयोग किया जाता है।
- स्थानीय बाजार व मेलों में बिक्री: ग्रामीण हाटों, मेलों एवं सरकारी हस्तशिल्प केंद्रों (उदा. तंतुजा, मंजूषा, विश्व बांग्ला) के माध्यम से बिक्री की जाती है।