(क) बुनियादी पारिभाषिक शब्दावली:
- यादृच्छिक प्रयोग (Random Experiment): ऐसा प्रयोग जिसके सभी संभव परिणाम पहले से ज्ञात हों, परंतु किसी विशिष्ट परीक्षण में कौन-सा परिणाम आएगा, इसकी निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती (जैसे सिक्का उछालना या पासा फेंकना)।
- समप्रायिक परिणाम (Equally Likely Outcomes): जब किसी प्रयोग के किसी एक परिणाम के आने की संभावना किसी दूसरे परिणाम के आने की संभावना से न तो कम हो और न अधिक हो (जैसे एक अनभिनत सिक्का उछालने पर चित और पट दोनों की संभावना बराबर $1/2$ होती है)।
- प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space - $S$): किसी यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभव परिणामों का समुच्चय। कुल परिणामों की संख्या को $n(S)$ लिखते हैं।
सैद्धांतिक प्रायिकता का सार्वभौमिक सूत्र:
$$\mathbf{P(E) = \frac{n(E)}{n(S)} = \frac{\text{घटना } E \text{ के अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{प्रयोग के सभी संभव परिणामों की कुल संख्या}}}$$(ख) प्रायिकता की दो स्वर्णिम सीमाएं (CBSE 1 अंक MCQs):
$$\mathbf{0 \le P(E) \le 1}$$ • प्रायिकता कभी भी ऋणात्मक नहीं हो सकती (जैसे $-1.5$ या $-0.2$ कभी प्रायिकता नहीं हो सकती)।
• प्रायिकता कभी भी 1 से बड़ी नहीं हो सकती (जैसे $1.5$ या $\frac{5}{3}$ कभी प्रायिकता नहीं हो सकती)।
नियम 2: किसी प्रयोग की सभी प्रारंभिक घटनाओं की प्रायिकताओं का कुल योग सदैव 1 होता है:
$$\mathbf{\sum P(E_i) = P(E_1) + P(E_2) + \dots + P(E_k) = 1}$$