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  • अध्याय 16: मानव-पर्यावरण अंतःक्रिया: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Human-Environment Interactions: The Tropical and the Subtropical Region)
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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Social Science • अध्याय 16
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

मानव-पर्यावरण अंतःक्रिया: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Human-Environment Interactions: The Tropical and the Subtropical Region)

इस अध्याय में हम पृथ्वी के दो अत्यंत महत्वपूर्ण जल-बेसिनों—उष्णकटिबंधीय अमेजन बेसिन (दक्षिण अमेरिका) और उपोष्णकटिबंधीय गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन (भारतीय उपमहाद्वीप)—में मानव और पर्यावरण के पारस्परिक संबंधों, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, वन्यजीवों तथा मानवीय जीवन शैलियों का गहन तुलनात्मक अध्ययन करेंगे।

क्या आप जानते हैं कि एक नदी बेसिन पूरे ग्रह का 20% ऑक्सीजन और दुनिया की सबसे घनी आबादी दोनों को संभालता है?

दक्षिण अमेरिका की अमेजन नदी का बेसिन दुनिया का सबसे बड़ा वर्षावन है, जिसे 'पृथ्वी का फेफड़ा' कहा जाता है, जहाँ दिन में भी सूरज की रोशनी जमीन तक नहीं पहुँचती। वहीं दूसरी ओर, भारत का गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन दुनिया का सबसे उपजाऊ मैदान है जहाँ 40 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। प्रकृति के इन दो अलग-अलग स्वरूपों में मानव जीवन कैसे ढला, आइए इसे विस्तार से समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय हमें यह समझने में मदद करता है कि विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों (वर्षावन बनाम मानसूनी जलोढ़ मैदान) में मनुष्य अपने आवास, कृषि पद्धतियों और अर्थव्यवस्था को कैसे अनुकूलित करता है। साथ ही यह वनों की कटाई, नदी प्रदूषण और सतत विकास की वैश्विक चुनौतियों को उजागर करता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • अक्षांश, देशांतर और पृथ्वी के प्रमुख ताप कटिबंधों (उष्ण, शीतोष्ण) की मूलभूत समझ।
  • जल चक्र, वर्षा और प्राकृतिक वनस्पतियों के वितरण की प्राथमिक अवधारणा।
  • मानचित्र पर महाद्वीपों (दक्षिण अमेरिका और एशिया) तथा प्रमुख नदियों की स्थिति की जानकारी।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • उष्णकटिबंधीय (10°N से 10°S) और उपोष्णकटिबंधीय (10°N से 30°N) कटिबंधों की भौगोलिक स्थिति व जलवायु में अंतर स्पष्ट करना।
  • अमेजन बेसिन की जलवायु, वर्षावनों की परतदार संरचना, ब्रोमेलियाड, स्लॉथ, टूकन तथा मैलोका (Maloca) आवास को समझना।
  • कर्तन एवं दहन (Slash and Burn) कृषि पद्धति और आधुनिक विकास के कारण वर्षावनों के विनाश के परिणामों का विश्लेषण करना।
  • गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन के स्थलरूपों, जलोढ़ मृदा, सघन जनसंख्या घनत्व, मानसूनी कृषि (धान की खेती) और वेदिका कृषि को समझना।
  • सुंदरबन डेल्टा, मैंग्रोव वन, रॉयल बंगाल टाइगर, एक सींग वाले गैंडे तथा गंगा की डॉल्फिन (सुसु) के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करना।
  • नमामि गंगे और स्वच्छ भारत मिशन जैसी संरक्षण पहलों के संदर्भ में नदी पारिस्थितिकी की सुरक्षा का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. उष्णकटिबंधीय प्रदेश : अमेजन बेसि...
2 2. कर्तन एवं दहन कृषि और वर्षावनों...
3 3. उपोष्णकटिबंधीय प्रदेश : गंगा-ब्र...
4 4. प्राकृतिक वनस्पति, वन्यजीव एवं न...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. उष्णकटिबंधीय प्रदेश : अमेजन बेसिन में जीवन (Life in the Amazon Basin)

भूमध्य रेखा के 10° उत्तर से 10° दक्षिण के मध्य स्थित भाग को उष्णकटिबंधीय प्रदेश (Tropical Region) अथवा भूमध्यरेखीय प्रदेश कहा जाता है। दक्षिण अमेरिका की विशाल अमेजन नदी इसी प्रदेश से होकर बहती है। जिस स्थान पर कोई नदी किसी अन्य जलराशि (समुद्र या झील) में मिलती है, उसे नदी का मुहाना (Mouth) कहते हैं।

अमेजन बेसिन की भौगोलिक व जलवायु विशेषताएँ

  • विस्तार : यह बेसिन ब्राजील के भागों, पेरू के कुछ हिस्सों, बोलीविया, इक्वाडोर, कोलंबिया तथा वेनेजुएला के छोटे भाग से अपवाहित होता है।
  • जलवायु : यहाँ वर्षभर गर्म एवं नम जलवायु रहती है। दिन और रात दोनों समय तापमान एवं आर्द्रता अत्यधिक उच्च रहते हैं। शरीर में चिपचिपाहट महसूस होती है।
  • वर्षा : यहाँ लगभग प्रतिदिन वर्षा होती है, और वह भी बिना किसी पूर्व चेतावनी के। दिन का तापमान उच्च और आर्द्रता अति उच्च, जबकि रात में तापमान थोड़ा गिरता है लेकिन आर्द्रता बनी रहती है।
वर्षावन (Rainforests) की संरचना

यहाँ की वनस्पति इतनी सघन है कि पत्तियों और शाखाओं की एक सघन छत (Canopy) बन जाती है, जिसके कारण सूर्य का प्रकाश धरातल तक नहीं पहुँच पाता। धरातल अप्रकाशित और नम रहता है। केवल वही वनस्पतियाँ पनप सकती हैं जिनमें छाया में उगने की क्षमता हो। परजीवी पौधों के रूप में ऑर्किड और ब्रोमेलियाड (Bromeliads) उगते हैं।

अनोखे वन्यजीव (Fauna)

यहाँ रंग-बिरंगी चोंच वाले पक्षी जैसे टूकन (Toucan) और हमिंगबर्ड पाए जाते हैं। स्तनधारियों में पेड़ों पर धीरे-धीरे चलने वाला स्लॉथ (Sloth) और चींटी खाने वाला टैपिर (Tapir) प्रमुख हैं। सरीसृपों में अजगर, अनाकोंडा और बोआ पाए जाते हैं। नदी में मांसभक्षी पिरान्हा (Piranha) मछली पाई जाती है।

अमेजन बेसिन के निवासी एवं आवास

यहाँ के पुरुष शिकार करते हैं तथा नदी में मछली पकड़ते हैं, जबकि महिलाएँ फसलों का ध्यान रखती हैं।

मुख्य फसलें :

टैपियोका (कसावा - जो आलू की तरह जमीन के नीचे उगता है), अनानास और शकरकंद। नकदी फसलों में कॉफी, मक्का और कोको शामिल हैं। चींटी की रानी और अंडकोष भी खाए जाते हैं।

मैलोका (Maloca) घर :

लोग मधुमक्खी के छत्ते के आकार वाले छप्पर के घरों में रहते हैं। कुछ लोग अपार्टमेंट जैसे बड़े घरों में रहते हैं जिन्हें मैलोका कहा जाता है, जिनकी छत तीव्र ढलान वाली होती है ताकि भारी वर्षा का पानी तेजी से बह जाए।

2. कर्तन एवं दहन कृषि और वर्षावनों का विनाश (Slash and Burn Agriculture & Deforestation)

अमेजन बेसिन के पारंपरिक निवासी कर्तन एवं दहन (Slash and Burn) कृषि पद्धति अपनाते हैं। इस पद्धति में किसान वृक्षों और झाड़ियों को काटकर भूमि साफ करते हैं, फिर उन्हें जला देते हैं जिससे पोषक तत्व मृदा में मिल जाते हैं।

चरण प्रक्रिया (Process) पारिस्थितिक प्रभाव
1. भूमि की सफाई छोटे भूखंड पर पेड़ों और झाड़ियों को काटना (Slash)। सूर्य का प्रकाश जमीन तक पहुँचता है।
2. दहन एवं पोषक संवर्धन कटे हुए मलबे को जलाना (Burn); राख मिट्टी में मिल जाती है। राख से पोटाश व खनिजों द्वारा मृदा की उर्वरता बढ़ती है।
3. सीमित खेती कुछ वर्षों (3-5 वर्ष) तक लगातार फसलें उगाना। धीरे-धीरे मृदा के पोषक तत्वों का ह्रास हो जाता है।
4. परित्याग व पुनर्जनन पुराने खेत को छोड़कर नए स्थान पर जाना ताकि पुरानी जमीन पर फिर से जंगल उग सके। पारंपरिक रूप से यह चक्र टिकाऊ था, परंतु अत्यधिक जनसंख्या से चक्र बाधित हुआ है।

वर्षावनों का विनाश : एक वैश्विक पर्यावरणीय संकट

1970 में ट्रांस-अमेजन महामार्ग (Trans-Amazon Highway) बनने से वर्षावनों के सभी भागों तक पहुँचना संभव हो गया। हवाई जहाजों और हेलीकॉप्टरों का भी उपयोग होने लगा। स्वदेशी आबादी को उस क्षेत्र से बाहर खदेड़ा गया और व्यावसायिक गतिविधियों ने जंगल को काट डाला।

परिणाम : वर्षावनों के जैविक विनाश से वर्षा का जल सीधे नंगी जमीन पर गिरता है, जिससे ऊपरी उपजाऊ मृदा बह जाती है और हरा-भरा वर्षावन बंजर भूमि (Barren Landscape) में तब्दील हो रहा है।

3. उपोष्णकटिबंधीय प्रदेश : गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन में जीवन (Life in the Ganga-Brahmaputra Basin)

भारतीय उपमहाद्वीप में गंगा तथा ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ मिलकर उपोष्णकटिबंध (Subtropical Region) में एक विशाल बेसिन का निर्माण करती हैं। यह बेसिन 10° उत्तर से 30° उत्तर अक्षांश के मध्य स्थित है।

अपवाह तंत्र एवं सहायक नदियाँ
  • गंगा की सहायक नदियाँ : घाघरा, सोन, चंबल, गंडक, कोसी।
  • ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ : तीस्ता, मानस, सुबनसिरी, दिबांग, लोहित।
  • सुंदरबन डेल्टा : गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ बंगाल की खाड़ी में मिलने से पूर्व विश्व के सबसे बड़े डेल्टा का निर्माण करती हैं।
जलवायु एवं मानसूनी प्रभाव
  • मानसून प्रधान जलवायु : मध्य जून से मध्य सितंबर के बीच मानसूनी हवाओं से भारी वर्षा होती है।
  • ऋतु चक्र : ग्रीष्म ऋतु में तेज गर्मी और शीत ऋतु में ठंडी शुष्क जलवायु पाई जाती है।
  • बाढ़ की विभीषिका : वर्षा ऋतु में नदियों में जलस्तर बढ़ने से मैदानों में भीषण बाढ़ आती है।

स्थलरूप, जनसंख्या घनत्व एवं सघन कृषि

पर्वतीय क्षेत्रों की तीव्र ढलान पर जनसंख्या विरल है, जबकि मैदानी इलाकों में जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) की प्रचुरता और समतल भूमि के कारण जनसंख्या घनत्व अत्यधिक उच्च है (उदा. बिहार में 1100+ व्यक्ति प्रति वर्ग किमी)।

मुख्य फसलें :

धान (Paddy) मुख्य फसल है जिसके लिए अधिक जल चाहिए। अन्य फसलें: गेहूँ, मक्का, चना, बाजरा, गन्ना तथा जूट (पटसन)।

बागान एवं रेशम :

असम और पश्चिम बंगाल में चाय के बागान। बिहार और असम के कुछ भागों में रेशम के कीड़ों का पालन (Sericulture) कर सिल्क उत्पादन।

वेदिका कृषि (Terrace Farming) :

पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीनुमा सपाट खेत बनाए जाते हैं ताकि ढलान से बहने वाले पानी की गति धीमी हो और मृदा अपरदन रुक सके।

झारखंड और गंगा बेसिन का संबंध (Jharkhand Connection)

झारखंड राज्य का साहिबगंज जिला प्रत्यक्ष रूप से गंगा नदी के तट पर स्थित है। साहिबगंज में गंगा पर एक अत्याधुनिक मल्टी-मॉडल इनलैंड वाटरवे टर्मिनल (Multi-modal Terminal) स्थापित किया गया है, जो राज्य को राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1 : हल्दिया से प्रयागराज) के जरिए सीधे समुद्री व्यापार से जोड़ता है।

4. प्राकृतिक वनस्पति, वन्यजीव एवं नगरीय परिदृश्य (Flora, Fauna & Urban Centers)

गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन में स्थलरूपों की विविधता के अनुसार वनस्पति और वन्यजीवों में अद्भुत विविधता पाई जाती है।

वनस्पति संपदा (Flora)
  • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन : मैदानों में सागवान, साल, शीशम, पीपल और बरगद के पेड़।
  • बांस के घने झुरमुट : ब्रह्मपुत्र के मैदानों में विशाल बांस के कुंज आम हैं।
  • मैंग्रोव वन : सुंदरबन डेल्टा क्षेत्र में सुंदरी वृक्ष एवं लवण-सहिष्णु मैंग्रोव वनस्पति पाई जाती है।
  • शंकुधारी वन :; उत्तरांचल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में चीड़, देवदार और फर जैसे कोणधारी वृक्ष।
वन्यजीव एवं अद्वितीय जलीय जीव
  • विशाल जीव : हाथी, बाघ, हिरण, बंदर। ब्रह्मपुत्र के मैदानों (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) में एक सींग वाला गैंडा।
  • डेल्टा जीव : सुंदरबन में रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाते हैं।
  • सुसु (गंगा की डॉल्फिन) : गंगा और ब्रह्मपुत्र के ताजे जल में अंधी डॉल्फिन (प्लैटानिस्ता गैंगेटिका) पाई जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'सुसु' कहते हैं। यह जल की शुद्धता का प्राकृतिक सूचक है।

प्रमुख शहर, पर्यटन एवं नदी संरक्षण (Swachh Bharat & Namami Gange)

गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानों में कई बड़े शहर बसे हैं—इलाहाबाद (प्रयागराज), कानपुर, वाराणसी, लखनऊ, पटना और कोलकाता (हुगली नदी पर प्रमुख अंतर्देशीय बंदरगाह)। इन शहरों का अनुपचारित औद्योगिक व घरेलू कचरा नदियों को अत्यधिक प्रदूषित कर रहा है।

नमामि गंगे कार्यक्रम :

गंगा नदी के संरक्षण, प्रदूषण निवारण और पुनरुद्धार के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय एकीकृत मिशन।

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र :

आगरा में यमुना किनारे ताजमहल, वाराणसी के गंगा घाट, लखनऊ का इमामबाड़ा, बिहार में बौद्ध स्तूप तथा असम में काजीरंगा व मानस वन्यजीव अभयारण्य।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

उष्णकटिबंधीय बनाम उपोष्णकटिबंधीय अक्षांशीय सूत्र
उष्णकटिबंध = 10° N से 10° S (भूमध्यरेखीय) | उपोष्णकटिबंध = 10° N से 30° N (मध्य अक्षांशीय)
अमेजन बेसिन भूमध्य रेखा पर स्थित होने से दैनिक संवहनीय वर्षा पाता है, जबकि गंगा बेसिन उपोष्ण में स्थित होने से मौसमी मानसूनी वर्षा प्राप्त करता है।
जनसंख्या घनत्व सूत्र (Population Density)
जनसंख्या घनत्व = कुल जनसंख्या / कुल क्षेत्रफल (व्यक्ति प्रति वर्ग किमी)
पर्वतीय तीव्र ढलानों पर विरल जनसंख्या होती है, जबकि गंगा के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में जनसंख्या घनत्व 1000+ व्यक्ति/वर्ग किमी तक पहुँच जाता है।
सुसु (Susu) डॉल्फिन पारिस्थितिक सूचकांक
स्वच्छ अप्रदूषित ताजा जल ➔ स्वस्थ सुसु उपस्थिति | औद्योगिक अपशिष्ट व रसायन ➔ सुसु विलुप्ति
गंगा नदी डॉल्फिन (Platanista gangetica) केवल अत्यंत शुद्ध जल में जीवित रह सकती है, इसलिए इसकी उपस्थिति नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का प्रमाण है।
कर्तन एवं दहन (Slash and Burn) चक्रीय सूत्र
वन कटाई (Slash) ➔ दहन (Burn/राख संवर्धन) ➔ अल्पकालिक कृषि (3-5 वर्ष) ➔ खेत परित्याग ➔ नया भूखंड
मृदा के पोषक तत्वों के ह्रास होने पर किसानों द्वारा प्राकृतिक रूप से जंगल को पुनर्जीवित होने देने की पारंपरिक चक्रीय प्रणाली।
मैलोका (Maloca) वास्तुकला सिद्धांत
अत्यधिक तीव्र ढालू छत (Steep Roof) = त्वरित वर्षा जल निकास + उच्च आर्द्रता से बचाव
वर्षावन में प्रतिदिन होने वाली मूसलाधार वर्षा से घर को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय प्राकृतिक सामग्रियों से निर्मित विशाल अपार्टमेंटनुमा आवास।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
अमेजन बेसिन और गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन की जलवायु एवं मानवीय जीवनशैली में मुख्य अंतर क्या हैं? सारणीबद्ध तुलना प्रस्तुत कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

दोनों बेसिनों की तुलना निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर की जा सकती है:

लक्षण अमेजन बेसिन (Amazon Basin) गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन (Ganga Basin)
अक्षांशीय स्थिति 10°N से 10°S (उष्णकटिबंधीय / भूमध्यरेखीय) 10°N से 30°N (उपोष्णकटिबंधीय)
जलवायु वर्षभर अत्यधिक गर्म, नम व प्रतिदिन वर्षा मानसूनी जलवायु (ग्रीष्म, वर्षा व शीत ऋतु)
प्राकृतिक वनस्पति सघन वर्षावन (कैनोपी छत, ब्रोमेलियाड, ऑर्किड) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन एवं मैंग्रोव
मुख्य फसलें टैपियोका (कसावा), अनानास, शकरकंद, कोको धान (चावल), गेहूँ, गन्ना, जूट, मक्का, चाय
जनसंख्या घनत्व अत्यंत विरल (जंगलों में बिखरे कबीले) अत्यधिक सघन (सैकड़ों से हजार+ प्रति वर्ग किमी)
उदाहरण 2
कर्तन एवं दहन (Slash and Burn) कृषि क्या है? यह पद्धति आधुनिक समय में वर्षावनों के विनाश का कारण क्यों बनती जा रही है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

1. कर्तन एवं दहन कृषि की परिभाषा : इसमें किसान वन के एक छोटे टुकड़े के पेड़ों-झाड़ियों को काटकर गिराते हैं और फिर उन्हें जला देते हैं। जलाने से उत्पन्न राख मिट्टी में मिलकर उसकी उर्वरता बढ़ाती है। इस जमीन पर कुछ वर्षों तक टैपियोका या मक्का उगाया जाता है।

2. चक्र एवं आधुनिक समस्या : 3-5 वर्षों बाद जब मिट्टी के पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं, तब उस जमीन को छोड़ दिया जाता है ताकि प्राकृतिक रूप से फिर से जंगल उग सके। परंतु आधुनिक समय में जनसंख्या बढ़ने और व्यावसायिक सड़कों (जैसे ट्रांस-अमेजन महामार्ग), खनन और लकड़ी कंपनियों के आने से जंगलों को पुनः पनपने का समय नहीं मिलता। लगातार बड़े पैमाने पर जंगल कटने से मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत बह जाती है और जंगल हमेशा के लिए बंजर हो जाते हैं।

उदाहरण 3
गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानों में धान (चावल) की खेती सबसे अधिक क्यों की जाती है? इसके लिए किन भौगोलिक दशाओं की आवश्यकता होती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानों में धान की सघन खेती के प्रमुख भौगोलिक कारण निम्नलिखित हैं:

  • उर्वर जलोढ़ मृदा : नदियों द्वारा प्रतिवर्ष लाई जाने वाली नई जलोढ़ (खादर) मिट्टी अत्यधिक उपजाऊ होती है जो धान की फसल के लिए आदर्श है।
  • प्रचुर जल आपूर्ति : धान की फसल को उगने और पकने के लिए 100 सेमी से अधिक वर्षा तथा खड़े पानी की आवश्यकता होती है। मानसूनी वर्षा और नदियों की नहरें पर्याप्त पानी उपलब्ध कराती हैं।
  • समतल धरातल : समतल मैदानी भूभाग में खेतों में पानी को रोककर रखना आसान होता है।
  • सस्ता एवं प्रचुर श्रम : धान की रोपाई, निराई और कटाई के लिए अधिक मानवीय श्रम चाहिए, जो इस सघन बसे बेसिन में आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
उदाहरण 4
वेदिका कृषि (Terrace Farming) क्या है? पर्वतीय क्षेत्रों में इसका क्या महत्व है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

1. वेदिका कृषि की अवधारणा : तीव्र ढलानों पर सीढ़ियों (Terraces) के आकार में सपाट खेत बनाए जाते हैं। प्रत्येक सीढ़ी के बाहरी किनारे पर मेड़ उठाई जाती है।

2. महत्व :

  • तीव्र ढलान पर वर्षा का जल अत्यंत तीव्र गति से नीचे बहता है, जिससे मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत कट जाती है (मृदा अपरदन)। सीढ़ीनुमा सपाट खेत जल के बहाव की गति को धीमा कर देते हैं।
  • सपाट धरातल बन जाने से पानी खेतों में ठहरता है, जिससे फसलों की सिंचाई संभव हो पाती है।
  • पर्वतीय ढलानों पर खेती योग्य समतल भूमि उपलब्ध कराती है।
उदाहरण 5
अंधी डॉल्फिन 'सुसु' क्या है? इसे गंगा नदी के स्वास्थ्य का सूचक (Bio-indicator) क्यों माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

1. परिचय : गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी के अलवण (मीठे/ताजे) जल में एक विशेष प्रकार की अंधी डॉल्फिन पाई जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'सुसु' (Susu) अथवा गंगा डॉल्फिन (वैज्ञानिक नाम: Platanista gangetica) कहा जाता है। इसे भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव (National Aquatic Animal) भी घोषित किया गया है।

2. स्वास्थ्य का सूचक होने का कारण : सुसु केवल अत्यधिक स्वच्छ, अप्रदूषित और बिना रासायनिक अपशिष्ट वाले ताजे जल में ही जीवित रह सकती है। यदि किसी नदी खंड में शहरों का अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक विषाक्त रसायन या कीटनाशक अधिक हो जाते हैं, तो सुसु की मृत्यु हो जाती है या वह उस क्षेत्र को छोड़ देती है। अतः नदी में सुसु की स्वस्थ उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि नदी का जल स्वच्छ और जीवित है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अमेजन बेसिन और गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन दोनों को एक ही प्रकार का उष्णकटिबंधीय वर्षावन समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अमेजन बेसिन 10°N से 10°S (उष्णकटिबंधीय भूमध्यरेखीय) में है जहाँ सदाबहार वर्षावन पाए जाते हैं, जबकि गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन 10°N से 30°N (उपोष्णकटिबंध) में स्थित है जहाँ मानसूनी पर्णपाती वन और जलोढ़ मैदान पाए जाते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ब्रोमेलियाड (Bromeliad) को एक मांसाहारी कीटभक्षी पौधा मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ब्रोमेलियाड एक परजीवी या अधिपादप (Epiphyte) पौधा है जो अपनी पत्तियों में वर्षा का जल संचित करता है। मेंढक जैसे प्राणी इन जल संचयों का उपयोग अंडे देने के लिए करते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि गंगा बेसिन के पहाड़ी क्षेत्रों में भी मैदानों की तरह सघन जनसंख्या निवास करती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पर्वतीय भागों में तीव्र ढलान, दुर्गम भूभाग और खेती योग्य समतल भूमि की कमी के कारण जनसंख्या बहुत विरल है; जबकि समतल मैदानों में उपजाऊ जलोढ़ मृदा और परिवहन सुविधाओं के कारण जनसंख्या अत्यंत सघन है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

मानव-पर्यावरण अन्योन्यक्रिया : दो प्रमुख बेसिनों का तुलनात्मक मॉडल अमेजन बेसिन (उष्णकटिबंधीय) • स्थिति : 10°N से 10°S (भूमध्यरेखीय) • जलवायु : वर्षभर गर्म, नम, दैनिक वर्षा • वनस्पति : सघन कैनोपी वर्षावन, ब्रोमेलियाड • जीव : टूकन, स्लॉथ, टैपिर, अनाकोंडा, पिरान्हा • मानवीय जीवन : कर्तन एवं दहन (टैपियोका), मैलोका • संकट : ट्रांस-अमेजन मार्ग से वनों की कटाई 'पृथ्वी का फेफड़ा' — विरल जनसंख्या घनत्व गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन (उपोष्णकटिबंधीय) • स्थिति : 10°N से 30°N (उपोष्णकटिबंध) • जलवायु : मानसूनी (ग्रीष्म, वर्षा, शीत चक्र) • वनस्पति : पर्णपाती (साल, सागवान), सुंदरबन मैंग्रोव • जीव : हाथी, 1-सींग गैंडा, रॉयल बंगाल टाइगर, सुसु • मानवीय जीवन : सघन जलोढ़ खेती (धान, जूट, चाय) • संरक्षण : नमामि गंगे, स्वच्छ भारत मिशन 'सभ्यता का पालना' — अत्यधिक सघन जनसंख्या

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
10°N से 10°S के मध्य भूमध्यरेखीय उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित अमेजन बेसिन विश्व का सबसे बड़ा नदी अपवाह बेसिन है।
मुख्य बिंदु 2
अमेजन बेसिन में वर्षभर प्रतिदिन भारी वर्षा तथा उच्च तापमान व उच्च आर्द्रता वाली चिपचिपी जलवायु पाई जाती है।
मुख्य बिंदु 3
अमेजन के सघन वर्षावनों में पत्तियों की घनी कैनोपी (छत) के कारण सूर्य का प्रकाश जमीन तक नहीं पहुँचता; यहाँ ऑर्किड व ब्रोमेलियाड जैसे अधिपादप उगते हैं।
मुख्य बिंदु 4
अमेजन के मुख्य जीवों में टूकन पक्षी, सुस्त स्तनधारी स्लॉथ, टैपिर, अनाकोंडा अजगर और मांसाहारी पिरान्हा मछली शामिल हैं।
मुख्य बिंदु 5
अमेजन के आदिवासी कर्तन एवं दहन (Slash and Burn) पद्धति से कसावा (टैपियोका), अनानास व शकरकंद उगाते हैं और ढालू छत वाले 'मैलोका' घरों में रहते हैं।
मुख्य बिंदु 6
1970 के ट्रांस-अमेजन महामार्ग के निर्माण के बाद वनों की अंधाधुंध कटाई से शीर्ष मृदा का अपरदन हुआ है और वर्षावन बंजर भूमि में बदल रहे हैं।
मुख्य बिंदु 7
गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन 10°N से 30°N के उपोष्णकटिबंध में स्थित है, जहाँ मानसूनी वर्षा और अत्यंत उपजाऊ जलोढ़ मैदान पाए जाते हैं।
मुख्य बिंदु 8
समतल मैदानों में जलोढ़ मृदा और प्रचुर जल के कारण धान मुख्य फसल है तथा यहाँ जनसंख्या घनत्व विश्व में सर्वाधिक सघन क्षेत्रों में से एक है।
मुख्य बिंदु 9
सुंदरबन डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है जहाँ सुंदरी मैंग्रोव वन, रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ तथा ब्रह्मपुत्र में एक सींग वाला गैंडा पाया जाता है।
मुख्य बिंदु 10
गंगा-ब्रह्मपुत्र के अलवण जल में पाई जाने वाली अंधी डॉल्फिन 'सुसु' जल की शुद्धता का जैविक सूचक है; इसके संरक्षण हेतु नमामि गंगे मिशन संचालित है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
अमेजन बेसिन किस अक्षांश के मध्य स्थित है और इसे किस प्रकार का कटिबंध कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: A) 10° N से 10° S के मध्य, उष्णकटिबंधीय (भूमध्यरेखीय) प्रदेश
अमेजन बेसिन भूमध्य रेखा के दोनों ओर 10° उत्तर से 10° दक्षिण अक्षांशों के बीच स्थित है, इसलिए इसे भूमध्यरेखीय अथवा उष्णकटिबंधीय प्रदेश कहा जाता है।
2
अमेजन वर्षावन के लोगों द्वारा बनाए जाने वाले बड़े, तीव्र ढलान वाली छत वाले घरों को क्या कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B) मैलोका (Maloca)
अमेजन बेसिन में कुछ लोग बड़े अपार्टमेंट जैसे घरों में रहते हैं जिनकी छत अत्यधिक तीव्र ढलान वाली होती है, ताकि भारी वर्षा का पानी आसानी से बह जाए। इन्हें मैलोका कहा जाता है।
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गंगा और ब्रह्मपुत्र की नदियों के ताजे पानी में पाई जाने वाली अंधी डॉल्फिन को स्थानीय रूप से क्या कहते हैं?
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उत्तर: B) सुसु
गंगा और ब्रह्मपुत्र के अलवण जल में पाई जाने वाली अंधी डॉल्फिन को स्थानीय भाषा में सुसु (Platanista gangetica) कहा जाता है। यह जल की शुद्धता का सूचक है।
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ब्रह्मपुत्र नदी के मैदानी भागों में कौन सा अद्वितीय संकटापन्न वन्यजीव पाया जाता है?
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उत्तर: B) एक सींग वाला गैंडा
असम के ब्रह्मपुत्र मैदानों में, विशेष रूप से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में, विश्व प्रसिद्ध एक सींग वाला भारतीय गैंडा (One-horned Rhinoceros) पाया जाता है।
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गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानी भागों में जनसंख्या घनत्व पर्वतीय भागों की तुलना में बहुत अधिक क्यों है?
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उत्तर: B) उपजाऊ जलोढ़ मृदा, समतल भूमि, अनुकूल जलवायु और सघन कृषि सुविधाएं उपलब्ध हैं
मैदानी भागों में नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, समतल धरातल, कृषि के लिए पर्याप्त जल और उत्तम परिवहन के साधन होने के कारण भारी जनसंख्या निवास करती है।
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कक्षा 7 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: हज़ार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल (Tracing Changes Through a Thousand Years) अध्याय 2: नए राजा और साम्राज्य (New Kings and Kingdoms) अध्याय 3: दिल्ली के सुल्तान (The Delhi Sultans) अध्याय 4: मुगल साम्राज्य (The Mughal Empire) अध्याय 5: शासक और इमारतें (Rulers and Buildings) अध्याय 6: नगर, व्यापारी और शिल्पकार (Towns, Traders and Craftspersons) अध्याय 7: जनजातियां, खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय (Tribes, Nomads and Settled Communities) अध्याय 8: ईश्वर से अनुराग (Devotional Paths to the Divine) अध्याय 9: क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण (The Making of Regional Cultures) अध्याय 10: अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन (Eighteenth-Century Political Formations) अध्याय 11: पर्यावरण (Environment) अध्याय 12: हमारी पृथ्वी के अंदर (Inside Our Earth) अध्याय 13: हमारी बदलती पृथ्वी (Our Changing Earth) अध्याय 14: वायु (Air) अध्याय 15: जल (Water) अध्याय 16: मानव-पर्यावरण अंतःक्रिया: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Human-Environment Interactions: The Tropical and the Subtropical Region) अध्याय 17: रेगिस्तान में जीवन (Life in the Deserts) अध्याय 18: समानता (On Equality) (On Equality) अध्याय 19: स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका (Role of the Government in Health) अध्याय 20: राज्य शासन कैसे काम करता है (How the State Government Works) अध्याय 21: लड़के और लड़कियों के रूप में बड़ा होना (Growing Up as Boys and Girls) अध्याय 22: औरतों ने बदली दुनिया (Women Change the World) अध्याय 23: संचार माध्यमों को समझना (Understanding Media) अध्याय 24: हमारे आस-पास के बाज़ार (Markets Around Us) अध्याय 25: बाज़ार में एक कमीज़ (A Shirt in the Market) अध्याय 26: समानता के लिए संघर्ष (Struggles for Equality)

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