मुगल दो महान शासक वंशों के वंशज थे:
- माता की ओर से: वे मंगोल शासक चंगेज खान (मृत्यु 1227 ई.) के वंशज थे। किंतु मुगल स्वयं को "मंगोल" कहलाना पसंद नहीं करते थे क्योंकि चंगेज खान का नाम लाखों निर्दोषों के नरसंहार से जुड़ा था और उनके उजबेग प्रतिद्वंद्वी भी मंगोल थे।
- पिता की ओर से: वे ईरान, इराक और तुर्की के शासक तैमूर (मृत्यु 1404 ई.) के वंशज थे। मुगलों को तैमूरी वंशज होने पर बड़ा गर्व था क्योंकि उनके इस पूर्वज ने 1398 में दिल्ली पर अधिकार किया था।
उत्तराधिकार की परंपरा (सहदायाद):
मुगल ज्येष्ठाधिकार (Primogeniture) के नियम में विश्वास नहीं करते थे, जहाँ सबसे बड़ा पुत्र पिता के राज्य का स्वाभाविक उत्तराधिकारी बनता था। इसके विपरीत, वे तैमूर वंश की परंपरा "सहदायाद" (Coparcenary Inheritance) का पालन करते थे, जिसमें साम्राज्य का विभाजन समस्त भाइयों के बीच बराबर-बराबर कर दिया जाता था। इस परंपरा के कारण प्रत्येक शासक की मृत्यु के बाद भाइयों में खूनी गृहयुद्ध छिड़ते थे।
प्रमुख छह मुगल सम्राट (The Great Mughals):
| शासक | शासनकाल | प्रमुख उपलब्धियां व ऐतिहासिक घटनाएं |
|---|---|---|
| बाबर | 1526-1530 ई. | 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। 1527 में खानवा में राणा सांगा और 1528 में चंदेरी में राजपूतों को हराया। भारत में युद्ध में तोपों और बारूद का प्रथम निर्णायक प्रयोग। |
| हुमायूं | 1530-1540 एवं 1555-1556 ई. | अफगान शासक शेरशाह सूरी ने 1539 (चौसा) और 1540 (कन्नौज) में उसे पराजित कर भारत से खदेड़ दिया। ईरान के सफाविद शाह तहमास्प की मदद से 1555 में दिल्ली पुनः जीती, किंतु पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर आकस्मिक मृत्यु। |
| अकबर | 1556-1605 ई. | मात्र 13 वर्ष की आयु में शासक बना (संरक्षक बैरम खान)। 1556 में पानीपत के दूसरे युद्ध में हेमू को पराजित किया। मालवा, गुजरात, बंगाल, कश्मीर, काबुल, कंधार और दक्कन तक साम्राज्य विस्तार। मनसबदारी, जब्ती और सुलह-ए-कुल की स्थापना। |
| जहांगीर | 1605-1627 ई. | अकबर की नीतियों को जारी रखा। मेवाड़ के सिसोदिया शासक अमर सिंह ने मुगलों की अधीनता स्वीकार की। साम्राज्ञी नूरजहां (मेहरुन-निसा) का अत्यधिक राजनीतिक प्रभाव रहा। |
| शाहजहां | 1627-1658 ई. | मुगल स्थापत्य कला का स्वर्णिम युग (ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद)। दक्कन में अहमदनगर और बीजापुर के विरुद्ध सफल अभियान। अंतिम दिनों में पुत्र औरंगजेब द्वारा आगरा के किले में नजरबंद। |
| औरंगजेब | 1658-1707 ई. | साम्राज्य का भौगोलिक विस्तार दक्षिण भारत (बीजापुर 1685, गोलकुंडा 1687) तक किया। शिवाजी महाराज व मराठों, सिखों, जाटों और अहोमों के साथ दीर्घकालिक संघर्ष। जीवन के अंतिम 25 वर्ष दक्कन के युद्धों में बिताए, जिससे साम्राज्य की आर्थिक कमर टूट गई। |