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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Social Science • अध्याय 4
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

मुगल साम्राज्य (The Mughal Empire)

कक्षा 7 इतिहास का यह अध्याय "मुगल साम्राज्य" (The Mughal Empire) 16वीं से 17वीं सदी के उस गौरवशाली दौर का संपूर्ण शैक्षणिक विवरण प्रस्तुत करता है जब मुगलों ने भारत के कोने-कोने को एकीकृत कर एक सुदृढ़ साम्राज्य खड़ा किया। इस अध्याय में बाबर से लेकर औरंगजेब तक के प्रमुख शासकों के सैन्य अभियान, मनसबदारी और जागीरदारी व्यवस्था, राजा टोडरमल की "जब्ती" व राजस्व प्रणाली, अबुल फजल की "आईन-ए-अकबरी", इबादत खाना तथा अकबर की सार्वभौमिक शांति की नीति "सुलह-ए-कुल" का गहन व प्रमाणिक विश्लेषण शामिल है।

👑 क्या आपने कभी सोचा है?

⚔️ भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे उपमहाद्वीप पर मध्यकाल में शासन करना लगभग असंभव माना जाता था — फिर मुगलों ने इसे कैसे संभव बनाया?

कल्पना कीजिए उस सेनापति की जिसने अपनी वंशावली में एक तरफ दुनिया के सबसे क्रूर विजेता चंगेज खान और दूसरी तरफ मध्य एशिया के शहंशाह तैमूर का रक्त संजोया था! 1526 में मात्र 12,000 सैनिकों और पहली बार तोपों के बारूदी धमाकों से बाबर ने हिंदुस्तान का तख्त पलट दिया। और उसके पोते अकबर ने तलवार के साथ-साथ "सुलह-ए-कुल" (सर्वधर्म सद्भाव) और "मनसबदारी" का ऐसा अनूठा ढांचा गढ़ा कि राजपूत राजा भी उसके सबसे वफादार सेनापति बन गए!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक संस्थाएं जैसे जिला प्रशासन, भू-राजस्व का पैमाइश बंदोबस्त (जब्ती), तथा सिक्का प्रणाली (रुपया) आधुनिक भारतीय शासन और राजस्व अभिलेखों की आधारशिला हैं। इसके अतिरिक्त लाल किला, ताजमहल और सुलह-ए-कुल का दर्शन भारत की साझी गंगा-जमुनी तहजीब का अभिन्न अंग हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • दिल्ली सल्तनत के पतन और लोदी वंश के अंतिम दौर की समझ।
  • मध्यकालीन भारत की भौगोलिक संरचना तथा प्रमुख क्षेत्रीय रियासतों (मेवाड़, गुजरात, दक्कन) की स्थिति।
  • सामंतवाद और जागीर व्यवस्था के आधारभूत विचार।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • मुगलों की दोहरी वंशावली (मंगोल व तैमूरी) तथा उनके दृष्टिकोण का विश्लेषण करना।
  • बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब के प्रमुख सैन्य अभियानों का कालक्रम समझना।
  • मुगल उत्तराधिकार की परंपरा (सहदायाद/Coparcenary) का मूल्यांकन करना।
  • मनसबदारी व्यवस्था, जात (Rank) और सवार (Cavalry) के गणितीय अनुपात को स्पष्ट करना।
  • राजा टोडरमल के 10-वर्षीय सर्वेक्षण (दहसाला) एवं जब्ती (Zabt) राजस्व प्रणाली की कार्यप्रणाली सीखना।
  • इबादत खाना, अबुल फजल की "आईन-ए-अकबरी" तथा "सुलह-ए-कुल" के धार्मिक-राजनीतिक दर्शन को समझना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. मुगलों की वंशावली, उत्तराधिकार ए...
2 2. मनसबदार और जागीरदार व्यवस्था (Th...
3 3. जब्ती और जमींदार: राजा टोडरमल का...
4 4. अकबर की धार्मिक नीति: इबादत खाना...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. मुगलों की वंशावली, उत्तराधिकार एवं प्रमुख शासकों का कालक्रम

मुगल दो महान शासक वंशों के वंशज थे:

  • माता की ओर से: वे मंगोल शासक चंगेज खान (मृत्यु 1227 ई.) के वंशज थे। किंतु मुगल स्वयं को "मंगोल" कहलाना पसंद नहीं करते थे क्योंकि चंगेज खान का नाम लाखों निर्दोषों के नरसंहार से जुड़ा था और उनके उजबेग प्रतिद्वंद्वी भी मंगोल थे।
  • पिता की ओर से: वे ईरान, इराक और तुर्की के शासक तैमूर (मृत्यु 1404 ई.) के वंशज थे। मुगलों को तैमूरी वंशज होने पर बड़ा गर्व था क्योंकि उनके इस पूर्वज ने 1398 में दिल्ली पर अधिकार किया था।
उत्तराधिकार की परंपरा (सहदायाद):

मुगल ज्येष्ठाधिकार (Primogeniture) के नियम में विश्वास नहीं करते थे, जहाँ सबसे बड़ा पुत्र पिता के राज्य का स्वाभाविक उत्तराधिकारी बनता था। इसके विपरीत, वे तैमूर वंश की परंपरा "सहदायाद" (Coparcenary Inheritance) का पालन करते थे, जिसमें साम्राज्य का विभाजन समस्त भाइयों के बीच बराबर-बराबर कर दिया जाता था। इस परंपरा के कारण प्रत्येक शासक की मृत्यु के बाद भाइयों में खूनी गृहयुद्ध छिड़ते थे।

प्रमुख छह मुगल सम्राट (The Great Mughals):
शासक शासनकाल प्रमुख उपलब्धियां व ऐतिहासिक घटनाएं
बाबर 1526-1530 ई. 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। 1527 में खानवा में राणा सांगा और 1528 में चंदेरी में राजपूतों को हराया। भारत में युद्ध में तोपों और बारूद का प्रथम निर्णायक प्रयोग।
हुमायूं 1530-1540 एवं 1555-1556 ई. अफगान शासक शेरशाह सूरी ने 1539 (चौसा) और 1540 (कन्नौज) में उसे पराजित कर भारत से खदेड़ दिया। ईरान के सफाविद शाह तहमास्प की मदद से 1555 में दिल्ली पुनः जीती, किंतु पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर आकस्मिक मृत्यु।
अकबर 1556-1605 ई. मात्र 13 वर्ष की आयु में शासक बना (संरक्षक बैरम खान)। 1556 में पानीपत के दूसरे युद्ध में हेमू को पराजित किया। मालवा, गुजरात, बंगाल, कश्मीर, काबुल, कंधार और दक्कन तक साम्राज्य विस्तार। मनसबदारी, जब्ती और सुलह-ए-कुल की स्थापना।
जहांगीर 1605-1627 ई. अकबर की नीतियों को जारी रखा। मेवाड़ के सिसोदिया शासक अमर सिंह ने मुगलों की अधीनता स्वीकार की। साम्राज्ञी नूरजहां (मेहरुन-निसा) का अत्यधिक राजनीतिक प्रभाव रहा।
शाहजहां 1627-1658 ई. मुगल स्थापत्य कला का स्वर्णिम युग (ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद)। दक्कन में अहमदनगर और बीजापुर के विरुद्ध सफल अभियान। अंतिम दिनों में पुत्र औरंगजेब द्वारा आगरा के किले में नजरबंद।
औरंगजेब 1658-1707 ई. साम्राज्य का भौगोलिक विस्तार दक्षिण भारत (बीजापुर 1685, गोलकुंडा 1687) तक किया। शिवाजी महाराज व मराठों, सिखों, जाटों और अहोमों के साथ दीर्घकालिक संघर्ष। जीवन के अंतिम 25 वर्ष दक्कन के युद्धों में बिताए, जिससे साम्राज्य की आर्थिक कमर टूट गई।

2. मनसबदार और जागीरदार व्यवस्था (The Mansabdari System)

जैसे-जैसे मुगल साम्राज्य का विस्तार विभिन्न क्षेत्रों में हुआ, मुगलों ने केवल तुरानी और ईरानी रईसों के स्थान पर भारतीय मुसलमानों, अफगानों, राजपूतों, मराठों और अन्य समूहों को सेवा में सम्मिलित किया। मुगलों की सेवा में आने वाले ये सभी अधिकारी मनसबदार कहलाए:

मनसब, जात और सवार का अर्थ:
  • मनसब: इसका शाब्दिक अर्थ "पद" (Position/Rank) या ओहदा होता है। यह एक त्रिस्तरीय पद था जो अधिकारी की (1) पदवी, (2) वेतन, और (3) सैन्य उत्तरदायित्व तय करता था।
  • जात (Zat): यह मनसबदार के व्यक्तिगत दर्जे (Rank) और वेतन को निर्धारित करता था। जात की संख्या जितनी अधिक होती थी, दरबार में अभिजात की प्रतिष्ठा उतनी ही ऊंची होती थी और उसका वेतन उतना ही अधिक होता था (जैसे 5,000 जात वाले मनसबदार का पद 1,000 जात वाले से ऊंचा था)।
  • सवार (Sawar): यह मनसबदार द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और प्रशिक्षित घुड़सवारों की संख्या को निर्धारित करता था। मनसबदार को अपने सवारों को निरीक्षण के लिए लाना होता था, जहां घोड़ों को शाही मोहर से दागा (Branding) जाता था और सैनिकों का हुलिया दर्ज किया जाता था।
जागीर (Jagir) और इक्ता में अंतर:

मनसबदारों को उनका वेतन नकद देने के स्थान पर राजस्व एकत्र करने वाले भूभाग के रूप में दिया जाता था जिसे जागीर कहा जाता था। यह सल्तनत के इक्ता के समान थी, किंतु एक मौलिक अंतर था:

महत्वपूर्ण अंतर: सल्तनत के मुक्ति अपने इक्ता में रहकर स्वयं शासन चलाते थे, जबकि मुगल मनसबदार अपनी जागीरों में स्वयं नहीं रहते थे और न ही उन पर सीधा प्रशासन करते थे। वे देश के किसी अन्य भाग में सम्राट की सैन्य सेवा करते थे, जबकि उनके नौकर (कारिंदे) जागीर से केवल उतना ही राजस्व एकत्र करते थे जो मनसबदार के वेतन के बराबर अनुमोदित होता था।

3. जब्ती और जमींदार: राजा टोडरमल का राजस्व बंदोबस्त

मुगल साम्राज्य की आय का मुख्य स्रोत किसानों की उपज पर मिलने वाला कर था। अधिकांश स्थानों पर किसान स्थानीय ग्राम प्रधानों या कुलीन सरदारों के माध्यम से कर देते थे। मुगलों ने इन सभी स्थानीय मध्यस्थों के लिए केवल एक शब्द जमींदार (Zamindar) का प्रयोग किया।

राजा टोडरमल और दहसाला प्रणाली (Zabt System):

अकबर के प्रसिद्ध राजस्व मंत्री राजा टोडरमल ने 1570 से 1580 ई. की 10 वर्ष की कालावधि के लिए कृषि की पैदावार, प्रचलित बाजार कीमतों और जोती गई भूमि का अत्यंत सावधानीपूर्वक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया:

  • इन आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक फसल पर नकद के रूप में कर (राजस्व) निश्चित कर दिया गया।
  • प्रत्येक प्रांत को राजस्व मंडलों में विभाजित किया गया और प्रत्येक फसल के लिए राजस्व दरों की अलग अनुसूची तैयार की गई।
  • राजस्व निर्धारण की इस वैज्ञानिक और व्यवस्थित पद्धति को "जब्ती" (Zabt) कहा जाता था।
  • जब्ती व्यवस्था केवल उन्हीं क्षेत्रों में लागू हो सकती थी जहां मुगल प्रशासनिक अधिकारी भूमि का प्रत्यक्ष निरीक्षण और नापजोख कर सकते थे और हिसाब-किताब रख सकते थे। गुजरात और बंगाल जैसे सुदूर प्रांतों में यह संभव नहीं हो सका।
अबुल फजल की आईन-ए-अकबरी:

अकबर के दरबारी और घनिष्ठ मित्र अबुल फजल ने तीन जिल्दों (Volumes) में "अकबरनामा" नामक इतिहास लिखा:

  1. प्रथम जिल्द: अकबर के पूर्वजों (तैमूर और बाबर आदि) का इतिहास।
  2. द्वितीय जिल्द: अकबर के शासनकाल की प्रमुख घटनाओं का क्रमिक विवरण।
  3. तृतीय जिल्द - "आईन-ए-अकबरी" (Ain-i Akbari): यह सबसे महत्वपूर्ण भाग है जिसमें अकबर के प्रशासन, सेना, राजस्व, घराने, साम्राज्य के भूगोल तथा भारत के लोगों की परंपराओं व संस्कृति का विस्तृत सांख्यिकीय ब्यौरा दर्ज है।

4. अकबर की धार्मिक नीति: इबादत खाना एवं सुलह-ए-कुल

1570 के दशक में जब अकबर अपनी नई राजधानी फतेहपुर सीकरी में था, उसने धर्म और दर्शन पर गंभीर विमर्श प्रारंभ किया:

इबादत खाना (Ibadat Khana):

अकबर ने 1575 ई. में फतेहपुर सीकरी में इबादत खाना (प्रार्थना/विचार गृह) बनवाया। यहाँ उसने उलेमा (मुस्लिम विद्वान), ब्राह्मण पुरोहितों, जेसुइट पादरियों (रोमन कैथोलिक ईसाई) तथा जोरोस्ट्रियन (पारसी) धर्मगुरुओं को आमंत्रित कर धार्मिक परिचर्चाएं कीं। इन बहसों से अकबर को यह गहरा अहसास हुआ कि जो धार्मिक विद्वान कट्टरता और कर्मकांडों पर बल देते हैं, वे वास्तव में समाज में विभाजन और असंतोष पैदा करते हैं।

सुलह-ए-कुल (सार्वभौमिक शांति):

विभिन्न धर्मों के सत्यों को समझकर अकबर ने "सुलह-ए-कुल" (Sulh-i kul - सार्वभौमिक शांति व सहिष्णुता) के सिद्धांत को अपने शासन का आधार बनाया:

  • यह व्यवस्था किसी एक धर्म के लोगों में भेदभाव नहीं करती थी, बल्कि इसका ध्यान सच्चाई, न्याय और शांति की एक ऐसी नीति पर केंद्रित था जो सार्वभौमिक रूप से सभी पर लागू हो सकती थी।
  • अबुल फजल ने अकबर को शासन के इस दृष्टिकोण को तैयार करने में मदद की। जहांगीर और शाहजहां ने भी सुलह-ए-कुल के इसी सिद्धांत का निष्ठापूर्वक पालन किया।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

मुगल वंशावली संगम
माता (चंगेज खान / मंगोल) + पिता (तैमूर / तुर्क)
तैमूरी विरासत पर गौरव
पानीपत का प्रथम युद्ध
1526 ई. (बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया)
भारत में बारूदी तोपों का प्रथम निर्णायक प्रयोग
मनसबदारी सूत्र
मनसब = जात (व्यक्तिगत ओहदा व वेतन) + सवार (घुड़सवार सैन्य दायित्व)
अकबर द्वारा स्थापित नौकरशाही व्यवस्था
दहसाला जब्ती प्रणाली
10 वर्ष का सर्वेक्षण (1570-1580) ➔ औसत पैदावार व नकद राजस्व दर
राजा टोडरमल द्वारा निर्मित व्यवस्था
अकबरनामा की संरचना
भाग 1 (पूर्वज) + भाग 2 (घटनाएं) + भाग 3 (आईन-ए-अकबरी / सांख्यिकीय प्रशासन)
अबुल फजल द्वारा रचित

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
Q1 (अवधारणात्मक स्पष्टीकरण): मुगलों की मनसबदारी व्यवस्था में "जात" (Zat) और "सवार" (Sawar) शब्दों का क्या अर्थ था? यह किसी मनसबदार के पद को कैसे निर्धारित करता था?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. जात (Zat): जात शब्द संख्यात्मक मान को दर्शाता था जो मनसबदार के प्रशासनिक दर्जे (Rank) और उसके व्यक्तिगत वेतन को तय करता था। जात की संख्या जितनी बड़ी होती थी (उदा. 5,000 जात बनाम 1,000 जात), दरबार में मनसबदार का सम्मान उतना अधिक और वेतन उतना भारी होता था।
2. सवार (Sawar): सवार शब्द मनसबदार के सैन्य उत्तरदायित्व को दर्शाता था। इससे यह तय होता था कि उस मनसबदार को कितने हथियारबंद प्रशिक्षित घुड़सवार सैनिक और अच्छे नस्ल के घोड़े युद्ध सेवा के लिए तैयार रखने हैं।
3. निष्कर्ष: इस प्रकार जात और सवार मिलकर यह तय करते थे कि अधिकारी का वेतन कितना होगा और उसे राज्य के लिए कितनी सैन्य टुकड़ी का प्रबंध करना होगा।

उदाहरण 2
Q2 (तुलनात्मक विश्लेषण): मुगल "जागीर" (Jagir) और दिल्ली सल्तनत के "इक्ता" (Iqta) में क्या समानताएं और मौलिक अंतर थे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. समानता: जागीर और इक्ता दोनों ही अधिकारियों (जागीरदार व मुक्ति) को नकद वेतन देने के स्थान पर राजस्व एकत्र करने के लिए सौंपे गए विशिष्ट भूभाग थे।
2. मौलिक अंतर:
- इक्तादार (मुक्ति): अपने इक्ता क्षेत्र में स्वयं निवास करते थे, वहां की कानून-व्यवस्था संभालते थे और सैनिकों का सीधा नेतृत्व करते थे।
- मुगल जागीरदार: अपनी जागीरों में स्वयं निवास नहीं करते थे और न ही उनका जागीर पर कोई प्रशासनिक अधिकार था। वे साम्राज्य के किसी दूरस्थ भाग में सैन्य सेवा दे रहे होते थे, जबकि उनके नियुक्त कारिंदे (नौकर) जागीर के किसानों से केवल निर्धारित राजस्व वसूल कर मनसबदार को भेजते थे।

उदाहरण 3
Q3 (आर्थिक व प्रशासनिक योजना): राजा टोडरमल की "जब्ती" (Zabt) राजस्व व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं क्या थीं? यह व्यवस्था किन प्रांतों में लागू नहीं की जा सकी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. प्रमुख विशेषताएं:
- 1570 से 1580 ई. तक 10 वर्षों के लिए विभिन्न फसलों की पैदावार और बाजार मूल्यों का सावधानीपूर्वक सर्वेक्षण (दहसाला) किया गया।
- प्रत्येक फसल पर नकद के रूप में निश्चित राजस्व दर तय की गई और किसानों को मनमाने लगान से मुक्ति मिली।
- साम्राज्य को अलग-अलग राजस्व क्षेत्रों में बांटकर दरों की सूची (शेड्यूल) बनाई गई।
2. लागू न हो पाने वाले क्षेत्र: यह व्यवस्था केवल उत्तरी और मध्य भारत के उन्हीं क्षेत्रों में लागू हो सकी जहां मुगल पटवारी व अधिकारी खेतों की प्रत्यक्ष नापजोख और नियमित अभिलेख रख सकते थे। गुजरात, बंगाल और उड़ीसा जैसे समुद्री और दूरस्थ प्रांतों में भौगोलिक व राजनीतिक कारणों से यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।

उदाहरण 4
Q4 (दार्शनिक व नीतिगत समीक्षा): अकबर के "सुलह-ए-कुल" (Sulh-i kul) के विचार का जन्म कैसे हुआ और यह आधुनिक धर्मनिरपेक्षता से किस प्रकार मेल खाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. सुलह-ए-कुल का जन्म: 1575 ई. में अकबर ने फतेहपुर सीकरी के इबादत खाना में इस्लाम, हिंदू, ईसाई, जैन और पारसी धर्मों के विद्वानों के साथ गहन चर्चाएं कीं। उसने पाया कि धार्मिक अंधविश्वास और रूढ़िवादिता प्रजा में वैमनस्य फैलाती है। अतः उसने सभी धर्मों के नैतिक तत्वों को मिलाकर "सुलह-ए-कुल" (सार्वभौमिक शांति) का सिद्धांत प्रतिपादित किया।
2. आधुनिक प्रासंगिकता: सुलह-ए-कुल किसी एक धर्म की सर्वोच्चता को अस्वीकार कर न्याय, दया, शांति और सहिष्णुता पर बल देता था। यह आधुनिक भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के उस मूल सिद्धांत से मेल खाता है जहाँ राज्य सभी नागरिकों के साथ बिना धार्मिक भेदभाव के समान व्यवहार करता है।

उदाहरण 5
Q5 (पतन के कारण): औरंगजेब के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में क्या संकट उत्पन्न हुआ, जिसने साम्राज्य के पतन का मार्ग प्रशस्त किया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. मनसबदारों की अत्यधिक संख्या: औरंगजेब के समय दक्कन विजय के कारण मनसबदारों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई, किंतु उनके वितरण के लिए उपलब्ध जागीरें (कृषि योग्य भूमि) सीमित थीं।
2. जागीरों का अभाव व शोषण: मनसबदारों को जागीर प्राप्त करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। अतः जब किसी मनसबदार को जागीर मिलती थी, तो वह यह सोचकर कि जागीर जल्द छिन जाएगी, किसानों से जितना संभव हो सके उतना अधिक लगान बेरहमी से वसूलने का प्रयास करता था।
3. परिणाम: किसानों की आर्थिक स्थिति तबाह हो गई, कई स्थानों पर कृषक विद्रोह हुए, और औरंगजेब के अंतिम वर्षों में दक्कन युद्धों के खर्च के कारण शाही खजाना खाली हो गया।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मुगलों को केवल मंगोल मानना और यह समझना कि वे मंगोल कहलाने में गर्व महसूस करते थे।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मुगल स्वयं को मंगोल कहलाना नापसंद करते थे क्योंकि मंगोल नाम चंगेज खान के क्रूर नरसंहारों से जुड़ा था; वे तैमूर के वंशज होने पर गर्व करते थे।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मुगल साम्राज्य में सबसे बड़े बेटे को ही पिता के बाद स्वतः राजा (ज्येष्ठाधिकार) समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मुगलों में ज्येष्ठाधिकार नहीं था; वे "सहदायाद" (Coparcenary) परंपरा मानते थे जिसमें समस्त भाइयों में साम्राज्य का विभाजन होता था, जिससे भीषण उत्तराधिकार युद्ध होते थे।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जमींदार को केवल एक छोटा स्थानीय किसान या खेत मजदूर समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मुगल काल में "जमींदार" शब्द का प्रयोग गाँव के शक्तिशाली मुखिया से लेकर बड़े-बड़े क्षेत्रीय सरदारों और राजाओं तक सभी बिचौलियों के लिए किया जाता था जो किसानों से राजस्व एकत्र करते थे।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

मुगल प्रशासनिक व नीतिगत विकास संरचना (1526-1707 ई.)
बाबर (तोपखाना व पानीपत 1526) ➔ हुमायूं व शेरशाह सूरी ➔ अकबर (मनसबदारी व जब्ती) ➔ इबादत खाना ➔ सुलह-ए-कुल ➔ औरंगजेब (दक्कन संकट व पतन)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
मुगल माता की ओर से मंगोल शासक चंगेज खान और पिता की ओर से तैमूर के वंशज थे।
मुख्य बिंदु 2
बाबर ने 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में तोपखाने के बल पर मुगल साम्राज्य स्थापित किया।
मुख्य बिंदु 3
मुगल उत्तराधिकार में ज्येष्ठाधिकार के स्थान पर तैमूरी सहदायाद (भाइयों में बराबर बंटवारा) व्यवस्था का पालन करते थे।
मुख्य बिंदु 4
अकबर ने 1556 ई. में पानीपत के दूसरे युद्ध में हेमू को पराजित किया और विशाल भूभाग को मुगल झंडे तले एकत्र किया।
मुख्य बिंदु 5
मनसबदारी व्यवस्था में "जात" अधिकारी का पद और वेतन तथा "सवार" घुड़सवारों की संख्या तय करता था।
मुख्य बिंदु 6
मनसबदारों को वेतन के रूप में "जागीर" दी जाती थी, किंतु वे जागीरों पर सीधे शासन नहीं करते थे।
मुख्य बिंदु 7
राजा टोडरमल ने 10 वर्ष के कृषि सर्वेक्षण (1570-1580) के आधार पर "जब्ती" राजस्व प्रणाली का निर्माण किया।
मुख्य बिंदु 8
अबुल फजल ने तीन जिल्दों में "अकबरनामा" लिखा, जिसकी तीसरी जिल्द "आईन-ए-अकबरी" प्रशासनिक व सांख्यिकीय दर्पण है।
मुख्य बिंदु 9
अकबर ने फतेहपुर सीकरी में 1575 ई. में "इबादत खाना" बनाया और सर्वधर्म सद्भाव हेतु "सुलह-ए-कुल" की नीति अपनाई।
मुख्य बिंदु 10
औरंगजेब के समय मनसबदारों की भारी वृद्धि और जागीरों की कमी तथा दक्कन के 25 वर्षीय युद्धों से साम्राज्य कमजोर हुआ।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
पानीपत का प्रथम युद्ध कब और किनके बीच लड़ा गया था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 ईस्वी में बाबर और दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच लड़ा गया था, जिसमें बाबर विजयी हुआ और मुगल साम्राज्य की नींव पड़ी।
2
मनसबदारी व्यवस्था में "जात" (Zat) का क्या कार्य था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: जात एक संख्यात्मक मान था जो मनसबदार के दरबार में प्रशासनिक ओहदे (Rank) और उसके व्यक्तिगत वेतन को निर्धारित करता था।
3
अकबर के वित्त मंत्री राजा टोडरमल द्वारा विकसित राजस्व व्यवस्था को क्या कहा जाता था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: राजा टोडरमल द्वारा 10-वर्षीय भूमि व फसल सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई राजस्व व्यवस्था को "जब्ती" (Zabt) प्रणाली कहा जाता था।
4
आईन-ए-अकबरी के लेखक कौन थे और यह किस पुस्तक का भाग है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: आईन-ए-अकबरी के लेखक अबुल फजल थे। यह उनकी प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति "अकबरनामा" की तीसरी और सर्वाधिक महत्वपूर्ण जिल्द (Volume) है।
5
अकबर द्वारा प्रतिपादित "सुलह-ए-कुल" (Sulh-i kul) का शाब्दिक अर्थ और मूल सिद्धांत क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: सुलह-ए-कुल का शाब्दिक अर्थ "सार्वभौमिक शांति" (Universal Peace) है। इसका मूल सिद्धांत धर्म, जाति के भेदभाव के बिना न्याय, शांति, दया और सहिष्णुता पर आधारित शासन चलाना था।
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कक्षा 7 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: हज़ार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल (Tracing Changes Through a Thousand Years) अध्याय 2: नए राजा और साम्राज्य (New Kings and Kingdoms) अध्याय 3: दिल्ली के सुल्तान (The Delhi Sultans) अध्याय 4: मुगल साम्राज्य (The Mughal Empire) अध्याय 5: शासक और इमारतें (Rulers and Buildings) अध्याय 6: नगर, व्यापारी और शिल्पकार (Towns, Traders and Craftspersons) अध्याय 7: जनजातियां, खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय (Tribes, Nomads and Settled Communities) अध्याय 8: ईश्वर से अनुराग (Devotional Paths to the Divine) अध्याय 9: क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण (The Making of Regional Cultures) अध्याय 10: अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन (Eighteenth-Century Political Formations) अध्याय 11: पर्यावरण (Environment) अध्याय 12: हमारी पृथ्वी के अंदर (Inside Our Earth) अध्याय 13: हमारी बदलती पृथ्वी (Our Changing Earth) अध्याय 14: वायु (Air) अध्याय 15: जल (Water) अध्याय 16: मानव-पर्यावरण अंतःक्रिया: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Human-Environment Interactions: The Tropical and the Subtropical Region) अध्याय 17: रेगिस्तान में जीवन (Life in the Deserts) अध्याय 18: समानता (On Equality) (On Equality) अध्याय 19: स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका (Role of the Government in Health) अध्याय 20: राज्य शासन कैसे काम करता है (How the State Government Works) अध्याय 21: लड़के और लड़कियों के रूप में बड़ा होना (Growing Up as Boys and Girls) अध्याय 22: औरतों ने बदली दुनिया (Women Change the World) अध्याय 23: संचार माध्यमों को समझना (Understanding Media) अध्याय 24: हमारे आस-पास के बाज़ार (Markets Around Us) अध्याय 25: बाज़ार में एक कमीज़ (A Shirt in the Market) अध्याय 26: समानता के लिए संघर्ष (Struggles for Equality)

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