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JAC • Class 8 • Mathematics • Ch 7
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Comparing Quantities

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 गणित का सातवाँ अध्याय "राशियों की तुलना" (Comparing Quantities) व्यावहारिक अंकगणित एवं वाणिज्यिक गणित (Commercial Mathematics) का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। हमारे दैनिक जीवन में दो राशियों की तुलना करना, प्रतिशत में बदलना, छूट प्राप्त करना तथा बैंक में ब्याज की गणना करना अपरिहार्य है। इस अध्याय में अनुपात (Ratio) और प्रतिशत (Percentage) का पारस्परिक रूपांतरण, प्रतिशत वृद्धि एवं ह्रास, बट्टा या छूट (Discount = MP - SP), बिक्री कर व माल एवं सेवा कर (GST), क्रय मूल्य (CP), विक्रय मूल्य (SP), लाभ व हानि प्रतिशत, साधारण ब्याज (SI) बनाम चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest, CI) का गहन तुलनात्मक विश्लेषण, चक्रवृद्धि ब्याज का गणितीय सूत्र [A = P(1 + R/100)ⁿ], ब्याज का वार्षिक व अर्धवार्षिक संयोजन तथा जनसंख्या वृद्धि व अवमूल्यन (Depreciation) के व्यावहारिक प्रश्नों का संपूर्ण, प्रामाणिक व परीक्षा-उपयोगी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

💰 बैंक में ₹10,000 जमा करने पर 2 वर्ष बाद साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज में क्या अंतर आएगा?

क्या आपने कभी गौर किया है कि त्योहारों पर दुकानों में "50% + 40% छूट" का बोर्ड लगा होता है—क्या इसका मतलब 90% छूट है या कुछ और? जब आप कोई सामान खरीदते हैं तो बिल पर 18% GST जुड़कर कुल कीमत कैसे बढ़ जाती है? बैंक या डाकघर में आपके पैसे पर मिलने वाला "चक्रवृद्धि ब्याज" साधारण ब्याज से इतना अधिक क्यों हो जाता है कि अल्बर्ट आइंस्टीन ने चक्रवृद्धि ब्याज को "दुनिया का आठवां अजूबा" कहा था? और एक नई बाइक खरीदने के 3 साल बाद उसकी कीमत हर साल 10% की दर से घटकर आधी क्यों रह जाती है? आइए, धन, छूट, टैक्स और चक्रवृद्धि ब्याज के इस अत्यंत रोचक गणित को गहराई से समझें!

Why This Chapter Matters

वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) आज के प्रत्येक नागरिक और विद्यार्थी के लिए जीवन का अनिवार्य कौशल है। बैंक खाते, सावधि जमा (FD), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), ऋण (Loans), जीएसटी बिलिंग, शेयर बाजार, मुद्रास्फीति और पारिवारिक बजट के कुशल प्रबंधन में प्रतिशत, लाभ-हानि और चक्रवृद्धि ब्याज के सूत्रों का सीधा अनुप्रयोग होता है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • भिन्न, दशमलव और प्रतिशत का परस्पर रूपांतरण (1/2 = 50%, 0.25 = 25%)।
  • ऐकिक नियम (Unitary Method) द्वारा मूल्यों की गणना।
  • साधारण ब्याज का सूत्र: SI = (P × R × T) / 100 की पूर्व समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • अनुपातों को प्रतिशत में बदलना तथा राशियों में प्रतिशत वृद्धि व कमी की सटीक गणना कर सकेंगे।
  • अंकित मूल्य (MP), विक्रय मूल्य (SP) और बट्टा प्रतिशत (Discount %) के अंतर्संबंधों को हल कर सकेंगे।
  • बिक्री कर (Sales Tax) और वस्तु एवं सेवा कर (GST) जोड़कर कुल बिल राशि ज्ञात कर सकेंगे।
  • क्रय मूल्य (CP) में ऊपरी व्यय (Overheads) जोड़कर वास्तविक लाभ या हानि प्रतिशत निकाल सकेंगे।
  • चक्रवृद्धि ब्याज सूत्र [A = P(1 + R/100)ⁿ, CI = A - P] का प्रयोग कर वार्षिक व अर्धवार्षिक संयोजन की गणना कर सकेंगे।
  • जनसंख्या वृद्धि तथा मशीनों के अवमूल्यन (Depreciation) की वास्तविक समस्याओं को हल कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. अनुपात, प्रतिशत एवं प्रतिशत वृद्...
2 2. बट्टा (छूट), बिक्री कर एवं माल व...
3 3. लाभ और हानि एवं ऊपरी व्यय (Overh...
4 4. साधारण ब्याज बनाम चक्रवृद्धि ब्य...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. अनुपात, प्रतिशत एवं प्रतिशत वृद्धि अथवा कमी

समान इकाइयों वाली दो राशियों के भाग द्वारा तुलना को अनुपात (Ratio) कहते हैं (जैसे $a : b = \frac{a}{b}$)। जब किसी भिन्न या अनुपात के हर को 100 मान लिया जाता है, तो उसे प्रतिशत (Percentage, %) कहते हैं (प्रति + शत = प्रति सौ में से)।

  • अनुपात को प्रतिशत में बदलना: अनुपात को भिन्न में लिखकर 100 से गुणा करते हैं; जैसे $3 : 4 = \frac{3}{4} \times 100\% = 75\%$।
  • प्रतिशत वृद्धि या कमी (Percentage Increase or Decrease): किसी राशि में हुए परिवर्तन का मूल मान के सापेक्ष प्रतिशत:
    $$\text{प्रतिशत वृद्धि / कमी} = \left( \frac{\text{राशि में परिवर्तन}}{\text{मूल राशि (Original Value)}} \right) \times 100\%$$
    उदाहरण: यदि किसी कर्मचारी का वेतन ₹20,000 से बढ़कर ₹22,000 हो जाए, तो वृद्धि $= 22000 - 20000 = ₹2,000$। $\text{प्रतिशत वृद्धि} = \frac{2000}{20000} \times 100\% = 10\%$।

2. बट्टा (छूट), बिक्री कर एवं माल व सेवा कर (GST)

A. बट्टा या छूट (Discount):

किसी वस्तु पर छपे हुए मूल्य को अंकित मूल्य या सूची मूल्य (Marked Price, MP) कहते हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने या पुराने स्टॉक को निकालने के लिए अंकित मूल्य पर दी गई कमी को बट्टा (Discount) कहते हैं:

  • बट्टा = अंकित मूल्य (MP) − विक्रय मूल्य (SP)
  • विक्रय मूल्य (SP) = अंकित मूल्य (MP) − बट्टा
  • बट्टा सदैव अंकित मूल्य (MP) पर ही आकलित किया जाता है: $$\text{बट्टा } \% = \left( \frac{\text{बट्टा}}{\text{अंकित मूल्य (MP)}} \right) \times 100\%$$

B. बिक्री कर एवं जीएसटी (Goods and Services Tax - GST):

सरकार द्वारा विभिन्न जन-कल्याणकारी कार्यों के लिए वस्तुओं की बिक्री पर लगाया जाने वाला कर बिक्री कर या जीएसटी कहलाता है:

  • जीएसटी सदैव वस्तु के विक्रय मूल्य (SP) पर जोड़ा जाता है।
  • ग्राहक द्वारा देय कुल बिल राशि = वस्तु का विक्रय मूल्य + जीएसटी राशि
  • यदि किसी वस्तु का मूल्य ₹500 है और उस पर 18% GST लगता है, तो कर $= 500 \times \frac{18}{100} = ₹90$। बिल राशि $= 500 + 90 = ₹590$।

3. लाभ और हानि एवं ऊपरी व्यय (Overhead Expenses)

जिस मूल्य पर कोई वस्तु खरीदी जाती है, उसे क्रय मूल्य (Cost Price, CP) तथा जिस पर बेची जाती है, उसे विक्रय मूल्य (Selling Price, SP) कहते हैं।

ऊपरी व्यय (Overhead Expenses):

वस्तु को खरीदने के बाद उसकी मरम्मत, परिवहन (भाड़ा), मजदूरी आदि पर किए गए अतिरिक्त खर्च को ऊपरी व्यय कहते हैं।

कुल प्रभावी क्रय मूल्य (Effective CP) = खरीद मूल्य + ऊपरी व्यय

लाभ या हानि की गणना सदैव इसी कुल प्रभावी क्रय मूल्य पर की जाती है।

लाभ की स्थिति (SP > CP)
  • लाभ = $SP - CP$
  • $$\text{लाभ } \% = \left( \frac{\text{लाभ}}{CP} \right) \times 100\%$$
  • $$SP = CP \times \left( \frac{100 + \text{लाभ } \%}{100} \right)$$
हानि की स्थिति (CP > SP)
  • हानि = $CP - SP$
  • $$\text{हानि } \% = \left( \frac{\text{हानि}}{CP} \right) \times 100\%$$
  • $$SP = CP \times \left( \frac{100 - \text{हानि } \%}{100} \right)$$

4. साधारण ब्याज बनाम चक्रवृद्धि ब्याज एवं अनुप्रयोग

उधार ली गई या बैंक में जमा की गई धनराशि को मूलधन (Principal, $P$) कहते हैं। एक निश्चित समयावधि के बाद अतिरिक्त दी जाने वाली राशि ब्याज (Interest) कहलाती है।

  • साधारण ब्याज (Simple Interest, SI): पूरे समय के लिए मूलधन सदैव स्थिर रहता है। $$SI = \frac{P \times R \times T}{100}$$
  • चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest, CI): इसमें प्रत्येक निश्चित समयांतराल (प्रायः 1 वर्ष या 6 माह) के बाद अर्जित ब्याज को मूलधन में जोड़ दिया जाता है, जिससे आगामी अवधि के लिए नया मूलधन बढ़ जाता है (अर्थात "ब्याज पर भी ब्याज" लगता है)। अतः $CI > SI$ होता है।

चक्रवृद्धि ब्याज का सूत्र:

$$A = P \left( 1 + \frac{R}{100} \right)^n$$

चक्रवृद्धि ब्याज (CI) = कुल मिश्रधन ($A$) − मूलधन ($P$)

जहाँ $A$ = मिश्रधन (Amount), $P$ = मूलधन, $R$ = वार्षिक ब्याज दर, $n$ = समयावधि (वर्षों में)।

विशेष परिस्थितियाँ:

  • जब ब्याज अर्धवार्षिक (छमाही / Half-yearly) संयोजित हो:
    • वार्षिक दर आधी हो जाती है: $R_{half} = \frac{R}{2}$
    • समयावधि दोगुनी हो जाती है: $n_{half} = 2n$
    • सूत्र: $A = P \left( 1 + \frac{R/2}{100} \right)^{2n}$
  • जनसंख्या वृद्धि एवं अवमूल्यन (Depreciation):
    • जनसंख्या में $R\%$ वार्षिक दर से वृद्धि होने पर: $V = P \left( 1 + \frac{R}{100} \right)^n$
    • मशीन या वाहन के मूल्य में $R\%$ वार्षिक दर से घिसाव (ह्रास) होने पर: $$V = P \left( 1 - \frac{R}{100} \right)^n$$

Key Formulas, Identities & Theorems

बट्टा एवं बट्टा प्रतिशत सूत्र (Discount Formula)
Discount = MP - SP ; Discount % = (Discount / MP) × 100%
बट्टा सदैव अंकित मूल्य (Marked Price) पर ही दिया जाता है।
लाभ व हानि प्रतिशत सूत्र (Profit & Loss Percentage)
Profit % = (Profit / CP) × 100% ; Loss % = (Loss / CP) × 100%
लाभ या हानि की गणना सदैव कुल प्रभावी क्रय मूल्य (CP + ऊपरी व्यय) पर होती है।
चक्रवृद्धि मिश्रधन वार्षिक सूत्र (Annual Compound Amount Formula)
A = P · (1 + R / 100)ⁿ तथा CI = A - P
जहाँ A = मिश्रधन, P = मूलधन, R = वार्षिक दर (%), n = समयावधि (वर्ष)।
अर्धवार्षिक चक्रवृद्धि सूत्र (Half-Yearly Compounding Formula)
A = P · [1 + (R/2) / 100]^(2n)
छमाही संयोजन में ब्याज दर आधी (R/2) तथा समयावधि दोगुनी (2n) हो जाती है।
मूल्यह्रास / अवमूल्यन सूत्र (Depreciation Formula)
V = P · (1 - R / 100)ⁿ
वाहन, मशीनरी या इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के मूल्य में प्रतिवर्ष ह्रास निकालने के लिए।

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
₹840 अंकित मूल्य वाली एक वस्तु को ₹714 में बेचा जाता है। बट्टा और बट्टा प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:\nदिया गया है:\nअंकित मूल्य (MP) = ₹840\nविक्रय मूल्य (SP) = ₹714\n\n1. बट्टा (Discount):\n$$\text{बट्टा} = MP - SP = 840 - 714 = ₹126$$\n\n2. बट्टा प्रतिशत:\n$$\text{बट्टा } \% = \left( \frac{\text{बट्टा}}{MP} \right) \times 100\%$$\n$$\text{बट्टा } \% = \frac{126}{840} \times 100\% = \frac{1260}{84} = 15\%$$\n\nउत्तर: बट्टा ₹126 है तथा बट्टा प्रतिशत 15% है।
Example 2
सोहन ने एक पुराना रेफ्रिजरेटर ₹2,500 में खरीदा। उसने इसकी मरम्मत पर ₹500 खर्च किए और फिर इसे ₹3,300 में बेच दिया। उसका लाभ या हानि प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:\nखरीद मूल्य = ₹2,500\nमरम्मत (ऊपरी व्यय) = ₹500\nकुल प्रभावी क्रय मूल्य ($CP$) = $2500 + 500 = ₹3,000$\nविक्रय मूल्य ($SP$) = ₹3,300\n\nचूँकि $SP > CP$, अतः सोहन को लाभ हुआ।\n$$\text{लाभ} = SP - CP = 3300 - 3000 = ₹300$$\n\nलाभ प्रतिशत:\n$$\text{लाभ } \% = \left( \frac{\text{लाभ}}{CP} \right) \times 100\%$$\n$$\text{लाभ } \% = \frac{300}{3000} \times 100\% = 10\%$$\n\nउत्तर: सोहन को 10% का लाभ हुआ।
Example 3
₹10,000 की राशि पर 2 वर्ष के लिए 10% वार्षिक दर से चक्रवृद्धि ब्याज तथा साधारण ब्याज का अंतर ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:\nदिया गया है: $P = ₹10,000$, $R = 10\%$, $T = n = 2$ वर्ष\n\n1. साधारण ब्याज ($SI$):\n$$SI = \frac{P \times R \times T}{100} = \frac{10000 \times 10 \times 2}{100} = ₹2,000$$\n\n2. चक्रवृद्धि मिश्रधन ($A$):\n$$A = P \left( 1 + \frac{R}{100} \right)^n = 10000 \left( 1 + \frac{10}{100} \right)^2 = 10000 \left( \frac{11}{10} \right)^2$$\n$$A = 10000 \times \frac{121}{100} = ₹12,100$$\nचक्रवृद्धि ब्याज ($CI$) = $A - P = 12100 - 10000 = ₹2,100$\n\n3. ब्याजों का अंतर:\n$$\text{अंतर} = CI - SI = 2100 - 2000 = ₹100$$\n\nउत्तर: चक्रवृद्धि ब्याज और साधारण ब्याज में ₹100 का अंतर है।
Example 4
₹8,000 पर 1 वर्ष के लिए 10% वार्षिक दर से चक्रवृद्धि ब्याज ज्ञात कीजिए, जबकि ब्याज अर्धवार्षिक (छमाही) संयोजित होता है।
Step-by-Step Solution:
हल:\nदिया गया है: $P = ₹8,000$\nवार्षिक दर $R = 10\%$, अतः अर्धवार्षिक दर $R_{half} = \frac{10\%}{2} = 5\%$\nसमय $n = 1$ वर्ष, अतः अर्धवार्षिक अवधियों की संख्या $n_{half} = 1 \times 2 = 2$ छमाही\n\nमिश्रधन का सूत्र:\n$$A = P \left( 1 + \frac{R_{half}}{100} \right)^{n_{half}} = 8000 \left( 1 + \frac{5}{100} \right)^2$$\n$$A = 8000 \left( \frac{21}{20} \right)^2 = 8000 \times \frac{441}{400} = 20 \times 441 = ₹8,820$$\n\nचक्रवृद्धि ब्याज ($CI$):\n$$CI = A - P = 8820 - 8000 = ₹820$$\n\nउत्तर: चक्रवृद्धि ब्याज ₹820 है।
Example 5
एक स्कूटर ₹42,000 में खरीदा गया। 8% वार्षिक दर से इसके मूल्य का अवमूल्यन (Depreciation) हो गया। 1 वर्ष के बाद स्कूटर का मूल्य ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हल:\nप्रारंभिक मूल्य ($P$) = ₹42,000\nअवमूल्यन दर ($R$) = 8% वार्षिक\nसमय ($n$) = 1 वर्ष\n\nअवमूल्यन के सूत्र से:\n$$V = P \left( 1 - \frac{R}{100} \right)^n$$\n$$V = 42000 \left( 1 - \frac{8}{100} \right)^1 = 42000 \times \frac{92}{100} = 420 \times 92 = ₹38,640$$\n\n(अथवा: 1 वर्ष में मूल्यह्रास = $42000 \times \frac{8}{100} = ₹3,360$।\nनया मूल्य = $42000 - 3360 = ₹38,640$)\n\nउत्तर: 1 वर्ष बाद स्कूटर का मूल्य ₹38,640 होगा।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

बट्टा प्रतिशत की गणना विक्रय मूल्य (SP) पर कर देना।

Scientific Reality & Correction

बट्टा सदैव अंकित मूल्य (Marked Price / सूची मूल्य) पर ही निकाला जाता है; विक्रय मूल्य पर नहीं।

Common Misconception

अर्धवार्षिक ब्याज संयोजन में दर को आधा करना अथवा समय को दोगुना करना भूल जाना।

Scientific Reality & Correction

छमाही संयोजन में ब्याज दर को 2 से भाग देकर आधा (R/2) तथा समयावधि को 2 से गुणा कर दोगुना (2n) करना अनिवार्य है।

Common Misconception

मिश्रधन (A) को ही चक्रवृद्धि ब्याज मान लेना।

Scientific Reality & Correction

सूत्र A = P(1 + R/100)ⁿ से कुल मिश्रधन (Amount) प्राप्त होता है; चक्रवृद्धि ब्याज (CI) निकालने के लिए अंत में मूलधन घटाना पड़ता है (CI = A - P)।

Visual Learning & Conceptual Map

राशियों की तुलना (Comparing Quantities): बट्टा, लाभ-हानि व चक्रवृद्धि ब्याज A. साधारण ब्याज (SI) बनाम चक्रवृद्धि ब्याज (CI) समय (वर्ष) धनराशि (₹) P SI (रैखिक) CI (घातीय) CI − SI अंतर A = P(1 + R/100)ⁿ तथा CI = A − P चक्रवृद्धि ब्याज में ब्याज पर भी ब्याज मिलता है B. व्यापारिक प्रवाह: अंकित मूल्य, बट्टा व GST अंकित मूल्य (MP) ₹1,000 बट्टा: - 10% (₹100) विक्रय मूल्य (SP) ₹900 + GST 18% कुल बिल राशि ₹1,062 • बट्टा (Discount) = MP − SP (MP पर आकलित) • प्रभावी CP = खरीद मूल्य + मरम्मत/परिवहन • लाभ % = (लाभ/CP) × 100 ; हानि % = (हानि/CP) × 100 • मूल्यह्रास: V = P(1 − R/100)ⁿ छमाही संयोजन: दर = R/2 तथा समय = 2n

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
  1. समान इकाइयों वाली दो राशियों की तुलना को अनुपात कहते हैं; भिन्न या अनुपात को प्रतिशत में बदलने हेतु 100 से गुणा करते हैं।
Takeaway 2
  1. प्रतिशत वृद्धि या कमी = (मान में परिवर्तन / मूल मान) × 100% होती है।
Takeaway 3
  1. अंकित मूल्य (MP) पर दी गई छूट को बट्टा (Discount = MP - SP) कहते हैं; बट्टा सदैव MP पर आकलित होता है।
Takeaway 4
  1. सरकार द्वारा वस्तु की बिक्री पर लगाया जाने वाला कर (GST) सदैव विक्रय मूल्य (SP) पर जोड़ा जाता है।
Takeaway 5
  1. खरीद मूल्य में मरम्मत, भाड़ा आदि जोड़ने पर कुल प्रभावी क्रय मूल्य (Effective CP) प्राप्त होता है।
Takeaway 6
  1. लाभ % = (लाभ / CP) × 100% तथा हानि % = (हानि / CP) × 100%; दोनों सदैव क्रय मूल्य पर आकलित होते हैं।
Takeaway 7
  1. साधारण ब्याज (SI = PRT/100) में मूलधन स्थिर रहता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज (CI) में ब्याज पर भी ब्याज जुड़ता है।
Takeaway 8
  1. चक्रवृद्धि मिश्रधन A = P(1 + R/100)ⁿ तथा CI = A - P होता है।
Takeaway 9
  1. यदि ब्याज अर्धवार्षिक संयोजित हो, तो ब्याज दर आधी (R/2) और समय दोगुना (2n) हो जाता है।
Takeaway 10
  1. जनसंख्या वृद्धि में V = P(1 + R/100)ⁿ तथा मशीनों के अवमूल्यन (घिसाव) में V = P(1 - R/100)ⁿ सूत्र का प्रयोग होता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
₹500 अंकित मूल्य वाली शर्ट पर 20% बट्टा दिया जाता है। विक्रय मूल्य क्या होगा?
Reveal Answer & Explanation
Answer: बट्टा = 500 का 20% = ₹100। विक्रय मूल्य = 500 - 100 = ₹400।
सूत्र: SP = MP - बट्टा।
2
लाभ या हानि प्रतिशत की गणना सदैव किस मूल्य पर की जाती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्रय मूल्य (Cost Price / कुल प्रभावी क्रय मूल्य) पर।
लाभ या हानि का आधार वस्तु की कुल लागत होती है, विक्रय मूल्य नहीं।
3
अर्धवार्षिक (छमाही) चक्रवृद्धि ब्याज संयोजन में दर और समय में क्या परिवर्तन होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: वार्षिक दर आधी (R/2) हो जाती है तथा समय दोगुना (2n छमाही) हो जाता है।
1 वर्ष में दो छमाही अवधियाँ होती हैं।
4
अंकित मूल्य (MP) और विक्रय मूल्य (SP) के अंतर को क्या कहते हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: बट्टा या छूट (Discount)।
Discount = MP - SP।
5
एक नई कार का मूल्य ₹5,00,000 है। यदि प्रतिवर्ष 10% की दर से मूल्यह्रास हो, तो 1 वर्ष बाद इसका मूल्य क्या होगा?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ह्रास = 5,00,000 × 10% = ₹50,000। नया मूल्य = 5,00,000 - 50,000 = ₹4,50,000।
सूत्र: V = P(1 - R/100)¹।
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