सामान्य बोलचाल में 'बाजार' का अर्थ किसी निश्चित भौतिक स्थान (जैसे कोलकाता का बड़ाबाजार या स्थानीय साप्ताहिक हाट) से लगाया जाता है जहाँ क्रेता-विक्रेता आमने-सामने एकत्र होते हैं। परंतु अर्थशास्त्र में बाजार स्थान-विशेष से मुक्त एक व्यापक अवधारणा है। सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री कूर्नो (Cournot) के अनुसार:
"अर्थशास्त्र में बाजार का अर्थ किसी विशेष स्थान से नहीं है जहाँ वस्तुएं खरीदी और बेची जाती हैं; बल्कि उस संपूर्ण क्षेत्र अथवा नेटवर्क से है जिसमें क्रेताओं और विक्रेताओं के मध्य ऐसे स्वतंत्र संबंध होते हैं कि एक ही वस्तु की कीमतें सुगमता व शीघ्रता से समान हो जाती हैं।"
वर्तमान डिजिटल युग में इंटरनेट, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (अमेज़न, फ्लिपकार्ट), टेलीफोन तथा शेयर बाजारों (NSE, BSE) के माध्यम से बिना आमने-सामने मिले जो विशाल व्यापार संपन्न होता है, वह अर्थशास्त्र की दृष्टि से एक सुव्यवस्थित बाजार है।
- एक विशिष्ट वस्तु अथवा सेवा: विनिमय हेतु किसी निश्चित वस्तु, सेवा या साधन (उदा. गेहूं, सॉफ्टवेयर, श्रम) का होना।
- क्रेताओं एवं विक्रेताओं की उपस्थिति: वस्तु के इच्छुक खरीदार और विक्रेता मौजूद होने चाहिए।
- प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष संपर्क: दलालों, पत्रों, फोन या इंटरनेट के माध्यम से मूल्य निर्धारण हेतु संपर्क।
- कीमत निर्धारण: मांग और पूर्ति के स्वतंत्र पारस्परिक प्रभाव से एक निश्चित विनिमय मूल्य तय होना।
- बाजार दशाओं का ज्ञान: क्रेताओं व विक्रेताओं को प्रचलित कीमतों व गुणवत्ता की जानकारी होना।
अर्थशास्त्र में बाजार संरचनाओं को पांच मुख्य कसौटियों पर विभाजित किया जाता है:
| संरचनात्मक मानदंड | पूर्ण प्रतियोगिता | शुद्ध एकाधिकार | एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता | अल्पाधिकार |
|---|---|---|---|---|
| विक्रेताओं की संख्या | अत्यधिक बड़ी संख्या (असंख्य) | एकमात्र एकल विक्रेता | अनेक विक्रेता | कुछ गिने-चुने बड़े विक्रेता |
| वस्तु की प्रकृति | पूर्णतः समरूप (Homogeneous) | अद्वितीय; निकट स्थानापन्न रहित | विभेदित उत्पाद (ब्रांडेड) | समरूप अथवा विभेदित |
| कीमत पर नियंत्रण | शून्य (फर्म कीमत स्वीकारक) | पूर्ण नियंत्रण (कीमत निर्धारक) | सीमित नियंत्रण | उच्च पारस्परिक निर्भरता |
| प्रवेश व निकास | पूर्णतः स्वतंत्र एवं निर्वाध | कठोर वैधानिक/आर्थिक बाधाएं | दीर्घकाल में स्वतंत्र प्रवेश | प्रवेश में महत्वपूर्ण बाधाएं |
| मांग वक्र का स्वरूप | पूर्णतः लोचदार क्षैतिज रेखा ($e = \infty$) | नीचे गिरता हुआ कम लोचदार वक्र | नीचे गिरता हुआ अत्यधिक लोचदार वक्र | अनिर्धारित या विकुंचित वक्र (Kinked) |