सांख्यिकी में जब किसी समंक श्रेणी का अवलोकन किया जाता है, तो उसके मूल्य पूरी श्रृंखला में अनियंत्रित रूप से बिखरे नहीं रहते; बल्कि उनका एक स्वाभाविक गुण होता है कि वे किसी एक मध्यवर्ती या केंद्रीय मान के इर्द-गिर्द एकत्रित या संकेंद्रित होने की प्रवृत्ति रखते हैं। समंकों के किसी केंद्रीय मान के चारों ओर संकेंद्रित होने की इसी प्रवृत्ति को केंद्रीय प्रवृत्ति (Central Tendency) कहा जाता है। तथा जिस एकल संख्यात्मक मान द्वारा इस संपूर्ण श्रेणी का प्रतिनिधित्व किया जाता है, उसे केंद्रीय प्रवृत्ति का माप या बोलचाल में औसत (Average) कहते हैं।
"औसत संपूर्ण समंक समूह का वर्णन करने के लिए एक एकल संख्या ज्ञात करने का प्रयास है।" — सर आर्थर लियोन बाउले
"केंद्रीय प्रवृत्ति का माप वह विशिष्ट मान है जिसके चारों ओर अन्य संख्याएं एकत्रित होती हैं।" — सिम्पसन एवं काफ्का
- जटिल एवं विशाल समंकों का संक्षिप्तीकरण: हजारों व्यक्तियों की आय या उत्पादन के आंकड़ों को पृथक रूप से याद रखना मानव मस्तिष्क के लिए असंभव है। औसत पूरे समंक को एक ही संख्या में प्रस्तुत कर देता है (जैसे पश्चिम बंगाल के नागरिकों की औसत प्रति व्यक्ति आय)।
- तुलनात्मक अध्ययन में सुगमता: दो या दो से अधिक श्रेणियों, जिलों या राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत तुलना करने हेतु औसत एक मानक आधार प्रस्तुत करता है (जैसे दो जिलों में चावल की औसत उत्पादकता की तुलना)।
- उच्चतर सांख्यिकीय विश्लेषण का आधार: सांख्यिकी के आगामी उन्नत माप—जैसे अपकिरण (प्रमाप विचलन), विषमता, सहसंबंध गुणांक और प्रतिगमन विश्लेषण—पूरी तरह औसत पर ही आधारित होते हैं।
- नीति निर्धारण एवं आर्थिक नियोजन: सरकार द्वारा आधिकारिक गरीबी रेखा तय करने, न्यूनतम वैधानिक मजदूरी निर्धारित करने, राशन कोटा आवंटन और वार्षिक बजट तैयार करने में औसत मान अनिवार्य होते हैं।
प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् जॉर्ज उडनी यूल (G. Udny Yule) ने एक आदर्श औसत के लिए छह अनिवार्य कसौटियां प्रतिपादित की हैं:
| कसौटी | सैद्धांतिक आवश्यकता | आर्थिक महत्व |
|---|---|---|
| 1. स्पष्ट एवं दृढ़ता से परिभाषित (Rigidly Defined) | औसत एक निश्चित गणितीय सूत्र द्वारा परिभाषित होना चाहिए, जिसमें अन्वेषक के व्यक्तिगत पूर्वाग्रह या अनुमान का कोई स्थान न हो। | विभिन्न गणनाकर्ताओं द्वारा समान समंक से सदैव एक ही परिणाम प्राप्त होता है। |
| 2. सभी अवलोकनों पर आधारित (Based on all observations) | सूत्र में श्रेणी के प्रत्येक पद ($X_1, X_2, \dots, X_N$) को गणितीय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। | किसी भी अवलोकन को छोड़ना समंक के वास्तविक प्रतिनिधित्व को विकृत कर देता है। |
| 3. समझने एवं गणना में सरल (Easy to Understand & Calculate) | आम नागरिकों एवं नीति-निर्माताओं के लिए समझने में सरल और गणना में सहज होना चाहिए। | व्यावसायिक रिपोर्टों और सार्वजनिक प्रशासन में व्यापक रूप से स्वीकार्य। |
| 4. बीजगणितीय विवेचन के योग्य (Capable of Algebraic Treatment) | औसत को आगे के गणितीय सूत्रों (जैसे संयुक्त औसत, विचलन आदि) में सीधे प्रयोग किया जा सकना चाहिए। | उन्नत इकोनोमेट्रिक मॉडलिंग और प्रतिचयन सिद्धांत के लिए अपरिहार्य। |
| 5. चरम मानों से अप्रभावित (Resistant to Outliers) | अत्यधिक बड़े या अत्यधिक छोटे सीमांत मानों द्वारा औसत कृत्रिम रूप से विकृत नहीं होना चाहिए। | मुट्ठी भर अरबपतियों की आय से पूरे देश की सामान्य जनता के आय स्तर का भ्रम न फैले। |
| 6. प्रतिचयन स्थायित्व (Sampling Stability) | समान समष्टि से लिए गए विभिन्न यादृच्छिक नमूनों में औसत का मान लगभग स्थिर रहना चाहिए। | नमूना सर्वेक्षणों और आर्थिक निष्कर्षों की विश्वसनीयता में वृद्धि होती है। |
- गणितीय औसत (Mathematical Averages): वे औसत जो सभी अवलोकनों पर कठोर गणितीय संक्रियाओं द्वारा ज्ञात किए जाते हैं:
- समांतर माध्य (Arithmetic Mean, $ar{X}$): सरल एवं भारित।
- गुणोत्तर माध्य (Geometric Mean, GM): सभी पदों के गुणनफल का $n$-वां मूल।
- हरात्मक माध्य (Harmonic Mean, HM): पदों के व्युत्क्रमों के समांतर माध्य का व्युत्क्रम।
- स्थितीय औसत (Positional Averages): वे औसत जो क्रमित श्रृंखला में पद की स्थिति या स्थान के आधार पर निर्धारित होते हैं:
- माध्यिका (Median, $M$): आरोही क्रम में व्यवस्थित समंकों का ठीक मध्यवर्ती पद।
- विभाजन मान (Partition Values): चतुर्थक ($Q$), दशमक ($D$) और शतमक ($P$)।
- बहुलक (Mode, $Z$): श्रेणी में सर्वाधिक बारंबारता वाला या सर्वाधिक लोकप्रिय पद।