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WBB • कक्षा XI • Economics • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

अपकिरण के माप

अपकिरण के माप (Measures of Dispersion) आर्थिक सांख्यिकी के परिमाणात्मक विश्लेषण का एक अत्यंत मौलिक एवं अपरिहार्य आधार स्तंभ हैं, जिनके द्वारा किसी समंक श्रेणी के केंद्रीय मूल्य (माध्य) के चारों ओर विभिन्न व्यक्तिगत मानों के फैलाव, बिखराव अथवा विचरण की मात्रा का वैज्ञानिक अध्ययन एवं मापन किया जाता है। पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) के कक्षा 11 अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम के परिमाणात्मक अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी खंड के अंतर्गत यह अध्याय केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों (समांतर माध्य, माध्यिका एवं बहुलक) की सीमाओं को दूर करते हुए समंकों की आंतरिक संरचना का यथार्थवादी विवेचन प्रस्तुत करता है। केंद्रीय प्रवृत्ति के माप केवल यह दर्शाते हैं कि समंकों का झुकाव या केंद्र बिंदु कहां स्थित है, परंतु वे यह बताने में पूर्णतः असमर्थ रहते हैं कि विभिन्न अवलोकन उस केंद्र के समीप घने रूप से केंद्रित हैं अथवा दूर-दूर तक फैले हुए हैं। उदाहरणार्थ, यदि दो औद्योगिक कारखानों के पांच-पांच श्रमिकों की दैनिक मजदूरी क्रमशः (५०, ५०, ५०, ५०, ५०) तथा (१०, २०, ५०, ८०, ९०) रुपये हो, तो दोनों का समांतर माध्य समान रूप से ५० रुपये होने के बावजूद पहले कारखाने में मजदूरी का विचरण शून्य (पूर्ण समरूपता) है, जबकि दूसरे कारखाने में अत्यधिक आर्थिक विषमता एवं अस्थिरता विद्यमान है। इसी कारण सांख्यिकी में अपकिरण को 'द्वितीय श्रेणी के औसत' (Averages of the second order) की संज्ञा दी जाती है। इस अध्याय में समंकों की मूल इकाइयों में व्यक्त 'निरपेक्ष माप' तथा तुलनात्मक अध्ययन हेतु उपयोगी इकाई-रहित 'सापेक्ष माप अथवा अपकिरण गुणांक' का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। पाठ्यक्रम में स्थिति संबंधी माप के रूप में विस्तार (Range) व चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation), व्यक्तिगत विचलनों के औसत के रूप में माध्य विचलन (Mean Deviation), तथा सन् 1893 में कार्ल पियर्सन द्वारा प्रतिपादित अपकिरण का सर्वमान्य आदर्श माप प्रमाप विचलन (Standard Deviation, σ) व प्रसरण (Variance, σ²), समरूपता एवं निरंतरता की परख हेतु विचरण गुणांक (CV), तथा राष्ट्रीय आय एवं धन के वितरण में व्याप्त विषमता को आरेखीय रूप से प्रदर्शित करने वाले लोरेंज वक्र (Lorenz Curve) का प्रमाणिक समावेश किया गया है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

व्यावहारिक अर्थशास्त्र, समष्टिगत आर्थिक नियोजन, वित्तीय जोखिम प्रबंधन तथा सामाजिक कल्याण के मूल्यांकन में अपकिरण के माप निर्णय-प्रक्रिया के प्रमुख साधन माने जाते हैं। किसी भी राष्ट्र की आर्थिक समृद्धि का आकलन केवल प्रति व्यक्ति आय (औसत आय) के आधार पर नहीं किया जा सकता; क्योंकि उच्च औसत आय के पीछे भी जनसंख्या के एक बड़े हिस्से की भीषण दरिद्रता और असमानता छिपी हो सकती है यदि आय का अपकिरण अत्यधिक विषम हो। अर्थशास्त्री अपकिरण के मापों तथा लोरेंज वक्र के माध्यम से गिनी गुणांक (Gini Coefficient) का परिकलन करके देश में आय विषमता की वास्तविक स्थिति का आकलन करते हैं तथा न्यायसंगत कर नीतियों एवं गरीबी उन्मूलन योजनाओं का प्रारूप तैयार करते हैं। वित्तीय अर्थशास्त्र एवं शेयर बाजार में परिसंपत्तियों के जोखिम और मूल्य अस्थिरता (Volatility) को मापने का सार्वभौमिक पैमाना प्रमाप विचलन (σ) ही है: उच्च प्रमाप विचलन का अर्थ उच्च वित्तीय जोखिम होता है। इसी प्रकार औद्योगिक विनिर्माण में उत्पादों की गुणवत्ता को एकरूप बनाए रखने तथा सांख्यिकीय गुणवत्ता नियंत्रण (SQC) में अपकिरण का प्रयोग अनिवार्य होता है। उच्च माध्यमिक अर्थशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए अपकिरण के बीजगणितीय सूत्रों, गणितीय विशेषताओं तथा व्यावहारिक व्याख्या में दक्षता हासिल करना भविष्य में सहसंबंध, प्रतीपगमन (Regression), अर्थमिति तथा आधुनिक डेटा-आधारित आर्थिक अनुसंधान के लिए मजबूत आधारशिला प्रदान करता है।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 अपकिरण का अर्थ, केंद्रीय प्रवृत्ति...
2 स्थिति संबंधी माप: विस्तार (Range)...
3 माध्य विचलन (Mean Deviation) एवं मा...
4 कार्ल पियर्सन का प्रमाप विचलन (Stan...
5 प्रमाप विचलन की विशेषताएं एवं प्रसा...
6 विचरण गुणांक (CV), लोरेंज वक्र एवं...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

अपकिरण का अर्थ, केंद्रीय प्रवृत्ति की सीमाएं एवं उद्देश्य

१. केंद्रीय प्रवृत्ति की सीमाएं एवं अपकिरण की आवश्यकता

केंद्रीय प्रवृत्ति के माप (समांतर माध्य, माध्यिका, बहुलक) किसी समंक श्रेणी का प्रतिनिधित्व करने वाला एक संक्षिप्त एकल मान प्रस्तुत करते हैं। किंतु केवल माध्य के आधार पर किसी समंक श्रेणी की वास्तविक प्रकृति को पूर्णतः नहीं समझा जा सकता। माध्य केवल केंद्र की स्थिति दर्शाता है, बिखराव की नहीं।

इसे एक ठोस उदाहरण से समझें। मान लीजिए तीन विभिन्न फर्मों में ५-५ श्रमिकों की दैनिक मजदूरी (रुपयों में) इस प्रकार है:

  • फर्म अ: ५०, ५०, ५०, ५०, ५० $\implies \text{माध्य } (\bar{X}) = ₹५०$
  • फर्म ब: ४५, ४८, ५०, ५२, ৫৫ $\implies \text{माध्य } (\bar{X}) = ₹५०$
  • फर्म स: १०, २०, ५०, ८०, ९० $\implies \text{माध्य } (\bar{X}) = ₹५०$

तीनों फर्मों का औसत वेतन बिल्कुल बराबर (₹५०) है। किंतु फर्म 'अ' में कोई विचरण नहीं है (पूर्ण समानता); फर्म 'ब' में मामूली फैलाव है (उच्च स्थिरता); जबकि फर्म 'स' में अत्यधिक विषमता है। इस फैलाव, बिखराव या विचरण को ही सांख्यिकी में अपकिरण (Dispersion) कहा जाता है।

२. प्रमुख सांख्यिकीविदों की परिभाषाएं
  • आर्थर एल. बाउले (A. L. Bowley): "अपकिरण पदों के विचरण का माप है।"
  • ब्रुक्स एवं डिक (Brooks & Dick): "अपकिरण या फैलाव किसी केंद्रीय मूल्य के चारों ओर चरों के बिखराव या विचरण की मात्रा है।"
  • सिम्पसन एवं काफ्का (Simpson & Kafka): "किसी श्रेणी में एक औसत के चारों ओर समंकों के बिखराव के मापन को ही अपकिरण या विचरण का माप कहते हैं।"

चूंकि केंद्रीय प्रवृत्ति के माप मूल समंकों के प्रत्यक्ष औसत होते हैं (प्रथम श्रेणी के औसत), अतः अपकिरण के माप—जो औसत से विचलनों के पुनः औसत होते हैं—द्वितीय श्रेणी के औसत (Averages of the second order) कहलाते हैं।

३. अपकिरण मापने के प्रमुख उद्देश्य
  1. माध्य की विश्वसनीयता की परख: यदि अपकिरण कम है, तो माध्य अत्यधिक विश्वसनीय एवं प्रतिनिधि होता है। अपकिरण अधिक होने पर माध्य भ्रामक सिद्ध हो सकता है।
  2. समरूपता एवं स्थिरता की तुलना: दो या दो से अधिक श्रेणियों के बीच विचरण, स्थिरता या निरंतरता की तुलना करना (जैसे दो बल्लेबाजों के रनों की निरंतरता या दो मशीनों के उत्पादन की स्थिरता)।
  3. औद्योगिक गुणवत्ता नियंत्रण: विनिर्माण में उत्पाद की त्रुटियों को सहनीय सीमाओं के भीतर सीमित रखना।
  4. उच्च सांख्यिकीय विश्लेषण का आधार: सहसंबंध, प्रतीपगमन, प्राक्कल्पना परीक्षण एवं आर्थिक सूचकांकों के निर्माण हेतु अपकिरण आधारभूत सामग्री प्रदान करता है।
४. निरपेक्ष माप बनाम सापेक्ष माप (अपकिरण गुणांक)
तुलना का आधार निरपेक्ष माप (Absolute Dispersion) सापेक्ष माप या अपकिरण गुणांक (Relative Dispersion)
परिभाषा यह मूल समंकों की भौतिक इकाइयों में विचरण की वास्तविक मात्रा को दर्शाता है। यह केंद्रीय माध्य के संदर्भ में विचरण को शुद्ध इकाई-रहित अनुपात या प्रतिशत में व्यक्त करता है।
इकाई मूल समंकों की इकाइयों में व्यक्त होता है: रुपया, किलोग्राम, मीटर, क्विंटल आदि। शुद्ध इकाई-रहित संख्या या प्रतिशत (उदा. ०.२५ या २५%)।
तुलना की क्षमता भिन्न इकाइयों वाली श्रेणियों अथवा अत्यधिक असमान माध्यों वाली श्रेणियों की तुलना नहीं कर सकता। किन्हीं भी दो भिन्न इकाइयों या पैमानों वाली श्रेणियों की तुलना हेतु सर्वथा उपयुक्त।
प्रमुख माप विस्तार, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन, प्रमाप विचलन। विस्तार गुणांक, चतुर्थक विचलन गुणांक, माध्य विचलन गुणांक, विचरण गुणांक (CV)।
५. यूल के अनुसार एक आदर्श अपकिरण माप की विशेषताएं

सांख्यिकीविद् जी. उडनी यूल (G. Udny Yule) के अनुसार एक उत्तम अपकिरण माप में छह विशेषताएं होनी चाहिए:

  1. वह स्पष्ट गणितीय सूत्र द्वारा कठोरता से परिभाषित होना चाहिए।
  2. वह श्रेणी के सभी अवलोकनों पर आधारित होना चाहिए।
  3. वह सरल एवं सुबोध होना चाहिए।
  4. उसकी गणना सरल होनी चाहिए।
  5. वह उच्च बीजगणितीय विवेचन के योग्य होना चाहिए (जैसे संयुक्त प्रमाप विचलन निकालना)।
  6. वह प्रतिचयन के उच्चावचनों से न्यूनतम प्रभावित होना चाहिए।

स्थिति संबंधी माप: विस्तार (Range) एवं चतुर्थक विचलन (QD)

१. विस्तार या परास (Range): संकल्पना एवं सूत्र

अपकिरण का सबसे सरल एवं प्राथमिक माप विस्तार या परास (Range) है। किसी समंक श्रेणी के अधिकतम मूल्य और न्यूनतम मूल्य के अंतर को विस्तार कहा जाता है।

$$\text{निरपेक्ष विस्तार (Range)} = L - S$$ $$\text{विस्तार गुणांक (Coefficient of Range)} = \frac{L - S}{L + S}$$

जहां $L$ श्रेणी का सबसे बड़ा पद (Largest value) तथा $S$ सबसे छोटा पद (Smallest value) है।

  • अखंडित / सतत श्रेणी में: उच्चतम वर्ग की उच्च सीमा में से न्यूनतम वर्ग की निम्न सीमा घटाकर निकाला जाता है (अथवा चरम वर्गों के मध्य बिंदुओं के अंतर से)।

मूल्यांकन:

  • गुण: समझने एवं गणना करने में सर्वाधिक सरल; मौसम के दैनिक तापमान के प्रसार तथा कारखानों में गुणवत्ता नियंत्रण चार्टों में उपयोगी।
  • दोष: चरम मानों (Outliers) से अत्यधिक प्रभावित; श्रेणी के मध्यवर्ती ९८% पदों की पूर्ण उपेक्षा करता है; खुले सिरे वाले (Open-ended) वर्गों में ज्ञात नहीं किया जा सकता।
२. चतुर्थक विचलन या अर्ध-अंतर-चतुर्थक परास (Quartile Deviation)

विस्तार के चरम मानों के दोष को दूर करने के लिए चतुर्थकों (Quartiles) पर आधारित माप निकाला जाता है। चतुर्थक समंक श्रेणी को चार बराबर भागों में बांटते हैं: $Q_1$ (प्रथम चतुर्थक, २५वां शततमक), $Q_2$ (माध्यिका, ५०वां शततमक), और $Q_3$ (तृतीय चतुर्थक, ७५वां शततमक)।

$$\text{अंतर-चतुर्थक परास (Interquartile Range - IQR)} = Q_3 - Q_1$$ $$\text{चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation - QD)} = \frac{Q_3 - Q_1}{2}$$ $$\text{चतुर्थक विचलन गुणांक (Coefficient of QD)} = \frac{Q_3 - Q_1}{Q_3 + Q_1}$$

समंक श्रेणी के मध्यवर्ती ५०% पदों के फैलाव को अंतर-चतुर्थक परास कहते हैं, तथा इसके आधे भाग को चतुर्थक विचलन (QD) अथवा अर्ध-अंतर-चतुर्थक परास कहा जाता है।

३. सतत श्रेणी में चतुर्थक गणना के चरण
  1. संचयी बारंबारता ($c.f.$) सारणी तैयार करें।
  2. निम्न चतुर्थक वर्ग $\frac{N}{4}$ तथा उच्च चतुर्थक वर्ग $\frac{3N}{4}$ के पद मूल्य से ज्ञात करें।
  3. अंतर्वेशन सूत्र लागू करें: $$Q_1 = L_1 + \frac{\frac{N}{4} - c.f.}{f_1} \times i_1$$ $$Q_3 = L_3 + \frac{\frac{3N}{4} - c.f.}{f_3} \times i_3$$ जहां $L$ चतुर्थक वर्ग की निम्न सीमा, $c.f.$ पूर्ववर्ती वर्ग की संचयी बारंबारता, $f$ उस वर्ग की आवृत्ति, तथा $i$ वर्ग विस्तार है।
४. चतुर्थक विचलन के गुण एवं सीमाएं
  • गुण:
    • यह चरम मानों से पूर्णतः मुक्त होता है, क्योंकि यह प्रथम २५% और अंतिम २५% पदों को छोड़कर केवल मध्यवर्ती ५०% पदों पर ध्यान केंद्रित करता है।
    • खुले सिरे वाले वर्गों (Open-ended classes) में भी इसकी गणना सरलतापूर्वक की जा सकती है।
  • सीमाएं:
    • श्रेणी के ५०% पदों (चरम सीमावर्ती) की सर्वथा उपेक्षा करता है।
    • बीजगणितीय विवेचन के योग्य नहीं है; दो श्रेणियों का संयुक्त चतुर्थक विचलन नहीं निकाला जा सकता।

माध्य विचलन (Mean Deviation) एवं माध्यिका आधारित न्यूनतम मान

१. सैद्धांतिक संकल्पना एवं परिभाषा

माध्य विचलन (Mean Deviation अथवा Average Deviation) किसी समंक श्रेणी के किसी केंद्रीय मूल्य (समांतर माध्य, माध्यिका अथवा बहुलक) से निकाले गए विचलनों के निरपेक्ष मानों (चिह्नों की उपेक्षा करके) का समांतर माध्य है।

बीजगणित के नियम के अनुसार समांतर माध्य से विचलनों का बीजगणितीय योग सदैव शून्य होता है: $\sum (X - \bar{X}) = 0$। अतः विचलन का वास्तविक फैलाव मापने हेतु धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-) चिह्नों की उपेक्षा करके केवल निरपेक्ष मान $|d|$ लिया जाता है।

२. विभिन्न समंक श्रेणियों के सूत्र
श्रेणी का स्वरूप समांतर माध्य से माध्य विचलन ($MD_{\bar{X}}$) माध्यिका से माध्य विचलन ($MD_M$)
व्यक्तिगत श्रेणी $$MD_{\bar{X}} = \frac{\sum |X - \bar{X}|}{N}$$ $$MD_M = \frac{\sum |X - M|}{N}$$
खंडित एवं सतत श्रेणी $$MD_{\bar{X}} = \frac{\sum f |X - \bar{X}|}{N}$$
(सतत श्रेणी में $X$ मध्य बिंदु है)
$$MD_M = \frac{\sum f |X - M|}{N}$$
३. माध्य विचलन गुणांक (Coefficient of Mean Deviation)
$$\text{माध्य से विचलन गुणांक} = \frac{MD_{\bar{X}}}{\bar{X}} \qquad \text{तथा} \qquad \text{माध्यिका से विचलन गुणांक} = \frac{MD_M}{M}$$
४. माध्यिका से विचलनों का न्यूनतम मान संबंधी गुणधर्म
बोर्ड परीक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण उपप्रमेय:
किसी श्रेणी के विभिन्न पदों से विचलनों के निरपेक्ष मानों का योग सदैव न्यूनतम होता है, जब विचलन माध्यिका (Median) से निकाले जाएं: $$\sum |X - M| < \sum |X - A| \quad (A \neq M)$$ अतः माध्यिका से ज्ञात किया गया माध्य विचलन समांतर माध्य से ज्ञात विचलन की तुलना में सदैव कम या बराबर होता है ($MD_M \le MD_{\bar{X}}$)। इसलिए सैद्धांतिक दृष्टि से माध्य विचलन सदैव माध्यिका से ही परिकलित करना सर्वोत्तम होता है।
५. माध्य विचलन के गुण एवं दोष
  • गुण: श्रेणी के सभी पदों पर आधारित; समझने में सरल; प्रमाप विचलन की तुलना में चरम मानों से कम विकृत।
  • दोष: सबसे बड़ा गणितीय दोष यह है कि इसमें बीजगणितीय चिह्नों (+ और -) की कृत्रिम उपेक्षा की जाती है, जो मूल गणितीय सिद्धांतों के विरुद्ध है और इसे आगे बीजगणितीय विवेचन के अयोग्य बनाता है।

कार्ल पियर्सन का प्रमाप विचलन (Standard Deviation, σ) एवं प्रसरण (σ²)

१. प्रमाप विचलन का उद्भव एवं वैज्ञानिक परिभाषा

सन् 1893 में प्रख्यात ब्रिटिश सांख्यिकीविद् कार्ल पियर्सन ने माध्य विचलन की गणितीय त्रुटि (चिह्नों की उपेक्षा) को दूर करने के लिए अपकिरण के जिस वैज्ञानिक एवं सर्वोत्कृष्ट माप का प्रतिपादन किया, उसे प्रमाप विचलन या मानक विचलन (Standard Deviation) कहा जाता है। इसे ग्रीक वर्णमाला के छोटे अक्षर सिग्मा ($\sigma$) से प्रदर्शित किया जाता है।

परिभाषा: किसी समंक श्रेणी के पदों के उनके समांतर माध्य से लिए गए विचलनों के वर्गों के समांतर माध्य के धनात्मक वर्गमूल को प्रमाप विचलन कहते हैं।

$$\sigma = \sqrt{\frac{\sum (X - \bar{X})^2}{N}} = \sqrt{\frac{\sum x^2}{N}}$$

विचलनों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होने के कारण इसे ऐतिहासिक रूप से Root-Mean-Square Deviation भी कहा जाता है।

प्रमाप विचलन के वर्ग को प्रसरण (Variance) कहते हैं:

$$\text{प्रसरण (Variance)} = \sigma^2 = \frac{\sum (X - \bar{X})^2}{N}$$
२. गणना की विभिन्न विधियां
विधि का नाम उपयुक्तता की स्थिति प्रमाप विचलन का सूत्र
प्रत्यक्ष विधि (Direct Method) जब वास्तविक समांतर माध्य $\bar{X}$ पूर्ण संख्या में हो। $$\sigma = \sqrt{\frac{\sum f(X - \bar{X})^2}{N}} = \sqrt{\frac{\sum f x^2}{N}}$$
लघु विधि (Short-cut Method) जब वास्तविक माध्य दशमलव में आए; कल्पित माध्य $A$ मानकर गणना की जाती है। $$\sigma = \sqrt{\frac{\sum f d^2}{N} - \left(\frac{\sum f d}{N}\right)^2} \quad (d = X - A)$$
पद-विचलन विधि (Step-Deviation Method) सतत श्रेणी में समान वर्ग विस्तार $c$ होने पर संख्याओं को छोटा करने हेतु। $$\sigma = c \times \sqrt{\frac{\sum f d'^2}{N} - \left(\frac{\sum f d'}{N}\right)^2} \quad \left(d' = \frac{X - A}{c}\right)$$
३. लघु विधि की सामान्य भ्रांति से बचाव
अत्यंत महत्वपूर्ण चेतावनी:
सूत्र में $\frac{\sum f d^2}{N}$ तथा $\left(\frac{\sum f d}{N}\right)^2$ के अंतर को स्पष्ट समझें:
  • प्रथम पद $\frac{\sum f d^2}{N}$ प्रत्येक विचलन $d$ के वर्ग को $f$ से गुणा करके योग करने के बाद $N$ से भाग देता है।
  • द्वितीय पद $\left(\frac{\sum f d}{N}\right)^2$ सभी $fd$ के कुल योग को $N$ से भाग देकर प्राप्त भागफल का वर्ग करता है।
  • पहला पद सदैव दूसरे पद से बड़ा या बराबर होता है। यदि करणी के अंदर ऋणात्मक संख्या आती है, तो गणना में त्रुटि अवश्यंभावी है!

प्रमाप विचलन की विशेषताएं एवं प्रसामान्य बंटन के नियम

१. प्रमाप विचलन के प्रमुख बीजगणितीय गुणधर्म

प्रमाप विचलन की अद्वितीय गणितीय विशेषताएं इसे संपूर्ण सांख्यिकी का सबसे सशक्त साधन बनाती हैं:

गुणधर्म १: विचलनों के वर्गों का योग न्यूनतम

श्रेणी के पदों से विचलनों के वर्गों का योग सदैव न्यूनतम होता है जब विचलन समांतर माध्य से लिए जाएं:

$$\sum (X - \bar{X})^2 < \sum (X - A)^2 \quad (A \neq \bar{X})$$
गुणधर्म २: मूल बिंदु के परिवर्तन से स्वतंत्रता

समंकों के प्रत्येक पद में कोई स्थिर संख्या जोड़ने या घटाने से प्रमाप विचलन अथवा प्रसरण में कोई परिवर्तन नहीं होता:

$$\sigma(X \pm a) = \sigma(X)$$
गुणधर्म ३: पैमाने के परिवर्तन पर निर्भरता

प्रत्येक पद को किसी संख्या $c$ से गुणा या भाग करने पर प्रमाप विचलन भी उस संख्या के निरपेक्ष मान से गुणा या भाग हो जाता है:

$$\sigma(c \cdot X) = |c| \cdot \sigma(X)$$
गुणधर्म ४: संयुक्त प्रमाप विचलन (Combined Standard Deviation)

यदि दो समूहों का आकार $N_1, N_2$, माध्य $\bar{X}_1, \bar{X}_2$ तथा प्रमाप विचलन $\sigma_1, \sigma_2$ हों, तो संयुक्त प्रमाप विचलन $\sigma_{12}$ होगा:

$$\sigma_{12} = \sqrt{\frac{N_1(\sigma_1^2 + d_1^2) + N_2(\sigma_2^2 + d_2^2)}{N_1 + N_2}}$$

जहां संयुक्त माध्य $\bar{X}_{12} = \frac{N_1\bar{X}_1 + N_2\bar{X}_2}{N_1 + N_2}$, तथा $d_1 = \bar{X}_1 - \bar{X}_{12}, d_2 = \bar{X}_2 - \bar{X}_{12}$।

२. प्रसामान्य बंटन में अपकिरण मापों के आनुभविक संबंध

एक पूर्णतः सममित प्रसामान्य बंटन में तीनों प्रमुख अपकिरण मापों में निश्चित संबंध पाया जाता है:

$$QD = \frac{2}{3} \sigma = ०.६७४५ \sigma \qquad \text{तथा} \qquad MD = \frac{4}{5} \sigma = ०.७९७९ \sigma$$ $$६ \cdot QD \approx ५ \cdot MD \approx ४ \cdot \sigma$$ $$\text{अनुपात: } QD : MD : \sigma = १० : १२ : १५$$

प्रसामान्य वक्र के क्षेत्रफल का प्रसार:

  • $\bar{X} \pm १\sigma$ के मध्य कुल पदों का लगभग ६८.२७% भाग आता है।
  • $\bar{X} \pm २\sigma$ के मध्य कुल पदों का लगभग ९५.४५% भाग आता है।
  • $\bar{X} \pm ३\sigma$ के मध्य कुल पदों का लगभग ९९.७३% भाग आता है (लगभग संपूर्ण समंक)।
  • $\bar{X} \pm ১ QD$ के मध्य कुल पदों का ठीक ५०.००% भाग आता है।

विचरण गुणांक (CV), लोरेंज वक्र एवं आय विषमता का मापन

१. कार्ल पियर्सन का विचरण गुणांक (Coefficient of Variation - CV)

भिन्न-भिन्न इकाइयों वाले अथवा अत्यधिक असमान माध्यों वाले दो या दो से अधिक समंक समूहों की समरूपता, स्थिरता अथवा विचरणशीलता की तुलना हेतु कार्ल पियर्सन ने प्रमाप विचलन के प्रतिशत सापेक्ष माप विचरण गुणांक (CV) का प्रतिपादन किया:

$$CV = \frac{\sigma}{\bar{X}} \times ১০০ \%$$
२. स्थिरता एवं समरूपता तुलना का निर्णय नियम
परीक्षा में प्रश्न हल करने का स्वर्ण नियम:
  • CV अधिक होने पर: समंकों में अधिक विचरणशीलता, कम स्थिरता, कम निरंतरता अथवा कम समरूपता होती है।
  • CV कम होने पर: समंकों में कम विचरण, अधिक स्थिरता, अधिक निरंतरता अथवा अधिक समरूपता पाई जाती है।
  • व्यावहारिक प्रश्न: यदि पूछा जाए: "कौन सा बल्लेबाज अधिक भरोसेमंद/निरंतर है?" अथवा "किस कारखाने में वेतन अधिक सुसंगत है?"—तो दोनों का CV निकालें। जिसका CV कम होगा, वही अधिक निरंतर एवं स्थिर होगा!
३. आरेखीय विधि: लोरेंज वक्र (Lorenz Curve)

सन् 1905 में अमेरिकी अर्थशास्त्री मैक्स ओ. लोरेंज ने आय, धन, लाभ अथवा भूमि के वितरण में व्याप्त आर्थिक विषमता को आरेखीय रूप में मापने हेतु लोरेंज वक्र का आविष्कार किया।

निर्माण विधि:

  1. व्यक्तियों की संख्या (आवृत्ति) तथा कुल आय (चर) दोनों को संचयी प्रतिशत (०% से १००%) में बदला जाता है।
  2. $X$-अक्ष पर व्यक्तियों का संचयी प्रतिशत (०-१००%) तथा $Y$-अक्ष पर आय का संचयी प्रतिशत (०-१००%) अंकित किया जाता है।
  3. $(०, ০)$ से $(১০০, ১০০)$ तक ४५° की तिरछी रेखा खींची जाती है। इसे पूर्ण समानता रेखा (Line of Equal Distribution) कहते हैं। इस रेखा पर निचले २०% लोगों को २०% आय मिलती है।
  4. वास्तविक संचयी प्रतिशत के बिंदुओं को मिलाकर जो वक्र बनता है, वही लोरेंज वक्र कहलाता है।
४. आर्थिक निर्वचन एवं गिनी गुणांक (Gini Coefficient)
  • वास्तविक जीवन में आय वितरण में विषमता होने के कारण लोरेंज वक्र सदैव ४५° समानता रेखा के नीचे झुका हुआ रहता है।
  • दूरी का नियम: लोरेंज वक्र ४५° समानता रेखा से जितना अधिक दूर झुकेगा, समाज में आर्थिक विषमता उतनी ही अधिक होगी। वक्र जितना पास होगा, विषमता उतनी ही कम होगी।
  • गिनी गुणांक (Gini Coefficient): समानता रेखा एवं लोरेंज वक्र के बीच के क्षेत्रफल तथा समानता रेखा के नीचे के कुल क्षेत्रफल के अनुपात को गिनी गुणांक कहते हैं। इसका मान ० (पूर्ण समानता) से १ (पूर्ण विषमता) के मध्य रहता है।

प्रमुख आर्थिक सूत्र, व्यावसायिक सिद्धांत एवं मानक

विस्तार एवं चतुर्थक विचलन के सूत्र
माध्य विचलन एवं प्रमाप विचलन के सूत्र
विचरण गुणांक एवं संयुक्त प्रमाप विचलन

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग (क): व्यक्तिगत श्रेणी
पदों को आरोही क्रम में रखने पर: १১০, ১২০, १५০, १७০, ১৮০, ২০০, ২৫০।
महत्तम पद ($L$) = ₹২৫০, न्यूनतम पद ($S$) = ₹१১০।
$$\text{निरपेक्ष विस्तार} = L - S = ২৫০ - १১০ = ₹১৪০$$ $$\text{विस्तार गुणांक} = \frac{L - S}{L + S} = \frac{২৫০ - १১০}{২৫০ + १১০} = \frac{১৪০}{৩৬০} = ०.৩৮৮৯ \approx ०.३९$$
भाग (ख): सतत श्रेणी
उच्चतम वर्ग की उच्च सीमा ($L$) = ৬০।
न्यूनतम वर्ग की निम्न सीमा ($S$) = ১০।
$$\text{निरपेक्ष विस्तार} = L - S = ৬০ - ১০ = ৫০ \text{ अंक}$$ $$\text{विस्तार गुणांक} = \frac{L - S}{L + S} = \frac{৬০ - ১০}{৬০ + ১০} = \frac{৫০}{৭০} = ०.৭১৪৩ \approx ०.৭১$$
उदाहरण 2
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण १: संचयी बारंबारता सारणी
मजदूरी (₹) बारंबारता ($f$) संचयी बारंबारता ($c.f.$)
৩০-৪০৬৬
৪০-৫০১০১৬
৫০-৬০১৮৩৪
৬০-৭০১০৪৪
৭০-৮০৬৫০
योग $N = ৫০$ -
चरण २: प्रथम चतुर्थक ($Q_1$) ज्ञात करना
$$\frac{N}{4} = \frac{৫০}{४} = १२.५ \text{ वां पद}$$ ১২.৫ संचयी आवृत्ति ১৬ के अंतर्गत आता है, अतः $Q_1$ वर्ग ৪০-৫০ है।
$L_1 = ৪০, c.f. = ৬, f_1 = ১০, i = ১০$। $$Q_1 = L_1 + \frac{\frac{N}{4} - c.f.}{f_1} \times i = ৪০ + \frac{১২.৫ - ৬}{১০} \times ১০ = ৪০ + ৬.৫ = ₹৪৬.৫০$$
चरण ३: तृतीय चतुर्थक ($Q_3$) ज्ञात करना
$$\frac{3N}{4} = \frac{৩(৫০)}{४} = ৩৭.৫ \text{ वां पद}$$ ৩৭.৫ संचयी आवृत्ति ৪৪ में आता है, अतः $Q_3$ वर्ग ৬০-৭০ है।
$L_3 = ৬০, c.f. = ৩৪, f_3 = ১০, i = ১০$। $$Q_3 = L_3 + \frac{\frac{3N}{4} - c.f.}{f_3} \times i = ৬০ + \frac{৩৭.৫ - ৩৪}{১০} \times ১০ = ৬০ + ৩.৫ = ₹৬৩.৫০$$
चरण ४: चतुर्थक विचलन एवं गुणांक
$$\text{चतुर्थक विचलन (QD)} = \frac{Q_3 - Q_1}{2} = \frac{৬৩.৫০ - ৪৬.৫০}{२} = \frac{১৭.০০}{२} = ₹৮.৫০$$ $$\text{चतुर्थक विचलन गुणांक} = \frac{Q_3 - Q_1}{Q_3 + Q_1} = \frac{৬৩.৫০ - ৪৬.৫০}{৬৩.৫০ + ৪৬.৫০} = \frac{১৭}{১১০} = ०.১৫৪५ \approx ०.১৫५$$
उदाहरण 3
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण १: माध्य एवं माध्यिका की गणना
कुल बारंबारता $N = ১ + ৪ + ৬ + ৪ + ১ = ১৬$।
$$\sum fX = (२)(১) + (४)(४) + (৬)(৬) + (৮)(४) + (১০)(১) = २ + ১৬ + ৩৬ + ৩২ + ১০ = ৯৬$$ $$ar{X} = rac{\sum fX}{N} = rac{৯৬}{১৬} = ৬$$ माध्यिका हेतु: $ rac{N}{2} = rac{১৬}{२} = ৮$ वां पद। संचयी आवृत्ति ১, ৫, ১১, १५, ১৬। ৮वां पद ১১ में आता है जिसका मान $X = ৬$ है। अतः $ ext{माध्यिका } M = ৬$।
सममित बंटन होने के कारण $ar{X} = M = ৬$।

चरण २: विचलन सारणी
$X$ $f$ $|X - ৬|$ $f|X - ৬|$
২১४४
४४२৮
৬৬००
৮४२৮
১০১४४
योग $N = ১৬$ - $\sum f|X - ৬| = ২৪$
चरण ३: माध्य विचलन एवं गुणांक $$MD_{ar{X}} = MD_M = rac{\sum f|X - ৬|}{N} = rac{২৪}{১৬} = ১.৫$$ $$ ext{माध्य विचलन गुणांक} = rac{MD}{ar{X}} = rac{১.৫}{৬} = ०.२५$$
उदाहरण 4
विस्तृत समाधान / उत्तर:
विधि १: प्रत्यक्ष विधि (वास्तविक माध्य से)
पदों की संख्या $N = ৫$।
$$\sum X = ৮ + ১২ + ১৩ + १५ + ২২ = ৭০ \implies ar{X} = rac{৭০}{৫} = ১৪$$ वास्तविक माध्य से विचलन $x = X - ১৪$:
  • $X = ৮: x = -৬ \implies x^2 = ৩৬$
  • $X = ১২: x = -२ \implies x^2 = ৪$
  • $X = ১৩: x = -১ \implies x^2 = ১$
  • $X = १५: x = +১ \implies x^2 = ১$
  • $X = ২২: x = +৮ \implies x^2 = ৬৪$
$$\sum x^2 = ৩৬ + ৪ + ১ + ১ + ৬৪ = ১০৬$$ $$\sigma = \sqrt{ rac{\sum x^2}{N}} = \sqrt{ rac{১০৬}{৫}} = \sqrt{২১.२} pprox ৪.৬০৪$$ $$ ext{प्रसरण } (\sigma^2) = ২১.২০$$
विधि २: कल्पित माध्य विधि ($A = ১৩$ मानकर)
विचलन $d = X - ১৩$:
  • $X = ৮: d = -৫ \implies d^2 = ২৫$
  • $X = ১২: d = -১ \implies d^2 = ১$
  • $X = ১৩: d = ० \implies d^2 = ०$
  • $X = १५: d = +२ \implies d^2 = ৪$
  • $X = ২২: d = +৯ \implies d^2 = ৮১$
$$\sum d = -৫ - ১ + ० + २ + ৯ = +৫, \qquad \sum d^2 = ২৫ + ১ + ० + ৪ + ৮১ = ১১১$$ सूत्र में मान रखने पर: $$\sigma = \sqrt{ rac{\sum d^2}{N} - \left( rac{\sum d}{N} ight)^2} = \sqrt{ rac{১১১}{৫} - \left( rac{৫}{৫} ight)^2} = \sqrt{२२.२ - ১} = \sqrt{২১.२} pprox ৪.৬০৪$$ $$ ext{प्रसरण } (\sigma^2) = ২১.২০$$ दोनों विधियों से परिणाम समान आता है।
उदाहरण 5
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण १: मध्य बिंदु एवं पद-विचलन सारणी
माना कल्पित माध्य $A = २५$, वर्ग विस्तार $c = ১০$।
पद-विचलन $d' = rac{m - ২৫}{১০}$।

चरण २: गणना सारणी
वर्ग मध्य बिंदु ($m$) $f$ $d'$ $f d'$ $d'^2$ $f d'^2$
०-१०৫२-२-৪४৮
১০-২০১৫৫-১-৫১৫
২০-৩০২৫৮००००
৩০-৪০৩৫৩+১+৩১৩
৪০-৫০৪৫२+२+৪४৮
योग - $N = ২০$ - $\sum f d' = -२$ - $\sum f d'^2 = २४$
चरण ३: समांतर माध्य ($ar{X}$) की गणना $$ar{X} = A + \left( rac{\sum f d'}{N} ight) imes c = २५ + \left( rac{-२}{२०} ight) imes ১০ = ২৫ - ১.० = ₹२४.००$$
चरण ४: प्रमाप विचलन ($\sigma$) $$\sigma = c imes \sqrt{ rac{\sum f d'^2}{N} - \left( rac{\sum f d'}{N} ight)^2} = ১০ imes \sqrt{ rac{২৪}{२०} - \left( rac{-२}{२०} ight)^2}$$ $$\sigma = ১০ imes \sqrt{১.२० - (-०.১)^२} = ১০ imes \sqrt{১.२० - ०.०১} = ১০ imes \sqrt{১.১৯} = ১০ imes ১.०९०८৭ = ₹१०.९१$$
चरण ५: विचरण गुणांक ($CV$) $$CV = rac{\sigma}{ar{X}} imes १०० = rac{১০.९१}{२४.००} imes १०० = ৪৫.৪৬\%$$
उदाहरण 6
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग (क): विचरण गुणांक द्वारा स्थिरता की तुलना
संयंत्र अ हेतु: $$CV_A = rac{\sigma_1}{ar{X}_1} imes १०० = rac{९}{১৮৬} imes १०० = ৪.৮৩৯\%$$ संयंत्र ब हेतु: $$CV_B = rac{\sigma_2}{ar{X}_2} imes १०० = rac{১০}{১৭৫} imes १०० = ৫.৭১৪\%$$ निर्णय: चूंकि $CV_A < CV_B$ (४.८४% < ५.৭১%), अतः संयंत्र अ में श्रमिकों की मजदूरी में अधिक स्थिरता एवं एकरूपता है।

भाग (ख): संयुक्त माध्य एवं संयुक्त प्रमाप विचलन
१. संयुक्त माध्य ($ar{X}_{12}$): $$ar{X}_{12} = rac{N_1 ar{X}_1 + N_2 ar{X}_2}{N_1 + N_2} = rac{৫০০(১৮৬) + ৬০০(১৭৫)}{৫০০ + ৬০০} = rac{৯৩০০০ + ১০৫০০০}{১১০০} = rac{১৯৮০০০}{১১০০} = ₹১৮০.००$$
२. संयुक्त माध्य से विचलनों के वर्ग: $$d_1 = ar{X}_1 - ar{X}_{12} = ১৮৬ - ১৮০ = +৬ \implies d_1^2 = ৩৬$$ $$d_2 = ar{X}_2 - ar{X}_{12} = ১৭৫ - ১৮০ = -৫ \implies d_2^2 = ২৫$$
३. संयुक्त प्रमाप विचलन ($\sigma_{12}$): $$\sigma_{12} = \sqrt{ rac{N_1(\sigma_1^2 + d_1^2) + N_2(\sigma_2^2 + d_2^2)}{N_1 + N_2}}$$ $$\sigma_{12} = \sqrt{ rac{৫০০(৯^২ + ৩৬) + ৬০০(১০^২ + ২৫)}{১১০০}} = \sqrt{ rac{৫০০(৮১ + ৩৬) + ৬০০(১০০ + ২৫)}{১১০০}}$$ $$\sigma_{12} = \sqrt{ rac{৫০০(১১৭) + ৬০০(১২৫)}{১১০০}} = \sqrt{ rac{৫৮৫০০ + ৭৫০০০}{১১০০}} = \sqrt{ rac{১৩৩৫০০}{১১০০}} = \sqrt{১২১.৩৬৩৬} pprox ₹১১.०२$$ संयुक्त माध्य ₹১৮০.०० तथा संयुक्त प्रमाप विचलन ₹১১.०२ है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लघु विधि में (Σfd / N)² तथा Σfd² / N को एक जैसा मानकर गलत घटाव करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

Σfd² / N प्रत्येक विचलन के वर्ग का औसत है, जबकि (Σfd / N)² औसत विचलन का वर्ग है। प्रथम पद सदैव दूसरे पद से बड़ा होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विचरण गुणांक (CV) अधिक होने पर उसे अधिक स्थिर मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

CV अधिक होने का अर्थ अधिक विचरणशीलता और कम स्थिरता है। जिस इकाई का CV कम होता है, वही अधिक स्थिर और सुसंगत होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पदों में संख्या जोड़ने पर प्रमाप विचलन के भी बढ़ने का भ्रम पालना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रमाप विचलन मूल बिंदु के परिवर्तन से स्वतंत्र है: σ(X ± a) = σ(X)। संख्या जोड़ने या घटाने से प्रमाप विचलन में कोई परिवर्तन नहीं होता।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

σ WBCHSE कक्षा 11 • परिमाणात्मक अर्थशास्त्र: अपकिरण के माप का संपूर्ण विश्लेषण विस्तार, चतुर्थक विचलन (QD), माध्य विचलन (MD), प्रमाप विचलन (σ), विचरण गुणांक (CV) व लोरेंज वक्र १. अपकिरण की संकल्पना: समान माध्य किंतु भिन्न फैलाव माध्य x̄ = ५० श्रेणी अ: कम फैलाव (उच्च एकरूपता) श्रेणी ब: अधिक फैलाव (अधिक विषमता) • केंद्रीय प्रवृत्ति केवल केंद्र दर्शाती है; पदों के बिखराव या फैलाव की माप अपकिरण से होती है। २. प्रमाप विचलन (σ) एवं प्रसामान्य बंटन Karl Pearson's Root-Mean-Square Deviation (σ): σ = √[Σ(X - x̄)² / N] = √[Σd²/N - (Σd/N)²] अपकिरण के मापों में आनुभविक संबंध: ६ QD ≈ ५ MD ≈ ४ σ (चतुर्थक : माध्य : प्रमाप विचलन = १० : १२ : १५) Empirical Rule in Symmetrical Normal Distributions: प्रसामान्य बंटन का प्रसार: x̄ ± १σ = ६८.२७% | x̄ ± २σ = ९५.४५% | x̄ ± ३σ = ९९.७३% Independent of origin: σ(X ± a) = σ(X) | Scale dependent: σ(c·X) = |c|·σ(X) ३. विचरण गुणांक (CV) एवं लोरेंज वक्र (Lorenz Curve) विचरण गुणांक (Coefficient of Variation): CV = (σ / x̄) × १०० % • CV अधिक ➔ अधिक परिवर्तनशील, कम स्थिर, कम एकरूपता • CV कम ➔ कम विचरण, अधिक स्थिरता, अधिक समरूपता लोरेंज वक्र (आय विषमता का आरेखीय माप): -- ४५° पूर्ण समानता रेखा (Line of Equality) __ लोरेंज वक्र (वास्तविक आय बंटन) वक्र जितना दूर होगा, विषमता उतनी ही अधिक होगी TargetExams Academic Series • WBCHSE Quantitative Statistics • Absolute & Relative Dispersion Analysis

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
१. अपकिरण के माप किसी समंक श्रेणी के केंद्रीय मूल्य के चारों ओर पदों के बिखराव या विचरण को मापते हैं; इन्हें 'द्वितीय श्रेणी के औसत' कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 2
२. केंद्रीय प्रवृत्ति केवल मध्य बिंदु बताती है, बिखराव नहीं। समान माध्य वाली दो श्रेणियों का अपकिरण और स्थिरता सर्वथा भिन्न हो सकती है।
मुख्य बिंदु 3
३. निरपेक्ष माप मूल इकाइयों में व्यक्त होते हैं (रुपया, किग्रा), जबकि सापेक्ष माप (अपकिरण गुणांक) इकाई-रहित होने के कारण तुलनात्मक अध्ययन में प्रयुक्त होते हैं।
मुख्य बिंदु 4
४. विस्तार अधिकतम एवं न्यूनतम पदों का अंतर (L - S) है। यह अत्यंत सरल है किंतु चरम मानों से अत्यधिक प्रभावित होता है और खुले सिरे वाले वर्गों में असमर्थ है।
मुख्य बिंदु 5
५. चतुर्थक विचलन (QD = [Q3 - Q1] / 2) मध्यवर्ती ५०% पदों का फैलाव है। यह चरम मानों से मुक्त रहता है और खुले सिरे वाले वर्गों में भी उपयोगी है।
मुख्य बिंदु 6
६. माध्य विचलन माध्य से विचलनों के निरपेक्ष मानों का औसत है। माध्यिका से विचलन लेने पर निरपेक्ष विचलनों का योग न्यूनतम होता है: Σ|X - M| न्यूनतम है।
मुख्य बिंदु 7
७. कार्ल पियर्सन का प्रमाप विचलन (σ) समांतर माध्य से विचलनों के वर्गों के औसत का धनात्मक वर्गमूल है। यह अपकिरण का सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक माप है।
मुख्य बिंदु 8
८. प्रमाप विचलन मूल बिंदु के परिवर्तन से स्वतंत्र रहता है [σ(X ± a) = σ(X)], किंतु पैमाने के परिवर्तन पर निर्भर करता है [σ(c · X) = |c| · σ(X)]।
मुख्य बिंदु 9
९. कार्ल पियर्सन का विचरण गुणांक (CV = σ / X̄ × 100) समरूपता और स्थिरता मापने हेतु प्रयुक्त होता है; जिस समूह का CV कम होता है, वह अधिक स्थिर होता है।
मुख्य बिंदु 10
१०. लोरेंज वक्र आर्थिक विषमता दर्शाने वाला संचयी आरेख है; ४५° पूर्ण समानता रेखा से लोरेंज वक्र जितना अधिक दूर झुकेगा, विषमता उतनी ही अधिक होगी।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

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