(क) विद्युत आवेश (Electric Charge - $Q$)
- पदार्थ का वह मूल गुण जिसके कारण वह विद्युत एवं चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है तथा अनुभव करता है।
- आवेश दो प्रकार के होते हैं: धनावेश ($+$) तथा ऋणावेश ($-$)। सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा विजातीय आवेश आकर्षित करते हैं।
- SI मात्रक: कूलॉम (Coulomb, C)।
- आवेश का क्वांटमीकरण: $Q = ne$, जहाँ $n$ = इलेक्ट्रॉनों की संख्या, $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$।
- 1 कूलॉम आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या (बोर्ड 1 अंक): $$n = \frac{Q}{e} = \frac{1}{1.6 \times 10^{-19}} = 6.25 \times 10^{18} \approx 6 \times 10^{18}\text{ इलेक्ट्रॉन}$$
(ख) विद्युत धारा (Electric Current - $I$)
किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित होने वाले कुल नेट आवेश की दर को विद्युत धारा कहते हैं:
$$I = \frac{Q}{t}$$- SI मात्रक: एम्पीयर (Ampere, A) (फ्रांसीसी वैज्ञानिक आंद्रे-मेरी एम्पीयर के सम्मान में)।
- 1 एम्पीयर की परिभाषा (अति महत्वपूर्ण): यदि किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस चालक में प्रवाहित धारा 1 एम्पीयर कहलाती है ($1\text{ A} = 1\text{ C/s}$)।
- छोटे मात्रक: मिलीएम्पीयर ($1\text{ mA} = 10^{-3}\text{ A}$), माइक्रोएम्पीयर ($1\text{ }\mu\text{A} = 10^{-6}\text{ A}$)।
- धारा की दिशा: परिपथ में विद्युत धारा की दिशा धनात्मक आवेश के प्रवाह की दिशा (यानी बैटरी के धन सिरे से ऋण सिरे की ओर) मानी जाती है, जो कि इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के ठीक विपरीत होती है।
- मापन यंत्र: धारा को मापने के लिए एमीटर (Ammeter) का उपयोग किया जाता है, जिसे परिपथ में सदैव श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है (आदर्श एमीटर का प्रतिरोध शून्य होना चाहिए)।
(ग) विद्युत विभव एवं विभवांतर (Electric Potential Difference - $V$)
एकांक धन आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का विद्युत विभव कहते हैं।
किसी धारावाही विद्युत परिपथ के दो बिंदुओं के बीच एकांक धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन दोनों बिंदुओं के बीच का विभवांतर (Potential Difference) कहते हैं:
$$V = \frac{W}{Q}$$- SI मात्रक: वोल्ट (Volt, V) (इतालवी वैज्ञानिक अलेसांद्रो वोल्टा के सम्मान में)।
- 1 वोल्ट की परिभाषा: यदि किसी धारावाही चालक के दो बिंदुओं के बीच 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है, तो उन दोनों बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट कहलाता है ($1\text{ V} = 1\text{ J/C}$)।
- मापन यंत्र: विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर (Voltmeter) का उपयोग किया जाता है, जिसे सदैव उन दो बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है (आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत होना चाहिए ताकि वह परिपथ से न्यूनतम धारा ले)।