(क) आयनिक बंध एवं आयनिक यौगिकों का निर्माण
जब एक धातु अपने संयोजी इलेक्ट्रॉनों को किसी अधातु को स्थानांतरित करती है, तो धातु धनायन ($M^+$) तथा अधातु ऋणायन ($X^-$) बनाती है। इन विपरीत आवेशित आयनों के मध्य लगने वाले प्रबल स्थिर-वैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic Force of Attraction) से बने यौगिकों को आयनिक यौगिक (विद्युत-संयोजी यौगिक) कहते हैं।
सोडियम क्लोराइड ($NaCl$) का निर्माण:
• सोडियम का विन्यास: $Na (2, 8, 1) \to Na^+ (2, 8) + e^-$ (एक इलेक्ट्रॉन त्यागा)
• क्लोरीन का विन्यास: $Cl (2, 8, 7) + e^- \to Cl^- (2, 8, 8)$ (एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण किया)
• परस्पर संयोजन: $Na^+ + Cl^- \to NaCl$
मैग्नीशियम क्लोराइड ($MgCl_2$) का निर्माण:
• मैग्नीशियम दो इलेक्ट्रॉन त्यागता है: $Mg (2, 8, 2) \to Mg^{2+} (2, 8) + 2e^-$
• क्लोरीन के दो परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं: $2Cl + 2e^- \to 2Cl^-$
• सूत्र: $[Mg^{2+}][Cl^-]_2 \to MgCl_2$
(ख) आयनिक यौगिकों के चार प्रमुख गुणधर्म (बोर्ड परीक्षा का सर्वप्रमुख 5 अंक प्रश्न)
- भौतिक प्रकृति: धनायनों और ऋणायनों के बीच मजबूत स्थिर-वैद्युत आकर्षण बल होने के कारण ये ठोस एवं कठोर होते हैं। ये सामान्यतः भंगुर (Brittle) होते हैं तथा दबाव डालने पर टुकड़ों में टूट जाते हैं।
- उच्च गलनांक एवं क्वथनांक (High Melting & Boiling Points): आयनिक जालक में विपरीत आयनों के मजबूत अंतरा-आयनिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। (उदा. $NaCl$ का गलनांक 1074 K / 801°C है)।
- घुलनशीलता (Solubility): आयनिक यौगिक सामान्यतः जल में विलेय (घुलनशील) होते हैं, परंतु केरोसिन, पेट्रोल, बेंजीन जैसे अध्रुवीय कार्बनिक विलायकों में अविलेय होते हैं।
- विद्युत चालकता (Electrical Conductivity):
• ठोस अवस्था में: आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते, क्योंकि ठोस अवस्था में आयन अपने क्रिस्टल जालक में बंधे होने के कारण गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते।
• जलीय विलयन अथवा गलित अवस्था में: ये विद्युत का उत्तम चालन करते हैं, क्योंकि जल में अथवा गलने पर आयन मुक्त हो जाते हैं और विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विपरीत इलेक्ट्रोडों की ओर गमन करते हैं।