जीव अपने सदृश ही संतति उत्पन्न करते हैं क्योंकि उनकी शारीरिक अभिकल्पना (Body Design), अंग तंत्र और कार्यप्रणाली समान होती है। इस समानता का मूल आधार कोशिका के केंद्रक में उपस्थित DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) के अणु हैं।
(क) DNA प्रतिकृति का निर्माण (DNA Replication)
- कोशिका के केंद्रक में उपस्थित गुणसूत्रों के DNA में प्रोटीन निर्माण की संपूर्ण आनुवंशिक सूचनाएं कोडित होती हैं।
- जनन के समय कोशिकाएं रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा DNA की दो समरूप प्रतियाँ (प्रतिकृतियाँ) तैयार करती हैं।
- केवल DNA की प्रतिकृति बनाना ही पर्याप्त नहीं है; नई संतति कोशिका के अस्तित्व के लिए आवश्यक कोशिकीय संरचना (Cellular Apparatus—माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, कोशिकाद्रव्य) का भी निर्माण होता है।
- अंततः एक कोशिका विभाजित होकर दो नई संतति कोशिकाओं में विभक्त हो जाती है।
(ख) विभिन्नता (Variation) का जैविक महत्व
कोई भी जैव-रासायनिक प्रणाली 100% सटीक नहीं होती। अतः DNA प्रतिकृति बनते समय कुछ सूक्ष्म त्रुटियाँ (Inaccuracies) रह जाती हैं। इन्हीं सूक्ष्म परिवर्तनों के कारण संतति अपने जनकों के एकदम समान होते हुए भी उनसे थोड़ी भिन्न दिखाई देती है। इसे विभिन्नता (Variation) कहते हैं।
| पहलू | व्यक्तिगत स्तर पर प्रभाव | समष्टि (Population) के स्तर पर महत्व |
|---|---|---|
| पर्यावरणीय संकट से सुरक्षा | प्रायः कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं, कभी-कभी हानिकारक भी हो सकता है। | यदि वैश्विक तापन या प्रदूषण से जल का तापमान अत्यधिक बढ़ जाए, तो शीतोष्ण जीवाणुओं की समष्टि नष्ट हो जाएगी; किंतु ऊष्मा-प्रतिरोधी विभिन्नता वाले कुछ जीवाणु जीवित बचकर वंश आगे बढ़ाएंगे। |
| जैव विकास (Evolution) | अकेले व्यक्ति का विकास नहीं होता। | पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचित होने वाली उपयोगी विभिन्नताएं ही लाखों वर्षों में नई प्रजातियों की उत्पत्ति (Speciation) का मार्ग प्रशस्त करती हैं। |
| निकेत (Niche) में स्थायित्व | जीव अपने पारितंत्र में जीवन यापन करता है। | विभिन्नताएं प्रजाति को बदलते हुए निकेत में अनुकूलित रहने की सामर्थ्य प्रदान करती हैं। |