(क) स्वपोषी पोषण एवं प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके अकार्बनिक पदार्थों ($CO_2$ तथा $H_2O$) से कार्बनिक भोज्य पदार्थ (ग्लूकोज) का संश्लेषण करते हैं। इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं:
$$6CO_2 + 12H_2O \xrightarrow[\text{सूर्य का प्रकाश}]{\text{क्लोरोफिल}} C_6H_{12}O_6 \text{ (ग्लूकोज)} + 6O_2↑ + 6H_2O$$प्रकाश संश्लेषण के तीन प्रमुख चरण:
- प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण: पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट में उपस्थित क्लोरोफिल द्वारा सूर्य के प्रकाश का अवशोषण।
- ऊर्जा रूपांतरण एवं जल का प्रकाशिक अपघटन: प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरण तथा जल ($H_2O$) के अणुओं का हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन ($O_2$) में विखंडन।
- कार्बन डाइऑक्साइड का अपचयन: हाइड्रोजन द्वारा $CO_2$ का अपचयन होकर कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण।
(ख) रंध्र (Stomata) एवं द्वार कोशिकाएं (Guard Cells)
पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्रों को रंध्र कहते हैं, जिनके माध्यम से गैसों ($CO_2$ व $O_2$) का विनिमय तथा वाष्पोत्सर्जन होता है। रंध्रों का खुलना और बंद होना द्वार कोशिकाओं (Guard Cells) की स्फीति (Turgidity) पर निर्भर करता है:
- जब द्वार कोशिकाओं में जल प्रवेश करता है, तो वे फूल जाती हैं और रंध्र का छिद्र खुल जाता है।
- जब द्वार कोशिकाओं से जल बाहर निकल जाता है, तो वे सिकुड़ जाती हैं और रंध्र का छिद्र बंद हो जाता है।
(ग) विषमपोषी पोषण: अमीबा में पोषण के पाँच चरण
अमीबा एककोशिकीय प्राणीसमभोजी जीव है। इसमें पोषण पाँच चरणों में पूर्ण होता है:
- अंतर्ग्रहण (Ingestion): अमीबा भोजन के कण के चारों ओर अंगुली जैसे अस्थायी प्रवर्ध—कूटपाद (Pseudopodia)—बनाकर उसे घेर लेता है और खाद्य रिक्तिका (Food Vacuole) बनाता है।
- पाचन (Digestion): खाद्य रिक्तिका में पाचक एंजाइम भोजन को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं।
- अवशोषण (Absorption): पचा हुआ भोजन सीधे कोशिकाद्रव्य में विसरित हो जाता है।
- स्वांगीकरण (Assimilation): भोजन का उपयोग वृद्धि और ऊर्जा प्राप्ति में होता है।
- बहिःक्षेपण (Egestion): अपचा भोजन कोशिका की सतह पर जाकर बाहर फेंक दिया जाता है।