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CBSE • कक्षा X • Science • अध्याय 13
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

हमारा पर्यावरण (Our Environment)

पर्यावरण (Environment) उन सभी भौतिक, रासायनिक और जैविक परिस्थितियों तथा कारकों का संपूर्ण योग है जो किसी जीव को चारों ओर से घेरे रहते हैं और उसके जीवन, वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करते हैं। किसी विशिष्ट क्षेत्र में उपस्थित सभी जीवित जीव (पादप, जंतु, सूक्ष्मजीव) तथा उनके साथ परस्पर क्रिया करने वाले निर्जीव घटक (हवा, जल, मृदा, प्रकाश, तापमान) मिलकर एक स्वपोषी और आत्मनिर्भर जैविक इकाई का निर्माण करते हैं जिसे पारितंत्र या पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) कहते हैं। पारितंत्र प्राकृतिक (वन, तालाब, झील, समुद्र) अथवा मानव-निर्मित/कृत्रिम (खेत, बगीचा, एक्वेरियम) हो सकते हैं। पारितंत्र के जैविक घटकों को उनके पोषण के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: (1) उत्पादक (Producers)—हरे पौधे एवं नील-हरित शैवाल जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं, (2) उपभोक्ता (Consumers)—जो अपने पोषण के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं (शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी, परजीवी), तथा (3) अपघटक (Decomposers)—जीवाणु एवं कवक जो मृत पादपों और जंतुओं के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़कर मिट्टी में पुनः मिला देते हैं। विभिन्न जीवों की वह क्रमबद्ध श्रृंखला जिसमें एक जीव दूसरे जीव को भोजन के रूप में खाता है, आहार श्रृंखला (Food Chain) कहलाती है। रेमंड लिंडमैन के 10% ऊर्जा नियम (10% Law of Energy Transfer) के अनुसार, एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर तक केवल 10% ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है, जबकि 90% ऊर्जा उपापचय और ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में लुप्त हो जाती है। यह अध्याय दो अत्यंत गंभीर पर्यावरणीय संकटों का विश्लेषण करता है: (1) जैव आवर्धन (Biological Magnification)—कीटनाशकों (जैसे DDT) और अजैव-निम्नीकरणीय रसायनों का आहार श्रृंखला के माध्यम से उत्तरोत्तर पोषण स्तरों पर सांद्रित होते जाना, जिसकी अधिकतम मात्रा शीर्ष उपभोक्ता (मनुष्य) में संचित हो जाती है, तथा (2) ओजोन परत का क्षरण (Depletion of Ozone Layer)—समताप मंडल में स्थित ओजोन ($O_3$) की रक्षात्मक छतरी जो सूर्य की घातक पराबैंगनी (UV) किरणों से त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और आनुवंशिक विकृतियों से हमारी रक्षा करती है, उसका क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) द्वारा नष्ट होना (1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल)। साथ ही, कचरा प्रबंधन हेतु जैव-निम्नीकरणीय बनाम अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्टों का वैज्ञानिक निस्तारण विद्यार्थियों के नागरिक दायित्व का अभिन्न अंग है।

🦅 क्या आपने कभी सोचा है: खेतों में छिड़का गया कीटनाशक हज़ारों मील दूर उड़ने वाले बाज और आपके पीने के दूध में कैसे पहुँच गया?

जरा सोचिए: किसी किसान ने अपनी गोभी की फसल को कीड़ों से बचाने के लिए उस पर केवल एक चुटकी रासायनिक कीटनाशक (जैसे DDT) छिड़का। बारिश हुई, वह दवा धुल कर पास के तालाब में चली गई। तालाब में शैवालों ने उस दवा के नन्हे कणों को अवशोषित किया, शैवालों को छोटी मछलियों ने खाया, छोटी मछलियों को बड़ी मछली ने खाया, और उस बड़ी मछली को एक बाज या बगुले ने खा लिया।

अब विज्ञान का सबसे डरावना सच देखिए: तालाब के पानी में जो रसायन मात्र 0.000003 भाग प्रति मिलियन (ppm) था, वह बाज के शरीर तक पहुँचते-पहुँचते 25 ppm हो गया—यानी उसकी सांद्रता लगभग एक करोड़ गुना बढ़ गई! इस भयानक जहर ने बाजों के अंडों के छिलकों को इतना कमजोर कर दिया कि अंडे माता के बैठने से पहले ही फूट गए और पूरी दुनिया में बाजों की प्रजाति विलुप्ति की कगार पर पहुँच गई!

और हमारे सिर के ऊपर 25 किलोमीटर की ऊँचाई पर गैस की एक अदृश्य, नीली सी छतरी तनी है—ओजोन परत! यदि वह न हो, तो सूर्य की पराबैंगनी किरणें 10 मिनट में हमारी त्वचा को जलाकर कैंसर कर देंगी। आइए, प्रकृति के इस अद्भुत, संवेदनशील और आपस में जुड़े हुए ताने-बाने को समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों अनिवार्य है?

  1. बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत प्रश्न: CBSE Class 10वीं विज्ञान परीक्षा में "10% ऊर्जा प्रवाह का नियम", "जैव आवर्धन की परिभाषा एवं उदाहरण", "ओजोन परत का निर्माण एवं क्षरण के कारण (CFC)", "अपघटकों की पारितंत्र में भूमिका", तथा "कचरा प्रबंधन के उपाय" पर 4 से 6 अंक के प्रश्न प्रतिवर्ष अवश्य आते हैं।
  2. पर्यावरणीय चेतना एवं प्रतियोगी परीक्षाएं: UPSC, SSC, NEET और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Ecology & Environment) खंड का यह सबसे बुनियादी अध्याय है।
  3. पृथ्वी के संरक्षण में व्यक्तिगत योगदान: प्लास्टिक कचरे का न्यूनीकरण, अपशिष्ट का पृथक्करण (गीला व सूखा कचरा), और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने की व्यावहारिक जीवनशैली।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि (पौधों द्वारा भोजन निर्माण)।
  • सजीवों में पोषण के विभिन्न प्रकार (स्वपोषी, विषमपोषी, मृतजीवी)।
  • वायुमंडल की विभिन्न परतें (क्षोभमंडल, समतापमंडल)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पारितंत्र के जैविक घटकों (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) और अजैविक घटकों की परस्पर निर्भरता स्पष्ट कर सकेंगे।
  • आहार श्रृंखला और आहार जाल का रेखाचित्र बनाकर विभिन्न पोषण स्तरों की पहचान कर सकेंगे।
  • लिंडमैन के 10% ऊर्जा नियम का प्रयोग कर किसी भी आहार श्रृंखला में विभिन्न स्तरों पर उपलब्ध ऊर्जा की सटीक गणना कर सकेंगे।
  • जैव आवर्धन (बायोमैग्निफिकेशन) की क्रियाविधि और मानव स्वास्थ्य पर इसके घातक प्रभावों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • ओजोन परत के निर्माण ($O_2 + O \to O_3$), CFC द्वारा इसके क्षरण और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के महत्व की व्याख्या कर सकेंगे।
  • जैव-निम्नीकरणीय और अजैव-निम्नीकरणीय कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की विधियों का प्रस्ताव कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पारितंत्र: घटक, उत्पादक, उपभोक्त...
2 2. आहार श्रृंखला, आहार जाल एवं 10%...
3 3. जैव आवर्धन की परिघटना (Biologica...
4 4. ओजोन परत एवं इसका क्षरण (Ozone L...
5 5. कचरा प्रबंधन: जैव-निम्नीकरणीय बन...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पारितंत्र: घटक, उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक

किसी क्षेत्र के सभी जीव तथा वातावरण के अजैव कारक संयुक्त रूप से एक पारितंत्र (Ecosystem) का निर्माण करते हैं।

(क) पारितंत्र के दो मुख्य घटक:

  1. अजैविक घटक (Abiotic Components): भौतिक एवं रासायनिक वातावरण—जैसे तापमान, वर्षा, प्रकाश, वायु, जल, मृदा और खनिज लवण।
  2. जैविक घटक (Biotic Components): सभी सजीव प्राणी, जिन्हें पोषण विधि के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा जाता है:
    • उत्पादक (Producers): वे सभी हरे पौधे और नील-हरित शैवाल (सायनोबैक्टीरिया) जो पर्णहरित और सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण द्वारा अकार्बनिक पदार्थों ($CO_2$ और जल) से कार्बनिक भोज्य पदार्थ बनाते हैं। इन्हें स्वपोषी कहते हैं। वे पारितंत्र में सौर ऊर्जा का एकमात्र प्राथमिक द्वार हैं।
    • उपभोक्ता (Consumers): वे जीव जो अपने पोषण के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर होते हैं (विषमपोषी):
      • प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी / Herbivores): सीधे पौधों को खाते हैं (उदा. गाय, हिरण, टिड्डा, खरगोश)।
      • द्वितीयक उपभोक्ता (छोटे मांसाहारी / Carnivores): शाकाहारियों को खाते हैं (उदा. मेंढक, लोमड़ी, पक्षी)।
      • तृतीयक / शीर्ष उपभोक्ता (Top Carnivores): अन्य मांसाहारियों को खाते हैं (उदा. शेर, बाघ, बाज, मनुष्य)।
      • परजीवी (Parasites): अन्य जीवों के शरीर पर या अंदर रहकर पोषण लेते हैं (उदा. अमरबेल, जूँ, फीताकृमि)।
    • अपघटक (Decomposers): जीवाणु (Bacteria) और कवक (Fungi) जैसे सूक्ष्मजीव जो मृत जीवों के शरीरों और उत्सर्जी पदार्थों का अपघटन करते हैं।
पारितंत्र में अपघटकों की 3 अनिवार्य भूमिकाएं (CBSE Board 3 अंक):
1. प्राकृतिक सफाईकर्मी (Natural Scavengers): ये मृत पादपों और जंतुओं के अवशेषों को विघटित कर पर्यावरण को दुर्गंध, गंदगी और महामारी से मुक्त रखते हैं।
2. पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण (Nutrient Recycling): ये जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक तत्वों (नाइट्रोजन, फास्फोरस, कार्बन) में बदलकर पुनः मृदा और वायु में मिला देते हैं, जिससे पौधों को फिर से खनिज प्राप्त हो सकें।
3. मृदा की उर्वरता वृद्धि: अपघटन के फलस्वरूप ह्यूमस का निर्माण होता है जो भूमि की उपजाऊ क्षमता को बनाए रखता है।

2. आहार श्रृंखला, आहार जाल एवं 10% ऊर्जा नियम

(क) आहार श्रृंखला (Food Chain) एवं पोषण स्तर (Trophic Levels)

जीवों की एक ऐसी श्रृंखला जिसमें प्रत्येक जीव अपने से नीचे वाले जीव को भोजन के रूप में खाता है और स्वयं अगले जीव का भोजन बन जाता है, आहार श्रृंखला कहलाती है।

आहार श्रृंखला के प्रत्येक चरण या स्तर को पोषण स्तर (Trophic Level) कहते हैं:

पोषण स्तर जीवों की श्रेणी विशिष्ट उदाहरण
प्रथम पोषण स्तर ($T_1$) उत्पादक (स्वपोषी) घास, पेड़-पौधे, पादप प्लवक (Phytoplankton)
द्वितीय पोषण स्तर ($T_2$) प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) टिड्डा, हिरण, खरगोश, प्राणि प्लवक (Zooplankton)
तृतीय पोषण स्तर ($T_3$) द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी) मेंढक, लोमड़ी, छोटी मछली
चतुर्थ पोषण स्तर ($T_4$) तृतीयक / शीर्ष उपभोक्ता साँप, बाज, शेर, मनुष्य, बड़ी मछली

(ख) लिंडमैन का 10% ऊर्जा नियम (10% Law of Energy Transfer)

सन् 1942 में रेमंड लिंडमैन ने पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह का 10% नियम प्रतिपादित किया:

नियम का कथन (अत्यंत महत्वपूर्ण 3 अंक):
"एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में केवल 10% ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है। शेष 90% ऊर्जा जीव द्वारा जैविक क्रियाओं (श्वसन, पाचन, वृद्धि, गति) और ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में लुप्त हो जाती है।"
  • सौर ऊर्जा का अवशोषण: हरे पौधे अपने ऊपर पड़ने वाले कुल सौर प्रकाश का केवल लगभग 1% भाग ही खाद्य ऊर्जा में रूपांतरित कर पाते हैं।
  • आहार श्रृंखला 3 से 4 चरणों की ही क्यों होती है? (बोर्ड 2 अंक):
    चूँकि प्रत्येक स्तर पर 90% ऊर्जा नष्ट हो जाती है, अतः 3-4 पोषण स्तरों के बाद बची हुई ऊर्जा की मात्रा इतनी सूक्ष्म हो जाती है कि वह किसी अगले जीव के जीवन निर्वाह के लिए अपर्याप्त होती है। इसीलिए आहार श्रृंखलाएं सामान्यतः 4 चरणों से लंबी नहीं होतीं।
  • ऊर्जा प्रवाह की एकदिशिक प्रकृति (Unidirectional Flow):
    पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव एक ही दिशा में होता है—सूर्य $\to$ उत्पादक $\to$ शाकाहारी $\to$ मांसाहारी। उपभोक्ता द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा कभी वापस उत्पादक या सूर्य को नहीं लौट सकती।

(ग) आहार जाल (Food Web)

प्रकृति में आहार श्रृंखलाएं कभी पृथक और सीधी रेखा में नहीं होतीं। एक ही जीव कई विभिन्न प्रकार के जीवों को खा सकता है और स्वयं कई जीवों द्वारा खाया जा सकता है। इस प्रकार अनेक आहार श्रृंखलाएं आपस में जुड़कर एक जटिल जाल जैसी संरचना बनाती हैं, जिसे आहार जाल (Food Web) कहते हैं। आहार जाल पारितंत्र को स्थिरता और संतुलन प्रदान करता है।

3. जैव आवर्धन की परिघटना (Biological Magnification)

(क) जैव आवर्धन (Biomagnification) की परिभाषा एवं क्रियाविधि

फसलों को कीटों और रोगों से बचाने के लिए अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों (जैसे DDT, BHC) तथा खरपतवारनाशियों का उपयोग किया जाता है। ये रसायन अजैव-निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) होते हैं, अर्थात सूक्ष्मजीव इन्हें तोड़ नहीं सकते।

जैव आवर्धन की परिभाषा (CBSE Board 3 अंक):
"आहार श्रृंखला के माध्यम से अजैव-निम्नीकरणीय विषाक्त रसायनों (कीटनाशकों, भारी धातुओं) की सांद्रता का प्रत्येक उत्तरोत्तर पोषण स्तर पर क्रमशः बढ़ते जाना जैव आवर्धन कहलाता है।"

(ख) जलीय आहार श्रृंखला में जैव आवर्धन का क्लासिक उदाहरण (DDT सांद्रण):

  1. जल (Water): $0.000003\text{ ppm}$ (अत्यंत सूक्ष्म सांद्रता)।
  2. पादप प्लवक (Phytoplankton - उत्पादक): $0.04\text{ ppm}$ (रसायन का अवशोषण)।
  3. छोटी मछलियाँ (Small Fish - प्राथमिक उपभोक्ता): $0.5\text{ ppm}$ (हजारों प्लवकों को खाने से सांद्रता बढ़ी)।
  4. बड़ी मछलियाँ (Large Fish - द्वितीयक उपभोक्ता): $2.0\text{ ppm}$।
  5. मत्स्यभक्षी पक्षी / मनुष्य (Top Consumer): $25.0\text{ ppm}$ (लगभग 1 करोड़ गुना वृद्धि!)।

(ग) मनुष्य में सर्वाधिक सांद्रता क्यों पाई जाती है?

चूँकि मनुष्य किसी भी आहार श्रृंखला के शीर्ष (Top) पोषण स्तर पर स्थित होता है, अतः इन हानिकारक अजैव-निम्नीकरणीय रसायनों की सर्वाधिक सांद्रता मानव शरीर (वसा ऊतकों, यकृत, मस्तिष्क और माता के दूध) में ही संचित होती है। इसके कारण कैंसर, तंत्रिका तंत्र विकार, गुर्दे की विफलता और जन्मजात विकृतियां उत्पन्न होती हैं।

4. ओजोन परत एवं इसका क्षरण (Ozone Layer & Depletion)

ओजोन ($O_3$) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बना एक अणु है। वायुमंडल के निचले स्तर (क्षोभमंडल) में ओजोन एक घातक विष है, किंतु वायुमंडल के ऊपरी स्तर—समताप मंडल (Stratosphere - 15 से 30 किमी ऊँचाई)—में यह पृथ्वी के लिए एक अनिवार्य रक्षात्मक ढाल (Protective Shield) बनाती है।

(क) ओजोन का निर्माण (Formation of Ozone):

सूर्य से आने वाली उच्च ऊर्जा वाली पराबैंगनी (UV) विकिरणें आणविक ऑक्सीजन ($O_2$) को स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणुओं में विखंडित कर देती हैं:

$$O_2 \xrightarrow{\text{UV विकिरण}} O + O$$

यह स्वतंत्र और अत्यधिक क्रियाशील ऑक्सीजन परमाणु आणविक ऑक्सीजन से संयुक्त होकर ओजोन बनाता है:

$$O + O_2 \to O_3 \quad (\text{ओजोन})$$

(ख) ओजोन परत का जैविक महत्व:

ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV-B Radiation) को अवशोषित कर लेती है और उन्हें पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से रोकती है। यदि ये किरणें पृथ्वी तक पहुँचें, तो मनुष्यों में त्वचा कैंसर (Skin Cancer), आँखों में मोतियाबिंद (Cataract), रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी तथा पौधों में प्रकाश संश्लेषण की दर घट जाएगी।

(ग) ओजोन क्षरण का मुख्य कारण एवं मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल:

  • सन् 1980 के दशक में अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत की मोटाई में अत्यधिक गिरावट देखी गई, जिसे ओजोन छिद्र (Ozone Hole) कहा गया।
  • मुख्य कारण: मानव-निर्मित संश्लेषित रसायन—क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)। CFCs का उपयोग रेफ्रिजरेटर (शीतलन), एयर कंडीशनर और अग्निशामक यंत्रों में व्यापक रूप से किया जाता था। CFC से निकलने वाले क्लोरीन परमाणु ओजोन अणुओं को तेजी से तोड़ देते हैं (1 क्लोरीन परमाणु $1,00,000$ ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है)।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987): संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तहत विश्व के देशों ने 1987 में मॉन्ट्रियल (कनाडा) में एक ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत CFC के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही फ्रीज (प्रतिबंधित) कर दिया गया और अब सभी रेफ्रिजरेटरों में CFC-मुक्त गैसों (HFCs) का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।

5. कचरा प्रबंधन: जैव-निम्नीकरणीय बनाम अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट

हमारी जीवनशैली में बदलाव और उपयोग करके फेंकने (Use and Throw) की प्रवृत्ति के कारण प्रतिदिन टनों कचरा उत्पन्न हो रहा है।

(क) अपशिष्टों के दो प्रकार:

तुलना का बिंदु जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable) अजैव-निम्नीकरणीय (Non-biodegradable)
परिभाषा वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रमों (जीवाणुओं एवं कवकों) द्वारा आसानी से सरल पदार्थों में अपघटित हो जाते हैं। वे पदार्थ जिनका जैविक प्रक्रमों द्वारा प्राकृतिक रूप से अपघटन नहीं होता।
पर्यावरण पर प्रभाव पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान नहीं पहुँचाते; अपघटित होकर खाद बनते हैं। पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक बने रहते हैं, मृदा, जल और वायु को प्रदूषित करते हैं और नालियों को अवरुद्ध करते हैं।
उदाहरण सब्जियों और फलों के छिलके, कागज, सूती कपड़ा, गोबर, लकड़ी, पत्तियां। प्लास्टिक, पॉलीथिन थैलियां, धातु के डिब्बे, कांच, DDT, कीटनाशक।

(ख) कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक विधियां (Waste Disposal Methods):

  1. कचरे का पृथक्करण (Segregation at Source): गीले कचरे (हरा डिब्बा - जैव-निम्नीकरणीय) और सूखे कचरे (नीला डिब्बा - पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक, कांच) को घर पर ही अलग-अलग एकत्र करना।
  2. खाद बनाना (Composting): जैव-निम्नीकरणीय कचरे (सब्जी के छिलके, पत्तियां) को गड्ढों में दबाकर उत्कृष्ट प्राकृतिक जैविक खाद और वर्मीकम्पोस्ट तैयार करना।
  3. पुनर्चक्रण (Recycling): प्लास्टिक, कागज और कांच को कारखानों में पुनः प्रसंस्कृत कर नई उपयोगी वस्तुएं बनाना।
  4. भस्मीकरण (Incineration): अस्पतालों के संक्रामक जैव-चिकित्सीय कचरे (Biomedical waste) को विशेष भट्टियों में $1000^\circ\text{C}$ से अधिक तापमान पर जलाकर राख में बदलना।
  5. बायोगैस संयंत्र (Biogas Plant): गोबर और जैविक कचरे से धुआंरहित बायोगैस (मीथेन) ईंधन और समृद्ध खाद प्राप्त करना।
कुल्हड़ (मिट्टी के कप) बनाम डिस्पोजेबल प्लास्टिक कप (रेलवे का अनुभव):
पहले प्लास्टिक के कपों का उपयोग होता था जो अजैव-निम्नीकरणीय कचरा और नालियों में रुकावट पैदा करते थे। फिर मिट्टी के कुल्हड़ों का विकल्प लाया गया, किंतु लाखों कुल्हड़ों के निर्माण से खेतों की उपजाऊ ऊपरी मिट्टी (Topsoil) नष्ट होने लगी। अंततः पुनर्चक्रण योग्य डिस्पोजेबल कागज के कप (Paper cups) को पर्यावरण की दृष्टि से सबसे उपयुक्त समाधान माना गया।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

लिंडमैन का 10% ऊर्जा नियम
E_{n+1} = 0.10 × E_n (अगले स्तर को केवल 10% ऊर्जा मिलती है)
सौर ऊर्जा से पौधों द्वारा अवशोषण
खाद्य ऊर्जा ≈ 1\% of Total Solar Energy falling on leaves
ओजोन निर्माण समीकरण 1 (विखंडन)
O_2 →{पराबैंगनी किरणें (UV)} O + O (मुक्त ऑक्सीजन परमाणु)
ओजोन निर्माण समीकरण 2 (संलयन)
O_2 + O → O_3 (ओजोन अणु)
जैव आवर्धन संबंध
विषाक्त रसायन सांद्रता: T_1 < T_2 < T_3 < T_4 (शीर्ष पर अधिकतम)
ऊर्जा प्रवाह की दिशा
सूर्य → उत्पादक → शाकाहारी → मांसाहारी (सदैव एकदिशिक)
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल वर्ष
1987 (UNEP - CFC उत्पादन फ्रीज संधि)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (CBSE 2023 - 5 अंक): किसी पारितंत्र में लिंडमैन के 10% ऊर्जा नियम को समझाइए। यदि किसी आहार श्रृंखला के उत्पादक स्तर (घास) पर 20,000 जूल सौर ऊर्जा अवशोषित होकर खाद्य ऊर्जा में बदलती है, तो तीसरे पोषण स्तर (मेंढक) को कितनी ऊर्जा उपलब्ध होगी? गणना दर्शाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: 1. लिंडमैन के 10% नियम का सिद्धांत: एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर तक केवल 10% ऊर्जा का ही स्थानांतरण होता है, जबकि 90% ऊर्जा श्वसन, गति और ऊष्मा के रूप में व्यय हो जाती है।

2. आहार श्रृंखला के स्तर:

$$\text{घास (उत्पादक, } T_1) \to \text{टिड्डा (शाकाहारी, } T_2) \to \text{मेंढक (मांसाहारी, } T_3)$$

3. ऊर्जा की गणना: • प्रथम पोषण स्तर ($T_1$ - घास):

$$E_1 = 20,000\text{ J}$$

• द्वितीय पोषण स्तर ($T_2$ - टिड्डा):

$$E_2 = 10\% \text{ of } 20,000\text{ J} = \frac{10}{100} \times 20,000 = 2,000\text{ J}$$

• तृतीय पोषण स्तर ($T_3$ - मेंढक):

$$E_3 = 10\% \text{ of } 2,000\text{ J} = \frac{10}{100} \times 2,000 = \mathbf{200\text{ J}}$$

उत्तर: तीसरे पोषण स्तर (मेंढक) को केवल 200 जूल ऊर्जा प्राप्त होगी।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (CBSE 2022 - 3 अंक): जैव आवर्धन (Biological Magnification) क्या है? क्या यह पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर भिन्न-भिन्न होगा? मनुष्य के संदर्भ में इसका क्या प्रभाव है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. जैव आवर्धन की परिभाषा: आहार श्रृंखला के माध्यम से अजैव-निम्नीकरणीय विषाक्त रसायनों (जैसे कीटनाशक DDT, सीसा, पारा) की सांद्रता का प्रत्येक उत्तरोत्तर पोषण स्तर पर क्रमशः बढ़ते चले जाना जैव आवर्धन कहलाता है।

2. विभिन्न स्तरों पर भिन्नता: हाँ, यह पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर निश्चित रूप से भिन्न-भिन्न होगा। उत्पादक स्तर ($T_1$) पर इसकी सांद्रता न्यूनतम होगी और जैसे-जैसे हम आहार श्रृंखला में ऊपर बढ़ते हैं, प्रत्येक स्तर पर इसकी सांद्रता कई गुना बढ़ती जाती है।

3. मनुष्य पर प्रभाव: चूँकि मनुष्य आहार श्रृंखला के शीर्ष पोषण स्तर पर स्थित सर्वाहारी प्राणी है, अतः इन विषाक्त रसायनों की अधिकतम सांद्रता मानव शरीर में ही जमा होती है। इससे तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार, यकृत क्षति, हार्मोनल असंतुलन, कैंसर और भ्रूण में जन्मजात विकृतियां उत्पन्न होती हैं।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (CBSE 2021 - 3 अंक): ओजोन परत क्या है और यह हमारे लिए क्यों अनिवार्य है? ओजोन परत के क्षरण के लिए मुख्य रूप से कौन-सा रसायन उत्तरदायी है और इसके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कदम उठाया गया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. ओजोन परत एवं अनिवार्यता: ओजोन ($O_3$) समताप मंडल में स्थित तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बनी गैस की एक सुरक्षात्मक परत है। यह सूर्य से आने वाली अत्यधिक हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरणों को अवशोषित करके उन्हें पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है। यदि यह परत न हो, तो UV किरणें पृथ्वी पर जीवों में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, और प्रतिरक्षा तंत्र की विफलता का कारण बनेंगी।

2. क्षरण के लिए उत्तरदायी रसायन: ओजोन क्षरण के लिए मुख्य रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) उत्तरदायी हैं, जिनका उपयोग रेफ्रिजरेटरों, एयर कंडीशनरों और एरोसोल स्प्रे में शीतलक के रूप में किया जाता था।

3. अंतरराष्ट्रीय कदम: सन् 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तहत 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' समझौता किया गया, जिसके तहत वैश्विक स्तर पर CFC के उत्पादन और उपयोग को फ्रीज कर दिया गया तथा इनके स्थान पर पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों (HFCs) का उपयोग अनिवार्य किया गया।

उदाहरण 4
प्रश्न 4 (CBSE 2020 - 3 अंक): यदि हम एक पोषण स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डालें), तो पारितंत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा? हिरण और बाघ के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. पारितंत्र पर प्रभाव: यदि किसी पोषण स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दिया जाए, तो आहार श्रृंखला टूट जाएगी और पूरे पारितंत्र का पारिस्थितिकीय संतुलन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा: (क) निचले पोषण स्तर पर प्रभाव: उस स्तर से ठीक नीचे वाले जीवों को खाने वाला कोई नहीं रहेगा, जिससे उनकी संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ जाएगी। (ख) ऊपरी पोषण स्तर पर प्रभाव: उस स्तर से ऊपर वाले जीवों को भोजन नहीं मिलेगा, जिससे वे भूख से मरने लगेंगे अथवा पलायन कर जाएंगे।

2. जंगल के उदाहरण से स्पष्टीकरण: यदि किसी जंगल से सभी हिरणों (शाकाहारियों) को मार दिया जाए, तो: • घास और वनस्पतियों को चरने वाला कोई नहीं रहेगा, जिससे जंगल में अवांछित खरपतवार और घास का अत्यधिक फैलाव हो जाएगा। • भोजन के अभाव में बाघ और शेर (मांसाहारी) भूखे मरने लगेंगे और भोजन की तलाश में मानव बस्तियों पर हमला करने लगेंगे, जिससे पूरी खाद्य श्रृंखला नष्ट हो जाएगी।

उदाहरण 5
प्रश्न 5 (CBSE 2019 - 3 अंक): कचरा प्रबंधन की किन्हीं तीन आधुनिक और वैज्ञानिक विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। डिस्पोजेबल प्लास्टिक की जगह कागज के कपों का उपयोग क्यों बेहतर माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. कचरा प्रबंधन की तीन वैज्ञानिक विधियां:

  1. स्रोत पर पृथक्करण (Segregation): गीले कचरे (जैव-निम्नीकरणीय) और सूखे कचरे (अजैव-निम्नीकरणीय) को घर पर ही अलग-अलग हरे और नीले डिब्बों में एकत्र करना।
  2. जैविक खाद निर्माण (Composting): रसोई के जैविक कचरे (सब्जी के छिलके, जूठन) को गड्ढों में दबाकर उत्कृष्ट प्राकृतिक खाद बनाना।
  3. पुनर्चक्रण (Recycling): पुराने कागज, प्लास्टिक और धातु के बर्तनों को प्रसंस्कृत कर नई वस्तुएं बनाना।

2. कागज के कप प्लास्टिक से बेहतर क्यों हैं? (क) प्लास्टिक के कप अजैव-निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) होते हैं, जो सैकड़ों सालों तक नालियों को जाम करते हैं और जलाने पर जहरीली डाइऑक्सिन गैसें छोड़ते हैं। (ख) इसके विपरीत, कागज के कप जैव-निम्नीकरणीय होते हैं, जो मिट्टी में कुछ ही हफ्तों में प्राकृतिक रूप से अपघटित होकर पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचाते और आसानी से पुनर्चक्रित भी किए जा सकते हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ओजोन (O3) और ऑक्सीजन (O2) के रासायनिक सूत्र में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्राणवायु ऑक्सीजन दो परमाणुओं (O2) से बनती है; जबकि ओजोन तीन परमाणुओं (O3) से बनती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

10% नियम में पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश का 10% अवशोषण लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पौधे कुल सूर्य के प्रकाश का केवल लगभग 1% ही अवशोषित कर भोजन बनाते हैं; 10% नियम एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर तक स्थानांतरण पर लागू होता है!

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जैव आवर्धन में रसायन की सांद्रता को ऊपर घटती हुई दिखाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जैव आवर्धन में सांद्रता प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर बढ़ती है; शीर्ष उपभोक्ता (मनुष्य) में सांद्रता सर्वाधिक होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि ओजोन परत का क्षरण ग्लोबल वार्मिंग (ग्रीनहाउस प्रभाव) का मूल कारण है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ओजोन क्षरण UV किरणों को रोकने से संबंधित है (CFC द्वारा); ग्लोबल वार्मिंग CO2 और मीथेन द्वारा अवरक्त किरणों (ऊष्मा) को रोकने से संबंधित है। दोनों अलग-अलग परिघटनाएं हैं!

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पारितंत्र में ऊर्जा के प्रवाह को चक्रीय (Cyclic) बता देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

खनिजों/पोषक तत्वों का चक्र चक्रीय होता है; किंतु ऊर्जा का प्रवाह सदैव एकदिशिक (Unidirectional - अपरिवर्तनीय) होता है।

पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह (10% नियम), ओजोन निर्माण एवं जैव आवर्धन चार्ट

हमारा पर्यावरण: 10% ऊर्जा नियम, आहार श्रृंखला एवं ओजोन परत (Ecosystem & Ozone) 10% ऊर्जा प्रवाह पिरामिड (Lindeman's Rule) T4: बाज / मनुष्य 10 J ऊर्जा T3: मेंढक / छोटी मछली (मांसाहारी) 100 J ऊर्जा (10%) T2: टिड्डा / हिरण (शाकाहारी उपभोक्ता) 1,000 J ऊर्जा (10%) T1: हरे पौधे / घास (प्राथमिक उत्पादक) 10,000 J संचित खाद्य ऊर्जा सौर ऊर्जा इनपुट: 10,00,000 J सूर्य प्रकाश • पौधे केवल 1% सौर ऊर्जा ग्रहण करते हैं (10,000 J) • प्रत्येक स्तर पर 90% ऊर्जा उपापचय व ऊष्मा में लुप्त होती है ओजोन परत एवं जैव आवर्धन ओजोन परत का निर्माण (समताप मंडल): O₂ —(UV किरणें)—> O + O O + O₂ —> O₃ (ओजोन सुरक्षा ढाल) • UV किरणों से रक्षा करती है (त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद से बचाव) • क्षरण का कारण: CFCs (रेफ्रिजरेटर/AC) | 1987 मॉन्ट्रियल संधि जैव आवर्धन (Biological Magnification): अजैव-निम्नीकरणीय कीटनाशक (DDT) की सांद्रता वृद्धि: जल: 0.000003 ppm \to प्लवक: 0.04 ppm छोटी मछली: 0.5 ppm \to बड़ी मछली: 2.0 ppm शीर्ष उपभोक्ता (बाज / मनुष्य): 25.0 ppm (अधिकतम!) निष्कर्ष: शीर्ष उपभोक्ता होने से मानव में सर्वाधिक विष जमा उपाय: जैविक खेती एवं जैव-कीटनाशकों का प्रयोग

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
पारितंत्र जैविक घटकों (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) और अजैविक घटकों (ताप, जल, मृदा) की आत्मनिर्भर इकाई है।
मुख्य बिंदु 2
उत्पादक (हरे पौधे) सौर ऊर्जा का 1% अवशोषित कर प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं।
मुख्य बिंदु 3
अपघटक (जीवाणु व कवक) मृत अवशेषों का विघटन कर पोषक तत्वों का मृदा में पुनर्चक्रण करते हैं।
मुख्य बिंदु 4
लिंडमैन का 10% नियम: एक पोषण स्तर से अगले स्तर तक केवल 10% ऊर्जा जाती है; 90% उपापचय व ऊष्मा में नष्ट होती है।
मुख्य बिंदु 5
पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव एकदिशिक (Unidirectional) होता है; 3-4 स्तरों के बाद उपयोगी ऊर्जा नहीं बचती।
मुख्य बिंदु 6
जैव आवर्धन: आहार श्रृंखला में अजैव-निम्नीकरणीय कीटनाशकों (DDT) की सांद्रता प्रत्येक स्तर पर बढ़ती है; शीर्ष उपभोक्ता (मनुष्य) में अधिकतम होती है।
मुख्य बिंदु 7
ओजोन (O3) समताप मंडल में UV विकिरण द्वारा O2 के विखंडन (O + O) और संलयन (O + O2) से बनती है।
मुख्य बिंदु 8
ओजोन परत सूर्य की घातक UV किरणों को रोककर त्वचा कैंसर व मोतियाबिंद से रक्षा करती है।
मुख्य बिंदु 9
CFCs ओजोन क्षरण का मुख्य कारण हैं; 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल द्वारा CFC उत्पादन को प्रतिबंधित किया गया।
मुख्य बिंदु 10
कचरा प्रबंधन में गीले व सूखे कचरे का पृथक्करण, खाद बनाना, पुनर्चक्रण तथा एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध अनिवार्य उपाय हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. पारितंत्र में अपघटक न होने पर क्या परिणाम होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पृथ्वी पर मृत जीवों और पौधों के अवशेषों का ढेर लग जाएगा, पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण रुक जाएगा और मृदा की उपजाऊ क्षमता समाप्त होने से जीवन असंभव हो जाएगा।
2
2. यदि एक आहार श्रृंखला में एक तृतीयक उपभोक्ता (बाज) को 5 जूल ऊर्जा प्राप्त होती है, तो उत्पादक स्तर पर कितनी ऊर्जा रही होगी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: T4 (बाज) = 5 J ⇒ T3 (साँप) = 50 J ⇒ T2 (मेंढक) = 500 J ⇒ T1 (उत्पादक) = 5,000 J (उत्पादक स्तर पर 5,000 जूल ऊर्जा रही होगी)।
3
3. ओजोन का एक अणु ऑक्सीजन के कितने परमाणुओं से मिलकर बना होता है और इसका निर्माण समताप मंडल में किस प्रकार होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ओजोन 3 ऑक्सीजन परमाणुओं (O3) से बना होता है; समताप मंडल में UV किरणें O2 को दो O परमाणुओं में तोड़ती हैं, जो अन्य O2 अणुओं से मिलकर O3 बनाते हैं।
4
4. अजैव-निम्नीकरणीय कचरे के दो प्रमुख उदाहरण दीजिए जो पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाते हैं।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्लास्टिक (पॉलीथिन बैग) और रासायनिक कीटनाशक (जैसे DDT)।
5
5. किसी आहार श्रृंखला में शीर्ष उपभोक्ता में कीटनाशकों की सांद्रता सर्वाधिक क्यों होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: जैव आवर्धन (Biological Magnification) के कारण; क्योंकि कीटनाशक अजैव-निम्नीकरणीय होते हैं और जीव द्वारा अपघटित या उत्सर्जित नहीं होते, जिससे वे प्रत्येक पोषण स्तर पर संचित होते रहते हैं।
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