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CBSE • कक्षा X • Science • अध्याय 12
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

सन् 1820 में हैंस क्रिश्चियन ओरस्टेड (Hans Christian Oersted) के एक आकस्मिक प्रयोग ने विज्ञान की दुनिया में क्रांति ला दी। उन्होंने देखा कि जब किसी चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके पास रखी चुंबकीय दिक्सूची (Compass needle) विक्षेपित हो जाती है। इस ऐतिहासिक खोज ने यह सिद्ध कर दिया कि विद्युत और चुंबकत्व एक-दूसरे से भिन्न नहीं बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। विद्युत धारावाही चालक अपने चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) उत्पन्न करता है। चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश राशि है जिसका परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। इसका SI मात्रक टेस्ला (Tesla, T) होता है। चुंबकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने वाली काल्पनिक रेखाओं को चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं (Magnetic Field Lines) कहते हैं। ये रेखाएं चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं और चुंबक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर जाकर बंद वक्र बनाती हैं। दो क्षेत्र रेखाएं कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं। किसी सीधे धारावाही चालक के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-Hand Thumb Rule / मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम) द्वारा ज्ञात की जाती है। पास-पास लिपटे विद्युतरोधी ताँबे के तार के अनेक फेरों वाली बेलनाकार कुंडली को परिनालिका (Solenoid) कहते हैं। परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है और इसके भीतर नर्म लोहे का क्रोड रखकर शक्तिशाली विद्युत चुंबक (Electromagnet) बनाया जाता है। जब किसी धारावाही चालक को बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक यांत्रिक बल लगता है। इस बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम (Fleming's Left-Hand Rule) द्वारा ज्ञात की जाती है, जो कि विद्युत मोटर (Electric Motor) का कार्य सिद्धांत है। माइकल फैराडे ने विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) की खोज की, जिसके अनुसार गतिशील चुंबक द्वारा कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है (दिशा: फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम)। हमारे घरों में 220 V, 50 Hz की प्रत्यावर्ती धारा (AC) की आपूर्ति होती है। घरेलू परिपथ में विद्युन्मय तार (Live - लाल/भूरा), उदासीन तार (Neutral - काला/नीला) तथा भूसंपर्क तार (Earth - हरा/पीला) प्रयुक्त होते हैं। भूसंपर्क तार धात्विक आवरण वाले उपकरणों (प्रेस, हीटर, कूलर) को विद्युत आघात (Electric shock) से बचाने का सबसे महत्वपूर्ण जीवन रक्षक सुरक्षा उपाय है।

🧲 क्या आपने कभी सोचा है: बिजली का कोई तार बिना छुए लोहे को अपनी ओर कैसे खींच लेता है, और एक साधारण पहिया बिजली से कैसे घूमने लगता है?

जरा सोचिए: बिजली और चुंबक—सदियों तक वैज्ञानिक इन दोनों को बिल्कुल अलग-अलग ताकतें मानते थे। लेकिन 200 साल पहले एक डेनिश प्रोफेसर जब अपनी क्लास में बच्चों को तार से बिजली जलाकर दिखा रहे थे, तभी मेज पर रखी कंपास की सुई अचानक जोर से हिल गई! उस एक सेकंड की घटना ने पूरी दुनिया की दिशा बदल दी। आज दुनिया में घूमने वाली हर मोटर—चाहे वह आपके घर का पंखा हो, वाशिंग मशीन हो, पानी का पंप हो, या 300 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन हो—सबके पीछे केवल एक ही जादुई नियम काम करता है: जब किसी तार में करंट बहता है, तो वह एक अदृश्य चुंबक बन जाता है, और जब दो चुंबक आमने-सामने आते हैं, तो वे एक-दूसरे को धक्का देकर पहिये को नचा देते हैं! इतना ही नहीं, क्या कभी आपने सोचा कि तीन-पिन वाले प्लग में ऊपर वाली पिन बाकी दोनों से ज्यादा मोटी और लंबी क्यों बनाई जाती है? आइए, विद्युत और चुंबकत्व के इस अद्भुत संगम और इसके घरेलू सुरक्षा रहस्यों को गहराई से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों अनिवार्य है?

  1. बोर्ड परीक्षा में उच्च स्कोरिंग: CBSE Class 10वीं विज्ञान परीक्षा में "चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के 4 गुण", "दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम", "परिनालिका एवं विद्युत चुंबक", "फ्लेमिंग का वामहस्त नियम", तथा "घरेलू विद्युत परिपथ में भूसंपर्क तार (Earth Wire) का कार्य एवं लघुपथन" पर 6 से 8 अंक के प्रश्न प्रतिवर्ष आते हैं।
  2. इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी फाउंडेशन: इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मोटर्स, जनरेटर्स, ट्रांसफॉर्मर्स और MRI मशीनों का आधार इसी अध्याय के सिद्धांतों पर टिका है।
  3. घरेलू सुरक्षा एवं जीवन रक्षा: घर में शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडिंग और बिजली के करंट (Electric Shock) से जान-माल की रक्षा करने के वैज्ञानिक नियमों की व्यावहारिक जानकारी।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • चुंबक के ध्रुव (उत्तरी ध्रुव N, दक्षिणी ध्रुव S) तथा आकर्षण-प्रतिकर्षण का नियम।
  • विद्युत धारा, विभवांतर तथा परिपथ की आधारभूत संकल्पना।
  • सदिश राशियां (परिमाण और दिशा)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ओरस्टेड के प्रयोग और विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की संकल्पना स्पष्ट कर सकेंगे।
  • चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के 4 प्रमुख गुणों को सूचीबद्ध कर छड़ चुंबक के चारों ओर क्षेत्र रेखाओं का आरेख खींच सकेंगे।
  • दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम द्वारा सीधे तार, वृत्ताकार पाश और परिनालिका के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निर्धारित कर सकेंगे।
  • विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक के मध्य स्पष्ट तुलना कर सकेंगे।
  • फ्लेमिंग के वामहस्त नियम द्वारा धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा निकाल सकेंगे।
  • घरेलू विद्युत परिपथ के तीनों तारों (Live, Neutral, Earth) के कार्यों और भूसंपर्क तार के सुरक्षा महत्व की व्याख्या कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. चुंबकीय क्षेत्र एवं क्षेत्र रेखा...
2 2. धारावाही चालक का चुंबकीय क्षेत्र...
3 3. चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चाल...
4 4. विद्युत चुंबकीय प्रेरण एवं प्रत्...
5 5. घरेलू विद्युत परिपथ एवं सुरक्षा...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. चुंबकीय क्षेत्र एवं क्षेत्र रेखाओं के गुण (Magnetic Field & Field Lines)

किसी चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसके चुंबकीय बल का संसूचन (अनुभव) किया जा सकता है, उस चुंबक का चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) कहलाता है।

  • चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश राशि (Vector quantity) है, जिसका परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।
  • इसका SI मात्रक टेस्ला (Tesla, T) है।

(क) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं (Magnetic Field Lines)

चुंबकीय क्षेत्र को निरूपित करने के लिए खींचे गए वे काल्पनिक सतत वक्र जिन पर कोई स्वतंत्र काल्पनिक उत्तरी ध्रुव गमन करेगा, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कहलाती हैं।

(ख) चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के 4 प्रमुख गुण (CBSE Board पसंदीदा 3 अंक):

  1. दिशा (उत्तरी से दक्षिणी ध्रुव): चुंबक के बाहर क्षेत्र रेखाएं उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं; जबकि चुंबक के अंदर इनकी दिशा दक्षिणी ध्रुव (S) से उत्तरी ध्रुव (N) की ओर होती है। अतः ये रेखाएं बंद सतत वक्र (Closed continuous loops) बनाती हैं।
  2. स्पर्श रेखा द्वारा दिशा: क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की परिणामी दिशा को दर्शाती है।
  3. क्षेत्र की प्रबलता (सघनता): जहाँ क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे के अत्यधिक निकट (सघन / Crowded) होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अत्यधिक प्रबल होता है (जैसे चुंबक के ध्रुवों के समीप); और जहाँ रेखाएं दूर-दूर होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल होता है।
  4. दो क्षेत्र रेखाएं कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं (प्रतिच्छेद नहीं करतीं):
    यदि दो क्षेत्र रेखाएं किसी बिंदु पर एक-दूसरे को काटेंगी, तो कटान बिंदु पर दो स्पर्श रेखाएं खींची जा सकेंगी, जिसका अर्थ होगा कि उस एक ही बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएं होंगी—जो कि भौतिक रूप से सर्वथा असंभव है!

2. धारावाही चालक का चुंबकीय क्षेत्र एवं दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम

(क) सीधे धारावाही चालक का चुंबकीय क्षेत्र

जब किसी सीधे ताँबे के तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र संकेंद्रीय वृत्तों (Concentric Circles) के रूप में उत्पन्न होता है, जिनका केंद्र वह तार स्वयं होता है।

  • चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता ($B$):
    1. तार में प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती होती है ($B \propto I$)।
    2. तार से दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है ($B \propto \frac{1}{r}$)—जैसे-जैसे तार से दूर जाते हैं, वृत्त बड़े और चुंबकीय प्रभाव क्षीण होता जाता है।

(ख) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-Hand Thumb Rule)

नियम का कथन:
"कल्पना कीजिए कि आपने अपने दाहिने हाथ में धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़ रखा है कि आपका अंगूठा विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करता है, तो आपकी उँगलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा में लिपटी होंगी।"

इसे मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम (Maxwell's Corkscrew Rule) भी कहते हैं।

(ग) परिनालिका (Solenoid) एवं विद्युत चुंबक

पास-पास लिपटे विद्युतरोधी ताँबे के तार की बेलनाकार अनेक फेरों वाली कुंडली को परिनालिका कहते हैं:

  • जब परिनालिका में धारा प्रवाहित की जाती है, तो इसका चुंबकीय क्षेत्र ठीक एक छड़ चुंबक (Bar Magnet) के चुंबकीय क्षेत्र के समान व्यवहार करता है। इसका एक सिरा उत्तरी ध्रुव (N) तथा दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव (S) बन जाता है।
  • परिनालिका के भीतर क्षेत्र: परिनालिका के भीतर सभी स्थानों पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं समानांतर सरल रेखाएं होती हैं। इसका अर्थ है कि परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र सभी बिंदुओं पर एकसमान (Uniform) होता है।
  • विद्युत चुंबक (Electromagnet): परिनालिका के भीतर के तीव्र चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग किसी चुंबकीय पदार्थ (जैसे नर्म लोहे की छड़ / Soft Iron core) को उसके अंदर रखकर चुंबकित करने में किया जाता है। इस प्रकार बने चुंबक को विद्युत चुंबक कहते हैं।
  • विद्युत चुंबक बनाम स्थायी चुंबक:
    • विद्युत चुंबक एक अस्थायी चुंबक है; धारा बंद करते ही इसका चुंबकत्व समाप्त हो जाता है। इसकी शक्ति धारा बढ़ाकर या फेरों की संख्या ($N$) बढ़ाकर इच्छानुसार बहुत अधिक की जा सकती है।
    • स्थायी चुंबक (जैसे कार्बन स्टील का चुंबक) का चुंबकत्व आसानी से समाप्त नहीं होता और इसकी शक्ति स्थिर होती है।

3. चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल एवं फ्लेमिंग का वामहस्त नियम

फ्रांसीसी वैज्ञानिक आंद्रे-मेरी एम्पीयर ने प्रतिपादित किया कि यदि धारावाही चालक चुंबक पर बल लगाता है, तो चुंबक को भी धारावाही चालक पर परिमाण में बराबर और विपरीत दिशा में बल लगाना चाहिए।

(क) चालक पर लगने वाले बल की निर्भरता ($F = BIl \sin\theta$):

  • चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता ($B$) पर अनुक्रमानुपाती।
  • चालक में प्रवाहित धारा ($I$) पर अनुक्रमानुपाती।
  • चालक की लंबाई ($l$) पर अनुक्रमानुपाती।
  • अधिकतम बल: जब चालक चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत ($90^\circ$) रखा हो, तो उस पर लगने वाला बल अधिकतम होता है।
  • शून्य बल: जब चालक चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के समानांतर ($0^\circ$ या $180^\circ$) रखा हो, तो उस पर लगने वाला बल शून्य होता है।

(ख) फ्लेमिंग का वामहस्त नियम (Fleming's Left-Hand Rule)

चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल (या गति) की दिशा ज्ञात करने का स्वर्णिम नियम:

नियम का कथन (CBSE Board 3 अंक):
"अपने बाएँ हाथ के अँगूठे, तर्जनी (Forefinger) तथा मध्यमा (Middle finger) को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत हों। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर तथा मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करे, तो अँगूठा चालक पर लगने वाले बल (या गति) की दिशा की ओर संकेत करेगा।"

याद रखने की ट्रिक (Father - Mother - Child):

  • Forefinger (तर्जनी) = Magnetic Field (चुंबकीय क्षेत्र)
  • Center/Middle finger (मध्यमा) = Current (धारा)
  • Thumb (अंगूठा) = Force / Motion (बल या गति)

(ग) विद्युत मोटर (Electric Motor) का सिद्धांत

विद्युत मोटर एक ऐसी घूर्णी युक्ति है जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरित करती है।

  • कार्य सिद्धांत: यह फ्लेमिंग के वामहस्त नियम पर आधारित है। जब किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखी आयताकार कुंडली (आर्मेचर) में धारा प्रवाहित की जाती है, तो कुंडली की दोनों विपरीत भुजाओं पर बराबर किंतु विपरीत दिशा में बल कार्य करते हैं। यह बलयुग्म (Torque) कुंडली को लगातार एक ही दिशा में घुमाता है।
  • विभक्त वलय (Split Rings / दिक्परिवर्तक - Commutator) का कार्य: विभक्त वलय प्रत्येक आधे घूर्णन के पश्चात कुंडली में धारा की दिशा को उलट देता है, जिससे कुंडली लगातार एक ही दिशा में घूमती रहती है।

4. विद्युत चुंबकीय प्रेरण एवं प्रत्यावर्ती धारा (AC vs DC)

(क) विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)

सन् 1831 में माइकल फैराडे ने यह युगांतरकारी खोज की कि जब किसी चालक और चुंबकीय क्षेत्र के बीच आपेक्षिक गति होती है (या कुंडली से बद्ध चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन होता है), तो कुंडली में एक विद्युत विभवांतर और धारा प्रेरित होती है। इस परिघटना को विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं और उत्पन्न धारा को प्रेरित धारा (Induced Current) कहते हैं।

(ख) फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (Fleming's Right-Hand Rule)

प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने हेतु अपने दाहिने हाथ के अँगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाएं:

  • तर्जनी = चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
  • अंगूठा = चालक की गति की दिशा
  • मध्यमा = प्रेरित विद्युत धारा की दिशा को दर्शाएगी।

(ग) दिष्ट धारा (DC) बनाम प्रत्यावर्ती धारा (AC)

तुलना का आधार दिष्ट धारा (Direct Current - DC) प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC)
दिशा की प्रकृति सदा एक ही दिशा में बहती है; दिशा समय के साथ नहीं बदलती। निश्चित समयांतराल के बाद अपनी दिशा आवर्ती रूप से उत्क्रमित (उलटती) करती रहती है।
स्रोत सेल, रासायनिक बैटरी, सौर सेल, DC जनरेटर। पावर स्टेशन, AC जनरेटर (डायनेमो), घर का मुख्य ग्रिड।
आवृत्ति (Frequency) शून्य ($0\text{ Hz}$)। भारत में: $50\text{ Hz}$ (धारा प्रति सेकंड 100 बार दिशा बदलती है, प्रत्येक $1/100$ सेकंड में)।
दीर्घ दूरी संचरण लंबी दूरी तक संचरण करने में ऊर्जा की भारी हानि होती है। ट्रांसफॉर्मर की मदद से बिना अधिक ऊर्जा हानि के मीलों दूर तक आसानी से संचरित की जा सकती है (AC का सबसे बड़ा लाभ)।

5. घरेलू विद्युत परिपथ एवं सुरक्षा उपाय (Domestic Circuits & Safety)

हमारे घरों में बिजली के खंभों या भूमिगत केबलों द्वारा मुख्य आपूर्ति (Main Supply) प्राप्त होती है। यह आपूर्ति 220 वोल्ट विभवांतर एवं 50 Hz आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा होती है।

(क) घरेलू परिपथ के तीन मुख्य तार एवं रंग संहिता (Color Code):

तार का नाम विद्युतरोधी आवरण का रंग कार्य एवं विभव
1. विद्युन्मय तार (Live Wire / गरम तार) लाल (Red) या भूरा यह मुख्य धारा लाता है। इसका विभव +220 V पर होता है। सभी स्विच और फ्यूज सदैव इसी तार में जोड़े जाते हैं।
2. उदासीन तार (Neutral Wire / ठंडा तार) काला (Black) या नीला यह परिपथ को पूरा कर धारा को वापस ले जाता है। इसका विभव 0 V (शून्य) माना जाता है। (Live और Neutral के बीच विभवांतर $= 220 - 0 = 220\text{ V}$)।
3. भूसंपर्क तार (Earth Wire) हरा (Green) या पीला घर के निकट भूमि में गहराई में दबी धातु की प्लेट से जुड़ा सुरक्षात्मक तार। विभव $= 0\text{ V}$।

(ख) भूसंपर्क तार का क्या कार्य है और यह क्यों आवश्यक है? (CBSE Board 3 अंक)

  • धातु के आवरण वाले विद्युत उपकरणों (जैसे विद्युत प्रेस, टोस्टर, मेज का पंखा, रेफ्रिजरेटर, कूलर) के धात्विक खोल को भूसंपर्क तार से जोड़ दिया जाता है।
  • सुरक्षा कार्य: यदि कभी उपकरण का पुराना या कटा हुआ सजीव तार (Live wire) उपकरण की धातु की बॉडी को छू लेता है, तो भूसंपर्क तार उस क्षरित करंट को अत्यंत कम प्रतिरोध का मार्ग प्रदान करके सीधे जमीन (पृथ्वी) में पहुँचा देता है।
  • इससे उपकरण का विभव पृथ्वी के विभव (शून्य) के बराबर बना रहता है, और यदि कोई व्यक्ति उस उपकरण को छू ले, तो उसे कोई गंभीर या जानलेवा बिजली का झटका (Electric Shock) नहीं लगता।

(ग) लघुपथन बनाम अतिभारण (Short-Circuit vs Overloading):

घटना कारण एवं क्रियाविधि परिणाम एवं बचाव
लघुपथन (Short-Circuiting) जब तारों का विद्युतरोधी आवरण खराब होने से विद्युन्मय तार (Live) और उदासीन तार (Neutral) सीधे एक-दूसरे के संपर्क में आ जाते हैं। परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है। ओम के नियम ($I = V/R$) से परिपथ में विद्युत धारा का मान अत्यधिक तीव्र गति से बढ़ जाता है। अत्यधिक ऊष्मा से चिंगारियां निकलती हैं और आग लग सकती है। बचाव: उचित रेटिंग का फ्यूज या MCB।
अतिभारण (Overloading) जब एक ही सॉकेट से एक साथ कई उच्च शक्ति वाले उपकरण (जैसे हीटर, एसी, गीजर, प्रेस) जोड़ दिए जाएं, या आपूर्ति वोल्टेज में अचानक असामान्य वृद्धि हो जाए। परिपथ द्वारा खींची गई कुल धारा तारों की सुरक्षित वहन क्षमता से अधिक हो जाती है, जिससे तार अत्यधिक गर्म होकर जल सकते हैं।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

धारावाही तार पर बल
F = BIl [ = 90^ पर बल अधिकतम, 0^ पर शून्य]
लंबे सीधे तार का चुंबकीय क्षेत्र
B I तथा B {1}{r} ⇒ B = {_0 I}{2 r}
परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र
B = _0 n I [n = प्रति एकांक लंबाई फेरों की संख्या]
भारत में घरेलू AC वोल्टेज व आवृत्ति
$$V = 220\text{ V} \quad | \quad f = 50\text{ Hz}$$
AC दिशा परिवर्तन आवर्तकाल
T = {1}{f} = {1}{50} s ⇒ दिशा परिवर्तन प्रत्येक {1}{100} s में
घरेलू तारों के विभवांतर
$$V_{\text{Live}} = 220\text{ V}, \quad V_{\text{Neutral}} = 0\text{ V}, \quad V_{\text{Earth}} = 0\text{ V}$$
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम
तर्जनी (क्षेत्र B) + मध्यमा (धारा I) → अँगूठा (बल F)
फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम
तर्जनी (क्षेत्र B) + अँगूठा (गति v) → मध्यमा (प्रेरित धारा I)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (CBSE 2023 - 3 अंक): चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के किन्हीं तीन प्रमुख गुणों को लिखिए। दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के तीन प्रमुख गुण: (क) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं तथा चुंबक के अंदर दक्षिणी से उत्तरी ध्रुव की ओर जाकर बंद वक्र (Closed continuous loops) बनाती हैं। (ख) क्षेत्र रेखाओं की सघनता (निकटता) चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता को दर्शाती है; ध्रुवों के समीप रेखाएं घनी होती हैं अतः वहाँ क्षेत्र प्रबलतम होता है। (ग) क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की परिणामी दिशा को प्रदर्शित करती है।

2. दो क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं क्योंकि: यदि दो क्षेत्र रेखाएं किसी बिंदु पर एक-दूसरे को काटेंगी, तो इसका अर्थ होगा कि उस प्रतिच्छेद बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो स्पर्श रेखाएं खींची जा सकेंगी। अर्थात उस एक ही बिंदु पर कंपास की सुई दो अलग-अलग दिशाओं की ओर संकेत करेगी, जो कि भौतिक रूप से सर्वथा असंभव है।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (CBSE 2022 - 3 अंक): किसी धारावाही परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की विशेषताएं बताइए। परिनालिका का उपयोग करके विद्युत चुंबक किस प्रकार बनाया जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की विशेषताएं: (क) धारावाही परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं परस्पर समानांतर और समान दूरी पर स्थित सीधी रेखाएं होती हैं। (ख) इसका अर्थ है कि परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र सभी बिंदुओं पर पूर्णतः एकसमान (Uniform) होता है। (ग) परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र ठीक एक छड़ चुंबक के क्षेत्र के सदृश व्यवहार करता है।

2. विद्युत चुंबक का निर्माण: • पास-पास लिपटे विद्युतरोधी ताँबे के तार वाली परिनालिका के खोखले केंद्र के अंदर एक नर्म लोहे (Soft Iron) की छड़ (क्रोड / Core) रख दी जाती है। • जब परिनालिका में प्रबल दिष्ट धारा (DC) प्रवाहित की जाती है, तो परिनालिका के भीतर का तीव्र चुंबकीय क्षेत्र नर्म लोहे की छड़ को शक्तिशाली रूप से चुंबकित कर देता है। • इस प्रकार निर्मित चुंबक को विद्युत चुंबक (Electromagnet) कहते हैं। जैसे ही विद्युत धारा का प्रवाह बंद किया जाता है, नर्म लोहे का चुंबकत्व तत्काल समाप्त हो जाता है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (CBSE 2021 - 3 अंक): फ्लेमिंग का वामहस्त नियम (Fleming's Left-Hand Rule) लिखिए। इसका उपयोग किस विद्युत युक्ति के कार्य सिद्धांत में किया जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. फ्लेमिंग का वामहस्त नियम: अपने बाएँ हाथ के अँगूठे, तर्जनी (Forefinger) तथा मध्यमा (Middle finger) को इस प्रकार परस्पर लंबवत फैलाइए कि: • तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र ($B$) की दिशा को प्रदर्शित करे, • मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा ($I$) की दिशा को प्रदर्शित करे, • तो अँगूठा चालक पर आरोपित यांत्रिक बल (या चालक की गति की दिशा) को निरूपित करेगा।

2. उपयोग: इस नियम का उपयोग विद्युत मोटर (Electric Motor) के कार्य सिद्धांत में किया जाता है। विद्युत मोटर में जब चुंबकीय क्षेत्र के बीच रखी कुंडली में धारा प्रवाहित होती है, तो फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार कुंडली की विपरीत भुजाओं पर विपरीत दिशा में बल लगते हैं, जिससे मोटर का आर्मेचर निरंतर घूर्णन करता है।

उदाहरण 4
प्रश्न 4 (CBSE 2020 - 3 अंक): घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण (Overloading) तथा लघुपथन (Short-circuiting) में क्या अंतर है? इनसे बचने के लिए परिपथ में कौन-सी सुरक्षा युक्ति लगाई जाती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. अतिभारण बनाम लघुपथन: • अतिभारण (Overloading): जब एक ही सॉकेट से एक साथ कई भारी विद्युत उपकरणों (जैसे हीटर, एसी, गीजर) को जोड़ दिया जाता है, तो परिपथ से खींची जाने वाली कुल धारा तारों की सुरक्षित वहन क्षमता से अधिक हो जाती है। इसे अतिभारण कहते हैं। • लघुपथन (Short-Circuiting): जब तारों का प्लास्टिक आवरण घिस जाने या कट जाने से सजीव तार (Live wire - 220 V) और उदासीन तार (Neutral wire - 0 V) सीधे एक-दूसरे से चिपक जाते हैं, तो परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है और अत्यंत तीव्र धारा प्रवाहित होती है। इसे लघुपथन कहते हैं।

2. सुरक्षा युक्ति: इन दोनों खतरों से बचने के लिए परिपथ के सजीव तार के श्रेणीक्रम में उचित रेटिंग का विद्युत फ्यूज (Electric Fuse) अथवा आधुनिक MCB (Miniature Circuit Breaker) लगाया जाता है। अत्यधिक धारा बहने पर फ्यूज तार पिघलकर परिपथ को तुरंत तोड़ देता है, जिससे आग लगने और उपकरणों के जलने से रक्षा होती है।

उदाहरण 5
प्रश्न 5 (CBSE 2019 - 3 अंक): घरेलू विद्युत परिपथ में भूसंपर्क तार (Earth Wire) का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले उपकरणों को भू-संपर्कित करना क्यों आवश्यक है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. भूसंपर्क तार का कार्य: भूसंपर्क तार (हरे रंग का तार) उपकरण के धातु के बाहरी आवरण को घर के बाहर जमीन में गहराई में गड़ी धातु की प्लेट से जोड़ता है। इसका कार्य किसी भी क्षरित विद्युत धारा (Leakage current) को शून्य प्रतिरोध का सुरक्षित मार्ग प्रदान करके पृथ्वी में विसर्जित करना है।

2. धातु के आवरण वाले उपकरणों को भू-संपर्कित करने की अनिवार्यता: (क) विद्युत प्रेस, हीटर, टोस्टर, रेफ्रिजरेटर और कूलर जैसे उपकरणों का बाहरी आवरण धातु (लोहा/स्टील) का बना होता है। (ख) यदि कभी उपकरण का आंतरिक सजीव तार (Live wire) कटकर धातु की बॉडी से छू जाए, तो पूरी बॉडी में 220 V का खतरनाक करंट आ जाता है। (ग) यदि उपकरण भू-संपर्कित है, तो सारा करंट तुरंत भूसंपर्क तार से होकर जमीन में चला जाएगा। फलस्वरूप उपकरण की बॉडी का विभव शून्य बना रहेगा। (घ) यदि कोई व्यक्ति उस समय उपकरण को छू भी ले, तो उसके शरीर से करंट नहीं बहेगा और वह घातक बिजली के झटके (Electric Shock) से बच जाएगा। अतः यह जीवन रक्षा के लिए अनिवार्य है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

फ्लेमिंग के वामहस्त और दक्षिण-हस्त नियमों के उपयोग में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वामहस्त नियम (Left-hand) विद्युत मोटर (चालक पर बल ज्ञात करने) के लिए है; दक्षिण-हस्त नियम (Right-hand) विद्युत जनरेटर (प्रेरित धारा ज्ञात करने) के लिए है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र केंद्र पर सबसे अधिक और किनारों पर कम होता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

परिनालिका के भीतर सभी स्थानों पर क्षेत्र रेखाएं समानांतर होती हैं, अतः इसके भीतर चुंबकीय क्षेत्र पूर्णतः एकसमान (Uniform) होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

घरेलू तारों के रंगों में गलती करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विद्युन्मय (Live) = लाल/भूरा; उदासीन (Neutral) = काला/नीला; भूसंपर्क (Earth) = हरा/पीला।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत में प्रत्यावर्ती धारा (AC) की आवृत्ति 60 Hz लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भारत में AC की मानक आवृत्ति 50 Hz (50 साइकिल प्रति सेकंड) और वोल्टेज 220 V होता है (अमेरिका में 60 Hz, 110 V होता है)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

फ्यूज को उदासीन तार (Neutral) में जोड़ देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

फ्यूज को सदैव सजीव तार (Live wire) के श्रेणीक्रम में ही जोड़ा जाता है, ताकि फ्यूज उड़ने पर उपकरण का संपर्क 220 V सप्लाई से पूरी तरह कट जाए।

विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव, परिनालिका एवं घरेलू परिपथ सुरक्षा चार्ट

विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव एवं घरेलू परिपथ सुरक्षा (Magnetic Effects & Domestic Safety) चुंबकीय क्षेत्र एवं परिनालिका (Solenoid) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Thumb Rule): • अंगूठा = विद्युत धारा (I) की दिशा • मुड़ी उँगलियाँ = संकेंद्रीय चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सीधे तार का क्षेत्र: B ∝ I तथा B ∝ 1/r परिनालिका एवं विद्युत चुंबक (Electromagnet): • परिनालिका का क्षेत्र छड़ चुंबक के समान (N व S ध्रुव) • भीतर चुंबकीय क्षेत्र पूर्णतः एकसमान (Uniform) • नर्म लोहे की छड़ रखने पर विद्युत चुंबक बनता है • धारा बंद \to चुंबकत्व तुरंत समाप्त (अस्थायी चुंबक) फ्लेमिंग का वामहस्त नियम (Motor Principle): • तर्जनी: चुंबकीय क्षेत्र (B) • मध्यमा: विद्युत धारा (I) • अँगूठा: चालक पर लगने वाला बल (गति / Force) घरेलू विद्युत परिपथ एवं जीवन सुरक्षा घरेलू परिपथ के 3 तार (220 V, 50 Hz AC): 1. सजीव तार (Live - लाल/भूरा): +220 V (मुख्य धारा) 2. उदासीन तार (Neutral - काला/नीला): 0 V (वापसी मार्ग) 3. भूसंपर्क तार (Earth - हरा/पीला): 0 V (सुरक्षा कवच) Live व Neutral के बीच कुल विभवांतर = 220 V भूसंपर्क तार का सुरक्षा कवच (Earth Safety): • धातु आवरण (प्रेस, हीटर, कूलर) को जमीन से जोड़ता है • लीकेज करंट को शून्य प्रतिरोध से पृथ्वी में भेजता है • उपयोगकर्ता को घातक विद्युत झटके (Shock) से बचाता है लघुपथन (Short-Circuit) व अतिभारण (Overload): • लघुपथन: Live व Neutral सीधे मिले \to R=0 \to तीव्र धारा • अतिभारण: एक ही सॉकेट पर अत्यधिक उच्च शक्ति उपकरण \to बचाव: सजीव तार में उचित रेटिंग का फ्यूज / MCB

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
ओरस्टेड के प्रयोग से सिद्ध हुआ कि विद्युत धारावाही चालक अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
मुख्य बिंदु 2
चुंबकीय क्षेत्र सदिश राशि है (मात्रक टेस्ला, T); क्षेत्र रेखाएं चुंबक के बाहर N से S तथा अंदर S से N की ओर बंद वक्र बनाती हैं।
मुख्य बिंदु 3
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं क्योंकि कटान बिंदु पर दो दिशाएं संभव नहीं हैं।
मुख्य बिंदु 4
दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम: अंगूठा धारा की दिशा में हो तो मुड़ी उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा दर्शाती हैं।
मुख्य बिंदु 5
परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र सभी स्थानों पर एकसमान (Uniform) होता है; इसके अंदर नर्म लोहा रखकर विद्युत चुंबक बनता है।
मुख्य बिंदु 6
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम: तर्जनी (क्षेत्र B), मध्यमा (धारा I) और अंगूठा चालक पर लगने वाले बल (F) की दिशा दर्शाता है (विद्युत मोटर सिद्धांत)।
मुख्य बिंदु 7
विद्युत चुंबकीय प्रेरण: चुंबक और कुंडली की आपेक्षिक गति से प्रेरित धारा उत्पन्न होती है (दिशा: फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम)।
मुख्य बिंदु 8
भारत में घरेलू बिजली 220 V, 50 Hz प्रत्यावर्ती धारा (AC) है, जो बिना अधिक ऊर्जा हानि के लंबी दूरी तक संचरित की जा सकती है।
मुख्य बिंदु 9
घरेलू परिपथ में 3 तार होते हैं: सजीव (Live - लाल), उदासीन (Neutral - काला), और भूसंपर्क (Earth - हरा)।
मुख्य बिंदु 10
भूसंपर्क तार उपकरण के धातु आवरण से लीकेज करंट को जमीन में भेजकर उपयोगकर्ता को जानलेवा झटके से बचाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को कभी प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि यदि वे प्रतिच्छेद करेंगी, तो प्रतिच्छेद बिंदु पर दो स्पर्श रेखाएं होंगी अर्थात चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएं होंगी, जो कि असंभव है।
2
2. परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की क्या विशेषता होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं समानांतर होती हैं, जिसका अर्थ है कि भीतर चुंबकीय क्षेत्र सभी बिंदुओं पर पूर्णतः एकसमान (Uniform) होता है।
3
3. विद्युत मोटर में विभक्त वलय (Split Rings / Commutator) की क्या भूमिका है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: विभक्त वलय दिक्परिवर्तक का कार्य करता है; यह प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद कुंडली में धारा की दिशा को उलट देता है, जिससे कुंडली लगातार एक ही दिशा में घूमती रहती है।
4
4. भारत में उत्पादित प्रत्यावर्ती धारा (AC) की आवृत्ति कितनी है और यह एक सेकंड में कितनी बार अपनी दिशा बदलती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: आवृत्ति 50 Hz है; प्रत्येक चक्र में धारा दो बार दिशा बदलती है, अतः 1 सेकंड में यह 100 बार अपनी दिशा बदलती है (प्रत्येक 1/100 सेकंड में)।
5
5. विद्युत फ्यूज को परिपथ में किस तार के साथ और किस क्रम में जोड़ा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: विद्युत फ्यूज को सदैव सजीव तार (Live wire) के साथ श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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