किसी चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसके चुंबकीय बल का संसूचन (अनुभव) किया जा सकता है, उस चुंबक का चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) कहलाता है।
- चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश राशि (Vector quantity) है, जिसका परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।
- इसका SI मात्रक टेस्ला (Tesla, T) है।
(क) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं (Magnetic Field Lines)
चुंबकीय क्षेत्र को निरूपित करने के लिए खींचे गए वे काल्पनिक सतत वक्र जिन पर कोई स्वतंत्र काल्पनिक उत्तरी ध्रुव गमन करेगा, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कहलाती हैं।
(ख) चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के 4 प्रमुख गुण (CBSE Board पसंदीदा 3 अंक):
- दिशा (उत्तरी से दक्षिणी ध्रुव): चुंबक के बाहर क्षेत्र रेखाएं उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं; जबकि चुंबक के अंदर इनकी दिशा दक्षिणी ध्रुव (S) से उत्तरी ध्रुव (N) की ओर होती है। अतः ये रेखाएं बंद सतत वक्र (Closed continuous loops) बनाती हैं।
- स्पर्श रेखा द्वारा दिशा: क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की परिणामी दिशा को दर्शाती है।
- क्षेत्र की प्रबलता (सघनता): जहाँ क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे के अत्यधिक निकट (सघन / Crowded) होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अत्यधिक प्रबल होता है (जैसे चुंबक के ध्रुवों के समीप); और जहाँ रेखाएं दूर-दूर होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल होता है।
- दो क्षेत्र रेखाएं कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं (प्रतिच्छेद नहीं करतीं):
यदि दो क्षेत्र रेखाएं किसी बिंदु पर एक-दूसरे को काटेंगी, तो कटान बिंदु पर दो स्पर्श रेखाएं खींची जा सकेंगी, जिसका अर्थ होगा कि उस एक ही बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएं होंगी—जो कि भौतिक रूप से सर्वथा असंभव है!