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CBSE • कक्षा X • Science • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन

प्रकाश (Light) ऊर्जा का वह रूप है जो हमारी आँखों की रेटिना को संवेदित करके हमें इस सुंदर और रंगबिरंगे संसार को देखने की दृष्टिगत अनुभूति प्रदान करता है। निर्वात में प्रकाश की चाल प्रकृति में ज्ञात सर्वाधिक वेग—लगभग $3 \times 10^8\text{ m/s}$ ($3,00,000\text{ km/s}$)—होती है। प्रकाश सदैव एक सरल रेखा में गमन करता प्रतीत होता है, जिसे प्रकाश का ऋजुरेखीय संचरण कहते हैं। प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत प्रकाश के दो अत्यंत महत्वपूर्ण मूलभूत व्यवहारों—परावर्तन (Reflection) तथा अपवर्तन (Refraction)—का अध्ययन किया जाता है। जब प्रकाश की किरण किसी चिकनी, चमकदार या पॉलिशदार सतह (जैसे समतल या गोलीय दर्पण) पर गिरती है और टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, तो इस परिघटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। परावर्तन के दो सार्वभौमिक नियम हैं: (1) आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है ($\angle i = \angle r$), तथा (2) आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं। गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं: अवतल दर्पण (Concave Mirror)—जिसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर वक्रित होता है और यह किरणों को अभिसरित (Converge) करता है, तथा उत्तल दर्पण (Convex Mirror)—जिसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है और यह किरणों को अपसारित (Diverge) कर सदैव आभासी, सीधा व छोटा प्रतिबिंब बनाता है (वाहनों के पश्च-दृश्य दर्पण में उपयोगी)। नई कार्तीय चिह्न परिपाटी के आधार पर दर्पण सूत्र $\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$ तथा आवर्धन $m = -\frac{v}{u} = \frac{h'}{h}$ द्वारा प्रतिबिंब की स्थिति, आकार और प्रकृति की सटीक गणना की जाती है। जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछी प्रवेश करती है, तो दोनों माध्यमों के पृथक्कारी पृष्ठ पर उसके संचरण की दिशा और चाल बदल जाती है। इस परिघटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। अपवर्तन का कारण भिन्न-भिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल का भिन्न-भिन्न होना है। स्नेल का अपवर्तन नियम $\frac{\sin i}{\sin r} = \text{स्थिरांक} = n_{21}$ माध्यम के अपवर्तनांक को परिभाषित करता है। गोलीय लेंस दो प्रकार के होते हैं: उत्तल लेंस (अभिसारी) तथा अवतल लेंस (अपसारी)। लेंस सूत्र $\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$, आवर्धन $m = \frac{v}{u} = \frac{h'}{h}$ तथा लेंस की क्षमता $P = \frac{1}{f\text{ (मीटर में)}}$ (मात्रक: डायोप्टर, D) प्रकाशिकी के सबसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत हैं। झारखंड बोर्ड (CBSE Class 10) में इस अध्याय से किरण आरेख और संख्यात्मक प्रश्नों पर 8 से 10 अंक के प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।

🔍 क्या आपने कभी सोचा है: पानी के गिलास में डूबी पेंसिल मुड़ी हुई क्यों दिखती है, और एक साधारण सा काँच सूर्य की किरणों से आग कैसे लगा देता है?

जरा सोचिए: जब आप किसी साफ पानी से भरे शीशे के गिलास में एक सीधी पेंसिल डालते हैं, तो हवा और पानी के जोड़ पर पेंसिल अचानक मुड़ी हुई या टूटी हुई क्यों नजर आती है? इतना ही नहीं, यदि आप किसी स्विमिंग पूल या पानी की बाल्टी की तली को ऊपर से देखें, तो उसकी गहराई अपनी वास्तविक गहराई से काफी उथली (कम) क्यों दिखाई देती है? और उससे भी बड़ा आश्चर्य: एक छोटा सा गोल काँच का टुकड़ा (उत्तल लेंस) जब आप धूप में पकड़ते हैं, तो वह मीलों दूर स्थित सूर्य की अनंत ऊष्मा को एक नन्हे से बिंदु पर केंद्रित करके कागज को धू-धू कर जला देता है! कार के बगल वाले शीशे पर एक चेतावनी लिखी होती है: *"Objects in the mirror are closer than they appear"*—गाड़ी चलाने वाले को पीछे के बड़े-बड़े ट्रक उस नन्हे से शीशे में इतने छोटे और सीधे कैसे दिख जाते हैं? यह कोई जादू नहीं, बल्कि प्रकाश की किरणों के मुड़ने, टकराने और नाचने का शुद्ध गणित और भौतिकी है! आइए, प्रकाश के इस विस्मयकारी संसार के रहस्यों को खोलते हैं!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों अनिवार्य है?

  1. बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक अंक भार: CBSE Class 10वीं बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से 8 से 10 अंकों के प्रश्न प्रतिवर्ष आते हैं। अवतल दर्पण के 6 किरण आरेख, दर्पण एवं लेंस सूत्र पर आधारित संख्यात्मक प्रश्न (Numericals), स्नेल का नियम तथा लेंस की क्षमता (Dioptre) परीक्षा के अनिवार्य प्रश्न हैं।
  2. NEET एवं JEE (Ray Optics) का मजबूत आधार: कक्षा 11वीं और 12वीं की भौतिकी का अत्यंत महत्वपूर्ण खंड 'Geometric Optics' पूरी तरह इसी बुनियादी अध्याय पर टिका हुआ है।
  3. दैनिक जीवन एवं प्रौद्योगिकी में अनुप्रयोग: चश्मा, सूक्ष्मदर्शी (Microscope), दूरबीन (Telescope), कैमरा लेंस, वाहनों की हेडलाइट्स, सौर कुकर और ऑप्टिकल फाइबर के कार्य सिद्धांत को समझना।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्रकाश का ऋजुरेखीय संचरण (प्रकाश सीधी रेखा में चलता है)।
  • समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की विशेषताएं (समान दूरी, आभासी, पार्श्व उत्क्रमण)।
  • त्रिकोणमिति के बुनियादी अनुपात (sin, cos) एवं बुनियादी बीजगणित (समीकरण हल करना)।
  • निर्देशांक ज्यामिति की चिह्न परिपाटी (X-अक्ष, Y-अक्ष, धनात्मक व ऋणात्मक दिशाएं)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • परावर्तन के नियमों और अपवर्तन के नियमों (स्नेल के नियम) की वैज्ञानिक व्याख्या कर सकेंगे।
  • अवतल एवं उत्तल दर्पणों द्वारा विभिन्न स्थितियों पर रखी वस्तु के प्रतिबिंब निर्माण के किरण आरेख खींच सकेंगे।
  • नई कार्तीय चिह्न परिपाटी का सही उपयोग करते हुए दर्पण सूत्र $\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$ पर आधारित संख्यात्मक प्रश्नों को हल कर सकेंगे।
  • निरपेक्ष अपवर्तनांक एवं सापेक्ष अपवर्तनांक ($n_{21} = v_1 / v_2$) के संबंधों की गणना कर सकेंगे।
  • उत्तल एवं अवतल लेंसों के किरण आरेख बनाकर लेंस सूत्र $\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$ और लेंस की क्षमता ($P = 1/f$) का मान डायोप्टर में ज्ञात कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. प्रकाश का परावर्तन एवं गोलीय दर्...
2 2. नई कार्तीय चिह्न परिपाटी, दर्पण...
3 3. प्रकाश का अपवर्तन एवं अपवर्तनांक...
4 4. गोलीय लेंसों द्वारा अपवर्तन (Ref...
5 5. लेंस सूत्र, आवर्धन एवं लेंस की क...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. प्रकाश का परावर्तन एवं गोलीय दर्पण (Reflection & Spherical Mirrors)

जब प्रकाश की किरण किसी माध्यम से चलकर किसी परावर्तक सतह से टकराती है और पुनः उसी माध्यम में लौट आती है, तो इसे प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) कहते हैं।

(क) परावर्तन के दो सार्वभौमिक नियम

  1. आपतन कोण ($i$) सदैव परावर्तन कोण ($r$) के बराबर होता है: $\angle i = \angle r$।
  2. आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण—तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं।

(ख) गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors) एवं प्रमुख शब्दावली

ऐसे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ किसी खोखले काँच के गोले का एक भाग होता है, गोलीय दर्पण कहलाते हैं:

  • अवतल दर्पण (Concave Mirror): इसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर दबा (वक्रित) होता है। यह अनंत से आने वाली समानांतर प्रकाश किरणों को अपने मुख्य फोकस पर अभिसरित (Converge) करता है।
  • उत्तल दर्पण (Convex Mirror): इसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है। यह समानांतर प्रकाश किरणों को अपने मुख्य फोकस से अपसारित (Diverge) करता हुआ प्रतीत कराता है।
पारिभाषिक पद परिभाषा एवं भौतिक अर्थ प्रतीक एवं सूत्र
ध्रुव (Pole) गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ का केंद्र बिंदु। $P$ (दर्पण की सतह पर स्थित)
वक्रता केंद्र (Center of Curvature) उस खोखले गोले का केंद्र जिसका दर्पण एक भाग है। $C$ (अवतल में आगे, उत्तल में पीछे)
वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature) ध्रुव से वक्रता केंद्र के बीच की दूरी ($PC$)। $R$ ($R = 2f$)
मुख्य अक्ष (Principal Axis) ध्रुव ($P$) और वक्रता केंद्र ($C$) से होकर गुजरने वाली सीधी काल्पनिक रेखा। रेखा $PC$
मुख्य फोकस (Principal Focus) मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली किरणें परावर्तन के पश्चात जिस बिंदु पर मिलती हैं (अवतल) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल)। $F$
फोकस दूरी (Focal Length) ध्रुव ($P$) से मुख्य फोकस ($F$) के बीच की दूरी। $f$ ($f = \frac{R}{2}$)

(ग) अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण की 6 स्थितियां (बोर्ड में 5 अंक)

वस्तु (बिंब) की स्थिति प्रतिबिंब की स्थिति प्रतिबिंब का आकार प्रतिबिंब की प्रकृति दैनिक उपयोग
1. अनंत पर फोकस $F$ पर अत्यधिक छोटा (बिंदुवत) वास्तविक एवं उल्टा सौर कुकर, डिश एंटीना
2. $C$ से परे (अनंत व $C$ के बीच) $F$ और $C$ के बीच छोटा वास्तविक एवं उल्टा ऑप्टिकल उपकरण
3. वक्रता केंद्र $C$ पर वक्रता केंद्र $C$ पर ही वस्तु के ठीक बराबर वास्तविक एवं उल्टा आवर्धन $m = -1$ का मापन
4. $C$ और $F$ के बीच $C$ से परे (अनंत व $C$ के बीच) बड़ा (विवर्धित) वास्तविक एवं उल्टा प्रोजेक्टर सिनेमा
5. फोकस $F$ पर अनंत पर अत्यधिक बड़ा (अति विवर्धित) वास्तविक एवं उल्टा सर्चलाइट, कार की हेडलाइट्स
6. $P$ और $F$ के बीच दर्पण के पीछे बड़ा (विवर्धित) आभासी एवं सीधा दाढ़ी बनाने का शीशा (Shaving Mirror), दंत चिकित्सक (Dentist Mirror)
उत्तल दर्पण के उपयोग (CBSE Board पसंदीदा 2 अंक):
उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों के पश्च-दृश्य दर्पण (Rear-view / Wing Mirror) के रूप में किया जाता है क्योंकि: (1) यह सदैव सीधा एवं छोटा प्रतिबिंब बनाता है, और (2) बाहर की ओर वक्रित होने के कारण इसका दृष्टि-क्षेत्र (Field of View) अत्यंत विस्तृत होता है, जिससे चालक को पीछे का एक विशाल सड़क क्षेत्र दिखाई देता है।

2. नई कार्तीय चिह्न परिपाटी, दर्पण सूत्र एवं आवर्धन

संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने के लिए गोलीय दर्पणों में दूरियां मापने हेतु नई कार्तीय चिह्न परिपाटी (New Cartesian Sign Convention) का पालन किया जाता है:

(क) चिह्न परिपाटी के 5 स्वर्णिम नियम:

  1. बिंब (वस्तु) को सदैव दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है (आपतित प्रकाश बाईं से दाईं ओर चलता है)।
  2. सभी दूरियां दर्पण के ध्रुव ($P$) को मूल बिंदु $(0,0)$ मानकर मुख्य अक्ष के अनुदिश मापी जाती हैं।
  3. मूल बिंदु ($P$) के दाईं ओर ($+X$ अक्ष) मापी गई दूरियां धनात्मक ($+$) ली जाती हैं।
  4. मूल बिंदु ($P$) के बाईं ओर ($-X$ अक्ष) मापी गई दूरियां ऋणात्मक ($-$) ली जाती हैं।
  5. मुख्य अक्ष के लंबवत ऊपर की ओर ($+Y$ अक्ष) मापी गई ऊँचाई धनात्मक ($+$) तथा नीचे की ओर ($-Y$ अक्ष) मापी गई ऊँचाई ऋणात्मक ($-$) ली जाती है।
राशि अवतल दर्पण (Concave) उत्तल दर्पण (Convex)
फोकस दूरी ($f$) सदैव ऋणात्मक ($-$) सदैव धनात्मक ($+$)
वस्तु दूरी ($u$) सदैव ऋणात्मक ($-$) सदैव ऋणात्मक ($-$)
प्रतिबिंब दूरी ($v$) वास्तविक के लिए: ऋणात्मक ($-$) | आभासी के लिए: धनात्मक ($+$) सदैव धनात्मक ($+$) (दर्पण के पीछे)
आवर्धन ($m$) वास्तविक एवं उल्टा: ऋणात्मक ($-$) | आभासी एवं सीधा: धनात्मक ($+$) सदैव धनात्मक ($+$) तथा $m < 1$

(ख) दर्पण सूत्र एवं रेखीय आवर्धन:

दर्पण सूत्र (Mirror Formula):

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$$

जहाँ $u$ = बिंब दूरी, $v$ = प्रतिबिंब दूरी, $f$ = फोकस दूरी।

रेखीय आवर्धन (Linear Magnification - $m$):

प्रतिबिंब की ऊँचाई ($h'$) तथा बिंब की ऊँचाई ($h$) के अनुपात को आवर्धन कहते हैं:

$$m = \frac{\text{प्रतिबिंब की ऊँचाई } (h')}{\text{बिंब की ऊँचाई } (h)} = -\frac{v}{u}$$
अत्यंत महत्वपूर्ण निष्कर्ष:
• यदि $m$ का मान ऋणात्मक ($-$) आए $\to$ प्रतिबिंब वास्तविक एवं उल्टा है।
• यदि $m$ का मान धनात्मक ($+$) आए $\to$ प्रतिबिंब आभासी एवं सीधा है।
• यदि $|m| > 1$ हो $\to$ प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा (विवर्धित) है।
• यदि $|m| = 1$ हो $\to$ प्रतिबिंब वस्तु के बराबर आकार का है ($C$ पर)।
• यदि $|m| < 1$ हो $\to$ प्रतिबिंब वस्तु से छोटा है।

3. प्रकाश का अपवर्तन एवं अपवर्तनांक (Refraction & Snell's Law)

जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछी प्रवेश करती है, तो अपने सीधे पथ से विचलित हो जाती है। प्रकाश की किरण के मुड़ने की इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light) कहते हैं।

(क) अपवर्तन का मूल कारण एवं नियम:

  • मूल कारण: भिन्न-भिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल (Speed of Light) भिन्न-भिन्न होती है।
  • विरल से सघन माध्यम (Rarer to Denser): जब प्रकाश विरल माध्यम (जैसे वायु) से सघन माध्यम (जैसे काँच या जल) में जाता है, तो इसकी चाल घट जाती है और यह अभिलंब की ओर झुक जाती है ($\angle i > \angle r$)।
  • सघन से विरल माध्यम (Denser to Rarer): जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाता है, तो इसकी चाल बढ़ जाती है और यह अभिलंब से दूर हट जाती है ($\angle i < \angle r$)।

(ख) अपवर्तन के दो नियम एवं स्नेल का नियम (Snell's Law)

  1. प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिंदु पर दोनों माध्यमों के पृथक्कारी पृष्ठ पर अभिलंब—तीनों एक ही तल में होते हैं।
  2. द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): प्रकाश के किसी निश्चित रंग तथा निश्चित माध्यमों के युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या ($\sin i$) तथा अपवर्तन कोण की ज्या ($\sin r$) का अनुपात एक नियतांक (स्थिरांक) होता है: $$\frac{\sin i}{\sin r} = \text{स्थिरांक} = n_{21}$$ इस स्थिरांक को माध्यम 1 के सापेक्ष माध्यम 2 का अपवर्तनांक (Refractive Index) कहते हैं।

(ग) निरपेक्ष अपवर्तनांक एवं सापेक्ष अपवर्तनांक के सूत्र:

प्रकार परिभाषा एवं सूत्र विशिष्ट मान
निरपेक्ष अपवर्तनांक ($n_m$) निर्वात (या वायु) में प्रकाश की चाल ($c$) तथा माध्यम में प्रकाश की चाल ($v$) का अनुपात:
$$n = \frac{c}{v} = \frac{3 \times 10^8\text{ m/s}}{v}$$
• वायु: $1.0003 \approx 1.0$
• जल: $n_w = 1.33 = \frac{4}{3}$
• क्राउन काँच: $n_g = 1.52 = \frac{3}{2}$
• हीरा: $n = 2.42$ (प्रकृति में सर्वाधिक)
सापेक्ष अपवर्तनांक ($n_{21}$) माध्यम 1 में चाल ($v_1$) तथा माध्यम 2 में चाल ($v_2$) का अनुपात:
$$n_{21} = \frac{v_1}{v_2} = \frac{n_2}{n_1}$$
$$n_{12} = \frac{1}{n_{21}}$$

(घ) काँच की आयताकार सिल्ली (Glass Slab) से अपवर्तन एवं पार्श्व विस्थापन

जब प्रकाश की किरण काँच की सिल्ली में प्रवेश करती है और फिर बाहर निकलती है, तो:

  • आपतित किरण और निर्गत किरण (Emergent Ray) एक-दूसरे के समानांतर होती हैं (अर्थात आपतन कोण = निर्गत कोण $\Rightarrow \angle i = \angle e$)।
  • निर्गत किरण अपनी मूल दिशा से थोड़ा बगल में खिसक जाती है। आपतित किरण की मूल दिशा तथा निर्गत किरण के मध्य लंबवत दूरी को पार्श्व विस्थापन (Lateral Displacement) कहते हैं।
  • पार्श्व विस्थापन सिल्ली की मोटाई, अपवर्तनांक तथा आपतन कोण बढ़ने पर बढ़ता है।

4. गोलीय लेंसों द्वारा अपवर्तन (Refraction by Spherical Lenses)

दो पृष्ठों से घिरा हुआ कोई पारदर्शी माध्यम, जिसका एक या दोनों पृष्ठ गोलीय हों, लेंस (Lens) कहलाता है:

  • उत्तल लेंस (Convex Lens / द्वित्तल लेंस): यह बीच में से मोटा और किनारों से पतला होता है। यह अपने ऊपर आपतित होने वाले समानांतर प्रकाश पुंज को एक बिंदु पर अभिसरित कर देता है, अतः इसे अभिसारी लेंस (Converging Lens) कहते हैं।
  • अवतल लेंस (Concave Lens / द्वयवतल लेंस): यह बीच में से पतला और किनारों से मोटा होता है। यह समानांतर प्रकाश किरणों को अपसारित (फैला) देता है, अतः इसे अपसारी लेंस (Diverging Lens) कहते हैं।

(क) उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण की 6 स्थितियां

वस्तु की स्थिति प्रतिबिंब की स्थिति प्रतिबिंब का आकार प्रतिबिंब की प्रकृति अनुप्रयोग
1. अनंत पर फोकस $F_2$ पर अत्यधिक छोटा (बिंदुवत) वास्तविक एवं उल्टा दूरबीन का अभिदृश्यक
2. $2F_1$ से परे $F_2$ और $2F_2$ के बीच छोटा वास्तविक एवं उल्टा कैमरा लेंस
3. $2F_1$ पर $2F_2$ पर ही वस्तु के बराबर आकार वास्तविक एवं उल्टा टेरेस्ट्रियल दूरबीन ($m = -1$)
4. $F_1$ और $2F_1$ के बीच $2F_2$ से परे बड़ा (विवर्धित) वास्तविक एवं उल्टा प्रोजेक्टर, सूक्ष्मदर्शी
5. फोकस $F_1$ पर अनंत पर अत्यधिक बड़ा वास्तविक एवं उल्टा सर्चलाइट कोलीमीटर
6. $F_1$ और प्रकाशिक केंद्र $O$ के बीच वस्तु की ही ओर (उसी तरफ) बड़ा (विवर्धित) आभासी एवं सीधा सरल सूक्ष्मदर्शी / आवर्धक लेंस (Magnifying Glass)

(ख) अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण

अवतल लेंस वस्तु की प्रत्येक स्थिति (चाहे वस्तु अनंत पर हो या कहीं भी) के लिए सदैव आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा प्रतिबिंब ही बनाता है। यह प्रतिबिंब सदैव लेंस के प्रकाशिक केंद्र $O$ तथा फोकस $F_1$ के बीच बनता है।

5. लेंस सूत्र, आवर्धन एवं लेंस की क्षमता (Lens Formula & Power of Lens)

(क) लेंस सूत्र (Lens Formula)

बिंब दूरी ($u$), प्रतिबिंब दूरी ($v$) तथा फोकस दूरी ($f$) के मध्य संबंध को लेंस सूत्र कहते हैं:

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$
सावधानी (दर्पण बनाम लेंस सूत्र):
• दर्पण सूत्र में धन चिह्न ($+$) होता है: $\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$
• लेंस सूत्र में ऋण चिह्न ($-$) होता है: $\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$

(ख) लेंस द्वारा आवर्धन ($m$)

$$m = \frac{\text{प्रतिबिंब की ऊँचाई } (h')}{\text{बिंब की ऊँचाई } (h)} = +\frac{v}{u}$$

(ध्यान दें: लेंस के आवर्धन सूत्र में $v/u$ धनात्मक होता है, जबकि दर्पण में $-v/u$ होता है)।

(ग) लेंस की क्षमता (Power of a Lens - $P$)

किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसारित करने की सामर्थ्य को उस लेंस की क्षमता (Power) कहते हैं।

  • वैज्ञानिक परिभाषा: किसी लेंस की फोकस दूरी ($f$, मीटर में) के व्युत्क्रम (Reciprocal) को लेंस की क्षमता कहते हैं: $$P = \frac{1}{f\text{ (मीटर में)}} = \frac{100}{f\text{ (सेमी में)}}$$
  • SI मात्रक: लेंस की क्षमता का SI मात्रक डायोप्टर (Dioptre, प्रतीक: D) होता है।
  • 1 डायोप्टर की परिभाषा (बोर्ड में 1 अंक): 1 डायोप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी ठीक 1 मीटर हो ($1\text{ D} = 1\text{ m}^{-1}$)।
  • चिह्न:
    • उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है $\Rightarrow$ इसकी क्षमता धनात्मक ($+D$) होती है।
    • अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है $\Rightarrow$ इसकी क्षमता ऋणात्मक ($-D$) होती है।
  • लेंसों का संयोजन (Combination of Lenses): यदि कई पतले लेंसों को संपर्क में रखा जाए, तो कुल क्षमता व्यक्तिगत क्षमताओं के बीजगणितीय योग के बराबर होती है: $$P = P_1 + P_2 + P_3 + \dots$$

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

वक्रता त्रिज्या एवं फोकस दूरी संबंध
R = 2f अथवा f = {R}{2}
गोलीय दर्पण सूत्र
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$$
दर्पण का रेखीय आवर्धन
$$m = \frac{h'}{h} = -\frac{v}{u}$$
अपवर्तन का स्नेल नियम
$$\frac{\sin i}{\sin r} = n_{21} = \frac{n_2}{n_1}$$
माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक
$$n = \frac{c}{v} = \frac{3 \times 10^8\text{ m/s}}{v}$$
सापेक्ष अपवर्तनांक (चाल के पदों में)
$$n_{21} = \frac{v_1}{v_2} = \frac{n_2}{n_1}$$
गोलीय लेंस सूत्र
$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$
लेंस का रेखीय आवर्धन
$$m = \frac{h'}{h} = +\frac{v}{u}$$
लेंस की क्षमता (मीटर में)
P = {1}{f (m)} [मात्रक: डायोप्टर, D]
लेंस की क्षमता (सेमी में)
$$P = \frac{100}{f\text{ (cm)}}$$
लेंसों के संयोजन की क्षमता
$$P_{\text{total}} = P_1 + P_2 + P_3 + \dots$$
काँच की सिल्ली में संबंध
i = e (आपतन कोण = निर्गत कोण)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (CBSE 2023 - 5 अंक): एक 2.0 सेमी ऊँचा बिंब 10 सेमी फोकस दूरी के अवतल दर्पण के सामने 15 सेमी की दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर परदा रखा जाए ताकि उसका सुस्पष्ट प्रतिबिंब प्राप्त हो सके? प्रतिबिंब की प्रकृति, आकार तथा आवर्धन ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: 1. दिए गए मान (चिह्न परिपाटी सहित): • बिंब की ऊँचाई, $h = +2.0\text{ cm}$ • बिंब दूरी, $u = -15\text{ cm}$ (सदैव ऋणात्मक) • अवतल दर्पण की फोकस दूरी, $f = -10\text{ cm}$ (अवतल दर्पण हेतु ऋणात्मक) • प्रतिबिंब दूरी, $v = ?$ • प्रतिबिंब की ऊँचाई, $h' = ?$

2. दर्पण सूत्र का प्रयोग:

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$$

$$\frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u}$$

$$\frac{1}{v} = \frac{1}{-10} - \frac{1}{-15} = -\frac{1}{10} + \frac{1}{15}$$

ल.स. $(10, 15) = 30$:

$$\frac{1}{v} = \frac{-3 + 2}{30} = \frac{-1}{30}$$

$$v = -30\text{ cm}$$

अतः सुस्पष्ट प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए परदे को दर्पण के सामने (बाईं ओर) 30 सेमी की दूरी पर रखना होगा।

3. आवर्धन एवं प्रतिबिंब का आकार:

$$m = -\frac{v}{u} = -\frac{(-30)}{(-15)} = -2$$

चूँकि $m = \frac{h'}{h}$:

$$-2 = \frac{h'}{2.0} \implies h' = -2 \times 2.0 = -4.0\text{ cm}$$

4. निष्कर्ष: • प्रतिबिंब का आकार: $4.0\text{ cm}$ (दोगुना बड़ा) • प्रतिबिंब की प्रकृति: वास्तविक एवं उल्टा ($v$ और $h'$ दोनों ऋणात्मक हैं)।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (CBSE 2022 - 3 अंक): किसी वाहन के पीछे का दृश्य देखने के लिए उपयोग किए गए उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 3.00 मीटर है। यदि एक बस इस दर्पण से 5.00 मीटर की दूरी पर स्थित है, तो प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: 1. दिए गए मान: • वक्रता त्रिज्या, $R = +3.00\text{ m}$ (उत्तल दर्पण हेतु धनात्मक) • फोकस दूरी, $f = \frac{R}{2} = \frac{+3.00}{2} = +1.50\text{ m}$ • बिंब (बस) दूरी, $u = -5.00\text{ m}$ • प्रतिबिंब दूरी, $v = ?$

2. दर्पण सूत्र से:

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u} \implies \frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u}$$

$$\frac{1}{v} = \frac{1}{1.50} - \left(\frac{1}{-5.00}\right) = \frac{1}{1.50} + \frac{1}{5.00} = \frac{10}{15} + \frac{1}{5} = \frac{2}{3} + \frac{1}{5}$$

$$\frac{1}{v} = \frac{10 + 3}{15} = \frac{13}{15} \implies v = \frac{15}{13} = +1.15\text{ m}$$

3. आवर्धन:

$$m = -\frac{v}{u} = -\frac{(+1.15)}{(-5.00)} = +\frac{1.15}{5.00} = +0.23$$

4. परिणाम: • स्थिति: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 1.15 मीटर की दूरी पर बनता है। • प्रकृति: आभासी एवं सीधा ($m$ धनात्मक है)। • आकार: बस का प्रतिबिंब वास्तविक आकार का 0.23 गुना (छोटा) दिखाई देगा।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (CBSE 2021 - 5 अंक): एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 15 सेमी है। किसी बिंब को लेंस से कितनी दूरी पर रखा जाए कि इसका बिंब से 3 गुना बड़ा वास्तविक प्रतिबिंब बने? लेंस सूत्र द्वारा बिंब दूरी और प्रतिबिंब दूरी की गणना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: 1. दिए गए मान: • उत्तल लेंस की फोकस दूरी, $f = +15\text{ cm}$ (उत्तल लेंस हेतु धनात्मक) • प्रतिबिंब वास्तविक है, अतः आवर्धन ऋणात्मक होगा:

$$m = -3$$

• बिंब दूरी, $u = ?$

2. आवर्धन सूत्र से संबंध: लेंस के लिए $m = \frac{v}{u}$:

$$-3 = \frac{v}{u} \implies v = -3u$$

3. लेंस सूत्र में मान प्रतिस्थापित करने पर:

$$\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}$$

$$\frac{1}{15} = \frac{1}{-3u} - \frac{1}{u} = -\frac{1}{3u} - \frac{1}{u}$$

$$\frac{1}{15} = \frac{-1 - 3}{3u} = \frac{-4}{3u}$$

$$3u = -4 \times 15 = -60$$

$$u = \frac{-60}{3} = -20\text{ cm}$$

4. प्रतिबिंब दूरी ($v$):

$$v = -3u = -3(-20) = +60\text{ cm}$$

उत्तर: बिंब को लेंस के सामने 20 सेमी की दूरी पर ($2F_1$ और $F_1$ के बीच) रखना चाहिए, और प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 60 सेमी की दूरी पर ($2F_2$ से परे) वास्तविक, उल्टा और 3 गुना बड़ा बनेगा।

उदाहरण 4
प्रश्न 4 (CBSE 2020 - 3 अंक): प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक की काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? (निर्वात में प्रकाश की चाल = 3 × 10⁸ m/s)। हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है, इस कथन का क्या अभिप्राय है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: (क) काँच में प्रकाश की चाल: निरपेक्ष अपवर्तनांक सूत्र:

$$n = \frac{c}{v} \implies v = \frac{c}{n}$$

दिए गए मान: $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$, $n = 1.50$

$$v = \frac{3 \times 10^8}{1.50} = 2.0 \times 10^8\text{ m/s}$$

अतः काँच में प्रकाश की चाल $2 \times 10^8\text{ m/s}$ ($2,00,000\text{ km/s}$) होगी।

(ख) "हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है" का अभिप्राय: इसका अभिप्राय है कि:

  1. निर्वात में प्रकाश की चाल तथा हीरे में प्रकाश की चाल का अनुपात 2.42 है ($\frac{c}{v_{\text{diamond}}} = 2.42$)।
  2. हीरे में प्रकाश की चाल, वायु में प्रकाश की चाल की तुलना में $\frac{1}{2.42}$ गुना (लगभग 41%) रह जाती है ($v_{\text{diamond}} \approx 1.24 \times 10^8\text{ m/s}$)।
  3. प्रकाशिक रूप से हीरा सबसे अधिक सघन पदार्थ है, जिसके कारण इसमें प्रकाश की चाल न्यूनतम और प्रकाश का मुड़ाव अधिकतम होता है।
उदाहरण 5
प्रश्न 5 (CBSE 2019 - 3 अंक): कोई डॉक्टर +2.0 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। (क) लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। (ख) क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी? (ग) यदि इस लेंस के संपर्क में -0.5 D का दूसरा लेंस रख दिया जाए, तो संयोजन की क्षमता क्या होगी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: (क) फोकस दूरी की गणना: लेंस की क्षमता $P = +2.0\text{ D}$ सूत्र: $P = \frac{1}{f\text{ (m)}} \implies f = \frac{1}{P}$

$$f = \frac{1}{+2.0} = +0.5\text{ m} = +50\text{ cm}$$

लेंस की फोकस दूरी +50 सेमी (या +0.5 मीटर) है।

(ख) लेंस की प्रकृति: चूँकि लेंस की क्षमता ($P$) और फोकस दूरी ($f$) दोनों का मान धनात्मक ($+$) है, अतः यह उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस / Converging Lens) है।

(ग) संयोजन की कुल क्षमता:

$$P_{\text{total}} = P_1 + P_2 = (+2.0\text{ D}) + (-0.5\text{ D}) = +1.5\text{ D}$$

संयोजन की परिणामी क्षमता +1.5 डायोप्टर होगी और यह संयोजन भी एक उत्तल लेंस की भाँति कार्य करेगा।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दर्पण सूत्र में ऋण चिह्न (-) और लेंस सूत्र में धन चिह्न (+) लगा देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कंठस्थ रखें: दर्पण सूत्र में बीच में PLUS होता है (1/f = 1/v + 1/u); लेंस सूत्र में बीच में MINUS होता है (1/f = 1/v - 1/u)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आवर्धन सूत्र में ऋण चिह्न भूल जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

दर्पण के लिए m = -v/u (माइनस होता है); लेंस के लिए m = +v/u (प्लस होता है)। दोनों एक-दूसरे के विपरीत हैं!

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लेंस की क्षमता P = 1/f निकालते समय f को सेमी में ही रख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यदि f सेमी में हो, तो P = 100/f का उपयोग करें; अथवा f को पहले मीटर में बदलें, तभी उत्तर डायोप्टर में सही आएगा।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

उत्तल दर्पण और अवतल दर्पण की फोकस दूरी के चिह्न में गलती।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अवतल दर्पण/लेंस की फोकस दूरी सदैव ऋणात्मक (-) होती है; उत्तल दर्पण/लेंस की फोकस दूरी सदैव धनात्मक (+) होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अपवर्तनांक का मात्रक लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अपवर्तनांक समान राशियों (चालों का अनुपात c/v) का अनुपात है, अतः यह एक मात्रकहीन (Unitless) और विमाहीन संख्या है।

गोलीय दर्पण एवं गोलीय लेंस: किरण आरेख एवं चिह्न परिपाटी तुलनात्मक चार्ट

प्रकाशिकी: दर्पण एवं लेंस सूत्र, चिह्न परिपाटी एवं मुख्य किरण आरेख गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors) दर्पण सूत्र एवं आवर्धन (Mirror Formulas): 1/f = 1/v + 1/u | m = -v/u = h'/h f = R / 2 (वक्रता त्रिज्या की आधी) चिह्न परिपाटी (Sign Convention): • वस्तु दूरी (u): सदैव ऋणात्मक (-u) • अवतल दर्पण: f = ऋणात्मक (-), R = ऋणात्मक (-) • उत्तल दर्पण: f = धनात्मक (+), R = धनात्मक (+) • वास्तविक प्रतिबिंब: m = ऋणात्मक | आभासी: m = धनात्मक प्रमुख अनुप्रयोग (Key Applications): 1. अवतल (P व F के बीच): बड़ा सीधा आभासी प्रतिबिंब \to दाढ़ी बनाने का शीशा, दंत चिकित्सक दर्पण 2. उत्तल दर्पण: सदैव सीधा छोटा विस्तृत दृष्टि क्षेत्र \to वाहनों का साइड/रियर-व्यू मिरर (Rear View) गोलीय लेंस एवं क्षमता (Lenses & Power) लेंस सूत्र एवं आवर्धन (Lens Formulas): 1/f = 1/v - 1/u | m = +v/u = h'/h ध्यान दें: लेंस में ऋण (-) और m में धन (+) लेंस की क्षमता (Power of Lens - P): P = 1 / f (मीटर में) = 100 / f (सेमी में) • मात्रक: डायोप्टर (D) [1 D = 1 m⁻¹] • उत्तल लेंस: f > 0 \to क्षमता धनात्मक (+D) • अवतल लेंस: f < 0 \to क्षमता ऋणात्मक (-D) अपवर्तन एवं स्नेल का नियम (Refraction): sin i / sin r = n₂₁ = n₂ / n₁ = v₁ / v₂ • निरपेक्ष अपवर्तनांक: n = c / v (काँच: 1.5, जल: 1.33) • हीरा: n = 2.42 (सर्वाधिक प्रकाशिक घनत्व) • संयोजन क्षमता: P_total = P₁ + P₂ + P₃

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
प्रकाश का परावर्तन: आपतन कोण = परावर्तन कोण (∠i = ∠r); आपतित किरण, परावर्तित किरण व अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
मुख्य बिंदु 2
गोलीय दर्पण में फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है: f = R / 2।
मुख्य बिंदु 3
अवतल दर्पण वास्तविक व उल्टे प्रतिबिंब बनाता है, केवल P व F के बीच रखने पर आभासी, सीधा व बड़ा प्रतिबिंब बनाता है (शेविंग मिरर)।
मुख्य बिंदु 4
उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा व छोटा प्रतिबिंब बनाता है और विस्तृत दृष्टि क्षेत्र प्रदान करता है (वाहनों का पश्च-दृश्य दर्पण)।
मुख्य बिंदु 5
दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u; रेखीय आवर्धन m = h'/h = -v/u।
मुख्य बिंदु 6
प्रकाश का अपवर्तन माध्यम बदलने पर प्रकाश की चाल में परिवर्तन के कारण होता है; स्नेल का नियम: sin i / sin r = स्थिरांक = n₂₁।
मुख्य बिंदु 7
निरपेक्ष अपवर्तनांक n = c / v; हीरे का अपवर्तनांक 2.42 प्रकृति में सर्वाधिक है।
मुख्य बिंदु 8
उत्तल लेंस प्रकाश को अभिसरित करता है (f धनात्मक); अवतल लेंस प्रकाश को अपसारित करता है (f ऋणात्मक)।
मुख्य बिंदु 9
लेंस सूत्र: 1/f = 1/v - 1/u; लेंस का आवर्धन m = h'/h = +v/u।
मुख्य बिंदु 10
लेंस की क्षमता P = 1 / f(m); मात्रक डायोप्टर (D) है। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक (+) तथा अवतल की ऋणात्मक (-) होती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. एक समतल दर्पण का आवर्धन m = +1 है। इसका गणितीय एवं भौतिक अर्थ क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: धन चिह्न (+) दर्शाता है कि प्रतिबिंब आभासी एवं सीधा है; और संख्यात्मक मान 1 दर्शाता है कि प्रतिबिंब का आकार ठीक बिंब (वस्तु) के आकार के बराबर है।
2
2. अवतल दर्पण के सामने वस्तु को कहाँ रखा जाए कि उसका वास्तविक, उल्टा और वस्तु के बराबर आकार का प्रतिबिंब बने?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वक्रता केंद्र (C) पर रखने पर प्रतिबिंब वक्रता केंद्र पर ही वास्तविक, उल्टा और ठीक वस्तु के बराबर आकार का (m = -1) बनता है।
3
3. पानी में रखा नींबू बाहर से देखने पर अपने वास्तविक आकार से बड़ा क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्रकाश के अपवर्तन के कारण; जब पानी (सघन माध्यम) से प्रकाश किरणें वायु (विरल माध्यम) में आती हैं, तो वे अभिलंब से दूर हटती हैं, जिससे नेत्र को आभासी उठाव और आवर्धन दिखाई देता है।
4
4. 1 डायोप्टर (1 D) क्षमता वाले लेंस की परिभाषा दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 डायोप्टर उस लेंस की क्षमता होती है जिसकी फोकस दूरी ठीक 1 मीटर (1 m) हो (1 D = 1 m⁻¹)।
5
5. यदि किसी लेंस की क्षमता -2.5 D है, तो इसकी फोकस दूरी कितनी होगी और यह किस प्रकार का लेंस है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: f = 100 / P = 100 / (-2.5) = -40 सेमी; ऋण चिह्न दर्शाता है कि यह अवतल लेंस (अपसारी लेंस) है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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