भयानक ताड़का-वन: विश्वामित्र के साथ चलते हुए राम और लक्ष्मण एक ऐसे बीहड़ वन में पहुँचे जहाँ दिन में भी अंधेरा छाया रहता था और हिंसक जंतुओं की भयानक दहाड़ें गूँजती थीं। मुनि ने बताया कि यह सुंदर वन पहले सुंदर था, किंतु राक्षसी ताड़का के डर से लोग इसे छोड़कर भाग गए और इसका नाम ताड़का-वन पड़ गया।
ताड़का का वध: विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम ने अपने धनुष की प्रत्यंचा पर टंकार की। उस भयंकर ध्वनि को सुनकर ताड़का क्रोध से पागल होकर पत्थरों की वर्षा करती हुई दौड़ी। राम ने बाणों से पत्थरों को बीच में ही काट दिया और एक अचूक बाण ताड़का की छाती में मार दिया। ताड़का धरती पर गिर पड़ी और मर गई।
दिव्य अस्त्रों की प्राप्ति: प्रसन्न होकर विश्वामित्र ने राम को सौ प्रकार के गुप्त, अचूक और दिव्य अस्त्र प्रदान किए और उनके प्रयोग व संहार की विधियाँ सिखाईं।