छबीली का बचपन: कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन छबीली (लक्ष्मीबाई) अपने पिता की अकेली संतान थी। बचपन में गुड़ियों से खेलने के बजाय वह बरछी, ढाल, कटारी और कृपाण से खेलती थी। उसे छत्रपति शिवाजी की शौर्य-गाथाएँ जुबानी याद थीं।
विवाह और वज्रपात: झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ उनका विवाह हुआ और वे झाँसी की रानी बनीं। किंतु दुर्भाग्यवश कुछ ही समय बाद राजा निःसंतान स्वर्ग सिधार गए। रानी पर वैधव्य का घोर वज्रपात हुआ।
डलहौजी की हड़प नीति: अंग्रेज गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी मन में अत्यधिक प्रसन्न हुआ। उसने लावारिस राज्यों को हड़पने की नीति के तहत झाँसी के दुर्ग पर ब्रिटिश झंडा फहराने की घोषणा कर दी। तब रानी ने सिंहनी की तरह गर्जना की—"मैं अपनी झाँसी कभी नहीं दूँगी!"