निषिद्ध सुरंग: छोटू के घर के पास एक भूमिगत सुरंग थी, जिससे होकर उसके पापा रोज़ काम पर जाया करते थे। आम जनता के लिए उस रास्ते से जाना सख्त मना था; केवल कुछ चुनिंदा लोग जिनके पास विशेष 'सिक्योरिटी पास' (सुरक्षा पास) होता था, वही जा सकते थे।
पास चुराना और पकड़ा जाना: एक दिन छोटू ने पापा का सुरक्षा पास चुपके से चुरा लिया और सुरंग के स्वचालित दरवाजे में बने खांचे में डाल दिया। दरवाजा खुल गया। छोटू सुरंग में आगे बढ़ा ही था कि यांत्रिक निरीक्षकों (सेंसरों) ने उसकी तस्वीर खींच ली और खतरे की घंटी बज गई। सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़कर वापस घर पहुँचा दिया।
पापा द्वारा सच्चाई का प्रकटीकरण: माँ के गुस्से से बचाते हुए पापा ने छोटू को वैज्ञानिक सच्चाई समझाई: "छोटू! मैं जहाँ काम करता हूँ, वह ज़मीन से ऊपर की सतह है। आम आदमी वहाँ बिना विशेष स्पेस सूट और ऑक्सीजन सिलिंडर के जीवित नहीं रह सकता, क्योंकि वहाँ हवा अत्यंत विरल और ठंड जानलेवा है।"