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CBSE • कक्षा 6 • Hindi • अध्याय 15
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

नौकर (निबंध)

गांधीवादी लेखिका अनुबंधोपाध्याय द्वारा रचित प्रेरक निबंध "नौकर" राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम के दैनिक जीवन और उनके स्वावलंबन (Self-reliance) व 'श्रम की गरिमा' (Dignity of Labour) का सजीव चित्रण करता है। गांधीजी देश के सर्वोच्च नेता और बैरिस्टर होने के बावजूद किसी काम को छोटा या बड़ा नहीं मानते थे। वे आश्रम में स्वयं चक्की चलाकर आटा पीसते थे, अनाज से कंकड़ बीनते थे, रसोई के बर्तनों को माँजकर आईने जैसा चमकाते थे और शौचालय साफ करने से भी नहीं हिचकते थे। वे नौकरों को वेतनभोगी सेवक नहीं, बल्कि परिवार का अभिन्न भाई और सदस्य मानते थे।

करोड़ों लोगों का मसीहा, पर अपने हाथ से आटा पीसता था!

सोचिए एक ऐसा विश्वविख्यात नेता जिसके एक इशारे पर लाखों लोग जेल जाने को तैयार थे, वह लंदन के बड़े-बड़े सम्मेलनों से लौटकर सुबह-सुबह खुद आश्रम की भारी चक्की घुमाता था और रसोई के जले हुए पतीले रगड़कर चमकाता था! जानिए बापू के जीवन का वह गुप्त मंत्र जिसने श्रम को पूजा बना दिया!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

गांधीवादी लेखिका अनुबंधोपाध्याय द्वारा रचित प्रेरक निबंध "नौकर" राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम के दैनिक जीवन और उनके स्वावलंबन (Self-reliance) व 'श्रम की गरिमा' (Dignity of Labour) का सजीव चित्रण करता है। गांधीजी देश के सर्वोच्च नेता और बैरिस्टर होने के बावजूद किसी काम को छोटा या बड़ा नहीं मानते थे। वे आश्रम में स्वयं चक्की चलाकर आटा पीसते थे, अनाज से कंकड़ बीनते थे, रसोई के बर्तनों को माँजकर आईने जैसा चमकाते थे और शौचालय साफ करने से भी नहीं हिचकते थे। वे नौकरों को वेतनभोगी सेवक नहीं, बल्कि परिवार का अभिन्न भाई और सदस्य मानते थे।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • महात्मा गांधी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन का सामान्य परिचय
  • स्वावलंबन और श्रम की गरिमा के मानवीय मूल्यों की समझ

इस अध्याय के लक्ष्य

  • गांधीजी के आश्रम-जीवन में स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता और शारीरिक श्रम के महत्व को समझना।
  • किसी भी कार्य (चक्की पीसना, बर्तन धोना, सफाई) को हीन न मानने की समतावादी दृष्टि विकसित करना।
  • गांधीजी द्वारा नौकरों को वेतनभोगी दास के बजाय 'परिवार का भाई' मानने के विचार का विश्लेषण करना।
  • साबरमती आश्रम के नियमों, सादगी और सहयोग की भावना को आत्मसात करना।
  • शब्दावली संवर्धन: स्वावलंबन, बैरिस्टर, चक्की, खादी, बंधुत्व, श्रम-दान, आतिथ्य।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. आश्रम में बापू का शारीरिक श्रम:...
2 2. दक्षिण अफ्रीका के अनुभव और स्वाव...
3 3. नौकर नहीं, परिवार के भाई

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. आश्रम में बापू का शारीरिक श्रम: चक्की और रसोई

चक्की पीसना और अनाज बीनना: साबरमती आश्रम में गांधीजी कई ऐसे काम खुद करते थे जिन्हें आम तौर पर नौकर या मजदूर करते हैं। वे रोज सुबह जल्दी उठकर आश्रमवासियों के साथ चक्की पर आटा पीसते थे। आश्रम में गेहूं पीसने से पहले वे स्वयं गेहूं को फटकते और उसमें से कंकड़-पत्थर चुनकर अलग करते थे। जब एक बार एक कॉलेज के अहंकारी अंग्रेजी छात्र ने बापू से कोई काम माँगा, तो बापू ने उसे गेहूं बीनने का काम थमा दिया, जिससे उस छात्र का घमंड चूर हो गया!

रसोई और बर्तनों की सफाई: गांधीजी आश्रम की रसोई में स्वयं सब्जियाँ काटते और छीलते थे। वे पौष्टिकता के पक्के नियमपालक थे और बिना उबाले ककड़ी-टमाटर खाने के पोषक तत्वों को नष्ट होने से बचाते थे। बर्तनों की सफाई में बापू का कोई सानी नहीं था—वे राख और मिट्टी से रसोई के बड़े-बड़े काले पतीलों को तब तक रगड़ते थे जब तक कि वे चांदी की तरह चमक न उठें!

2. दक्षिण अफ्रीका के अनुभव और स्वावलंबन

हॉस्पिटल और सफाई के काम: जब गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में बैरिस्टरी करते थे, तब भी वे अपने घर का सारा काम खुद करते थे। वे अपने बच्चों को पालने-पोसने में भी सिद्धहस्त थे। वे अस्वस्थ साथियों की सेवा दिन-रात करते थे।

गोखले जी की सेवा: जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोपाल कृष्ण गोखले दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर आए, तो गांधीजी ने उनके बिस्तर बिछाने से लेकर उनके कपड़े धोने और उनके पाँव दबाने तक का सारा काम अपने हाथों से किया। वे बड़ों की सेवा को अपना परम कर्तव्य मानते थे।

3. नौकर नहीं, परिवार के भाई

नौकर शब्द से परहेज: गांधीजी अपने आश्रम या घर में काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को 'नौकर' नहीं कहते थे। वे उन्हें अपने परिवार का अभिन्न अंग और 'भाई' मानते थे।

लंदन के सम्मेलन का दृष्टांत: जब गांधीजी गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conference) के लिए लंदन गए, तो वे किसी भव्य होटल के बजाय पूर्व लंदन के एक गरीब इलाके में रुके। वहाँ उनके कमरे की सफाई और सेवा करने वाले अंग्रेज घरेलू सहायकों से बापू ने ऐसा आत्मीय रिश्ता जोड़ लिया कि भारत लौटते समय सभी नौकर बापू के गले लगकर रोने लगे। बापू ने उन्हें बहुमूल्य उपहार और आजीवन मित्रता की स्मृति दी।

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

गांधीवादी श्रम सिद्धांत
शारीरिक श्रम = पूजा (Dignity of Labour), कोई भी काम हीन या अपवित्र नहीं
गांधीजी का मूल नैतिक विचार।
बंधुत्व का समीकरण
मालिक-नौकर भेद →{अहिंसा व समानता} सहोदर भ्रातृ-भाव
आश्रम जीवन की सामाजिक आधारशिला।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
आश्रम में कॉलेज के छात्र से गांधीजी ने कौन सा काम करवाया और क्यों?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
कॉलेज का छात्र अंग्रेजी का विद्वान था और अपने ज्ञान के घमंड में गांधीजी से कोई बौद्धिक या लेखन कार्य की अपेक्षा कर रहा था। गांधीजी ने उसके अहंकार को तोड़ने और उसे शारीरिक श्रम का महत्व सिखाने के लिए उसे चक्की के पास ले जाकर गेहूं से कंकड़ बीनने का काम सौंप दिया। एक घंटे में ही छात्र के हाथ दुखने लगे और वह शर्मिंदा होकर विदा हो गया।
उदाहरण 2
गांधीजी बर्तनों की सफाई किस प्रकार करते थे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
गांधीजी बर्तनों की सफाई में अत्यधिक निपुण और कठोर थे। वे रसोई के बड़े-बड़े काले पतीलों को अपने हाथों से राख और मिट्टी से तब तक रगड़ते थे जब तक कि उनका कालापन पूरी तरह छूटकर वे चांदी की तरह चमकने न लगें।
उदाहरण 3
गांधीजी नौकरों को क्या मानते थे और उनके साथ कैसा व्यवहार करते थे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
गांधीजी किसी को भी नौकर या वेतनभोगी सेवक नहीं मानते थे। वे उन्हें अपने परिवार का सदस्य और अपना सगा भाई मानते थे। वे कहते थे कि हम सब ईश्वर की संतान हैं, अतः कोई मालिक या कोई नौकर नहीं है।
उदाहरण 4
लंदन में गोलमेज सम्मेलन के समय बापू ने नौकरों का दिल कैसे जीता?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
बापू किसी बड़े होटल के बजाय पूर्वी लंदन के साधारण इलाके में ठहरे। वहाँ उनके कमरों की सफाई करने वाले कर्मचारियों से बापू ने इतना स्नेहपूर्ण, विनम्र और आत्मीय व्यवहार किया कि वे बापू के भक्त बन गए और बापू की विदाई पर रोने लगे।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि गांधीजी कंजूस थे इसलिए नौकर नहीं रखते थे।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गांधीजी का उद्देश्य पैसे बचाना नहीं, बल्कि स्वावलंबन और किसी भी काम को छोटा न समझने का नैतिक आदर्श स्थापित करना था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सोचना कि बापू केवल दूसरों को काम करने का उपदेश देते थे।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गांधीजी पहले स्वयं वह कठिन कार्य करके दिखाते थे, फिर दूसरों को प्रेरणा देते थे।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

गांधीजी का स्वावलंबन दर्शन

अनुबंधोपाध्याय द्वारा रेखांकित श्रम की गरिमा

१. चक्की व अनाज

प्रतिदिन स्वयं आटा पीसना व गेहूँ फटकना।

२. बर्तन व सफाई

काले पतीलों को चांदी जैसा चमकाना।

३. बड़ों की सेवा

गोखले जी के वस्त्र धोना व पाँव दबाना।

४. बंधुत्व भाव

नौकरों को सेवक नहीं, सगा भाई समझना।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1

अनुबंधोपाध्याय का निबंध "नौकर" महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम के जीवन के माध्यम से स्वावलंबन और शारीरिक श्रम की गरिमा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। देश के सर्वोच्च नेता होने पर भी बापू चक्की चलाना, गेहूं बीनना, रसोई के काले पतीले मांजना और शौचालय साफ करना अपना धर्म समझते थे। वे नौकरों को सेवक न मानकर परिवार का भाई मानते थे। यह पाठ हमें सिखाता है कि अपने हाथों से काम करने में कोई हीनता नहीं, बल्कि स्वाभिमान और आत्म-शुद्धि है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
गांधीजी के अनुसार वास्तविक स्वतंत्रता का क्या अर्थ है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों या नौकरों पर निर्भर न रहकर स्वयं स्वावलंबी बनना।
स्वावलंबन के विचार से उत्तर दें।
2
गांधीजी रसोईघर में स्वच्छता और पोषण के किन नियमों का पालन करते थे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: सब्जियों को बिना धोए न काटना, पोषक तत्वों को नष्ट न होने देना और बर्तनों को पूर्ण स्वच्छ रखना।
रसोईघर से संबंधित प्रसंग को याद करें।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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