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CBSE • कक्षा 9 • Mathematics • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

वृत्त (Circles)

समतल ज्यामिति में वृत्त (Circle) सबसे परिपूर्ण, सममित (Symmetric) और सौंदर्यपूर्ण आकृति है। किसी एक समतल में स्थित उन सभी बिंदुओं का समूह जो एक स्थिर बिंदु से एक निश्चित (अचर) दूरी पर स्थित हों, वृत्त (Circle) कहलाता है। स्थिर बिंदु को वृत्त का केंद्र (Centre) तथा स्थिर दूरी को वृत्त की त्रिज्या (Radius - $r$) कहते हैं। कक्षा 9 का नवम अध्याय 'वृत्त' (Circles) प्राथमिक कक्षाओं के परिधि और क्षेत्रफल से आगे बढ़कर वृत्त की जीवाओं (Chords), चापों (Arcs), वृत्तखंडों (Segments) तथा चक्रीय चतुर्भुजों (Cyclic Quadrilaterals) के गहन प्रमेयों और उनके निगमनात्मक प्रमाणों का उद्घाटन करता है। इस अध्याय में हम निम्नलिखित केंद्रीय ज्यामितीय प्रमेयों का चरणबद्ध अध्ययन करेंगे: वृत्त के मूल अंग: त्रिज्या, जीवा, व्यास ($d = 2r$), छेदक रेखा (Secant), चाप (लघु चाप व दीर्घ चाप), वृत्तखंड (लघु व दीर्घ वृत्तखंड), तथा त्रिज्यखंड (Sector)। जीवाओं के गुणधर्म: बराबर जीवाएँ केंद्र पर बराबर कोण अंतरित करती हैं (Theorem 9.1) एवं इसका विलोम। वृत्त के केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है (Theorem 9.3) एवं इसका विलोम। केंद्र से समान दूरी पर स्थित जीवाएँ परस्पर बराबर होती हैं (Theorem 9.5) एवं इसका विलोम। चाप द्वारा अंतरित कोण के प्रमेय (Master Circle Theorems): एक चाप द्वारा वृत्त के केंद्र पर अंतरित कोण, वृत्त के शेष भाग के किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दुगुना होता है (Theorem 9.7): $$\angle AOB = 2\angle APB$$ एक ही वृत्तखंड के कोण परस्पर बराबर होते हैं (Theorem 9.8)। अर्धवृत्त में बना कोण सदैव समकोण ($90^\circ$) होता है। चक्रीय चतुर्भुज (Cyclic Quadrilateral): वह चतुर्भुज जिसके चारों शीर्ष एक ही वृत्त की परिधि पर स्थित हों। चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों के प्रत्येक युग्म का योग सदैव $180^\circ$ (संपूरक) होता है (Theorem 9.10): $$\angle A + \angle C = 180^\circ \quad \text{तथा} \quad \angle B + \angle D = 180^\circ$$ चक्रीय चतुर्भुज का बहिष्कोण अपने अभिमुख अंतःकोण के बराबर होता है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE Class 9) बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय 8 से 10 अंकों का अत्यधिक महत्वपूर्ण भार रखता है। केंद्र पर बना कोण परिधि पर बने कोण का दुगुना होने वाले प्रमेय (Theorem 9.7) की उपपत्ति, अर्धवृत्त के समकोण पर आधारित प्रश्न, तथा चक्रीय चतुर्भुज के अज्ञात कोणों ($x, y$) के मान ज्ञात करने वाले 4-अंकीय प्रश्न प्रतिवर्ष बोर्ड में निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।

🎡 पहिये का आविष्कार और घड़ियों के गोल डायल: मानव सभ्यता वृत्त (Circles) के बिना क्यों रुक जाती?

आज से लगभग 5500 वर्ष पूर्व मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) में सुमेरियन लोगों ने मानव इतिहास का सबसे महान आविष्कार किया—पहिया (The Wheel)!

कल्पना कीजिए यदि पहिया चौकोर, त्रिकोणीय या अंडाकार होता, तो क्या कोई गाड़ी चल पाती? पहिया इसलिए चलता है क्योंकि वृत्त के केंद्र से उसकी परिधि के प्रत्येक बिंदु की दूरी (त्रिज्या $r$) 100% एकसमान होती है! जब पहिया घूमता है, तो गाड़ी की धुरी (Axle) जमीन से सदैव एक निश्चित ऊँचाई पर स्थिर रहती है और यात्रियों को कोई हिचकोला नहीं लगता!

यही नहीं, आकाश में ग्रहों और उपग्रहों की कक्षाएँ, घड़ियों के डायल, कारों के स्टीयरिंग व्हील, सिक्कों का आकार और विशाल गियरबॉक्स सभी वृत्त के नियमों पर संचालित होते हैं। इस अध्याय में आप वृत्त के उन जादुई प्रमेयों को सीखेंगे जो वृत्त के अंदर बनने वाले कोणों और जीवाओं को नियंत्रित करते हैं।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

वृत्त की ज्यामिति आधुनिक विज्ञान, खगोलिकी और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की आत्मा है:

  1. उपग्रह कक्षाएँ और GPS नेविगेशन: जब इसरो (ISRO) या नासा रॉकेट लॉन्च करता है, तो उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर वृत्ताकार या दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं। उपग्रह की स्थिति और कवरेज एरिया वृत्त के चाप और त्रिज्यखंड के सूत्रों से मापा जाता है।
  2. मैकेनिकल गियर और ऑटोमोबाइल: घड़ियों की सुइयों से लेकर फरारी और बुगाटी कारों के 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स तक, गियरों के दांतों का संपर्क और गति अनुपात वृत्तों की परिधि और त्रिज्याओं पर आधारित होता है।
  3. खगोल भौतिकी और ग्रहण गणना: सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण का सटीक समय (सेकंड की शुद्धता के साथ) सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के वृत्ताकार डिस्क के ज्यामितीय प्रतिच्छेदन से निकाला जाता है।
  4. आर्किटेक्चर और मेहराब (Domes & Arches): प्राचीन रोम के कोलोसियम से लेकर भारत के ताजमहल के विशाल गुंबद तक, मेहराबों की स्थिरता अर्धवृत्ताकार ज्यामिति पर निर्भर करती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • वृत्त की प्रारंभिक शब्दावली (त्रिज्या, परिधि, व्यास, जीवा, स्पर्श रेखा)।
  • त्रिभुज की सर्वांगसमता (विशेष रूप से SSS, SAS, RHS कसौटियाँ)।
  • समद्विबाहु त्रिभुज के सम्मुख कोणों की समानता ($AB = AC \implies \angle B = \angle C$)।
  • त्रिभुज का बहिष्कोण प्रमेय (बहिष्कोण सम्मुख अंतःकोणों के योग के बराबर होता है)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • वृत्त, जीवा, व्यास, चाप, वृत्तखंड और त्रिज्यखंड की सटीक ज्यामितीय परिभाषा देना।
  • प्रमेय 9.1 (बराबर जीवाएँ केंद्र पर बराबर कोण बनाती हैं) तथा प्रमेय 9.3 (केंद्र से जीवा पर लंब जीवा को समद्विभाजित करता है) को सिद्ध करना।
  • केंद्र से जीवा की दूरी और जीवा की लंबाई के बीच पाइथागोरस प्रमेय ($r^2 = d^2 + (c/2)^2$) का अनुप्रयोग करके संख्यात्मक प्रश्न हल करना।
  • मास्टर प्रमेय 9.7 (केंद्र पर बना कोण परिधि पर बने कोण का दुगुना होता है: $\angle AOB = 2\angle APB$) की तीनों स्थितियों (लघु चाप, अर्धवृत्त, दीर्घ चाप) में निर्दोष औपचारिक उपपत्ति प्रस्तुत करना।

  • सिद्ध करना कि एक ही वृत्तखंड के कोण बराबर होते हैं तथा अर्धवृत्त में बना कोण समकोण ($90^\circ$) होता है।
  • चक्रीय चतुर्भुज के प्रमेय (सम्मुख कोणों का योग $180^\circ$) को सिद्ध करना तथा वृत्त पर आधारित जटिल प्रश्नों को हल करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. वृत्त की आधारभूत शब्दावली एवं जी...
2 2. केंद्र पर अंतरित कोण प्रमेय (Mas...
3 3. एक ही वृत्तखंड के कोण एवं अर्धवृ...
4 4. चक्रीय चतुर्भुज के प्रमेय एवं अन...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. वृत्त की आधारभूत शब्दावली एवं जीवाओं के प्रमेय (Basic Terms & Chords Theorems)

1. वृत्त के महत्वपूर्ण ज्यामितीय अंग
  • जीवा (Chord): वृत्त पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड। वृत्त के केंद्र से होकर जाने वाली जीवा वृत्त की सबसे लंबी जीवा होती है, जिसे व्यास (Diameter - $d = 2r$) कहते हैं।
  • चाप (Arc): वृत्त की परिधि का एक सतत भाग चाप कहलाता है। दो बिंदुओं के बीच छोटे भाग को लघु चाप (Minor Arc) तथा बड़े भाग को दीर्घ चाप (Major Arc) कहते हैं।
  • वृत्तखंड (Segment): एक जीवा और उसके संगत चाप के बीच का क्षेत्र वृत्तखंड कहलाता है (लघु वृत्तखंड और दीर्घ वृत्तखंड)।
  • त्रिज्यखंड (Sector): केंद्र को एक चाप के सिरों से मिलाने वाली दो त्रिज्याओं और चाप के बीच का क्षेत्र त्रिज्यखंड कहलाता है।
2. जीवाओं के आधारभूत प्रमेय
  1. प्रमेय 9.1: वृत्त की बराबर जीवाएँ केंद्र पर बराबर कोण अंतरित करती हैं।
    उपपत्ति: $\triangle AOB$ और $\triangle COD$ में $OA = OC = r, OB = OD = r$, तथा $AB = CD$ (दिया है)। SSS सर्वांगसमता से $\triangle AOB \cong \triangle COD \implies \angle AOB = \angle COD$ (CPCT)।
  2. प्रमेय 9.3: एक वृत्त के केंद्र से एक जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है।
    यदि $OM \perp AB$ हो, तो $AM = MB = \frac{1}{2}AB$।
    संख्यात्मक स्वर्णिम सूत्र: समकोण त्रिभुज $\triangle OMA$ में पाइथागोरस प्रमेय से: $$r^2 = OM^2 + AM^2 = d^2 + \left(\frac{AB}{2}\right)^2$$ जहाँ $r$ = त्रिज्या, $d$ = केंद्र से लंबवत दूरी, तथा $AB$ = जीवा की लंबाई।
  3. प्रमेय 9.5: एक वृत्त की समान जीवाएँ केंद्र से समान दूरी पर होती हैं ($AB = CD \implies OM = ON$)।

2. केंद्र पर अंतरित कोण प्रमेय (Master Theorem 9.7)

1. प्रमेय 9.7 (वृत्त का सबसे महत्वपूर्ण प्रमेय)

प्रमेय कथन: एक चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, वृत्त के शेष भाग के किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दुगुना (Double) होता है।

$$\angle AOB = 2\angle APB$$

उपपत्ति (Formal Step-by-Step Proof):

  1. दिया है: एक वृत्त जिसका केंद्र $O$ है। चाप $AB$ केंद्र पर $\angle AOB$ तथा वृत्त के शेष भाग पर स्थित बिंदु $P$ पर $\angle APB$ अंतरित करता है।
  2. सिद्ध करना है: $\angle AOB = 2\angle APB$
  3. रचना: रेखाखंड $PO$ को खींचकर एक बिंदु $Q$ तक आगे बढ़ाते हैं।
  4. उपपत्ति:
    • त्रिभुज $\triangle OAP$ में: $OA = OP = r$ (एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ)।
      समद्विबाहु त्रिभुज प्रमेय से: $\angle OPA = \angle OAP$।
      त्रिभुज $\triangle OAP$ के बहिष्कोण $\angle AOQ$ के लिए: $$\angle AOQ = \angle OPA + \angle OAP = 2\angle OPA \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
    • इसी प्रकार, त्रिभुज $\triangle OBP$ में: $OB = OP = r \implies \angle OPB = \angle OBP$।
      बहिष्कोण $\angle BOQ$ के लिए: $$\angle BOQ = \angle OPB + \angle OBP = 2\angle OPB \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
    • समीकरण (1) और (2) को जोड़ने पर: $$\angle AOQ + \angle BOQ = 2\angle OPA + 2\angle OPB$$ $$\angle AOB = 2(\angle OPA + \angle OPB) = 2\angle APB$$

अतः सिद्ध हुआ कि $\angle AOB = 2\angle APB$! (इति सिद्धम्)।

3. एक ही वृत्तखंड के कोण एवं अर्धवृत्त का कोण (Angles in Same Segment & Semicircle)

1. प्रमेय 9.8 (एक ही वृत्तखंड के कोण)

प्रमेय कथन: एक ही वृत्तखंड के कोण परस्पर बराबर (Equal) होते हैं।

$$\angle APB = \angle AQB$$

उपपत्ति: प्रमेय 9.7 के अनुसार: $$\angle AOB = 2\angle APB \implies \angle APB = \frac{1}{2}\angle AOB$$ तथा $\angle AOB = 2\angle AQB \implies \angle AQB = \frac{1}{2}\angle AOB$ अतः $\angle APB = \angle AQB$ (इति सिद्धम्)।

2. अर्धवृत्त का कोण समकोण होता है (Angle in a Semicircle is 90°)

जब चाप एक अर्धवृत्त (Semicircle) होता है, तो व्यास $AB$ केंद्र $O$ पर एक सरल रेखा बनाता है, अतः केंद्र पर अंतरित कोण: $$\angle AOB = 180^\circ \quad (\text{ऋजुकोण})$$ प्रमेय 9.7 से, अर्धवृत्त की परिधि पर स्थित किसी बिंदु $P$ पर बना कोण: $$\angle APB = \frac{1}{2}\angle AOB = \frac{1}{2}(180^\circ) = 90^\circ$$

गोल्डन नियम: व्यास द्वारा परिधि पर अंतरित कोण सदैव $90^\circ$ (समकोण) होता है!

4. चक्रीय चतुर्भुज के प्रमेय एवं अनुप्रयोग (Cyclic Quadrilaterals)

1. चक्रीय चतुर्भुज की परिभाषा एवं प्रमेय 9.10

एक चतुर्भुज $ABCD$ चक्रीय चतुर्भुज (Cyclic Quadrilateral) कहलाता है यदि इसके चारों शीर्ष एक ही वृत्त की परिधि पर स्थित हों (अर्थात् शीर्ष संवृत्तीय / Concyclic हों)।

प्रमेय 9.10: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों के प्रत्येक युग्म का योग $180^\circ$ (दो समकोण) होता है।

$$\u0007ngle A + \u0007ngle C = 180^\circ \quad ext{तथा} \quad \u0007ngle B + \u0007ngle D = 180^\circ$$

प्रमेय 9.11 (विलोम): यदि किसी चतुर्भुज के सम्मुख कोणों के एक युग्म का योग $180^\circ$ हो, तो वह चतुर्भुज चक्रीय होता है।

2. चक्रीय चतुर्भुज का बहिष्कोण गुणधर्म

यदि किसी चक्रीय चतुर्भुज की एक भुजा को आगे बढ़ाया जाए, तो बनने वाला बहिष्कोण अपने अभिमुख अंतःकोण (Interior Opposite Angle) के बराबर होता है:

$$\u0007ngle ext{CBE (बहिष्कोण)} = \u0007ngle D \quad (\u0007ngle ADC)$$

कारण: $\u0007ngle B + \u0007ngle CBE = 180^\circ$ (रैखिक युग्म) तथा $\u0007ngle B + \u0007ngle D = 180^\circ$ (चक्रीय चतुर्भुज सम्मुख कोण)। तुलना करने पर $\u0007ngle CBE = \u0007ngle D$ प्राप्त होता है।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

जीवा-त्रिज्या-दूरी संबंध सूत्र
$$r^2 = d^2 + \left( \frac{c}{2} \right)^2$$
केंद्र पर अंतरित कोण प्रमेय
$$\angle AOB = 2\angle APB$$
एक ही वृत्तखंड के कोण
$$\angle APB = \angle AQB$$
अर्धवृत्त का कोण
$$\angle APB = 90^\circ \quad (\text{Angle in a semicircle})$$
चक्रीय चतुर्भुज सम्मुख कोण योग
$$\angle A + \angle C = 180^\circ, \quad \angle B + \angle D = 180^\circ$$
चक्रीय चतुर्भुज बहिष्कोण सूत्र
$$\angle \text{Ext} = \angle \text{Int Opposite}$$
वृत्त की परिधि सूत्र
$$C = 2\pi r = \pi d$$
वृत्त का क्षेत्रफल सूत्र
$$A = \pi r^2$$
त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल
$$\text{Area} = \frac{\theta}{360^\circ} \times \pi r^2$$
चाप की लंबाई सूत्र
$$l = \frac{\theta}{360^\circ} \times 2\pi r$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
5 सेमी त्रिज्या वाले वृत्त के केंद्र से 4 सेमी की दूरी पर स्थित जीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उदाहरण 2
दी गई आकृति में, $\angle AOB = 100^\circ$ है, जहाँ $O$ वृत्त का केंद्र है। परिधि के शेष भाग पर स्थित बिंदु $P$ पर अंतरित कोण $\angle APB$ का मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उदाहरण 3
एक चक्रीय चतुर्भुज $ABCD$ में, यदि $\angle A = (2x + 4)^\circ$ तथा $\angle C = (3x - 24)^\circ$ हो, तो $x$ का मान तथा कोण $\angle A$ और $\angle C$ ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उदाहरण 4
दी गई आकृति में, $AB$ वृत्त का व्यास है और $C$ वृत्त पर कोई बिंदु है। यदि $\angle BAC = 35^\circ$ हो, तो $\angle ABC$ का मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उदाहरण 5
सिद्ध कीजिए कि एक चक्रीय समांतर चतुर्भुज (Cyclic Parallelogram) सदैव एक आयत (Rectangle) होता है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

केंद्र कोण प्रमेय में दुगुने और आधे में भ्रमित होना (जैसे $\angle AOB = \frac{1}{2}\angle APB$ लिख देना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

केंद्र पर बना कोण सदैव बड़ा (दुगुना) होता है: $\angle AOB = 2\angle APB$। परिधि पर बना कोण आधा होता है: $\angle APB = \frac{1}{2}\angle AOB$।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दीर्घ चाप में बने कोण के लिए लघु केंद्र कोण का प्रयोग करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यदि चाप दीर्घ हो, तो उसके द्वारा केंद्र पर बना कोण प्रतिवर्ती कोण (Reflex $\angle AOB$) लिया जाता है। तब $\text{Reflex } \angle AOB = 2\angle APB$ होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चक्रीय चतुर्भुज के आसन्न कोणों का योग $180^\circ$ मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

चक्रीय चतुर्भुज में सम्मुख (आमने-सामने के) कोणों का योग $180^\circ$ होता है ($ A+C = 180^\circ$), आसन्न कोणों का नहीं (जब तक कि वह समांतर चतुर्भुज न हो)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

केंद्र से जीवा की दूरी निकालते समय जीवा की पूरी लंबाई का प्रयोग कर देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पाइथागोरस प्रमेय में जीवा की आधी लंबाई ($c/2$) का प्रयोग करें, क्योंकि केंद्र से लंब जीवा को समद्विभाजित करता है: $r^2 = d^2 + (c/2)^2$।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

किसी भी वृत्तखंड के कोण को $90^\circ$ मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

केवल अर्धवृत्त (व्यास द्वारा बना कोण) ही $90^\circ$ होता है। लघु या दीर्घ वृत्तखंड के कोण क्रमशः अधिककोण या न्यूनकोण होते हैं।

वृत्त प्रमेय : केंद्र पर अंतरित कोण, एक ही वृत्तखंड एवं चक्रीय चतुर्भुज

वृत्त (CIRCLES) : केंद्र कोण प्रमेय, अर्धवृत्त एवं चक्रीय चतुर्भुज प्रमेय 9.7: केंद्र कोण = 2 × परिधि कोण O A B P ∠APB = θ ∠AOB = 2θ ∠AOB = 2 × ∠APB • अर्धवृत्त में बना कोण = 90° (समकोण) चक्रीय चतुर्भुज (Cyclic Quadrilateral) A B C D ∠A ∠C ∠B ∠D प्रमेय 9.10: सम्मुख कोण संपूरक होते हैं ∠A + ∠C = 180° ∠B + ∠D = 180°

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
समतल में एक स्थिर बिंदु (केंद्र) से समान दूरी (त्रिज्या) पर स्थित बिंदुओं का समूह वृत्त कहलाता है।
मुख्य बिंदु 2
वृत्त की सबसे लंबी जीवा उसका व्यास ($d = 2r$) होती है।
मुख्य बिंदु 3
वृत्त की बराबर जीवाएँ केंद्र पर बराबर कोण अंतरित करती हैं (Theorem 9.1)।
मुख्य बिंदु 4
केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है ($r^2 = d^2 + (c/2)^2$)।
मुख्य बिंदु 5
समान जीवाएँ केंद्र से समान दूरी पर होती हैं।
मुख्य बिंदु 6

मास्टर प्रमेय 9.7: चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, परिधि के शेष भाग पर अंतरित कोण का दुगुना होता है ($\angle AOB = 2\angle APB$)।

मुख्य बिंदु 7
एक ही वृत्तखंड के कोण परस्पर बराबर होते हैं (Theorem 9.8)।
मुख्य बिंदु 8
अर्धवृत्त में बना कोण सदैव समकोण ($90^\circ$) होता है।
मुख्य बिंदु 9
चक्रीय चतुर्भुज के चारों शीर्ष वृत्त की परिधि पर स्थित होते हैं।
मुख्य बिंदु 10
चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग सदैव $180^\circ$ (संपूरक) होता है ($\angle A + \angle C = 180^\circ$)।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
अर्धवृत्त में बने कोण का मान क्या होता है? सकारण बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

अर्धवृत्त में बने कोण का मान सदैव $90^\circ$ (समकोण) होता है। कारण: व्यास केंद्र पर $180^\circ$ (ऋजुकोण) बनाता है, और प्रमेय 9.7 से परिधि पर बना कोण केंद्र के कोण का आधा ($ rac{180^\circ}{2} = 90^\circ$) होता है।


2
यदि एक चक्रीय चतुर्भुज में $\angle B = 65^\circ$ हो, तो सम्मुख कोण $\angle D$ का मान क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग $180^\circ$ होता है: $\angle B + \angle D = 180^\circ \implies \angle D = 180^\circ - 65^\circ = 115^\circ$।
3
10 सेमी व्यास वाले वृत्त में केंद्र से 3 सेमी दूरी पर स्थित जीवा की लंबाई क्या होगी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: त्रिज्या $r = 10/2 = 5 \text{ cm}$, दूरी $d = 3 \text{ cm}$। समकोण त्रिभुज से आधी जीवा $= \sqrt{5^2 - 3^2} = \sqrt{25 - 9} = \sqrt{16} = 4 \text{ cm}$। अतः जीवा की पूरी लंबाई $= 2 \times 4 = 8 \text{ cm}$ होगी।
4
यदि केंद्र पर अंतरित कोण $\angle AOB = 70^\circ$ हो, तो उसी चाप द्वारा परिधि पर अंतरित कोण क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्रमेय 9.7 से परिधि पर बना कोण केंद्र कोण का आधा होता है: $\angle APB = \frac{70^\circ}{2} = 35^\circ$।
5
क्या किसी चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोण $80^\circ$ और $95^\circ$ हो सकते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नहीं! क्योंकि $80^\circ + 95^\circ = 175^\circ \ne 180^\circ$। चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग ठीक $180^\circ$ होना अनिवार्य है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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