1. चक्रीय चतुर्भुज की परिभाषा एवं प्रमेय 9.10
एक चतुर्भुज $ABCD$ चक्रीय चतुर्भुज (Cyclic Quadrilateral) कहलाता है यदि इसके चारों शीर्ष एक ही वृत्त की परिधि पर स्थित हों (अर्थात् शीर्ष संवृत्तीय / Concyclic हों)।
प्रमेय 9.10: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों के प्रत्येक युग्म का योग $180^\circ$ (दो समकोण) होता है।
$$\u0007ngle A + \u0007ngle C = 180^\circ \quad ext{तथा} \quad \u0007ngle B + \u0007ngle D = 180^\circ$$
प्रमेय 9.11 (विलोम): यदि किसी चतुर्भुज के सम्मुख कोणों के एक युग्म का योग $180^\circ$ हो, तो वह चतुर्भुज चक्रीय होता है।
2. चक्रीय चतुर्भुज का बहिष्कोण गुणधर्म
यदि किसी चक्रीय चतुर्भुज की एक भुजा को आगे बढ़ाया जाए, तो बनने वाला बहिष्कोण अपने अभिमुख अंतःकोण (Interior Opposite Angle) के बराबर होता है:
$$\u0007ngle ext{CBE (बहिष्कोण)} = \u0007ngle D \quad (\u0007ngle ADC)$$
कारण: $\u0007ngle B + \u0007ngle CBE = 180^\circ$ (रैखिक युग्म) तथा $\u0007ngle B + \u0007ngle D = 180^\circ$ (चक्रीय चतुर्भुज सम्मुख कोण)। तुलना करने पर $\u0007ngle CBE = \u0007ngle D$ प्राप्त होता है।