जब एक ही उभयनिष्ठ अंत-बिंदु (Initial Point) से दो किरणें निकलती हैं, तो एक कोण (Angle) का निर्माण होता है।
- उभयनिष्ठ अंत-बिंदु को कोण का शीर्ष (Vertex) कहते हैं।
- कोण को बनाने वाली दोनों किरणों को कोण की भुजाएँ (Arms) कहते हैं।
| कोण का प्रकार | माप सीमा (Angle Measure) | मुख्य विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| न्यूनकोण (Acute Angle) | $0^\circ < \theta < 90^\circ$ | समकोण से छोटा कोण। | $30^\circ, 45^\circ, 60^\circ, 89^\circ$ |
| समकोण (Right Angle) | $\theta = 90^\circ$ | दो परस्पर लंबवत किरणों द्वारा बना कोण। | $90^\circ$ |
| अधिककोण (Obtuse Angle) | $90^\circ < \theta < 180^\circ$ | समकोण से बड़ा परंतु ऋजुकोण से छोटा। | $105^\circ, 120^\circ, 150^\circ$ |
| ऋजुकोण (Straight Angle) | $\theta = 180^\circ$ | दोनों भुजाएँ विपरीत दिशा में एक सीधी रेखा बनाती हैं। | $180^\circ$ |
| प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle) | $180^\circ < \theta < 360^\circ$ | ऋजुकोण से बड़ा परंतु संपूर्ण कोण से छोटा। | $210^\circ, 270^\circ, 300^\circ$ |
| संपूर्ण कोण (Complete Angle) | $\theta = 360^\circ$ | एक किरण का अपने प्रारंभिक स्थान पर पूर्ण घूर्णन। | $360^\circ$ |
- पूरक कोण (Complementary Angles): यदि दो कोणों का योग $90^\circ$ हो, तो वे एक-दूसरे के पूरक कोण कहलाते हैं।
सूत्र: $\theta$ का पूरक कोण $= 90^\circ - \theta$ (उदा. $40^\circ$ और $50^\circ$ पूरक हैं)। - संपूरक कोण (Supplementary Angles): यदि दो कोणों का योग $180^\circ$ हो, तो वे एक-दूसरे के संपूरक कोण कहलाते हैं।
सूत्र: $\theta$ का संपूरक कोण $= 180^\circ - \theta$ (उदा. $70^\circ$ और $110^\circ$ संपूरक हैं)। - आसन्न कोण (Adjacent Angles): दो कोण आसन्न कहलाते हैं यदि:
- उनका एक उभयनिष्ठ शीर्ष हो।
- उनकी एक उभयनिष्ठ भुजा हो।
- उनकी जो भुजाएँ उभयनिष्ठ नहीं हैं, वे उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत ओर हों।