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CBSE • कक्षा 9 • Mathematics • अध्याय 6
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

रेखाएं और कोण (Lines and Angles)

ज्यामिति के अध्ययन में आकृतियों (त्रिभुज, चतुर्भुज, बहुभुज) का निर्माण रेखाओं और उनके झुकाव (कोणों) द्वारा ही संभव होता है। कक्षा 9 का षष्ठ अध्याय 'रेखाएँ और कोण' (Lines and Angles) ज्यामितीय प्रमेयों और उपपत्तियों की रीढ़ है। जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, या जब एक तिर्यक रेखा दो समानांतर रेखाओं को काटती है, तो बनने वाले कोणों के बीच सटीक और सुंदर गणितीय संबंध स्थापित होते हैं। इस अध्याय में हम निम्नलिखित प्रमुख संकल्पनाओं और प्रमेयों का चरणबद्ध, प्रामाणिक अध्ययन करेंगे: मूलभूत पद एवं परिभाषाएँ: रेखाखंड (Line Segment): दो अंत-बिंदुओं वाला रेखा का भाग ($AB$)। किरण (Ray): एक अंत-बिंदु वाला रेखा का भाग जो दूसरी ओर अनंत तक बढ़ता है ($AB$)। संरेख बिंदु (Collinear Points): यदि तीन या अधिक बिंदु एक ही सीधी रेखा पर स्थित हों। कोणों का वर्गीकरण: न्यूनकोण (Acute Angle): $0^\circ < \theta < 90^\circ$ समकोण (Right Angle): $\theta = 90^\circ$ अधिककोण (Obtuse Angle): $90^\circ < \theta < 180^\circ$ ऋजुकोण (Straight Angle): $\theta = 180^\circ$ प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle): $180^\circ < \theta < 360^\circ$ पूरक कोण (Complementary Angles): यदि दो कोणों का योग $90^\circ$ हो। संपूरक कोण (Supplementary Angles): यदि दो कोणों का योग $180^\circ$ हो। आसन्न कोण (Adjacent Angles): जिनका एक उभयनिष्ठ शीर्ष और एक उभयनिष्ठ भुजा हो। रैखिक युग्म अभिगृहीत (Linear Pair Axiom): यदि एक किरण किसी रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग सदैव $180^\circ$ होता है। शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय (Vertically Opposite Angles Theorem): यदि दो रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो शीर्षाभिमुख कोण परस्पर बराबर होते हैं। समानांतर रेखाएँ और तिर्यक रेखा (Parallel Lines &amp; Transversal): संगत कोण (Corresponding Angles): परस्पर समान होते हैं। एकांतर अंतःकोण (Alternate Interior Angles): परस्पर समान होते हैं (Z-आकृति)। क्रमागत अंतःकोण (Consecutive Interior Angles / Co-interior): तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतःकोणों का योग $180^\circ$ होता है। त्रिभुज का कोण योग गुणधर्म (Angle Sum Property): त्रिभुज के तीनों अंतःकोणों का योग सदैव $180^\circ$ होता है, तथा किसी त्रिभुज का बहिष्कोण (Exterior Angle) अपने दोनों अभिमुख अंतःकोणों के योग के बराबर होता है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE Class 9) बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय 6 से 8 अंकों का अनिवार्य भार रखता है। शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय की उपपत्ति, समानांतर रेखाओं वाले अज्ञात कोणों ($x, y, z$) के मान ज्ञात करने वाले 3-अंकीय प्रश्न, तथा त्रिभुज के कोण योग गुणधर्म पर आधारित 4-अंकीय प्रश्न प्रतिवर्ष बोर्ड में निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।

🎱 बिलियर्ड्स की गेंद का रिबाउंड और लेजर बीम का परावर्तन: कोणों का कौन सा नियम काम करता है?

जब आप कैरम बोर्ड पर स्ट्राइकर से बोर्ड के किनारे पर निशाना लगाते हैं, या पूल/स्नूकर (Pool/Billiards) की टेबल पर गेंद को कुशन (दीवार) पर मारते हैं, तो गेंद किस दिशा में जाएगी? क्या वह यादृच्छिक (Random) दिशा में मुड़ती है?

बिल्कुल नहीं! गेंद उसी कोण पर वापस लौटती है जिस कोण पर वह दीवार से टकराई थी! भौतिकी में इसे 'परावर्तन का नियम' (Law of Reflection) कहते हैं:

$$\text{आपतन कोण (Angle of Incidence)} = \text{परावर्तन कोण (Angle of Reflection)}$$

यही सिद्धांत ऑप्टिकल फाइबर केबल में लेजर बीम को पूर्ण आंतरिक परावर्तन द्वारा हजारों किलोमीटर तक बिना सिग्नल खोए ले जाता है। जब दो समानांतर दर्पणों के बीच प्रकाश किरणें टकराती हैं, तो वे रेखाओं और कोणों के एकांतर अंतःकोणों (Alternate Interior Angles) का ही निर्माण करती हैं! इस अध्याय में आप उन्हीं कोणों के गणितीय रहस्यों को समझेंगे।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

रेखाएँ और कोण आधुनिक इंजीनियरिंग और वास्तुकला की भाषा हैं:

  1. पुल और टावर का निर्माण (Trusses): हावड़ा ब्रिज या एफिल टॉवर जैसी विशाल संरचनाओं में त्रिकोणीय लोहे के गार्डर लगाए जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग $180^\circ$ होने के कारण त्रिभुज ज्यामिति की सबसे कठोर (Rigid) और न मुड़ने वाली आकृति है।
  2. सौर ऊर्जा पैनल (Solar Tracking): सोलर पैनल अधिकतम बिजली तभी उत्पन्न करते हैं जब सूर्य की किरणें पैनल की सतह से ठीक $90^\circ$ (लंबवत) का कोण बनाएँ। इंजीनियर कोणों की गणना करके सोलर ट्रैकर्स को प्रोग्राम करते हैं।
  3. नेविगेशन और त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण: जहाजों और विमानों की दिशा (Bearing) उत्तर दिशा से कोण नापकर तय की जाती है।
  4. एनिमेशन और कंप्यूटर विजन: ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और सेल्फ-ड्राइविंग कारों में कैमरे सड़कों की समानांतर सफेद पट्टियों के कोण मापकर ही कार को लेन के बीच में रखते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • चांदा (Protractor) की सहायता से कोणों का मापन ($0^\circ$ से $180^\circ$)।
  • बिंदु, रेखा, किरण और रेखाखंड की परिभाषा और प्रतीक चिन्ह।
  • समानांतर रेखाओं और प्रतिच्छेदी रेखाओं की पहचान।
  • सरल बीजीय समीकरणों को हल करना।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • कोणों के सभी प्रकारों (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण, ऋजुकोण, प्रतिवर्ती कोण, पूरक व संपूरक कोण) की पहचान और गणना करना।
  • रैखिक युग्म अभिगृहीत (Linear Pair Axiom) का प्रयोग करके एक रेखा पर बने अज्ञात कोणों का मान निकालना।

  • शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय (Vertically Opposite Angles Theorem) की औपचारिक और निर्दोष उपपत्ति प्रस्तुत करना।

  • समानांतर रेखाओं को तिर्यक रेखा द्वारा काटने पर बनने वाले संगत कोणों, एकांतर अंतःकोणों और क्रमागत अंतःकोणों के संबंधों को पहचानना और सिद्ध करना।
  • सिद्ध करना कि एक ही रेखा के समानांतर खींची गई रेखाएँ परस्पर भी समानांतर होती हैं।
  • त्रिभुज के कोण योग गुणधर्म (Angle Sum Property: $A + B + C = 180^\circ$) तथा बहिष्कोण प्रमेय (Exterior Angle Theorem) को सिद्ध करना और जटिल ज्यामितीय प्रश्नों को हल करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. कोणों के प्रकार, पूरक एवं संपूरक...
2 2. रैखिक युग्म एवं शीर्षाभिमुख कोण...
3 3. समानांतर रेखाएँ एवं तिर्यक रेखा...
4 4. त्रिभुज का कोण योग गुणधर्म एवं ब...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. कोणों के प्रकार, पूरक एवं संपूरक कोण (Classification of Angles & Pairs)

1. कोण की परिभाषा एवं अवयव

जब एक ही उभयनिष्ठ अंत-बिंदु (Initial Point) से दो किरणें निकलती हैं, तो एक कोण (Angle) का निर्माण होता है।

  • उभयनिष्ठ अंत-बिंदु को कोण का शीर्ष (Vertex) कहते हैं।
  • कोण को बनाने वाली दोनों किरणों को कोण की भुजाएँ (Arms) कहते हैं।
2. माप के आधार पर कोणों का वर्गीकरण
कोण का प्रकार माप सीमा (Angle Measure) मुख्य विशेषता उदाहरण
न्यूनकोण (Acute Angle) $0^\circ < \theta < 90^\circ$ समकोण से छोटा कोण। $30^\circ, 45^\circ, 60^\circ, 89^\circ$
समकोण (Right Angle) $\theta = 90^\circ$ दो परस्पर लंबवत किरणों द्वारा बना कोण। $90^\circ$
अधिककोण (Obtuse Angle) $90^\circ < \theta < 180^\circ$ समकोण से बड़ा परंतु ऋजुकोण से छोटा। $105^\circ, 120^\circ, 150^\circ$
ऋजुकोण (Straight Angle) $\theta = 180^\circ$ दोनों भुजाएँ विपरीत दिशा में एक सीधी रेखा बनाती हैं। $180^\circ$
प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle) $180^\circ < \theta < 360^\circ$ ऋजुकोण से बड़ा परंतु संपूर्ण कोण से छोटा। $210^\circ, 270^\circ, 300^\circ$
संपूर्ण कोण (Complete Angle) $\theta = 360^\circ$ एक किरण का अपने प्रारंभिक स्थान पर पूर्ण घूर्णन। $360^\circ$
3. संबंधित कोणों के विशेष युग्म (Related Angle Pairs)
  1. पूरक कोण (Complementary Angles): यदि दो कोणों का योग $90^\circ$ हो, तो वे एक-दूसरे के पूरक कोण कहलाते हैं।
    सूत्र: $\theta$ का पूरक कोण $= 90^\circ - \theta$   (उदा. $40^\circ$ और $50^\circ$ पूरक हैं)।
  2. संपूरक कोण (Supplementary Angles): यदि दो कोणों का योग $180^\circ$ हो, तो वे एक-दूसरे के संपूरक कोण कहलाते हैं।
    सूत्र: $\theta$ का संपूरक कोण $= 180^\circ - \theta$   (उदा. $70^\circ$ और $110^\circ$ संपूरक हैं)।
  3. आसन्न कोण (Adjacent Angles): दो कोण आसन्न कहलाते हैं यदि:
    • उनका एक उभयनिष्ठ शीर्ष हो।
    • उनकी एक उभयनिष्ठ भुजा हो।
    • उनकी जो भुजाएँ उभयनिष्ठ नहीं हैं, वे उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत ओर हों।

2. रैखिक युग्म एवं शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय (Linear Pair & Vertically Opposite Angles)

1. रैखिक युग्म अभिगृहीत (Linear Pair Axioms)

अभिगृहीत 6.1: यदि एक किरण किसी रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग $180^\circ$ होता है।

$$\angle AOC + \angle BOC = 180^\circ$$

अभिगृहीत 6.2 (विलोम): यदि दो आसन्न कोणों का योग $180^\circ$ हो, तो उनकी अ-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक सीधी रेखा बनाती हैं।

इन दोनों अभिगृहीतों को संयुक्त रूप से रैखिक युग्म अभिगृहीत (Linear Pair Axiom) कहा जाता है।

2. शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय (Theorem 6.1 - Board Master Proof)

प्रमेय कथन: यदि दो रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles) परस्पर बराबर होते हैं।

उपपत्ति (Formal Step-by-Step Proof):

  1. दिया है: दो रेखाएँ $AB$ और $CD$ परस्पर बिंदु $O$ पर प्रतिच्छेद करती हैं। इससे शीर्षाभिमुख कोणों के दो युग्म बनते हैं:
    • (i) $\angle AOC$ और $\angle BOD$
    • (ii) $\angle AOD$ और $\angle BOC$
  2. सिद्ध करना है: $$\angle AOC = \angle BOD \quad \text{तथा} \quad \angle AOD = \angle BOC$$
  3. उपपत्ति:
    • किरण $OA$ रेखा $CD$ पर खड़ी है। अतः रैखिक युग्म अभिगृहीत से: $$\angle AOC + \angle AOD = 180^\circ \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
    • पुनः किरण $OD$ रेखा $AB$ पर खड़ी है। अतः रैखिक युग्म अभिगृहीत से: $$\angle AOD + \angle BOD = 180^\circ \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
    • समीकरण (1) और (2) से (दोनों का योग $180^\circ$ है): $$\angle AOC + \angle AOD = \angle AOD + \angle BOD$$
    • दोनों पक्षों में से उभयनिष्ठ कोण $\angle AOD$ घटाने पर: $$\angle AOC = \angle BOD$$
  4. इसी प्रकार, किरण $OC$ को रेखा $AB$ पर मानकर हम सिद्ध कर सकते हैं कि: $$\angle AOD = \angle BOC$$

अतः सिद्ध हुआ कि शीर्षाभिमुख कोण परस्पर समान होते हैं! (इति सिद्धम्)।

3. समानांतर रेखाएँ एवं तिर्यक रेखा के कोण संबंध (Parallel Lines & Transversal)

1. तिर्यक रेखा (Transversal) द्वारा बने 8 कोण

एक रेखा जो दो या दो से अधिक रेखाओं को भिन्न बिंदुओं पर काटती है, तिर्यक रेखा (Transversal) कहलाती है। जब तिर्यक रेखा दो समानांतर रेखाओं $l \parallel m$ को काटती है, तो कुल 8 कोण बनते हैं:

कोणों का प्रकार कोणों के युग्म समानांतर रेखाओं में संबंध ($l \parallel m$)
संगत कोण (Corresponding Angles) F-आकृति में बनने वाले कोण (जैसे स्थिति ऊपर-दाएँ, ऊपर-बाएँ आदि) परस्पर समान होते हैं
$\angle 1 = \angle 5, \; \angle 2 = \angle 6, \; \angle 3 = \angle 7, \; \angle 4 = \angle 8$
एकांतर अंतःकोण (Alternate Interior Angles) Z-आकृति में तिर्यक रेखा के विपरीत ओर रेखाओं के अंदर स्थित कोण परस्पर समान होते हैं
$\angle 3 = \angle 5, \quad \angle 4 = \angle 6$
एकांतर बाह्य कोण (Alternate Exterior Angles) तिर्यक रेखा के विपरीत ओर रेखाओं के बाहर स्थित कोण परस्पर समान होते हैं
$\angle 1 = \angle 7, \quad \angle 2 = \angle 8$
तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतःकोण (Consecutive Interior / Co-interior) U या C-आकृति में तिर्यक रेखा के एक ही ओर अंदर स्थित कोण संपूरक होते हैं (योग $= 180^\circ$)
$\angle 3 + \angle 6 = 180^\circ, \quad \angle 4 + \angle 5 = 180^\circ$
2. समानांतर रेखाओं की संक्रामकता (Theorem 6.6)

प्रमेय कथन: वे रेखाएँ जो एक ही रेखा के समानांतर हों, परस्पर भी समानांतर होती हैं।

$$\text{यदि } l \parallel n \quad \text{तथा} \quad m \parallel n, \quad \text{तो } l \parallel m$$

4. त्रिभुज का कोण योग गुणधर्म एवं बहिष्कोण प्रमेय (Angle Sum Property of Triangle)

1. त्रिभुज का कोण योग गुणधर्म (Theorem 6.7)

प्रमेय कथन: किसी त्रिभुज के तीनों अंतःकोणों का योग सदैव $180^\circ$ (दो समकोण) होता है।

उपपत्ति (Formal Proof):

  1. दिया है: एक त्रिभुज $\triangle ABC$ जिसके अंतःकोण $\angle 1, \angle 2$ तथा $\angle 3$ हैं।
  2. सिद्ध करना है: $\angle 1 + \angle 2 + \angle 3 = 180^\circ$
  3. रचना: शीर्ष $A$ से होकर भुजा $BC$ के समानांतर एक रेखा $XAY$ खींचते हैं ($XAY \parallel BC$)।
  4. उपपत्ति:
    • चूँकि $XAY$ एक सीधी रेखा है, अतः इस पर बने कोणों का योग $180^\circ$ होगा: $$\angle XAB + \angle 1 + \angle YAC = 180^\circ \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
    • परंतु रेखा $XAY \parallel BC$ है और $AB$ तिर्यक रेखा है। अतः एकांतर अंतःकोण बराबर होंगे: $$\angle XAB = \angle 2 \quad (\angle B)$$
    • इसी प्रकार, $XAY \parallel BC$ और $AC$ तिर्यक रेखा है। अतः: $$\angle YAC = \angle 3 \quad (\angle C)$$
    • इन मानों को समीकरण (1) में रखने पर: $$\angle 2 + \angle 1 + \angle 3 = 180^\circ$$ $$\implies \angle 1 + \angle 2 + \angle 3 = 180^\circ$$

अतः त्रिभुज के तीनों कोणों का योग $180^\circ$ होता है! (इति सिद्धम्)।

2. त्रिभुज का बहिष्कोण प्रमेय (Exterior Angle Theorem - Theorem 6.8)

प्रमेय कथन: यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा को आगे बढ़ाया जाए, तो इस प्रकार बना बहिष्कोण (Exterior Angle) अपने दोनों अभिमुख (सामने के) अंतःकोणों के योग के बराबर होता है।

$$\angle \text{ACD (बहिष्कोण)} = \angle A + \angle B$$

उपपत्ति: त्रिभुज में $\angle A + \angle B + \angle ACB = 180^\circ$ तथा रेखा पर $\angle ACD + \angle ACB = 180^\circ$ (रैखिक युग्म)। दोनों की तुलना करने पर: $\angle ACD = \angle A + \angle B$ प्राप्त होता है।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

पूरक कोण संबंध
$$\theta_1 + \theta_2 = 90^\circ \implies \theta_2 = 90^\circ - \theta_1$$
संपूरक कोण संबंध
$$\theta_1 + \theta_2 = 180^\circ \implies \theta_2 = 180^\circ - \theta_1$$
रैखिक युग्म सूत्र
$$\angle AOC + \angle BOC = 180^\circ$$
शीर्षाभिमुख कोण समानता
$$\angle AOC = \angle BOD \quad \text{and} \quad \angle AOD = \angle BOC$$
संगत कोण अभिगृहीत
$$l \parallel m \iff \text{Corresponding Angles are Equal}$$
एकांतर अंतःकोण प्रमेय
$$l \parallel m \iff \text{Alternate Interior Angles are Equal}$$
क्रमागत अंतःकोण संपूरक नियम
$$\angle 3 + \angle 6 = 180^\circ \quad (l \parallel m)$$
त्रिभुज कोण योग गुणधर्म
$$\angle A + \angle B + \angle C = 180^\circ$$
बहिष्कोण प्रमेय सूत्र
$$\angle \text{Ext} = \angle \text{Int}_1 + \angle \text{Int}_2$$
प्रतिवर्ती कोण सूत्र
$$\text{Reflex } \angle AOB = 360^\circ - \angle AOB$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
वह कोण ज्ञात कीजिए जो अपने पूरक कोण के बराबर हो। साथ ही वह कोण ज्ञात कीजिए जो अपने संपूरक कोण के बराबर हो।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: (i) अपने पूरक कोण के बराबर कोण: मान लीजिए वह कोण $= x$ है। इसका पूरक कोण $= (90^\circ - x)$ होगा। प्रश्नानुसार, कोण अपने पूरक कोण के बराबर है:

$$x = 90^\circ - x$$

$$x + x = 90^\circ \implies 2x = 90^\circ \implies x = \frac{90^\circ}{2} = 45^\circ$$

अतः $45^\circ$ अपने पूरक कोण के बराबर होता है।

(ii) अपने संपूरक कोण के बराबर कोण: मान लीजिए वह कोण $= y$ है। इसका संपूरक कोण $= (180^\circ - y)$ होगा। प्रश्नानुसार:

$$y = 180^\circ - y$$

$$y + y = 180^\circ \implies 2y = 180^\circ \implies y = \frac{180^\circ}{2} = 90^\circ$$

अतः $90^\circ$ (समकोण) अपने संपूरक कोण के बराबर होता है।

उदाहरण 2
दी गई आकृति में, रेखाएँ $AB$ और $CD$ परस्पर बिंदु $O$ पर प्रतिच्छेद करती हैं। यदि $\angle AOC : \angle BOC = 5 : 7$ है, तो सभी चारों कोण ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: मान लीजिए अनुपातिक नियतांक $x$ है। तब $\angle AOC = 5x$ तथा $\angle BOC = 7x$।

चूँकि $AOB$ एक सीधी रेखा है और किरण $OC$ इस पर खड़ी है, अतः रैखिक युग्म अभिगृहीत से:

$$\angle AOC + \angle BOC = 180^\circ$$

$$5x + 7x = 180^\circ$$

$$12x = 180^\circ \implies x = \frac{180^\circ}{12} = 15^\circ$$

अब कोणों के मान:

$$\angle AOC = 5 \times 15^\circ = 75^\circ$$

$$\angle BOC = 7 \times 15^\circ = 105^\circ$$

शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय के अनुसार:

$$\angle BOD = \angle AOC = 75^\circ$$

$$\angle AOD = \angle BOC = 105^\circ$$

उत्तर: चारों कोण $75^\circ, 105^\circ, 75^\circ$ तथा $105^\circ$ हैं।

उदाहरण 3
दी गई आकृति में, यदि $AB \parallel CD$, $CD \parallel EF$ तथा $y : z = 3 : 7$ है, तो $x$ का मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: चरण 1: रेखाओं के बीच संबंध: दिया गया है कि $AB \parallel CD$ और $CD \parallel EF$। प्रमेय 6.6 के अनुसार (एक ही रेखा के समानांतर रेखाएँ परस्पर भी समानांतर होती हैं):

$$AB \parallel EF$$

चरण 2: $x$ और $z$ में संबंध: चूँकि $AB \parallel EF$ और तिर्यक रेखा इन्हें काटती है, अतः एकांतर अंतःकोण बराबर होंगे:

$$x = z \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$

चरण 3: $x$ और $y$ में संबंध: चूँकि $AB \parallel CD$ है, अतः तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतःकोण संपूरक होते हैं:

$$x + y = 180^\circ$$

समीकरण (1) से $x = z$ रखने पर:

$$z + y = 180^\circ$$

चरण 4: अनुपात का प्रयोग: दिया है $y : z = 3 : 7$। मान लीजिए $y = 3k$ और $z = 7k$।

$$3k + 7k = 180^\circ \implies 10k = 180^\circ \implies k = 18^\circ$$

अतः:

$$z = 7 \times 18^\circ = 126^\circ$$

$$y = 3 \times 18^\circ = 54^\circ$$

चूँकि $x = z$, अतः:

$$x = 126^\circ$$

उत्तर: $x = 126^\circ$

उदाहरण 4
दी गई आकृति में, $AB \parallel CD$, $\angle APQ = 50^\circ$ और $\angle PRD = 127^\circ$ है। $x$ और $y$ के मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: 1. $x$ का मान ज्ञात करना: दिया गया है कि $AB \parallel CD$ है और $PQ$ एक तिर्यक रेखा है। अतः एकांतर अंतःकोण (Alternate Interior Angles) परस्पर समान होंगे:

$$\angle PQR = \angle APQ$$

$$x = 50^\circ$$

2. $y$ का मान ज्ञात करना (दो विधियों से संभव): विधि 1 (एकांतर अंतःकोण द्वारा): $AB \parallel CD$ है और $PR$ एक तिर्यक रेखा है। अतः एकांतर अंतःकोण:

$$\angle APR = \angle PRD$$

आकृति से, $\angle APR = \angle APQ + y$:

$$50^\circ + y = 127^\circ$$

$$y = 127^\circ - 50^\circ = 77^\circ$$

विधि 2 (त्रिभुज के बहिष्कोण प्रमेय द्वारा): त्रिभुज $\triangle PQR$ में भुजा $QR$ को $D$ तक बढ़ाया गया है, अतः $\angle PRD$ बहिष्कोण है। बहिष्कोण प्रमेय से:

$$\angle PRD = \angle PQR + \angle QPR$$

$$127^\circ = x + y$$

$$127^\circ = 50^\circ + y \implies y = 127^\circ - 50^\circ = 77^\circ$$

उत्तर: $x = 50^\circ$ तथा $y = 77^\circ$

उदाहरण 5
सिद्ध कीजिए कि यदि दो समानांतर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा काटे, तो अंतःकोणों के समद्विभाजक (Bisectors) एक आयत (Rectangle) बनाते हैं।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: मान लीजिए दो समानांतर रेखाएँ $AB \parallel CD$ हैं और तिर्यक रेखा $PS$ इन्हें क्रमशः $Q$ और $R$ पर काटती है। अंतःकोणों $\angle BQR, \angle AQR, \angle CRQ$ तथा $\angle DRQ$ के समद्विभाजक क्रमशः $QM, QN, RM$ और $RN$ खींचे गए हैं, जो चतुर्भुज $QMRN$ बनाते हैं।

चरण 1: $QMRN$ एक समांतर चतुर्भुज है: चूँकि $AB \parallel CD$ है, अतः एकांतर अंतःकोण बराबर होंगे:

$$\angle BQR = \angle CRQ$$

दोनों पक्षों का आधा करने पर:

$$\frac{1}{2}\angle BQR = \frac{1}{2}\angle CRQ \implies \angle MQR = \angle NRQ$$

परंतु ये रेखाखंड $QM$ और $RN$ के लिए एकांतर अंतःकोण हैं! अतः $QM \parallel RN$। इसी प्रकार, सिद्ध किया जा सकता है कि $QN \parallel RM$। अतः चतुर्भुज $QMRN$ एक समांतर चतुर्भुज (Parallelogram) है।

चरण 2: एक कोण $90^\circ$ सिद्ध करना: हम जानते हैं कि रैखिक युग्म से:

$$\angle BQR + \angle AQR = 180^\circ$$

दोनों पक्षों का आधा करने पर:

$$\frac{1}{2}\angle BQR + \frac{1}{2}\angle AQR = \frac{180^\circ}{2} = 90^\circ$$

$$\angle MQR + \angle NQR = 90^\circ$$

$$\implies \angle MQN = 90^\circ$$

निष्कर्ष: चूँकि $QMRN$ एक ऐसा समांतर चतुर्भुज है जिसका एक अंतःकोण $90^\circ$ (समकोण) है, अतः चतुर्भुज $QMRN$ एक आयत (Rectangle) है। (इति सिद्धम्)।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पूरक कोण ($90^\circ$) और संपूरक कोण ($180^\circ$) में भ्रमित हो जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पूरक कोणों (Complementary) का योग $90^\circ$ होता है, जबकि संपूरक कोणों (Supplementary) का योग $180^\circ$ होता है। (स्मरण ट्रिक: अंग्रेजी वर्णमाला में C पहले आता है ($90^\circ$), S बाद में आता है ($180^\circ$))।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एकांतर अंतःकोणों को तब भी बराबर मान लेना जब रेखाएँ समानांतर न हों।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एकांतर अंतःकोण और संगत कोण केवल और केवल तभी बराबर होते हैं जब रेखाएँ समानांतर ($l \parallel m$) हों।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle) की गणना में $180^\circ$ से घटा देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रतिवर्ती कोण सदैव $360^\circ$ में से न्यूनकोण/अधिककोण को घटाकर निकाला जाता है: $\text{Reflex } \angle AOB = 360^\circ - \angle AOB$।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतःकोणों को बराबर मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतःकोण बराबर नहीं होते, बल्कि उनका योग $180^\circ$ (संपूरक) होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

बहिष्कोण प्रमेय में आसन्न अंतःकोण को जोड़ देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

बहिष्कोण केवल दो सम्मुख (अभिमुख) अंतःकोणों के योग के बराबर होता है: $\angle \text{Ext} = \angle A + \angle B$ (साथ वाले कोण $\angle C$ को नहीं जोड़ते)।

समानांतर रेखाएँ, तिर्यक रेखा एवं त्रिभुज के कोण योग गुणधर्म का संपूर्ण चार्ट

रेखाएँ और कोण (LINES & ANGLES) : मुख्य ज्यामितीय संबंध समानांतर रेखाएँ एवं तिर्यक रेखा (l ∥ m) l m t (तिर्यक) ∠1 ∠2 ∠3 ∠4 ∠5 ∠6 ∠7 ∠8 • संगत कोण (समान): ∠1 = ∠5, ∠2 = ∠6, ∠4 = ∠8, ∠3 = ∠7 • एकांतर अंतःकोण (समान - Z आकृति): ∠4 = ∠6, ∠3 = ∠5 • क्रमागत अंतःकोण (संपूरक): ∠4 + ∠5 = 180°, ∠3 + ∠6 = 180° त्रिभुज के कोण गुणधर्म (Triangle Angle Rules) A B C D ∠A ∠B ∠C बहिष्कोण e 1. कोण योग गुणधर्म (Angle Sum Property): ∠A + ∠B + ∠C = 180° (दो समकोण) 2. बहिष्कोण प्रमेय (Exterior Angle Theorem): बहिष्कोण e = ∠A + ∠B (अभिमुख योग)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
दो किरणों के एक उभयनिष्ठ अंत-बिंदु पर मिलने से कोण का निर्माण होता है।
मुख्य बिंदु 2
यदि दो कोणों का योग 90° हो, तो वे पूरक कोण तथा यदि योग 180° हो, तो वे संपूरक कोण कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 3

रैखिक युग्म अभिगृहीत: एक रेखा पर खड़ी किरण द्वारा बने दोनों आसन्न कोणों का योग 180° होता है।

मुख्य बिंदु 4

शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय: दो प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा बने शीर्षाभिमुख कोण परस्पर समान होते हैं।

मुख्य बिंदु 5
जब तिर्यक रेखा दो समानांतर रेखाओं को काटती है, तो: संगत कोण समान होते हैं, एकांतर अंतःकोण समान होते हैं, और एक ही ओर के अंतःकोणों का योग 180° होता है।
मुख्य बिंदु 6
वे रेखाएँ जो एक ही रेखा के समानांतर हों, परस्पर भी समानांतर होती हैं।
मुख्य बिंदु 7

त्रिभुज का कोण योग गुणधर्म: किसी भी त्रिभुज के तीनों अंतःकोणों का योग सदैव 180° होता है।

मुख्य बिंदु 8

बहिष्कोण प्रमेय: त्रिभुज का बहिष्कोण अपने दोनों अभिमुख (सम्मुख) अंतःकोणों के योग के बराबर होता है।

मुख्य बिंदु 9
किसी त्रिभुज में अधिकतम केवल एक समकोण या एक अधिककोण हो सकता है।
मुख्य बिंदु 10
समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक अंतःकोण 60° होता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
यदि दो संपूरक कोणों का अंतर $34^\circ$ हो, तो दोनों कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मान लीजिए कोण $x$ और $(180^\circ - x)$ हैं। अंतर: $x - (180^\circ - x) = 34^\circ \implies 2x - 180^\circ = 34^\circ \implies 2x = 214^\circ \implies x = 107^\circ$। दूसरा कोण $= 180^\circ - 107^\circ = 73^\circ$। अतः कोण $107^\circ$ तथा $73^\circ$ हैं।
2
क्या किसी त्रिभुज के तीनों कोण $55^\circ, 65^\circ$ और $70^\circ$ हो सकते हैं? सकारण बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

कोणों का योग: $55^\circ + 65^\circ + 70^\circ = 190^\circ$। चूँकि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग ठीक $180^\circ$ होना अनिवार्य है, अतः ये किसी त्रिभुज के कोण नहीं हो सकते।


3
यदि किसी कोण का प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle) $250^\circ$ हो, तो उस कोण का मान क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कोण का मान $= 360^\circ - 250^\circ = 110^\circ$ (यह एक अधिककोण है)।
4
शीर्षाभिमुख कोण कब बनते हैं और उनके बीच क्या संबंध होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

जब दो सीधी रेखाएँ परस्पर एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो आमने-सामने बनने वाले कोण शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं। प्रमेय 6.1 के अनुसार वे परस्पर समान होते हैं।


5
एक त्रिभुज का बहिष्कोण $110^\circ$ है और इसके दोनों अभिमुख अंतःकोण परस्पर बराबर हैं। प्रत्येक अंतःकोण का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: बहिष्कोण प्रमेय से: $\angle A + \angle B = 110^\circ$। चूँकि दोनों बराबर हैं ($x + x = 110^\circ$), अतः $2x = 110^\circ \implies x = 55^\circ$। प्रत्येक अंतःकोण $55^\circ$ है।
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