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CBSE • कक्षा 9 • Mathematics • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

संख्या पद्धति (Number Systems)

गणित की संपूर्ण संरचना संख्याओं की संकल्पना पर आधारित है। कक्षा 9 का प्रथम अध्याय 'संख्या पद्धति' (Number Systems) प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ी गई प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं एवं पूर्णांकों से आगे बढ़कर वास्तविक संख्याओं (Real Numbers - $\mathbb{R}$) के अनंत एवं सघन संसार का प्रामाणिक उद्घाटन करता है। दैनिक जीवन में गणना, मापन, व्यापार, वैज्ञानिक अनुसंधान, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग एवं क्रिप्टोग्राफी तक प्रत्येक विधा संख्याओं के वर्गीकरण और उनके नियमों पर टिकी है। इस अध्याय में हम संख्याओं के क्रमिक विकास का गहन अध्ययन करेंगे: प्राकृत संख्याएँ (Natural Numbers - $\mathbb{N}$): गणना की संख्याएँ $\{1, 2, 3, 4, \dots\}$। पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers - $\mathbb{W}$): शून्य सहित प्राकृत संख्याएँ $\{0, 1, 2, 3, \dots\}$। पूर्णांक (Integers - $\mathbb{Z}$): ऋणात्मक, शून्य एवं धनात्मक पूर्ण संख्याएँ $\{\dots, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, \dots\}$। परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers - $\mathbb{Q}$): वे संख्याएँ जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ $p, q \in \mathbb{Z}$ तथा $q \ne 0$ और $\text{HCF}(p, q) = 1$ (सह-अभाज्य / Co-prime)। अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers - $\mathbb{S}$ या $\mathbb{R} \setminus \mathbb{Q}$): वे वास्तविक संख्याएँ जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में कभी व्यक्त नहीं किया जा सकता, जैसे $\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5}, \pi, 0.1010010001\dots$। वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers - $\mathbb{R}$): परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं का संयुक्त समुच्चय। संख्या रेखा पर प्रत्येक बिंदु एक अद्वितीय वास्तविक संख्या को निरूपित करता है, और प्रत्येक वास्तविक संख्या संख्या रेखा पर एक अद्वितीय बिंदु द्वारा निरूपित होती है। इसे कैंटर-डेडेकिंड अभिगृहीत (Cantor-Dedekind Axiom) कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, दशमलव प्रसारों की प्रकृति (सांत - Terminating, असांत आवर्ती - Non-terminating Recurring, तथा असांत अनावर्ती - Non-terminating Non-recurring), अशांत आवर्ती दशमलवों को $\frac{p}{q}$ भिन्न रूप में बदलना, संख्या रेखा पर पाइथागोरस प्रमेय द्वारा अपरिमेय संख्याओं की ज्यामितीय रचना (वर्गमूल सर्पिल / Square Root Spiral), वास्तविक संख्याओं पर संक्रियाएँ, हर का परिमेयकरण (Rationalisation of Denominator), तथा वास्तविक संख्याओं के लिए घातांक नियम (Laws of Exponents for Real Numbers) का विस्तृत और चरणबद्ध अध्ययन करेंगे। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE Class 9) बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय 6 से 8 अंकों का अनिवार्य भार रखता है। किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच $n$ परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना, $0.\bar{6}$ या $0.\overline{235}$ को $\frac{p}{q}$ रूप में निरूपित करना, $\sqrt{2}$ अथवा $\sqrt{5}$ को संख्या रेखा पर प्रदर्शित करना, तथा व्यंजकों के हर का परिमेयकरण करने वाले दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रतिवर्ष बोर्ड परीक्षा में निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।

🔢 क्या आप जानते हैं? $\sqrt{2}$ की खोज करने वाले गणितज्ञ को समुद्र में फेंक कर मार दिया गया था!

प्राचीन ग्रीस में ईसा पूर्व पाँचवीं शताब्दी में प्रसिद्ध दार्शनिक और गणितज्ञ पाइथागोरस और उनके शिष्यों का एक गुप्त पंथ था। उनका मानना था कि इस पूरे ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु, संगीत के सुर और प्राकृतिक नियम केवल 'पूर्ण संख्याओं' और उनके अनुपातों (परिमेय संख्याओं) से बने हैं। वे मानते थे कि संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे दो पूर्णांकों के अनुपात $\frac{p}{q}$ में न लिखा जा सके।

परंतु लगभग 400 ईसा पूर्व में, उनके ही एक मेधावी शिष्य हिपासस (Hippasus of Metapontum) ने एक साधारण $1 \text{ unit} \times 1 \text{ unit}$ वाले वर्ग के विकर्ण की लंबाई की गणना की। पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार:

$$\text{विकर्ण}^2 = 1^2 + 1^2 = 2 \implies \text{विकर्ण} = \sqrt{2}$$

जब हिपासस ने गणितीय रूप से सिद्ध कर दिया कि $\sqrt{2}$ को दुनिया के किसी भी दो पूर्णांकों के अनुपात $\frac{p}{q}$ में नहीं लिखा जा सकता, तो पाइथागोरस के अनुयायियों में खलबली मच गई! उनका मानना था कि यह खोज देवताओं के नियमों का अपमान है। किंवदंतियों के अनुसार, इस 'अपरिमेय संख्या' (Irrational Number) के रहस्य को छिपाने के लिए हिपासस को समुद्र में डुबो कर प्राणदंड दे दिया गया!

आज वही अपरिमेय संख्याएँ—जैसे $\sqrt{2}, \sqrt{3}$ और $\pi$—आधुनिक क्वांटम फिजिक्स, कंप्यूटर ग्राफिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान और हमारे फोन के माइक्रोप्रोसेसरों की रीढ़ हैं! इस अध्याय में आप उसी क्रांतिकारी गणितीय सत्य को पूरी गहराई से समझेंगे।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

संख्या पद्धति केवल पाठ्यपुस्तक का एक अध्याय नहीं है, अपितु यह संपूर्ण आधुनिक विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी की मूल भाषा है:

  1. कंप्यूटर और बाइनरी सिस्टम: कंप्यूटर का प्रत्येक सॉफ्टवेयर, इमेज, वीडियो और AI मॉडल मूलतः संख्याओं की शृंखला (0 और 1) तथा उनके फ्लोटिंग-पॉइंट दशमलव मानों पर कार्य करता है।
  2. क्रिप्टोग्राफी और ऑनलाइन बैंकिंग: आपके बैंक खाते और यूपीआई (UPI) लेनदेन की सुरक्षा बहुत बड़ी अभाज्य संख्याओं (Prime Numbers) और घातांक नियमों (RSA एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम) पर आधारित होती है।
  3. आर्किटेक्चर और निर्माण: किसी भी पुल, गगनचुंबी इमारत या उपग्रह के निर्माण में वर्गमूल और अपरिमेय संख्याओं (जैसे $\pi$ और $\sqrt{2}$) की दशमलव के 15-20 स्थानों तक सटीक गणना अनिवार्य होती है। यदि इंजीनियर हर के परिमेयकरण और सन्निकटन के नियमों को न समझें, तो इमारत में तनाव वितरण गलत हो जाएगा और वह ढह सकती है।
  4. GPS नेविगेशन: उपग्रहों द्वारा हमारे स्मार्टफोन पर सटीक स्थिति दर्शाने के लिए सापेक्षता के सिद्धांत में समय और दूरी के सूक्ष्म दशमलव घातांकों की गणना की जाती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्राकृत संख्याएँ ($\mathbb{N}$), पूर्ण संख्याएँ ($\mathbb{W}$) तथा पूर्णांकों ($\mathbb{Z}$) का मूलभूत ज्ञान एवं संख्या रेखा पर निरूपण।
  • अभाज्य गुणनखंडन, महत्तम समापवर्तक (HCF / म.स.) तथा लघुत्तम समापवर्त्य (LCM / ल.स.) निकालने की विधि।
  • भिन्नों का जोड़, घटाव, गुणा, भाग और दीर्घ विभाजन विधि (Long Division Method)।
  • समकोण त्रिभुज में पाइथागोरस प्रमेय ($h^2 = p^2 + b^2$) का अनुप्रयोग।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • वास्तविक संख्याओं को परिमेय ($\mathbb{Q}$) तथा अपरिमेय संख्याओं में स्पष्टतः वर्गीकृत और परिभाषित करना।
  • किन्हीं दो दी गई परिमेय संख्याओं के मध्य अनंत परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने की दोनों विधियों (समान हर विधि एवं माध्य विधि) में पारंगत होना।
  • दशमलव प्रसारों की प्रकृति (सांत, अशांत आवर्ती, अशांत अनावर्ती) का विश्लेषण करना और अशांत आवर्ती दशमलवों (जैसे $0.\bar{3}, 0.\overline{47}, 1.2\bar{7}$) को $\frac{p}{q}$ के मानक रूप में रूपांतरित करना।
  • ज्यामितीय विधि और पाइथागोरस प्रमेय द्वारा $\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5}$ तथा संख्या रेखा पर $\sqrt{x}$ (जहाँ $x$ धनात्मक वास्तविक संख्या है) को निरूपित करना।
  • अपरिमेय व्यंजकों के हर का परिमेयकरण (Rationalisation) करने की बीजगणितीय तकनीकों में पूर्ण दक्षता प्राप्त करना।
  • वास्तविक संख्याओं के लिए घातांक के नियमों ($a^m \cdot a^n = a^{m+n}$, $(a^m)^n = a^{mn}$, $a^{-n} = \frac{1}{a^n}$, $a^{m/n} = \sqrt[n]{a^m}$) का सरलीकरण में सटीक प्रयोग करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. परिमेय संख्याएँ एवं उनका दशमलव प...
2 2. अशांत आवर्ती दशमलव को p/q रूप मे...
3 3. अपरिमेय संख्याएँ एवं संख्या रेखा...
4 4. हर का परिमेयकरण एवं वास्तविक संख...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. परिमेय संख्याएँ एवं उनका दशमलव प्रसार (Rational Numbers & Decimal Expansions)

1. मूलभूत अवधारणा एवं परिभाषा (Fundamental Concept)

एक संख्या $r$ को परिमेय संख्या (Rational Number) कहा जाता है यदि इसे $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ $p$ और $q$ दोनों पूर्णांक (Integers) हैं और $q \ne 0$ है।

विशेष ध्यान देने योग्य तथ्य:

  • शून्य (0) एक परिमेय संख्या है: क्योंकि इसे $0 = \frac{0}{1} = \frac{0}{5} = \frac{0}{-8}$ के रूप में लिखा जा सकता है (यहाँ $p=0, q=1 \ne 0$)।
  • प्रत्येक प्राकृत संख्या, पूर्ण संख्या और पूर्णांक एक परिमेय संख्या है: किसी भी पूर्णांक $m$ को $m = \frac{m}{1}$ लिखा जा सकता है।
  • तुल्य परिमेय संख्याएँ (Equivalent Rational Numbers): $\frac{1}{2} = \frac{2}{4} = \frac{10}{20} = \frac{25}{50}$। संख्या रेखा पर निरूपित करते समय हम सदैव सरलतम (मानक) रूप का चयन करते हैं, जहाँ $p$ और $q$ परस्पर सह-अभाज्य (Co-prime) होते हैं (अर्थात् $\text{HCF}(p, q) = 1$)।
2. दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ (Dense Property)

किन्हीं दो भिन्न परिमेय संख्याओं $a$ और $b$ के बीच अनंत (Infinitely Many) परिमेय संख्याएँ स्थित होती हैं। इन्हें ज्ञात करने की दो प्रमुख विधियाँ हैं:

विधि 1: समान हर विधि (Common Denominator Method - तीव्र एवं अनुशंसित विधि)
यदि हमें $a$ और $b$ के बीच $n$ परिमेय संख्याएँ ज्ञात करनी हों, तो हम दोनों संख्याओं के अंश और हर में $(n+1)$ से गुणा करके हर को समान बनाते हैं।
उदाहरण: $3$ और $4$ के बीच $6$ परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
यहाँ $n = 6 \implies n+1 = 7$।
$$3 = \frac{3 \times 7}{1 \times 7} = \frac{21}{7}, \quad 4 = \frac{4 \times 7}{1 \times 7} = \frac{28}{7}$$ अतः $21/7$ और $28/7$ के बीच की 6 संख्याएँ होंगी: $$\frac{22}{7}, \frac{23}{7}, \frac{24}{7}, \frac{25}{7}, \frac{26}{7}, \frac{27}{7}$$

विधि 2: माध्य विधि (Mean Method)
किन्हीं दो संख्याओं $a$ और $b$ के ठीक बीच की संख्या $\frac{a + b}{2}$ होती है। इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराकर इच्छित संख्याएँ प्राप्त की जा सकती हैं।

3. वास्तविक संख्याओं का दशमलव प्रसार (Decimal Expansions of Real Numbers)

वास्तविक संख्याओं के दशमलव प्रसार को मुख्यतः तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

दशमलव प्रसार का प्रकार गणितीय गुणधर्म संख्या की प्रकृति उदाहरण
सांत (Terminating) भाग देने पर शेषफल शून्य ($0$) हो जाता है। हर $q$ के अभाज्य गुणनखंड केवल $2^m \times 5^n$ रूप के होते हैं। परिमेय संख्या ($\mathbb{Q}$) $\frac{1}{2} = 0.5$, $\frac{7}{8} = 0.875$, $\frac{13}{25} = 0.52$
अशांत आवर्ती (Non-terminating Recurring) भाग देने पर शेषफल कभी शून्य नहीं होता, बल्कि अंकों का एक निश्चित खंड बार-बार दोहराता है। परिमेय संख्या ($\mathbb{Q}$) $\frac{1}{3} = 0.333\dots = 0.\bar{3}$, $\frac{1}{7} = 0.\overline{142857}$
अशांत अनावर्ती (Non-terminating Non-recurring) दशमलव प्रसार न तो कभी समाप्त होता है और न ही अंकों का कोई निश्चित खंड दोहराता है। अपरिमेय संख्या (Irrational) $\sqrt{2} = 1.41421356\dots$, $\pi = 3.14159265\dots$, $0.1010010001\dots$

गोल्डन नियम: एक संख्या परिमेय संख्या होती है यदि और केवल यदि उसका दशमलव प्रसार सांत हो अथवा अशांत आवर्ती हो!

2. अशांत आवर्ती दशमलव को p/q रूप में व्यक्त करना (Converting Recurring Decimals to p/q)

1. सैद्धांतिक चरणबद्ध कार्यविधि (Algorithm)

अशांत आवर्ती दशमलव (जैसे $0.\bar{6}$ या $1.2\overline{35}$) को $\frac{p}{q}$ भिन्न रूप में बदलने के लिए निम्न मानक बीजगणितीय विधि अपनाई जाती है:

  1. दी गई संख्या को चर $x$ के बराबर मानिए: $x = 0.6666\dots$ (समीकरण 1)।
  2. जाँचिए कि दशमलव बिंदु के बाद कितने अंकों पर बार (आवर्तता) है। यदि $1$ अंक दोहराता है तो $10$ से, यदि $2$ अंक दोहराते हैं तो $100$ से, और यदि $k$ अंक दोहराते हैं तो $10^k$ से दोनों पक्षों में गुणा कीजिए।
  3. नए समीकरण में से मूल समीकरण को घटाइए ताकि दशमलव के बाद का अनंत आवर्ती भाग पूर्णतः निरस्त (Cancel) हो जाए।
  4. प्राप्त समीकरण को हल करके $x = \frac{p}{q}$ का मान ज्ञात कीजिए और उसे सरलतम रूप में लिखिए।
2. प्रामाणिक विस्तृत उदाहरण (Comprehensive Solved Cases)

केस I: केवल एक अंक की आवर्तता ($0.\bar{6}$)
माना $x = 0.\bar{6} = 0.6666\dots$    --- (समीकरण 1)
यहाँ केवल एक अंक ($6$) की पुनरावृत्ति हो रही है, अतः दोनों पक्षों को $10$ से गुणा करने पर:
$10x = 6.6666\dots$    --- (समीकरण 2)
समीकरण (2) में से समीकरण (1) को घटाने पर:
$$10x - x = (6.6666\dots) - (0.6666\dots)$$ $$9x = 6 \implies x = \frac{6}{9} = \frac{2}{3}$$ अतः $0.\bar{6} = \frac{2}{3}$।

केस II: मिश्रित अशांत आवर्ती दशमलव ($0.2\overline{35}$)
माना $x = 0.2\overline{35} = 0.2353535\dots$    --- (समीकरण 1)
सर्वप्रथम, उस अंक को दशमलव से पहले लाएँ जो दोहरा नहीं रहा है ($1$ अंक $2$ है), अतः $10$ से गुणा करें:
$10x = 2.353535\dots$    --- (समीकरण 2)
अब दो अंक ($35$) दोहरा रहे हैं, अतः समीकरण (2) को $100$ से गुणा करें:
$1000x = 235.353535\dots$    --- (समीकरण 3)
समीकरण (3) में से समीकरण (2) को घटाने पर:
$$1000x - 10x = (235.353535\dots) - (2.353535\dots)$$ $$990x = 233 \implies x = \frac{233}{990}$$ अतः $0.2\overline{35} = \frac{233}{990}$। (यह सह-अभाज्य है क्योंकि 233 एक अभाज्य संख्या है)।

3. अपरिमेय संख्याएँ एवं संख्या रेखा पर निरूपण (Irrational Numbers & Geometric Representation)

1. अपरिमेय संख्याओं की संकल्पना एवं इतिहास

वे संख्याएँ जिनका दशमलव प्रसार अशांत अनावर्ती (Non-terminating Non-recurring) होता है, अपरिमेय संख्याएँ कहलाती हैं। इन्हें कभी भी $\frac{p}{q}$ रूप में नहीं लिखा जा सकता।

प्रमुख उदाहरण:

  • किसी भी अभाज्य संख्या $p$ का वर्गमूल $\sqrt{p}$ सदैव एक अपरिमेय संख्या होता है (जैसे $\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5}, \sqrt{7}, \sqrt{11}$)।
  • पाई ($\pi$): वृत्त की परिधि और उसके व्यास का अनुपात $\pi = \frac{C}{d}$ एक अपरिमेय संख्या है (लगभग $3.14159\dots$)। हम गणना की सुगमता हेतु $\pi \approx \frac{22}{7}$ या $3.14$ लेते हैं, परंतु यह केवल सन्निकट (Approximate) मान है, वास्तविक मान नहीं। $\frac{22}{7}$ एक परिमेय संख्या है जबकि $\pi$ एक अपरिमेय संख्या है!
2. संख्या रेखा पर $\sqrt{2}$ और $\sqrt{5}$ का ज्यामितीय निरूपण

ग्रीक गणितज्ञों ने संख्या रेखा पर अपरिमेय लंबाइयों को दर्शाने के लिए पाइथागोरस प्रमेय का अद्भुत अनुप्रयोग किया:

$\sqrt{2}$ का निरूपण (चरणबद्ध):

  1. संख्या रेखा पर बिंदु $O$ (शून्य निरूपक) से $1 \text{ इकाई}$ की दूरी पर बिंदु $A$ लें ($OA = 1$)।
  2. बिंदु $A$ पर एक लंब $AB = 1 \text{ इकाई}$ खींचें।
  3. बिंदु $O$ और $B$ को मिलाएँ। समकोण त्रिभुज $\triangle OAB$ में पाइथागोरस प्रमेय से: $$OB^2 = OA^2 + AB^2 = 1^2 + 1^2 = 2 \implies OB = \sqrt{2} \text{ इकाई}$$
  4. प्रकार (Compass) की नोक को $O$ पर रखें और त्रिज्या $OB$ लेकर संख्या रेखा पर एक चाप लगाएँ। जहाँ यह चाप संख्या रेखा को काटता है (मान लीजिए बिंदु $P$), वह बिंदु $\sqrt{2} \approx 1.414$ को निरूपित करता है।

$\sqrt{5}$ का निरूपण:
आधार $OA = 2 \text{ इकाई}$ और लंब $AB = 1 \text{ इकाई}$ लें। तब: $$OB = \sqrt{OA^2 + AB^2} = \sqrt{2^2 + 1^2} = \sqrt{4 + 1} = \sqrt{5} \approx 2.236$$ $O$ को केंद्र और $OB$ को त्रिज्या मानकर संख्या रेखा पर चाप लगाने से बिंदु $\sqrt{5}$ प्राप्त होता है।

3. वास्तविक संख्याओं पर संक्रियाएँ (Operations on Real Numbers)

वास्तविक संख्याओं के योग, घटाव, गुणा व भाग के मूलभूत नियम:

  1. एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का जोड़ या घटाव सदैव अपरिमेय होता है (उदा. $2 + \sqrt{3}$ अपरिमेय है)।
  2. एक शून्येतर (Non-zero) परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का गुणनफल या भागफल सदैव अपरिमेय होता है (उदा. $3\sqrt{2}$ और $\frac{5}{\sqrt{2}}$ अपरिमेय हैं)।
  3. दो अपरिमेय संख्याओं का जोड़, घटाव, गुणा या भाग परिमेय भी हो सकता है और अपरिमेय भी!
    • उदा. जोड़: $(\sqrt{3}) + (-\sqrt{3}) = 0$ (परिमेय)। परंतु $\sqrt{2} + \sqrt{3}$ (अपरिमेय)।
    • उदा. गुणा: $\sqrt{2} \times \sqrt{8} = \sqrt{16} = 4$ (परिमेय)। परंतु $\sqrt{2} \times \sqrt{3} = \sqrt{6}$ (अपरिमेय)।

4. हर का परिमेयकरण एवं वास्तविक संख्याओं के घातांक नियम (Rationalisation & Laws of Exponents)

1. हर का परिमेयकरण (Rationalisation of the Denominator)

जब किसी भिन्न के हर (Denominator) में वर्गमूल या करणी (Surd) युक्त पद हो, तो हर को एक परिमेय संख्या में बदलने की प्रक्रिया को हर का परिमेयकरण कहते हैं। इससे संख्या का मान बदले बिना उसकी गणना, तुलना और संख्या रेखा पर स्थिति ज्ञात करना अत्यंत सरल हो जाता है।

संयुग्मी करणी (Conjugate Surd) का सिद्धांत:
हम बीजीय सर्वसमिका $(a + b)(a - b) = a^2 - b^2$ का प्रयोग करते हैं:

  • $(\sqrt{a} + \sqrt{b})$ का परिमेयकारी गुणक (Rationalising Factor) $(\sqrt{a} - \sqrt{b})$ होता है: $$(\sqrt{a} + \sqrt{b})(\sqrt{a} - \sqrt{b}) = (\sqrt{a})^2 - (\sqrt{b})^2 = a - b$$
  • $(a + \sqrt{b})$ का परिमेयकारी गुणक $(a - \sqrt{b})$ होता है: $$(a + \sqrt{b})(a - \sqrt{b}) = a^2 - (\sqrt{b})^2 = a^2 - b$$

उदाहरण: $\frac{1}{7 + 3\sqrt{2}}$ के हर का परिमेयकरण कीजिए।
अंश और हर में $(7 - 3\sqrt{2})$ से गुणा करने पर: $$\frac{1}{7 + 3\sqrt{2}} \times \frac{7 - 3\sqrt{2}}{7 - 3\sqrt{2}} = \frac{7 - 3\sqrt{2}}{7^2 - (3\sqrt{2})^2} = \frac{7 - 3\sqrt{2}}{49 - 18} = \frac{7 - 3\sqrt{2}}{31}$$ यहाँ हर $31$ एक धनात्मक पूर्णांक (परिमेय) बन चुका है!

2. वास्तविक संख्याओं के लिए घातांक के नियम (Laws of Exponents)

मान लीजिए $a > 0$ एक वास्तविक संख्या है तथा $p$ और $q$ परिमेय संख्याएँ हैं। तब निम्नलिखित नियम सदैव सत्य होते हैं:

घातांक नियम गणितीय सूत्र उदाहरण व्याख्या
गुणन नियम (Product Rule) $a^p \cdot a^q = a^{p+q}$ $2^3 \cdot 2^5 = 2^{3+5} = 2^8 = 256$, $2^{2/3} \cdot 2^{1/3} = 2^1 = 2$
भागफल नियम (Quotient Rule) $\frac{a^p}{a^q} = a^{p-q}$ $\frac{7^{1/5}}{7^{1/3}} = 7^{\frac{1}{5} - \frac{1}{3}} = 7^{-\frac{2}{15}} = \frac{1}{7^{2/15}}$
घात की घात (Power of a Power) $(a^p)^q = a^{pq}$ $(3^{1/5})^4 = 3^{4/5}$, $(4^{3/2}) = (2^2)^{3/2} = 2^3 = 8$
समान घात पर गुणन (Power of a Product) $a^p \cdot b^p = (ab)^p$ $13^{1/5} \cdot 17^{1/5} = (13 \times 17)^{1/5} = (221)^{1/5}$
ऋणात्मक घातांक (Negative Exponent) $a^{-p} = \frac{1}{a^p}$ $5^{-3} = \frac{1}{5^3} = \frac{1}{125}$, $(125)^{-1/3} = (5^3)^{-1/3} = 5^{-1} = \frac{1}{5}$
शून्य घातांक (Zero Exponent) $a^0 = 1 \quad (a \ne 0)$ $100^0 = 1$, $(-7)^0 = 1$, $\left(\frac{3}{5}\right)^0 = 1$
मूल और घातांक का संबंध (Radical to Power) $\sqrt[n]{a} = a^{1/n}$, $\sqrt[n]{a^m} = a^{m/n}$ $\sqrt[3]{64} = 64^{1/3} = (4^3)^{1/3} = 4$, $\sqrt[5]{32^2} = (2^5)^{2/5} = 2^2 = 4$

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

परिमेय संख्या की मानक परिभाषा
$\mathbb{Q} = \left\{ \frac{p}{q} : p, q \in \mathbb{Z},\; q \ne 0,\; \text{HCF}(p,q) = 1 \right\}$
दो संख्याओं का समानांतर माध्य
$\text{Mean} = \frac{a + b}{2}$
सांत दशमलव हेतु हर का स्वरूप
$q = 2^m \times 5^n \quad (m, n \in \mathbb{W})$
करणी गुणा सर्वसमिका I
$\sqrt{ab} = \sqrt{a} \sqrt{b} \quad (a > 0, b > 0)$
करणी भाग सर्वसमिका II
$\sqrt{\frac{a}{b}} = \frac{\sqrt{a}}{\sqrt{b}} \quad (a > 0, b > 0)$
वर्ग अंतर करणी सर्वसमिका
$$(\sqrt{a} + \sqrt{b})(\sqrt{a} - \sqrt{b}) = a - b$$
द्विपद वर्ग करणी सर्वसमिका
$$(\sqrt{a} + \sqrt{b})^2 = a + 2\sqrt{ab} + b$$
घातांक गुणन नियम
$a^p \cdot a^q = a^{p+q}$
घातांक भागफल नियम
$\frac{a^p}{a^q} = a^{p-q}$
परिमेय घातांक की परिभाषा
$a^{m/n} = (\sqrt[n]{a})^m = \sqrt[n]{a^m}$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
क्या शून्य ($0$) एक परिमेय संख्या है? क्या इसे आप $\frac{p}{q}$ के रूप में लिख सकते हैं, जहाँ $p$ और $q$ पूर्णांक हैं और $q \ne 0$ है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उदाहरण 2
$\frac{3}{5}$ और $\frac{4}{5}$ के बीच पाँच (5) परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उदाहरण 3
दिखाइए कि $0.\overline{235} = 0.2353535\dots$ को $\frac{p}{q}$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ $p$ और $q$ पूर्णांक हैं और $q \ne 0$ है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उदाहरण 4
यदि $a$ और $b$ दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो निम्नलिखित समिका में $a$ और $b$ के मान ज्ञात कीजिए: $$\frac{5 + 2\sqrt{3}}{7 + 4\sqrt{3}} = a + b\sqrt{3}$$
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उदाहरण 5
सरल कीजिए: $$\left[ 5 \left( 8^{1/3} + 27^{1/3} \right)^3 \right]^{1/4}$$
विस्तृत समाधान / उत्तर:

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मानना कि $\pi = \frac{22}{7}$ होने के कारण $\pi$ भी एक परिमेय संख्या है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

$\pi$ वास्तव में एक अपरिमेय संख्या है (दशमलव प्रसार अशांत अनावर्ती $3.14159\dots$)। $\frac{22}{7}$ केवल गणना में उपयोग किया जाने वाला एक सन्निकट (Approximate) परिमेय मान है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

करणी जोड़ में गलती करना, जैसे $\sqrt{2} + \sqrt{3} = \sqrt{5}$ लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

$\sqrt{2} + \sqrt{3}$ को आगे नहीं जोड़ा जा सकता! $\sqrt{a} + \sqrt{b} \ne \sqrt{a+b}$। केवल सजातीय करणियाँ (Like Surds) ही जोड़ी जा सकती हैं, जैसे $2\sqrt{3} + 5\sqrt{3} = 7\sqrt{3}$।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हर का परिमेयकरण करते समय केवल एक पद का चिह्न बदलना भूल जाना या गलत चिह्न से गुणा करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यदि हर $(a + \sqrt{b})$ है, तो अंश और हर दोनों में $(a - \sqrt{b})$ से गुणा करें। यदि हर $(\sqrt{a} - \sqrt{b})$ है, तो $(\sqrt{a} + \sqrt{b})$ से गुणा करें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

घातांक नियम में आधार और घात का गलत योग, जैसे $2^3 \cdot 2^4 = 4^7$ या $2^{12}$ लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

$a^m \cdot a^n = a^{m+n}$ होता है। आधार अपरिवर्तित रहता है, केवल घातें जुड़ती हैं: $2^3 \cdot 2^4 = 2^{3+4} = 2^7 = 128$।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ऋणात्मक घात को ऋणात्मक संख्या समझ लेना, जैसे $2^{-3} = -8$ या $-6$ लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

$a^{-n} = \frac{1}{a^n}$ होता है। अतः $2^{-3} = \frac{1}{2^3} = \frac{1}{8}$ (यह एक धनात्मक भिन्न है, ऋणात्मक नहीं!)।

वास्तविक संख्याओं (Real Numbers - ℝ) का पदानुक्रम एवं वर्गीकरण चार्ट

वास्तविक संख्याएँ (REAL NUMBERS - ℝ) : सम्पूर्ण पदानुक्रम ℝ = वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers = ℚ ∪ 𝕀) ℚ : परिमेय संख्याएँ (p/q, q ≠ 0, सांत / अशांत आवर्ती) उदा: 1/2, -3/4, 0.75, 0.333... = 0.3̄ ℤ : पूर्णांक (Integers : {..., -3, -2, -1, 0, 1, 2, ...}) 𝕎 : पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers : {0, 1, 2, 3, ...}) ℕ : प्राकृत संख्याएँ (Natural Numbers) {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, ...} गहन सत्य: ℕ ⊂ 𝕎 ⊂ ℤ ⊂ ℚ ⊂ ℝ 𝕀 : अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers) • दशमलव: अशांत अनावर्ती • p/q में असंभव प्रमुख उदाहरण: √2 ≈ 1.41421356... √3 ≈ 1.73205080... √5 ≈ 2.23606797... π ≈ 3.14159265... 0.101001000100001...

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
एक संख्या परिमेय संख्या कहलाती है यदि उसे $\frac{p}{q}$ ($p, q \in \mathbb{Z}, q \ne 0$) के रूप में व्यक्त किया जा सके।
मुख्य बिंदु 2
शून्य ($0$) एक परिमेय संख्या है क्योंकि $0 = \frac{0}{1}$।
मुख्य बिंदु 3
किन्हीं दो दी गई परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं।
मुख्य बिंदु 4
एक परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार या तो सांत (Terminating) होता है या अशांत आवर्ती (Non-terminating Recurring) होता है।
मुख्य बिंदु 5
एक अपरिमेय संख्या का दशमलव प्रसार अशांत अनावर्ती (Non-terminating Non-recurring) होता है।
मुख्य बिंदु 6
सभी परिमेय एवं अपरिमेय संख्याओं का संग्रह वास्तविक संख्याएँ ($\mathbb{R}$) कहलाता है। संख्या रेखा पर प्रत्येक बिंदु एक अद्वितीय वास्तविक संख्या को निरूपित करता है।
मुख्य बिंदु 7
पाइथागोरस प्रमेय के अनुप्रयोग से संख्या रेखा पर $\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5}$ की सटीक ज्यामितीय रचना की जा सकती है।
मुख्य बिंदु 8
एक परिमेय और एक अपरिमेय संख्या का योग व अंतर सदैव अपरिमेय होता है। एक शून्येतर परिमेय और अपरिमेय संख्या का गुणनफल व भागफल सदैव अपरिमेय होता है।
मुख्य बिंदु 9
हर का परिमेयकरण करने के लिए संयुग्मी करणी $(\sqrt{a} - \sqrt{b})$ से अंश और हर दोनों में गुणा किया जाता है, जिससे हर एक परिमेय संख्या बन जाती है।
मुख्य बिंदु 10
घातांक के प्रमुख नियम: $a^p \cdot a^q = a^{p+q}$, $\frac{a^p}{a^q} = a^{p-q}$, $(a^p)^q = a^{pq}$, $a^p b^p = (ab)^p$, $a^0 = 1$, तथा $a^{-p} = \frac{1}{a^p}$।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
प्रत्येक पूर्ण संख्या एक प्राकृत संख्या होती है या नहीं? सकारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

यह कथन असत्य है। कारण: शून्य ($0$) एक पूर्ण संख्या है ($0 \in \mathbb{W}$), परंतु शून्य प्राकृत संख्या नहीं है ($0 \notin \mathbb{N}$)। (प्राकृत संख्याएँ 1 से प्रारंभ होती हैं)।


2
प्रत्येक पूर्णांक एक परिमेय संख्या होती है या नहीं? सकारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

यह कथन सत्य है। कारण: किसी भी पूर्णांक $m$ को हम $m = \frac{m}{1}$ के रूप में लिख सकते हैं, जहाँ अंश $m$ और हर $1$ दोनों पूर्णांक हैं तथा हर $1 \ne 0$ है।


3
बिना वास्तविक दीर्घ विभाजन किए बताइए कि $\frac{17}{8}$ का दशमलव प्रसार सांत होगा या अशांत आवर्ती?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

$\frac{17}{8}$ का दशमलव प्रसार सांत (Terminating) होगा। कारण: यहाँ हर $8 = 2^3 = 2^3 \times 5^0$ है, जो $2^m \times 5^n$ के मानक रूप में है। (वास्तव में $\frac{17}{8} = 2.125$ सांत है)।


4
संख्या रेखा पर $\sqrt{9.3}$ को ज्यामितीय रूप से कैसे निरूपित किया जाता है? मुख्य सिद्धांत बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रेखा पर $AB = 9.3 \text{ इकाई}$ खींचकर $BC = 1 \text{ इकाई}$ बढ़ाते हैं। $AC$ का मध्यबिंदु $O$ ज्ञात कर अर्धवृत्त बनाते हैं। $B$ पर लंब खींचते हैं जो अर्धवृत्त को $D$ पर काटता है। ज्यामिति के अनुसार $BD = \sqrt{9.3}$ होता है। $B$ को केंद्र मानकर चाप लगाने से संख्या रेखा पर $\sqrt{9.3}$ प्राप्त होता है।
5
$(64)^{-1/6}$ का सरलतम संख्यात्मक मान क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: चूँकि $64 = 2^6$, अतः $(64)^{-1/6} = (2^6)^{-1/6} = 2^{6 \times (-1/6)} = 2^{-1} = \frac{1}{2}$ या $0.5$।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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