शब्द 'सर्वांगसम' (सर्व + अंग + सम) का अर्थ है जिसके सभी अंग परस्पर समान हों। दो ज्यामितीय आकृतियाँ सर्वांगसम होती हैं यदि वे एक ही आकार (Shape) और एक ही आमाप (Size) की हों।
- समान त्रिज्या वाले दो वृत्त सदैव सर्वांगसम होते हैं।
- समान भुजा वाले दो वर्ग सदैव सर्वांगसम होते हैं।
- दो रेखाखंड सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी लंबाइयाँ समान हों ($AB = CD \iff \overline{AB} \cong \overline{CD}$)।
मान लीजिए $\triangle ABC$ और $\triangle PQR$ सर्वांगसम हैं। इसका अर्थ है कि यदि $\triangle ABC$ को $\triangle PQR$ पर रखा जाए, तो:
- शीर्ष $A$ शीर्ष $P$ पर गिरेगा ($A \leftrightarrow P$)
- शीर्ष $B$ शीर्ष $Q$ पर गिरेगा ($B \leftrightarrow Q$)
- शीर्ष $C$ शीर्ष $R$ पर गिरेगा ($C \leftrightarrow R$)
अतः 6 संगत संबंध प्राप्त होते हैं:
$$AB = PQ, \quad BC = QR, \quad CA = RP$$ $$\angle A = \angle P, \quad \angle B = \angle Q, \quad \angle C = \angle R$$सावधानी! संगति का क्रम अनिवार्य है: यदि $\triangle ABC \cong \triangle PQR$ है, तो इसे $\triangle ABC \cong \triangle QPR$ लिखना पूर्णतः गलत होगा, क्योंकि इसका अर्थ बदल जाएगा कि $AB = QP$ जो सत्य नहीं है!