रेने देकार्त एक दिन अपने बिस्तर पर लेटे हुए छत पर रेंगती हुई एक मक्खी को देख रहे थे। उन्होंने विचार किया कि छत पर इस मक्खी की यथार्थ स्थिति को किसी अन्य व्यक्ति को कैसे समझाया जाए? उन्होंने पाया कि यदि कमरे की दो परस्पर लंबवत दीवारों से मक्खी की लंबवत दूरियाँ नाप ली जाएँ, तो मक्खी की स्थिति को केवल दो संख्याओं के जोड़े $(x, y)$ द्वारा अद्वितीय (Unique) रूप से निर्धारित किया जा सकता है!
- कार्तीय तल (Cartesian Plane / Coordinate Plane): वह समतल जिस पर निर्देशांक अक्ष स्थित होते हैं, कार्तीय तल अथवा $xy$-तल कहलाता है।
- $x$-अक्ष (क्षैतिज अक्ष / Horizontal Axis): समतल पर खींची गई क्षैतिज संख्या रेखा $X'OX$ को $x$-अक्ष कहते हैं।
- $O$ से दाईं ओर ($OX$) धनात्मक दिशा होती है ($+1, +2, +3, \dots$)।
- $O$ से बाईं ओर ($OX'$) ऋणात्मक दिशा होती है ($-1, -2, -3, \dots$)।
- $y$-अक्ष (ऊर्ध्वाधर अक्ष / Vertical Axis): समतल पर खींची गई ऊर्ध्वाधर संख्या रेखा $Y'OY$ को $y$-अक्ष कहते हैं।
- $O$ से ऊपर की ओर ($OY$) धनात्मक दिशा होती है ($+1, +2, +3, \dots$)।
- $O$ से नीचे की ओर ($OY'$) ऋणात्मक दिशा होती है ($-1, -2, -3, \dots$)।
- मूल बिंदु (Origin - $O$): दोनों अक्ष जहाँ एक-दूसरे को परस्पर समकोण ($90^\circ$) पर काटते हैं, उस प्रतिच्छेद बिंदु को मूल बिंदु कहते हैं। इसके निर्देशांक सदैव $(0, 0)$ होते हैं।