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JAC • Class 7 • Social Science • Ch 26
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Struggles for Equality

इस अंतिम अध्याय में हम भारतीय लोकतंत्र में वास्तविक समानता हासिल करने हेतु जनता के सामूहिक संघर्षों, मध्य प्रदेश में तवा बांध विस्थापितों द्वारा संचालित ऐतिहासिक "तवा मत्स्य संघ" (TMS) के मत्स्य सहकारी आंदोलन, भारतीय संविधान के एक "जीवंत दस्तावेज" (Living Document) के रूप में महत्व तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय के बिना राजनीतिक समानता की सीमाओं का गहन विश्लेषण करेंगे।

जब एक बांध ने हजारों आदिवासियों के गांव और जंगल डुबो दिए, तो मछुआरों ने अपने हक के लिए सरकार और ठेकेदारों को कैसे झुकाया?

सतपुड़ा के घने जंगलों में तवा नदी पर बने बांध ने लाखों आदिवासियों को बेघर कर दिया। जब बची-खुची जिंदगी चलाने के लिए वे जलाशय में मछली पकड़ने लगे, तो सरकार ने ठेका निजी उद्योगपतियों को दे दिया और ठेकेदारों के गुंडों ने आदिवासियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। लेकिन आदिवासियों ने हथियार नहीं उठाए, बल्कि संविधान के समानता के अधिकार को ढाल बनाकर 'तवा मत्स्य संघ' का गठन किया और चक्का जाम कर अपनी आजीविका वापस छीन ली। आइए इस ऐतिहासिक जन-आंदोलन की गाथा समझें।

Why This Chapter Matters

यह अध्याय विद्यार्थियों को यह बोध कराता है कि लोकतंत्र में अधिकार केवल किताबों में लिखे होने से नहीं मिलते, बल्कि जब-जब कमजोर वर्गों के अधिकारों का हनन होता है, तब-तब अहिंसक सामूहिक लामबंदी और संवैधानिक संघर्षों के माध्यम से ही लोकतंत्र मजबूत और परिपक्व होता है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • कक्षा 7 के नागरिक शास्त्र के पूर्ववर्ती अध्यायों (समानता, स्वास्थ्य, जेंडर व बाजार) की समझ।
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित न्याय, स्वतंत्रता और समानता के मूल आदर्श।
  • विस्थापन (Displacement) और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की जानकारी।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • भारत में राजनीतिक समानता (मताधिकार) और वास्तविक सामाजिक-आर्थिक विषमता के द्वंद्व को समझना।
  • मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में तवा बांध (1958-1978) निर्माण, वनवासियों के विस्थापन और ठेकेदारों द्वारा शोषण के इतिहास को जानना।
  • तवा मत्स्य संघ (TMS) के गठन (1994), चक्का जाम आंदोलन और 2 जनवरी 1997 को 5-वर्षीय पट्टा हासिल करने की ऐतिहासिक विजय का विश्लेषण करना।
  • मत्स्य सहकारी समिति द्वारा मछुआरों की आय में 300% वृद्धि और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन के मॉडल को समझना।
  • भारतीय संविधान को एक "जीवंत दस्तावेज" (Living Document) कहे जाने के दार्शनिक और व्यावहारिक अर्थ को आत्मसात करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. लोकतंत्र में समानता के लिए संघर्...
2 2. तवा मत्स्य संघ (TMS) : विस्थापन...
3 3. सहकारी समिति का मॉडल एवं आर्थिक...
4 4. भारतीय संविधान : एक जीवंत दस्ताव...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. लोकतंत्र में समानता के लिए संघर्ष की अनिवार्यता (The Need for Struggles in Democracy)

भारतीय संविधान सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समान मानता है और किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान पर भेदभाव का निषेध करता है। परंतु यथार्थ में भारत का समाज घोर असमानताओं से ग्रस्त है:

असमानता का क्षेत्र जमीनी हकीकत संबंधित जन-संघर्ष / आंदोलन
स्वास्थ्य का बाजारीकरण गरीब परिवारों को निजी अस्पतालों के भारी खर्च के लिए कर्ज लेना पड़ता है (हाकिम शेख मामला)। स्वास्थ्य के अधिकार (अनुच्छेद 21) हेतु जन-स्वास्थ्य अभियान।
लिंग आधारित भेदभाव महिलाओं के घरेलू काम का अमूल्यन और बालिकाओं की शिक्षा में बाधाएं। महिला आंदोलन (घरेलू हिंसा कानून, विशाखा गाइडलाइन्स)।
जल व वन से विस्थापन बड़े बांधों और खनन परियोजनाओं द्वारा आदिवासियों व वनवासियों का बेघर होना। नर्मदा बचाओ आंदोलन एवं तवा मत्स्य संघ (TMS)।

2. तवा मत्स्य संघ (TMS) : विस्थापन से संघर्ष और विजय (Tawa Matsya Sangh Case Study)

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से निकलने वाली और होशंगाबाद (नर्मदापुरम) में नर्मदा से मिलने वाली तवा नदी पर 1958 में बांध बनना शुरू हुआ और 1978 में पूरा हुआ।

विस्थापन की त्रासदी एवं ठेकेदारों का आतंक

  • बांध बनने से विशाल जलाशय बना, जिससे सतपुड़ा के घने जंगलों के सैकड़ों गांव डूब गए और हजारों आदिवासी विस्थापित हो गए।
  • बेघर वनवासियों ने तवा जलाशय के किनारे झोपड़ियां बनाईं और आजीविका के लिए थोड़ी-बहुत खेती और मछली पकड़ना शुरू किया।
  • 1994 का संकट : 1994 में सरकार ने तवा जलाशय में मछली पकड़ने का एकाधिकार निजी ठेकेदारों को नीलाम कर दिया। ठेकेदारों ने स्थानीय ग्रामीणों को जलाशय से खदेड़ दिया, बाहर से सस्ते मजदूर ले आए और विरोध करने वाले आदिवासियों को अपने सशस्त्र लठैतों/गुंडों से डराया-धमकाया।

संघ का गठन एवं ऐतिहासिक जीत (1994-1997)

ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा हेतु 'तवा मत्स्य संघ' (TMS) का गठन किया:

  • उन्होंने लगातार रैलियां निकालीं और तवा पुल पर विशाल 'चक्का जाम' (रास्ता रोको आंदोलन) किया।
  • जनता के भारी दबाव के कारण मध्य प्रदेश सरकार ने एक समिति नियुक्त की। समिति ने सिफारिश की कि विस्थापितों की आजीविका के लिए जलाशय में मछली पकड़ने का पहला अधिकार स्थानीय आदिवासियों का होना चाहिए।
  • 2 जनवरी 1997 : सरकार ने औपचारिक आदेश जारी कर तवा जलाशय में मछली पकड़ने का 5 वर्ष का पट्टा तवा मत्स्य संघ को सौंप दिया। विस्थापितों ने एक नई गरिमापूर्ण सुबह में प्रवेश किया।

3. सहकारी समिति का मॉडल एवं आर्थिक समृद्धि (The Cooperative Success & Prosperity)

तवा मत्स्य संघ (TMS) ने मछली पकड़ने के पट्टे को एक कुशल सहकारी समिति (Cooperative) के रूप में संचालित किया जिसने आर्थिक शोषण का पूर्ण अंत कर दिया।

सहकारी प्रबंधन एवं सुविधाएं
  • टीएमएस ने मछुआरों को नए जाल खरीदने और पुराने जालों की मरम्मत के लिए सस्ता ऋण (Loan) उपलब्ध कराया।
  • जलाशय से पकड़ी गई मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज और तेजी से बड़े शहरों तक पहुँचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था की।
  • बिचौलियों को हटाकर मछलियों को सीधे थोक मंडियों में बेचा गया, जिससे मछुआरों को उनके उत्पादन का तीन गुना अधिक दाम मिलने लगा।
आय में वृद्धि एवं सतत पर्यावरण
  • मछुआरों की औसत आय में तीन गुना (300%) से अधिक की वृद्धि हुई। वे अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में भेजने लगे और पक्के मकान बनाए।
  • संघ ने साबित कर दिया कि जब स्थानीय लोगों को संसाधनों पर अधिकार दिया जाता है, तो वे न केवल अपनी आजीविका संवारते हैं बल्कि प्रकृति और जलीय जीवों का भी टिकाऊ संरक्षण करते हैं।

4. भारतीय संविधान : एक जीवंत दस्तावेज (The Constitution as a Living Document)

जब भी कोई हाशिए का समुदाय, श्रमिक संघ या महिला संगठन अपने अधिकारों और समानता के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष करता है, तो वह किसी विदेशी विचार का नहीं बल्कि भारतीय संविधान के मूल्यों का ही सहारा लेता है।

संविधान "जीवंत दस्तावेज" (Living Document) क्यों है?

संविधान केवल सरकारी दफ्तरों में रखी कानूनों की एक निर्जीव पुस्तक नहीं है। इसे एक जीवंत दस्तावेज कहा जाता है क्योंकि:

1. निरंतर गतिशीलता :

समाज में जैसे-जैसे नई चुनौतियाँ (जैसे डिजिटल अधिकार, पर्यावरण प्रदूषण, बांध विस्थापन) पैदा होती हैं, जन-आंदोलन संविधान के समानता और न्याय के आदर्शों को नया व्यावहारिक अर्थ देते हैं।

2. जनता की प्रेरणा का स्रोत :

तवा मत्स्य संघ के मछुआरों ने संविधान में निहित समानता के अधिकार को ही अपनी ढाल बनाकर सरकार को पट्टा देने पर मजबूर किया। इस तरह आम जनता अपने संघर्षों से संविधान को हर रोज जीवंत बनाए रखती है।

Key Historical Terms, Chronology & Administrative Principles

तवा मत्स्य संघ अधिकार सूत्र (TMS Rights Formula)
स्थानीय विस्थापित समुदाय + सामूहिक संगठन (TMS) + संवैधानिक अहिंसक संघर्ष ➔ प्राकृतिक संसाधनों पर प्रथम अधिकार
2 जनवरी 1997 को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 5-वर्षीय मत्स्य पट्टा सौंपने का ऐतिहासिक मॉडल।
संविधान "जीवंत दस्तावेज" समीकरण
जीवंत दस्तावेज = मूल संवैधानिक मूल्य (समानता + न्याय) + निरंतर जन-आंदोलन + प्रगतिशील विधिक व्याख्या
संविधान स्थिर नहीं है; आम नागरिक अपने लोकतांत्रिक संघर्षों से इसके अर्थ को समृद्ध करते हैं।
मत्स्य सहकारी समिति आर्थिक चक्र
सामूहिक मछली पकड़ना + शून्य बिचौलिया + कोल्ड स्टोरेज व सीधा परिवहन ➔ 300% आय वृद्धि
तवा मत्स्य संघ ने साबित किया कि स्थानीय भागीदारी से आजीविका और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहते हैं।
लोकतांत्रिक समानता की द्वैधता (Democratic Dualism)
राजनीतिक समानता (1 नागरिक = 1 वोट) ≠ वास्तविक सामाजिक-आर्थिक समानता (पूंजी/संसाधन विषमता)
जब तक वंचित वर्गों को आर्थिक और सामाजिक न्याय नहीं मिलता, राजनीतिक लोकतंत्र अधूरा रहता है।
विस्थापन एवं पुनर्वास संतुलन सूत्र
विकास परियोजना (बांध/खनन) ➔ अनिवार्य आजीविका पुनर्वास + स्थानीय जन-सहमति (Panchayats/PESA)
पर्यावरण और मानव अधिकारों के संतुलन हेतु सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश।

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
तवा मत्स्य संघ (TMS) क्या था और इसके गठन की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसका संक्षिप्त इतिहास बताइए।
Step-by-Step Solution:

1. परिचय : तवा मत्स्य संघ (TMS) मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (नर्मदापुरम) जिले में सतपुड़ा के जंगलों से विस्थापित आदिवासियों और मछुआरों की सहकारी समितियों का एक महासंघ था।

2. गठन की आवश्यकता :

  • 1958 से 1978 के बीच तवा नदी पर बने बांध के कारण सैकड़ों गांव डूब गए और हजारों आदिवासी बेघर होकर जलाशय के किनारे बस गए जहाँ वे मछली पकड़कर जीवन यापन करने लगे।
  • 1994 में सरकार ने जलाशय में मछली पकड़ने का ठेका निजी ठेकेदारों को दे दिया। ठेकेदारों ने स्थानीय आदिवासियों को जलाशय से खदेड़ दिया और बाहर के सस्ते मजदूरों को लाकर गुंडों से ग्रामीणों को धमकाया।
  • अपनी आजीविका और अस्तित्व की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने एकजुट होकर 1994 में 'तवा मत्स्य संघ' बनाया और रैलियां व चक्का जाम कर सरकार को पट्टा देने पर मजबूर किया।
Example 2
तवा मत्स्य संघ (TMS) ने मछुआरों के जीवन में क्या क्रांतिकारी आर्थिक और सामाजिक सुधार किए?
Step-by-Step Solution:

2 जनवरी 1997 को 5 वर्ष का पट्टा मिलने के बाद तवा मत्स्य संघ ने निम्नलिखित अभूतपूर्व सुधार किए:

  • आय में तीन गुना वृद्धि : सहकारी समिति ने बिचौलियों को हटाकर मछलियों को सीधे बड़े बाजारों में बेचा, जिससे मछुआरों को पहले की तुलना में तीन गुना अधिक मूल्य मिलने लगा।
  • ऋण एवं उपकरण सुरक्षा : संघ ने मछुआरों को नए जाल खरीदने और करघों/नावों की मरम्मत के लिए कम ब्याज पर ऋण दिया।
  • जीवन स्तर में सुधार : मछुआरों की आय बढ़ने से वे अपने बच्चों (विशेषकर बालिकाओं) को स्कूलों में पढ़ाने लगे, पक्के मकान बनाए और कर्ज के फंदे से मुक्त हो गए।
  • पर्यावरणीय संरक्षण : मछुआरों ने जलाशय में छोटी मछलियों को न पकड़ने और प्रजनन काल में मछली न मारने के नियम बनाए जिससे जलाशय में मछलियों का भंडार सतत बना रहा।
Example 3
भारतीय संविधान को एक 'जीवंत दस्तावेज' (Living Document) क्यों कहा जाता है?
Step-by-Step Solution:

संविधान को जीवंत दस्तावेज कहे जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • समय के साथ प्रासंगिकता : संविधान कोई जड़ या अपरिवर्तनीय नियम-पुस्तिका नहीं है। जैसे-जैसे देश का समाज बदलता है, नए कानून बनते हैं और संवैधानिक अधिकारों की नई व्याख्याएं की जाती हैं (जैसे शिक्षा का अधिकार, निजता का अधिकार, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार)।
  • जन-आंदोलनों की संजीवनी : जब तवा मत्स्य संघ जैसे हाशिए के समूह अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं, तो वे संविधान की प्रस्तावना के समानता और न्याय के आदर्शों को जमीन पर सच कर दिखाते हैं। लोग अपने संघर्षों से संविधान को निरंतर जीवंत और अर्थपूर्ण बनाए रखते हैं।
Example 4
राजनीतिक समानता (Political Equality) होने के बावजूद भारत में सामाजिक और आर्थिक समानता (Socio-Economic Equality) आज भी एक चुनौती क्यों बनी हुई है?
Step-by-Step Solution:

यह द्वंद्व भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना है:

  • राजनीतिक समानता की प्राप्ति : संविधान ने 18 वर्ष के हर नागरिक को वोट का समान अधिकार दिया है (कांता और उसके मालिक जैन साहब दोनों एक ही लाइन में खड़े होकर वोट डालते हैं)।
  • सामाजिक-आर्थिक विषमता की खाई : वोट के बाद कांता को बीमार बेटी के लिए सरकारी अस्पताल की कतार में भटकना पड़ता है, स्वप्ना को साहूकार के कर्ज के कारण आधी कीमत पर कपास बेचनी पड़ती है, और तवा के आदिवासियों को बांध के नाम पर बेघर कर दिया जाता है। जब तक स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि और रोजगार के समान अवसर नहीं मिलेंगे, केवल वोट की समानता से वास्तविक लोकतंत्र पूरा नहीं हो सकता।
Example 5
विस्थापन (Displacement) क्या है और बड़े बांधों या विकास परियोजनाओं से विस्थापित होने वाले आदिवासियों को किन संकटों का सामना करना पड़ता है?
Step-by-Step Solution:

1. विस्थापन का अर्थ : जब किसी विकास परियोजना (जैसे बड़े बांध, अभयारण्य, खनन, राजमार्ग या स्मार्ट सिटी) के निर्माण के लिए लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीन, घरों और गांवों से जबरन हटा दिया जाता है, तो उसे विस्थापन कहते हैं।

2. संकट :

  • आजीविका का खात्मा : खेती की जमीन और जंगल डूब जाने से लोगों का पारंपरिक रोजगार हमेशा के लिए छिन जाता है।
  • संस्कृति और समुदाय का बिखराव : पूरा गांव और नाते-रिश्तेदार अलग-अलग बिखर जाते हैं; उनकी सदियों पुरानी लोक-संस्कृति और रीति-रिवाज नष्ट हो जाते हैं।
  • शहरी मलिन बस्तियों में नरक : उचित मुआवजे के अभाव में विस्थापित आदिवासी बड़े शहरों की गंदी बस्तियों में जाकर रिक्शा चलाने या निर्माण मजदूर के रूप में अमानवीय जीवन जीने पर विवश हो जाते हैं।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

यह समझना कि तवा मत्स्य संघ (TMS) एक हिंसक या अलगाववादी आंदोलन था।

Scientific Reality & Correction

तवा मत्स्य संघ पूर्णतः अहिंसक, लोकतांत्रिक और संवैधानिक आंदोलन था जिसने शांतिपूर्ण रैलियों, चक्का जाम और कानूनी याचिकाओं के माध्यम से सरकार से अपने अधिकार हासिल किए।

Common Misconception

संविधान को केवल संसद और वकीलों के उपयोग की एक कानूनी किताब मान लेना।

Scientific Reality & Correction

संविधान आम जनता का घोषणापत्र है; मछुआरे, किसान, महिलाएं और दलित जब भी अपने मानवाधिकारों की मांग करते हैं, वे संविधान के समानता के आदर्शों को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाते हैं।

Common Misconception

यह सोचना कि किसी देश में चुनाव हो जाने मात्र से वहाँ पूर्ण समानता स्थापित हो जाती है।

Scientific Reality & Correction

चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया है; जब तक समाज से जातिवाद, गरीबी, लैंगिक भेदभाव और संसाधनों की घोर गैर-बराबरी समाप्त नहीं होती, समानता का संघर्ष निरंतर जारी रहता है।

Visual Learning & Conceptual Map

समानता के लिए संघर्ष : तवा मत्स्य संघ एवं जीवंत संविधान 1. विस्थापन का दंश • तवा बांध (1958-78) • सतपुड़ा जंगल जलमग्न • बेघर आदिवासी • 1994 निजी ठेकेदार आजीविका पर संकट 2. संगठित प्रतिरोध • 1994 TMS का गठन • अहिंसक रैलियां • विशाल चक्का जाम • सरकारी समिति जांच जनता की एकता 3. ऐतिहासिक विजय • 2 जनवरी 1997 आदेश • 5 वर्ष का मत्स्य पट्टा • सहकारी समिति मॉडल • आय में 300% वृद्धि स्थानीय स्वावलंबन 4. जीवंत संविधान • समानता का अधिकार • जीवन का अधिकार (21) • जन-संघर्षों से संवर्धन • लोकतंत्र की संजीवनी नागरिक संप्रभुता समानता की निरंतर यात्रा : कांता (वोट) ➔ ओमप्रकाश (गरिमा) ➔ TMS (संसाधन) ➔ जीवंत लोकतंत्र "समानता कोई स्थापित मंजिल नहीं, बल्कि जनता की सतत जागरूकता और सामूहिक संघर्ष का जीवंत पथ है।"

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान मानता है, परंतु वास्तविक जीवन में गरीबी, जाति और विस्थापन गहरी विषमता पैदा करते हैं।
Takeaway 2
मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में तवा नदी पर 1958 से 1978 के बीच बने बांध ने हजारों आदिवासियों को विस्थापित कर दिया।
Takeaway 3
1994 में मध्य प्रदेश सरकार ने तवा जलाशय में मछली पकड़ने का अधिकार निजी ठेकेदारों को दे दिया जिन्होंने स्थानीय लोगों को प्रताड़ित किया।
Takeaway 4
ग्रामीणों ने 1994 में "तवा मत्स्य संघ" (TMS) का गठन किया और रैलियों तथा चक्का जाम के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा की।
Takeaway 5
सरकार द्वारा गठित समिति की सिफारिश पर 2 जनवरी 1997 को तवा जलाशय का 5-वर्षीय मत्स्य पट्टा औपचारिक रूप से संघ को दिया गया।
Takeaway 6
तवा मत्स्य संघ ने सहकारी समिति बनाकर मछुआरों को उचित मूल्य, परिवहन और ऋण देकर उनकी आय में 300% से अधिक की वृद्धि की।
Takeaway 7
संघ ने सिद्ध किया कि स्थानीय विस्थापितों को अधिकार देने पर वे न केवल समृद्ध होते हैं बल्कि जलीय पर्यावरण की भी रक्षा करते हैं।
Takeaway 8
भारतीय संविधान एक "जीवंत दस्तावेज" (Living Document) है क्योंकि लोग अपने वास्तविक आंदोलनों से इसके समानता के आदर्शों को नया अर्थ देते हैं।
Takeaway 9
जब तक देश में आर्थिक और सामाजिक न्याय नहीं मिलता, तब तक केवल मतदान की राजनीतिक समानता से संपूर्ण लोकतंत्र अधूरा रहता है।
Takeaway 10
समानता समाज में अपने आप नहीं आती; इसके लिए जनता को जागरूक, संगठित और संवैधानिक संघर्षों के लिए सदैव तत्पर रहना पड़ता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
तवा मत्स्य संघ (TMS) किस राज्य में और किस नदी पर बने बांध के विस्थापितों का संगठन था?
Reveal Answer & Explanation
Answer: मध्य प्रदेश राज्य, तवा नदी (होशंगाबाद/नर्मदापुरम जिला)।
तवा नदी पर बने बांध से सतपुड़ा के जंगलों के आदिवासी विस्थापित हुए थे जिन्होंने टीएमएस का गठन किया।
2
मध्य प्रदेश सरकार ने औपचारिक रूप से तवा जलाशय में 5 वर्ष के लिए मछली पकड़ने का पट्टा तवा मत्स्य संघ को किस तारीख को सौंपा?
Reveal Answer & Explanation
Answer: 2 जनवरी 1997 को।
मछुआरों के अहिंसक आंदोलन और चक्का जाम के बाद 2 जनवरी 1997 को सरकार ने जलाशय का पट्टा संघ को सौंपा था।
3
तवा मत्स्य संघ की सहकारी समिति द्वारा संचालित व्यवस्था से मछुआरों की आय में लगभग कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई?
Reveal Answer & Explanation
Answer: तीन गुना (लगभग 300%) से अधिक की वृद्धि।
बिचौलियों के हटने और सीधे थोक बिक्री से मछुआरों को मिलने वाले मूल्य में 300% से अधिक का इजाफा हुआ।
4
भारतीय संविधान को एक 'जीवंत दस्तावेज' (Living Document) क्यों माना जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि आम नागरिक और जन-आंदोलन अपने वास्तविक संघर्षों से इसके समानता और न्याय के आदर्शों को हर रोज नया और समृद्ध अर्थ देते हैं।
संविधान केवल कागजी कानून नहीं है, बल्कि समाज के बदलते समय और जन-संघर्षों के साथ निरंतर सक्रिय और गतिशील रहता है।
5
1994 में तवा जलाशय में स्थानीय आदिवासियों के आजीविका संकट का मुख्य कारण क्या था?
Reveal Answer & Explanation
Answer: सरकार द्वारा मछली पकड़ने का एकाधिकार निजी ठेकेदारों को नीलाम कर देना।
निजी ठेकेदारों ने स्थानीय आदिवासियों को जलाशय से खदेड़ दिया और बाहर से सस्ते मजदूर लाकर गुंडों से ग्रामीणों को धमकाया था।
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