रसायन विज्ञान विज्ञान की वह शाखा है जो द्रव्य के संघटन, संरचना, गुणधर्मों तथा रासायनिक परिवर्तनों का अध्ययन करती है। द्रव्य की भौतिक अवस्था के आधार पर इसे ठोस (Solid), द्रव (Liquid) तथा गैस (Gas) में वर्गीकृत किया जाता है। रासायनिक संघटन के आधार पर द्रव्य को शुद्ध पदार्थों और मिश्रणों में विभाजित किया जाता है।
- शुद्ध पदार्थ (Pure Substances): जिनका संघटन सर्वत्र एक समान और निश्चित होता है।
- तत्व (Elements): एक ही प्रकार के परमाणुओं से बने पदार्थ, जिन्हें साधारण भौतिक या रासायनिक विधियों द्वारा सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता (जैसे: सोना, लोहा, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन)।
- यौगिक (Compounds): दो या दो से अधिक तत्व जब एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में रासायनिक रूप से संयुक्त होते हैं (जैसे: जल $H_2O$, ग्लूकोज $C_6H_{12}O_6$)।
- मिश्रण (Mixtures): दो या दो से अधिक पदार्थ जब किसी भी अनुपात में बिना रासायनिक क्रिया के मिलते हैं।
- समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture): जिसके सभी घटकों का वितरण संपूर्ण मिश्रण में एक समान होता है (जैसे: चीनी का जल में विलयन, वायु)।
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture): जिसका संघटन संपूर्ण मिश्रण में एक समान नहीं होता (जैसे: रेत और नमक का मिश्रण, धुआँ)।
| भौतिक राशि (Physical Quantity) | मात्रक का नाम (SI Unit) | प्रतीक (Symbol) | परिभाषा / संदर्भ |
|---|---|---|---|
| लंबाई (Length) | मीटर (Meter) | m | प्रकाश द्वारा निर्वात में $1/299792458$ सेकंड में तय की गई दूरी। |
| द्रव्यमान (Mass) | किलोग्राम (Kilogram) | kg | प्लांक स्थिरांक $h = 6.62607015 \times 10^{-34}\text{ J}\cdot\text{s}$ के आधार पर पुनर्परिभाषित। |
| समय (Time) | सेकंड (Second) | s | सीज़ियम-133 ($^{133}\text{Cs}$) परमाणु के 9,192,631,770 आवर्त कालों की अवधि। |
| विद्युत धारा (Electric Current) | एम्पीयर (Ampere) | A | मूल आवेश $e = 1.602176634 \times 10^{-19}\text{ C}$ द्वारा निर्धारित। |
| ऊष्मागतिक ताप (Temperature) | केल्विन (Kelvin) | K | बोल्ट्ज़मान स्थिरांक $k = 1.380649 \times 10^{-23}\text{ J/K}$ द्वारा निर्धारित। |
| पदार्थ की मात्रा (Amount of Substance) | मोल (Mole) | mol | $6.02214076 \times 10^{23}$ मूल कणों वाली मात्रा। |
| ज्योति तीव्रता (Luminous Intensity) | कैंडेला (Candela) | cd | विशिष्ट आवृत्ति के एकवर्णी प्रकाश स्रोत द्वारा परिभाषित। |
किसी भी वैज्ञानिक मापन में यथार्थता को सही रूप से व्यक्त करने के लिए सार्थक अंकों के निम्नलिखित नियम लागू होते हैं:
- नियम 1: सभी गैर-शून्य अंक सार्थक होते हैं (उदा. $285\text{ cm}$ में 3 सार्थक अंक हैं)।
- नियम 2: दो गैर-शून्य अंकों के बीच स्थित सभी शून्य सार्थक होते हैं (उदा. $2.005\text{ g}$ में 4 सार्थक अंक हैं)।
- नियम 3: पहले गैर-शून्य अंक के बाईं ओर स्थित आरंभिक शून्य कभी सार्थक नहीं होते; वे केवल दशमलव की स्थिति दर्शाते हैं (उदा. $0.03$ में 1 तथा $0.0052$ में 2 सार्थक अंक हैं)।
- नियम 4: दशमलव बिंदु के दाईं ओर स्थित अंतस्थ शून्य सार्थक होते हैं (उदा. $0.200\text{ g}$ में 3 तथा $100.0$ में 4 सार्थक अंक हैं)।
- नियम 5: बिना दशमलव वाली संख्याओं के अंतस्थ शून्य सामान्यतः सार्थक नहीं होते (उदा. $100$ में 1, 2 या 3 सार्थक अंक हो सकते हैं)। वैज्ञानिक संकेतन इस संशय को दूर करता है: $1 \times 10^2$ (1 सार्थक अंक), $1.0 \times 10^2$ (2 सार्थक अंक), $1.00 \times 10^2$ (3 सार्थक अंक)।
- नियम 6: वस्तुओं की यथार्थ गिनती में सार्थक अंकों की संख्या अनंत (Infinite) होती है (उदा. 20 गेंदें $= 20.000...$)।
- जोड़ या घटाव में, अंतिम परिणाम में दशमलव के बाद उतने ही अंक होने चाहिए जितने कि दी गई संख्याओं में दशमलव के बाद न्यूनतम अंक हों (उदा. $18.0 + 1.012 = 19.012 \rightarrow 19.0$)।
- गुणा या भाग में, अंतिम परिणाम में कुल सार्थक अंक सबसे कम सार्थक अंक वाली मूल संख्या के बराबर होने चाहिए (उदा. $2.5 \times 1.25 = 3.125 \rightarrow 3.1$)।