1.1 चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux - $\Phi_B$)
किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित किसी काल्पनिक अथवा वास्तविक पृष्ठ से अभिलंबवत गुजरने वाली चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की कुल संख्या की माप को चुंबकीय फ्लक्स कहते हैं:
$$\mathbf{\Phi_B = \int_A \vec{B}\cdot d\vec{A} = B A \cos\theta}$$• $\theta$: चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ तथा तल के अभिलंब सदिश $d\vec{A}$ के बीच का कोण।• प्रकृति: अदिश राशि।
• SI मात्रक: टेस्ला-मीटर$^2$ ($\text{T}\cdot\text{m}^2$) अथवा वेबर (Weber - Wb)। ($1\text{ Wb} = 1\text{ V}\cdot\text{s} = 10^8\text{ Maxwell}$)।
• विमीय सूत्र: $[ML^2T^{-2}A^{-1}]$।
1.2 फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण के दो नियम (Faraday's Laws)
जब कभी किसी बंद परिपथ अथवा कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो परिपथ में एक विद्युत वाहक बल (Induced EMF) प्रेरित हो जाता है। यदि परिपथ बंद हो, तो उसमें एक प्रेरित धारा बहने लगती है। यह प्रेरित EMF केवल तब तक रहता है जब तक कि चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है。
द्वितीय नियम (परिमाणात्मक नियम - Quantitative Rule):
परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल ($\mathcal{E}$) का परिमाण, परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर (ऋणात्मक दर) के अनुक्रमानुपाती होता है:
$$\mathbf{\mathcal{E} = -\frac{d\Phi_B}{dt}}$$
यदि कुंडली में फेरों की संख्या $N$ हो, तो कुल प्रेरित विद्युत वाहक बल:
$$\mathbf{\mathcal{E} = -N \frac{d\Phi_B}{dt}} = -N \frac{\Phi_2 - \Phi_1}{\Delta t}$$जहाँ ऋण चिह्न (Negative sign) लेंज के नियम को निरूपित करता है।