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CBSE • कक्षा XII • Physics • अध्याय 13
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

नाभिक (Nuclei)

परमाणु के 99.99% खोखले विस्तार के केंद्र में स्थित 'नाभिक' ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली रहस्यों का केंद्र है। सन् 1932 में जेम्स चैडविक द्वारा विद्युत-उदासीन कण न्यूट्रॉन ($^1_0\text{n}$) की खोज के बाद नाभिक का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट हुआ—नाभिक धनावेशित प्रोटॉनों एवं उदासीन न्यूट्रॉनों (जिन्हें संयुक्त रूप से न्यूक्लिऑन कहते हैं) से मिलकर बना है। नाभिक की त्रिज्या का प्रायोगिक संबंध $R = R_0 A^{1/3}$ (जहाँ $R_0 = 1.2\text{ fm}$) यह आश्चर्यजनक सत्य उजागर करता है कि सभी तत्वों के नाभिकों का नाभिकीय घनत्व ($\rho \approx 2.3 \times 10^{17}\text{ kg/m}^3$) सर्वदा एकसमान और अकल्पनीय रूप से सघन होता है! कूलॉम के प्रचंड प्रतिकर्षण के बावजूद प्रोटॉनों को एक साथ बांधे रखने वाला नाभिकीय बल (Nuclear Force) प्रकृति का सबसे प्रबलतम, लघु-परासी एवं आवेश-मुक्त बल है। आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण ($E = mc^2$) के अनुसार नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान उसके अवयवी कणों के योग से कुछ कम होता है; यह अंतर द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$) कहलाता है जो बंधन ऊर्जा ($E_b = \Delta m \times 931.5\text{ MeV}$) में परिवर्तित हो जाती है। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा वक्र ($E_{bn} - A$ Curve) यह सिद्ध करता है कि आयरन ($^{56}\text{Fe}$, $8.75\text{ MeV}$) प्रकृति का सर्वाधिक स्थायी नाभिक है, और इसी वक्र से भारी नाभिकों के नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission - यूरेनियम विखंडन $\approx 200\text{ MeV}$) तथा हल्के नाभिकों के नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion - सूर्य व तारों का ऊर्जा स्रोत $17.6\text{ MeV}$) में विमुक्त होने वाली असीम ऊर्जा का औचित्य स्थापित होता है।

यदि एक चम्मच भर नाभिकीय पदार्थ को तराजू पर रख दिया जाए, तो उसका वजन कितने सौ करोड़ हाथियों के बराबर होगा?

कल्पना कीजिए कि आप किसी परमाणु के केंद्र में स्थित नाभिक से केवल एक चाय का छोटा चम्मच (1 cubic cm) भरकर नाभिकीय द्रव्य निकाल लेते हैं। आप सोच सकते हैं कि वह कितना भारी होगा? उस एक चम्मच नाभिकीय पदार्थ का द्रव्यमान लगभग 23 करोड़ टन (2.3 × 10⁸ टन) होगा! यानी पूरे पृथ्वी के करोड़ों हाथियों और गगनचुंबी इमारतों को एक नन्हीं सी चम्मच में ठूंस दिया गया हो! इतने प्रचंड घनत्व वाले केंद्र में जब प्रोटॉन-प्रोटॉन पास आते हैं, तो कूलॉम प्रतिकर्षण के कारण उन्हें एक-दूसरे को उड़ा देना चाहिए। परंतु प्रकृति का सबसे रहस्यमयी महा-बल—'नाभिकीय बल'—उन्हें फेविकोल से भी अरबों गुना मजबूती से जकड़े रखता है! और जब यह जकड़न टूटती है, तो जन्म होता है परमाणु बम और सूर्य की उस अग्नि का जो अरबों वर्षों से धरती को जीवन दे रही है! आइए जानें नाभिक की इस प्रचंड ऊर्जा का संपूर्ण भौतिक शास्त्र!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'नाभिक' अध्याय से 3 से 5 अंकों के सिद्धांतिक व संख्यात्मक प्रश्न अनिवार्यतः पूछे जाते हैं। नाभिक की संरचना (समस्थानिक, समभारिक, समन्यूट्रॉनिक), नाभिक की त्रिज्या ($R = R_0 A^{1/3}$) तथा नाभिकीय घनत्व का द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र होना सिद्ध करना, नाभिकीय बल के 4 प्रमुख लक्षण (प्रबलतम, लघु-परासी, आवेश-मुक्त, संतृप्त), द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$) तथा बंधन ऊर्जा ($E_b = \Delta m \times 931.5\text{ MeV}$) की परिभाषा व संख्यात्मक प्रश्न, प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा वक्र ($E_{bn}$ Curve) के प्रमुख लक्षण एवं इसके आधार पर नाभिकीय विखंडन व संलयन की व्याख्या, तथा यूरेनियम विखंडन अभिक्रिया व ताप-नाभिकीय संलयन पर प्रश्न बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • आइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता संबंध ($E = mc^2$)।
  • परमाणु संरचना, परमाणु क्रमांक ($Z$), द्रव्यमान संख्या ($A$), न्यूट्रॉन संख्या ($N = A - Z$)।
  • ऊर्जा के मात्रक: इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ($1\text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19}\text{ J}$, $1\text{ MeV} = 10^6\text{ eV}$)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • नाभिक की संरचना को समझना तथा $1\text{ u}$ द्रव्यमान के तुल्य ऊर्जा ($931.5\text{ MeV}$) का परिकलन करना।
  • नाभिक त्रिज्या सूत्र ($R = R_0 A^{1/3}$) का अनुप्रयोग करना तथा सिद्ध करना कि नाभिकीय घनत्व द्रव्यमान संख्या पर निर्भर नहीं करता।
  • नाभिकीय बलों के प्रमुख अभिलक्षणों (प्रबलता, लघु-परास, संतृप्ति) की व्याख्या करना।
  • द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$) एवं प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ($E_{bn}$) की गणना करना।
  • प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा वक्र के आधार पर नाभिकीय विखंडन एवं नाभिकीय संलयन की ऊर्जा विमुक्ति का कारण स्पष्ट करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. नाभिक की संरचना, आकार एवं नाभिकी...
2 2. नाभिकीय बल (Nuclear Forces) के अ...
3 3. द्रव्यमान क्षति एवं बंधन ऊर्जा (...
4 4. नाभिकीय विखंडन एवं नाभिकीय संलयन...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. नाभिक की संरचना, आकार एवं नाभिकीय घनत्व

1.1 नाभिक का संघटन एवं शब्दावली

नाभिक का निर्माण दो मूल कणों—प्रोटॉन (आवेश $+e$, $m_p = 1.00727\text{ u}$) तथा न्यूट्रॉन (उदासीन, चैडविक द्वारा 1932 में खोजा गया, $m_n = 1.00866\text{ u}$) से होता है। इन्हें संयुक्त रूप से न्यूक्लिऑन (Nucleons) कहते हैं।

  • परमाणु क्रमांक ($Z$): नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या।
  • द्रव्यमान संख्या ($A$): कुल न्यूक्लिऑनों की संख्या ($A = Z + N$, जहाँ $N = A - Z$ न्यूट्रॉनों की संख्या है)। संकेत: $\mathbf{^A_Z\text{X}}$।
  • परमाणु द्रव्यमान मात्रक (Atomic Mass Unit - $\text{u}$): $^{12}\text{C}$ परमाणु के द्रव्यमान का $1/12$वां भाग:
    $$\mathbf{1\text{ u} = 1.660539 \times 10^{-27}\text{ kg}}$$
    आइंस्टीन के नियम $E = mc^2$ से $1\text{ u}$ के समतुल्य ऊर्जा:
    $$\mathbf{E = (1.6605 \times 10^{-27}\text{ kg}) \times (3 \times 10^8\text{ m/s})^2 \approx 931.5\text{ MeV}}$$
  • वर्गीकरण:
    • समस्थानिक (Isotopes): समान $Z$, भिन्न $A$ (जैसे $^1_1\text{H}, ^2_1\text{H}, ^3_1\text{H}$)।
    • समभारिक (Isobars): समान $A$, भिन्न $Z$ (जैसे $^{40}_{18}\text{Ar}, ^{40}_{20}\text{Ca}$)।
    • समन्यूट्रॉनिक (Isotones): समान न्यूट्रॉन संख्या $N$ (जैसे $^3_1\text{H}, ^4_2\text{He}$ दोनों में $N = 2$)।

1.2 नाभिक का आकार एवं नाभिकीय घनत्व का निगमन

प्रायोगिक प्रकीर्णन प्रयोगों द्वारा यह पाया गया कि किसी नाभिक का आयतन उसकी द्रव्यमान संख्या $A$ के अनुक्रमानुपाती होता है ($V \propto A$)। यदि नाभिक को $R$ त्रिज्या का गोला माना जाए, तो $\frac{4}{3}\pi R^3 \propto A \implies R^3 \propto A$:

$$\mathbf{R = R_0 A^{1/3}}$$
जहाँ $\mathbf{R_0 \approx 1.2 \times 10^{-15}\text{ m} = 1.2\text{ fm}$ (फर्मी) एक सार्वत्रिक स्थिरांक है।

नाभिकीय घनत्व (Nuclear Density - $\rho$) का निगमन:

माना प्रत्येक न्यूक्लिऑन का औसत द्रव्यमान $m \approx 1.66 \times 10^{-27}\text{ kg}$ है।
नाभिक का कुल द्रव्यमान $M = A \times m$ तथा नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3}\pi R^3 = \frac{4}{3}\pi (R_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3}\pi R_0^3 A$。
अतः नाभिकीय घनत्व:
$$\rho = \frac{M}{V} = \frac{A \times m}{\frac{4}{3}\pi R_0^3 A} = \mathbf{\frac{3m}{4\pi R_0^3}}$$मान रखने पर:
$$\rho = \frac{3 \times (1.66 \times 10^{-27})}{4 \times 3.1416 \times (1.2 \times 10^{-15})^3} \approx \mathbf{2.3 \times 10^{17}\text{ kg/m}^3}$$
क्रांतिक निष्कर्ष: नाभिकीय घनत्व $\rho$ के सूत्र में द्रव्यमान संख्या $A$ कट जाती है! अतः नाभिकीय घनत्व द्रव्यमान संख्या $A$ से पूर्णतः स्वतंत्र होता है—चाहे हाइड्रोजन का सबसे हल्का नाभिक हो या यूरेनियम का सबसे भारी नाभिक, सभी के नाभिकों का घनत्व लगभग $\mathbf{2.3 \times 10^{17}\text{ kg/m}^3}$ ही होता है!

2. नाभिकीय बल (Nuclear Forces) के अभिलक्षण

2.1 नाभिकीय बल की परिभाषा एवं आवश्यकता

नाभिक के अतिसूक्ष्म आकार ($10^{-15}\text{ m}$) में एक साथ उपस्थित धनावेशित प्रोटॉनों के मध्य अत्यधिक शक्तिशाली स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षण बल ($F_e \approx 230\text{ N}$) कार्य करता है। फिर भी नाभिक स्थायी रहता है। इससे सिद्ध होता है कि न्यूक्लिऑनों के मध्य एक अत्यधिक प्रबल आकर्षण बल कार्य करता है जिसे नाभिकीय बल कहते हैं।

2.2 नाभिकीय बल के 5 प्रमुख लक्षण

  1. 1. प्रकृति का सबसे प्रबलतम बल (Strongest Force in Nature):
    नाभिकीय बल गुरुत्वाकर्षण बल से लगभग $10^{38}$ गुना तथा कूलॉम स्थिरवैद्युत बल से लगभग $100$ गुना अधिक शक्तिशाली होता है।
  2. 2. लघु-परासी बल (Short-Range Force):
    यह बल केवल नाभिकीय दूरियों (लगभग $\mathbf{1\text{ fm} \text{ से } 2\text{ fm}}$) के भीतर ही प्रभावी होता है। यदि दूरी $3-4\text{ fm}$ से अधिक हो जाए तो नाभिकीय बल तेजी से घटकर शून्य हो जाता है।
  3. 3. आवेश से स्वतंत्र (Charge-Independent):
    नाभिकीय बल विद्युत आवेश पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता। दो प्रोटॉनों के मध्य ($p-p$), दो न्यूट्रॉनों के मध्य ($n-n$), तथा एक प्रोटॉन व एक न्यूट्रॉन के मध्य ($p-n$) लगने वाला नाभिकीय आकर्षण बल परस्पर बिल्कुल समान होता है।
  4. 4. अ-केंद्रीय एवं चक्रण-निर्भर बल (Non-Central & Spin-Dependent):
    यह बल न्यूक्लिऑनों के केंद्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में नहीं लगता और यह न्यूक्लिऑनों के आंतरिक चक्रण (Spin) पर निर्भर करता है।
  5. 5. संतृप्ति का गुण (Saturation Property):
    प्रत्येक न्यूक्लिऑन केवल अपने निकटतम पड़ोसी न्यूक्लिऑनों के साथ ही नाभिकीय बल द्वारा अंतःक्रिया करता है, दूर स्थित न्यूक्लिऑनों से नहीं। साथ ही, जब दूरी $\mathbf{r < 0.8\text{ fm}}$ हो जाती है, तो यह बल तीव्र प्रतिकर्षण में बदल जाता है ताकि नाभिक का पतन (Collapse) न हो सके।

3. द्रव्यमान क्षति एवं बंधन ऊर्जा (Mass Defect & Binding Energy)

3.1 द्रव्यमान क्षति (Mass Defect - $\Delta m$)

परिभाषा: किसी नाभिक का मापा गया वास्तविक द्रव्यमान ($M$) सदैव उसमें उपस्थित स्वतंत्र प्रोटॉनों एवं न्यूट्रॉनों के द्रव्यमानों के योग से कुछ कम होता है। इस द्रव्यमान अंतर को द्रव्यमान क्षति कहते हैं:

$$\mathbf{\Delta m = [Z m_p + (A - Z) m_n] - M_{\text{nucleus}}}$$जहाँ $m_p$ प्रोटॉन का द्रव्यमान, $m_n$ न्यूट्रॉन का द्रव्यमान तथा $M_{\text{nucleus}}$ नाभिक का द्रव्यमान है。

3.2 नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Binding Energy - $E_b$)

परिभाषा: किसी नाभिक के सभी न्यूक्लिऑनों को एक-दूसरे से अनंत दूरी तक पृथक (विखंडित) करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को उस नाभिक की बंधन ऊर्जा ($E_b$) कहते हैं। आइंस्टीन के नियमानुसार, यही ऊर्जा नाभिक के निर्माण के समय द्रव्यमान क्षति $\Delta m$ के लुप्त होने से मुक्त होती है:

$$\mathbf{E_b = \Delta m \times c^2 = \Delta m(\text{in u}) \times 931.5\text{ MeV}}$$

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा (Binding Energy per Nucleon - $E_{bn}$):

$$\mathbf{E_{bn} = \frac{E_b}{A}}$$महत्व: $E_{bn}$ किसी नाभिक के स्थायित्व (Stability) का वास्तविक मापक है। जिस नाभिक की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा जितनी अधिक होगी, वह नाभिक उतना ही अधिक स्थायी होगा।

3.3 प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा वक्र ($E_{bn} - A$ Curve) के प्रमुख लक्षण

वक्र के 4 स्वर्णिम निष्कर्ष:
1. मध्यम द्रव्यमान वाले नाभिक सर्वाधिक स्थायी: $30 < A < 170$ परास के लिए $E_{bn}$ लगभग नियत और उच्च ($\u0007pprox 8.5\text{ MeV/nucleon}$) रहती है。
2. सर्वाधिक स्थायी नाभिक: आयरन ($^{56}\text{Fe}$) के लिए $E_{bn}$ का मान उच्चतम $\mathbf{\approx 8.75\text{ MeV/nucleon}}$ होता है। प्रकृति में लोहा सबसे स्थायी तत्व है。
3. हल्के नाभिकों ($A < 30$) में अस्थायित्व: हाइड्रोजन ($^2_1\text{H}$) के लिए $E_{bn} \approx 1.1\text{ MeV}$ बहुत कम होती है, परंतु $^4_2\text{He}, ^{12}_6\text{C}, ^{16}_8\text{O}$ पर स्थानीय शिखर (Peaks) मिलते हैं जो इनके विशेष स्थायित्व को दर्शाते हैं。
4. भारी नाभिकों ($A > 170$) में ह्रास: प्रोटॉनों के बीच बढ़ते कूलॉम प्रतिकर्षण के कारण $E_{bn}$ घटकर $\approx 7.6\text{ MeV}$ (जैसे यूरेनियम $^{238}\text{U}$) रह जाती है。

4. नाभिकीय विखंडन एवं नाभिकीय संलयन (Fission & Fusion)

4.1 नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)

परिभाषा: जब एक भारी नाभिक (जैसे $^{235}\text{U}$) एक मंदगामी तापीय न्यूट्रॉन को अवशोषित करके लगभग समान द्रव्यमान वाले दो मध्यम नाभिकों में टूट जाता है और साथ में प्रचंड ऊर्जा तथा न्यूट्रॉन मुक्त करता है, तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहते हैं (ऑटो हान व स्ट्रॉसमेन, 1939):

$$\mathbf{^{235}_{92}\text{U} + ^1_0\text{n} \to ^{236}_{92}\text{U}^* \to ^{144}_{56}\text{Ba} + ^{89}_{36}\text{Kr} + 3 ^1_0\text{n} + Q \quad (\approx 200\text{ MeV})}$$
  • ऊर्जा विमुक्ति का कारण: विखंडन उत्पादों ($E_{bn} \approx 8.5\text{ MeV}$) की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा मूल भारी नाभिक ($E_{bn} \approx 7.6\text{ MeV}$) से अधिक होती है। अतः प्रति न्यूक्लिऑन $\approx 0.9\text{ MeV}$ ऊर्जा मुक्त होती है ($235 \times 0.9 \approx 200\text{ MeV}$)।
  • श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction): उत्सर्जित न्यूट्रॉन अन्य यूरेनियम नाभिकों का विखंडन करते हैं। नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया नाभिकीय रिएक्टर में विद्युत उत्पादन हेतु तथा अनियंत्रित अभिक्रिया परमाणु बम में प्रयुक्त होती है।

4.2 नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)

परिभाषा: जब दो या दो से अधिक अत्यंत हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक) परस्पर संयुक्त होकर एक भारी एवं अधिक स्थायी नाभिक बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते हैं:

$$\mathbf{^2_1\text{H} + ^3_1\text{H} \to ^4_2\text{He} + ^1_0\text{n} + 17.6\text{ MeV}}$$
  • शर्तें (ताप-नाभिकीय अभिक्रिया): नाभिकों के मध्य स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षण रोधिका (Coulomb Barrier) को पार करने के लिए अत्यधिक उच्च ताप ($\mathbf{\sim 10^7 - 10^8\text{ K}}$) तथा प्रचंड दाब की आवश्यकता होती है।
  • सूर्य एवं तारों की ऊर्जा: सूर्य के केंद्र में होने वाला प्रोटॉन-प्रोटॉन चक्र (Proton-Proton Cycle) निरंतर $4 ^1_1\text{H} \to ^4_2\text{He} + 2e^+ + 2\nu + 26.7\text{ MeV}$ द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करता है।

प्रमुख भौतिक सूत्र, नियम एवं नियतांक

नाभिक त्रिज्या
$$R = R_0 A^{1/3} \quad (R_0 \approx 1.2 \times 10^{-15}\text{ m} = 1.2\text{ fm})$$
नाभिकीय घनत्व
= {3m}{4 R_0^3} ≈ 2.3 × 10^{17} kg/m^3 (A से स्वतंत्र)
amu ऊर्जा तुल्यता
$$1\text{ u} = 1.6605 \times 10^{-27}\text{ kg} = 931.5\text{ MeV}$$
द्रव्यमान क्षति
$$\Delta m = [Z m_p + (A - Z) m_n] - M_{\text{nucleus}}$$
नाभिकीय बंधन ऊर्जा
$$E_b = \Delta m \times c^2 = \Delta m(\text{in u}) \times 931.5\text{ MeV}$$
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा
E_{bn} = {E_b}{A} (आयरन ^{56}Fe ≈ 8.75 MeV, अधिकतम)
यूरेनियम विखंडन Q
$$Q \approx 200\text{ MeV} \quad (\approx 0.9\text{ MeV/nucleon})$$
D-T संलयन Q
$$^2_1\text{H} + ^3_1\text{H} \to ^4_2\text{He} + ^1_0\text{n} + 17.6\text{ MeV}$$
सूर्य प्रोटॉन चक्र Q
$$4 ^1_1\text{H} \to ^4_2\text{He} + 2e^+ + 2\nu + 26.7\text{ MeV}$$
नाभिकीय बल परास
1-2 fm (प्रबलतम); r < 0.8 fm (प्रतिकर्षण)
नाभिकीय रिएक्टर मंदक
D_2O (भारी जल), ग्रेफाइट (न्यूट्रॉन गति मंद करने हेतु)
नियंत्रक छड़ें
कैडमियम (Cd) व बोरॉन (B) - न्यूट्रॉन अवशोषक

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
यदि ऐलुमिनियम ($^{27}_{13}\text{Al}$) के नाभिक की त्रिज्या $3.6\text{ fm}$ हो, तो टेल्यूरियम ($^{125}_{52}\text{Te}$) के नाभिक की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
ऐलुमिनियम की द्रव्यमान संख्या $A_1 = 27$, त्रिज्या $R_1 = 3.6\text{ fm}$
टेल्यूरियम की द्रव्यमान संख्या $A_2 = 125$, त्रिज्या $R_2 = ?$

सूत्र:
नाभिक की त्रिज्या: $R = R_0 A^{1/3}$
अनुपात लेने पर:
$$\frac{R_2}{R_1} = \left(\frac{A_2}{A_1}\right)^{1/3} = \left(\frac{125}{27}\right)^{1/3}$$
चूंकि $125 = 5^3$ तथा $27 = 3^3$:
$$\frac{R_2}{R_1} = \frac{5}{3}$$
$$R_2 = \frac{5}{3} \times R_1 = \frac{5}{3} \times 3.6\text{ fm} = 5 \times 1.2\text{ fm} = \mathbf{6.0\text{ fm}}$$
उत्तर: टेल्यूरियम नाभिक की त्रिज्या $\mathbf{6.0\text{ fm}}$ ($6.0 \times 10^{-15}\text{ m}$) होगी।
उदाहरण 2
सिद्ध कीजिए कि नाभिकीय घनत्व द्रव्यमान संख्या $A$ पर निर्भर नहीं करता।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
नाभिकीय घनत्व की स्वतंत्रता का प्रमाण:
1. माना किसी तत्व के नाभिक की द्रव्यमान संख्या $A$ तथा त्रिज्या $R$ है。
2. नाभिक का आकार गोलीय माना जाए, तो नाभिक का आयतन:
$$V = \frac{4}{3}\pi R^3$$
हम जानते हैं कि नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ होती है, जहाँ $R_0 = 1.2\text{ fm}$ स्थिरांक है。
अतः आयतन:
$$V = \frac{4}{3}\pi (R_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3}\pi R_0^3 A$$
3. यदि प्रत्येक न्यूक्लिऑन का औसत द्रव्यमान $m$ हो, तो नाभिक का कुल द्रव्यमान:
$$M = A \times m$$
4. नाभिकीय घनत्व (द्रव्यमान / आयतन):
$$\rho = \frac{M}{V} = \frac{A \times m}{\frac{4}{3}\pi R_0^3 A}$$
अंश और हर से $A$ निरस्त (Cancel) हो जाता है:
$$\mathbf{\rho = \frac{3m}{4\pi R_0^3}}$$
चूंकि $m, \pi$ और $R_0$ तीनों सार्वत्रिक नियतांक हैं, अतः नाभिकीय घनत्व $\rho$ द्रव्यमान संख्या $A$ से पूर्णतः स्वतंत्र होता है। (इति सिद्धम्)
सभी नाभिकों का घनत्व लगभग $2.3 \times 10^{17}\text{ kg/m}^3$ नियत रहता है।
उदाहरण 3
हीलियम नाभिक ($^4_2\text{He}$) के लिए द्रव्यमान क्षति तथा प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ज्ञात कीजिए। दिया है: प्रोटॉन का द्रव्यमान $m_p = 1.007276\text{ u}$, न्यूट्रॉन का द्रव्यमान $m_n = 1.008665\text{ u}$ तथा हीलियम नाभिक का द्रव्यमान $M = 4.001506\text{ u}$।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
हीलियम ($^4_2\text{He}$) में प्रोटॉनों की संख्या $Z = 2$
न्यूट्रॉनों की संख्या $N = A - Z = 4 - 2 = 2$

1. न्यूक्लिऑनों का कुल द्रव्यमान:
$$2 m_p + 2 m_n = 2(1.007276\text{ u}) + 2(1.008665\text{ u})$$
$$= 2.014552 + 2.017330 = 4.031882\text{ u}$$

2. द्रव्यमान क्षति ($\Delta m$):
$$\Delta m = (2m_p + 2m_n) - M = 4.031882\text{ u} - 4.001506\text{ u} = \mathbf{0.030376\text{ u}}$$

3. कुल बंधन ऊर्जा ($E_b$):
चूंकि $1\text{ u} = 931.5\text{ MeV}$:
$$E_b = 0.030376 \times 931.5\text{ MeV} = \mathbf{28.295\text{ MeV}}$$

4. प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ($E_{bn}$):
$$E_{bn} = \frac{E_b}{A} = \frac{28.295\text{ MeV}}{4} = \mathbf{7.074\text{ MeV/nucleon}}$$
उदाहरण 4
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा वक्र के मुख्य अभिलक्षणों का उल्लेख कीजिए तथा इसके आधार पर नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन में ऊर्जा विमुक्ति की व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा वक्र ($E_{bn} - A$) के मुख्य अभिलक्षण:
1. मध्यवर्ती द्रव्यमान संख्या वाले नाभिकों ($30 < A < 170$) के लिए $E_{bn}$ का मान लगभग नियत और अत्यधिक उच्च ($\u0007pprox 8.5\text{ MeV}$) रहता है।
2. आयरन ($^{56}\text{Fe}$) के लिए $E_{bn}$ का मान शिखर पर सर्वाधिक $\mathbf{8.75\text{ MeV/nucleon}}$ होता है, अतः लोहा ब्रह्मांड में सबसे स्थायी नाभिक है।
3. अति भारी नाभिकों ($A > 170$) के लिए कूलॉम प्रतिकर्षण के कारण $E_{bn}$ घटकर $\approx 7.6\text{ MeV}$ (जैसे यूरेनियम $^{238}\text{U}$) रह जाती है।
4. अति हल्के नाभिकों ($A < 30$) के लिए $E_{bn}$ का मान अत्यंत कम होता है (ड्यूटीरियम हेतु केवल $1.1\text{ MeV}$)।

नाभिकीय विखंडन में ऊर्जा विमुक्ति:
जब कोई भारी नाभिक ($A \approx 240, E_{bn} \approx 7.6\text{ MeV}$) दो मध्यम नाभिकों ($A \approx 120, E_{bn} \approx 8.5\text{ MeV}$) में टूटता है, तो प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा में लगभग $\Delta E_{bn} = 8.5 - 7.6 = 0.9\text{ MeV}$ की वृद्धि होती है। अतः कुल विमुक्त ऊर्जा $\approx 240 \times 0.9 = \mathbf{\approx 216\text{ MeV}}$ होती है。

नाभिकीय संलयन में ऊर्जा विमुक्ति:
जब दो अत्यंत हल्के नाभिक (कम $E_{bn}$) आपस में जुड़कर एक भारी नाभिक (जैसे $^4\text{He}, E_{bn} \approx 7.1\text{ MeV}$) बनाते हैं, तो प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा में भारी उछाल आता है। यह अंतर प्रचंड ऊष्मा एवं विकिरण के रूप में बाहर निकलता है।
उदाहरण 5
नाभिकीय बल क्या है? इसके किन्हीं चार प्रमुख लक्षणों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
नाभिकीय बल की परिभाषा:
नाभिक के भीतर न्यूक्लिऑनों (प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों) को एक साथ बांधकर रखने वाले अत्यंत शक्तिशाली आकर्षण बल को नाभिकीय बल (Nuclear Force) कहते हैं。

चार प्रमुख अभिलक्षण:
1. प्रकृति का सबसे शक्तिशाली बल: यह बल गुरुत्वाकर्षण बल से $10^{38}$ गुना तथा कूलॉम स्थिरवैद्युत बल से लगभग 100 गुना अधिक शक्तिशाली होता है। इसी कारण यह प्रोटॉन-प्रोटॉन प्रतिकर्षण पर विजय पाकर नाभिक को जोड़े रखता है।
2. लघु-परासी प्रकृति: यह केवल नाभिकीय सीमाओं (लगभग $1\text{ fm} - 2\text{ fm}$) के भीतर ही कार्य करता है। $3-4\text{ fm}$ से अधिक दूरी होते ही यह तीव्रता से शून्य हो जाता है।
3. आवेश से स्वतंत्र: यह विद्युत आवेश पर निर्भर नहीं करता। प्रोटॉन-प्रोटॉन ($p-p$), न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन ($n-n$) तथा प्रोटॉन-न्यूट्रॉन ($p-n$) के मध्य लगने वाला नाभिकीय बल एकसमान होता है।
4. संतृप्ति का गुण (Saturation Property): प्रत्येक न्यूक्लिऑन केवल अपने ठीक पास वाले पड़ोसी न्यूक्लिऑनों को ही आकर्षित करता है। साथ ही, $0.8\text{ fm}$ से कम दूरी पर यह बल तीव्र प्रतिकर्षण में बदल जाता है जिससे नाभिक संकुचित होकर नष्ट नहीं होता।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारी नाभिकों का घनत्व हल्के नाभिकों से अधिक मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

नाभिकीय घनत्व द्रव्यमान संख्या $A$ से पूर्णतः स्वतंत्र होता है; सभी तत्वों के नाभिकों का घनत्व लगभग $2.3 \times 10^{17}\text{ kg/m}^3$ नियत रहता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

नाभिकीय बल को कूलॉम अथवा गुरुत्वाकर्षण बल का रूप समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

नाभिकीय बल प्रकृति का एक स्वतंत्र मूल बल है; यह आवेश से स्वतंत्र होता है और गुरुत्वाकर्षण से $10^{38}$ गुना अधिक शक्तिशाली है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

द्रव्यमान क्षति को ऊर्जा मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

द्रव्यमान क्षति $\Delta m$ द्रव्यमान का अंतर है (मात्रक $\text{u}$ या $\text{kg}$); जब इसे $c^2$ या $931.5\text{ MeV}$ से गुणा करते हैं तब बंधन ऊर्जा मिलती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

नाभिकीय विखंडन और संलयन में द्रव्यमान बढ़ने का भ्रम।

सही वैज्ञानिक तथ्य

दोनों ही प्रक्रियाओं में अंतिम उत्पादों का कुल द्रव्यमान प्रारंभिक द्रव्यमान से कम होता है; लुप्त द्रव्यमान ऊर्जा में बदलता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आयरन के बाद भी प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा बढ़ती मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा केवल आयरन ($^{56}\text{Fe}$) तक बढ़ती है ($8.75\text{ MeV}$ शिखर), इसके बाद भारी नाभिकों में यह घटने लगती है।

नाभिक: संरचना, नाभिकीय बल, E_bn वक्र, विखंडन व संलयन

नाभिक: आकार, नाभिकीय बल, E_bn वक्र, विखंडन एवं संलयन1. आकार व नाभिकीय बलत्रिज्या R व घनत्व ρ• R = R₀ A¹/³ (R₀ = 1.2 fm)आयतन V ∝ द्रव्यमान संख्या A• नाभिकीय घनत्व ρ = 2.3×10¹⁷ρ = 3m / (4πR₀³) [A से स्वतंत्र!]• नाभिकीय बल लक्षण:प्रबलतम (10³⁸ × गुरुत्व), लघु-परासीआवेश-मुक्त (p-p = n-n = p-n)• 1 u = 931.5 MeV (E=mc²)चैडविक (1932): न्यूट्रॉन खोज2. बंधन ऊर्जा वक्रE_bn बनाम A वक्र• द्रव्यमान क्षति Δm:Δm = [Zm_p + (A-Z)m_n] - M• बंधन ऊर्जा E_b = Δm × 931.5प्रति न्यूक्लिऑन E_bn = E_b / A• ⁵⁶Fe पर शिखर: 8.75 MeVआयरन ब्रह्मांड में सबसे स्थायी• मध्यम A=30-170: ~8.5 MeV• भारी A>170 घटती (~7.6 MeV)हल्के A<30 भी कम E_bn3. विखंडन व संलयनऊर्जा विमुक्ति का स्रोत• नाभिकीय विखंडन (Fission):²³⁵U + n → Ba + Kr + 3n + 200 MeVE_bn 7.6 से बढ़कर 8.5 MeV• नाभिकीय संलयन (Fusion):²H + ³H → ⁴He + n + 17.6 MeVसूर्य व तारों की ऊर्जा का स्रोत• ताप-नाभिकीय शर्तें:अति उच्च ताप ~ 10⁷ K व दाबरिएक्टर: D₂O मंदक, Cd नियंत्रकबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Nuclear Physics Capsule)नाभिकीय घनत्व:ρ = 3m/(4πR₀³) ≈ 2.3×10¹⁷ kg/m³; यह द्रव्यमान संख्या A पर निर्भर नहीं करता।बंधन ऊर्जा वक्र:⁵⁶Fe शिखर (8.75 MeV/nucleon); भारी नाभिक टूटने (विखंडन) व हल्के जुड़ने (संलयन) पर ऊर्जा विमुक्त।1 u द्रव्यमान ऊर्जा:1 u = 931.5 MeV; यूरेनियम विखंडन Q ≈ 200 MeV; सूर्य प्रोटॉन चक्र Q ≈ 26.7 MeV।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
नाभिक प्रोटॉनों व न्यूट्रॉनों (न्यूक्लिऑनों) से बना है; 1 u = 1.66×10⁻²⁷ kg = 931.5 MeV ऊर्जा तुल्य।
मुख्य बिंदु 2
नाभिक की त्रिज्या R = R₀ A¹/³ (R₀ = 1.2 fm); नाभिक का आयतन V ∝ A होता है।
मुख्य बिंदु 3
नाभिकीय घनत्व ρ = 3m/(4πR₀³) ≈ 2.3×10¹⁷ kg/m³ द्रव्यमान संख्या A से स्वतंत्र होता है।
मुख्य बिंदु 4
नाभिकीय बल प्रकृति का प्रबलतम, लघु-परासी (1-2 fm), आवेश-मुक्त एवं संतृप्त बल है।
मुख्य बिंदु 5
द्रव्यमान क्षति Δm = [Zm_p + (A-Z)m_n] - M; लुप्त द्रव्यमान बंधन ऊर्जा E_b = Δm × 931.5 MeV देता है।
मुख्य बिंदु 6
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा E_bn = E_b / A नाभिक के स्थायित्व का वास्तविक मापक है।
मुख्य बिंदु 7
आयरन (⁵⁶Fe) के लिए E_bn उच्चतम (8.75 MeV/nucleon) होती है; लोहा सबसे स्थायी नाभिक है।
मुख्य बिंदु 8
नाभिकीय विखंडन में भारी नाभिक दो मध्यम नाभिकों में टूटकर ~200 MeV ऊर्जा मुक्त करता है।
मुख्य बिंदु 9
नाभिकीय संलयन में हल्के नाभिक अति उच्च ताप (~10⁷ K) पर मिलकर भारी नाभिक बनाते हैं (सूर्य की ऊर्जा)।
मुख्य बिंदु 10
नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल (D₂O) मंदक तथा कैडमियम/बोरॉन नियंत्रक छड़ के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
प्रमाणित कीजिए कि किसी भारी नाभिक और हल्के नाभिक का नाभिकीय घनत्व परस्पर लगभग समान होता है।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नाभिक का द्रव्यमान M = A × m तथा आयतन V = (4/3)πR³ = (4/3)π(R₀ A¹/³)³ = (4/3)πR₀³ A। अतः घनत्व ρ = M/V = (A m)/[(4/3)πR₀³ A] = 3m / (4πR₀³)। इस सूत्र में द्रव्यमान संख्या A निरस्त हो जाती है, जिससे सिद्ध होता है कि सभी तत्वों के नाभिकों का घनत्व लगभग 2.3 × 10¹⁷ kg/m³ समान रहता है।
2
'द्रव्यमान क्षति' (Mass Defect) तथा 'बंधन ऊर्जा' (Binding Energy) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: किसी नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान उसमें उपस्थित घटक न्यूक्लिऑनों के अलग-अलग द्रव्यमानों के योग से सदैव कुछ कम होता है; इस द्रव्यमान अंतर को द्रव्यमान क्षति (Δm) कहते हैं। आइंस्टीन के नियमानुसार, इस लुप्त द्रव्यमान के समतुल्य ऊर्जा E_b = Δm × c² = Δm × 931.5 MeV को नाभिक की बंधन ऊर्जा कहते हैं।
3
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा वक्र (E_bn - A Curve) के आधार पर नाभिकीय विखंडन में ऊर्जा विमुक्त होने का कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: भारी नाभिकों (जैसे ²³⁵U) की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा लगभग 7.6 MeV होती है, जबकि विखंडन के बाद बनने वाले मध्यम नाभिकों (जैसे Ba, Kr) की E_bn लगभग 8.5 MeV हो जाती है। उत्पाद अधिक स्थायी होते हैं और प्रति न्यूक्लिऑन लगभग 0.9 MeV ऊर्जा विमुक्त होती है।
4
नाभिकीय संलयन को 'ताप-नाभिकीय अभिक्रिया' (Thermonuclear Reaction) क्यों कहते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: दो धनावेशित नाभिकों को संलयित होने के लिए उनके मध्य लगने वाले प्रचंड कूलॉम स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षण बल को पार करना होता है। इसके लिए नाभिकों को अत्यधिक गतिज ऊर्जा चाहिए जो केवल अति उच्च ताप (लगभग 10⁷ से 10⁸ K) पर ही प्राप्त हो सकती है, इसलिए इसे ताप-नाभिकीय अभिक्रिया कहते हैं।
5
नाभिकीय बलों के कोई दो प्रमुख अभिलक्षण लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. यह प्रकृति का सबसे प्रबलतम बल है (गुरुत्वाकर्षण से 10³⁸ गुना प्रबल)। 2. यह आवेश से स्वतंत्र होता है (प्रोटॉन-प्रोटॉन, न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन-न्यूट्रॉन के मध्य समान बल लगता है)।

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