1.1 ऐम्पियर के नियम की असंगति (Inconsistency of Ampere's Law)
जब किसी समांतर प्लेट संधारित्र को बैटरी द्वारा आवेशित किया जाता है, तो संयोजक तारों में चालक धारा ($I_c$) बहती है।
- तार के चारों ओर एक लूप $C$ लेने पर ऐम्पियर के नियम से: $\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 I_c \ne 0$ (चुंबकीय क्षेत्र उपस्थित है)।
- किंतु यदि उसी लूप $C$ की परिधि पर आधारित एक बर्तन के आकार का पृष्ठ चुनें जो संधारित्र की प्लेटों के बीच से गुजरता हो: चूंकि प्लेटों के बीच कोई चालक तार नहीं है, अतः $I_c = 0 \implies \oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = 0$।
- यह एक ही परिपथ में एक गंभीर विरोधाभास (असंगति) था: संधारित्र के बाहर चुंबकीय क्षेत्र है परंतु प्लेटों के बीच नहीं, जबकि प्रयोगों ने सिद्ध किया कि प्लेटों के बीच भी चुंबकीय सुई विक्षेपित होती है!
1.2 विस्थापन धारा (Displacement Current - $I_d$) का समाधान
मैक्सवेल (1864) ने इस समस्या को सुलझाते हुए बताया कि संधारित्र के आवेशन के दौरान प्लेटों के बीच संचित आवेश $q$ बढ़ता है, जिससे प्लेटों के बीच का विद्युत क्षेत्र ($E$) तथा विद्युत फ्लक्स ($\Phi_E$) समय के साथ तेजी से बदलता है।
$$\mathbf{I_d = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}}$$
• निगमन: संधारित्र की प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र $E = \frac{q}{\varepsilon_0 A}$
विद्युत फ्लक्स $\Phi_E = E \cdot A = \frac{q}{\varepsilon_0 A} \times A = \frac{q}{\varepsilon_0} \implies q = \varepsilon_0 \Phi_E$
समय के सापेक्ष अवकलन करने पर: $\frac{dq}{dt} = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$
$$\mathbf{I_c = I_d = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}}$$• सततता का नियम: संयोजक तारों में केवल चालक धारा होती है ($I = I_c$, $I_d = 0$), जबकि प्लेटों के बीच केवल विस्थापन धारा होती है ($I = I_d$, $I_c = 0$)। अतः परिपथ में कुल धारा $\mathbf{I = I_c + I_d}$ की सततता सर्वत्र बनी रहती है!