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CBSE • कक्षा XII • Physics • अध्याय 5
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

चुंबकत्व एवं द्रव्य

विद्युत और चुंबकत्व के बीच की समानताएं और विषमताएं इस अध्याय के केंद्र में हैं। एक दंड चुंबक (Bar Magnet) विद्युत द्विध्रुव की तरह ही व्यवहार करता है, जिसके दो ध्रुव—उत्तरी ध्रुव ($N$) तथा दक्षिणी ध्रुव ($S$)—होते हैं और इसका चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{M} = m(2\vec{l})$ सदा $S$ ध्रुव से $N$ ध्रुव की ओर दिष्ट होता है। दंड चुंबक का अक्षीय चुंबकीय क्षेत्र ($B_{\text{axial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}$) निरक्षीय क्षेत्र ($B_{\text{equatorial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3}$) का ठीक दोगुना होता है। किंतु स्थिरवैद्युतिकी और चुंबकत्व में एक अत्यंत मौलिक अंतर है: विद्युत में स्वतंत्र धन और ऋण आवेश पाए जाते हैं, परंतु चुंबकत्व में कभी भी स्वतंत्र एकाकी ध्रुव (Magnetic Monopole) नहीं पाया जाता। यही कारण है कि चुंबकत्व संबंधी गाउस का नियम सर्वदा $\oint \vec{B}\cdot d\vec{A} = 0$ होता है और चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सतत बंद लूप (Closed Loops) बनाती हैं। हमारी पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक की भांति व्यवहार करती है, जिसके चुंबकीय क्षेत्र को भू-चुंबकत्व के तीन अवयवों—दिक्पात कोण ($D$), नति कोण ($\delta$), तथा क्षैतिज घटक ($B_H$)—द्वारा पूर्णतः परिभाषित किया जाता है (ध्रुवों पर $\delta = 90^\circ$ तथा भूमध्य रेखा पर $\delta = 0^\circ$)। पदार्थों के चुंबकीय गुणों के आधार पर द्रव्य को तीन श्रेणियों—प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic), अनुचुंबकीय (Paramagnetic), तथा लौहचुंबकीय (Ferromagnetic)—में वर्गीकृत किया जाता है। लौहचुंबकीय पदार्थों का डोमेन सिद्धांत, क्यूरी ताप ($T_c$), तथा शैथिल्य लूप (Hysteresis Loop) के आधार पर स्थायी चुंबक (स्टील/एल्निको) और ट्रांसफॉर्मर क्रोड (नर्म लोहा) का चयन इस अध्याय की व्यावहारिक पराकाष्ठा है।

यदि एक शक्तिशाली दंड चुंबक को हथौड़े से तोड़कर दो टुकड़े कर दें, तो क्या उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव अलग हो जाएंगे?

बचपन में हम सभी सोचते थे कि यदि चुंबक को बीच से काट दिया जाए तो एक हाथ में सिर्फ उत्तरी ध्रुव ($N$) और दूसरे हाथ में सिर्फ दक्षिणी ध्रुव ($S$) आ जाएगा! परंतु जब आप ऐसा करते हैं, तो चमत्कारिक रूप से टूटे हुए दोनों सिरों पर तुरंत नए $S$ और $N$ ध्रुव पैदा हो जाते हैं—अर्थात एक चुंबक के दो नए पूर्ण चुंबक बन जाते हैं! चाहे आप चुंबक को तोड़कर रेत के कण जितना बारीक कर दें या परमाणु के स्तर तक काट डालें, आप उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव को कभी भी एक-दूसरे से जुदा नहीं कर सकते! प्रकृति में 'एकल चुंबकीय ध्रुव' (Magnetic Monopole) का कोई अस्तित्व क्यों नहीं है? और हमारी पृथ्वी के गर्भ में ऐसा कौन सा रहस्यमय चुंबक गड़ा है जो कंपास की सुई को हमेशा उत्तर की ओर मोड़ देता है? आइए जानें चुंबकत्व और द्रव्य के इस अद्भुत रहस्य को!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'चुंबकत्व एवं द्रव्य' स्थिर सिद्धांतों और संकल्पनात्मक प्रश्नों का प्रमुख स्रोत है। दंड चुंबक के अक्षीय व निरक्षीय क्षेत्र ($B_{\text{axial}} = 2B_{\text{equatorial}}$), चुंबकत्व में गाउस के नियम का कथन व इसका भौतिक अर्थ (एकल ध्रुव का अस्तित्व न होना), भू-चुंबकत्व के तीन अवयव (विशेषकर नति कोण $\delta$ के ध्रुवों व भूमध्य रेखा पर मान एवं $\tan\delta = B_V/B_H$), प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय तथा लौहचुंबकीय पदार्थों में तुलनात्मक अंतर (सारणी रूप में), क्यूरी का नियम एवं क्यूरी ताप ($T_c$), तथा शैथिल्य लूप (धारणशीलता व निग्राहिता) के आधार पर स्थायी चुंबक बनाम विद्युत चुंबक के चयन पर 3 से 5 अंकों के विश्लेषणात्मक प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण, अक्षीय व निरक्षीय विद्युत क्षेत्र तथा गाउस नियम की अवधारणा।
  • धारा लूप का चुंबकीय आघूर्ण ($M = NIA$) एवं चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का ज्ञान।
  • पृथ्वी के भौगोलिक अक्ष एवं ध्रुवों की सामान्य भौगोलिक समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • दंड चुंबक के चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण की व्याख्या करना तथा अक्षीय व निरक्षीय चुंबकीय क्षेत्र के सूत्रों का निगमन करना।
  • चुंबकत्व के गाउस नियम ($\oint \vec{B}\cdot d\vec{A} = 0$) के भौतिक अर्थ एवं बंद लूपों के निर्माण को समझना।
  • भू-चुंबकत्व के तीनों अवयवों (दिक्पात, नमन कोण, क्षैतिज घटक) को स्पष्ट करना और उनके पारस्परिक सूत्रों की गणना करना।
  • प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थों के चुंबकीय व्यवहार, चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi_m$) और ताप प्रभाव (क्यूरी नियम) की तुलना करना।
  • शैथिल्य लूप (धारणशीलता व निग्राहिता) की व्याख्या करना और स्थायी चुंबक व नर्म लोहे के क्रोड के चयन के आधार को समझना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. दंड चुंबक: चुंबकीय द्विध्रुव, अक...
2 2. चुंबकत्व संबंधी गाउस का नियम एवं...
3 3. भू-चुंबकत्व (Earth's Magnetism)...
4 4. पदार्थों का चुंबकीय वर्गीकरण: प्...
5 5. शैथिल्य लूप (Hysteresis) एवं स्थ...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. दंड चुंबक: चुंबकीय द्विध्रुव, अक्षीय व निरक्षीय क्षेत्र

1.1 दंड चुंबक एवं चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment - $\vec{M}$)

एक दंड चुंबक में दो बराबर व विपरीत ध्रुव होते हैं—उत्तरी ध्रुव ($+m$, ध्रुव प्राबल्य) तथा दक्षिणी ध्रुव ($-m$)। दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी को चुंबकीय प्रभावी लंबाई ($2l$) कहते हैं।

चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण ($\vec{M}$): ध्रुव प्राबल्य ($m$) तथा दोनों ध्रुवों के बीच की प्रभावी दूरी ($2l$) के गुणनफल को चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं:
$$\mathbf{\vec{M} = m(2\vec{l})}$$• दिशा: सदैव दक्षिणी ध्रुव ($S$) से उत्तरी ध्रुव ($N$) की ओर (विद्युत द्विध्रुव की भांति $-q$ से $+q$ की ओर)।
• SI मात्रक: $\text{A}\cdot\text{m}^2$ (एम्पियर-मीटर$^2$) अथवा जूल प्रति टेस्ला ($\text{J/T}$)।
• विमीय सूत्र: $[L^2 A]$।

1.2 अक्षीय एवं निरक्षीय स्थिति में चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field on Axial & Equatorial Lines)

केंद्र से $r$ दूरी पर ($r \gg l$ लघु चुंबक हेतु):

  • 1. अक्षीय स्थिति (End-on / Axial Position):$$\mathbf{B_{\text{axial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}} \quad (\text{दिशा: } \vec{M} \text{ के अनुदिश})$$
  • 2. निरक्षीय स्थिति (Broadside-on / Equatorial Position):$$\mathbf{B_{\text{equatorial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3}} \quad (\text{दिशा: } \vec{M} \text{ के विपरीत})$$
  • तुलनात्मक संबंध: समान दूरी $r$ पर:
    $$\mathbf{B_{\text{axial}} = 2 \times B_{\text{equatorial}}}$$

एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में बल आघूर्ण एवं स्थितिज ऊर्जा:
बल आघूर्ण: $\mathbf{\vec{\tau} = \vec{M} \times \vec{B} \implies \tau = MB\sin\theta}$
स्थितिज ऊर्जा: $\mathbf{U = -\vec{M}\cdot\vec{B} = -MB\cos\theta}$ (स्थायी साम्यावस्था $\theta = 0^\circ$ पर $U = -MB$ न्यूनतम)।

2. चुंबकत्व संबंधी गाउस का नियम एवं क्षेत्र रेखाएं

2.1 चुंबकत्व का गाउस नियम (Gauss's Law for Magnetism)

कथन: किसी भी बंद काल्पनिक पृष्ठ (Gaussian Surface) से गुजरने वाला कुल नेट चुंबकीय फ्लक्स सदैव शून्य होता है:

$$\mathbf{\oint_S \vec{B}\cdot d\vec{A} = 0}$$

भौतिक निष्कर्ष एवं स्थिरवैद्युतिकी से तुलना:

  1. एकल चुंबकीय ध्रुव का अभाव (Non-existence of Magnetic Monopoles): स्थिरवैद्युतिकी में $\oint \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q}{\varepsilon_0}$ होता है क्योंकि स्वतंत्र धन या ऋण आवेश संभव हैं। परंतु चुंबकत्व में स्वतंत्र उत्तरी ($N$) या दक्षिणी ($S$) ध्रुव कभी नहीं पाया जाता; ध्रुव सदैव युग्म में होते हैं। अतः किसी बंद पृष्ठ के भीतर जितना उत्तरी ध्रुव प्राबल्य होगा उतना ही दक्षिणी ध्रुव प्राबल्य होगा, जिससे नेट चुंबकीय आवेश शून्य रहता है।
  2. सतत बंद लूप (Continuous Closed Loops): चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं उत्तरी ध्रुव से निकलकर बाहर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं और चुंबक के भीतर दक्षिणी ध्रुव से पुनः उत्तरी ध्रुव की ओर वापस लौटती हैं। अतः ये सर्वदा सतत बंद लूप बनाती हैं। (विद्युत क्षेत्र रेखाएं बंद लूप नहीं बनातीं)।

3. भू-चुंबकत्व (Earth's Magnetism) एवं इसके तीन अवयव

3.1 पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र एवं चुंबकीय याम्योत्तर

विलियम गिल्बर्ट (1600 ई.) ने सर्वप्रथम बताया कि पृथ्वी स्वयं एक शक्तिशाली चुंबकीय द्विध्रुव की भांति व्यवहार करती है। इसका काल्पनिक चुंबकीय अक्ष भौगोलिक अक्ष से लगभग $11.3^\circ$ के कोण पर झुका है।

  • भौगोलिक याम्योत्तर (Geographic Meridian): पृथ्वी के भौगोलिक उत्तरी व दक्षिणी ध्रुवों से गुजरने वाला ऊर्ध्वाधर तल।
  • चुंबकीय याम्योत्तर (Magnetic Meridian): स्वतंत्रतापूर्वक लटकी चुंबकीय सुई की अक्ष से गुजरने वाला ऊर्ध्वाधर तल।

3.2 भू-चुंबकत्व के तीन प्रमुख अवयव (Magnetic Elements of the Earth)

पृथ्वी के किसी स्थान पर उसके चुंबकीय क्षेत्र को पूर्णतः व्यक्त करने हेतु तीन राशियों की आवश्यकता होती है:

  1. 1. दिक्पात कोण (Angle of Declination - $D$ या $\theta$):
    किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुंबकीय याम्योत्तर के बीच बने न्यून कोण को उस स्थान का दिक्पात कोण कहते हैं। (जहाजों के नौपरिवहन में सही दिशा ज्ञात करने हेतु इसका ज्ञान आवश्यक है)।
  2. 2. नति कोण अथवा नमन कोण (Angle of Dip or Inclination - $\delta$):
    परिभाषा: किसी स्थान पर चुंबकीय याम्योत्तर में स्वतंत्रतापूर्वक लटकी चुंबकीय सुई की अक्ष क्षैतिज दिशा के साथ जो कोण बनाती है, उसे उस स्थान का नति कोण ($\delta$) कहते हैं।
    • पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों पर: चुंबकीय सुई पूर्णतः ऊर्ध्वाधर हो जाती है $\implies \mathbf{\delta = 90^\circ}$
    • चुंबकीय भूमध्य रेखा (Magnetic Equator) पर: चुंबकीय सुई पूर्णतः क्षैतिज हो जाती है $\implies \mathbf{\delta = 0^\circ}$
  3. 3. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक (Horizontal Component - $B_H$):
    पृथ्वी के संपूर्ण चुंबकीय क्षेत्र $B_e$ का चुंबकीय याम्योत्तर में क्षैतिज दिशा के अनुदिश घटक:
    $$B_H = B_e \cos\delta \quad \text{तथा ऊर्ध्वाधर घटक } B_V = B_e \sin\delta$$दोनों समीकरणों से:
    $$\mathbf{\tan\delta = \frac{B_V}{B_H}} \quad \text{तथा} \quad \mathbf{B_e = \sqrt{B_H^2 + B_V^2}}$$

4. पदार्थों का चुंबकीय वर्गीकरण: प्रति, अनु एवं लौहचुंबकत्व

4.1 चुंबकीय शब्दावली: चुंबकन तीव्रता, चुंबकीय प्रवृत्ति

  • चुंबकन तीव्रता (Intensity of Magnetisation - $\vec{I}$ या $\vec{M}$): पदार्थ के प्रति एकांक आयतन में उत्पन्न परिणामी चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण: $I = \frac{M_{\text{net}}}{V}$ (मात्रक: $\text{A/m}$)।
  • चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility - $\chi_m$): पदार्थ कितनी सुगमता से चुंबकत्व ग्रहण करता है: $\chi_m = \frac{I}{H}$ (विमाहीन राशि)।
  • आपेक्षिक चुंबकशीलता (Relative Permeability - $\mu_r$): $\mathbf{\mu_r = 1 + \chi_m}$।

4.2 प्रति, अनु तथा लौहचुंबकीय पदार्थों में तुलनात्मक अध्ययन

गुणधर्मप्रतिचुंबकीय पदार्थ (Diamagnetic)अनुचुंबकीय पदार्थ (Paramagnetic)लौहचुंबकीय पदार्थ (Ferromagnetic)
उदाहरणबिस्मथ ($ ext{Bi}$), तांबा ($ ext{Cu}$), सीसा, जल, नाइट्रोजनऐलुमिनियम ($ ext{Al}$), सोडियम, प्लैटिनम, ऑक्सीजनलोहा ($ ext{Fe}$), कोबाल्ट ($ ext{Co}$), निकेल ($ ext{Ni}$), एल्निको
चुंबक के प्रति व्यवहारप्रबल चुंबक के सिरों द्वारा दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित होते हैं।प्रबल चुंबक द्वारा दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं।चुंबक द्वारा अत्यधिक प्रबलता से आकर्षित होते हैं।
असमान चुंबकीय क्षेत्र में गतिअधिक तीव्र क्षेत्र से कम तीव्र क्षेत्र की ओर जाते हैं।कम तीव्र क्षेत्र से अधिक तीव्र क्षेत्र की ओर जाते हैं।दुर्बल क्षेत्र से तीव्र क्षेत्र की ओर तेजी से भागते हैं।
चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi_m$)अल्प एवं ऋणात्मक ($-1 \le \chi_m < 0$)अल्प एवं धनात्मक ($0 < \chi_m < \varepsilon$)अत्यधिक विशाल एवं धनात्मक ($\chi_m \gg 1000$)
आपेक्षिक चुंबकशीलता ($\mu_r$)1 से कुछ कम ($0 \le \mu_r < 1$)1 से कुछ अधिक ($\mu_r > 1$)1 से बहुत अधिक ($\mu_r \gg 1000$)
ताप पर निर्भरता (क्यूरी नियम)ताप पर निर्भर नहीं करती (अपरिवर्तित)।ताप के व्युत्क्रमानुपाती:
क्यूरी नियम: $\chi_m \propto \frac{1}{T}$
क्यूरी-वाइस नियम: $T > T_c$ पर अनुचुंबकीय बन जाता है:
$\chi_m = \frac{C}{T - T_c}$
क्यूरी ताप (Curie Temperature - $T_c$): वह विशिष्ट ताप जिसके ऊपर कोई लौहचुंबकीय पदार्थ अपना लौहचुंबकत्व खोकर सामान्य अनुचुंबकीय पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है। (लोहे के लिए $T_c \approx 770^\circ\text{C} = 1043\text{ K}$)।

5. शैथिल्य लूप (Hysteresis) एवं स्थायी चुंबक व विद्युत चुंबक का चयन

5.1 चुंबकीय शैथिल्य एवं $B-H$ वक्र (Magnetic Hysteresis Loop)

जब किसी लौहचुंबकीय पदार्थ को चुंबकन क्षेत्र ($H$) में रखकर चुंबकित तथा विचुंबकित किया जाता है, तो चुंबकीय प्रेरण ($B$) चुंबकन क्षेत्र ($H$) से पीछे-पीछे चलता है। इस पश्चता को चुंबकीय शैथिल्य (Hysteresis) कहते हैं:

  • अवशेष चुंबकत्व / धारणशीलता (Retentivity): जब बाह्य चुंबकन क्षेत्र को शून्य कर दिया जाए ($H = 0$), तब भी पदार्थ में शेष बचे चुंबकत्व $B$ के मान को धारणशीलता कहते हैं।
  • निग्राहिता (Coercivity): पदार्थ के अवशेष चुंबकत्व को पूर्णतः शून्य करने के लिए विपरीत दिशा में लगाए गए आवश्यक बाह्य चुंबकीय क्षेत्र ($-H$) के मान को निग्राहिता कहते हैं।
  • शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल: एक पूर्ण चुंबकन चक्र में प्रति एकांक आयतन प्रति सेकंड होने वाली तापीय ऊर्जा हानि के बराबर होता है।

5.2 स्थायी चुंबक बनाम विद्युत चुंबक (Permanent Magnets vs Electromagnets)

उपकरणवांछित चुंबकीय गुणधर्मउपयुक्त पदार्थ एवं कारण
स्थायी चुंबक (Permanent Magnets)
(जैसे लाउडस्पीकर, अमीटर चुंबक)
• उच्च धारणशीलता (High Retentivity): ताकि शक्तिशाली चुंबकत्व बना रहे।
• उच्च निग्राहिता (High Coercivity): ताकि बाह्य क्षेत्रों, झटकों या ताप से चुंबकत्व नष्ट न हो।
इस्पात (Steel), एल्निको (Alnico), Ticonal
क्योंकि इनकी निग्राहिता अत्यधिक उच्च होती है।
विद्युत चुंबक एवं ट्रांसफॉर्मर क्रोड (Electromagnets & Transformer Core)• उच्च चुंबकशीलता व उच्च धारणशीलता: ताकि तीव्र चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो सके।
• अति-निम्न निग्राहिता (Low Coercivity): ताकि धारा बंद करते ही चुंबकत्व समाप्त हो जाए।
• संकीर्ण शैथिल्य लूप (Narrow Loop): ताकि $AC$ चक्रों में शैथिल्य ऊर्जा हानि न्यूनतम हो।
नर्म लोहा (Soft Iron)
क्योंकि इसकी निग्राहिता बहुत कम तथा शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल अत्यंत संकीर्ण होता है।

प्रमुख भौतिक सूत्र, नियम एवं नियतांक

चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण
{M} = m(2{l}) (दिशा: S से N, मात्रक: A·m^2 या J/T)
अक्षीय चुंबकीय क्षेत्र (r >> l)
B_{axial} = {_0}{4} {2M}{r^3} (दिशा: {M} के अनुदिश)
निरक्षीय चुंबकीय क्षेत्र
$$B_{\text{equatorial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3} \implies B_{\text{axial}} = 2 B_{\text{equatorial}}$$
चुंबक पर बल आघूर्ण व ऊर्जा
$$\vec{\tau} = \vec{M} \times \vec{B} = MB\sin\theta; \quad U = -MB\cos\theta$$
चुंबकत्व का गाउस नियम
_S {B}· d{A} = 0 (एकल ध्रुव असंभव, सतत बंद लूप)
भू-चुंबकत्व क्षैतिज घटक
$$B_H = B_e \cos\delta; \quad B_V = B_e \sin\delta$$
नति कोण संबंध
$$\tan\delta = \frac{B_V}{B_H}; \quad B_e = \sqrt{B_H^2 + B_V^2}$$
ध्रुवों व भूमध्य पर नति कोण
ध्रुवों पर: = 90^; भूमध्य रेखा पर: = 0^
चुंबकीय प्रवृत्ति व चुंबकशीलता
$$\chi_m = \frac{I}{H}; \quad \mu_r = 1 + \chi_m$$
क्यूरी का नियम (अनुचुंबकत्व)
$$\chi_m = \frac{C}{T} \quad (\chi_m \propto 1/T)$$
क्यूरी-वाइस नियम (लौहचुंबकत्व)
_m = {C}{T - T_c} (T > T_c पर अनुचुंबकीय)
शैथिल्य मापदंड
स्थायी चुंबक: उच्च धारणशीलता + उच्च निग्राहिता (Steel/Alnico); ट्रांसफॉर्मर: नर्म लोहा

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक ($B_V$) उसके क्षैतिज घटक ($B_H$) का $\sqrt{3}$ गुना है। उस स्थान पर नति कोण (नमन कोण) का मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
ऊर्ध्वाधर घटक $B_V = \sqrt{3} B_H$

सूत्र:
नति कोण ($\delta$) का संबंध:
$$\tan\delta = \frac{B_V}{B_H}$$
गणना:
$$\tan\delta = \frac{\sqrt{3} B_H}{B_H} = \sqrt{3}$$
हम जानते हैं कि $\tan 60^\circ = \sqrt{3}$:
$$\delta = \mathbf{60^\circ}$$
उत्तर: उस स्थान पर नति कोण का मान $\mathbf{60^\circ}$ है।
उदाहरण 2
एक छोटे दंड चुंबक का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $0.48\text{ J/T}$ है। चुंबक के केंद्र से $10\text{ cm}$ की दूरी पर (a) अक्षीय स्थिति में, तथा (b) निरक्षीय स्थिति में चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण एवं दिशा ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
चुंबकीय आघूर्ण $M = 0.48\text{ J/T} = 0.48\text{ A}\cdot\text{m}^2$
दूरी $r = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m} = 10^{-1}\text{ m}$
स्थिरांक $\frac{\mu_0}{4\pi} = 10^{-7}\text{ T}\cdot\text{m/A}$

(a) अक्षीय स्थिति में चुंबकीय क्षेत्र ($B_{\text{axial}}$):
$$B_{\text{axial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3} = 10^{-7} \times \frac{2 \times 0.48}{(0.1)^3} = 10^{-7} \times \frac{0.96}{10^{-3}}$$
$$B_{\text{axial}} = 0.96 \times 10^{-4}\text{ T} = \mathbf{9.6 \times 10^{-5}\text{ T} = 0.96\text{ Gauss}}$$
दिशा: दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर ($\vec{M}$ के अनुदिश)।

(b) निरक्षीय स्थिति में चुंबकीय क्षेत्र ($B_{\text{equatorial}}$):
$$B_{\text{equatorial}} = \frac{B_{\text{axial}}}{2} = \frac{9.6 \times 10^{-5}}{2} = \mathbf{4.8 \times 10^{-5}\text{ T} = 0.48\text{ Gauss}}$$
दिशा: उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर ($\vec{M}$ के विपरीत दिशा में)।
उदाहरण 3
चुंबकत्व के लिए 'गाउस का नियम' लिखिए। यह नियम स्थिरवैद्युतिकी के गाउस नियम से किस प्रकार भिन्न है और इसका क्या भौतिक निष्कर्ष निकलता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चुंबकत्व के लिए गाउस का नियम:
किसी भी बंद काल्पनिक पृष्ठ से निर्गत कुल नेट चुंबकीय फ्लक्स सदैव शून्य होता है:
$$\oint_S \vec{B}\cdot d\vec{A} = 0$$
स्थिरवैद्युतिकी से अंतर:
स्थिरवैद्युतिकी में गाउस का नियम $\oint_S \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q_{\text{in}}}{\varepsilon_0}$ होता है, जहाँ यदि पृष्ठ के भीतर कोई नेट आवेश परिबद्ध हो तो फ्लक्स अशून्य होता है。

भौतिक निष्कर्ष:
1. एकल चुंबकीय ध्रुव का अस्तित्व न होना: प्रकृति में स्वतंत्र एकल चुंबकीय ध्रुव (उत्तरी अथवा दक्षिणी ध्रुव) नहीं पाया जाता। चुंबकीय ध्रुव सदैव समान परिमाण व विपरीत प्रकृति के युग्म ($N$ और $S$) के रूप में पाए जाते हैं, जिसके कारण किसी भी बंद पृष्ठ के भीतर कुल ध्रुव प्राबल्य सदैव शून्य रहता है।
2. सतत बंद लूप: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं बाहर उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं और चुंबक के भीतर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर लौटती हैं, जिससे वे सर्वदा सतत बंद वक्र बनाती हैं।
उदाहरण 4
प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic), अनुचुंबकीय (Paramagnetic) तथा लौहचुंबकीय (Ferromagnetic) पदार्थों के मध्य किन्हीं चार प्रमुख गुणों के आधार पर अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चार प्रमुख गुणों के आधार पर तुलना निम्न प्रकार है:

1. चुंबकीय क्षेत्र के प्रति अनुक्रिया:
• प्रतिचुंबकीय: प्रबल चुंबक के ध्रुवों द्वारा दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित होते हैं (उदा: तांबा, जल, बिस्मथ)।
• अनुचुंबकीय: चुंबक के ध्रुवों द्वारा दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं (उदा: ऐलुमिनियम, सोडियम, ऑक्सीजन)।
• लौहचुंबकीय: चुंबक के ध्रुवों द्वारा अत्यधिक प्रबलता से आकर्षित होते हैं (उदा: लोहा, निकेल, कोबाल्ट)।

2. चुंबकीय प्रवृत्ति ($\chi_m$):
• प्रतिचुंबकीय: $\chi_m$ का मान अल्प तथा ऋणात्मक होता है (लगभग $-10^{-5}$)।
• अनुचुंबकीय: $\chi_m$ का मान अल्प तथा धनात्मक होता है (लगभग $+10^{-4}$)।
• लौहचुंबकीय: $\chi_m$ का मान अत्यधिक विशाल तथा धनात्मक होता है ($\chi_m > 1000$)।

3. आपेक्षिक चुंबकशीलता ($\mu_r$):
• प्रतिचुंबकीय: $\mu_r < 1$ (1 से कुछ कम)।
• अनुचुंबकीय: $\mu_r > 1$ (1 से कुछ अधिक)।
• लौहचुंबकीय: $\mu_r \gg 1$ (1 से बहुत अधिक)।

4. ताप का प्रभाव:
• प्रतिचुंबकीय: चुंबकीय प्रवृत्ति ताप पर बिल्कुल निर्भर नहीं करती।
• अनुचुंबकीय: क्यूरी के नियमानुसार $\chi_m \propto \frac{1}{T}$ (ताप बढ़ाने पर चुंबकत्व घटता है)।
• लौहचुंबकीय: ताप बढ़ाने पर चुंबकत्व घटता है तथा क्यूरी ताप ($T_c$) के ऊपर यह अनुचुंबकीय बन जाता है।
उदाहरण 5
स्थायी चुंबक (Permanent Magnet) तथा ट्रांसफॉर्मर के क्रोड (Transformer Core) के निर्माण हेतु प्रयुक्त पदार्थों के गुणों की तुलना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. स्थायी चुंबक के निर्माण हेतु आवश्यक गुण एवं पदार्थ:
• उच्च धारणशीलता (High Retentivity): ताकि बाह्य चुंबकन क्षेत्र हटा लेने के बाद भी उसमें अत्यंत प्रबल चुंबकत्व संचित रहे।
• उच्च निग्राहिता (High Coercivity): ताकि विपरीत चुंबकीय क्षेत्रों, तापीय परिवर्तनों अथवा यांत्रिक झटकों से उसका चुंबकत्व आसानी से नष्ट न हो सके।
• उपयुक्त पदार्थ: इस्पात (Steel) अथवा एल्निको (Alnico - Al-Ni-Co मिश्र धातु); क्योंकि यद्यपि इनकी धारणशीलता नर्म लोहे से थोड़ी कम होती है, परंतु इनकी निग्राहिता अत्यधिक उच्च होती है。

2. ट्रांसफॉर्मर क्रोड एवं विद्युत चुंबक हेतु आवश्यक गुण एवं पदार्थ:
• उच्च चुंबकशीलता व उच्च धारणशीलता: ताकि प्राथमिक कुंडली में धारा प्रवाहित होते ही क्रोड में विशाल चुंबकीय प्रेरण उत्पन्न हो।
• अति-निम्न निग्राहिता (Low Coercivity): ताकि धारा बंद होते ही या दिशा बदलते ही क्रोड तुरंत विचुंबकित हो सके।
• संकीर्ण शैथिल्य लूप (Narrow Hysteresis Loop): प्रत्यावर्ती धारा (AC) में प्रति सेकंड 50 चुंबकन चक्र होते हैं; संकीर्ण लूप होने से प्रति चक्र तापीय ऊर्जा की हानि (Hysteresis loss) न्यूनतम होती है।
• उपयुक्त पदार्थ: नर्म लोहा (Soft Iron)।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चुंबक को तोड़ने पर ध्रुवों के अलग हो जाने का भ्रम पालना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

चुंबक को कितने भी टुकड़ों में तोड़ दिया जाए, प्रत्येक टुकड़ा तुरंत नया $N$ और $S$ ध्रुव बनाकर एक पूर्ण चुंबक बन जाता है; एकल ध्रुव असंभव है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चुंबकत्व में गाउस के नियम का फ्लक्स शून्य के स्थान पर $\mu_0 q_m$ लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

चुंबकत्व का गाउस नियम सदैव $\oint \vec{B}\cdot d\vec{A} = 0$ होता है क्योंकि प्रकृति में कोई एकल चुंबकीय ध्रुव नहीं होता।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों पर नति कोण को $0^\circ$ मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ध्रुवों पर चुंबकीय सुई पूर्णतः ऊर्ध्वाधर होती है अतः नति कोण $\delta = 90^\circ$ होता है; चुंबकीय भूमध्य रेखा पर $\delta = 0^\circ$ होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रतिचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति को ताप पर निर्भर मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रतिचुंबकीय पदार्थों का चुंबकत्व इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति से उत्पन्न होता है और यह ताप परिवर्तन से पूर्णतः स्वतंत्र रहता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

स्थायी चुंबक बनाने के लिए नर्म लोहे का चयन करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

नर्म लोहे की निग्राहिता बहुत कम होती है जिससे वह आसानी से विचुंबकित हो जाता है; स्थायी चुंबक हेतु उच्च निग्राहिता वाला 'इस्पात' या 'एल्निको' प्रयुक्त होता है।

चुंबकत्व एवं द्रव्य: भू-चुंबकत्व, गाउस नियम, चुंबकीय पदार्थ व शैथिल्य लूप

चुंबकत्व एवं द्रव्य: भू-चुंबकत्व अवयव, गाउस नियम, पदार्थ व शैथिल्य लूप1. द्विध्रुव व भू-चुंबकत्वM = m(2l) एवं 3 अवयव• B_axial = 2 x B_equatorialB_ax = (μ₀/4π)(2M/r³)• गाउस नियम: ∮ B·dA = 0एकल ध्रुव असंभव, सतत बंद लूप• भू-चुंबकत्व के 3 अवयव:1. दिक्पात कोण (D)2. नति कोण (δ): tanδ = B_V / B_Hध्रुवों पर δ = 90°, भूमध्य पर δ = 0°3. क्षैतिज घटक B_H = B_e cosδ2. चुंबकीय पदार्थों के 3 वर्गप्रति, अनु व लौहचुंबकत्व• 1. प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic):प्रतिकर्षित; χ_m ऋणात्मक; ताप स्वतंत्रउदा: Bi, Cu, Pb, जल, नाइट्रोजन• 2. अनुचुंबकीय (Paramagnetic):आकर्षित; χ_m अल्प धनात्मक; χ ∝ 1/Tउदा: Al, Na, Pt, ऑक्सीजन• 3. लौहचुंबकीय (Ferromagnetic):प्रबल आकर्षित; डोमेन; χ_m >> 1000क्यूरी ताप T_c पर अनुचुंबकीय में बदलताउदा: Fe (T_c=770°C), Co, Ni3. शैथिल्य लूप व चुंबक चयनधारणशीलता व निग्राहिता• B-H वक्र (Hysteresis Loop):धारणशीलता = H=0 पर शेष Bनिग्राहिता = B=0 करने हेतु विपरीत H• स्थायी चुंबक (Permanent):उच्च धारणशीलता + उच्च निग्राहितापदार्थ: इस्पात (Steel), एल्निको (Alnico)• विद्युत चुंबक व ट्रांसफॉर्मर क्रोड:उच्च धारणशीलता + निम्न निग्राहितासंकीर्ण लूप (ऊर्जा हानि न्यूनतम)पदार्थ: नर्म लोहा (Soft Iron)बोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Magnetism & Matter Capsule)नति कोण (δ) के मान:ध्रुवों पर δ = 90° (सुई ऊर्ध्वाधर); भूमध्य रेखा पर δ = 0° (सुई क्षैतिज); tanδ = B_V/B_H।गाउस नियम निष्कर्ष:∮ B·dA = 0 सिद्ध करता है कि एकल चुंबकीय ध्रुव का अस्तित्व कभी नहीं हो सकता।ट्रांसफॉर्मर क्रोड चयन:नर्म लोहा (Soft Iron) क्योंकि इसकी निग्राहिता निम्न व शैथिल्य लूप संकीर्ण होता है।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
दंड चुंबक का चुंबकीय आघूर्ण M = m(2l) (मात्रक A m² या J/T); दिशा S से N ध्रुव की ओर होती है।
मुख्य बिंदु 2
लघु चुंबक का अक्षीय क्षेत्र B_axial = 2kp/r³ तथा निरक्षीय क्षेत्र B_equatorial = kp/r³ (B_axial = 2 B_equatorial)।
मुख्य बिंदु 3
चुंबकत्व का गाउस नियम ∮ B·dA = 0 दर्शाता है कि एकल चुंबकीय ध्रुव असंभव हैं और क्षेत्र रेखाएं बंद लूप बनाती हैं।
मुख्य बिंदु 4
भू-चुंबकत्व के 3 अवयव हैं: दिक्पात कोण (D), नति कोण (δ), तथा क्षैतिज घटक (B_H = B_e cosδ)।
मुख्य बिंदु 5
पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों पर नति कोण δ = 90° तथा चुंबकीय भूमध्य रेखा पर δ = 0° होता है (tanδ = B_V / B_H)।
मुख्य बिंदु 6
प्रतिचुंबकीय पदार्थ दुर्बल प्रतिकर्षित होते हैं; χ_m ऋणात्मक व ताप से स्वतंत्र होती है (उदा: तांबा, जल)।
मुख्य बिंदु 7
अनुचुंबकीय पदार्थ दुर्बल आकर्षित होते हैं; क्यूरी नियम χ_m ∝ 1/T का पालन करते हैं (उदा: ऐलुमिनियम, O₂)।
मुख्य बिंदु 8
लौहचुंबकीय पदार्थ प्रबल आकर्षित होते हैं; क्यूरी ताप T_c के ऊपर अनुचुंबकीय में बदल जाते हैं (उदा: लोहा T_c = 770°C)।
मुख्य बिंदु 9
शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल प्रति चुंबकन चक्र ऊर्जा हानि को व्यक्त करता है।
मुख्य बिंदु 10
स्थायी चुंबक हेतु उच्च धारणशीलता व उच्च निग्राहिता (Steel/Alnico); ट्रांसफॉर्मर क्रोड हेतु निम्न निग्राहिता (नर्म लोहा)।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
चुंबकत्व में गाउस के नियम (Gauss's Law in Magnetism) का गणितीय रूप लिखिए तथा इसका भौतिक निष्कर्ष स्पष्ट कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: गणितीय रूप: ∮ B·dA = 0। इसका भौतिक निष्कर्ष यह है कि प्रकृति में एकल चुंबकीय ध्रुव (Magnetic Monopole) का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता; चुंबकीय ध्रुव सदैव समान परिमाण व विपरीत प्रकृति के युग्म में पाए जाते हैं और चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सतत बंद लूप बनाती हैं।
2
पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों तथा चुंबकीय भूमध्य रेखा पर नति कोण (Angle of Dip) का मान कितना होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों पर नति कोण 90° (सुई ऊर्ध्वाधर) तथा चुंबकीय भूमध्य रेखा पर नति कोण 0° (सुई क्षैतिज) होता है।
3
प्रतिचुंबकीय तथा अनुचुंबकीय पदार्थों में चुंबकीय प्रवृत्ति (χ_m) के आधार पर दो मुख्य अंतर बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. प्रतिचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति अल्प एवं ऋणात्मक होती है तथा ताप पर निर्भर नहीं करती। 2. अनुचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति अल्प एवं धनात्मक होती है तथा यह परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है (क्यूरी नियम: χ_m ∝ 1/T)।

4
'क्यूरी ताप' (Curie Temperature) की परिभाषा दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वह विशिष्ट ताप जिसके ऊपर गर्म करने पर कोई लौहचुंबकीय पदार्थ अपने लौहचुंबकत्व को खोकर सामान्य अनुचुंबकीय पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है, उसे क्यूरी ताप (T_c) कहते हैं (जैसे लोहे के लिए T_c = 770°C)।
5
ट्रांसफॉर्मर का क्रोड बनाने के लिए 'नर्म लोहे' (Soft Iron) को ही क्यों चुना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि नर्म लोहे की चुंबकशीलता उच्च, निग्राहिता अत्यंत निम्न, तथा इसके शैथिल्य लूप (Hysteresis loop) का क्षेत्रफल बहुत संकीर्ण होता है, जिससे प्रत्यावर्ती धारा के बार-बार चुंबकन व विचुंबकन चक्रों में तापीय ऊर्जा हानि (Hysteresis loss) न्यूनतम रहती है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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