(क) जन्म और अजमेर का दोमंजिला मकान
लेखिका का जन्म मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था, किंतु उनके बचपन की स्मृतियों का आरंभ राजस्थान के अजमेर शहर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले के एक दोमंजिला मकान से होता है। इस मकान की ऊपरी मंजिल पर पिता का साम्राज्य था, जहाँ वे अव्यवस्थित रूप से फैली पुस्तकों, पत्रिकाओं और समाचार-पत्रों के बीच बैठकर या तो पढ़ते रहते थे या डिक्टेशन देते थे। नीचे की मंजिल पर लेखिका अपनी अनपढ़, सहनशील माँ और भाई-बहनों के साथ रहती थीं।
(ख) शारीरिक रंग-रूप और हीन-भावना का बीजारोपण:
बचपन में मन्नू भंडारी बहुत दुबली, मरियल और काले रंग की थीं। उनके पिता गोरे रंग को बहुत पसंद करते थे। लेखिका से दो साल बड़ी बहन सुशीला खूब गोरी, स्वस्थ और हँसमुख थी।
पिता हमेशा हर बात में सुशीला की सुंदरता और प्रतिभा की तुलना मन्नू से करते थे और सुशीला की प्रशंसा करते थे। पिता की इस निरंतर तुलना और उपेक्षा ने लेखिका के कोमल मन में एक ऐसी गहरी 'हीन-भावना' (Inferiority Complex) पैदा कर दी कि आगे चलकर जीवन में जब उन्हें बहुत बड़ा नाम, सम्मान और प्रतिष्ठा मिली, तब भी वे अपने किसी भी गुण पर विश्वास नहीं कर पाती थीं। उन्हें हमेशा लगता था कि यह सब तुक्के से हो गया है।