(क) शब्दों का भ्रम और अस्पष्टता
लेखक निबंध के आरंभ में ही स्पष्ट करता है कि हमारी भाषा में दो शब्द ऐसे हैं जिनका प्रयोग बहुत अधिक होता है, किंतु जिनका अर्थ सबसे कम स्पष्ट है—वे शब्द हैं 'सभ्यता' और 'संस्कृति'।
अक्सर लोग इन दोनों शब्दों को एक ही मान लेते हैं या इनके साथ 'भौतिक' और 'आत्मिक' जैसे विशेषण लगाकर इन्हें और अधिक उलझा देते हैं। लेखक प्रश्न उठाता है कि क्या ये दोनों एक ही वस्तु हैं या दो भिन्न वस्तुएं?
तालिका: सभ्यता और संस्कृति का वैज्ञानिक एवं दार्शनिक तुलनात्मक विश्लेषण
| तुलना का आधार | संस्कृति (Culture) | सभ्यता (Civilization) |
|---|---|---|
| 1. मूल स्वरूप | अंतःकरण की योग्यता, प्रेरणा, प्रतिभा, जिज्ञासा एवं मौलिक चेतना। | संस्कृति द्वारा निर्मित बाहरी भौतिक साधन, उपकरण, तकनीक एवं वस्त्र। |
| 2. दार्शनिक संबंध | कारण (Cause): वह आंतरिक शक्ति जिससे नई वस्तु का जन्म होता है। | कार्य (Effect): वह बाह्य परिणाम जो संस्कृति के फलस्वरूप प्रकट होता है। |
| 3. स्थायित्व एवं हस्तांतरण | संस्कृति किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत प्रतिभा और अंतःप्रेरणा है; इसे सीधे विरासत में नहीं पाया जा सकता। | सभ्यता पूर्वजों से अगली पीढ़ी को अनायास (सहज रूप से) प्राप्त हो जाती है। |
| 4. उदाहरण | आग की खोज करने की बुद्धि; सुई-धागे की रचना करने की प्रेरणा; न्यूटन का वैज्ञानिक चिंतन। | माचिस, हीटर, गैस चूल्हा, सिले हुए फैशनेबल कपड़े, हवाई जहाज, कंप्यूटर। |