लेखिका मधु कांकरिया अपनी यात्रा का शुभारंभ सिक्किम की राजधानी गंगटोक (गैंतोक) से करती हैं। रात के सन्नाटे में पहाड़ों पर ढलान की ओर बिछी टिमटिमाती रोशनियाँ लेखिका के मन में एक जादुई सम्मोहन और अतींद्रिय शून्यता रचती हैं।
1.1 मेहनतकश बादशाहों का शहर (गंगटोक):
लेखिका ने गंगटोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' कहा है। इसका तात्विक अर्थ यह है कि यहाँ के निवासियों का जीवन अत्यंत दुर्गम, अभावग्रस्त और कठिन है, किंतु अपने स्वाभिमानी स्वभाव, सतत परिश्रम, प्रकृति के प्रति निष्ठा और विषम परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहने की अद्भुत जिजीविषा के कारण वे किसी सम्राट (बादशाह) के समान गरिमामय प्रतीत होते हैं। वहाँ का सब कुछ सुंदर था—सुबह, शाम और रात।
1.2 साना-साना हाथ जोड़ि... प्रार्थना:
सुबह उठते ही लेखिका ने एक नेपाली युवती के मुख से एक पवित्र प्रार्थना सुनी:
"साना-साना हाथ जोड़ि गर्दहु प्रार्थना,
हमारो जीवन तिम्रो कोसेली।"
अर्थात्: मैं अपने छोटे-छोटे हाथ जोड़कर यह मंगल-प्रार्थना करती हूँ कि मेरा सम्पूर्ण जीवन अच्छाइयों और लोक-कल्याण को समर्पित हो।
यह प्रार्थना लेखिका के अंतःकरण में रच-बस गई और पूरी यात्रा के दौरान उनकी मानवीय संवेदनशीलता का मार्गदर्शक दीपस्तंभ बन गई।