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WBB • कक्षा 8 • Science • अध्याय 10
अनुमानित समय: 55 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

जैव विविधता, पर्यावरणीय संकट और संकटग्रस्त जीवों का संरक्षण

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) के कक्षा 8 के पाठ्यक्रम "पर्यावरण एवं विज्ञान" (Environment & Science) के अध्याय 10 "जैव विविधता, पर्यावरणीय संकट और संकटग्रस्त जीवों का संरक्षण" (Biodiversity, Environmental Crisis and Conservation of Endangered Animals) का संपूर्ण एवं प्रामाणिक डिजिटल अध्ययन मार्गदर्शक। सुंदरबन के मैंग्रोव दलदलों में विचरण करने वाले राजसी रॉयल बंगाल टाइगर से लेकर सिंगालीला के धुंध भरे बाँस के वनों में रहने वाले दुर्लभ रेड पांडा, डुआर्स के वनों में हाथियों के गलियारे और बंगाल की खाड़ी के तटों पर अंडे देने आने वाले ओलिव रिडले कछुए—हमारी पृथ्वी अद्भुत जैव संपदा से समृद्ध है। किंतु अनियंत्रित वनों की कटाई, अवैध शिकार, रासायनिक प्रदूषण और तीव्र जलवायु परिवर्तन के कारण आज पृथ्वी का जीवन-जाल संकट में है, जिससे छठे महा-विलोपन (Sixth Mass Extinction) का खतरा उत्पन्न हो गया है। यह मार्गदर्शिका ५ व्यापक शैक्षणिक मॉड्यूलों में विभाजित है: (1) जैव विविधता की आधारभूत अवधारणा, स्तर और हॉटस्पॉट — आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय विविधता (अल्फा, बीटा, गामा), पारितंत्र सेवाएँ, नॉर्मन मायर्स के हॉटस्पॉट मानदंड और भारत के 4 प्रमुख हॉटस्पॉट (पूर्वी हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट, सुंदरलैंड); (2) वैश्विक पर्यावरणीय संकट और समुद्री पारितंत्र का ह्रास — ध्रुवीय बर्फ का पिघलना और ध्रुवीय भालू व सम्राट पेंगुइन पर प्रभाव, प्रवाल विरंजन (कोरल ब्लीचिंग) और ज़ूजैंथेली शैवाल का निष्कासन, महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification), कीटनाशकों से मधुमक्खियों का विलोपन (CCD), और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण; (3) भारत और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रीय संकटापन्न वन्यजीव — रॉयल बंगाल टाइगर और प्रोजेक्ट टाइगर (1973), एक-सींग वाला गैंडा और केराटिन सींग का अवैध शिकार, रेड पांडा और दार्जिलिंग पद्मजा नायडू प्राणी उद्यान का कैप्टिव प्रजनन, दृष्टिहीन गंगा डॉल्फ़िन और पराश्रव्य बायो-सोनार, ओलिव रिडले कछुए की अरिबाडा, और मवेशियों की दवा डिक्लोफेनाक से गिद्धों का विसरल गाउट व विनाश तथा राजाभातखावा प्रजनन केंद्र; (4) पर्यावरणीय संकट के प्रमुख चालक: HIPPO ढाँचा — आवास विनाश एवं विखंडन (H), आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (I: पार्थेनियम, लैंटाना, अफ्रीकी कैटफ़िश), रासायनिक प्रदूषण एवं डीडीटी का जैव आवर्धन (P), जनसंख्या विस्फोट (P), और अत्यधिक दोहन व वन्यजीव तस्करी (O); तथा (5) संरक्षण प्रतिमान, सुरक्षित क्षेत्र और पर्यावरण कानून — IUCN रेड लिस्ट श्रेणियाँ (EX, CR, EN, VU), स्व-स्थाने संरक्षण (पश्चिम बंगाल के 6 राष्ट्रीय उद्यान: सुंदरबन, गोरुमारा, जलदापाड़ा, सिंगालीला, नेओरा वैली, बक्सा; अभयारण्य और बायोस्फीयर रिज़र्व), बाह्य-स्थाने संरक्षण (चिड़ियाघर, क्रायोप्रिजर्वेशन), वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, और 1971-72 में पश्चिम मेदिनीपुर के अड़ाबाड़ी (Arabari) में डॉ. ए. के. बनर्जी के नेतृत्व में शुरू संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) जहाँ ग्रामीणों को 25% राजस्व हिस्सेदारी दी गई।

🌍 मौन विलोपन: पृथ्वी का जीवन-जाल क्यों बिखर रहा है और हम इसे कैसे बचा सकते हैं?

सोचिए, यदि 30,000 फीट की ऊँचाई पर उड़ते हवाई जहाज़ के पंखों से कोई एक-एक करके नट-बोल्ट निकालना शुरू कर दे, तो क्या होगा? शुरुआत में शायद कुछ न हो, लेकिन जैसे ही एक मुख्य बोल्ट निकलेगा, पूरा पंख टूटकर गिर जाएगा!

पृथ्वी का प्रत्येक जीव—सुंदरबन के दलदल में दहाड़ने वाले बाघ से लेकर सरसों के फूलों पर परागण करने वाली नन्हीं मधुमक्खी तक—हमारे जीवमंडल के उसी हवाई जहाज़ का एक अनिवार्य बोल्ट है। क्या आप जानते हैं कि मवेशियों के दर्द की एक साधारण दवा ने भारत के करोड़ों गिद्धों को विलोपन की कगार पर कैसे पहुँचा दिया? गंगा की अंधी डॉल्फ़िन गंदले पानी में पराश्रव्य ध्वनि की गूँज सुनकर शिकार कैसे पकड़ती है?

और दार्जिलिंग के पहाड़ों में बाँस के जंगलों को बचाने से प्यारे रेड पांडा का भविष्य कैसे जुड़ा है? आइए, इस अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय जैव विविधता, पर्यावरणीय संकट और संकटग्रस्त जीवों का संरक्षण में इन रहस्यों को विस्तार से जानें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) के कक्षा 8 के पाठ्यक्रम "पर्यावरण एवं विज्ञान" (Environment & Science) के अध्याय 10 "जैव विविधता, पर्यावरणीय संकट और संकटग्रस्त जीवों का संरक्षण" (Biodiversity, Environmental Crisis and Conservation of Endangered Animals) का संपूर्ण एवं प्रामाणिक डिजिटल अध्ययन मार्गदर्शक। सुंदरबन के मैंग्रोव दलदलों में विचरण करने वाले राजसी रॉयल बंगाल टाइगर से लेकर सिंगालीला के धुंध भरे बाँस के वनों में रहने वाले दुर्लभ रेड पांडा, डुआर्स के वनों में हाथियों के गलियारे और बंगाल की खाड़ी के तटों पर अंडे देने आने वाले ओलिव रिडले कछुए—हमारी पृथ्वी अद्भुत जैव संपदा से समृद्ध है। किंतु अनियंत्रित वनों की कटाई, अवैध शिकार, रासायनिक प्रदूषण और तीव्र जलवायु परिवर्तन के कारण आज पृथ्वी का जीवन-जाल संकट में है, जिससे छठे महा-विलोपन (Sixth Mass Extinction) का खतरा उत्पन्न हो गया है। यह मार्गदर्शिका ५ व्यापक शैक्षणिक मॉड्यूलों में विभाजित है: (1) जैव विविधता की आधारभूत अवधारणा, स्तर और हॉटस्पॉट — आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय विविधता (अल्फा, बीटा, गामा), पारितंत्र सेवाएँ, नॉर्मन मायर्स के हॉटस्पॉट मानदंड और भारत के 4 प्रमुख हॉटस्पॉट (पूर्वी हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट, सुंदरलैंड); (2) वैश्विक पर्यावरणीय संकट और समुद्री पारितंत्र का ह्रास — ध्रुवीय बर्फ का पिघलना और ध्रुवीय भालू व सम्राट पेंगुइन पर प्रभाव, प्रवाल विरंजन (कोरल ब्लीचिंग) और ज़ूजैंथेली शैवाल का निष्कासन, महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification), कीटनाशकों से मधुमक्खियों का विलोपन (CCD), और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण; (3) भारत और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रीय संकटापन्न वन्यजीव — रॉयल बंगाल टाइगर और प्रोजेक्ट टाइगर (1973), एक-सींग वाला गैंडा और केराटिन सींग का अवैध शिकार, रेड पांडा और दार्जिलिंग पद्मजा नायडू प्राणी उद्यान का कैप्टिव प्रजनन, दृष्टिहीन गंगा डॉल्फ़िन और पराश्रव्य बायो-सोनार, ओलिव रिडले कछुए की अरिबाडा, और मवेशियों की दवा डिक्लोफेनाक से गिद्धों का विसरल गाउट व विनाश तथा राजाभातखावा प्रजनन केंद्र; (4) पर्यावरणीय संकट के प्रमुख चालक: HIPPO ढाँचा — आवास विनाश एवं विखंडन (H), आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (I: पार्थेनियम, लैंटाना, अफ्रीकी कैटफ़िश), रासायनिक प्रदूषण एवं डीडीटी का जैव आवर्धन (P), जनसंख्या विस्फोट (P), और अत्यधिक दोहन व वन्यजीव तस्करी (O); तथा (5) संरक्षण प्रतिमान, सुरक्षित क्षेत्र और पर्यावरण कानून — IUCN रेड लिस्ट श्रेणियाँ (EX, CR, EN, VU), स्व-स्थाने संरक्षण (पश्चिम बंगाल के 6 राष्ट्रीय उद्यान: सुंदरबन, गोरुमारा, जलदापाड़ा, सिंगालीला, नेओरा वैली, बक्सा; अभयारण्य और बायोस्फीयर रिज़र्व), बाह्य-स्थाने संरक्षण (चिड़ियाघर, क्रायोप्रिजर्वेशन), वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, और 1971-72 में पश्चिम मेदिनीपुर के अड़ाबाड़ी (Arabari) में डॉ. ए. के. बनर्जी के नेतृत्व में शुरू संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) जहाँ ग्रामीणों को 25% राजस्व हिस्सेदारी दी गई।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पारितंत्र, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल और पोषण स्तर (Trophic Levels) की आधारभूत समझ।
  • पृथ्वी के विभिन्न जलवायु कटिबंधों (उष्णकटिबंधीय, समशीतोष्ण, ध्रुवीय) और महासागरीय वातावरण का ज्ञान।
  • पश्चिम बंगाल के प्रमुख वनों और भौगोलिक क्षेत्रों (सुंदरबन, डुआर्स, दार्जिलिंग की पहाड़ियाँ) की सामान्य जानकारी।
  • पर्यावरणीय प्रदूषण, कीटनाशकों और प्रकृति पर मानवजनित प्रभावों की प्रारंभिक समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • जैव विविधता की परिभाषा स्पष्ट कर इसके तीनों संगठनात्मक स्तरों (आनुवंशिक, प्रजातीय, पारितंत्रीय) में भेद कर सकेंगे।
  • नॉर्मन मायर्स के हॉटस्पॉट निर्धारण के मानदंडों का विश्लेषण कर भारत के 4 प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट पहचान सकेंगे।
  • वैश्विक पर्यावरणीय संकटों (ध्रुवीय बर्फ पिघलना, प्रवाल विरंजन, महासागरीय अम्लीकरण, मधुमक्खी ह्रास) की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझा सकेंगे।
  • पश्चिम बंगाल और भारत के प्रमुख संकटापन्न वन्यजीवों (बाघ, गैंडा, रेड पांडा, गंगा डॉल्फ़िन, गिद्ध, ओलिव रिडले) के पारिस्थितिक महत्व और संरक्षण पहलों का मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • HIPPO रूपरेखा के आधार पर जैव विविधता ह्रास के प्रमुख चालकों (आवास विनाश, आक्रामक प्रजातियाँ, डीडीटी का जैव आवर्धन, अवैध शिकार) की व्याख्या कर सकेंगे।
  • स्व-स्थाने (In-situ) और बाह्य-स्थाने (Ex-situ) संरक्षण में अंतर स्पष्ट कर पश्चिम बंगाल के 6 राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव कानून 1972 और अड़ाबाड़ी संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) के महत्व को रेखांकित कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. जैव विविधता की आधारभूत अवधारणा,...
2 2. वैश्विक पर्यावरणीय संकट और समुद्...
3 3. भारत और पश्चिम बंगाल के क्षेत्री...
4 4. पर्यावरणीय संकट के प्रमुख चालक:...
5 5. संरक्षण के प्रतिमान, सुरक्षित क्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. जैव विविधता की आधारभूत अवधारणा, पारिस्थितिक स्तर और हॉटस्पॉट

1.1 जैव विविधता क्या है? जीवन के तीन प्रमुख स्तर

जैव विविधता (Biodiversity) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1985 में वाल्टर जी. रोसेन ने किया था और समाजशास्त्रीय जीवविज्ञानी एडवर्ड ओ. विल्सन ने इसे लोकप्रिय बनाया। इसका तात्पर्य पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवों (पादप, जंतु, सूक्ष्मजीव), उनकी आनुवंशिक विभिन्नताओं और उनके द्वारा निर्मित जटिल पारिस्थितिक तंत्रों की समग्र विविधता से है।

  • 1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के व्यष्टियों के बीच जीन और एलील्स में पाई जाने वाली भिन्नता। उदाहरण के लिए, भारत में देशी धान (Oryza sativa) की 50,000 से अधिक किस्में और आम की 1,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। उच्च आनुवंशिक विविधता किसी प्रजाति को बदलते मौसम और नए रोगाणुओं से लड़ने में अनुकूलन क्षमता प्रदान करती है।
  • 2. प्रजातीय विविधता (Species Diversity): किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की संख्या और उनकी सापेक्ष प्रचुरता। इसके दो प्रमुख घटक हैं:
    • प्रजातीय प्रचुरता (Species Richness): किसी क्षेत्र में उपस्थित कुल भिन्न प्रजातियों की संख्या।
    • प्रजातीय समानता (Species Evenness): उस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के जीवों का आनुपातिक संतुलन।
  • 3. पारितंत्रीय विविधता (Ecosystem Diversity): किसी विशाल भौगोलिक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के आवासों, जैविक समुदायों और पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता। इसे तीन पैमानों पर मापा जाता है:
    • अल्फा ($\alpha$) विविधता: किसी एक स्थानीय समुदाय या आवास के भीतर उपस्थित प्रजातियों की विविधता।
    • बीटा ($\beta$) विविधता: पर्यावरण प्रवणता के साथ दो संलग्न आवासों के बीच प्रजातियों के प्रतिस्थापन की दर।
    • गामा ($\gamma$) विविधता: एक संपूर्ण भौगोलिक परिदृश्य में उपस्थित सभी पारितंत्रों की कुल क्षेत्रीय विविधता।

1.2 पारिस्थितिक कार्य और अमूल्य पारितंत्र सेवाएँ

जैव विविधता प्रकृति का वह सजीव आधार है जो मानव जीवन को सुचारू बनाए रखने के लिए अनिवार्य पारिस्थितिक सेवाएँ (Ecosystem Services) प्रदान करती है:

पारितंत्र सेवा का प्रकार पारिस्थितिक भूमिका एवं तंत्र प्रत्यक्ष उदाहरण
प्रावधान सेवाएँ (Provisioning) पारितंत्र से सीधे प्राप्त होने वाले भौतिक संसाधन। अन्न, खाद्य मछलियाँ, इमारती लकड़ी, जीवनरक्षक औषधियाँ (कुनैन, विन्क्रिस्टीन) और स्वच्छ पेयजल।
नियामक सेवाएँ (Regulating) जलवायु नियंत्रण, बाढ़ नियंत्रण और जल शोधन। सुंदरबन के मैंग्रोव चक्रवात की तरंग ऊर्जा को 66% तक कम कर देते हैं; वन अरबों टन $CO_2$ का अवशोषण करते हैं।
सहायक सेवाएँ (Supporting) अन्य सभी सेवाओं को संचालित करने वाली मौलिक प्रक्रियाएँ। प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन उत्पादन, मृदा निर्माण, और पोषक चक्र (नाइट्रोजन, कार्बन, फॉस्फोरस)।
परागण एवं जैविक नियंत्रण फसलों का निषेचन और प्राकृतिक रूप से कीटों का नियंत्रण। मधुमक्खियाँ 75% खाद्य फसलों का परागण करती हैं; उल्लू और चमगादड़ रात में हानिकारक कीटों और चूहों को खाते हैं।

1.3 जैव विविधता हॉटस्पॉट: स्थानिकता के वैश्विक केंद्र

ब्रिटिश पारिस्थितिकीविद् नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) ने 1988 में सर्वप्रथम "बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉट" की अवधारणा प्रस्तुत की थी। यह ऐसे संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र हैं जहाँ अद्वितीय जैविक संपदा पाई जाती है परंतु वे मानवीय गतिविधियों से अत्यधिक खतरे में हैं।

  • हॉटस्पॉट घोषित करने के दो अनिवार्य वैज्ञानिक मानदंड:
    1. उच्च स्थानिकता (High Endemism): उस क्षेत्र में कम से कम 1,500 संवहनी पादप प्रजातियाँ स्थानिक (Endemic) होनी चाहिए (अर्थात् वे पौधे पृथ्वी पर अन्यत्र कहीं नहीं उगते)।
    2. तीव्र विनाश (Severe Threat Level): उस क्षेत्र के मूल प्राकृतिक आवास का कम से कम 70% हिस्सा नष्ट हो चुका हो (अर्थात् केवल 30% या उससे कम प्राकृतिक आवास शेष बचा हो)।
  • भारत के 4 प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट:

    विश्व के 36 मान्यता प्राप्त हॉटस्पॉट में से 4 भारत में स्थित या विस्तृत हैं:

    हॉटस्पॉट का नाम भौगोलिक विस्तार प्रमुख स्थानिक एवं संकटापन्न जीव
    1. पूर्वी हिमालय (Eastern Himalaya) पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग-कालिम्पोंग, सिक्किम, अरुणाचल, भूटान व पूर्वी नेपाल। रेड पांडा (Ailurus fulgens), हिम तेंदुआ (Snow Leopard), रोडोडेंड्रोन, दुर्लभ ऑर्किड।
    2. इंडो-बर्मा (Indo-Burma) ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण का पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय, मिजोरम आदि) से म्यांमार तक। हूलॉक गिब्बन (भारत का एकमात्र लंगूर/कपि), गोल्डन लंगूर, पिग्मी हॉग।
    3. पश्चिमी घाट एवं श्रीलंका भारत के पश्चिमी तट के पर्वत (महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु)। शेर-पूँछ मकाक (Lion-tailed Macaque), नीलगिरि ताहर, मालाबार उड़न मेंढक।
    4. सुंदरलैंड (Sundaland) भारत का निकोबार द्वीप समूह, इंडोनेशिया, मलेशिया और ब्रुनेई। निकोबार मेगापोड, केकड़ा-भक्षी मकाक, विशाल प्रवाल भित्तियाँ, मैंग्रोव।

1.4 भारत: अति-जैव विविधता (Mega-Diversity) संपन्न राष्ट्र

विश्व के केवल 17 देशों को "मेगा-डायवर्सिटी राष्ट्र" का दर्जा प्राप्त है, जिनमें भारत अग्रणी है। यद्यपि भारत के पास विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का केवल 2.4% भाग है, किंतु यह विश्व की कुल ज्ञात प्रजातियों का लगभग 8.1% (लगभग 45,000 पादप और 91,000 से अधिक जंतु प्रजातियाँ) धारण करता है।

1.5 पारितंत्र स्थिरता में की-स्टोन प्रजातियों (Keystone Species) की भूमिका

की-स्टोन प्रजाति (Keystone Species) वह जीव है जिसकी पारितंत्र में उपस्थिति उसके संख्याबल की तुलना में अत्यधिक व्यापक और निर्णायक प्रभाव डालती है।

  • यदि किसी खाद्य श्रृंखला से की-स्टोन प्रजाति को हटा दिया जाए, तो पूरा पारितंत्र ध्वस्त हो जाता है।
  • सुंदरबन में रॉयल बंगाल टाइगर: शीर्ष परभक्षी (Apex Predator) के रूप में बाघ चीतल हिरण और जंगली सूअर की संख्या नियंत्रित करता है। बाघ न होने पर शाकाहारी जंतुओं की अत्यधिक संख्या मैंग्रोव के पौधों को चरकर पूरे वन को रेगिस्तान बना देगी।
  • अंजीर का वृक्ष (Ficus): वनों में सूखे के मौसम में जब कोई अन्य फल नहीं होता, तब अंजीर पक्षियों, चमगादड़ों और बंदरों को भोजन प्रदान कर पारितंत्र को बचाए रखता है।

2. वैश्विक पर्यावरणीय संकट और समुद्री पारितंत्र का ह्रास

2.1 ध्रुवीय बर्फ का पिघलना: ध्रुवीय भालू और पेंगुइन पर संकट

मानवजनित ग्रीनहाउस गैसों ($CO_2, CH_4$) के उत्सर्जन से वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। ध्रुवीय क्षेत्रों में यह प्रभाव सामान्य से दुगुनी-तिगुनी गति से हो रहा है, जिसे ध्रुवीय आवर्धन (Polar Amplification) कहते हैं:

  • आर्कटिक ध्रुवीय भालू (Ursus maritimus): ध्रुवीय भालू तैरती हुई समुद्री बर्फ (Sea Ice Floes) का उपयोग सील (Ringed Seal) का शिकार करने के लिए करते हैं। बर्फ के जल्दी पिघलने और देर से जमने के कारण भालुओं को भोजन नहीं मिलता। वे भूख से मर रहे हैं और ऊर्जा की कमी के कारण उनकी प्रजनन दर में भारी गिरावट आई है।
  • अंटार्कटिका के सम्राट पेंगुइन (Aptenodytes forsteri): सम्राट पेंगुइन समुद्री बर्फ पर अपने अंडे सेते हैं और चूजों का पालन-पोषण करते हैं। समय से पहले बर्फ की चट्टानें टूटकर समुद्र में बह जाने से हजारों नवजात चूजे, जिनके वॉटरप्रूफ पंख विकसित नहीं हुए होते, ठंडे पानी में डूबकर मर जाते हैं।

2.2 प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching): समुद्र के वर्षावनों का विनाश

प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs) को "समुद्र का वर्षावन" कहा जाता है क्योंकि वे महासागर के 0.1% से भी कम क्षेत्र में रहकर 25% से अधिक समुद्री प्रजातियों को आश्रय देती हैं।

  • प्रवाल और शैवाल का सहजीवन: प्रवाल पॉलिप (Coral Polyp) के पारदर्शी ऊतकों में सूक्ष्म एककोशिकीय ज़ूजैंथेली (Zooxanthellae) नामक प्रकाश संश्लेषी शैवाल रहते हैं। ये शैवाल प्रवाल को 90% पोषण ऊर्जा और सुंदर रंग प्रदान करते हैं, जबकि प्रवाल उन्हें सुरक्षा और कच्चा माल देता है।
  • विरंजन (Bleaching) की क्रियाविधि: जब समुद्र का तापमान सामान्य ग्रीष्मकालीन स्तर से केवल 1°C से 2°C अधिक बढ़ जाता है, तो शैवाल का प्रकाश संश्लेषण तंत्र असंतुलित हो जाता है और वह जहरीले रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) उत्पन्न करने लगता है। अपनी रक्षा के लिए प्रवाल पॉलिप इन शैवालों को अपने शरीर से बाहर निकाल देता है।
  • परिणाम: शैवाल निकलने से प्रवाल के नीचे का सफेद कैल्सियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) का कंकाल दिखाई देने लगता है, जिसे कोरल ब्लीचिंग (Coral Bleaching) कहते हैं। यदि पानी का तापमान शीघ्र सामान्य न हो, तो भोजन के अभाव में प्रवाल मर जाते हैं।

2.3 महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification)

वायुमंडल में उत्सर्जित अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड का लगभग 30% हिस्सा महासागरों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है:

  • रासायनिक अभिक्रिया: जल में घुलकर $CO_2$ कार्बोनिक अम्ल ($\text{H}_2\text{CO}_3$) बनाती है, जो वियोजित होकर हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) और बाइकार्बोनेट आयन ($\text{HCO}_3^-$) मुक्त करता है: $$\text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{H}_2\text{CO}_3 \rightleftharpoons \text{H}^+ + \text{HCO}_3^-$$
  • कार्बोनेट आयनों का ह्रास: मुक्त $\text{H}^+$ आयन समुद्री जल में उपस्थित कार्बोनेट आयनों ($\text{CO}_3^{2-}$) से जुड़ जाते हैं। इसके कारण समुद्री जीवों (शंख, घोंघे, सीपी, प्रवाल) को अपने कैल्सियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) के सुरक्षा कवच बनाने के लिए कार्बोनेट आयन नहीं मिल पाते।
  • खपचों का घुलना: अत्यधिक अम्लीय जल में जीवों के पहले से बने कवच भी रासायनिक रूप से घुलने लगते हैं, जिससे समुद्री खाद्य जाल का आधार नष्ट हो रहा है।

2.4 मधुमक्खियों का संकट: कॉलोनी कोलैप्स डिसऑर्डर (CCD)

विश्व भर में मधुमक्खियों की श्रमिक आबादी का छत्तों से अचानक गायब हो जाना कॉलोनी कोलैप्स डिसऑर्डर (CCD) कहलाता है:

  • नियोनिकोटिनोइड कीटनाशक (Neonicotinoids): आधुनिक कृषि में प्रयुक्त कीटनाशक (जैसे इमिडाक्लोप्रिड) फूलों के मकरंद और पराग में प्रवेश कर जाते हैं।
  • तंत्रिका विषाक्तता: यह कीटनाशक मधुमक्खियों के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे उनकी याददाश्त और दिशा-ज्ञान (Navigation Ability) नष्ट हो जाता है। श्रमिक मधुमक्खियाँ फूलों से मकरंद लेकर वापस छत्ते तक नहीं पहुँच पातीं और रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं।
  • खाद्य सुरक्षा पर खतरा: मानव द्वारा खाए जाने वाले 100 प्रमुख खाद्य पौधों में से 71 का परागण मधुमक्खियों द्वारा होता है। मधुमक्खियों के नष्ट होने से वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन ठप हो सकता है।

2.5 समुद्री माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण

प्लास्टिक कचरा सूर्य के पराबैंगनी प्रकाश और समुद्री लहरों के घर्षण से 5 मिलीमीटर से छोटे कणों में टूट जाता है, जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक (Microplastics) कहते हैं।

  • प्लवक (Plankton) और छोटी मछलियाँ इन्हें भोजन समझकर निगल लेती हैं।
  • यह प्लास्टिक मछलियों के पेट में जमा होकर उन्हें भूखा मार देता है और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से अंततः मानव शरीर में पहुँचकर कैंसर और हार्मोनल विकार उत्पन्न करता है।

3. भारत और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रीय संकटापन्न वन्यजीव

3.1 रॉयल बंगाल टाइगर (Panthera tigris tigris)

भारत का राष्ट्रीय पशु, सुंदरबन के खारे मैंग्रोव दलदलों और तराई वनों का शीर्ष शिकारी:

  • अनुकूलन: सुंदरबन के बाघ खारे पानी में तैरने में अत्यंत कुशल हैं और सुंदरी व गरान के मैंग्रोव वनों में शिकार करने के लिए अनुकूलित हैं।
  • संकट: वनों का विखंडन, अवैध शिकार (त्वचा और हड्डियों के लिए), समुद्र का जलस्तर बढ़ने से मैंग्रोव द्वीपों का डूबना, और मानव-बाघ संघर्ष।
  • संरक्षण पहल: बाघों को विलुप्त होने से बचाने के लिए 1 अप्रैल 1973 को "प्रोजेक्ट टाइगर" (Project Tiger) शुरू किया गया। सुंदरबन पश्चिम बंगाल का प्रमुख टाइगर रिज़र्व और राष्ट्रीय उद्यान है।

3.2 भारतीय एक-सींग वाला गैंडा (Rhinoceros unicornis)

विशाल शाकाहारी स्तनपायी, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के डुआर्स (जलदापाड़ा एवं गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान) और असम के काजीरंगा में पाया जाता है:

  • सींग का वैज्ञानिक सच: गैंडे की नाक पर स्थित सींग कोई हड्डी या हाथीदाँत नहीं है; यह पूरी तरह से संघनित केराटिन (Keratin) रेशों से बना होता है—वही प्रोटीन जिससे हमारे बाल और नाखून बनते हैं!
  • संकट: अंधविश्वास के कारण पारंपरिक दवाओं में सींग के कथित औषधीय गुणों के चलते अंतरराष्ट्रीय तस्करों द्वारा गैंडों का क्रूर अवैध शिकार।
  • संरक्षण: इंडियन राइनो विज़न (IRV 2020) के तहत सख्त सशस्त्र गश्ती और सुरक्षित क्षेत्रों का विस्तार किया गया है।

3.3 रेड पांडा (Ailurus fulgens)

पूर्वी हिमालय के शीतोष्ण बाँस के वनों में रहने वाला अत्यंत सुंदर और शर्मीला वृक्षीय स्तनपायी:

  • विशिष्ट आहार: रेड पांडा का 95% आहार केवल बाँस की ताज़ी पत्तियाँ और कोमल अंकुर हैं। उनके हाथ में एक संशोधित कलाई की हड्डी होती है जो "छठे अँगूठे" (False Thumb) की तरह काम कर बाँस की टहनियों को पकड़ने में मदद करती है।
  • पश्चिम बंगाल में प्राकृतिक आवास: दार्जिलिंग जिले का सिंगालीला राष्ट्रीय उद्यान (Singalila National Park) और कालिम्पोंग का नेओरा वैली राष्ट्रीय उद्यान।
  • सफल बाह्य-स्थाने संरक्षण: दार्जिलिंग स्थित पद्मजा नायडू हिमालयन प्राणी उद्यान (Padmaja Naidu Himalayan Zoological Park) ने रेड पांडा के सफल कैप्टिव प्रजनन (Captive Breeding) और उन्हें पुनः सिंगालीला के जंगलों में छोड़ने में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है।

3.4 गंगा नदी की डॉल्फ़िन (Platanista gangetica)

भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव (National Aquatic Animal), जो गंगा, ब्रह्मपुत्र और हुगली नदी प्रणालियों में पाया जाता है:

  • कार्यात्मक रूप से अंधी (Functionally Blind): नदी के अत्यधिक गंदले और गादयुक्त पानी में लाखों वर्षों के अनुकूलन के कारण इसकी आँखों का लेंस समाप्त हो चुका है; यह केवल प्रकाश और अंधकार का अनुभव कर सकती है।
  • इकोलोकेशन (Echolocation / बायो-सोनार): डॉल्फ़िन अपने सिर (Melon) से 20 से 100 किलोहर्ट्ज़ की उच्च आवृत्ति वाली पराश्रव्य क्लिक ध्वनियाँ (Ultrasonic clicks) छोड़ती है। शिकार या तलहटी से टकराकर लौटने वाली ध्वनि तरंगों की प्रतिध्वनि को निचले जबड़े से सुनकर यह शिकार की सटीक दूरी और आकार का पता लगाती है।
  • संकट: फरक्का जैसे बैराजों से नदी का विखंडन, नायलॉन के गिल-नेट में फँसकर दम घुटना (फेफड़ों से साँस लेने के कारण इसे हर 1-2 मिनट में सतह पर आना पड़ता है), और रासायनिक प्रदूषण।

3.5 ओलिव रिडले समुद्री कछुआ (Lepidochelys olivacea)

प्रशांत और हिंद महासागर का समुद्री कछुआ, जो सामूहिक अंडा-प्रसव के लिए विख्यात है:

  • अरिबाडा (Arribada): स्पैनिश शब्द जिसका अर्थ है "आगमन"। प्रतिवर्ष शीतकाल में हजारों मादा कछुए एक साथ ओडिशा के गहिरमाथा और बंगाल की खाड़ी के तटों पर रात में लाखों अंडे देने आती हैं।
  • खतरे एवं समाधान: यंत्रीकृत मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों के जालों में फँसकर डूबना और तटवर्ती रोशनी से भटकाव। संरक्षण हेतु ट्रॉलरों में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TED) लगाना अनिवार्य किया गया है।

3.6 भारतीय गिद्धों का महाविनाश: डिक्लोफेनाक का कहर

1990 के दशक में भारत में सफेद पीठ वाले गिद्धों और भारतीय गिद्धों की आबादी में 99.9% की अभूतपूर्व गिरावट दर्ज की गई:

  • अपराधी दवा — डिक्लोफेनाक (Diclofenac): यह एक गैर-स्टेरॉयडीय सूजनरोधी दर्दनाशक दवा (NSAID) थी, जिसका उपयोग किसान बीमार मवेशियों (गायों-बैलों) के दर्द निवारण के लिए करते थे।
  • विसरल गाउट (Visceral Gout): जब दवा दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद मवेशी मर जाते थे, तो उनके शवों को खाने वाले गिद्धों के शरीर में डिक्लोफेनाक पहुँच जाता था। गिद्धों के गुर्दे (Kidneys) इस दवा को पचाने में असमर्थ होते हैं, जिससे गुर्दे पूरी तरह फेल हो जाते थे और यूरिक एसिड के सफेद क्रिस्टल आंतरिक अंगों (हृदय, यकृत) पर जम जाते थे, जिससे 48 घंटों में गिद्ध की मृत्यु हो जाती थी।
  • संरक्षण उपाय: 2006 में भारत सरकार ने पशु चिकित्सा में डिक्लोफेनाक पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और गिद्धों के लिए सुरक्षित विकल्प मेलोक्सिकैम (Meloxicam) पेश किया। पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिज़र्व के राजाभातखावा में गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र (VCBC) स्थापित किया गया।

4. पर्यावरणीय संकट के प्रमुख चालक: HIPPO ढाँचा

4.1 विख्यात जीवविज्ञानी ई. ओ. विल्सन का HIPPO ढाँचा

हार्वर्ड के प्रख्यात जीवविज्ञानी एडवर्ड ओ. विल्सन ने जैव विविधता के विनाश के पाँच प्रमुख मानवजनित कारणों को संक्षिप्त नाम HIPPO के रूप में प्रस्तुत किया:

अक्षर पर्यावरणीय संकट का कारक पारिस्थितिक प्रभाव एवं प्रमुख उदाहरण
H Habitat Loss & Fragmentation (आवास विनाश एवं विखंडन) वनों की कटाई, खनन और सड़कों-रेलवे लाइनों का निर्माण। डुआर्स में प्राचीन हाथी गलियारे के बीच से ब्रॉडगेज रेलवे लाइन गुजरने से नियमित रूप से ट्रेनों से कटकर हाथियों की दुखद मौत होती है।
I Invasive Alien Species (आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ) बाहर से लाई गई ऐसी प्रजातियाँ जो स्थानीय जीवों को समाप्त कर देती हैं। उदाहरण: गाजर घास (Parthenium), लैंटाना (Lantana camara), जलकुंभी (Eichhornia), और मांसाहारी अफ्रीकी कैटफ़िश (Clarias gariepinus)।
P Pollution (पर्यावरणीय प्रदूषण) कीटनाशकों, भारी धातुओं (सीसा, पारा) और प्लास्टिक का संचय। खाद्य श्रृंखला में डीडीटी का घातक जैव आवर्धन (Biomagnification)।
P Population Growth (मानव जनसंख्या विस्फोट) बढ़ती आबादी के लिए आवास, कृषि और उद्योगों के लिए प्राकृतिक वनों और आर्द्रभूमियों का अंधाधुंध अतिक्रमण।
O Overexploitation & Poaching (अत्यधिक दोहन व अवैध शिकार) व्यावसायिक लाभ और अंधविश्वास के लिए वन्यजीवों का संहार। बाघ की खाल-हड्डियों, गैंडे के सींग, कस्तूरी मृग की नाभि और हाथीदाँत की अंतरराष्ट्रीय तस्करी।

4.2 आहार श्रृंखला में रासायनिक जैव आवर्धन (Biomagnification)

जैव आवर्धन (Biomagnification) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई अजैव-निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) और वसा में घुलनशील विषैला रसायन खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक उच्चतर पोषण स्तर पर उत्तरोत्तर अधिक सांद्रता में जमा होता जाता है:

  • डीडीटी (DDT) का उदाहरण:
    1. जल में डीडीटी की सांद्रता: 0.000003 ppm (भाग प्रति दस लाख)
    2. पादप-प्लवक (Phytoplankton): 0.04 ppm
    3. जंतु-प्लवक (Zooplankton): 0.2 ppm
    4. छोटी मछलियाँ: 0.5 ppm
    5. बड़ी मांसाहारी मछलियाँ: 2.0 ppm
    6. मछली खाने वाले शिकारी पक्षी (ओस्प्रे, चील): 25.0 ppm (लाखों गुना सांद्रण!)
  • पक्षियों पर विनाशकारी प्रभाव: शिकारी पक्षियों के शरीर में डीडीटी की उच्च सांद्रता कैल्सियम चयापचय में भाग लेने वाले एंजाइम (कार्बोनिक एनहाइड्रेज़) को बाधित करती है। इसके कारण पक्षियों के अंडों के छिलके अत्यधिक पतले हो जाते हैं। जब माता-पिता अंडे सेते हैं, तो अंडों के छिलके समय से पहले ही टूट जाते हैं, जिससे चूजे मर जाते हैं।

4.3 आक्रामक विदेशी प्रजातियों का पारिस्थितिक आतंक

जब किसी विदेशी जीव को नए क्षेत्र में लाया जाता है, जहाँ उसका कोई प्राकृतिक शिकारी नहीं होता, तो वह स्थानीय प्रजातियों को बेदखल कर देता है:

  • पार्थेनियम (Parthenium hysterophorus): आयातित गेहूँ के साथ भारत आया खरपतवार; यह मिट्टी में ऐसे रसायन छोड़ता है जिससे देशी वनस्पतियाँ नष्ट हो जाती हैं और मनुष्यों में दमा व त्वचा एलर्जी पैदा करता है।
  • जलकुंभी (Eichhornia crassipes): "बंगाल का आतंक" (Terror of Bengal); जलाशयों की पूरी सतह को ढककर सूर्य का प्रकाश रोक देती है और पानी से घुली ऑक्सीजन खींच लेती है, जिससे मछलियाँ मर जाती हैं।
  • अफ्रीकी कैटफ़िश (Clarias gariepinus): अवैध रूप से पाली जाने वाली मांसाहारी मछली जो नदियों और तालाबों की सभी देशी छोटी मछलियों और मेंढकों को खा जाती है।

5. संरक्षण के प्रतिमान, सुरक्षित क्षेत्र और पर्यावरण कानून

5.1 IUCN और रेड डाटा बुक की श्रेणियाँ

प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (IUCN) विश्व स्तर पर प्रजातियों के विलोपन जोखिम का आकलन कर रेड डाटा बुक (Red Data Book) जारी करता है:

  • विलुप्त (Extinct - EX): जिस प्रजाति का अंतिम व्यष्टि भी पृथ्वी पर मर चुका है (जैसे डोडो, तस्मानियाई भेड़िया, यात्री कबूतर)।
  • वन-विलुप्त (Extinct in the Wild - EW): जो केवल चिड़ियाघरों या कृत्रिम संरक्षण में जीवित हैं, प्राकृतिक जंगलों में समाप्त हो चुके हैं।
  • गंभीर रूप से संकटापन्न (Critically Endangered - CR): निकट भविष्य में वनों से विलुप्त होने का अत्यधिक गंभीर खतरा (जैसे घड़ियाल, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, सफेद पीठ वाला गिद्ध)।
  • संकटापन्न (Endangered - EN): जिनकी संख्या तेजी से घट रही है (जैसे रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, रेड पांडा, गंगा डॉल्फ़िन)।
  • असुरक्षित / सुभेद्य (Vulnerable - VU): जिन्हें संरक्षण न मिलने पर शीघ्र संकटापन्न श्रेणी में जाने का खतरा है (जैसे एक-सींग वाला गैंडा, स्नो लेपर्ड)।

5.2 स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation)

संकटग्रस्त पादपों और जंतुओं को उनके प्राकृतिक आवास में ही सुरक्षा और अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करना स्व-स्थाने संरक्षण कहलाता है:

संरक्षित क्षेत्र का प्रकार कानूनी स्थिति एवं मानवीय हस्तक्षेप पश्चिम बंगाल एवं भारत के उदाहरण
राष्ट्रीय उद्यान (National Park) सख्त सरकारी नियंत्रण; मानवीय गतिविधियाँ (शिकार, पशु चराई, वनोपज संग्रह) पूर्णतः प्रतिबंधित। पश्चिम बंगाल के 6 राष्ट्रीय उद्यान (सुंदरबन, गोरुमारा, जलदापाड़ा, सिंगालीला, नेओरा वैली, बक्सा)।
वन्यजीव अभयारण्य (Sanctuary) विशिष्ट वन्यजीव की सुरक्षा; अनुमति के साथ सीमित मानवीय गतिविधियाँ (जैसे सूखी लकड़ी व शहद संग्रह) मान्य। चपरामारी वन्यजीव अभयारण्य, महानंदा अभयारण्य, चिंतामणि कर पक्षी अभयारण्य (कोलकाता के पास)।
बायोस्फीयर रिज़र्व (Biosphere Reserve) विशाल संरक्षित क्षेत्र जो कोर (पूर्ण संरक्षित), बफर और ट्रांजिशन ज़ोन में विभाजित होता है। सुंदरबन बायोस्फीयर रिज़र्व, नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व।

पश्चिम बंगाल के 6 राष्ट्रीय उद्यान:

  1. सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान (दक्षिण 24 परगना): रॉयल बंगाल टाइगर, खारे पानी का मगरमच्छ, मैंग्रोव।
  2. जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान (अलीपुरद्वार): एक-सींग वाला गैंडा, दलदली हिरण।
  3. गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान (जलपाईगुड़ी): भारतीय गौर (बायसन), एक-सींग वाला गैंडा।
  4. सिंगालीला राष्ट्रीय उद्यान (दार्जिलिंग): रेड पांडा, कस्तूरी मृग, हिमालयन काला भालू।
  5. नेओरा वैली राष्ट्रीय उद्यान (कालिम्पोंग): रेड पांडा, क्लाउडेड लेपर्ड।
  6. बक्सा राष्ट्रीय उद्यान (अलीपुरद्वार): एशियाई हाथी, बाघ, क्लाउडेड लेपर्ड।

5.3 बाह्य-स्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation)

जब किसी प्रजाति पर प्राकृतिक आवास में विलुप्ति का गंभीर संकट हो, तो उसे प्राकृतिक आवास से बाहर मानव-निर्मित कृत्रिम एवं सुरक्षित वातावरण में ले जाकर पालना और प्रजनन कराना बाह्य-स्थाने संरक्षण कहलाता है:

  • प्राणी उद्यान (Zoos): दार्जिलिंग का पद्मजा नायडू हिमालयन प्राणी उद्यान (रेड पांडा और हिम तेंदुए का सफल प्रजनन केंद्र) और कोलकाता का अलीपुर चिड़ियाघर।
  • वानस्पतिक उद्यान (Botanical Gardens): शिवपुर, हावड़ा का आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वानस्पतिक उद्यान (250 वर्ष पुराना विशाल बरगद का पेड़ और दुर्लभ पादप संग्रह)।
  • क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation): पौधों के परागकणों, बीजों और जंतुओं के शुक्राणुओं व अंडाणुओं को तरल नाइट्रोजन में -196°C तापमान पर दशकों तक सुरक्षित रखना।

5.4 वन्यजीव कानून और राष्ट्रीय संरक्षण परियोजनाएँ

  • भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972): वन्यजीवों के शिकार, अंगों के व्यापार और आवास विनाश पर कठोर दंड और कारावास का प्रावधान।
  • प्रोजेक्ट टाइगर (1973): बाघों की घटती संख्या को रोकने के लिए जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से शुरू किया गया ऐतिहासिक कार्यक्रम।
  • प्रोजेक्ट एलिफेंट (1992): हाथियों के आवासों और प्रवासी गलियारों (Corridors) की सुरक्षा तथा मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए।

5.5 संयुक्त वन प्रबंधन (JFM): अड़ाबाड़ी की ऐतिहासिक क्रांति

1971–1972 में पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के अड़ाबाड़ी (Arabari) वन क्षेत्र में प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) डॉ. अजीत कुमार बनर्जी के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक सामाजिक-पारिस्थितिक प्रयोग प्रारंभ हुआ:

  • अवधारणा: ग्रामीणों को वन का शत्रु समझने के बजाय वन विभाग ने स्थानीय 612 निर्धन जनजातीय परिवारों के साथ हाथ मिलाया और वन सुरक्षा समितियाँ (FPC - Forest Protection Committees) गठित कीं।
  • समझौता: ग्रामीणों ने 1,270 हेक्टेयर में फैले उजड़ रहे साल (Sal) के वनों को अवैध कटाई और आग से बचाने का संकल्प लिया। इसके बदले में सरकार ने उन्हें गैर-काष्ठ वनोत्पाद (साल के पत्ते, सूखी टहनियाँ, महुआ) एकत्र करने का अधिकार दिया और भविष्य में इमारती लकड़ी की व्यावसायिक नीलामी से होने वाले शुद्ध राजस्व का 25% सीधा हिस्सा कानूनी रूप से ग्रामीणों को देने की गारंटी दी।
  • राष्ट्रीय परिणाम: मात्र एक दशक में उजड़ा हुआ अड़ाबाड़ी वन लहलहाते कीमती साल वन में बदल गया। अड़ाबाड़ी का यह सफल मॉडल पूरे भारत में संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management - JFM) की राष्ट्रीय नीति का आधार बना!

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

प्रजातीय विविधता घटक एवं सिम्पसन सूचकांक
$$\text{Diversity} = \text{Species Richness } (S) + \text{Species Evenness } (E); \quad D = 1 - \sum \left(\frac{n_i}{N}\right)^2$$
नॉर्मन मायर्स के हॉटस्पॉट निर्धारण समीकरण
$$स्थानिक पादप ≥ 1,500 तथा आवास विनाश ≥ 70\% (अवशेष ≤ 30\%)$$
महासागरीय अम्लीकरण एवं कार्बोनेट ह्रास रासायनिक साम्य
$$\text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{H}_2\text{CO}_3 \rightleftharpoons \text{H}^+ + \text{HCO}_3^-; \quad \text{H}^+ + \text{CO}_3^{2-} \rightleftharpoons \text{HCO}_3^-$$
प्रवाल विरंजन तापीय सीमा समीकरण
$$ T ≥ +1.0^ to +2.0^ [उष्णता अवधि] ⇒ ROS निर्माण ⇒ ज़ूजैंथेली निष्कासन$$
पोषण जैव आवर्धन कारक (Biomagnification Factor - BMF)
$$BMF = {C_{शिकारी}}{C_{शिकार}} > 1; C_n = C_0 × (BMF)^n$$
गिद्धों में डिक्लोफेनाक यूरिक एसिड क्रिस्टलीकरण
$$डिक्लोफेनाक अंतर्ग्रहण →{यूरिक एसिड निष्कासन अवरोध} तीव्र वृक्क विफलता विसरल गाउट$$
गंगा डॉल्फ़िन पराश्रव्य बायो-सोनार दूरी समीकरण
$$d = {v_{ध्वनि} × t}{2} (v_{जल} ≈ 1,500 m/s)$$
अड़ाबाड़ी संयुक्त वन प्रबंधन २५% राजस्व सूत्र
$$ग्रामीणों का हिस्सा = 0.25 × इमारती लकड़ी शुद्ध आय + 100% गैर-काष्ठ वनोत्पाद$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
जैव विविधता के तीनों स्तरों को समझाइए और भारत या पश्चिम बंगाल के संदर्भ में प्रत्येक का एक ठोस उदाहरण दीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. आनुवंशिक विविधता: एक ही प्रजाति के भीतर जीनों की विविधता। उदाहरण: भारत में देशी धान (Oryza sativa) की 50,000 से अधिक और आम की 1,000 से अधिक आनुवंशिक किस्में।
  2. प्रजातीय विविधता: किसी निश्चित क्षेत्र में विभिन्न जातियों के जीवों की प्रचुरता। उदाहरण: सुंदरबन में बाघ, चीतल हिरण, खारे पानी का मगरमच्छ और मैंग्रोव वृक्षों की सह-उपस्थिति।
  3. पारितंत्रीय विविधता: किसी विशाल क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के आवासों और पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता। उदाहरण: पश्चिम बंगाल में मैंग्रोव डेल्टा (सुंदरबन), जलोढ़ मैदानी भाग (गंगा घाटी), शुष्क पर्णपाती वन (जंगलमहल) और अल्पाइन पर्वतीय वन (दार्जिलिंग हिमालय) का पाया जाना।
उदाहरण 2
नॉर्मन मायर्स द्वारा किसी क्षेत्र को जैव विविधता हॉटस्पॉट घोषित करने के दो अनिवार्य वैज्ञानिक मानदंड क्या हैं? भारत के चारों हॉटस्पॉट के नाम लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

नॉर्मन मायर्स के मानदंड:

  1. उच्च स्थानिकता: उस क्षेत्र में कम से कम 1,500 संवहनी पादप प्रजातियाँ स्थानिक (Endemic) होनी चाहिए (जो विश्व में अन्यत्र कहीं न मिलें)।
  2. संकट का स्तर: उस क्षेत्र के मूल प्राकृतिक आवास का कम से कम 70% हिस्सा मानवीय गतिविधियों से नष्ट हो चुका हो (केवल 30% या कम आवास शेष बचा हो)।

भारत के 4 हॉटस्पॉट:

  1. पूर्वी हिमालय (दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, सिक्किम, पूर्वोत्तर)
  2. इंडो-बर्मा (ब्रह्मपुत्र के दक्षिण का पूर्वोत्तर क्षेत्र)
  3. पश्चिमी घाट एवं श्रीलंका
  4. सुंदरलैंड (निकोबार द्वीप समूह)
उदाहरण 3
प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) की घटना क्या है? प्रवाल भित्तियों को "समुद्र का वर्षावन" क्यों कहा जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. समुद्र का वर्षावन: प्रवाल भित्तियाँ समुद्र के 0.1% से भी कम तल पर स्थित होने के बावजूद 25% से अधिक समुद्री जैव विविधता को भोजन, प्रजनन स्थल और सुरक्षा प्रदान करती हैं।

  2. प्रवाल विरंजन: प्रवाल पॉलिप के ऊतकों में सूक्ष्म एककोशिकीय ज़ूजैंथेली शैवाल रहते हैं, जो प्रवाल को 90% ऊर्जा और आकर्षक रंग देते हैं। जब समुद्र का तापमान 1-2°C बढ़ता है, तो शैवाल विषाक्त पदार्थ उत्पन्न करने लगते हैं। प्रवाल अपने बचाव के लिए शैवाल को बाहर निकाल देता है, जिससे प्रवाल का पारदर्शी ऊतक हटकर नीचे का सफेद कैल्सियम कार्बोनेट कंकाल दिखाई देने लगता है। तापमान सामान्य न होने पर प्रवाल भूख से मर जाते हैं।

उदाहरण 4
1990 और 2000 के दशक में भारत में गिद्धों की संख्या 99% से अधिक क्यों घट गई? इसके लिए कौन-सी दवा जिम्मेदार थी और क्या समाधान किया गया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
जिम्मेदार दवा — डिक्लोफेनाक: यह मवेशियों (गाय-भैंस) के दर्द और सूजन के इलाज के लिए दी जाने वाली सस्ती दर्दनाशक दवा थी। जब दवा दिए जाने के कुछ ही समय बाद मवेशी मर जाते थे, तो उनके शव खाने वाले गिद्धों के पेट में यह दवा पहुँच जाती थी। गिद्धों में इस दवा को तोड़ने वाले एंजाइम नहीं होते, जिससे उनके गुर्दे फेल हो जाते थे और आंतरिक अंगों पर यूरिक एसिड जमने से विसरल गाउट होकर 48 घंटे में मृत्यु हो जाती थी। समाधान: 2006 में भारत सरकार ने पशु चिकित्सा में डिक्लोफेनाक पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और गिद्धों के लिए सुरक्षित दर्दनाशक दवा मेलोक्सिकैम (Meloxicam) लागू की। साथ ही पश्चिम बंगाल के राजाभातखावा (बक्सा) में गिद्ध प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया।
उदाहरण 5
गंगा की दृष्टिहीन डॉल्फ़िन गंदले पानी में दिशा-ज्ञान और शिकार कैसे करती है? इसके अस्तित्व के प्रमुख खतरे क्या हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
पराश्रव्य बायो-सोनार: गंगा नदी के गादयुक्त और गंदले पानी में रहने के कारण डॉल्फ़िन की आँखों का लेंस समाप्त हो चुका है और वह अंधी होती है। दिशा-ज्ञान और शिकार के लिए यह अपने सिर से 20-100 किलोहर्ट्ज़ की उच्च आवृत्ति वाली पराश्रव्य क्लिक ध्वनियाँ छोड़ती है। शिकार से टकराकर लौटने वाली प्रतिध्वनि को जबड़े के संवेदनशील अंगों से ग्रहण कर यह शिकार की दूरी और गति का सटीक अनुमान लगाती है। प्रमुख खतरे: फरक्का जैसे बैराजों द्वारा नदी का विखंडन, मछली पकड़ने के नायलॉन के जालों में फँसकर दम घुटना (फेफड़ों से साँस लेने के कारण), औद्योगिक रसायन और कृषि प्रदूषण।
उदाहरण 6
जलीय खाद्य श्रृंखला में कीटनाशक डीडीटी (DDT) के उदाहरण द्वारा जैव आवर्धन (Biomagnification) की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

जैव आवर्धन वह प्रक्रिया है जिसमें कोई अजैव-निम्नीकरणीय और वसा में घुलनशील विषैला रसायन खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर अधिक सांद्रता में जमा होता जाता है।

डीडीटी का उदाहरण:

  1. जल: 0.000003 ppm
  2. पादप-प्लवक: 0.04 ppm
  3. जंतु-प्लवक: 0.2 ppm
  4. छोटी मछली: 0.5 ppm
  5. बड़ी मछली: 2.0 ppm
  6. मछली खाने वाले शिकारी पक्षी: 25.0 ppm (लगभग 80 लाख गुना सांद्रता!)

प्रभाव: शिकारी पक्षियों में उच्च डीडीटी के कारण अंडों के छिलके पतले हो जाते हैं और सेने के दौरान माता-पिता के वजन से समय से पहले ही टूट जाते हैं, जिससे पक्षियों की संख्या तेजी से घट गई।

उदाहरण 7
पश्चिम मेदिनीपुर के अड़ाबाड़ी (Arabari) प्रयोग (1971-72) क्या था और इसे सामुदायिक वन संरक्षण का मील का पत्थर क्यों माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1971-72 में वनाधिकारी डॉ. अजीत कुमार बनर्जी ने महसूस किया कि ग्रामीणों के सहयोग के बिना उजड़ रहे साल वनों को नहीं बचाया जा सकता। उन्होंने 612 स्थानीय जनजातीय परिवारों के साथ वन सुरक्षा समितियाँ (FPC) बनाईं। समझौता: ग्रामीणों ने 1,270 हेक्टेयर साल वन को अवैध कटाई और आग से बचाया। बदले में सरकार ने उन्हें गैर-काष्ठ वनोत्पाद (पत्ते, सूखी लकड़ी) का अधिकार दिया और इमारती लकड़ी की बिक्री से प्राप्त कुल राजस्व का 25% सीधा हिस्सा ग्रामीणों को दिया। महत्व: अड़ाबाड़ी ने साबित कर दिया कि बंदूक और पुलिस के बजाय जनता की भागीदारी से वन अधिक सुरक्षित रहते हैं। यह पूरे भारत के संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) का आधार बना।
उदाहरण 8
पश्चिम बंगाल के 6 राष्ट्रीय उद्यानों के नाम लिखिए और प्रत्येक में संरक्षित एक प्रमुख संकटापन्न वन्यजीव का नाम बताइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान (दक्षिण 24 परगना) — रॉयल बंगाल टाइगर
  2. जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान (अलीपुरद्वार) — एक-सींग वाला गैंडा
  3. गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान (जलपाईगुड़ी) — भारतीय गौर (बायसन) व गैंडा
  4. सिंगालीला राष्ट्रीय उद्यान (दार्जिलिंग) — रेड पांडा
  5. नेओरा वैली राष्ट्रीय उद्यान (कालिम्पोंग) — रेड पांडा व क्लाउडेड लेपर्ड
  6. बक्सा राष्ट्रीय उद्यान (अलीपुरद्वार) — एशियाई हाथी व क्लाउडेड लेपर्ड

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पशुओं के सींगों को हिरण के सींग या गाय की हड्डियों की तरह आंतरिक हड्डीदार संरचना मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गैंडे के सींग में कोई हड्डी नहीं होती; यह पूरी तरह से संघनित केराटिन (Keratin) प्रोटीन से बना होता है, जो हमारे बालों और नाखूनों में पाया जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

रंगीन सूक्ष्म शैवाल के निष्कासन और खनिज कंकाल के विघटन में अंतर न समझ पाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सफेद रंग प्रवाल के पारदर्शी ऊतकों के नीचे स्थित कैल्सियम कार्बोनेट का कंकाल है, क्योंकि तापमान बढ़ने पर रंगीन ज़ूजैंथेली शैवाल बाहर निकल जाते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

खाद्य श्रृंखला के माध्यम से अप्रत्यक्ष रासायनिक विषाक्तता की भूमिका को न समझ पाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गिद्धों को किसी ने सीधा जहर नहीं दिया था। मवेशियों के इलाज के लिए प्रयुक्त दर्दनाशक दवा डिक्लोफेनाक मृत पशुओं के मांस के जरिए गिद्धों के शरीर में पहुँची और उनके गुर्दे फेल कर दिए।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जलीय रूप-रंग और तैरने की आदत देखकर स्तनपायी और मछली के वर्गीकरण को मिला देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गंगा डॉल्फ़िन एक गर्म रक्त वाला स्तनपायी (Mammal) जीव है। यह बच्चों को जन्म देती है, दूध पिलाती है और फेफड़ों से साँस लेने के लिए पानी की सतह पर आती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दोनों ही विधियों में जीव बचते हैं, इसलिए प्राकृतिक आवास और कृत्रिम केंद्र का अंतर भूल जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

स्व-स्थाने का अर्थ है जीव के अपने प्राकृतिक जंगल में संरक्षण (जैसे राष्ट्रीय उद्यान)। बाह्य-स्थाने का अर्थ है प्राकृतिक आवास से बाहर लाकर मानव देखरेख में कृत्रिम प्रजनन (जैसे चिड़ियाघर)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जल के सामान्य प्रदूषण और खाद्य श्रृंखला के पोषण स्तरों पर जैविक सांद्रण को एक समान मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जैव आवर्धन का अर्थ भोजन के माध्यम से निचले पोषण स्तर से उच्च मांसाहारी स्तर पर वसा में घुलनशील विष की सांद्रता का लाखों गुना बढ़ना है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दक्षिण बंगाल के सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान को भूल जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा और विश्वप्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान है, जो दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है।

जैव विविधता, पर्यावरणीय संकट एवं वन्यजीव संरक्षण — 4-चतुर्थांश संकल्पना मानचित्र

जैव विविधता, पर्यावरणीय संकट एवं संकटग्रस्त वन्यजीव संरक्षण — समग्र मानचित्र कक्षा 8 विज्ञान जैव विविधता एवं वन्यजीव संरक्षण 5 प्रमुख मॉड्यूल 1. जैव विविधता स्तर एवं वैश्विक पर्यावरण संकट 3 स्तर: आनुवंशिक, प्रजातीय एवं पारिस्थितिक विविधता ध्रुवीय संकट: बर्फ पिघलना, ध्रुवीय भालू व पेंगुइन आवास विनाश प्रवाल भित्ति: जूजैन्थेली विरंजन, महासागरीय अम्लीकरण परागणकर्ता: मधुमक्खी कॉलोनी विनाश (CCD) व कीटनाशक 2. क्षेत्रीय संकटापन्न वन्यजीव (बंगाल/भारत) रॉयल बंगाल टाइगर: सुंदरबन का शीर्ष शिकारी, प्रोजेक्ट टाइगर 1973 एक-सींग वाला गैंडा: जलदापाड़ा व गोरुमारा; सींग हेतु शिकार रेड पांडा व सोंस: सिंगालीला बाँस वितान; अंधी डॉल्फिन सोनार गिद्ध व कछुआ: डिक्लोफेनाक गाउट महाविनाश; ओलिव रिडले 3. संकट के कारक: HIPPO रूपरेखा आवास विनाश (H): वनों की कटाई व डुअर्स में रैखिक विखंडन आक्रामक प्रजातियाँ (I): गाजर घास, लैंटाना, अफ्रीकन मांगुर प्रदूषण (P): जैव-आवर्धन (DDT), माइक्रोप्लास्टिक, भारी धातुएं अति-दोहन (O): अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी, जलवायु परिवर्तन 4. संरक्षण पद्धतियाँ एवं संरक्षित क्षेत्र स्व-स्थाने अभयारण्य: प. बंगाल के 6 राष्ट्रीय उद्यान, सुंदरबन बायोस्फीयर बाह्य-स्थाने केंद्र: पद्मजा नायडू चिड़ियाघर (रेड पांडा), अलीपुर वन्यजीव कानून: WPA 1972, IUCN रेड लिस्ट (CR, EN, VU) संयुक्त वन प्रबंधन: अराबाड़ी JFM मॉडल 1971, पवित्र उपवन टारगेट एग्ज़ाम्स • पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा 8 विज्ञान शिक्षण ढाँचा

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
जैव विविधता के स्तर एवं हॉटस्पॉट: आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय विविधता (अल्फा, बीटा, गामा); नॉर्मन मायर्स के हॉटस्पॉट मानदंड: न्यूनतम 1,500 स्थानिक पादप और 70% आवास विनाश (भारत में 4 हॉटस्पॉट हैं)।
मुख्य बिंदु 2
ध्रुवीय एवं समुद्री संकट: ध्रुवीय बर्फ पिघलने से ध्रुवीय भालू और सम्राट पेंगुइन बेघर; घुली CO2 से महासागरीय अम्लीकरण और कवच क्षरण; 1-2°C तापमान वृद्धि से ज़ूजैंथेली निष्कासन व प्रवाल विरंजन; कीटनाशकों से मधुमक्खियों का CCD संकट।
मुख्य बिंदु 3
क्षेत्रीय संकटापन्न वन्यजीव: सुंदरबन का रॉयल बंगाल टाइगर (शीर्ष शिकारी, प्रोजेक्ट टाइगर 1973); डुआर्स का एक-सींग वाला गैंडा (केराटिन सींग का अवैध शिकार); सिंगालीला का रेड पांडा (बाँस आहार, दार्जिलिंग चिड़ियाघर में प्रजनन); गंगा की दृष्टिहीन डॉल्फ़िन (पराश्रव्य इकोलोकेशन)।
मुख्य बिंदु 4
गिद्धों का डिक्लोफेनाक विनाश: मवेशियों की दर्दनाशक दवा डिक्लोफेनाक से गुर्दे फेल व विसरल गाउट के कारण भारत में गिद्ध 99.9% समाप्त; 2006 में प्रतिबंध व मेलोक्सिकैम लागू; राजाभातखावा (बक्सा) में प्रजनन केंद्र।
मुख्य बिंदु 5
HIPPO रूपरेखा: आवास विनाश (H: डुआर्स में ट्रेनों से हाथियों की मौत), आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (I: पार्थेनियम, जलकुंभी, अफ्रीकी कैटफ़िश), रासायनिक प्रदूषण व डीडीटी का जैव आवर्धन (P), जनसंख्या विस्फोट (P), और अत्यधिक दोहन व अवैध शिकार (O)।
मुख्य बिंदु 6
IUCN रेड लिस्ट: विलोपन जोखिम के आधार पर रेड डाटा बुक का प्रकाशन—विलुप्त (EX), गंभीर रूप से संकटापन्न (CR), संकटापन्न (EN), और असुरक्षित (VU)।
मुख्य बिंदु 7
स्व-स्थाने संरक्षण एवं राष्ट्रीय उद्यान: प्राकृतिक आवास में संरक्षण; पश्चिम बंगाल के 6 राष्ट्रीय उद्यान—सुंदरबन, गोरुमारा, जलदापाड़ा, सिंगालीला, नेओरा वैली और बक्सा।
मुख्य बिंदु 8
वन्यजीव कानून एवं अड़ाबाड़ी JFM: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972; 1971-72 में पश्चिम मेदिनीपुर के अड़ाबाड़ी में डॉ. ए. के. बनर्जी के नेतृत्व में ग्रामीणों को 25% राजस्व हिस्सा देकर संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) का ऐतिहासिक जन्म।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
समुद्र के पानी का तापमान मात्र 1° से 2° सेल्सियस बढ़ने पर प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) कैसे होता है और प्रवाल के जीवन में ज़ूजैंथेली की क्या भूमिका है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ज़ूजैंथेली शैवाल प्रकाश संश्लेषण से प्रवाल को 90% ऊर्जा और रंग प्रदान करते हैं। अत्यधिक गर्मी में शैवाल जहरीले रसायन बनाते हैं, जिससे प्रवाल उन्हें निकाल देता है और सफेद कंकाल दिखने लगता है।
2
पशु चिकित्सा की दवा डिक्लोफेनाक भारतीय गिद्धों के महाविनाश का कारण कैसे बनी और इसके समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: डिक्लोफेनाक से उपचारित मृत मवेशियों का मांस खाने से गिद्धों के गुर्दे फेल होकर विसरल गाउट से मृत्यु हुई। सरकार ने 2006 में इस पर प्रतिबंध लगाकर मेलोक्सिकैम शुरू किया और प्रजनन केंद्र बनाए।
3
गंगा नदी की डॉल्फ़िन (Platanista gangetica) पूर्णतः अंधी होने के बावजूद नदी के जल में कैसे तैरती है और शिकार कैसे पकड़ती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: गादयुक्त गंदले पानी में विकास के कारण आँख का लेंस समाप्त हो चुका है; यह सिर से पराश्रव्य ध्वनि छोड़कर उसकी प्रतिध्वनि (इकोलोकेशन) सुनकर शिकार और मार्ग का पता लगाती है।
4
ई. ओ. विल्सन द्वारा प्रस्तावित HIPPO ढाँचे के प्रत्येक अक्षर का क्या अर्थ है? इसमें "H" का एक स्थानीय उदाहरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: HIPPO का अर्थ Habitat loss, Invasive species, Pollution, Population growth, Overexploitation है। "H" का स्थानीय उदाहरण डुआर्स के वनों में रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों से कटकर हाथियों की मौत है।
5
1971-72 में पश्चिम मेदिनीपुर के अड़ाबाड़ी में शुरू हुए संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) प्रयोग की मुख्य क्रांतिकारी विशेषता क्या थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वन संरक्षण में स्थानीय ग्रामीणों को साझीदार बनाकर उन्हें गैर-काष्ठ वनोत्पाद का अधिकार देना तथा इमारती लकड़ी की बिक्री से प्राप्त राजस्व का 25% हिस्सा ग्रामीणों को देना।
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