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WBB • कक्षा 8 • Science • अध्याय 2
अनुमानित समय: 50 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

पदार्थ की प्रकृति

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) द्वारा स्वीकृत कक्षा 8 के "पर्यावरण एवं विज्ञान" पाठ्यक्रम के द्वितीय अध्याय "पदार्थ की प्रकृति" (Nature of Matter) की इस व्यापक एवं प्रामाणिक अध्ययन संदर्शिका में आपका स्वागत है। रसायन विज्ञान और पदार्थ विज्ञान के प्रवेश द्वार के रूप में रचित इस अध्याय में पाँच प्रमुख स्तंभों का गहन विश्लेषण किया गया है: (1) पदार्थ का गतिज आणविक सिद्धांत, धातु-अधातु-उपधातु के विशिष्ट भौतिक लक्षण तथा रसायन विज्ञान के महत्वपूर्ण अपवाद (द्रव पारा व ब्रोमीन, मुलायम सोडियम, सुचालक ग्रेफाइट व कठोरतम हीरा); (2) भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन, मोमबत्ती का द्वैध परिवर्तन तथा मिश्रण पृथक्करण तकनीकें (ऊर्ध्वपातन, आसवन, प्रभाजी आसवन व पृथक्कारी कीप); (3) रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार—संयोजन, अपघटन, विस्थापन, द्विविस्थापन व अवक्षेपण तथा कॉपर सल्फेट में लोहे की कील का विज्ञान; (4) ऊष्माक्षेपी व ऊष्माशोषी ऊर्जा परिवर्तन, अकार्बनिक उत्प्रेरक (MnO₂) तथा जैव-उत्प्रेरक एंजाइम (लार का टायलिन व आमाशय का पेप्सिन); और (5) विलयन व विलेयता (S = w/W × 100), गैसों की विलेयता पर हेनरी का नियम व तापमान का प्रभाव, तथा वास्तविक विलयन, कोलॉइड व निलंबन की तुलना सहित टिंडल प्रभाव व ब्राउनी गति। 25 शिक्षण चरणों, उच्च-विभेदन SVG संकल्पना मानचित्र, 8 मूलभूत सूत्रों, हल किए गए उदाहरणों, परीक्षा सावधानियों तथा स्व-मूल्यांकन अभ्यासों से सुसज्जित यह संदर्शिका बोर्ड परीक्षा में सर्वोच्च अंक सुनिश्चित करती है।

🧪 रासायनिक रूपांतरण का चमत्कार: प्राणघातक विष और क्षारीय धातु मिलकर जीवनदायी नमक कैसे बनाते हैं?

पानी में डालते ही आग पकड़ने वाली विस्फोटक कोमल धातु सोडियम ($Na$) और सांस लेते ही दम घोंटने वाली विषैली पीली-हरी गैस क्लोरीन ($Cl_2$)—आपस में मिलकर हमारे दैनिक जीवन का परम आवश्यक स्वादिष्ट साधारण नमक ($NaCl$) कैसे बनाते हैं?

पेंसिल का मुलायम काला ग्रेफाइट और दुनिया का सबसे कठोर व कीमती हीरा—दोनों एक ही तत्व कार्बन से बने होने पर भी उनके व्यवहार में जमीन-आसमान का अंतर क्यों है? नीले कॉपर सल्फेट में लोहे की कील डालते ही पानी हरा क्यों हो जाता है, और नमक-पानी में लेजर टॉर्च की रोशनी न दिखने पर भी दूध में रोशनी का रास्ता क्यों जगमगा उठता है?

इन सभी रहस्यों के उत्तर पदार्थ की प्रकृति (Nature of Matter) के आणविक सिद्धांतों में छिपे हैं: परमाण्विक बंधन, रासायनिक रूपांतरण, ऊर्जा परिवर्तन तथा कोलॉइडी अवस्था। आइए पदार्थ के आंतरिक संसार को क्रमबद्ध रूप से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) द्वारा स्वीकृत कक्षा 8 के "पर्यावरण एवं विज्ञान" पाठ्यक्रम के द्वितीय अध्याय "पदार्थ की प्रकृति" (Nature of Matter) की इस व्यापक एवं प्रामाणिक अध्ययन संदर्शिका में आपका स्वागत है। रसायन विज्ञान और पदार्थ विज्ञान के प्रवेश द्वार के रूप में रचित इस अध्याय में पाँच प्रमुख स्तंभों का गहन विश्लेषण किया गया है: (1) पदार्थ का गतिज आणविक सिद्धांत, धातु-अधातु-उपधातु के विशिष्ट भौतिक लक्षण तथा रसायन विज्ञान के महत्वपूर्ण अपवाद (द्रव पारा व ब्रोमीन, मुलायम सोडियम, सुचालक ग्रेफाइट व कठोरतम हीरा); (2) भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन, मोमबत्ती का द्वैध परिवर्तन तथा मिश्रण पृथक्करण तकनीकें (ऊर्ध्वपातन, आसवन, प्रभाजी आसवन व पृथक्कारी कीप); (3) रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार—संयोजन, अपघटन, विस्थापन, द्विविस्थापन व अवक्षेपण तथा कॉपर सल्फेट में लोहे की कील का विज्ञान; (4) ऊष्माक्षेपी व ऊष्माशोषी ऊर्जा परिवर्तन, अकार्बनिक उत्प्रेरक (MnO₂) तथा जैव-उत्प्रेरक एंजाइम (लार का टायलिन व आमाशय का पेप्सिन); और (5) विलयन व विलेयता (S = w/W × 100), गैसों की विलेयता पर हेनरी का नियम व तापमान का प्रभाव, तथा वास्तविक विलयन, कोलॉइड व निलंबन की तुलना सहित टिंडल प्रभाव व ब्राउनी गति। 25 शिक्षण चरणों, उच्च-विभेदन SVG संकल्पना मानचित्र, 8 मूलभूत सूत्रों, हल किए गए उदाहरणों, परीक्षा सावधानियों तथा स्व-मूल्यांकन अभ्यासों से सुसज्जित यह संदर्शिका बोर्ड परीक्षा में सर्वोच्च अंक सुनिश्चित करती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • परमाणु, अणु तथा पदार्थ की कणिकीय संरचना की मूलभूत समझ।
  • पदार्थ की तीन अवस्थाएँ: ठोस, द्रव एवं गैसीय अवस्थाओं का रूपांतरण।
  • रासायनिक प्रतीकों, सूत्रों तथा द्रव्यमान संरक्षण के नियम का सामान्य ज्ञान।
  • शुद्ध पदार्थों एवं अपरिष्कृत मिश्रणों के बीच अंतर।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • गतिज सिद्धांत से पदार्थ की अवस्थाओं की व्याख्या करना तथा धातु, अधातु व उपधातु के अपवादों (Hg, Br₂, Na, ग्रेफाइट, हीरा) का विश्लेषण करना।
  • भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों में भेद करना तथा ऊर्ध्वपातन, आसवन व पृथक्कारी कीप द्वारा पृथक्करण योजना बनाना।
  • चार प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं (संयोजन, अपघटन, विस्थापन, द्विविस्थापन) की पहचान करना व संतुलित समीकरण लिखना।
  • ऊष्माक्षेपी व ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं में अंतर करना तथा अकार्बनिक उत्प्रेरकों व एंजाइमों (टायलिन, पेप्सिन) की क्रियाविधि समझाना।
  • विलेयता (S = w/W × 100) की गणना करना तथा विलेयता पर ताप और दाब (हेनरी का नियम) के प्रभाव का विश्लेषण करना।
  • वास्तविक विलयन, कोलॉइड व निलंबन के कणों के आकार की तुलना करना तथा टिंडल प्रभाव और ब्राउनी गति के कारणों को समझना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पदार्थ की भौतिक अवस्थाएँ, तत्व,...
2 2. भौतिक व रासायनिक परिवर्तन एवं मि...
3 3. रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार ए...
4 4. अभिक्रियाओं में ऊर्जा परिवर्तन ए...
5 5. विलयन, विलेयता एवं कोलॉइडी निकाय...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पदार्थ की भौतिक अवस्थाएँ, तत्व, धातु-अधातु एवं यौगिक (Elements & Compounds)

चरण 1: पदार्थ का गतिज आणविक सिद्धांत (Kinetic Molecular Theory)

ब्रह्मांड का प्रत्येक पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों—परमाणुओं और अणुओं से मिलकर बना है। पदार्थ की कोई भी भौतिक अवस्था (ठोस, द्रव अथवा गैस) दो परस्पर विरोधी कारकों के संतुलन पर निर्भर करती है:

  • अंतराणुक आकर्षण बल ($F_{\text{inter}}$): पास-पास स्थित कणों के बीच परस्पर आकर्षण बल जो उन्हें परस्पर बाँधे रखता है।
  • अंतराणुक स्थान एवं तापीय गतिज ऊर्जा ($r_{\text{inter}}$): तापमान के कारण कणों की कंपन व गतिशीलता जो उन्हें एक-दूसरे से दूर धकेलती है।
  • ठोस अवस्था: आकर्षण बल अधिकतम होता है, कण केवल अपनी निश्चित स्थितियों पर कंपन करते हैं; अतः निश्चित आकार व आयतन होता है।
  • द्रव अवस्था: आकर्षण बल मध्यम होता है; कण एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं, अतः निश्चित आयतन तो होता है पर निश्चित आकार नहीं होता।
  • गैसीय अवस्था: आकर्षण बल नगण्य होता है; कण अत्यधिक वेग से सभी दिशाओं में यादृच्छिक गति करते हैं और पात्र का पूरा आयतन घेर लेते हैं।
चरण 2: तत्वों का वर्गीकरण: धातु, अधातु एवं उपधातु

वह शुद्ध पदार्थ जिसे किसी भी सामान्य रासायनिक विधि द्वारा दो या दो से अधिक भिन्न गुणों वाले सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता, तत्व (Element) कहलाता है।

  • धातु (Metals): उच्च घनत्व, धात्विक चमक, विद्युत व ऊष्मा के सुचालक तथा इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (Cation) बनाने वाले तत्व (जैसे तांबा, लोहा, सोना)।
  • अधातु (Non-metals): भंगुर, चमकहीन, विद्युत व ऊष्मा के कुचालक तथा ऋणायन (Anion) बनाने वाले तत्व (जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर)।
  • उपधातु (Metalloids): वे तत्व जिनमें धातु और अधातु दोनों के उभयनिष्ठ गुणधर्म पाए जाते हैं। उदाहरण: आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), सिलिकॉन (Si) तथा जर्मेनियम (Ge)।
  • अक्रिय गैसें (Noble Gases): रासायनिक रूप से निष्क्रिय एकल-परमाणुक गैसें जिनके बाह्यतम कोश पूर्ण होते हैं: हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टॉन (Kr), जीनॉन (Xe) व रेडॉन (Rn)।
चरण 3: धातुओं के चार प्रमुख विशिष्ट भौतिक गुण

धातुओं के विशिष्ट यांत्रिक व भौतिक लक्षण:

  1. धात्विक चमक (Metallic Luster): मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्रकाश परावर्तन के कारण धातुओं की ताजी कटी सतह चमकदार दिखती है।
  2. आघातवर्धनीयता (Malleability): हथौड़े से पीटने पर बिना टूटे पतली चादर या पन्नी (Foil) में बदलने का गुण। सोना (Au) और चांदी (Ag) सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं।
  3. तन्यता (Ductility): खींचकर अत्यंत बारीक और लंबे तारों में परिवर्तित किए जाने की क्षमता। प्लैटिनम (Pt) और तांबा (Cu) अत्यधिक तन्य धातुएँ हैं (1 ग्राम प्लैटिनम से लगभग 2 किमी लंबा तार खींचा जा सकता है)।
  4. ध्वानिक गुण व सुचालकता (Sonority & Conductivity): चोट करने पर गूंजने वाली विशेष ध्वनि (स्कूल की घंटी में प्रयुक्त) तथा मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा तीव्र ऊष्मा व विद्युत संचरण (चांदी सर्वोत्तम चालक है, इसके बाद तांबा व एल्युमिनियम)।
चरण 4: रसायन विज्ञान के महत्वपूर्ण अपवाद (Scientific Anomalies)

परीक्षाओं के दृष्टिकोण से सामान्य नियमों के अपवाद अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं:

गुणधर्मसामान्य नियमविशिष्ट अपवाद
धातुओं की भौतिक अवस्थाकमरे के ताप पर सभी धातुएँ ठोस होती हैंपारा (Mercury, Hg) कमरे के ताप पर एकमात्र द्रव धातु है; गैलियम (Ga) और सीजियम (Cs) हथेली की गर्मी ($30^\circ\text{C}$) से पिघल जाते हैं।
अधातुओं की भौतिक अवस्थाअधातुएँ ठोस या गैस होती हैंब्रोमीन (Bromine, Br₂) कमरे के ताप पर एकमात्र द्रव अधातु है (लाल-भूरे रंग का)।
धातुओं की कठोरताधातुएँ अत्यंत कठोर व भारी होती हैंसोडियम (Na) और पोटैशियम (K) मक्खन की तरह मुलायम धातुएँ हैं, जिन्हें साधारण चाकू से आसानी से काटा जा सकता है और पानी पर तैरती हैं।
अधातुओं की विद्युत चालकताअधातुएँ विद्युत की कुचालक होती हैंग्रेफाइट और गैस कार्बन (कार्बन के अपररूप) मुक्त पाई-इलेक्ट्रॉनों के कारण विद्युत के उत्कृष्ट सुचालक हैं।
अधातुओं की ऊष्मा चालकता व कठोरताअधातुएँ मुलायम व ऊष्मा कुचालक होती हैंहीरा (कार्बन का अपररूप) प्राकृतिक रूप से ज्ञात सबसे कठोर पदार्थ है और तांबे से भी 5 गुना बेहतर ऊष्मा चालक है।
अधातुओं की चमकअधातुएँ चमकहीन व मलिन होती हैंआयोडीन (I₂) और ग्रेफाइट धातुओं जैसी जगमगाती चमक प्रदर्शित करते हैं।
चरण 5: यौगिक बनाम मिश्रण (स्थिर अनुपात का नियम)

रासायनिक संयोग और यांत्रिक मिश्रण के बीच मूलभूत अंतर:

  • यौगिक (Compound): दो या अधिक तत्व एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में रासायनिक रूप से परस्पर जुड़कर सर्वथा नए गुणों वाले पदार्थ का निर्माण करते हैं। उदाहरण: शुद्ध जल ($H_2O$) में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदैव $1:8$ ($2\text{ g } H : 16\text{ g } O$) रहता है।
  • नवीन गुणों की उत्पत्ति: यौगिक के गुण उसके घटक तत्वों के गुणों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। हाइड्रोजन स्वयं अत्यंत ज्वलनशील गैस है; ऑक्सीजन दहन में सहायक है। परंतु इनसे बना यौगिक—जल—आग बुझाने के काम आता है!
  • मिश्रण (Mixture): दो या अधिक पदार्थ किसी भी अनिश्चित अनुपात में भौतिक रूप से मिले होते हैं और कोई रासायनिक बंध नहीं बनता। घटक अपने मूल गुण बनाए रखते हैं और उन्हें साधारण भौतिक विधियों (जैसे चुंबक द्वारा लोहे के बुरादे को गंधक से अलग करना) से पृथक किया जा सकता है।

2. भौतिक व रासायनिक परिवर्तन एवं मिश्रणों का पृथक्करण (Changes & Separation)

चरण 6: भौतिक परिवर्तन बनाम रासायनिक परिवर्तन

परिवर्तनों का तुलनात्मक वैज्ञानिक विश्लेषण:

तुलना का आधारभौतिक परिवर्तन (Physical Change)रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)
नए पदार्थ का निर्माणकोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता; केवल अवस्था, रंग या आकार बदलता हैसर्वथा नए रासायनिक संगठन एवं गुणों वाले पदार्थ बनते हैं
उत्क्रमणीयताअस्थायी तथा परिस्थितियों को पलटने पर उत्क्रमणीय (Reversible)स्थायी तथा सामान्य भौतिक विधियों द्वारा अनुत्क्रमणीय (Irreversible)
द्रव्यमान परिवर्तनमूल पदार्थ का कुल द्रव्यमान सर्वथा अपरिवर्तित रहता हैअभिकारक नए उत्पादों में बदल जाते हैं, यद्यपि कुल द्रव्यमान संरक्षित रहता है
ऊर्जा विनिमयबहुत कम ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है (अवस्था परिवर्तन की गुप्त ऊष्मा)बड़ी मात्रा में ऊष्मा, प्रकाश अथवा विद्युत ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण होता है
प्रमुख उदाहरणबर्फ का पिघलना, जल का उबलना, जल में चीनी का घुलना, बल्ब के फिलामेंट का जलनालोहे पर जंग लगना, दूध का दही बनना, मैग्नीशियम फीते का जलना, कागज का दहन
चरण 7: जलती मोमबत्ती: भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों का संगम

एक जलती हुई मोमबत्ती में भौतिक और रासायनिक दोनों परिवर्तन एक साथ होते हैं:

  • भौतिक परिवर्तन: ज्वाला की ऊष्मा से ठोस मोम पिघलकर द्रव मोम बन जाता है। द्रव मोम नीचे बहकर ठंडा होने पर पुनः ठोस मोम में बदल जाता है। इसके रासायनिक हाइड्रोकार्बन सूत्र में कोई बदलाव नहीं होता।
  • रासायनिक परिवर्तन: बत्ती के माध्यम से केशिका क्रिया द्वारा द्रव मोम ऊपर चढ़कर वाष्पीकृत होता है और वायु की ऑक्सीजन के साथ जलकर कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), जलवाष्प ($H_2O$), ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करता है। जले हुए मोम से दोबारा मोम प्राप्त नहीं किया जा सकता।
चरण 8: ऊर्ध्वपातन (Sublimation) एवं वाष्पशील ठोस

ऊर्ध्वपातन: वह प्रक्रिया जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रव में बदले सीधे वाष्प में बदल जाता है और उस वाष्प को ठंडा करने पर पुनः सीधे ठोस में परिवर्तित हो जाता है:

$$\mathbf{\text{ठोस पदार्थ} \xrightleftharpoons[\text{शीतलन}]{\text{तापन}} \text{वाष्प अवस्था}}$$

कक्षा 8 के पाठ्यक्रम के चार प्रमुख ऊर्ध्वपातित होने वाले पदार्थ:

  1. कपूर (Camphor)
  2. आयोडीन क्रिस्टल (Iodine, $I_2$) — गर्म करने पर सुंदर गहरे बैंगनी रंग की वाष्प निकलती है।
  3. नैफ्थलीन (Naphthalene) — कपड़ों में कीड़े मारने के लिए रखी जाने वाली गोलियाँ।
  4. नौसादर या अमोनियम क्लोराइड ($NH_4Cl$)

पृथक्करण अनुप्रयोग: नमक ($NaCl$) और नौसादर ($NH_4Cl$) के मिश्रण को चीनी मिट्टी की प्याली में उल्टी कीप रखकर गर्म करने पर नौसादर वाष्पीकृत होकर कीप की ठंडी गर्दन पर ठोस पपड़ी के रूप में जम जाता है और नमक प्याली में शेष रह जाता है।

चरण 9: साधारण आसवन एवं प्रभाजी आसवन

क्वथनांक के अंतर के आधार पर द्रवों का पृथक्करण:

  • साधारण आसवन (Simple Distillation): वाष्पीकरण और संघनन की संयुक्त प्रक्रिया (आसवन = वाष्पीकरण + संघनन)। जब दो घुलनशील द्रवों के क्वथनांकों में $25^\circ\text{C}$ से अधिक का अंतर हो (जैसे एसीटोन $56^\circ\text{C}$ और जल $100^\circ\text{C}$), या लवणीय जल से शुद्ध आसुत जल प्राप्त करना हो।
  • प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation): जब दो या अधिक घुलनशील द्रवों के क्वथनांकों में $25^\circ\text{C}$ से कम का अंतर हो (जैसे एथिल अल्कोहल $78.3^\circ\text{C}$ और जल $100^\circ\text{C}$, अथवा कच्चे पेट्रोलियम से पेट्रोल, डीजल और केरोसिन को अलग करना), तब कांच के मोतियों से भरे एक लंबे प्रभाजी स्तंभ (Fractionating Column) का उपयोग किया जाता है।
चरण 10: पृथक्कारी कीप द्वारा अमिश्रणीय द्रवों का पृथक्करण

जो दो द्रव परस्पर नहीं घुलते (जैसे सरसों का तेल या केरोसिन और पानी), उन्हें अमिश्रणीय द्रव (Immiscible Liquids) कहते हैं। घनत्व के अंतर के आधार पर इन्हें सरलता से पृथक किया जाता है:

  • अधिक घनत्व वाला भारी द्रव (जल, घनत्व $1.0\text{ g/cm}^3$) नीचे की परत में रहता है।
  • कम घनत्व वाला हल्का द्रव (तेल, घनत्व $\approx 0.8\text{ g/cm}^3$) ऊपर की परत में तैरता है।
  • पृथक्कारी कीप (Separating Funnel): मिश्रण को स्टॉपकॉक वाली नाशपाती के आकार की कांच की कीप में शांत छोड़ दिया जाता है। दोनों परतें अलग होने पर नीचे का स्टॉपकॉक खोलकर पूरा पानी नीचे बीकर में निकाल लिया जाता है और तेल-पानी का जोड़ आते ही कॉक बंद कर दिया जाता है।

3. रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार एवं समीकरण (Chemical Reactions)

चरण 11: प्रत्यक्ष संयोजन या संश्लेषण अभिक्रिया (Direct Combination)

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक तत्व अथवा सरल यौगिक आपस में सीधे जुड़कर केवल एक ही नया उत्पाद बनाते हैं:

$$\mathbf{A + B \longrightarrow AB}$$

  • मैग्नीशियम फीते का दहन: चमकदार श्वेत ज्वाला के साथ जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड का सफेद चूर्ण बनाता है:
    $$2Mg + O_2 \longrightarrow 2MgO$$
  • कार्बन का दहन: कोयला हवा में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाता है:
    $$C + O_2 \longrightarrow CO_2$$
  • अनबुझे चूने में जल का योग: कली चूना जल से तीव्र क्रिया कर बुझा चूना बनाता है:
    $$CaO + H_2O \longrightarrow Ca(OH)_2$$
चरण 12: अपघटन या वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

वह अभिक्रिया जिसमें एक एकल यौगिक ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा के प्रभाव से टूटकर दो या दो से अधिक सरल तत्वों अथवा यौगिकों में विभाजित हो जाता है:

$$\mathbf{AB \xrightarrow{\text{ऊर्जा}} A + B}$$

  • पोटैशियम क्लोरेट का तापीय अपघटन: $MnO_2$ उत्प्रेरक की उपस्थिति में गर्म करने पर ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है:
    $$2KClO_3 \xrightarrow{\Delta, MnO_2} 2KCl + 3O_2 \uparrow$$
  • चूना पत्थर का अपघटन: तीव्र ऊष्मा पर चूना पत्थर टूटकर कली चूना और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है:
    $$CaCO_3 \xrightarrow{\Delta \approx 1000^\circ\text{C}} CaO + CO_2 \uparrow$$
  • जल का विद्युत अपघटन: अम्लीय जल से विद्युत गुजारने पर $2:1$ आयतन अनुपात में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन प्राप्त होते हैं:
    $$2H_2O \xrightarrow{\text{विद्युत}} 2H_2 \uparrow (\text{कैथोड}) + O_2 \uparrow (\text{एनोड})$$
चरण 13: विस्थापन अभिक्रिया एवं सक्रियता श्रेणी (Displacement Reaction)

वह अभिक्रिया जिसमें किसी यौगिक के एक तत्व को कोई अधिक सक्रिय तत्व विस्थापित कर स्वयं उसका स्थान ले लेता है:

$$\mathbf{A + BC \longrightarrow AC + B}$$

  • कॉपर सल्फेट विलयन में लोहे की कील: नीले रंग के कॉपर सल्फेट ($CuSO_4$) विलयन में लोहे की कील डालने पर विलयन का नीला रंग हल्के हरे रंग (फेरस सल्फेट $FeSO_4$) में बदल जाता है और कील पर तांबे ($Cu$) की लाल-भूरी परत जम जाती है:
    $$Fe + CuSO_4 \longrightarrow FeSO_4 + Cu \downarrow$$
  • जिंक और तनु सल्फ्यूरिक अम्ल: जिंक हाइड्रोजन को विस्थापित कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है:
    $$Zn + H_2SO_4 \longrightarrow ZnSO_4 + H_2 \uparrow$$
  • सक्रियता श्रेणी: विद्युत-रासायनिक श्रेणी में लोहा और जिंक तांबे व हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हैं ($Zn > Fe > H > Cu$), अतः वे कॉपर को सरलता से विस्थापित कर देते हैं।
चरण 14: द्विविस्थापन एवं अवक्षेपण अभिक्रिया (Double Displacement & Precipitation)

वह अभिक्रिया जिसमें दो यौगिक जलीय विलयन में अपने आयनों या मूलकों का परस्पर विनिमय करके दो नए यौगिक बनाते हैं। यदि बना कोई एक यौगिक अघुलनशील ठोस के रूप में नीचे बैठ जाए, तो उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं:

$$\mathbf{AB + CD \longrightarrow AD + CB \downarrow}$$

  • सिल्वर नाइट्रेट और सोडियम क्लोराइड: दोनों रंगहीन विलयनों को मिलाने पर तुरंत सिल्वर क्लोराइड का दही जैसा सफेद अवक्षेप बनता है:
    $$AgNO_3 + NaCl \longrightarrow AgCl \downarrow (\text{सफेद अवक्षेप}) + NaNO_3$$
  • बेरियम क्लोराइड और सल्फ्यूरिक अम्ल: बेरियम सल्फेट का भारी सफेद अवक्षेप बनता है:
    $$BaCl_2 + H_2SO_4 \longrightarrow BaSO_4 \downarrow (\text{सफेद}) + 2HCl$$
  • लेड नाइट्रेट और पोटैशियम आयोडाइड: लेड आयोडाइड का चमकीला पीला अवक्षेप बनता है:
    $$Pb(NO_3)_2 + 2KI \longrightarrow PbI_2 \downarrow (\text{पीला}) + 2KNO_3$$
चरण 15: उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction)

द्विविस्थापन का एक विशेष प्रकार जिसमें अम्ल और क्षार परस्पर क्रिया करके एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर लवण और जल बनाते हैं तथा ऊष्मा मुक्त करते हैं:

$$\mathbf{\text{अम्ल} + \text{क्षार} \longrightarrow \text{लवण} + \text{जल} + \text{उदासीनीकरण ऊष्मा}}$$

$$HCl + NaOH \longrightarrow NaCl + H_2O$$

आयनिक रूप में: अम्ल के $H^+$ आयन और क्षार के $OH^-$ आयन मिलकर जल का अणु बनाते हैं: $\mathbf{H^+ + OH^- \longrightarrow H_2O}$।

4. अभिक्रियाओं में ऊर्जा परिवर्तन एवं उत्प्रेरण (Energy Changes & Catalysis)

चरण 16: ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction)

वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनके संपन्न होने पर रासायनिक ऊर्जा ऊष्मा ऊर्जा में बदलकर वातावरण में ऊष्मा मुक्त होती है (एंथैल्पी परिवर्तन $\Delta H < 0$), उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहते हैं। इससे बर्तन का तापमान बढ़ जाता है।

  • अनबुझे चूने पर पानी डालना: कली चूने में जल डालने पर पानी खौलने लगता है और अत्यधिक ऊष्मा निकलती है:
    $$CaO + H_2O \longrightarrow Ca(OH)_2 + \text{प्रचुर ऊष्मा}$$
  • ईंधनों का दहन: प्राकृतिक गैस (मीथेन) का दहन:
    $$CH_4 + 2O_2 \longrightarrow CO_2 + 2H_2O + \text{ऊष्मा}$$
  • श्वसन क्रिया: जीवित कोशिकाओं में ग्लूकोज का मंद दहन जिससे एटीपी (ATP) ऊर्जा बनती है:
    $$C_6H_{12}O_6 + 6O_2 \longrightarrow 6CO_2 + 6H_2O + \text{ऊर्जा}$$
चरण 17: ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction)

वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जो केवल बाहर से ऊष्मा ऊर्जा अवशोषित करके ही संपन्न होती हैं (एंथैल्पी परिवर्तन $\Delta H > 0$), उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहते हैं। इससे अभिक्रिया मिश्रण ठंडा हो जाता है।

  • नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण: तड़ित (बिजली) के अत्यधिक ताप पर नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाते हैं:
    $$N_2 + O_2 + \text{ऊष्मा} \longrightarrow 2NO$$
  • पानी में नौसादर या यूरिया का घुलना: जल में ठोस अमोनियम क्लोराइड ($NH_4Cl$) घोलने पर परखनली बर्फ जैसी ठंडी हो जाती है क्योंकि यह प्रक्रिया विलयन की ऊष्मा अवशोषित करती है।
  • प्रकाश-संश्लेषण: हरे पौधे सौर ऊर्जा अवशोषित कर भोजन बनाते हैं:
    $$6CO_2 + 6H_2O + \text{सौर ऊर्जा} \xrightarrow{\text{क्लोरोफिल}} C_6H_{12}O_6 + 6O_2$$
चरण 18: उत्प्रेरक एवं उत्प्रेरण की परिभाषा व प्रकार

उत्प्रेरक (Catalyst): वह बाह्य पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया में उपस्थित रहकर अभिक्रिया के वेग को परिवर्तित (तेज या धीमा) कर देता है, परंतु अभिक्रिया के अंत में अपने द्रव्यमान और रासायनिक संगठन में पूरी तरह अपरिवर्तित रहता है, उसे उत्प्रेरक कहते हैं।

  • धनात्मक उत्प्रेरक (Positive Catalyst): जो सक्रियण ऊर्जा को घटाकर अभिक्रिया का वेग बढ़ा देता है। उदाहरण: $KClO_3$ से ऑक्सीजन बनाते समय मैंगनीज डाइऑक्साइड ($MnO_2$) अभिक्रिया का ताप $650^\circ\text{C}$ से घटाकर $250^\circ\text{C}$ कर देता है।
  • ऋणात्मक उत्प्रेरक या संदमक (Negative Catalyst / Inhibitor): जो अभिक्रिया के वेग को धीमा कर देता है। उदाहरण: हाइड्रोजन पेरोक्साइड ($H_2O_2$) के स्वतः अपघटन को रोकने के लिए थोड़ा फॉस्फोरिक अम्ल मिलाया जाता है।
  • उत्प्रेरक विष: जो उत्प्रेरक की सक्रियता को नष्ट कर देता है (जैसे प्लैटिनम के लिए आर्सेनिक)।
चरण 19: उत्प्रेरक के प्रमुख वैज्ञानिक लक्षण

उत्प्रेरक के अनिवार्य नियम:

  1. द्रव्यमान व रासायनिक संगठन की स्थिरता: अभिक्रिया के अंत में उत्प्रेरक का कुल द्रव्यमान और रासायनिक सूत्र सर्वथा अपरिवर्तित रहता है (यद्यपि उसका भौतिक रूप बदल सकता है)।
  2. सूक्ष्म मात्रा ही पर्याप्त: अभिकारकों की विशाल मात्रा के लिए उत्प्रेरक की अत्यंत सूक्ष्म मात्रा ही पर्याप्त होती है।
  3. अभिक्रिया प्रारंभ करने में असमर्थ: उत्प्रेरक किसी ऐसी अभिक्रिया को शुरू नहीं कर सकता जो स्वतः संभव न हो ($\Delta G > 0$); यह केवल गति को नियंत्रित करता है।
  4. विशिष्टता (Specificity): प्रत्येक रासायनिक अभिक्रिया के लिए एक निश्चित उत्प्रेरक ही कार्य करता है।
चरण 20: जैव-उत्प्रेरक या एंजाइम (Biocatalysts / Enzymes)

एंजाइम (Enzyme): जीवित कोशिकाओं द्वारा निर्मित जटिल प्रोटीन अणु जो शरीर के सामान्य ताप ($37^\circ\text{C}$) पर जैव-रासायनिक उपापचयी क्रियाओं को अत्यधिक तीव्र गति से संपन्न करते हैं, जैव-उत्प्रेरक या एंजाइम कहलाते हैं।

  • टायलिन (Ptyalin या लार-एमाइलेज): मानव लार में उपस्थित एंजाइम; भोजन चबाते समय अघुलनशील स्टार्च को मीठी घुलनशील माल्टोज शर्करा में बदल देता है।
  • पेप्सिन (Pepsin): आमाशय रस में उपस्थित एंजाइम; हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के माध्यम में जटिल प्रोटीनों को पेप्टोन में तोड़ता है।
  • यीस्ट के एंजाइम (जाइमेज व इन्वर्टेज): ग्लूकोज को किण्वन द्वारा अल्कोहल व कार्बन डाइऑक्साइड में बदलते हैं (बेकरी उद्योग में प्रयुक्त)।

5. विलयन, विलेयता एवं कोलॉइडी निकाय (Solutions & Colloids)

चरण 21: विलयन के घटक एवं सार्वत्रिक विलायक जल

दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण जिसमें घटकों का सापेक्ष अनुपात एक निश्चित सीमा तक बदला जा सके, विलयन (Solution) कहलाता है:

$$\mathbf{\text{विलयन (Solution)} = \text{विलेय (Solute)} + \text{विलायक (Solvent)}}$$

  • विलेय (Solute): विलयन में जो घटक कम मात्रा में होता है और घुलता है (जैसे नमक, चीनी)।
  • विलायक (Solvent): जो घटक अधिक मात्रा में होता है और विलयन की भौतिक अवस्था निर्धारित करता है (जैसे जल)।
  • जल सार्वत्रिक विलायक क्यों है? जल का परावैद्युतांक (Dielectric Constant $\epsilon \approx 80$) अत्यधिक उच्च होता है और इसकी ध्रुवीय संरचना ($H_2O$) आयनिक यौगिकों के आकर्षण को कमजोर कर उन्हें आसानी से घोल लेती है।
चरण 22: संतृप्त, असंतृप्त एवं अतिसंतृप्त विलयन

निश्चित ताप पर विलेय की मात्रा के आधार पर विलयन के तीन प्रकार:

  • असंतृप्त विलयन (Unsaturated): जिस विलयन में उसी ताप पर और अधिक विलेय घोला जा सके।
  • संतृप्त विलयन (Saturated): निश्चित ताप पर जब विलायक में विलेय की अधिकतम संभव मात्रा घुल चुकी हो और घुले व अघुले विलेय में साम्यावस्था हो।
  • अतिसंतृप्त विलयन (Supersaturated): एक अत्यंत अस्थिर अवस्था जिसमें संतृप्त अवस्था से भी अधिक विलेय घुला होता है (विलेय का एक छोटा सा कण डालते ही अतिरिक्त विलेय तुरंत क्रिस्टलीकृत हो जाता है)।
चरण 23: विलेयता की परिभाषा एवं ताप का प्रभाव

विलेयता (Solubility, $S$): किसी निश्चित ताप पर 100 ग्राम विलायक को संतृप्त करने के लिए विलेय के जितने ग्राम की आवश्यकता होती है, वह संख्या उस ताप पर उस विलेय की विलेयता कहलाती है।

$$\mathbf{S = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान } (w)}{\text{विलायक का द्रव्यमान } (W)} \times 100}$$

मात्रकहीन राशि: विलेयता दो समान द्रव्यमानों का अनुपात होने के कारण इसका कोई मात्रक नहीं होता।

ठोसों की विलेयता पर ताप का प्रभाव:

  • अधिकांश ठोसों की विलेयता ताप बढ़ने पर बढ़ती है (जैसे पोटैशियम नाइट्रेट $KNO_3$, कॉपर सल्फेट)।
  • कुछ पदार्थों की विलेयता ताप बढ़ने पर घटती है (जैसे बुझा चूना $Ca(OH)_2$)।
  • साधारण नमक ($NaCl$) की विलेयता ताप परिवर्तन से लगभग अप्रभावित रहती है।
  • ग्लोबर लवण ($Na_2SO_4 \cdot 10H_2O$) की विलेयता $32.4^\circ\text{C}$ तक बढ़ती है और फिर घटने लगती है।
चरण 24: द्रवों में गैसों की विलेयता एवं हेनरी का नियम

द्रवों में गैसों के घुलने के निश्चित नियम:

  • दाब का प्रभाव (हेनरी का नियम): स्थिर ताप पर किसी द्रव में गैस की विलेयता उसके ऊपर आरोपित आंशिक दाब के समानुपाती होती है ($C = k \cdot P$)।
    अनुप्रयोग: सोडा वाटर या शीतल पेय की बोतलों में 3-4 गुना उच्च दाब पर $CO_2$ गैस भरी जाती है। ढक्कन खोलते ही दाब घटकर 1 वायुमंडल हो जाता है, जिससे अत्यधिक घुली गैस सनसनाहट के साथ झाग बनकर बाहर निकलती है।
  • तापमान का प्रभाव: द्रवों में गैसों की विलेयता ताप बढ़ने पर सदैव तेजी से घटती है। पानी को उबालने पर उसमें घुली सारी ऑक्सीजन और वायु निकल जाती है। अतः उबला ठंडा पानी स्वादहीन लगता है और ऐसे पानी में रखने पर ऑक्सीजन की कमी से मछलियाँ मर जाती हैं!
चरण 25: वास्तविक विलयन, कोलॉइड, निलंबन एवं टिंडल प्रभाव

कणों के आकार के आधार पर मिश्रणों का वर्गीकरण:

गुणधर्मवास्तविक विलयन (True Solution)कोलॉइड (Colloid)निलंबन (Suspension)
कणों का व्यास$< 10^{-8}\text{ cm}$ ($< 0.1\text{ nm}$)$10^{-7}\text{ cm} - 10^{-5}\text{ cm}$ ($1 - 100\text{ nm}$)$> 10^{-5}\text{ cm}$ ($> 100\text{ nm}$)
प्रकृति व समांगतापारदर्शी व समांगीधुंधला व विषमांगी (परिक्षिप्त प्रावस्था + परिक्षेपण माध्यम)अपारदर्शी व विषमांगी
स्थिरताअत्यधिक स्थिर; कण कभी नीचे नहीं बैठतेब्राउनी गति व आवेश के कारण स्थिरअस्थिर; शांत रखने पर कण नीचे बैठ जाते हैं
टिंडल प्रभावप्रदर्शित नहीं करतास्पष्ट प्रदर्शित करता हैकण बड़े होने से प्रकाश को रोकते हैं
प्रमुख उदाहरणजल में नमक या चीनी का घोलदूध, रक्त, गोंद, कोहरा, धुआं, स्याहीगंदला पानी, जल में चाक का चूर्ण

टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect): कोलॉइडी विलयन से तीव्र प्रकाश पुंज गुजारने पर कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन होता है, जिससे प्रकाश का मार्ग एक चमकदार शंकु के रूप में दिखाई देने लगता है। घने जंगल के वितान से छनकर आती धूप या सिनेमा हॉल के प्रोजेक्टर की रोशनी का चमकीला रास्ता इसका प्राकृतिक उदाहरण है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

विलेयता का गणितीय सूत्र
S = {w}{W} × 100 = {विलेय का द्रव्यमान (g)}{विलायक का द्रव्यमान (g)} × 100
100 ग्राम विलायक को संतृप्त करने हेतु आवश्यक विलेय का द्रव्यमान। यह मात्रकहीन है।
संयोजन या संश्लेषण अभिक्रिया
A + B AB (जैसे: 2Mg + O_2 → 2MgO)
दो या अधिक घटक सीधे जुड़कर एक नया एकल यौगिक बनाते हैं।
पोटैशियम क्लोरेट का तापीय अपघटन
$$2KClO_3 \xrightarrow{\Delta, MnO_2} 2KCl + 3O_2 \uparrow$$
मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂) उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऑक्सीजन का निर्माण।
एकल विस्थापन अभिक्रिया समीकरण
$$Fe + CuSO_4 \longrightarrow FeSO_4 + Cu \downarrow$$
लोहा कॉपर से अधिक सक्रिय होने के कारण तांबे को विस्थापित करता है।
द्विविस्थापन एवं अवक्षेपण अभिक्रिया
AgNO_3 + NaCl AgCl (सफेद) + NaNO_3
आयनों के विनिमय द्वारा अघुलनशील सिल्वर क्लोराइड का अवक्षेप बनता है।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया समीकरण
CaO + H_2O Ca(OH)_2 + ऊष्मा ( H < 0)
अनबुझे चूने में जल मिलाने पर अत्यधिक ऊष्मा ऊर्जा मुक्त होती है।
ऊष्माशोषी अभिक्रिया समीकरण
N_2 + O_2 + ऊष्मा 2NO ( H > 0)
बिजली चमकने के उच्च ताप पर नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से नाइट्रिक ऑक्साइड बनना।
गैसों की विलेयता में हेनरी का नियम
C = k · P (विलेयता आरोपित दाब)
दाब बढ़ने पर द्रव में गैस की विलेयता समानुपाती रूप से बढ़ती है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
30°C पर 50 ग्राम जल में 15 ग्राम कॉपर सल्फेट घोलकर एक संतृप्त विलयन बनाया गया। 30°C पर कॉपर सल्फेट की विलेयता ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

दिया है:
विलेय (कॉपर सल्फेट) का द्रव्यमान $w = 15\text{ ग्राम}$।
विलायक (जल) का द्रव्यमान $W = 50\text{ ग्राम}$।
तापमान $T = 30^\circ\text{C}$।

सूत्र:
$$\text{विलेयता } (S) = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान } (w)}{\text{विलायक का द्रव्यमान } (W)} \times 100$$

$$S = \frac{15}{50} \times 100 = 15 \times 2 = \mathbf{30}$$

उत्तर: 30°C पर कॉपर सल्फेट की विलेयता 30 है (विलेयता दो समान द्रव्यमानों का अनुपात होने के कारण इसका कोई मात्रक नहीं होता)।

उदाहरण 2
नीले रंग के कॉपर सल्फेट विलयन में लोहे की साफ कील 30 मिनट तक डुबोकर रखने पर क्या-क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं? संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए और अभिक्रिया का प्रकार बताइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अवलोकन:

  1. कॉपर सल्फेट ($CuSO_4$) विलयन का गहरा नीला रंग धीरे-धीरे उड़कर हल्के हरे रंग (फेरस सल्फेट $FeSO_4$) में बदल जाता है।
  2. लोहे की कील की सतह पर तांबे ($Cu$) की लाल-भूरी स्पंजी परत जम जाती है।

रासायनिक समीकरण:
$$\mathbf{Fe (s) + CuSO_4 (aq) \longrightarrow FeSO_4 (aq) + Cu (s) \downarrow}$$

अभिक्रिया का प्रकार: यह एक विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) है। विद्युत-रासायनिक श्रेणी में लोहा ($Fe$) तांबे ($Cu$) से ऊपर स्थित है, अतः लोहा अधिक सक्रिय होने के कारण कॉपर सल्फेट से कॉपर को विस्थापित कर स्वयं फेरस सल्फेट बना लेता है।

उदाहरण 3
निम्नलिखित परिवर्तनों को भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों में वर्गीकृत कीजिए तथा संक्षेप में कारण स्पष्ट कीजिए: (क) मोम का पिघलना, (ख) मोम का जलना, (ग) लोहे पर जंग लगना, (घ) जल में नमक का घुलना, (ङ) दूध का फटना (दही बनना)।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

वर्गीकरण एवं कारण:

  • (क) मोम का पिघलना: भौतिक परिवर्तन। मोम केवल ठोस से द्रव अवस्था में बदलता है, कोई नया पदार्थ नहीं बनता और ठंडा करने पर पुनः ठोस मोम बन जाता है।
  • (ख) मोम का जलना: रासायनिक परिवर्तन। मोम ऑक्सीजन से जलकर कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प बनाता है, जिससे दोबारा मोम नहीं बनाया जा सकता।
  • (ग) लोहे पर जंग लगना: रासायनिक परिवर्तन। लोहा नमी और ऑक्सीजन से क्रिया कर नया पदार्थ हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3 \cdot xH_2O$) बनाता है।
  • (घ) जल में नमक का घुलना: भौतिक परिवर्तन। नमक के आयन पानी में बिखर जाते हैं; पानी को वाष्पीकृत करने पर 100% शुद्ध नमक पुनः प्राप्त हो जाता है।
  • (ङ) दूध का फटना: रासायनिक परिवर्तन। जीवाणुओं द्वारा लैक्टोज लैक्टिक अम्ल में बदल जाता है जिससे प्रोटीन थक्के में बदल जाता है; यह अनुत्क्रमणीय है।
उदाहरण 4
साधारण नमक (NaCl), नौसादर (NH₄Cl) और बालू के मिश्रण से घटकों को आप प्रयोगशाला में किस प्रकार अलग करेंगे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

क्रमबद्ध पृथक्करण विधि:

  1. चरण 1: ऊर्ध्वपातन द्वारा नौसादर पृथक करना:
    मिश्रण को चीनी मिट्टी की प्याली में रखकर ऊपर उल्टी कांच की कीप ढक दी जाती है तथा कीप की नली में रूई लगा दी जाती है। प्याली को बर्नर से हल्का गर्म करने पर नौसादर ($NH_4Cl$) ऊर्ध्वपातित होकर वाष्प बनता है और कीप की ठंडी दीवारों पर ठोस सफेद पपड़ी के रूप में जम जाता है। कीप हटाकर शुद्ध नौसादर अलग कर लिया जाता है। प्याली में नमक और बालू शेष बचते हैं।
  2. चरण 2: जल में घोलना और निस्पंदन (Filtration) द्वारा बालू अलग करना:
    प्याली के अवशेष में पानी डालकर अच्छी तरह हिलाया जाता है। नमक पानी में पूरी तरह घुल जाता है, जबकि बालू अघुलनशील रहता है। मिश्रण को फिल्टर पेपर लगी कीप से छानने पर बालू फिल्टर पेपर पर अवशेष (Residue) के रूप में बच जाता है।
  3. चरण 3: वाष्पीकरण द्वारा नमक प्राप्त करना:
    नीचे एकत्रित स्वच्छ विलयन को गर्म करके पूरा पानी भाप बनाकर उड़ा दिया जाता है। प्याली की तली में शुद्ध सफेद नमक के क्रिस्टल प्राप्त हो जाते हैं।
उदाहरण 5
उबला हुआ ठंडा पानी पीने में स्वादहीन क्यों लगता है और ऐसे पानी में रखने पर एक्वेरियम की मछलियाँ क्यों मर जाती हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

गैस विलेयता के आधार पर वैज्ञानिक कारण:

  • प्राकृतिक जल में वायुमंडलीय गैसें—विशेषकर ऑक्सीजन ($O_2$) और कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) घुली होती हैं, जो पानी को ताजगी और स्वाद प्रदान करती हैं।
  • द्रव में गैस की विलेयता ताप बढ़ने पर तेजी से घटती है। जब पानी को $100^\circ\text{C}$ पर उबाला जाता है, तो उसमें घुली सारी ऑक्सीजन और वायु बुलबुलों के रूप में बाहर निकल जाती है।
  • अतः उबले हुए पानी को ठंडा करने पर भी उसमें घुली गैसें न होने के कारण वह स्वादहीन और बेमजा लगता है।
  • एक्वेरियम की मछलियाँ गलफड़ों द्वारा जल में घुली ऑक्सीजन ($DO$) से सांस लेती हैं। उबले ठंडे पानी में घुली ऑक्सीजन शून्य होने के कारण मछलियाँ सांस नहीं ले पातीं और दम घुटने से मर जाती हैं।
उदाहरण 6
पोटैशियम क्लोरेट (KClO₃) से ऑक्सीजन बनाते समय मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂) की क्या भूमिका है? क्या अभिक्रिया में इसका द्रव्यमान घटता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

$MnO_2$ की भूमिका:

  • अकेले पोटैशियम क्लोरेट को गर्म करने पर ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए लगभग $650^\circ\text{C}$ उच्च ताप की आवश्यकता होती है और अभिक्रिया बहुत धीमी होती है।
  • परंतु 4 भाग $KClO_3$ में 1 भाग मैंगनीज डाइऑक्साइड ($MnO_2$) मिलाकर गर्म करने पर यह एक शक्तिशाली धनात्मक उत्प्रेरक का कार्य करता है। यह अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा घटाकर मात्र $250^\circ\text{C}$ पर ही तीव्र गति से ऑक्सीजन गैस मुक्त कराता है।
  • $$2KClO_3 \xrightarrow{250^\circ\text{C}, MnO_2} 2KCl + 3O_2 \uparrow$$
  • क्या द्रव्यमान घटता है? नहीं। अभिक्रिया के अंत में उत्प्रेरक $MnO_2$ का द्रव्यमान और रासायनिक संगठन 100% अपरिवर्तित रहता है और इसे पूरा वापस प्राप्त किया जा सकता है।
उदाहरण 7
टिंडल प्रभाव क्या है? घने जंगल में पेड़ों के बीच से या धूल भरे कमरे में प्रकाश का मार्ग क्यों चमकता हुआ दिखता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

परिभाषा: किसी कोलॉइडी विलयन में से प्रकाश किरण पुंज गुजारने पर कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण प्रकाश का मार्ग चमकता हुआ दिखाई देने की परिघटना को टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) कहते हैं।

कारण:

  • वास्तविक विलयन (जैसे नमक-पानी) के कणों का आकार $< 0.1\text{ nm}$ होने से वे प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं कर पाते और प्रकाश का मार्ग अदृश्य रहता है।
  • धूल भरे कमरे या कोहरे से घिरे जंगल में हवा में तैरते धूल के कणों व जलकणों का आकार कोलॉइडी परास (1 nm से 100 nm) में होता है।
  • जब सूर्य का प्रकाश इनसे होकर गुजरता है, तो ये कण प्रकाश को सभी दिशाओं में प्रकीर्णित कर देते हैं, जिससे पूरा प्रकाश मार्ग चमकता हुआ दिखाई देता है।
उदाहरण 8
जैव-उत्प्रेरक या एंजाइम किसे कहते हैं? मानव लार में पाए जाने वाले एंजाइम का नाम बताइए और पाचन में उसकी भूमिका लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

एंजाइम (Enzyme): जीवित कोशिकाओं द्वारा उत्पादित जटिल नाइट्रोजनयुक्त प्रोटीन अणु जो शरीर के सामान्य ताप ($37^\circ\text{C}$) पर जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को हजारों गुना बढ़ा देते हैं, जैव-उत्प्रेरक या एंजाइम कहलाते हैं।

लार का एंजाइम: मानव लार में पाए जाने वाले प्रमुख एंजाइम का नाम टायलिन (Ptyalin या लार-एमाइलेज) है।

पाचन में भूमिका: भोजन चबाते समय टायलिन अघुलनशील जटिल स्टार्च को तोड़कर मीठी घुलनशील माल्टोज शर्करा में परिवर्तित कर देता है:
$$\text{अघुलनशील स्टार्च} + H_2O \xrightarrow{\text{टायलिन}} \text{घुलनशील माल्टोज}$$
इसी कारण सादी रोटी या उबले चावल को कुछ देर तक चबाने पर मुँह में मीठा स्वाद महसूस होने लगता है!

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सभी धातुओं को कठोर ठोस और सभी अधातुओं को गैस या ठोस मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पारा (Hg) कमरे के ताप पर द्रव धातु है; ब्रोमीन (Br₂) कमरे के ताप पर द्रव अधातु है। सोडियम व पोटैशियम अत्यंत मुलायम धातुएँ हैं जो चाकू से काटी जा सकती हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अधातुओं को विद्युत और ऊष्मा का पूर्ण कुचालक समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ग्रेफाइट और गैस कार्बन अधातु होते हुए भी मुक्त इलेक्ट्रॉनों के कारण विद्युत के उत्कृष्ट सुचालक हैं। हीरा अधातु होकर भी तांबे से बेहतर ऊष्मा चालक है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विलेयता का कोई मात्रक (जैसे 'ग्राम' या 'ग्राम/लीटर') लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विलेयता 100 ग्राम विलायक में घुले विलेय का द्रव्यमान है: $S = (w/W) \times 100$। दो समान द्रव्यमानों का अनुपात होने के कारण यह एक मात्रकहीन शुद्ध संख्या है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मोमबत्ती के जलने को केवल भौतिक या केवल रासायनिक परिवर्तन बताना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मोमबत्ती का जलना दोनों है: मोम का पिघलना भौतिक परिवर्तन है, जबकि वाष्प बनकर $CO_2$ और जल में जलना रासायनिक परिवर्तन है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि उत्प्रेरक किसी असंभव अभिक्रिया को भी प्रारंभ कर सकता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

उत्प्रेरक किसी ऐसी अभिक्रिया को शुरू नहीं कर सकता जो स्वतः संभव न हो ($\Delta G > 0$)। यह केवल पहले से संभव अभिक्रिया के वेग को घटा या बढ़ा सकता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पानी गर्म करने पर उसमें गैसों की विलेयता बढ़ने की गलत धारणा।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गैसों का घुलना ऊष्माक्षेपी होता है। अतः ताप बढ़ने पर द्रवों में गैस की विलेयता तेजी से घटती है और गैस बाहर निकल जाती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

नमक-पानी के पारदर्शी वास्तविक विलयन में भी टिंडल प्रभाव की अपेक्षा करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वास्तविक विलयन के कण ($< 0.1\text{ nm}$) प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं कर सकते। टिंडल प्रभाव केवल कोलॉइडी विलयनों (1-100 nm) में ही दिखाई देता है।

पदार्थ की प्रकृति – रसायन विज्ञान के चार मुख्य स्तंभों का संकल्पना मानचित्र (Concept Map)

पदार्थ की प्रकृति (Nature of Matter) – कक्षा 8 पर्यावरण एवं विज्ञान (WBBSE) चार मुख्य स्तंभ: तत्व, यौगिक व मिश्रण • भौतिक/रासायनिक परिवर्तन • रासायनिक अभिक्रियाएँ • विलयन व कोलॉइड 1. तत्व, धातु-अधातु एवं यौगिक (Elements & Compounds) धातुओं के गुणधर्म: धात्विक चमक • आघातवर्धनीयता • तन्यता • सुचालकता महत्वपूर्ण अपवाद: द्रव धातु: पारा (Hg) • द्रव अधातु: ब्रोमीन (Br₂) • कोमल: Na, K यौगिक बनाम मिश्रण: निश्चित द्रव्यमान अनुपात (H₂O) बनाम अनिश्चित अनुपात ★ विद्युत सुचालक अधातु: ग्रेफाइट व गैस कार्बन • कठोरतम: हीरा 2. भौतिक व रासायनिक परिवर्तन एवं पृथक्करण भौतिक बनाम रासायनिक: उत्क्रमणीय (बर्फ गलन) बनाम अनुत्क्रमणीय (जंग लगना) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): कपूर • आयोडीन (I₂) • नैफ्थलीन • नौसादर (NH₄Cl) पृथक्करण विधियाँ: निस्पंदन • वाष्पीकरण • क्रिस्टलन • आसवन • पृथक्कारी कीप ★ पृथक्कारी कीप द्वारा अमिश्रणीय द्रवों का पृथक्करण (तेल व पानी) 3. रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार व उत्प्रेरण अभिक्रियाओं के प्रकार: संयोजन • अपघटन • विस्थापन • द्विविस्थापन विस्थापन अभिक्रिया: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu (नीला विलयन हरा होना) ऊर्जा परिवर्तन: ऊष्माक्षेपी (चूने में जल CaO+H₂O) बनाम ऊष्माशोषी (N₂+O₂) उत्प्रेरक व एंजाइम: O₂ निर्माण में MnO₂ • लार में टायलिन (Ptyalin) 4. विलयन, विलेयता एवं कोलॉइडी निकाय विलेयता का सूत्र: विलेयता S = (विलेय का द्रव्यमान / विलायक) × 100 द्रव में गैस की विलेयता: दाब ↑ विलेयता ↑ (हेनरी का नियम) • ताप ↑ विलेयता ↓ कणों के व्यास का परास: वास्तविक (<0.1 nm) • कोलॉइड (1-100 nm) • निलंबन टिंडल प्रभाव: कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश प्रकीर्णन • ब्राउनी गति

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
पदार्थ की भौतिक अवस्था अंतराणुक आकर्षण बल और तापीय गतिशीलता के संतुलन द्वारा निर्धारित होती है।
मुख्य बिंदु 2
धातुएँ आघातवर्धनीय, तन्य व सुचालक होती हैं। प्रमुख अपवाद: द्रव पारा व ब्रोमीन, मुलायम सोडियम व पोटैशियम, सुचालक ग्रेफाइट तथा कठोरतम हीरा।
मुख्य बिंदु 3
यौगिक में तत्व निश्चित द्रव्यमान अनुपात में जुड़कर सर्वथा नए गुण बनाते हैं (जल आग बुझाता है); मिश्रण में घटक मूल गुण बनाए रखते हैं।
मुख्य बिंदु 4
भौतिक परिवर्तन अस्थायी व उत्क्रमणीय होते हैं; रासायनिक परिवर्तन स्थायी होकर नए पदार्थ बनाते हैं।
मुख्य बिंदु 5
चार मुख्य अभिक्रियाएँ: संयोजन (A+B→AB), अपघटन (AB→A+B), विस्थापन (Fe+CuSO₄→FeSO₄+Cu) तथा द्विविस्थापन (AgNO₃+NaCl→AgCl↓+NaNO₃)।
मुख्य बिंदु 6
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ऊष्मा मुक्त होती है (चूने में जल); ऊष्माशोषी में ऊष्मा अवशोषित होती है (तड़ित में NO)। उत्प्रेरक अभिक्रिया वेग नियंत्रित करते हैं।
मुख्य बिंदु 7
विलेयता S = (w/W) × 100 मात्रकहीन राशि है। दाब बढ़ने पर गैस की विलेयता बढ़ती है (हेनरी का नियम) तथा ताप बढ़ने पर घटती है।
मुख्य बिंदु 8
कोलॉइड (1-100 nm) प्रकाश प्रकीर्णन द्वारा टिंडल प्रभाव और ब्राउनी गति प्रदर्शित करते हैं; वास्तविक विलयनों में टिंडल प्रभाव नहीं होता।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
25°C पर 40 ग्राम जल में 12 ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट घोलकर संतृप्त विलयन बनाया गया। 25°C पर पोटैशियम नाइट्रेट की विलेयता क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

$$S = \frac{w}{W} \times 100 = \frac{12}{40} \times 100 = \frac{3}{10} \times 100 = \mathbf{30}$$

25°C पर पोटैशियम नाइट्रेट की विलेयता 30 है।


2
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के प्रकार पहचानिए: (क) 2Mg + O₂ → 2MgO, (ख) CaCO₃ → CaO + CO₂, (ग) Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂, (घ) BaCl₂ + Na₂SO₄ → BaSO₄↓ + 2NaCl।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

(क) संयोजन या प्रत्यक्ष संश्लेषण अभिक्रिया (दो तत्व जुड़कर एक यौगिक)।
(ख) तापीय अपघटन अभिक्रिया (एक यौगिक टूटकर दो पदार्थ)।
(ग) एकल विस्थापन अभिक्रिया (जिंक ने हाइड्रोजन को विस्थापित किया)।
(घ) द्विविस्थापन या अवक्षेपण अभिक्रिया (आयनों के विनिमय से सफेद अवक्षेप BaSO₄)।


3
ऊर्ध्वपातित होने वाले दो ठोस पदार्थों के नाम लिखिए। ऊर्ध्वपातन और वाष्पीकरण में क्या अंतर है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

1. पदार्थ: कपूर तथा नौसादर ($NH_4Cl$) [अथवा आयोडीन, नैफ्थलीन]।
2. अंतर: ऊर्ध्वपातन में ठोस पदार्थ बिना द्रव बने सीधे ठोस से गैस में बदलता है; जबकि वाष्पीकरण में द्रव पदार्थ वाष्प में बदलता है।


4
दूध को वास्तविक विलयन न मानकर कोलॉइडी इमल्शन क्यों माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

दूध में द्रव वसा की बूंदें (परिक्षिप्त प्रावस्था) जल (परिक्षेपण माध्यम) में 1 nm से 100 nm के कोलॉइडी आकार में फैली रहती हैं। ये कण प्रकाश का प्रकीर्णन कर टिंडल प्रभाव दिखाते हैं और पार्चमेंट झिल्ली से नहीं छनते। अतः दूध एक कोलॉइडी इमल्शन (द्रव में द्रव) है।


5
सोडा वाटर की बोतल खोलने पर तेज सनसनाहट के साथ गैस क्यों निकलती है? इसे किस नियम से समझाया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

नियम: हेनरी का नियम, जिसके अनुसार द्रव में गैस की विलेयता आरोपित दाब के समानुपाती होती है ($C = kP$)।

व्याख्या: बोतल में $CO_2$ उच्च दाब (3-4 atm) पर घुली रहती है। ढक्कन खोलते ही दाब घटकर 1 atm रह जाता है। अतः अतिरिक्त घुली $CO_2$ की विलेयता अचानक घट जाती है और वह सनसनाहट के साथ तीव्र झाग बनकर बाहर निकलती है।


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