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WBB • कक्षा 8 • Science • अध्याय 3
अनुमानित समय: 55 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

कुछ परिचित गैसें

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 8 विज्ञान ("পরিবেশ ও বিজ্ঞান" / पर्यावरण एवं विज्ञान) के आधिकारिक पाठ्यक्रम पर आधारित अध्याय: "कुछ परिचित गैसें" (Know About Some Common Gases) का प्रामाणिक व व्यापक मास्टर स्टडी गाइड। इस अध्याय में हमारे वायुमंडल और जीवन की चार सबसे महत्वपूर्ण गैसों—ऑक्सीजन (O₂), हाइड्रोजन (H₂), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) एवं नाइट्रोजन (N₂)—के प्रयोगशाला निर्माण, उत्प्रेरक (MnO₂) की भूमिका, ऑक्साइडों के प्रकार, लोहे पर जंग लगना व गैल्वनीकरण, हाइड्रोजन के अपचायक गुण व पॉप परीक्षण, संगमरमर से CO₂ निर्माण, चूने के पानी की दो-चरणीय अभिक्रिया, शुष्क बर्फ, नाइट्रोजन के त्रिबंध (N≡N) की रासायनिक निष्क्रियता, जैविक व तड़ित नाइट्रोजन स्थिरीकरण, ग्रीनहाउस प्रभाव, अम्लीय वर्षा (पत्थर का कोढ़) और सीएफसी (CFC) द्वारा ओजोन परत क्षरण का संपूर्ण विश्लेषण शामिल है। इसमें 25 शिक्षण चरण, 4-क्वाड्रेंट वेक्टर कॉन्सेप्ट मैप, 8 संतुलित रासायनिक समीकरण कार्ड, 8 हल किए गए मानक उदाहरण, 7 परीक्षक जाल चेतावनियाँ, 8 निष्कर्ष एवं ऑनलाइन सीबीटी मॉक टेस्ट उपलब्ध हैं।

💨 हमारे चारों ओर फैली अदृश्य शक्तियाँ: प्राणदायिनी ऑक्सीजन से भविष्य के हरित ईंधन तक

एक रंगहीन-गंधहीन गैस के जार में बिना लौ वाली अगरबत्ती ले जाने पर वह एकाएक धधक कर जल उठती है, दूसरी गैस में तीखी "पॉप" ध्वनि के साथ छोटा विस्फोट होता है और तीसरी गैस में चूने का पानी दूधिया हो जाता है—ऐसा क्यों होता है?

जो गैस हमारे जीवन का आधार है, वही विशाल लोहे के पुलों पर जंग लगाकर उन्हें खंडहर बना देती है? ठोस कार्बन डाइऑक्साइड बिना गीला किए सीधे गैस में कैसे बदल जाती है, और वायुमंडल का 78% भाग घेरने वाली एक अक्रिय गैस पौधों के विकास का सबसे बड़ा पोषक तत्व कैसे बनती है?

इन सभी वैज्ञानिक रहस्यों का उत्तर हमारे इस अध्याय कुछ परिचित गैसें (Know About Some Common Gases) में समाहित है: ऑक्सीजन (O₂), हाइड्रोजन (H₂), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और नाइट्रोजन (N₂)। आइए, चरणबद्ध तरीके से इनके विज्ञान को समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 8 विज्ञान ("পরিবেশ ও বিজ্ঞান" / पर्यावरण एवं विज्ञान) के आधिकारिक पाठ्यक्रम पर आधारित अध्याय: "कुछ परिचित गैसें" (Know About Some Common Gases) का प्रामाणिक व व्यापक मास्टर स्टडी गाइड। इस अध्याय में हमारे वायुमंडल और जीवन की चार सबसे महत्वपूर्ण गैसों—ऑक्सीजन (O₂), हाइड्रोजन (H₂), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) एवं नाइट्रोजन (N₂)—के प्रयोगशाला निर्माण, उत्प्रेरक (MnO₂) की भूमिका, ऑक्साइडों के प्रकार, लोहे पर जंग लगना व गैल्वनीकरण, हाइड्रोजन के अपचायक गुण व पॉप परीक्षण, संगमरमर से CO₂ निर्माण, चूने के पानी की दो-चरणीय अभिक्रिया, शुष्क बर्फ, नाइट्रोजन के त्रिबंध (N≡N) की रासायनिक निष्क्रियता, जैविक व तड़ित नाइट्रोजन स्थिरीकरण, ग्रीनहाउस प्रभाव, अम्लीय वर्षा (पत्थर का कोढ़) और सीएफसी (CFC) द्वारा ओजोन परत क्षरण का संपूर्ण विश्लेषण शामिल है। इसमें 25 शिक्षण चरण, 4-क्वाड्रेंट वेक्टर कॉन्सेप्ट मैप, 8 संतुलित रासायनिक समीकरण कार्ड, 8 हल किए गए मानक उदाहरण, 7 परीक्षक जाल चेतावनियाँ, 8 निष्कर्ष एवं ऑनलाइन सीबीटी मॉक टेस्ट उपलब्ध हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कक्षा 7 विज्ञान से भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन तथा परमाणु संरचना की मूलभूत समझ।
  • तत्वों के रासायनिक प्रतीक (O, H, C, N, Mn, K, Zn, Ca) और सरल यौगिक सूत्रों की जानकारी।
  • पदार्थ की अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) और विलयनों की प्रारंभिक संकल्पना।
  • अम्ल, क्षार और सूचकों (लिटमस पत्र के रंग परिवर्तन) का सामान्य ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पोटेशियम क्लोरेट और हाइड्रोजन परॉक्साइड से ऑक्सीजन निर्माण के समीकरण व उत्प्रेरक की भूमिका समझा सकेंगे।
  • दानेदार जस्ते और तनु H₂SO₄ से हाइड्रोजन निर्माण, पॉप परीक्षण और इसके अपचायक गुण सिद्ध कर सकेंगे।
  • संगमरमर के टुकड़ों से CO₂ निर्माण और चूने के पानी की दो-चरणीय अभिक्रियाओं का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • नाइट्रोजन अणु के त्रिबंध (N≡N) और सामान्य ताप पर इसकी अक्रियता का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट कर सकेंगे।
  • चारों प्रमुख गैसों के प्रयोगशाला विभेदीकरण हेतु संपूर्ण तुलनात्मक तालिका बना सकेंगे।
  • ग्रीनहाउस प्रभाव, वैश्विक ऊष्मण, अम्लीय वर्षा और ओजोन परत के क्षरण के कारणों का विश्लेषण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. ऑक्सीजन (O₂) — प्रयोगशाला निर्मा...
2 2. हाइड्रोजन (H₂) — निर्माण, दानेदा...
3 3. कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) — निर्मा...
4 4. नाइट्रोजन (N₂) एवं प्रयोगशाला गै...
5 5. पर्यावरण रसायन — ग्रीनहाउस प्रभा...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. ऑक्सीजन (O₂) — प्रयोगशाला निर्माण, उत्प्रेरक, ऑक्साइड व जंग की रसायन

1.1 खोज, वायुमंडलीय उपस्थिति एवं भौतिक गुणधर्म

शुष्क वायु में आयतन के अनुसार लगभग 20.95% और द्रव्यमान के अनुसार लगभग 23% ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) गैस होती है। जल में द्रव्यमान के अनुसार लगभग 89% ऑक्सीजन विद्यमान है। इसकी खोज कार्ल विल्हेम शीले (1772) और जोसेफ प्रीस्टले (1774) ने स्वतंत्र रूप से की थी। वैज्ञानिक लैनवॉज़िए ने 1777 में इसका नाम "ऑक्सीजन" (अम्ल जनक) रखा।

भौतिक गुणधर्म: ऑक्सीजन एक रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस है। यह वायु से थोड़ी भारी होती है (वाष्प घनत्व 16, वायु का 14.4)। यह जल में अल्प विलेय है (20°C पर 100 सेमी³ जल में लगभग 3 सेमी³ ऑक्सीजन घुलती है), जो जलीय जीवों के जीवन निर्वाह हेतु अत्यंत आवश्यक है। यह -183°C पर हल्के नीले द्रव में तथा -218.8°C पर नीले ठोस में बदलती है।

1.2 प्रयोगशाला निर्माण: पोटेशियम क्लोरेट का ऊष्मीय अपघटन

प्रयोगशाला में ऑक्सीजन गैस बनाने के लिए शुष्क पोटेशियम क्लोरेट ($\text{KClO}_3$) और मैंगनीज डाइऑक्साइड ($\text{MnO}_2$) को 4:1 भार अनुपात में मिलाकर कठोर कांच की परखनली में 200°C - 240°C पर गर्म किया जाता है।

$$\mathbf{2\text{KClO}_3 \\xrightarrow[\text{MnO}_2]{200^\circ\text{C} - 240^\circ\text{C}} 2\text{KCl} + 3\text{O}_2\\uparrow}$$

महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण: अकेले शुद्ध पोटेशियम क्लोरेट को गर्म करने पर ऑक्सीजन मुक्त करने के लिए 650°C से अधिक उच्च तापमान की आवश्यकता होती है, जिससे परखनली के पिघलने या अचानक विस्फोट का खतरा रहता है। मिश्रण में $\text{MnO}_2$ मिलाने से अपघटन ताप घटकर मात्र 200°-240°C रह जाता है और तीव्र गति से ऑक्सीजन गैस प्राप्त होती है।

1.3 उत्प्रेरक की संकल्पना एवं सामान्य ताप पर वैकल्पिक विधि

उत्प्रेरक की परिभाषा (Catalyst): वह पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में सूक्ष्म मात्रा में उपस्थित रहकर अभिक्रिया के वेग को परिवर्तित (प्रायः तीव्र) कर देता है, परंतु अभिक्रिया के अंत में स्वयं द्रव्यमान एवं रासायनिक संघटन में पूर्णतः अपरिवर्तित रहता है, उसे उत्प्रेरक कहते हैं। यहाँ $\text{MnO}_2$ एक धनात्मक उत्प्रेरक है।

बिना गर्म किए सामान्य ताप पर निर्माण: हाइड्रोजन परॉक्साइड द्रव में मैंगनीज डाइऑक्साइड मिलाने पर कमरे के तापमान पर ही ऑक्सीजन गैस बुलबुलों के रूप में निकलने लगती है:

$$\mathbf{2\text{H}_2\text{O}_2 \\xrightarrow{\text{MnO}_2} 2\text{H}_2\text{O} + \text{O}_2\\uparrow}$$

गैस संग्रहण विधि: ऑक्सीजन गैस को जल के अधोमुखी विस्थापन (Downward displacement of water) द्वारा गैस जार में एकत्र किया जाता है, क्योंकि यह जल में अत्यंत अल्प विलेय है और जल से कोई अभिक्रिया नहीं करती। वायु से घनत्व में बहुत कम अंतर होने के कारण वायु विस्थापन द्वारा इसे एकत्र नहीं किया जाता।

1.4 रासायनिक गुणधर्म एवं तत्वों का दहन

ऑक्सीजन स्वयं नहीं जलती (अदह्य है), परंतु यह दहन की प्रबल पोषक है। बिना लौ वाली जलती हुई अगरबत्ती या तीली को ऑक्सीजन जार में ले जाने पर वह तुरंत तेज लौ के साथ जल उठती है।

  • कार्बन (C): जलकर अम्लीय कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाता है: $\text{C} + \text{O}_2 \\to \text{CO}_2$।
  • सल्फर (S): नीली लौ के साथ जलकर तीखी गंध वाली सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है: $\text{S} + \text{O}_2 \\to \text{SO}_2$।
  • मैग्नीशियम (Mg): चमकदार श्वेत प्रकाश के साथ जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड का सफेद चूर्ण बनाता है: $2\text{Mg} + \text{O}_2 \\to 2\text{MgO}$।
  • सोडियम (Na): सुनहरी पीली ज्वाला के साथ जलकर क्षारीय सोडियम ऑक्साइड बनाता है: $4\text{Na} + \text{O}_2 \\to 2\text{Na}_2\text{O}$।
  • लोहा (Fe): रक्त-तप्त लोहे का तार ऑक्सीजन में चिंगारियों के साथ जलकर फेरोसो-फेरिक ऑक्साइड बनाता है: $3\text{Fe} + 2\text{O}_2 \\to \text{Fe}_3\text{O}_4$।

1.5 ऑक्साइडों का वर्गीकरण एवं लोहे पर जंग लगना

तत्वों के ऑक्सीजन के साथ संयोग से बनने वाले ऑक्साइडों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

ऑक्साइड का प्रकारनिर्माणकारी तत्वउदाहरणजल में प्रकृति एवं लिटमस परीक्षण
अम्लीय ऑक्साइडअधातुएँ$\text{CO}_2, \text{SO}_2, \text{P}_2\text{O}_5$अम्ल बनाते हैं ($\text{H}_2\text{SO}_3$), नीले लिटमस को लाल करते हैं
क्षारीय ऑक्साइडधातुएँ$\text{Na}_2\text{O}, \text{K}_2\text{O}, \text{MgO}, \text{CaO}$क्षार बनाते हैं ($\text{NaOH}$), लाल लिटमस को नीला करते हैं
उभयधर्मी ऑक्साइडविशिष्ट धातुएँ$\text{ZnO}, \text{Al}_2\text{O}_3, \text{PbO}$अम्ल एवं क्षार दोनों से क्रिया करके लवण व जल बनाते हैं
उदासीन ऑक्साइडविशिष्ट अधातुएँ$\text{CO}, \text{N}_2\text{O}, \text{NO}, \text{H}_2\text{O}$अम्ल या क्षार किसी से क्रिया नहीं करते; लिटमस पर निष्प्रभावी

लोहे पर जंग लगना (Rusting of Iron): नम वायु में खुला रखने पर लोहे पर भूरे रंग की पपड़ीदार परत जम जाती है जिसे जंग कहते हैं। जंग वास्तव में जलयोजित फेरिक ऑक्साइड है। जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जल/नमी दोनों की एक साथ उपस्थिति अनिवार्य है। केवल शुष्क ऑक्सीजन या उबाले हुए वायु-रहित जल में लोहे पर कभी जंग नहीं लगता।

$$\mathbf{4\text{Fe} + 3\text{O}_2 + 2x\text{H}_2\text{O} \\longrightarrow 2\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}\quad\text{(जलयोजित फेरिक ऑक्साइड / जंग)}}$$

जंग से बचाव के उपाय: (1) पेंट, ग्रीस या तेल की परत चढ़ाना, (2) गैल्वनीकरण / यशदलेपन (Galvanization) — पिघले हुए जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाना, (3) क्रोमियम या निकेल का विद्युत-लेपन करना।

2. हाइड्रोजन (H₂) — निर्माण, दानेदार जस्ता, पॉप परीक्षण व अपचायक गुण

2.1 उपस्थिति एवं सबसे हल्के तत्व की पहचान

हाइड्रोजन ($\text{H}_2$) पूरे ब्रह्मांड का सबसे हल्का और सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है (तारों और सूर्य की ऊर्जा का मूल स्रोत)। 1766 में हेनरी कैवेंडिश ने इसे खोजकर "ज्वलनशील वायु" कहा। लैनवॉज़िए ने इसका नाम हाइड्रोजन रखा (जिसका अर्थ जल उत्पादक है)।

भौतिक गुणधर्म: रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस। यह सभी ज्ञात पदार्थों में सबसे हल्की है (घनत्व मात्र 0.0899 ग्राम/लीटर, वायु का 1/14.4 भाग)। यह जल में लगभग अविलेय है (20°C पर 100 सेमी³ जल में मात्र 2 सेमी³ घुलती है) और ग्राहम के नियम के अनुसार इसका विसरण सबसे तेज होता है।

2.2 प्रयोगशाला निर्माण: दानेदार जस्ता एवं तनु सल्फ्यूरिक अम्ल

प्रयोगशाला में कमरे के तापमान पर वुल्फ बोतल में दानेदार जस्ता (Granulated Zinc) लेकर उसमें थिसिल कीप की सहायता से तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$) डालने पर तीव्र बुदबुदाहट के साथ हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है। इसमें गर्म करने की आवश्यकता नहीं होती।

$$\mathbf{\text{Zn} + \text{H}_2\text{SO}_4\text{ (तनु)} \\longrightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{H}_2\\uparrow}$$

शुद्ध जस्ते के स्थान पर दानेदार जस्ते का प्रयोग क्यों किया जाता है?

  • कॉपर अशुद्धि की उत्प्रेरक भूमिका: दानेदार जस्ते में सूक्ष्म मात्रा में कॉपर ($\text{Cu}$) की अशुद्धि होती है। अम्ल के संपर्क में आने पर सूक्ष्म विद्युत-युग्म ($\text{Zn-Cu}$ कपल) बन जाते हैं, जो धनात्मक उत्प्रेरक का कार्य कर हाइड्रोजन निकलने की दर को अत्यधिक तीव्र कर देते हैं। शुद्ध जस्ता अत्यंत मंद गति से अभिक्रिया करता है।
  • अधिक पृष्ठीय क्षेत्रफल: पिघले हुए जस्ते को ठंडे पानी में गिराकर दानेदार जस्ता बनाया जाता है, जिससे यह छिद्रयुक्त और खुरदुरा बनता है और अम्ल से संपर्क हेतु बड़ा पृष्ठीय क्षेत्रफल प्रदान करता है।

सावधानी: हाइड्रोजन निर्माण में कभी भी नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$) का उपयोग नहीं करते, क्योंकि यह प्रबल ऑक्सीकारक अम्ल है। यह उत्पन्न हाइड्रोजन को तुरंत जल में ऑक्सीकृत कर देता है और स्वयं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों में अपचयित हो जाता है।

2.3 गैस संग्रहण एवं प्रयोगशाला सावधानियाँ

हाइड्रोजन गैस को जल के अधोमुखी विस्थापन द्वारा गैस जार में एकत्र किया जाता है। यद्यपि यह वायु से हल्की है, फिर भी इसे वायु के विस्थापन द्वारा एकत्र नहीं करते क्योंकि वायु और हाइड्रोजन का मिश्रण अत्यंत विस्फोटक होता है।

अत्यंत महत्वपूर्ण सावधानी: थिसिल कीप का निचला सिरा सदैव बोतल में भरे अम्ल के भीतर डूबा रहना चाहिए। यदि कीप का सिरा अम्ल से ऊपर रहा, तो हाइड्रोजन गैस कीप के रास्ते कमरे में फैल जाएगी और घातक विस्फोट हो सकता है।

2.4 रासायनिक गुणधर्म, 'पॉप' परीक्षण एवं दहन

हाइड्रोजन एक ज्वलनशील गैस है। यह वायु या ऑक्सीजन में हल्की नीली लौ के साथ जलकर जलवाष्प बनाती है और अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करती है:

$$\mathbf{2\text{H}_2 + \text{O}_2 \\longrightarrow 2\text{H}_2\text{O} + \text{अत्यधिक ऊष्मा}}$$

दहन में सहायक नहीं: उल्टे पकड़े गए हाइड्रोजन से भरे जार के अंदर जलती मोमबत्ती ले जाने पर मोमबत्ती तुरंत बुझ जाती है, परंतु जार के मुंह पर हाइड्रोजन नीली लौ से जलती रहती है।

प्रमाणिक पॉप परीक्षण (Pop Sound Test): परखनली में एकत्र हाइड्रोजन के मुंह पर जलती तीली ले जाने पर यह एक विशिष्ट तीखी "पॉप" (Pop) ध्वनि के साथ विस्फोटित होकर जल उठती है। यह हाइड्रोजन का निश्चित परीक्षण है।

2.5 अपचायक गुणधर्म एवं औद्योगिक अनुप्रयोग

हाइड्रोजन एक शक्तिशाली अपचायक (Reducing Agent) है। गर्म काले कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) के ऊपर से शुष्क हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने पर यह कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन छीनकर उसे लाल-भूरे धातुई तांबे में अपचयित कर देती है और स्वयं जल में ऑक्सीकृत हो जाती है:

$$\mathbf{\text{CuO}\text{ (काला)} + \text{H}_2 \\xrightarrow{\Delta} \text{Cu}\text{ (लाल-भूरा तांबा)} + \text{H}_2\text{O}}$$

प्रमुख औद्योगिक उपयोग:

  • हैबर प्रक्रम द्वारा अमोनिया उत्पादन: $\text{N}_2 + 3\text{H}_2 \\xrightleftharpoons[\text{Fe / Mo}]{450^\circ\text{C}, 200\text{ atm}} 2\text{NH}_3$, जो यूरिया उर्वरक का मुख्य आधार है।
  • वनस्पति घी का निर्माण (हाइड्रोजनीकरण): निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में तरल वनस्पति तेलों में हाइड्रोजन मिलाकर ठोस वनस्पति घी बनाया जाता है।
  • शून्य-उत्सर्जन ग्रीन फ्यूल: रॉकेटों में तरल हाइड्रोजन क्रायोजेनिक ईंधन के रूप में प्रयुक्त होती है। इसके जलने से केवल जलवाष्प बनती है, कोई कार्बन प्रदूषण नहीं होता।

3. कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) — निर्माण, चूने के पानी का परीक्षण, अग्निशामक व शुष्क बर्फ

3.1 वायुमंडलीय उपस्थिति एवं सामान्य गुणधर्म

वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) की मात्रा आयतन के अनुसार लगभग 0.04% (लगभग 420 ppm) होती है। कम मात्रा के बावजूद यह पौधों के प्रकाश संश्लेषण द्वारा पृथ्वी पर भोजन निर्माण का प्राथमिक आधार है।

भौतिक गुणधर्म: रंगहीन गैस, हल्की तीखी अम्लीय गंध व स्वाद। यह वायु से 1.53 गुना भारी है (वाष्प घनत्व 22, वायु का 14.4)। यह जल में मध्यम विलेय है (20°C पर 1 आयतन जल लगभग 1 आयतन $\text{CO}_2$ घोलता है) और दुर्बल कार्बोनिक अम्ल ($\text{H}_2\text{CO}_3$) बनाती है।

3.2 प्रयोगशाला निर्माण: संगमरमर के टुकड़े एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल

प्रयोगशाला में बिना गर्म किए सामान्य ताप पर वुल्फ बोतल या किप उपकरण में संगमरमर के टुकड़ों (कैल्शियम कार्बोनेट, $\text{CaCO}_3$) पर थिसिल कीप से तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) डालने पर तीव्र बुदबुदाहट के साथ कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है।

$$\mathbf{\text{CaCO}_3 + 2\text{HCl}\text{ (तनु)} \\longrightarrow \text{CaCl}_2 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\\uparrow}$$

परीक्षक का प्रमुख प्रश्न — तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) का उपयोग क्यों नहीं करते?

संगमरमर पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर प्रारंभ में थोड़ी गैस निकलकर अभिक्रिया तुरंत रुक जाती है। इसका कारण यह है कि अभिक्रिया में बनने वाला उप-उत्पाद कैल्शियम सल्फेट ($\text{CaSO}_4$) जल में अविलेय होता है। यह संगमरमर के टुकड़ों के ऊपर एक कठोर, अभेद्य परत बना देता है जिससे अम्ल अंदर के संगमरमर तक नहीं पहुँच पाता:

$$\text{CaCO}_3 + \text{H}_2\text{SO}_4 \\longrightarrow \mathbf{\text{CaSO}_4\\downarrow}\text{ (अविलेय आवरण)} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\\uparrow$$

गैस संग्रहण विधि: $\text{CO}_2$ वायु से 1.5 गुना भारी और जल में विलेय होने के कारण इसे वायु के ऊर्ध्वमुखी विस्थापन (Upward displacement of air) द्वारा सीधे खड़े गैस जार में एकत्र किया जाता है।

3.3 चूने के पानी का निश्चित परीक्षण (दो-चरणीय अभिक्रिया)

कार्बन डाइऑक्साइड की पहचान का सबसे प्रामाणिक परीक्षण इसे ताजे बने चूने के पानी [कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड विलयन, $\text{Ca(OH)}_2$] में प्रवाहित करना है:

प्रथम चरण (अल्प समय तक गैस प्रवाहित करना): चूने के पानी में थोड़ी देर $\text{CO}_2$ प्रवाहित करने पर जल में अविलेय कैल्शियम कार्बोनेट का श्वेत अवक्षेप बनने से विलयन दूधिया (Milky) हो जाता है:

$$\mathbf{\text{Ca(OH)}_2\text{ (aq)} + \text{CO}_2\text{ (g)} \\longrightarrow \text{CaCO}_3\\downarrow\text{ (श्वेत अवक्षेप, दूधिया)} + \text{H}_2\text{O}\text{ (l)}}$$

द्वितीय चरण (अत्यधिक समय तक गैस प्रवाहित करना): दूधिया विलयन में लगातार अधिक समय तक $\text{CO}_2$ प्रवाहित करते रहने पर अविलेय कैल्शियम कार्बोनेट घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट में बदल जाता है, जिससे विलयन पुनः पूर्णतः पारदर्शी व रंगहीन हो जाता है:

$$\mathbf{\text{CaCO}_3\\downarrow + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\text{ (अधिकता)} \\longrightarrow \text{Ca(HCO}_3)_2\text{ (जल में विलेय, पारदर्शी)}}$$

विशेष तथ्य: इस पारदर्शी विलयन को उबालने पर $\text{Ca(HCO}_3)_2$ अपघटित होकर पुनः अविलेय $\text{CaCO}_3$ बनाता है और विलयन फिर से दूधिया हो जाता है।

3.4 अग्निशामक भूमिका एवं जलते मैग्नीशियम फीते का अपवाद

कार्बन डाइऑक्साइड स्वयं नहीं जलती और न ही जलने में सहायता करती है। वायु से 1.5 गुना भारी होने के कारण यह जलती वस्तु को कंबल की तरह ढक लेती है और ऑक्सीजन की आपूर्ति काटकर आग बुझा देती है। इसलिए इसका उपयोग अग्निशामक यंत्रों में होता है।

जलते मैग्नीशियम फीते का अपवाद: $\text{CO}_2$ में जलती मोमबत्ती तुरंत बुझ जाती है, परंतु जलते हुए मैग्नीशियम फीते को ले जाने पर वह तेज रोशनी के साथ जलता रहता है और जार में सफेद चूर्ण व काले धब्बे बनते हैं:

$$\mathbf{2\text{Mg} + \text{CO}_2 \\longrightarrow 2\text{MgO}\text{ (सफेद चूर्ण)} + \text{C}\text{ (काले कार्बन कण)}}$$

मैग्नीशियम का ऑक्सीजन के प्रति अत्यधिक आकर्षण होता है और इसका प्रज्वलन ताप 2000°C से अधिक होने के कारण यह $\text{CO}_2$ के अणुओं को तोड़कर ऑक्सीजन छीन लेता है और कार्बन मुक्त कर देता है।

3.5 शुष्क बर्फ (Dry Ice) एवं व्यावहारिक उपयोग

उच्च दाब ($>50\text{ वायुमंडलीय दाब}$) पर संपीडित द्रव कार्बन डाइऑक्साइड को बारीक नोजल से अचानक प्रसारित करने पर अत्यधिक प्रशीतन के कारण यह बर्फ जैसे ठोस में बदल जाती है। इसे शुष्क बर्फ (Dry Ice) कहते हैं।

  • ऊर्ध्वपातन (-78.5°C): सामान्य वायुमंडलीय दाब पर ठोस $\text{CO}_2$ बिना द्रव में बदले सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है (ऊर्ध्वपातित होती है)। यह किसी वस्तु या हाथ को गीला नहीं करती, इसलिए इसे "शुष्क" बर्फ कहा जाता है।
  • उपयोग: दवाओं, टीकों और खाद्य पदार्थों के सुरक्षित परिवहन में प्रशीतक के रूप में, नाट्य मंचों पर कृत्रिम घना धुआँ उत्पन्न करने में, तथा सोडा वाटर व शीतल पेयों में।

4. नाइट्रोजन (N₂) एवं प्रयोगशाला गैस पहचान मास्टर तालिका

4.1 वायुमंडलीय प्रचुरता एवं त्रिबंध की रासायनिक निष्क्रियता

वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा नाइट्रोजन ($\text{N}_2$) गैस की होती है — लगभग 78.08% आयतन। 1772 में डैनियल रदरफोर्ड ने इसे खोजा था। इसका वाष्प घनत्व 14 है, जो वायु (14.4) से थोड़ा कम है।

सामान्य ताप पर रासायनिक निष्क्रियता का कारण:

नाइट्रोजन के अणु में दो नाइट्रोजन परमाणु परस्पर तीन-तीन इलेक्ट्रॉनों का साझा करके एक अत्यंत मजबूत सहसंयोजक त्रिबंध ($\mathbf{N \equiv N}$) बनाते हैं। इस त्रिबंध को तोड़ने हेतु अत्यधिक ऊर्जा (बंधन वियोजन ऊर्जा लगभग 945.3 kJ/mol) की आवश्यकता होती है। कमरे के सामान्य तापमान पर इतनी ऊर्जा उपलब्ध न होने के कारण नाइट्रोजन लगभग अक्रिय रहती है और वायु में ऑक्सीजन के तीव्र दहन को धीमा बनाए रखती है।

4.2 उच्च ताप पर अभिक्रियाएँ एवं तड़ित स्थिरीकरण

अत्यधिक उच्च तापमान ($3000^\circ\text{C}$) अथवा बादलों में आकाशीय बिजली चमकने (तड़ित) के समय उत्पन्न विद्युत ऊर्जा से नाइट्रोजन का त्रिबंध टूटता है और यह ऑक्सीजन से सीधे जुड़ जाती है:

$$\mathbf{\text{N}_2 + \text{O}_2 \\xrightarrow{\text{तड़ित} / 3000^\circ\text{C}} 2\text{NO}\text{ (नाइट्रिक ऑक्साइड)}}$$ $$2\text{NO} + \text{O}_2 \\longrightarrow 2\text{NO}_2\text{ (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, भूरी गैस)}$$ $$4\text{NO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + \text{O}_2 \\longrightarrow 4\text{HNO}_3\text{ (वर्षा जल में घुला नाइट्रिक अम्ल)}$$

वर्षा के साथ यह नाइट्रिक अम्ल भूमि पर आकर मृदा के खनिजों से क्रिया करके नाइट्रेट लवण ($\text{Ca(NO}_3)_2$) बनाता है, जो पौधों के पोषण का आवश्यक प्राकृतिक स्रोत है।

4.3 जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण एवं नाइट्रोजन चक्र

पौधे वायुमंडल की मुक्त नाइट्रोजन गैस को सीधे ग्रहण नहीं कर सकते। वे निर्भर करते हैं:

  • सहजीवी जीवाणु: दलहनी फसलों (चना, मटर, मूंग) की जड़ों की ग्रंथियों में रहने वाला राइजोबियम (Rhizobium) जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को सीधे नाइट्रेट यौगिकों में बदलता है।
  • स्वतंत्रजीवी जीवाणु: मिट्टी के एजोटोबैक्टर व क्लॉस्ट्रिडियम तथा नीले-हरे शैवाल जैसे एनाबीना व नॉस्टॉक।
  • विनाइट्रीकारी जीवाणु: स्यूडोमोनास जीवाणु मृदा के नाइट्रेट यौगिकों को पुनः मुक्त नाइट्रोजन गैस में बदलकर वायुमंडल में भेजते हैं, जिससे नाइट्रोजन चक्र संतुलित रहता है।

4.4 चारों प्रमुख गैसों की पहचान हेतु मास्टर तालिका

प्रयोगशाला में अज्ञात गैस जारों में भरी गैसों को विभेदित करने हेतु निम्नलिखित परीक्षण तालिका का उपयोग करें:

परीक्षणऑक्सीजन ($\text{O}_2$)हाइड्रोजन ($\text{H}_2$)कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$)नाइट्रोजन ($\text{N}_2$)
1. बिना लौ वाली जलती तीली धधक कर तेज जल उठती है तीखी 'पॉप' ध्वनि के साथ विस्फोट, तीली बुझती है तुरंत बुझ जाती है तुरंत बुझ जाती है
2. जार के मुंह पर मोमबत्ती और तेज जलती है जार के मुंह पर गैस नीली लौ से जलती है मोमबत्ती तुरंत बुझती है मोमबत्ती चुपचाप बुझ जाती है
3. चूने का पानी परीक्षण कोई प्रभाव नहीं कोई प्रभाव नहीं पहले दूधिया, अधिक गैस से पुनः रंगहीन कोई प्रभाव नहीं
4. नम लिटमस पत्र उदासीन (रंग अपरिवर्तित) उदासीन (रंग अपरिवर्तित) दुर्बल अम्लीय (नीला लिटमस हल्का लाल) उदासीन (रंग अपरिवर्तित)
5. क्षारीय पायरोगैलोल विलयन तुरंत गहरा भूरा/काला हो जाता है कोई परिवर्तन नहीं बिना रंग बदले अवशोषित होती है कोई अभिक्रिया या परिवर्तन नहीं

5. पर्यावरण रसायन — ग्रीनहाउस प्रभाव, वैश्विक ऊष्मण, अम्लीय वर्षा व ओजोन क्षरण

5.1 प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव एवं कृत्रिम वैश्विक ऊष्मण

प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव: सूर्य से आने वाली लघु तरंगदैर्घ्य की विकिरणें वायुमंडल से गुजरकर पृथ्वी की सतह को गर्म करती हैं। गर्म पृथ्वी इस ऊष्मा को दीर्घ तरंगदैर्घ्य की अवरक्त विकिरणों (Infrared rays) के रूप में अंतरिक्ष में लौटाती है। वायुमंडल की कुछ विशिष्ट गैसें इन अवरक्त किरणों को अवशोषित कर पुनः धरातल की ओर विकिरित करती हैं। इस प्राकृतिक आवरण के कारण पृथ्वी का औसत तापमान +15°C बना रहता है (इसके अभाव में पृथ्वी -18°C का बर्फीला ग्रह होती)।

प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें: कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$), मीथेन ($\text{CH}_4$), नाइट्रस ऑक्साइड ($\text{N}_2\text{O}$), क्लोरोफ्लोरोकार्बन ($\text{CFC}$) एवं जलवाष्प ($\text{H}_2\text{O}$)।

वैश्विक ऊष्मण (Global Warming): अंधाधुंध जीवाश्म ईंधन दहन और वनों की कटाई से $\text{CO}_2$ का स्तर 280 ppm से बढ़कर 420 ppm से अधिक हो चुका है। अतिरिक्त ऊष्मा रुकने से पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ध्रुवों की बर्फ पिघल रही है और सुंदरबन सहित तटीय क्षेत्रों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है।

5.2 अम्लीय वर्षा (Acid Rain) एवं पत्थर का कोढ़

सामान्य वर्षा जल में $\text{CO}_2$ घुली होने के कारण इसका $\text{pH}$ लगभग 5.6 होता है। जब वर्षा जल का $\text{pH}$ मान 5.6 से कम हो जाता है, तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं।

प्रदूषक स्रोत एवं रासायनिक अभिक्रियाएँ:

  • सल्फर डाइऑक्साइड ($\text{SO}_2$): ताप बिजलीघरों और रिफाइनरियों के धुएं से निकलकर सल्फ्यूरिक अम्ल बनाती है: $$2\text{SO}_2 + \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \\longrightarrow 2\mathbf{\text{H}_2\text{SO}_4}\text{ (सल्फ्यूरिक अम्ल)}$$
  • नाइट्रोजन के ऑक्साइड ($\text{NO}_x$): वाहनों और विमानों के धुएं से निकलकर नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं: $$4\text{NO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + \text{O}_2 \\longrightarrow 4\mathbf{\text{HNO}_3}\text{ (नाइट्रिक अम्ल)}$$

हानिकारक प्रभाव:

  • पत्थर का कोढ़ (Stone Leprosy): अम्लीय वर्षा का सल्फ्यूरिक अम्ल संगमरमर (तस्वीर: ताजमहल, विक्टोरिया मेमोरियल) के कैल्शियम कार्बोनेट को गलाकर भुरभुरे कैल्शियम सल्फेट में बदल देता है: $$\text{CaCO}_3 + \text{H}_2\text{SO}_4 \\longrightarrow \text{CaSO}_4 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\\uparrow$$
  • जलीय पारिस्थितिकी का विनाश: झीलों व नदियों का $\text{pH}$ घटने से मृदा से विषैले एल्युमिनियम आयन घुलकर मछलियों के गलफड़ों को बंद कर देते हैं।
  • मृदा की उर्वरता नष्ट: पत्तियों का क्लोरोफिल नष्ट होता है और भूमि के पोषक तत्व बह जाते हैं।

5.3 समतापमंडल की ओजोन परत ($\text{O}_3$) एवं पराबैंगनी किरणों से रक्षा

धरातल से 15 से 35 किमी ऊपर समतापमंडल (Stratosphere) में ओजोन गैस का एक सघन प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, जिसे ओजोन परत (Ozone Layer) कहते हैं। यह सूर्य की अत्यधिक हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV-B एवं UV-C) को 99% से अधिक अवशोषित कर जीवों को त्वचा कैंसर और मोतियाबिंद से बचाती है।

ओजोन निर्माण एवं विघटन का प्राकृतिक संतुलन:

$$\text{O}_2 \\xrightarrow{\text{UV किरणें}} \text{O} + \text{O}\quad\text{(प्रकाश-अपघटन)}$$ $$\text{O} + \text{O}_2 \\longrightarrow \mathbf{\text{O}_3}\text{ (ओजोन)}$$ $$\text{O}_3 \\xrightarrow{\text{UV-B}} \text{O}_2 + \text{O}\quad\text{(गतिक संतुलन)}$$

5.4 क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) द्वारा ओजोन परत का क्षरण

फ्रिज, एसी और स्प्रे कैन में प्रयुक्त क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC या फ्रीऑन) अत्यधिक स्थिर होने के कारण समतापमंडल में पहुँच जाते हैं। वहाँ तीव्र पराबैंगनी किरणों से टूटकर अत्यंत सक्रिय क्लोरीन मुक्त मूलक ($\text{Cl}^\bullet$) उत्पन्न करते हैं:

$$\text{CF}_2\text{Cl}_2 \\xrightarrow{h\nu} \text{CF}_2\text{Cl}^\bullet + \mathbf{\text{Cl}^\bullet}$$ $$\mathbf{\text{Cl}^\bullet + \text{O}_3 \\longrightarrow \text{ClO}^\bullet + \text{O}_2}$$ $$\mathbf{\text{ClO}^\bullet + \text{O} \\longrightarrow \text{Cl}^\bullet + \text{O}_2}$$

उत्प्रेरकीय विनाश चक्र: तीसरे चरण में क्लोरीन मूलक ($\text{Cl}^\bullet$) पुनः मुक्त हो जाता है! इस प्रकार एक अकेला क्लोरीन परमाणु 1 लाख से अधिक ओजोन अणुओं को नष्ट कर देता है, जिससे अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र का निर्माण हुआ।

वैश्विक संधि: 1987 के ऐतिहासिक मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) के तहत सीएफसी के उत्पादन पर वैश्विक प्रतिबंध लगाया गया।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

पोटेशियम क्लोरेट से ऑक्सीजन निर्माण
$$2\text{KClO}_3 \xrightarrow[\text{MnO}_2]{200-240^\circ\text{C}} 2\text{KCl} + 3\text{O}_2\uparrow$$
KClO₃ और MnO₂ का भार अनुपात 4:1; अपघटन ताप 650°C से घटकर 200–240°C हो जाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड से सामान्य ताप पर ऑक्सीजन
$$2\text{H}_2\text{O}_2 \xrightarrow{\text{MnO}_2} 2\text{H}_2\text{O} + \text{O}_2\uparrow$$
बिना गर्म किए MnO₂ उत्प्रेरक की उपस्थिति में सामान्य ताप पर होने वाली अभिक्रिया।
दानेदार जस्ते से हाइड्रोजन निर्माण
$$Zn + H_2SO_4 (तनु) ZnSO_4 + H_2$$
दानेदार जस्ते में मौजूद कॉपर अशुद्धि उत्प्रेरक का कार्य करती है; तनु HNO₃ का उपयोग वर्जित है।
कॉपर ऑक्साइड का अपचयन (हाइड्रोजन का अपचायक गुण)
$$CuO (काला) + H_2 → Cu (लाल-भूरा) + H_2O$$
गर्म काला कॉपर ऑक्साइड लाल-भूरे तांबे में अपचयित हो जाता है।
संगमरमर के टुकड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड निर्माण
$$CaCO_3 + 2HCl (तनु) CaCl_2 + H_2O + CO_2$$
तनु H₂SO₄ का प्रयोग वर्जित है क्योंकि अविलेय CaSO₄ की परत अभिक्रिया रोक देती है।
चूने के पानी का दो-चरणीय परीक्षण
$$Ca(OH)_2 + CO_2 → CaCO_3 + H_2O →{+CO_2 अधिकता} Ca(HCO_3)_2 (पारदर्शी)$$
अविलेय CaCO₃ से दूधिया; अधिक गैस से विलेय कैल्शियम बाइकार्बोनेट बनकर पुनः पारदर्शी।
लोहे पर जंग लगने की रासायनिक अभिक्रिया
$$4\text{Fe} + 3\text{O}_2 + 2x\text{H}_2\text{O} \longrightarrow 2\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$$
ऑक्सीजन और जलवाष्प दोनों की अनिवार्य उपस्थिति; गैल्वनीकरण (जस्ते की परत) से बचाव।
पत्थर का कोढ़ (संगमरमर पर अम्लीय वर्षा)
$$\text{CaCO}_3 + \text{H}_2\text{SO}_4 \longrightarrow \text{CaSO}_4 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\uparrow$$
अम्लीय वर्षा का सल्फ्यूरिक अम्ल संगमरमर के CaCO₃ को संक्षारित कर भुरभुरा बनाता है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
पोटेशियम क्लोरेट से ऑक्सीजन बनाते समय मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂) क्यों मिलाया जाता है? यह किस प्रकार का उत्प्रेरक है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

वैज्ञानिक कारण:

  1. अपघटन ताप में कमी: शुद्ध पोटेशियम क्लोरेट ($ ext{KClO}_3$) को अकेले गर्म करने पर ऑक्सीजन मुक्त करने के लिए लगभग 650°C उच्च तापमान चाहिए। इससे कांच की नली के पिघलने व विस्फोट का खतरा रहता है। 1 भाग $ ext{MnO}_2$ मिलाने पर यह अपघटन तापमान घटकर मात्र 200°C - 240°C रह जाता है।
  2. अभिक्रिया वेग में वृद्धि: यह ऑक्सीजन बनने की दर को बहुत तेज कर देता है और स्वयं रासायनिक रूप से अपरिवर्तित रहता है।
  3. प्रकार: चूँकि यह अभिक्रिया के वेग को बढ़ाता है, इसलिए $ ext{MnO}_2$ एक धनात्मक उत्प्रेरक (Positive Catalyst) है।
उदाहरण 2
प्रयोगशाला में हाइड्रोजन गैस बनाते समय शुद्ध जस्ते के स्थान पर दानेदार जस्ते (Granulated Zinc) को प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

इसके दो प्रमुख वैज्ञानिक कारण हैं:

  1. विद्युत-रासायनिक उत्प्रेरण: दानेदार जस्ते में सूक्ष्म मात्रा में तांबे ($ ext{Cu}$) की अशुद्धि होती है। अम्ल में डालने पर सूक्ष्म विद्युत-युग्म ($ ext{Zn-Cu}$ कपल) बन जाते हैं, जो धनात्मक उत्प्रेरक की तरह काम कर हाइड्रोजन गैस निकलने की गति को अत्यधिक बढ़ा देते हैं। शुद्ध जस्ता अत्यंत मंद गति से क्रिया करता है।
  2. अधिक पृष्ठीय क्षेत्रफल: पिघले जस्ते को ठंडे पानी में गिराने से यह छिद्रयुक्त और खुरदुरा बनता है, जिससे अम्ल के सीधे संपर्क हेतु बहुत बड़ा पृष्ठीय क्षेत्रफल मिलता है और सुचारू अभिक्रिया होती है।
उदाहरण 3
संगमरमर के टुकड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड बनाते समय तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) का उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

रासायनिक विश्लेषण:

संगमरमर के टुकड़ों ($ ext{CaCO}_3$) पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर होने वाली प्रारंभिक अभिक्रिया है:

$$ ext{CaCO}_3 + ext{H}_2 ext{SO}_4 \longrightarrow \mathbf{ ext{CaSO}_4\downarrow} + ext{H}_2 ext{O} + ext{CO}_2\uparrow$$

परंतु बनने वाला कैल्शियम सल्फेट ($ ext{CaSO}_4$) जल में अत्यधिक अविलेय होता है। यह संगमरमर के टुकड़ों के ऊपर एक अभेद्य, कठोर पपड़ी के रूप में चिपक जाता है। यह परत अम्ल को अंदर के संगमरमर से मिलने नहीं देती, जिससे गैस बनना तुरंत बंद हो जाता है। इसलिए तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($ ext{HCl}$) प्रयुक्त होता है, जिसका लवण $ ext{CaCl}_2$ जल में पूर्ण विलेय है।

उदाहरण 4
स्वच्छ चूने के पानी में कार्बन डाइऑक्साइड गैस (क) अल्प समय तक और (ख) अधिक समय तक प्रवाहित करने पर क्या होता है? संतुलित समीकरण दें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरणबद्ध समाधान:

(क) अल्प समय तक प्रवाहित करने पर: चूने के पानी [$ ext{Ca(OH)}_2$] में अविलेय कैल्शियम कार्बोनेट का श्वेत अवक्षेप बनने से विलयन दूधिया हो जाता है:

$$ ext{Ca(OH)}_2 + ext{CO}_2 \longrightarrow \mathbf{ ext{CaCO}_3\downarrow} ext{ (श्वेत अवक्षेप, दूधिया)} + ext{H}_2 ext{O}$$

(ख) अधिक समय तक प्रवाहित करने पर: लगातार $ ext{CO}_2$ प्रवाहित करने पर अविलेय $ ext{CaCO}_3$ विलेय कैल्शियम बाइकार्बोनेट में बदल जाता है, जिससे विलयन पुनः पूर्णतः पारदर्शी व रंगहीन हो जाता है:

$$ ext{CaCO}_3 + ext{H}_2 ext{O} + ext{CO}_2 ext{ (अधिकता)} \longrightarrow \mathbf{ ext{Ca(HCO}_3)_2} ext{ (जल में विलेय, पारदर्शी)}$$

उदाहरण 5
कार्बन डाइऑक्साइड के जार में जलती मोमबत्ती बुझ जाती है, परंतु जलता हुआ मैग्नीशियम फीता जलता रहता है। क्यों? समीकरण दें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

वैज्ञानिक कारण:

मोमबत्ती की ज्वाला का ताप (लगभग 800°C) $ ext{CO}_2$ के अणुओं को तोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं होता। $ ext{CO}_2$ दहन में सहायक नहीं है और भारी होने के कारण ऑक्सीजन रोककर मोमबत्ती को बुझा देती है।

परंतु जलते मैग्नीशियम फीते का तापमान 2000°C से अधिक होता है और मैग्नीशियम का ऑक्सीजन के प्रति तीव्र आकर्षण होता है। यह प्रचंड ऊष्मा $ ext{CO}_2$ के बंधों को तोड़ देती है और मैग्नीशियम ऑक्सीजन लेकर सफेद मैग्नीशियम ऑक्साइड ($ ext{MgO}$) बनाता है तथा काला कार्बन ($ ext{C}$) मुक्त करता है:

$$\mathbf{2 ext{Mg} + ext{CO}_2 \longrightarrow 2 ext{MgO} ext{ (सफेद चूर्ण)} + ext{C} ext{ (काले कार्बन कण)}}$$

उदाहरण 6
सामान्य ताप पर नाइट्रोजन गैस अक्रिय होती है, परंतु आकाशीय बिजली चमकने पर यह ऑक्सीजन से क्रिया क्यों करती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

संरचनात्मक व्याख्या:

नाइट्रोजन अणु ($ ext{N}_2$) में दोनों परमाणु परस्पर सहसंयोजक त्रिबंध ($ ext{N}\equiv ext{N}$) द्वारा जुड़े होते हैं। इस त्रिबंध को तोड़ने हेतु अत्यधिक ऊर्जा (लगभग 945.3 kJ/mol) चाहिए। सामान्य कमरे के ताप पर अणुओं के पास इतनी ऊर्जा नहीं होती, इसलिए नाइट्रोजन अक्रिय रहती है।

परंतु आकाशीय बिजली चमकने (तड़ित) के समय तापमान 3000°C से अधिक हो जाता है। इस प्रचंड विद्युत-ऊष्मा से त्रिबंध टूट जाता है और नाइट्रोजन परमाणु ऑक्सीजन से क्रिया करके नाइट्रिक ऑक्साइड ($ ext{NO}$) बनाते हैं:

$$ ext{N}_2 + ext{O}_2 \xrightarrow{ ext{तड़ित} / 3000^\circ ext{C}} 2 ext{NO}$$

उदाहरण 7
एक अकेला क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) अणु समतापमंडल में लाखों ओजोन (O₃) अणुओं को कैसे नष्ट करता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्प्रेरकीय विनाश प्रक्रिया:

  1. पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से CFC अणु टूटकर सक्रिय क्लोरीन मुक्त मूलक ($ ext{Cl}^ullet$) बनाते हैं: $ ext{CF}_2 ext{Cl}_2 \xrightarrow{h u} ext{CF}_2 ext{Cl}^ullet + ext{Cl}^ullet$।
  2. यह क्लोरीन मूलक ओजोन से क्रिया कर क्लोरीन मोनोऑक्साइड बनाता है: $ ext{Cl}^ullet + ext{O}_3 \longrightarrow ext{ClO}^ullet + ext{O}_2$।
  3. $ ext{ClO}^ullet$ मूलक वायुमंडल के मुक्त ऑक्सीजन परमाणु से क्रिया कर पुनः क्लोरीन मूलक ($ ext{Cl}^ullet$) को मुक्त कर देता है: $ ext{ClO}^ullet + ext{O} \longrightarrow \mathbf{ ext{Cl}^ullet} + ext{O}_2$।
  4. चूँकि क्लोरीन मूलक अभिक्रिया के अंत में फिर से स्वतंत्र हो जाता है, इसलिए यह बार-बार इसी चक्र को दोहराता है। एक अकेला $ ext{Cl}^ullet$ मूलक निष्क्रिय होने से पहले 1 लाख से अधिक ओजोन अणुओं को नष्ट कर देता है।
उदाहरण 8
अम्लीय वर्षा क्या है? सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) किस प्रकार ऐतिहासिक स्मारकों में "पत्थर का कोढ़" (Stone Leprosy) उत्पन्न करती है? समीकरण दें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

परिभाषा एवं रासायनिक अभिक्रिया:

जब वायुमंडलीय प्रदूषकों (सल्फर व नाइट्रोजन के ऑक्साइडों) के घुलने से वर्षा जल का $ ext{pH}$ मान 5.6 से कम हो जाता है, तो उसे अम्लीय वर्षा (Acid Rain) कहते हैं।

उद्योगों से निकली $ ext{SO}_2$ ऑक्सीकृत होकर वर्षा जल में सल्फ्यूरिक अम्ल बनाती है:

$$2 ext{SO}_2 + ext{O}_2 + 2 ext{H}_2 ext{O} \longrightarrow 2 ext{H}_2 ext{SO}_4$$

यह अम्लीय वर्षा ताजमहल जैसे संगमरमर (कैल्शियम कार्बोनेट, $ ext{CaCO}_3$) के स्मारकों पर गिरकर उसे भुरभुरे कैल्शियम सल्फेट में बदल देती है:

$$\mathbf{ ext{CaCO}_3 + ext{H}_2 ext{SO}_4 \longrightarrow ext{CaSO}_4 + ext{H}_2 ext{O} + ext{CO}_2\uparrow}$$

संगमरमर के इस क्षरण और पीले पड़कर नष्ट होने को ही पत्थर का कोढ़ (Stone Leprosy) कहा जाता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मानना कि ऑक्सीजन स्वयं एक ज्वलनशील गैस है जो जलती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ऑक्सीजन स्वयं कभी नहीं जलती, यह अदह्य है। यह केवल अन्य पदार्थों के जलने में सहायता करती है (दहन पोषक)। बिना ईंधन के केवल ऑक्सीजन में आग नहीं लगाई जा सकती।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हाइड्रोजन वायु से हल्की है, इसलिए इसे प्रयोगशाला में वायु विस्थापन द्वारा एकत्र करना सुरक्षित समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

हाइड्रोजन और वायु का मिश्रण अत्यधिक विस्फोटक होता है। जरा सी चिंगारी से भयानक विस्फोट हो सकता है। इसलिए प्रयोगशाला में हाइड्रोजन को सदैव जल के अधोमुखी विस्थापन द्वारा ही एकत्र किया जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हाइड्रोजन निर्माण में तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के स्थान पर तनु नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

नाइट्रिक अम्ल एक प्रबल ऑक्सीकारक अम्ल है। यह उत्पन्न हाइड्रोजन को तुरंत जल ($ ext{H}_2 ext{O}$) में बदल देता है और स्वयं भूरी $ ext{NO}_2$ गैस बनाता है। इसलिए सदैव तनु $ ext{H}_2 ext{SO}_4$ या तनु $ ext{HCl}$ का प्रयोग करें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जंग को केवल आयरन ऑक्साइड (Fe₂O₃) समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जंग केवल $ ext{Fe}_2 ext{O}_3$ नहीं है; यह जलयोजित फेरिक ऑक्साइड ($ ext{Fe}_2 ext{O}_3 \cdot x ext{H}_2 ext{O}$) है। जल या नमी की अनुपस्थिति में जंग कभी नहीं लग सकती।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

शुष्क बर्फ को बर्फ और कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

शुष्क बर्फ में पानी की एक बूंद भी नहीं होती। यह -78.5°C पर 100% शुद्ध ठोस कार्बन डाइऑक्साइड ($ ext{CO}_2$) है जो बिना पिघले सीधे गैस में बदल जाती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ग्रीनहाउस प्रभाव को पूरी तरह से केवल हानिकारक व कृत्रिम मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव जीवन के लिए अनिवार्य वरदान है; इसके बिना पृथ्वी -18°C का बर्फीला ग्रह होती। मानवीय प्रदूषण से होने वाला अत्यधिक तापमान वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) ही वास्तविक समस्या है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चूने के पानी के परीक्षण में कम समय और अधिक समय के उत्पादों के सूत्रों में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कम समय में अविलेय $ ext{CaCO}_3$ (दूधिया) बनता है। अधिक गैस प्रवाहित करने पर विलेय $ ext{Ca(HCO}_3)_2$ (रंगहीन व पारदर्शी) बनता है।

कुछ परिचित गैसें — 4-क्वाड्रेंट वेक्टर कॉन्सेप्ट मैप

कुछ परिचित गैसें (Know About Some Common Gases) – WBBSE Class 8 Science चार मुख्य गैसें: ऑक्सीजन (O₂) • हाइड्रोजन (H₂) • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) • नाइट्रोजन (N₂) व पर्यावरण 1. ऑक्सीजन (O₂) — जीवन एवं दहन का मुख्य समर्थक प्रयोगशाला निर्माण: 2KClO₃ ➔ 2KCl + 3O₂↑ (MnO₂ उत्प्रेरक, 200-240°C) संग्रहण एवं परीक्षण: जल के अधोमुखी विस्थापन द्वारा • जलती अगरबत्ती प्रज्वलित ऑक्साइड व जंग: अम्लीय (SO₂), क्षारीय (MgO), जंग: Fe₂O₃·xH₂O ★ MnO₂ उत्प्रेरक अभिक्रिया का वेग बढ़ाता है, स्वयं अपरिवर्तित रहता है 2. हाइड्रोजन (H₂) — सबसे हल्की गैस एवं शक्तिशाली अपचायक प्रयोगशाला निर्माण: Zn + तनु H₂SO₄ ➔ ZnSO₄ + H₂↑ (बिना गर्म किए, सामान्य ताप) दानेदार जस्ता (Zn): Cu अशुद्धि उत्प्रेरक बनती है; अधिक पृष्ठीय क्षेत्रफल प्रदान करता है अपचायक गुण: CuO + H₂ ➔ Cu + H₂O (काला कॉपर ऑक्साइड लाल-भूरे तांबे में) ★ पॉप ध्वनि के साथ नीली ज्वाला से जलती है • शून्य-प्रदूषण ग्रीन फ्यूल 3. कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) — भारी एवं अग्निशामक गैस प्रयोगशाला निर्माण: CaCO₃ (संगमरमर) + 2HCl ➔ CaCl₂ + H₂O + CO₂↑ चूने के पानी का परीक्षण: पहले दूधिया (CaCO₃↓); अधिक गैस से पुनः रंगहीन (Ca(HCO₃)₂) प्रमुख गुणधर्म: वायु से 1.5 गुना भारी • आग बुझाती है • शुष्क बर्फ (-78.5°C) ★ तनु H₂SO₄ का प्रयोग वर्जित: अविलेय CaSO₄ की परत अभिक्रिया रोक देती है 4. नाइट्रोजन (N₂) एवं पर्यावरणीय संतुलन रासायनिक निष्क्रियता: मजबूत N≡N त्रिबंध तोड़ने हेतु अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता नाइट्रोजन स्थिरीकरण: तड़ित/बिजली चमकना (NO, HNO₃) • राइजोबियम जीवाणु वैश्विक प्रभाव: ग्रीनहाउस प्रभाव (CO₂, CH₄) • अम्लीय वर्षा (SO₂, NO₂) ★ समतापमंडल की ओजोन परत (O₃) हानिकारक पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
ऑक्सीजन (O₂): वायु का 20.95%; प्रयोगशाला में KClO₃ व MnO₂ (4:1) को 200–240°C पर गर्म करके अथवा सामान्य ताप पर H₂O₂ के उत्प्रेरकीय अपघटन से तैयार की जाती है।
मुख्य बिंदु 2
उत्प्रेरक: MnO₂ अभिक्रिया के वेग को बढ़ाता है, परंतु स्वयं द्रव्यमान व रासायनिक संघटन में अपरिवर्तित रहता है।
मुख्य बिंदु 3
ऑक्साइड: अधातुओं के अम्लीय (SO₂, CO₂); धातुओं के क्षारीय (Na₂O, MgO); दोनों गुणों वाले उभयधर्मी (ZnO, Al₂O₃); तथा उदासीन ऑक्साइड (CO, NO, H₂O)।
मुख्य बिंदु 4
हाइड्रोजन (H₂): सबसे हल्की गैस; दानेदार जस्ते और तनु H₂SO₄ से निर्मित; कॉपर अशुद्धि उत्प्रेरक का कार्य करती है; पॉप ध्वनि के साथ जलती है; प्रबल अपचायक (CuO + H₂ ➔ Cu + H₂O)।
मुख्य बिंदु 5
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): वायु से 1.5 गुना भारी; संगमरमर (CaCO₃) व तनु HCl से तैयार; तनु H₂SO₄ अविलेय CaSO₄ बनने के कारण अनुपयुक्त है।
मुख्य बिंदु 6
चूने का पानी परीक्षण: पहले अविलेय CaCO₃ के कारण दूधिया; अधिक CO₂ से विलेय Ca(HCO₃)₂ बनने से पुनः पारदर्शी।
मुख्य बिंदु 7
नाइट्रोजन (N₂): N≡N त्रिबंध की उच्च वियोजन ऊर्जा (945 kJ/mol) के कारण कमरे के ताप पर अक्रिय; तड़ित एवं राइजोबियम जीवाणु द्वारा मृदा में स्थिर होती है।
मुख्य बिंदु 8
पर्यावरण रसायन: ग्रीनहाउस गैसें (CO₂, CH₄) अवरक्त किरणों को रोककर तापमान बढ़ाती हैं; अम्लीय वर्षा (pH < 5.6) पत्थर का कोढ़ पैदा करती है; समतापमंडल की ओजोन (O₃) पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है जिसे CFC नष्ट करते हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
प्रयोगशाला में ऑक्सीजन गैस को वायु के विस्थापन के स्थान पर जल के अधोमुखी विस्थापन द्वारा क्यों एकत्र किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

ऑक्सीजन जल में अत्यंत अल्प विलेय होती है (20°C पर 100 सेमी³ जल में मात्र लगभग 3 सेमी³ घुलती है), अतः जल के ऊपर एकत्र करने पर गैस की कोई हानि नहीं होती। दूसरी ओर, ऑक्सीजन का वाष्प घनत्व 16 और वायु का 14.4 है, यानी इनके घनत्व में बहुत कम अंतर है। वायु विस्थापन से एकत्र करने पर वायुमंडलीय गैसें मिलकर इसे अशुद्ध कर देती हैं। जल के विस्थापन द्वारा पूर्ण शुद्ध गैस मिलती है और जार में गैस भरने का स्तर स्पष्ट दिखाई देता है।


2
लोहे पर जंग लगने के लिए कौन सी दो परिस्थितियाँ एक साथ होना अनिवार्य हैं? गैल्वनीकरण जंग को कैसे रोकता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

अनिवार्य परिस्थितियाँ: जंग लगने के लिए ऑक्सीजन ($ ext{O}_2$) और तरल जल या जलवाष्प/नमी ($ ext{H}_2 ext{O}$) दोनों की एक साथ उपस्थिति अनिवार्य है। इनमें से किसी एक की भी अनुपस्थिति में लोहे पर जंग नहीं लगता।

गैल्वनीकरण की क्रियाविधि: लोहे पर पिघले हुए जस्ते (Zinc) की पतली परत चढ़ाना गैल्वनीकरण कहलाता है। जस्ता वायु की नमी से क्रिया कर सुरक्षात्मक जिंक कार्बोनेट परत बनाता है जो लोहे को वायु-जल से अलग रखती है। यदि खरोंच भी आ जाए, तो विद्युत-रासायनिक श्रेणी में जस्ता लोहे से अधिक सक्रिय होने के कारण स्वयं संक्षारित होकर लोहे को पूरी तरह सुरक्षित रखता है।


3
एक रंगहीन गंधहीन गैस X जलती तीली को बुझा देती है और चूने के पानी में प्रवाहित करने पर विलयन दूधिया हो जाता है। गैस X का नाम क्या है? दूधिया होने का संतुलित समीकरण लिखें।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

गैस X: कार्बन डाइऑक्साइड ($ ext{CO}_2$)।

समीकरण:

$$\mathbf{ ext{Ca(OH)}_2 ext{ (aq)} + ext{CO}_2 ext{ (g)} \longrightarrow ext{CaCO}_3\downarrow ext{ (श्वेत अवक्षेप, दूधिया)} + ext{H}_2 ext{O} ext{ (l)}}$$

जल में अविलेय कैल्शियम कार्बोनेट ($ ext{CaCO}_3$) बनने के कारण ही चूने का पानी दूधिया हो जाता है।


4
केवल एक जलती हुई लकड़ी की तीली से आप ऑक्सीजन और हाइड्रोजन गैस के जारों में कैसे अंतर करेंगे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

जलती हुई तीली को प्रत्येक जार के मुंह पर ले जाने पर:

  • ऑक्सीजन के जार में: तीली और अधिक चमकदार व तेज लौ के साथ जलने लगेगी, क्योंकि ऑक्सीजन दहन की पोषक है। (बिना लौ वाली सुलगती तीली तुरंत प्रज्वलित हो जाएगी)।
  • हाइड्रोजन के जार में: जार के मुंह पर गैस तीखी "पॉप" ध्वनि के साथ नीली लौ से जल उठेगी और तीली को जार के भीतर ले जाने पर वह बुझ जाएगी, क्योंकि हाइड्रोजन स्वयं जलती है परंतु दहन पोषक नहीं है।

5
नाइट्रोजन चक्र में राइजोबियम (Rhizobium) जीवाणु का क्या महत्व है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

राइजोबियम जीवाणु मटर, चना, सेम आदि दलहनी पौधों की जड़ों की ग्रंथियों (Root nodules) में सहजीवी के रूप में रहते हैं। इनमें नाइट्रोजिनेज एंजाइम होता है जो वायुमंडल की स्वतंत्र नाइट्रोजन गैस को सीधे ग्रहण कर विलेय नाइट्रेट यौगिकों में बदल देता है। पौधे इन नाइट्रेटों से जीवन-रक्षक प्रोटीन बनाते हैं और बदले में जीवाणु को भोजन व आश्रय प्रदान करते हैं।


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