(क) रासायनिक संयोजन के दो आधारभूत नियम
वैज्ञानिक एंटोनी एल. लैवोजियर और जोसेफ एल. प्राउस्ट ने अनगिनत प्रयोगों के पश्चात निम्नलिखित दो नियमों की स्थापना की:
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass):
"किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन (निर्माण) किया जा सकता है और न ही विनाश।"
अर्थात किसी रासायनिक अभिक्रिया में उत्पादों का कुल द्रव्यमान अभिकारकों के कुल द्रव्यमान के ठीक बराबर होता है।
$$ ext{अभिकारकों का कुल द्रव्यमान} = ext{उत्पादों का कुल द्रव्यमान}$$ प्रयोग: बेरियम क्लोराइड ($BaCl_2$) और सोडियम सल्फेट ($Na_2SO_4$) के जलीय घोलों को एक शंक्वाकार फ्लास्क में अलग-अलग रखकर तौलते हैं। जब दोनों को आपस में मिलाया जाता है, तो बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप बनता है। पुनः तौलने पर फ्लास्क का कुल भार बिल्कुल अपरिवर्तित रहता है। - स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant / Definite Proportions):
जोसेफ प्राउस्ट के अनुसार—"किसी भी रासायनिक यौगिक में तत्व सदैव एक निश्चित द्रव्यमान के अनुपात में विद्यमान होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो अथवा किसी भी विधि से बनाया गया हो।"
उदाहरण 1 (जल - $H_2O$): शुद्ध जल चाहे नदी का हो, कुएं का हो, समुद्र का हो या प्रयोगशाला में संश्लेषित किया गया हो, उसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमानों का अनुपात सदैव $1:8$ ही होता है ($2\text{ g हाइड्रोजन} : 16\text{ g ऑक्सीजन} = 1:8$)। यदि $9\text{ g}$ जल का अपघटन किया जाए, तो सदैव $1\text{ g}$ हाइड्रोजन तथा $8\text{ g}$ ऑक्सीजन प्राप्त होगी।
उदाहरण 2 (अमोनिया - $NH_3$): अमोनिया में नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के द्रव्यमानों का अनुपात सदैव $14:3$ होता है।
(ख) जॉन डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton's Atomic Theory, 1808)
डाल्टन ने रासायनिक संयोजन के नियमों की व्याख्या करने के लिए अपना परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसके प्रमुख अभिगृहीत निम्नलिखित हैं:
- सभी द्रव्य (चाहे तत्व, यौगिक या मिश्रण हों) अत्यंत सूक्ष्म कणों से बने होते हैं, जिन्हें परमाणु (Atoms) कहते हैं।
- परमाणु अविभाज्य सूक्ष्मतम कण होते हैं, जो रासायनिक अभिक्रिया में न तो बनाए जा सकते हैं और न ही नष्ट किए जा सकते हैं (द्रव्यमान संरक्षण के नियम की पुष्टि)।
- किसी एक दिए गए तत्व के सभी परमाणुओं का द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणधर्म पूर्णतः समान होते हैं।
- भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणधर्म भिन्न-भिन्न होते हैं।
- परमाणु परस्पर छोटी पूर्ण संख्याओं के सरल अनुपात में संयोग करके यौगिक (Compounds) का निर्माण करते हैं (स्थिर अनुपात के नियम की पुष्टि)।
- किसी भी यौगिक में परमाणुओं की सापेक्ष संख्या एवं प्रकार निश्चित होते हैं।