(क) पदार्थ कणों से मिलकर बना है (Particulate Nature of Matter)
प्राचीन काल में पदार्थ के स्वरूप के बारे में दो विचारधाराएँ प्रचलित थीं। एक विचारधारा का मानना था कि पदार्थ लकड़ी के लट्ठे की तरह 'सतत' (Continuous) होता है, जबकि दूसरी विचारधारा मानती थी कि पदार्थ रेत के कणों की तरह सूक्ष्म कणों (Particles) से मिलकर बना है।
प्रायोगिक सत्यापन (पोटैशियम परमैंगनेट प्रयोग): यदि हम 100 mL जल में पोटैशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$) के मात्र 2-3 छोटे क्रिस्टल घोलें, तो पूरा जल गहरे गुलाबी/बैंगनी रंग का हो जाता है। अब इस घोल में से 10 mL निकालकर 90 mL स्वच्छ जल में मिलाएँ। फिर इस नए घोल से 10 mL निकालकर अगले 90 mL स्वच्छ जल में मिलाएँ। इस प्रकार 5 से 8 बार तनुकरण (Dilution) करने पर भी जल का रंग रंगीन बना रहता है। यह सिद्ध करता है कि $KMnO_4$ के एक छोटे से क्रिस्टल में करोड़ों-अरबों अत्यंत सूक्ष्म कण विद्यमान होते हैं, जो बार-बार विभाजित होकर जल के कणों में फैलते चले जाते हैं।
(ख) पदार्थ के कणों के तीन प्रमुख अभिलाक्षणिक गुण
- पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान (Intermolecular Space) होता है: जब हम पानी में नमक, शर्करा (चीनी) या डेटॉल घोलते हैं, तो जल का स्तर (Water level) बिल्कुल नहीं बढ़ता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नमक के कण जल के कणों के बीच उपस्थित खाली स्थानों में पूर्णतः समाहित हो जाते हैं।
- पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं (Particles are in Constant Motion):
- कमरे के एक कोने में रखी बिना जली अगरबत्ती की सुगंध लेने के लिए हमें उसके समीप जाना पड़ता है, किंतु जलाई गई अगरबत्ती की खुशबू दूर बैठे ही हमारे पास पहुँच जाती है।
- कणों की यह गति उनके भीतर उपस्थित गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) के कारण होती है। तापमान बढ़ाने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे कणों का वेग तीव्र हो जाता है।
- दो विभिन्न पदार्थों के कणों का स्वतः मिलना विसरण (Diffusion) कहलाता है। तापमान में वृद्धि होने पर विसरण की दर तीव्र हो जाती है।
- पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं (Intermolecular Force of Attraction): लोहे की कील, चाक का टुकड़ा और एक रबर बैंड लें। हथौड़ा मारकर या खींचकर इन्हें तोड़ने का प्रयास करें। हम पाते हैं कि चाक आसानी से टूट जाता है, रबर बैंड खींचने पर थोड़ा प्रतिरोध दिखाता है, किंतु लोहे की कील को तोड़ना अत्यधिक कठिन है। यह दर्शाता है कि विभिन्न पदार्थों में कणों के बीच आकर्षण बल का परिमाण भिन्न-भिन्न होता है (लोहा > रबर बैंड > चाक)।