(क) शुद्ध पदार्थ की वैज्ञानिक अवधारणा
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक शुद्ध पदार्थ (Pure Substance) एक ही प्रकार के कणों से मिलकर बना होता है। इसके सभी कणों की रासायनिक प्रकृति एक समान होती है। शुद्ध पदार्थों को भौतिक विधियों द्वारा अन्य प्रकार के द्रव्यों में विभाजित नहीं किया जा सकता। शुद्ध पदार्थ दो प्रकार के होते हैं:
- तत्व (Elements): पदार्थ का वह मूल रूप जिसे रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता (उदा: लोहा, तांबा, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, सोना)।
- यौगिक (Compounds): वह पदार्थ जो दो या दो से अधिक तत्वों के एक निश्चित भारानुपात में रासायनिक संयोग से बनता है (उदा: जल $H_2O$, कार्बन डाइऑक्साइड $CO_2$, मेथेन $CH_4$, सोडियम क्लोराइड $NaCl$)।
(ख) मिश्रण (Mixture) एवं उसके प्रकार
जब दो या दो से अधिक तत्व या यौगिक किसी भी अनिश्चित अनुपात में बिना किसी रासायनिक बंध के भौतिक रूप से मिलाए जाते हैं, तो प्राप्त पदार्थ को मिश्रण कहते हैं। मिश्रण में उसके अवयवी घटकों के गुणधर्म सुरक्षित रहते हैं। मिश्रण दो प्रकार के होते हैं:
| लक्षण / आधार | समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) | विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture) |
|---|---|---|
| संगठन की एकरूपता | संपूर्ण मिश्रण में इसका संघटन पूर्णतः एकसमान (Uniform composition) होता है। | मिश्रण के विभिन्न भागों में इसका संघटन भौतिक रूप से असमान (Non-uniform) होता है। |
| पृथक्करण सीमा | अवयवों के बीच कोई सुस्पष्ट भौतिक पृथक्करण सीमा (Boundary of separation) नहीं दिखती। | घटकों के मध्य स्पष्ट भौतिक पृथक्करण सीमा नग्न आँखों या लेंस से दिखाई देती है। |
| दृश्यता | घटक कणों को नग्न आँखों या सामान्य सूक्ष्मदर्शी से अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। | घटक कण प्रायः अलग-अलग साफ दिखाई देते हैं। |
| उदाहरण | जल में नमक का घोल, चीनी का शरबत, वायु, पीतल (मिश्रधातु), एल्कोहॉल और जल। | जल में बालू/रेत, तेल और जल, लोहा और गंधक का चूर्ण, गंदला पानी, रक्त, दूध। |