(क) प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर
| लक्षण |
प्रोकैरियोटिक कोशिका (Prokaryotic) |
यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic) |
| 1. आकार |
प्रायः अत्यंत छोटा ($1$ से $10\ \mu ext{m}$)। |
प्रायः बड़ा ($5$ से $100\ \mu ext{m}$)। |
| 2. केंद्रकीय क्षेत्र |
अस्पष्ट, केंद्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है। इसे केंद्रीकाय (Nucleoid) कहते हैं। |
सुस्पष्ट, दोहरी केंद्रक झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक उपस्थित होता है। |
| 3. गुणसूत्र |
एकल (Single) वृत्ताकार गुणसूत्र। |
एक से अधिक रैखिक गुणसूत्र (DNA + हिस्टोन प्रोटीन)। |
| 4. झिल्ली-युक्त कोशिकांग |
माइटोकॉन्ड्रिया, ER, गॉल्जी उपकरण, लवक आदि पूर्णतः अनुपस्थित। |
सभी झिल्ली-युक्त कोशिकांग सुविकसित रूप से उपस्थित। |
| 5. राइबोसोम |
छोटे 70S प्रकार के राइबोसोम। |
बड़े 80S प्रकार के राइबोसोम (माइटोकॉन्ड्रिया में 70S)। |
| 6. उदाहरण |
जीवाणु (Bacteria), नीले-हरे शैवाल (Cyanobacteria), माइकोप्लाज्मा। |
कवक (Fungi), पादप कोशिकाएं, जंतु कोशिकाएं, प्रोटोजोआ। |
(ख) प्लाज्मा झिल्ली एवं परासरण (Osmosis) के तीन प्रभाव
प्लाज्मा झिल्ली लिपिड और प्रोटीन से बनी एक लचीली झिल्ली है। इसे वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली (Selectively Permeable Membrane) कहते हैं क्योंकि यह केवल कुछ चुने हुए पदार्थों को ही अंदर या बाहर आने-जाने देती है, सभी को नहीं।
परासरण की परिभाषा: "जल के अणुओं की गति जब एक वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली के माध्यम से उच्च जल सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न जल सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर होती है, तो उसे परासरण कहते हैं।"
- अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic Solution): यदि कोशिका के बाहरी माध्यम में जल की सांद्रता कोशिका के भीतर से अधिक हो (तनु घोल), तो जल अंतःपरासरण (Endosmosis) द्वारा कोशिका में प्रवेश करता है, जिससे कोशिका फूल जाती है (उदा: किशमिश को पानी में रखने पर फूलना)।
- समपरासरी विलयन (Isotonic Solution): यदि बाहरी माध्यम और कोशिका द्रव की जल सांद्रता बिल्कुल समान हो, तो दोनों ओर जल का शुद्ध प्रवाह शून्य होता है। कोशिका के आकार में कोई परिवर्तन नहीं होता।
- अतिपरासरी विलयन (Hypertonic Solution): यदि बाहरी घोल अधिक सांद्र हो (जल की सांद्रता कोशिका से कम हो), तो बहिःपरासरण (Exosmosis) द्वारा जल कोशिका से बाहर निकल जाता है, जिससे कोशिका सिकुड़ जाती है (उदा: अंगूर को सांद्र नमक के घोल में रखने पर पिचक जाना)। पादप कोशिका में इसे जीवद्रव्यकुंचन (Plasmolysis) कहते हैं।