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CBSE • कक्षा 9 • Science • अध्याय 5
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

जीवन की मौलिक इकाई

संसार के सभी सजीव प्राणी—चाहे वह एककोशिकीय सूक्ष्म अमीबा अथवा बैक्टीरिया हो, या विशालकाय बरगद का वृक्ष अथवा मनुष्य—सभी की शारीरिक संरचना का निर्माण एक अत्यंत सूक्ष्म ईकाई द्वारा होता है। इस मूलभूत संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को कोशिका (Cell) कहा जाता है। जिस प्रकार अनगिनत छोटी-छोटी ईंटों को जोड़कर एक विशाल बहुमंजिला भवन का निर्माण होता है, उसी प्रकार खरबों कोशिकाओं के सुनियोजित संयोजन से सजीव शरीर की रचना होती है। कोशिका की खोज का गौरव 1665 में ब्रिटिश वैज्ञानिक रॉबर्ट हुक (Robert Hooke) को जाता है, जिन्होंने स्वनिर्मित सूक्ष्मदर्शी द्वारा कॉर्क (पेड़ की छाल) की पतली काट में मधुमक्खी के छत्ते जैसी छोटी-छोटी कोठरियाँ देखीं और उन्हें लैटिन भाषा के शब्द 'सेल्युला' (अर्थात छोटा कमरा) से 'सेल' (Cell) नाम दिया। 1674 में ल्यूवेनहॉक ने उन्नत सूक्ष्मदर्शी से तालाब के स्वच्छ जल में स्वतंत्र जीवित कोशिकाओं की खोज की। 1838-39 में एम. जे. श्लीडेन एवं थियोडोर श्वान ने प्रसिद्ध 'कोशिका सिद्धांत' (Cell Theory) प्रतिपादित किया, जिसे 1855 में रुडोल्फ विरचो ने "ओमनिस सेल्युला-ए-सेल्युला" (सभी नई कोशिकाएं पूर्ववर्ती कोशिकाओं के विभाजन से बनती हैं) का अमर सिद्धांत देकर पूर्ण किया। प्रत्येक कोशिका के तीन प्रमुख घटक होते हैं—प्लाज्मा झिल्ली (वर्णनात्मक पारगम्य झिल्ली), केंद्रक (कोशिका का नियंत्रण कक्ष), तथा कोशिका द्रव्य जिसमें विभिन्न जीवन-रक्षक कोशिकांग (Cell Organelles)—जैसे माइटोकॉन्ड्रिया (कोशिका का पावरहाउस), लाइसोसोम (आत्मघाती थैली), अंतर्द्रव्यी जालिका (ER), गॉल्जी उपकरण, लवक (प्लास्टिड) एवं रसधानियाँ स्थित होती हैं। इसके साथ ही जीवन की निरंतरता बनाए रखने के लिए दो प्रकार के कोशिका विभाजन—समसूत्री (Mitosis) एवं अर्धसूत्री (Meiosis) की प्रक्रिया संपन्न होती है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE Class 9) बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय का 6 से 8 अंकों का भार है। पादप एवं जंतु कोशिका का सचित्र तुलनात्मक अंतर, माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का बिजलीघर क्यों कहते हैं, लाइसोसोम को आत्मघाती थैली क्यों कहा जाता है, प्लाज्मा झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली क्यों कहते हैं, तथा परासरण (Osmosis) की परिघटना पर व्याख्यात्मक व चित्र आधारित प्रश्न प्रतिवर्ष निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।

🔬 क्या आप जानते हैं: आपके शरीर में लगभग 37 लाख करोड़ (37 Trillion) जीवित मजदूर बिना एक पल रुके 24 घंटे काम कर रहे हैं?

जब आप सो रहे होते हैं, तब भी आपके शरीर के भीतर एक महा-महानगर जितनी हलचल मच रही होती है! अरबों की संख्या में नन्हें जीवित कारखाने अपनी-अपनी चौकियों पर मुस्तैद रहते हैं।

इन कारखानों में अपना एक मास्टर कंट्रोल रूम है जो डीएनए के निर्देशों से पूरे शहर को चलाता है (केंद्रक); एक ऊर्जा संयंत्र है जो निरंतर एटीपी (ATP) के रूप में जैविक विद्युत का उत्पादन करता है (माइटोकॉन्ड्रिया); एक पैकेजिंग और कूरियर कंपनी है जो प्रोटीन को छांटकर सही पते पर पहुँचाती है (गॉल्जी उपकरण); और यहाँ तक कि एक सुसाइड स्क्वाड (आत्मघाती दस्ता) भी तैनात है, जो कारखाना पुराना या संक्रमित होने पर पूरे शहर की सुरक्षा के लिए स्वयं को विस्फोट से उड़ा देता है (लाइसोसोम)!

यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि आपके शरीर की प्रत्येक कोशिका (Cell) की वास्तविक कार्यप्रणाली है! प्याज की एक झिल्ली को सूक्ष्मदर्शी के नीचे रखने पर दिखने वाली जादुई ईंटें वास्तव में जीवन के किस गहरे रहस्य को अपने भीतर समेटे हुए हैं? आइए, जीवन के इस मूलभूत अणु-परमाणु से परे जैविक ब्रह्मांड की खोज करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय आपकी शैक्षणिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों निर्णायक है?

  1. CBSE बोर्ड परीक्षा में उच्चतम अंक स्कोरिंग: पादप कोशिका बनाम जंतु कोशिका का चित्र व तुलनात्मक सारणी (3-5 अंक), परासरण व विसरण में अंतर, लाइसोसोम व माइटोकॉन्ड्रिया पर कारण स्पष्टीकरण प्रश्न 100% पूछे जाते हैं।
  2. Class 11 & 12 Biology (Cell Biology & Genetics) का आधार: 11वीं कक्षा का संपूर्ण 'Cell Biology' (Cell Cycle, Biomolecules) और 12वीं की जेनेटिक्स (डीएनए, आरएनए, प्रोटीन संश्लेषण) सीधे इसी अध्याय की नींव पर आधारित है।
  3. स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं जैव-प्रौद्योगिकी की समझ: कैंसर रोग (अनियंत्रित कोशिका विभाजन), एंटीबायोटिक्स की कार्यविधि (जीवाणु कोशिका भित्ति को नष्ट करना), और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को वैज्ञानिक रूप से समझना।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • सजीव एवं निर्जीव में मूलभूत अंतर (श्वसन, पोषण, वृद्धि एवं प्रजनन)।
  • सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आधारभूत कार्यप्रणाली (वस्तु को आवर्धित करके देखना)।
  • विलेय, विलायक एवं विलयन की सांद्रता का सामान्य ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • कोशिका की खोज के ऐतिहासिक चरणों (रॉबर्ट हुक, ल्यूवेनहॉक, श्लीडेन, श्वान, विरचो) को कालक्रमानुसार स्पष्ट कर सकेंगे।
  • प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिकाओं में स्पष्ट वैज्ञानिक विभेद कर सकेंगे।
  • प्लाज्मा झिल्ली की वर्णात्मक पारगम्यता और परासरण (अल्पपरासरी, समपरासरी, अतिपरासरी घोलों का प्रभाव) की व्याख्या कर सकेंगे।
  • पादप कोशिका एवं जंतु कोशिका की संरचना का नामांकित चित्र बनाकर उनके प्रमुख अंतरों को सूचीबद्ध कर सकेंगे।
  • विभिन्न कोशिकांगों (माइटोकॉन्ड्रिया, लाइसोसोम, गॉल्जी उपकरण, अंतर्द्रव्यी जालिका, लवक, रसधानियाँ) के विशिष्ट कार्यों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • समसूत्री (Mitosis) एवं अर्धसूत्री (Meiosis) कोशिका विभाजन के उद्देश्यों एवं संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या के अंतर को समझ सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. कोशिका की ऐतिहासिक खोज एवं कोशिक...
2 2. प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक क...
3 3. प्रमुख कोशिकांग एवं उनके विशिष्ट...
4 4. पादप एवं जंतु कोशिका में तुलना त...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. कोशिका की ऐतिहासिक खोज एवं कोशिका सिद्धांत

(क) कोशिका की खोज के मील के पत्थर

  1. रॉबर्ट हुक (1665): कॉर्क की पतली काट में स्वनिर्मित सूक्ष्मदर्शी द्वारा मधुमक्खी के छत्ते के समान कोष्ठ देखे और उन्हें 'सेल' (Cell) नाम दिया। उन्होंने वास्तव में मृत पादप कोशिकाओं की कोशिका भित्तियों को देखा था।
  2. एंटोन वॉन ल्यूवेनहॉक (1674): उन्नत सूक्ष्मदर्शी की सहायता से तालाब के जल में पहली बार स्वतंत्र रूप से जीवित कोशिकाओं (जीवाणु, प्रोटोजोआ, शुक्राणु) का अवलोकन किया।
  3. रॉबर्ट ब्राउन (1831): आर्किड की जड़ की कोशिकाओं में केंद्र में एक गोल संरचना की खोज की और उसे केंद्रक (Nucleus) नाम दिया।
  4. जे.ई. पुरकिंजे (1839): कोशिका के भीतर उपस्थित तरल जैविक पदार्थ को जीवद्रव्य (Protoplasm) नाम दिया। (हक्सले ने जीवद्रव्य को 'जीवन का भौतिक आधार' कहा था)।
  5. कोशिका सिद्धांत (Cell Theory):
    • जर्मन वनस्पतिशास्त्री एम. जे. श्लीडेन (1838) तथा जंतुविज्ञानी थियोडोर श्वान (1839) ने प्रतिपादित किया कि "सभी पौधे एवं जंतु कोशिकाओं से बने होते हैं और कोशिका जीवन की मूलभूत इकाई है।"
    • रुडोल्फ विरचो (1855) ने इस सिद्धांत को आगे बढ़ाया और प्रसिद्ध सूत्र दिया—"Omnis cellula-e-cellula", अर्थात "सभी नई कोशिकाओं की उत्पत्ति पूर्ववर्ती जीवित कोशिकाओं के विभाजन से ही होती है।"
अपवाद: विषाणु (Virus) कोशिका सिद्धांत का एक प्रमुख अपवाद हैं, क्योंकि इनमें स्वतंत्र रूप से कोई कोशिकीय संरचना नहीं होती और ये सजीव पोषक शरीर के बाहर अक्रिय क्रिस्टल के रूप में रहते हैं।

2. प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक कोशिका तथा परासरण परिघटना

(क) प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर

लक्षण प्रोकैरियोटिक कोशिका (Prokaryotic) यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic)
1. आकार प्रायः अत्यंत छोटा ($1$ से $10\ \mu ext{m}$)। प्रायः बड़ा ($5$ से $100\ \mu ext{m}$)।
2. केंद्रकीय क्षेत्र अस्पष्ट, केंद्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है। इसे केंद्रीकाय (Nucleoid) कहते हैं। सुस्पष्ट, दोहरी केंद्रक झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक उपस्थित होता है।
3. गुणसूत्र एकल (Single) वृत्ताकार गुणसूत्र। एक से अधिक रैखिक गुणसूत्र (DNA + हिस्टोन प्रोटीन)।
4. झिल्ली-युक्त कोशिकांग माइटोकॉन्ड्रिया, ER, गॉल्जी उपकरण, लवक आदि पूर्णतः अनुपस्थित। सभी झिल्ली-युक्त कोशिकांग सुविकसित रूप से उपस्थित।
5. राइबोसोम छोटे 70S प्रकार के राइबोसोम। बड़े 80S प्रकार के राइबोसोम (माइटोकॉन्ड्रिया में 70S)।
6. उदाहरण जीवाणु (Bacteria), नीले-हरे शैवाल (Cyanobacteria), माइकोप्लाज्मा। कवक (Fungi), पादप कोशिकाएं, जंतु कोशिकाएं, प्रोटोजोआ।

(ख) प्लाज्मा झिल्ली एवं परासरण (Osmosis) के तीन प्रभाव

प्लाज्मा झिल्ली लिपिड और प्रोटीन से बनी एक लचीली झिल्ली है। इसे वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली (Selectively Permeable Membrane) कहते हैं क्योंकि यह केवल कुछ चुने हुए पदार्थों को ही अंदर या बाहर आने-जाने देती है, सभी को नहीं।

परासरण की परिभाषा: "जल के अणुओं की गति जब एक वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली के माध्यम से उच्च जल सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न जल सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर होती है, तो उसे परासरण कहते हैं।"

  1. अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic Solution): यदि कोशिका के बाहरी माध्यम में जल की सांद्रता कोशिका के भीतर से अधिक हो (तनु घोल), तो जल अंतःपरासरण (Endosmosis) द्वारा कोशिका में प्रवेश करता है, जिससे कोशिका फूल जाती है (उदा: किशमिश को पानी में रखने पर फूलना)।
  2. समपरासरी विलयन (Isotonic Solution): यदि बाहरी माध्यम और कोशिका द्रव की जल सांद्रता बिल्कुल समान हो, तो दोनों ओर जल का शुद्ध प्रवाह शून्य होता है। कोशिका के आकार में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  3. अतिपरासरी विलयन (Hypertonic Solution): यदि बाहरी घोल अधिक सांद्र हो (जल की सांद्रता कोशिका से कम हो), तो बहिःपरासरण (Exosmosis) द्वारा जल कोशिका से बाहर निकल जाता है, जिससे कोशिका सिकुड़ जाती है (उदा: अंगूर को सांद्र नमक के घोल में रखने पर पिचक जाना)। पादप कोशिका में इसे जीवद्रव्यकुंचन (Plasmolysis) कहते हैं।

3. प्रमुख कोशिकांग एवं उनके विशिष्ट जीवन-रक्षक कार्य

यूकैरियोटिक कोशिका द्रव्य में कई विशिष्ट उप-संरचनाएं होती हैं जिन्हें कोशिकांग (Organelles) कहते हैं:

  1. अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum - ER): यह झिल्ली-युक्त नलिकाओं और शीटों का एक विशाल तंत्र है। यह दो प्रकार की होती है:
    • खुरदुरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER): इसकी सतह पर राइबोसोम चिपके होते हैं, जो प्रोटीन संश्लेषण का कार्य करते हैं।
    • चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER): यह वसा एवं लिपिड अणुओं के निर्माण में सहायता करती है। (कशेरुकी जंतुओं के यकृत में SER विषैले पदार्थों एवं दवाओं का निराविषीकरण / Detoxification करती है)। झिल्ली निर्माण में लिपिड व प्रोटीन की इस सहायता को झिल्ली जीवात-जनन (Membrane Biogenesis) कहते हैं।
  2. गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus): कैमिलो गॉल्जी द्वारा खोजी गई यह समानांतर चपटी थैलियों (कुंडिकाओं / Cisternae) का तंत्र है। इसका कार्य ER में बने पदार्थों का पैकेजिंग, भंडारण, रूपांतरण एवं प्रेषण करना है। यह सरल शर्करा से जटिल शर्करा बनाती है तथा लाइसोसोम के निर्माण में भाग लेती है।
  3. लाइसोसोम (Lysosome - आत्मघाती थैली / Suicidal Bag):

    यह एकल झिल्ली से घिरी थैली है जिसमें खुरदुरी ER द्वारा निर्मित अत्यंत शक्तिशाली पाचक एंजाइम भरे होते हैं। यह कोशिका का अपशिष्ट निपटाने वाला तंत्र है।

    कारण स्पष्ट कीजिए: लाइसोसोम को 'आत्मघाती थैली' क्यों कहते हैं?
    जब कोशिकीय उपापचय में कोई रुकावट आती है अथवा कोशिका क्षतिग्रस्त या मृतप्राय हो जाती है, तो लाइसोसोम फट जाते हैं और उनके भीतर के शक्तिशाली पाचक एंजाइम मुक्त होकर अपनी ही कोशिका के अंगों का पाचन (Autophagy) कर डालते हैं। इसी कारण लाइसोसोम को कोशिका की आत्मघाती थैली (Suicide Bag) कहा जाता है।
  4. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria - कोशिका का बिजलीघर / Powerhouse of Cell):

    यह दोहरी झिल्ली से घिरा अंगक है। बाहरी झिल्ली छिद्रित होती है जबकि भीतरी झिल्ली अत्यधिक वलित (क्रिस्टी / Cristae) होती है, जो एटीपी निर्माण के लिए रासायनिक क्रियाओं हेतु एक विशाल पृष्ठीय क्षेत्रफल प्रदान करती है।

    एटीपी (ATP - Adenosine Triphosphate): इसे कोशिका की ऊर्जा मुद्रा (Energy Currency of the Cell) कहा जाता है। कोशिकीय श्वसन द्वारा भोजन के ऑक्सीकरण से उत्पन्न ऊर्जा इसी में संचित होती है। विशेषता: माइटोकॉन्ड्रिया के पास अपना स्वयं का DNA तथा राइबोसोम होते हैं, अतः यह अपने कुछ आवश्यक प्रोटीन स्वयं बना सकता है।

  5. लवक / प्लास्टिड (Plastids): यह केवल पादप कोशिकाओं में पाए जाते हैं। इनके दो प्रमुख प्रकार हैं:
    • क्रोमोप्लास्ट (रंगीन लवक): इनमें क्लोरोफिल वर्णक युक्त लवक को क्लोरोप्लास्ट (हरितलवक) कहते हैं, जो पौधों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण करता है (इसे कोशिका की रसोई / Kitchen of the Cell कहते हैं)।
    • ल्यूकोप्लास्ट (श्वेत या रंगहीन लवक): यह प्राथमिक रूप से स्टार्च, तेल तथा प्रोटीन जैसे संचित पदार्थों का भंडारण करता है। (प्लास्टिड में भी अपना स्वयं का DNA और राइबोसोम होता है)।
  6. रसधानियाँ (Vacuoles): ठोस अथवा तरल पदार्थों की संग्राहक थैलियाँ हैं। जंतु कोशिकाओं में ये छोटी-छोटी और अस्थायी होती हैं, जबकि पादप कोशिकाओं में एक केंद्रीय बड़ी रसधानी कोशिका आयतन का 50% से 90% स्थान घेरती है। यह कोशिका को स्फीति (Turgidity) तथा कठोरता प्रदान करती है।

4. पादप एवं जंतु कोशिका में तुलना तथा कोशिका विभाजन

(क) पादप कोशिका एवं जंतु कोशिका की विस्तृत तुलना

तुलना का बिंदु पादप कोशिका (Plant Cell) जंतु कोशिका (Animal Cell)
1. कोशिका भित्ति (Cell Wall) प्लाज्मा झिल्ली के बाहर सेल्युलोज की बनी दृढ़ कोशिका भित्ति उपस्थित होती है। कोशिका भित्ति पूर्णतः अनुपस्थित होती है (केवल प्लाज्मा झिल्ली होती है)।
2. लवक / प्लास्टिड क्लोरोप्लास्ट सहित विभिन्न प्लास्टिड उपस्थित होते हैं। प्लास्टिड अनुपस्थित होते हैं।
3. रसधानी (Vacuole) मध्य में एक अत्यधिक बड़ी, स्थायी केंद्रीय रसधानी उपस्थित होती है। रसधानियाँ बहुत छोटी, अनेक अथवा अनुपस्थित होती हैं।
4. केंद्रक की स्थिति बड़ी रसधानी के कारण केंद्रक परिधि (किनारे) की ओर खिसक जाता है। केंद्रक प्रायः कोशिका के ठीक मध्य (केंद्र) में स्थित होता है।
5. तारककाय (Centrosome) उच्च पादपों में प्रायः अनुपस्थित होता है। कोशिका विभाजन में सहायता हेतु उपस्थित होता है।
6. संचित भोजन भोजन स्टार्च (मंड) के रूप में संचित रहता है। भोजन ग्लाइकोजन एवं वसा के रूप में संचित रहता है।

(ख) कोशिका विभाजन: समसूत्री (Mitosis) बनाम अर्धसूत्री (Meiosis)

जीवों में वृद्धि, मरम्मत और प्रजनन हेतु नई कोशिकाओं का निर्माण कोशिका विभाजन द्वारा होता है:

  1. समसूत्री विभाजन (Mitosis): यह कायिक (शारीरिक) कोशिकाओं में शरीर की वृद्धि एवं घावों की मरम्मत के लिए होता है। इसमें एक मातृ कोशिका विभाजित होकर दो समान संतति कोशिकाएं बनाती है। संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका के बिल्कुल समान ($2n$) रहती है।
  2. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): यह केवल जनन अंगों की जनन कोशिकाओं में युग्मक (Gametes - शुक्राणु एवं अंडाणु) बनाने के लिए होता है। इसमें लगातार दो विभाजन होते हैं और कुल चार संतति कोशिकाएं बनती हैं। संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका की आधी ($n$) रह जाती है, ताकि निषेचन के बाद युग्मनज में गुणसूत्रों की मूल संख्या पुनः बहाल हो सके।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

एटीपी का पूरा नाम (ATP)
एडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine Triphosphate - कोशिका की ऊर्जा मुद्रा)
डीएनए का पूरा नाम (DNA)
डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (Deoxyribonucleic Acid - आनुवंशिक पदार्थ)
आरएनए का पूरा नाम (RNA)
राइबोन्यूक्लिक अम्ल (Ribonucleic Acid)
कोशिका सिद्धांत का सूत्र (विरचो)
Omnis cellula-e-cellula (सभी कोशिकाएं पूर्ववर्ती कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं)
पादप कोशिका भित्ति का रासायनिक संघटन
मुख्यतः सेल्युलोज (जटिल कार्बोहाइड्रेट जो यांत्रिक दृढ़ता देता है)
मानव कोशिका में गुणसूत्र संख्या
46 गुणसूत्र (23 जोड़े: 22 जोड़े कायिक + 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र)
समसूत्री विभाजन में संतति कोशिकाएं
2 संतति कोशिकाएं, गुणसूत्र संख्या = 2n (समान)
अर्धसूत्री विभाजन में संतति कोशिकाएं
4 संतति कोशिकाएं, गुणसूत्र संख्या = n (आधी)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
CBSE बोर्ड मॉडल प्रश्न (3 अंक): पादप कोशिका एवं जंतु कोशिका में कोई तीन प्रमुख संरचनात्मक अंतर लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

पादप कोशिका एवं जंतु कोशिका में अंतर:

  1. कोशिका भित्ति: पादप कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली के बाहर सेल्युलोज से निर्मित एक कठोर एवं सुरक्षात्मक कोशिका भित्ति पाई जाती है, जबकि जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति पूर्णतः अनुपस्थित होती है।
  2. लवक (प्लास्टिड): पादप कोशिका में प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोप्लास्ट तथा अन्य लवक उपस्थित होते हैं, जबकि जंतु कोशिका में कोई प्लास्टिड नहीं पाया जाता।
  3. रसधानी (वैक्यूल): पादप कोशिका के केंद्र में एक बहुत बड़ी स्थायी रसधानी होती है जिसके कारण केंद्रक किनारे की ओर खिसक जाता है, जबकि जंतु कोशिका में छोटी-छोटी अस्थाई रसधानियाँ पाई जाती हैं और केंद्रक मध्य में होता है।
उदाहरण 2
कारण स्पष्ट कीजिए (3 अंक): (a) माइटोकॉन्ड्रिया को "कोशिका का बिजलीघर" क्यों कहा जाता है? (b) लाइसोसोम को "आत्मघाती थैली" क्यों कहा जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

(a) माइटोकॉन्ड्रिया को बिजलीघर (Powerhouse) कहने का कारण: कोशिका की विभिन्न जैविक क्रियाओं को संपन्न करने के लिए आवश्यक ऊर्जा का उत्पादन माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर कोशिकीय श्वसन द्वारा होता है। यह ऊर्जा एटीपी (ATP - एडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट) अणुओं के रूप में संचित रहती है। आवश्यकता पड़ने पर कोशिका इसी एटीपी ऊर्जा का उपयोग करती है, इसलिए इसे कोशिका का बिजलीघर कहा जाता है।

(b) लाइसोसोम को आत्मघाती थैली कहने का कारण: लाइसोसोम में शक्तिशाली पाचक एंजाइम होते हैं। जब कोशिका क्षतिग्रस्त, पुरानी या उपापचय में व्यवधान के कारण मृतप्राय हो जाती है, तो लाइसोसोम फट जाते हैं और उनके एंजाइम अपनी ही कोशिका के अंगों का पाचन कर डालते हैं। अतः इन्हें आत्मघाती थैली कहते हैं।

उदाहरण 3
CBSE बोर्ड 3 अंक प्रश्न: क्या होगा यदि हम: (a) एक पादप कोशिका को अतिपरासरी (Hypertonic) नमक के घोल में रखें? (b) सूखी किशमिश को स्वच्छ जल (Hypotonic) में रखें?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

(a) जब पादप कोशिका को अतिपरासरी (सांद्र) नमक के घोल में रखा जाता है, तो बहिःपरासरण (Exosmosis) के कारण कोशिका के भीतर से जल निकलकर बाहरी घोल में चला जाता है। इसके फलस्वरूप कोशिका भित्ति के भीतर उपस्थित जीवद्रव्य संकुचित होकर एक कोने में सिमट जाता है। इस प्रक्रिया को जीवद्रव्यकुंचन (Plasmolysis) कहते हैं।

(b) जब सूखी किशमिश को स्वच्छ जल (अल्पपरासरी घोल) में रखा जाता है, तो अंतःपरासरण (Endosmosis) के कारण जल किशमिश की अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर उसके भीतर प्रवेश कर जाता है। इसके परिणामस्वरूप किशमिश जल से भरकर फूल जाती है।

उदाहरण 4
विभेदन कीजिए (3 अंक): प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिका में तीन मुख्य अंतर लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अंतर:

  1. केंद्रक की संरचना: प्रोकैरियोटिक कोशिका में स्पष्ट केंद्रक झिल्ली नहीं होती और आनुवंशिक पदार्थ सीधे कोशिका द्रव्य में बिखरा रहता है (केंद्रीकाय / Nucleoid)। यूकैरियोटिक कोशिका में दोहरी झिल्ली से घिरा पूर्ण विकसित वास्तविक केंद्रक होता है।
  2. झिल्लीदार कोशिकांग: प्रोकैरियोटिक कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी उपकरण, अंतर्द्रव्यी जालिका आदि झिल्लीदार अंगक अनुपस्थित होते हैं, जबकि यूकैरियोटिक कोशिका में ये सभी उपस्थित होते हैं।
  3. राइबोसोम: प्रोकैरियोटिक में 70S प्रकार के तथा यूकैरियोटिक में 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं।
उदाहरण 5
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए (2 अंक): समसूत्री विभाजन और अर्धसूत्री विभाजन में क्या मूल अंतर है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

मूल अंतर:

  • समसूत्री विभाजन (Mitosis): यह कायिक कोशिकाओं में वृद्धि एवं मरम्मत हेतु होता है। एक मातृ कोशिका से 2 संतति कोशिकाएं बनती हैं और गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका के समान ($2n$) बनी रहती है।
  • अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): यह जनन कोशिकाओं में युग्मक (शुक्राणु/अंडाणु) निर्माण हेतु होता है। इसमें 4 संतति कोशिकाएं बनती हैं और गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका की आधी ($n$) रह जाती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पादप कोशिका भित्ति को प्लाज्मा झिल्ली की तरह लचीली और प्रोटीन-लिपिड से बनी मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पादप कोशिका भित्ति मृत और कठोर होती है जो जटिल कार्बोहाइड्रेट "सेल्युलोज" से बनी होती है। लचीली प्लाज्मा झिल्ली इसके ठीक नीचे होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जीवाणु (Bacteria) को यूकैरियोटिक मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जीवाणु और नीले-हरे शैवाल आदि सभी प्रोकैरियोटिक जीव हैं क्योंकि इनमें केंद्रक झिल्ली तथा झिल्लीदार कोशिकांग अनुपस्थित होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

माइटोकॉन्ड्रिया और प्लास्टिड में डीएनए न मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

याद रखें: माइटोकॉन्ड्रिया और प्लास्टिड दोनों के पास अपना स्वयं का DNA और 70S राइबोसोम होते हैं। अतः ये अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग कहलाते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कोशिका के सबसे बड़े अंगक के रूप में जंतु कोशिका में रसधानी लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

बड़ी रसधानी केवल पादप कोशिका में होती है (आयतन का 50-90%)। जंतु कोशिका में रसधानियाँ बहुत छोटी व नगण्य होती हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विसरण और परासरण को बिल्कुल एक ही परिघटना मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विसरण में किसी अर्धपारगम्य झिल्ली की आवश्यकता नहीं होती (उदा. अगरबत्ती की गंध)। परासरण में द्रव का प्रवाह सदैव एक वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली (Selectively permeable membrane) के आर-पार ही होता है।

पादप कोशिका बनाम जंतु कोशिका की संरचना एवं अंगक (Cell Architecture Diagram)

पादप कोशिका बनाम जंतु कोशिका संरचनात्मक तुलना NCERT / CBSE Board Class 9 Science Chapter 5 पादप कोशिका (Plant Cell) बड़ी केंद्रीय रसधानी (Vacuole) (50%–90% आयतन) केंद्रक क्लोरोप्लास्ट क्लोरोप्लास्ट जंतु कोशिका (Animal Cell) केंद्रक (मध्य में स्थित) छोटी रसधानी माइटोकॉन्ड्रिया माइटोकॉन्ड्रिया तारककाय पादप: कोशिका भित्ति (+) क्लोरोप्लास्ट (+) बड़ी रसधानी (+) | जंतु: भित्ति (-) क्लोरोप्लास्ट (-) तारककाय (+)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
कोशिका सजीवों की मूलभूत संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है; इसकी खोज 1665 में रॉबर्ट हुक ने की।
मुख्य बिंदु 2
श्लीडेन और श्वान ने कोशिका सिद्धांत दिया; रुडोल्फ विरचो ने जोड़ा कि सभी कोशिकाएं पूर्ववर्ती कोशिकाओं से बनती हैं।
मुख्य बिंदु 3
प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में केंद्रक झिल्ली तथा झिल्लीदार कोशिकांग नहीं होते (उदा. जीवाणु); यूकैरियोटिक कोशिकाओं में वास्तविक केंद्रक एवं सभी अंगक होते हैं।
मुख्य बिंदु 4
प्लाज्मा झिल्ली वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली है; जल का उच्च से निम्न सांद्रता की ओर अर्धपारगम्य झिल्ली से विसरण परासरण कहलाता है।
मुख्य बिंदु 5
पादप कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली के बाहर सेल्युलोज से बनी कठोर कोशिका भित्ति होती है।
मुख्य बिंदु 6
माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का बिजलीघर (Powerhouse) कहते हैं; यह ऊर्जा को एटीपी (ATP) के रूप में संचित करता है।
मुख्य बिंदु 7
लाइसोसोम में पाचक एंजाइम होते हैं, क्षतिग्रस्त होने पर कोशिका का पाचन कर लेने के कारण इसे आत्मघाती थैली कहते हैं।
मुख्य बिंदु 8
क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं (कोशिका की रसोई); ल्यूकोप्लास्ट संचयन का कार्य करते हैं।
मुख्य बिंदु 9
पादप कोशिकाओं में एक विशाल केंद्रीय रसधानी होती है जो कोशिका को स्फीति व कठोरता देती है।
मुख्य बिंदु 10
समसूत्री विभाजन से 2 समान गुणसूत्र वाली संतति कोशिकाएं (वृद्धि व मरम्मत) तथा अर्धसूत्री विभाजन से 4 आधी गुणसूत्र वाली कोशिकाएं (युग्मक) बनती हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
प्लाज्मा झिल्ली को "वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली" क्यों कहते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि यह झिल्ली केवल कुछ चयनित विलेय पदार्थों और विलायक के अणुओं को ही अंदर या बाहर जाने देती है, सभी पदार्थों को आर-पार नहीं होने देती।
2
माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट को "अर्ध-स्वायत्त अंगक" क्यों कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि इन दोनों कोशिकांगों के पास अपना स्वयं का डीएनए (DNA) तथा राइबोसोम होते हैं, जिससे ये अपनी वृद्धि एवं कुछ आवश्यक प्रोटीनों का संश्लेषण स्वयं करने में सक्षम होते हैं।
3
यदि किसी जंतु कोशिका को अल्पपरासरी (तनु) घोल में रखा जाए तो क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अंतःपरासरण के कारण जल कोशिका के भीतर तेजी से प्रवेश करेगा। जंतु कोशिका में पादपों की तरह दृढ़ कोशिका भित्ति नहीं होती, अतः अत्यधिक जल भरने पर कोशिका फूलकर अंततः फट जाएगी।
4
जीवद्रव्यकुंचन (Plasmolysis) किसे कहते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: जब किसी जीवित पादप कोशिका को अतिपरासरी (सांद्र) घोल में रखा जाता है, तो बहिःपरासरण द्वारा जल बाहर निकल जाता है और प्लाज्मा झिल्ली सहित आंतरिक जीवद्रव्य सिकुड़कर कोशिका भित्ति से दूर सिमट जाता है। इसे जीवद्रव्यकुंचन कहते हैं।
5
कायिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है? इसमें संतति कोशिकाओं की संख्या क्या होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कायिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु "समसूत्री विभाजन" (Mitosis) होता है। इसमें 1 मातृ कोशिका से 2 समान संतति कोशिकाएं बनती हैं जिनमें गुणसूत्र संख्या मातृ कोशिका के बराबर होती है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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