(क) सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम
सर आइज़क न्यूटन के अनुसार: "विश्व का प्रत्येक पिंड प्रत्येक अन्य पिंड को एक आकर्षण बल से आकर्षित करता है, जो दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।"
गणितीय व्यंजक:
मान लीजिए द्रव्यमान $M$ तथा $m$ के दो पिंड एक-दूसरे से $d$ दूरी पर स्थित हैं:
(ख) गुरुत्वीय नियतांक ($G$) का मान एवं SI मात्रक
$$G = rac{F \cdot d^2}{M \cdot m}$$- $G$ का SI मात्रक $ ext{N}\cdot ext{m}^2/ ext{kg}^2$ (न्यूटन-मीटर वर्ग प्रति किलोग्राम वर्ग या $ ext{N m}^2 ext{ kg}^{-2}$) होता है।
- 1798 में हेनरी कैवेंडिश ने एक संवेदनशील तुला द्वारा $G$ का सर्वमान्य मान ज्ञात किया:
$$\mathbf{G = 6.673 imes 10^{-11} ext{ N m}^2/ ext{kg}^2}$$ - महत्व: $G$ का मान ब्रह्मांड के प्रत्येक स्थान पर, सभी पदार्थों के लिए तथा सभी परिस्थितियों में सदैव अचर (स्थिर) रहता है।
(ग) गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का महत्व
यह नियम कई ऐसी परिघटनाओं की सफल वैज्ञानिक व्याख्या करता है जो असंबंधित मानी जाती थीं:
- हमें पृथ्वी से बांधे रखने वाला बल।
- पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गति।
- सूर्य के चारों ओर समस्त सौरमंडलीय ग्रहों की गति।
- चंद्रमा तथा सूर्य के आकर्षण के कारण समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटा।