(क) ध्वनि का उत्पादन (Production of Sound)
ध्वनि विभिन्न वस्तुओं के कंपन (Vibration - किसी वस्तु की अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर त्वरित गति) द्वारा उत्पन्न होती है। जब हम बोलते हैं, तो हमारे गले के वाक्-तंतुओं (Vocal Cords) में कंपन होता है; गिटार या सितार में तानित तार कंपित होते हैं; तबले में तानित झिल्ली और बाँसुरी में वायु स्तंभ के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
(ख) ध्वनि संचरण हेतु माध्यम की अनिवार्यता (विद्युत घंटी प्रयोग)
ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है। इसके संचरण के लिए ठोस, द्रव अथवा गैस जैसे भौतिक माध्यम की आवश्यकता अनिवार्य होती है। ध्वनि निर्वात (Vacuum) में गमन नहीं कर सकती।
प्रायोगिक सत्यापन (Bell Jar Experiment): एक कांच के बेलजार में एक विद्युत घंटी लटकाते हैं और बेलजार को वैक्यूम पंप (वायु निष्कासन पंप) से जोड़ते हैं। जब बेलजार में हवा भरी होती है और स्विच दबाया जाता है, तो घंटी की स्पष्ट और तेज आवाज बाहर सुनाई देती है। अब वैक्यूम पंप चलाकर बेलजार से हवा को धीरे-धीरे बाहर निकालना प्रारंभ करते हैं। जैसे-जैसे हवा कम होती जाती है, घंटी की आवाज धीमी होती चली जाती है, यद्यपि घंटी का हथौड़ा पहले की तरह ही घंटी पर बजता हुआ स्पष्ट दिखाई देता है। जब बेलजार के भीतर पूर्ण निर्वात (Vacuum) उत्पन्न हो जाता है, तो घंटी की आवाज पूर्णतः बंद हो जाती है। यह सिद्ध करता है कि ध्वनि संचरण के लिए माध्यम अनिवार्य है। (यही कारण है कि चंद्रमा पर वायुमंडल न होने के कारण अंतरिक्ष यात्री सीधे एक-दूसरे की आवाज नहीं सुन सकते और रेडियो तरंगों का उपयोग करते हैं)।
(ग) अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में संचरण: संपीडन एवं विरलन
वायु में ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal Waves) के रूप में गमन करती है, जिसमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर आगे-पीछे दोलन करते हैं:
- संपीडन (Compression - C): जब कंपित वस्तु आगे बढ़ती है, तो वह अपने सामने की वायु को धक्का देकर संपीड़ित करती है। इस उच्च घनत्व तथा उच्च दाब वाले क्षेत्र को संपीडन कहते हैं।
- विरलन (Rarefaction - R): जब कंपित वस्तु पीछे हटती है, तो सामने एक निम्न दाब और निम्न घनत्व का क्षेत्र बन जाता है, जिसे विरलन कहते हैं।