(क) जे.जे. थॉमसन का तरबूज मॉडल (Plum Pudding Model)
थॉमसन ने प्रस्तावित किया कि परमाणु एक धनावेशित गोला होता है जिसमें इलेक्ट्रॉन तरबूज के लाल खाने वाले भाग में धंसे हुए बीजों की तरह अथवा क्रिसमस केक में सूखे मेवों (Plums) की तरह बिखरे रहते हैं।
थॉमसन मॉडल की मुख्य स्थापना: ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में पूर्णतः समान होते हैं, इसलिए परमाणु वैद्युतीय रूप से उदासीन (Electrically Neutral) होता है।
कमी: यह मॉडल अन्य वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोगों (विशेषकर रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग) के परिणामों की व्याख्या नहीं कर सका।
(ख) रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (Alpha Particle Scattering Experiment, 1911)
रदरफोर्ड ने सोने की लगभग 1000 परमाणु मोटी पन्नी पर द्वि-आवेशित हीलियम आयनों ($\u0007lpha$-कण, द्रव्यमान = $4 ext{ u}$, आवेश = $+2$) की तीव्र बौछार की।
| प्रायोगिक प्रेक्षण (Observations) |
रदरफोर्ड के वैज्ञानिक निष्कर्ष (Conclusions) |
| 1. अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी से बिना विक्षेपित हुए सीधे निकल गए। |
परमाणु के भीतर का अधिकांश भाग रिक्त (खोखला) है। |
| 2. बहुत कम अल्फा कण छोटे कोणों से विक्षेपित (मुड़े) हुए। |
परमाणु में धनावेशित भाग बहुत कम स्थान घेरता है (क्योंकि समान आवेश अल्फा कणों को प्रतिकर्षित करता है)। |
| 3. लगभग 20,000 में से 1 अल्फा कण अपने ही मार्ग पर 180° के कोण से वापस लौट आया। |
परमाणु का संपूर्ण धनावेश एवं संपूर्ण द्रव्यमान परमाणु के केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म आयतन में केंद्रित है, जिसे 'नाभिक' (Nucleus) कहते हैं। |
आकार की तुलना: नाभिक की त्रिज्या ($10^{-15} ext{ m}$) परमाणु की त्रिज्या ($10^{-10} ext{ m}$) से लगभग $10^5$ (एक लाख) गुना छोटी होती है। (यदि परमाणु को एक बड़ा क्रिकेट स्टेडियम मान लिया जाए, तो उसका नाभिक बीच में रखी एक छोटी सी मक्खी या गेंद के बराबर होगा!)
रदरफोर्ड मॉडल की गंभीर कमी (कमजोरी):
मैक्सवेल के विद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार, त्वरित आवेशित कणों को निरंतर विकिरण के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करनी चाहिए। यदि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हैं, तो उनका मार्ग त्वरित होगा और वे निरंतर ऊर्जा खोते जाएंगे। अंततः एक सर्पिलाकार मार्ग तय करते हुए $10^{-8}$ सेकंड के भीतर इलेक्ट्रॉन को नाभिक में गिर जाना चाहिए था! यदि ऐसा होता, तो परमाणु कभी स्थिर नहीं रह सकता था और संपूर्ण पदार्थ नष्ट हो जाता, जबकि हम जानते हैं कि परमाणु अत्यधिक स्थायी होते हैं। रदरफोर्ड परमाणु के इस स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सके।