(क) फसल किस्मों में सुधार के उद्देश्य
फसल की अच्छी किस्मों का विकास संकरण (Hybridisation - आनुवंशिक रूप से भिन्न पौधों में क्रॉसिंग) अथवा जीन संवर्धन (Genetically Modified Crops) द्वारा किया जाता है। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
- उच्च उपज (Higher Yield): प्रति एकड़ फसल की उत्पादकता बढ़ाना।
- उन्नत गुणवत्ता (Improved Quality): गेहूँ में बेकिंग गुणवत्ता, दालों में प्रोटीन, तिलहनों में तेल तथा फलों-सब्जियों में संरक्षण गुणवत्ता बढ़ाना।
- जैविक एवं अजैविक प्रतिरोधकता: जैविक कारक (रोग, कीट, सूत्रकृमि) तथा अजैविक कारक (सूखा, लवणता, अत्यधिक गर्मी/ठंड, पाला) को सहन करने की क्षमता।
- परिपक्वता काल में परिवर्तन (Shorter Maturity Period): बीज बोने से कटाई तक का समय कम होने से किसान एक वर्ष में कई फसलें उगा सकते हैं।
- व्यापक अनुकूलनशीलता: एक ही किस्म विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में उगाई जा सके।
(ख) पादप पोषण: 16 अनिवार्य पोषक तत्व
पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है:
| स्रोत | पोषक तत्व |
|---|---|
| 1. वायु (Air) - 2 | कार्बन (C) तथा ऑक्सीजन (O) |
| 2. जल (Water) - 1 | हाइड्रोजन (H) |
| 3. मृदा (Soil) - 13 |
• वृहत् पोषक (Macro-nutrients, अधिक मात्रा में आवश्यक - 6): नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S)। • सूक्ष्म पोषक (Micro-nutrients, अल्प मात्रा में आवश्यक - 7): आयरन (Fe), मैंगनीज (Mn), बोरॉन (B), जिंक (Zn), कॉपर (Cu), मोलिब्डेनम (Mo), क्लोरीन (Cl)। |