Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
CBSE • कक्षा 9 • Science • अध्याय 12
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

खाद्य संसाधनों में सुधार

भोजन सभी सजीव प्राणियों की प्राथमिक आवश्यकता है। यह हमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा (लिपिड), विटामिन तथा खनिज लवण प्रदान करता है, जो शारीरिक वृद्धि, विकास, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा के लिए अनिवार्य हैं। भारत विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है, जिसकी जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक है। इस विशाल जनसंख्या के भरण-पोषण के लिए हमें प्रतिवर्ष अरबों टन खाद्यान्न, दालों, तिलहनों, दूध, अंडे और मांस की आवश्यकता होती है। चूँकि हमारे पास कृषि योग्य भूमि सीमित है और उसमें अधिक विस्तार संभव नहीं है, अतः उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र वैज्ञानिक उपाय प्रति हेक्टेयर कृषि भूमि की उत्पादकता में गुणात्मक एवं मात्रात्मक सुधार करना है। भारत में पूर्व में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए 'हरित क्रांति' (Green Revolution - डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में) तथा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 'श्वेत क्रांति' (White Revolution / ऑपरेशन फ्लड - डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में) संचालित की गई। परंतु अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से मृदा की उर्वरता और पर्यावरण को भारी क्षति पहुँची है। अतः आज का वैज्ञानिक लक्ष्य संपोषणीय कृषि (Sustainable Agriculture) तथा जैविक खेती (Organic Farming) को अपनाना है। इस अध्याय में हम खाद्य उत्पादन सुधार की तीन प्रमुख वैज्ञानिक कार्यप्रणालियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे: फसल की किस्मों में सुधार: संकरण (Hybridisation), आनुवंशिक रूपांतरण, उच्च उपज, रोग प्रतिरोधकता और व्यापक अनुकूलनशीलता। फसल उत्पादन प्रबंधन: 16 पोषक तत्वों का प्रबंधन, खाद (Compost, Vermicompost, Green Manure) बनाम रासायनिक उर्वरक, सिंचाई के वैज्ञानिक तंत्र (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर प्रणाली), तथा मिश्रित फसल, अंतराफसलीकरण एवं फसल चक्र। फसल सुरक्षा प्रबंधन: खरपतवार नियंत्रण, कीट-पीड़क नियंत्रण तथा अनाजों का सुरक्षित वैज्ञानिक भंडारण। इसके साथ ही पशुधन संपदा को उन्नत करने के लिए पशुपालन (मवेशी पालन), कुक्कुट पालन (Poultry Farming), मत्स्य उत्पादन (मिश्रित मत्स्य संवर्धन) तथा मधुमक्खी पालन (Apiculture) का सर्वांगीण वैज्ञानिक विवेचन किया गया है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE Class 9) बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से 6 से 8 अंकों के अत्यंत महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रश्न पूछे जाते हैं। खाद और उर्वरक में तुलनात्मक अंतर, अंतराफसलीकरण बनाम फसल चक्र के लाभ, संमिश्र मत्स्य संवर्धन (Composite Fish Culture) की विशेषताएं, तथा मधुमक्खी पालन में इटैलियन मक्खी (एपिस मेलीफेरा) के गुणों पर प्रश्न प्रतिवर्ष निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।

🐟 एक ही छोटे से तालाब में 5 अलग-अलग प्रजातियों की 5000 मछलियाँ बिना एक-दूसरे का भोजन छीने और बिना लड़े एक साथ कैसे फलती-फूलती हैं?

साधारणतया जब आप किसी सीमित स्थान या तालाब में विभिन्न प्रकार के जीवों को एक साथ रखते हैं, तो वे भोजन और स्थान के लिए आपस में भयानक प्रतिस्पर्धा करते हैं और दुर्बल प्रजाति नष्ट हो जाती है।

परंतु भारत के आधुनिक मत्स्य वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जादुई तकनीक विकसित की है जिसे 'संमिश्र मत्स्य संवर्धन' (Composite Fish Culture) कहा जाता है! इसमें एक ही तालाब में 5 से 6 विभिन्न प्रजातियों की मछलियाँ—जैसे कतला, रोहू, मृगल, कॉमन कार्प और सिल्वर कार्प—एक साथ पाली जाती हैं, और आश्चर्यजनक रूप से उनका उत्पादन 10 गुना तक बढ़ जाता है!

वे आपस में लड़ती क्यों नहीं? क्योंकि कतला केवल पानी की सबसे ऊपरी सतह से भोजन खाती है; रोहू तालाब के बीच के पानी से भोजन लेती है; मृगल और कॉमन कार्प तालाब की तलहटी (पेंदी) से भोजन चुनती हैं; और सिल्वर कार्प केवल जलीय खरपतवारों को साफ करती है! तालाब का एक भी कोना और भोजन का एक भी टुकड़ा व्यर्थ नहीं जाता!

यही तो है कृषि और खाद्य विज्ञान का चमत्कार! आइए, फसलों की पैदावार बढ़ाने, जैविक खाद बनाने और उन्नत पशुपालन के इन वैज्ञानिक रहस्यों को विस्तार से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय आपकी शैक्षणिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों निर्णायक है?

  1. CBSE बोर्ड परीक्षा में सरल एवं शत-प्रतिशत स्कोरिंग: खाद बनाम उर्वरक में अंतर (3 अंक), फसल चक्र के लाभ (2 अंक), संमिश्र मत्स्य पालन (3 अंक), और कुक्कुट पालन के उद्देश्य हर वर्ष पूछे जाते हैं।
  2. कृषि प्रधान राज्य झारखंड के लिए व्यावहारिक वरदान: झारखंड के पठारी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन, जैविक खाद (वर्मीकम्पोस्ट), लाह और मधुमक्खी पालन तथा देशी नस्लों के संवर्धन का सीधा व्यावहारिक ज्ञान।
  3. खाद्य सुरक्षा एवं पर्यावरण संतुलन: रासायनिक कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचना, जैविक खेती अपनाना, और सतत विकास (Sustainable Development) के लक्ष्यों को प्राप्त करना।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पौधों में पोषण (प्रकाश संश्लेषण) की आधारभूत समझ।
  • पौधों की वृद्धि के लिए मृदा और जल की आवश्यकता।
  • सजीवों में विभिन्न पोषक तत्वों (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा) का ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • फसल सुधार के तीन प्रमुख चरणों (किस्म सुधार, उत्पादन प्रबंधन, सुरक्षा प्रबंधन) की व्याख्या कर सकेंगे।
  • पादपों के लिए अनिवार्य 16 पोषक तत्वों का वृहत् (Macro) एवं सूक्ष्म (Micro) पोषकों में वर्गीकरण कर सकेंगे।
  • खाद (Manure) और रासायनिक उर्वरक (Fertilizer) के लाभों एवं हानियों का तुलनात्मक चार्ट बना सकेंगे।
  • मिश्रित फसल (Mixed Cropping), अंतराफसलीकरण (Intercropping) और फसल चक्र (Crop Rotation) में वैज्ञानिक विभेद कर सकेंगे।
  • अनाज भंडारण में होने वाली जैविक एवं अजैविक हानियों तथा उनके निवारण के उपायों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • दुग्ध उत्पादन हेतु मवेशियों की देशी एवं विदेशी नस्लों के संकरण के लाभ समझ सकेंगे।
  • ब्रॉयलर (मांस) और लेयर (अंडे) कुक्कुट पालन के प्रबंधन अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • संमिश्र मत्स्य संवर्धन (Composite Fish Culture) तथा उन्नत मधुमक्खी पालन (इटैलियन मक्खी - एपिस मेलीफेरा) की विशेषताओं का वर्णन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. फसल की किस्मों में सुधार एवं पोष...
2 2. खाद बनाम उर्वरक तथा फसल पैटर्न
3 3. फसल सुरक्षा प्रबंधन एवं अनाज भंड...
4 4. पशुधन प्रबंधन: पशुपालन, कुक्कुट,...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. फसल की किस्मों में सुधार एवं पोषक तत्व प्रबंधन

(क) फसल किस्मों में सुधार के उद्देश्य

फसल की अच्छी किस्मों का विकास संकरण (Hybridisation - आनुवंशिक रूप से भिन्न पौधों में क्रॉसिंग) अथवा जीन संवर्धन (Genetically Modified Crops) द्वारा किया जाता है। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. उच्च उपज (Higher Yield): प्रति एकड़ फसल की उत्पादकता बढ़ाना।
  2. उन्नत गुणवत्ता (Improved Quality): गेहूँ में बेकिंग गुणवत्ता, दालों में प्रोटीन, तिलहनों में तेल तथा फलों-सब्जियों में संरक्षण गुणवत्ता बढ़ाना।
  3. जैविक एवं अजैविक प्रतिरोधकता: जैविक कारक (रोग, कीट, सूत्रकृमि) तथा अजैविक कारक (सूखा, लवणता, अत्यधिक गर्मी/ठंड, पाला) को सहन करने की क्षमता।
  4. परिपक्वता काल में परिवर्तन (Shorter Maturity Period): बीज बोने से कटाई तक का समय कम होने से किसान एक वर्ष में कई फसलें उगा सकते हैं।
  5. व्यापक अनुकूलनशीलता: एक ही किस्म विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में उगाई जा सके।

(ख) पादप पोषण: 16 अनिवार्य पोषक तत्व

पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है:

स्रोत पोषक तत्व
1. वायु (Air) - 2 कार्बन (C) तथा ऑक्सीजन (O)
2. जल (Water) - 1 हाइड्रोजन (H)
3. मृदा (Soil) - 13 • वृहत् पोषक (Macro-nutrients, अधिक मात्रा में आवश्यक - 6): नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S)।
• सूक्ष्म पोषक (Micro-nutrients, अल्प मात्रा में आवश्यक - 7): आयरन (Fe), मैंगनीज (Mn), बोरॉन (B), जिंक (Zn), कॉपर (Cu), मोलिब्डेनम (Mo), क्लोरीन (Cl)।

2. खाद बनाम उर्वरक तथा फसल पैटर्न

(क) खाद (Manure) बनाम रासायनिक उर्वरक (Fertilizers)

लक्षण खाद (Manure) रासायनिक उर्वरक (Fertilizers)
प्रकृति एवं स्रोत प्राकृतिक कार्बनिक पदार्थ, जो गोबर, मलमूत्र व पौधों के कचरे के अपघटन से बनता है। कारखानों में निर्मित अकार्बनिक रासायनिक लवण (जैसे यूरिया, NPK, अमोनियम सल्फेट)।
ह्यूमस की मात्रा मिट्टी को प्रचुर मात्रा में ह्यूमस (जीवांश) प्रदान करती है। मिट्टी को कोई ह्यूमस प्रदान नहीं करता।
पोषक तत्व सांद्रता पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम सांद्रता में होते हैं, धीरे-धीरे अवशोषित होते हैं। विशेष पोषक तत्वों (N, P, K) में अत्यंत समृद्ध, तुरंत पौधे को मिलते हैं।
मृदा पर प्रभाव दीर्घकाल में मिट्टी की संरचना, जल-धारण क्षमता और उर्वरता में सुधार करती है। लगातार प्रयोग से मिट्टी की संरचना बिगड़ती है, लवणता बढ़ती है और मृदा क्षारीय/अम्लीय हो जाती है।

(ख) फसल पैटर्न के तीन प्रमुख प्रकार

  1. मिश्रित फसल (Mixed Cropping): एक ही खेत में एक साथ दो या अधिक फसलें बिना किसी निश्चित कतार प्रारूप के उगाना (उदा: गेहूँ + चना, गेहूँ + सरसों, मूँगफली + सूरजमुखी)। लाभ: एक फसल के नष्ट होने पर भी दूसरी फसल से सुरक्षा मिलती है (जोखिम कम)।
  2. अंतराफसलीकरण (Intercropping): एक ही खेत में दो या अधिक फसलें एक निश्चित कतार पैटर्न (एक कतार मुख्य फसल की, कुछ कतारें दूसरी फसल की) में उगाना (उदा: सोयाबीन + मक्का, बाजरा + लोबिया)। लाभ: पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग होता है तथा कीड़े-बीमारियाँ एक ही फसल पर सीमित रहते हैं।
  3. फसल चक्र (Crop Rotation): किसी खेत में क्रमवार पूर्व-नियोजित ढंग से विभिन्न फसलों को बदल-बदल कर उगाना। प्रायः अनाज वाली फसल (जैसे धान या गेहूँ) के बाद दलहनी फसल (जैसे चना, मटर, मूँग) उगाई जाती है, क्योंकि दलहनी पौधों की जड़ों में उपस्थित राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके मिट्टी को बिना खाद के स्वाभाविक रूप से उपजाऊ बना देते हैं।

3. फसल सुरक्षा प्रबंधन एवं अनाज भंडारण

(क) फसल सुरक्षा: खरपतवार एवं कीट नियंत्रण

  • खरपतवार (Weeds): कृषि भूमि में मुख्य फसल के साथ स्वतः उग आने वाले अवांछित पौधे (उदा: गोखरू / ज़ैंथियम, गाजर घास / पारथेनियम, मोथा / साइप्रिनस)। ये सूर्य के प्रकाश, जल और पोषक तत्वों के लिए मुख्य फसल से प्रतिस्पर्धा करते हैं जिससे उपज घट जाती है।
  • कीट-पीड़क (Insect Pests): फसलों को तीन प्रकार से हानि पहुँचाते हैं: (1) जड़, तने और पत्तियों को काटना, (2) कोशिकीय रस चूसना, और (3) तने और फलों में छेद करना (बोरर)।
  • रोकथाम: शाकनाशी व कीटनाशकों का नियंत्रित छिड़काव, ग्रीष्मकालीन जुताई (Summer Ploughing), तथा यांत्रिक विधि से खरपतवार उखाड़ना।

(ख) अनाज भंडारण में हानियाँ एवं नियंत्रण

कटाई के पश्चात भंडारण में अनाजों को भारी नुकसान पहुँचाने वाले दो मुख्य कारक हैं:

  1. जैविक कारक (Biotic Factors): कीट, कीड़े, कृंतक (चूहे), चिड़ियाँ, घुन, कवक (फफूंद) तथा जीवाणु।
  2. अजैविक कारक (Abiotic Factors): भंडारण स्थान पर अत्यधिक नमी तथा अनुपयुक्त तापमान।

सुरक्षित भंडारण के उपाय: भंडारण से पूर्व दानों को धूप में अच्छी तरह सुखाना (नमी 9-10% से कम करना), गोदामों की रासायनिक धुंध (धूम्रीकरण / Fumigation) द्वारा सफाई, तथा नीम की सूखी पत्तियों का पारंपरिक उपयोग।

4. पशुधन प्रबंधन: पशुपालन, कुक्कुट, मत्स्य एवं मधुमक्खी पालन

(क) पशुपालन (Cattle Farming)

कृषि में पशुओं को दो उद्देश्यों से पाला जाता है: (1) दुग्ध उत्पादन (दूध देने वाले पशु / मिल्च पशु) तथा (2) कृषि कार्य (हल चलाना, गाड़ी खींचना / ड्राफ्ट पशु)।

  • नस्ल सुधार (Cross Breeding): विदेशी नस्लों (जैसे जर्सी, ब्राउन स्विस - लंबा दुग्धस्रवण काल) तथा भारतीय देशी नस्लों (जैसे रेड सिंधी, साहीवाल - असाधारण रोग प्रतिरोधक क्षमता) का संकरण कराके दोनों उत्तम गुणों वाली संकर नस्लें तैयार की जाती हैं।

(ख) कुक्कुट पालन (Poultry Farming)

मुर्गियों का पालन दो उद्देश्यों से होता है:

  1. लेयर (Layers - अंडों के लिए): इन्हें पर्याप्त कैल्शियम युक्त आहार दिया जाता है और प्रकाश प्रबंधन पर ध्यान दिया जाता है।
  2. ब्रॉयलर (Broilers - मांस के लिए): इन्हें विटामिन A और K युक्त उच्च प्रोटीन व वसायुक्त आहार दिया जाता है तथा 6-8 सप्ताह में मांस हेतु तैयार कर लिया जाता है। (भारतीय देशी नस्ल असील तथा विदेशी लेगहॉर्न का संकरण कराया जाता है)।

(ग) संमिश्र मत्स्य संवर्धन (Composite Fish Culture)

एक ही तालाब में 5-6 विभिन्न प्रजातियों की मछलियाँ पाली जाती हैं जो भोजन के लिए परस्पर प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं:

  • सतह पर भोजन लेने वाली: कतला (Catla)
  • मध्य क्षेत्र में भोजन लेने वाली: रोहू (Rohu)
  • पेंदी (तलहटी) से भोजन लेने वाली: मृगल (Mrigal) तथा कॉमन कार्प (Common Carp)
  • जलीय खरपतवार खाने वाली: ग्रास कार्प (Grass Carp)

(घ) मधुमक्खी पालन (Apiculture)

शहद तथा मोम के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों के छत्तों का रख-रखाव मधुमक्खी पालन कहलाता है।

इटैलियन मधुमक्खी (एपिस मेलीफेरा - Apis mellifera) के 4 प्रमुख लाभ:

  1. इनमें शहद एकत्र करने की क्षमता अत्यधिक उच्च होती है।
  2. ये बहुत कम डंक मारती हैं (शांत स्वभाव)।
  3. ये दिए गए छत्ते में लंबे समय तक टिकी रहती हैं।
  4. इनमें प्रजनन की दर बहुत तीव्र होती है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

पौधों के कुल आवश्यक पोषक तत्व
16 (वायु से 2, जल से 1, मृदा से 13)
वृहत् पोषक तत्व (Macro-nutrients, 6)
N, P, K, Ca, Mg, S
सूक्ष्म पोषक तत्व (Micro-nutrients, 7)
Fe, Mn, B, Zn, Cu, Mo, Cl
इटैलियन मधुमक्खी का वैज्ञानिक नाम
एपिस मेलीफेरा (Apis mellifera)
भारतीय देशी मधुमक्खी का नाम
एपिस सेरेना इंडिका (Apis cerana indica)
संमिश्र मत्स्य: सतह भोजी
कतला (Catla)
संमिश्र मत्स्य: मध्य भोजी
रोहू (Rohu)
संमिश्र मत्स्य: तलहटी भोजी
मृगल (Mrigal) एवं कॉमन कार्प (Common Carp)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
CBSE बोर्ड मॉडल प्रश्न (3 अंक): खाद और उर्वरक में कोई तीन प्रमुख अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

खाद एवं उर्वरक में अंतर:

  1. उत्पत्ति: खाद एक प्राकृतिक कार्बनिक पदार्थ है जो पशुओं के गोबर, मलमूत्र एवं पौधों के अवशेषों के अपघटन से बनता है; जबकि उर्वरक कारखानों में निर्मित अकार्बनिक रासायनिक लवण है।
  2. ह्यूमस: खाद मिट्टी को प्रचुर मात्रा में ह्यूमस (जीवांश) प्रदान करती है जिससे मिट्टी की जल-धारण क्षमता सुधरती है; जबकि उर्वरक मिट्टी को कोई ह्यूमस प्रदान नहीं करता।
  3. पोषक तत्वों की सांद्रता: उर्वरक में विशिष्ट पादप पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम) प्रचुर मात्रा में होते हैं; जबकि खाद में पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम मात्रा में होते हैं परंतु वे दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखते हैं।
उदाहरण 2
CBSE बोर्ड 3 अंक प्रश्न: संमिश्र मत्स्य संवर्धन (Composite Fish Culture) के क्या लाभ हैं? इसमें किन मछलियों का चयन किया जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

संमिश्र मत्स्य संवर्धन में एक ही तालाब में 5-6 प्रजातियों की मछलियों का एक साथ पालन किया जाता है। लाभ:

  1. ये मछलियाँ आहार के लिए परस्पर कोई प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं क्योंकि उनके भोजन के क्षेत्र और आदतें भिन्न-भिन्न होती हैं।
  2. तालाब के प्रत्येक भाग (सतह, मध्य व तलहटी) में उपलब्ध समस्त भोजन का पूर्ण और कुशल उपयोग हो जाता है।
  3. इससे तालाब की मछली उत्पादन क्षमता में 8 से 10 गुना वृद्धि हो जाती है।

मछलियों का चयन:

  • सतह भोजी: कतला
  • मध्य क्षेत्र भोजी: रोहू
  • पेंदी भोजी: मृगल एवं कॉमन कार्प
  • खरपतवार भोजी: ग्रास कार्प।
उदाहरण 3
विभेदन कीजिए (3 अंक): अंतराफसलीकरण (Intercropping) और फसल चक्र (Crop Rotation) में अंतर लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अंतर:

  1. अंतराफसलीकरण: एक ही खेत में एक ही समय पर दो या अधिक फसलों को निश्चित कतारों के अनुपात में उगाया जाता है (उदा. सोयाबीन + मक्का)। इससे भूमि व पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग होता है तथा एक फसल के कीट दूसरी फसल में आसानी से नहीं फैलते।
  2. फसल चक्र: एक ही खेत में विभिन्न फसलों को पूर्व-नियोजित योजना के अनुसार बदल-बदल कर क्रमानुसार उगाया जाता है (उदा. धान की फसल के बाद दलहन/चना उगाना)। इससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनी रहती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है।
उदाहरण 4
कारण बताइए (2 अंक): व्यावसायिक शहद उत्पादन के लिए इटैलियन मधुमक्खी (एपिस मेलीफेरा) को क्यों प्राथमिकता दी जाती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

इटैलियन मधुमक्खी (एपिस मेलीफेरा) की निम्नलिखित विशेषताओं के कारण इसे प्राथमिकता दी जाती है:

  1. इसमें शहद एकत्र करने की क्षमता भारतीय देशी मक्खियों की तुलना में अत्यधिक उच्च होती है।
  2. यह बहुत कम डंक मारती है और दिए गए कृत्रिम छत्ते में लंबे समय तक टिकी रहती है, तथा इसमें तीव्र प्रजनन क्षमता होती है।
उदाहरण 5
संक्षिप्त उत्तर (2 अंक): पौधों के लिए वृहत् पोषक तत्व (Macro-nutrients) और सूक्ष्म पोषक तत्व (Micro-nutrients) से क्या तात्पर्य है? उदाहरण दीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  • वृहत् पोषक तत्व: वे तत्व जिनकी पौधों को शारीरिक वृद्धि हेतु अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है (उदा: नाइट्रोजन-N, फॉस्फोरस-P, पोटैशियम-K)। इनकी कुल संख्या 6 है।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व: वे तत्व जिनकी पौधों को अत्यंत अल्प (सूक्ष्म) मात्रा में आवश्यकता होती है (उदा: आयरन-Fe, जिंक-Zn, बोरॉन-B, कॉपर-Cu)। इनकी कुल संख्या 7 है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

उर्वरक को पर्यावरण के लिए सदैव सुरक्षित और खाद से बेहतर मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

उर्वरक तुरंत पोषक तत्व देते हैं किंतु दीर्घकाल में मृदा की संरचना बिगाड़ते हैं और जल प्रदूषण फैलाते हैं। खाद मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और पर्यावरण के लिए कहीं अधिक सुरक्षित है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

संमिश्र मत्स्य संवर्धन में मांसाहारी मछलियों को शामिल मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

इसमें केवल शाकाहारी और विशिष्ट आहार वाली कार्प मछलियाँ चुनी जाती हैं जो एक-दूसरे को नहीं खातीं और भोजन के लिए नहीं लड़तीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ब्रॉयलर को अंडों के लिए पाला जाना लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ब्रॉयलर केवल मांस (Meat) उत्पादन हेतु 6-8 सप्ताह पाले जाते हैं; अंडों के लिए पाली जाने वाली मुर्गियों को "लेयर्स" (Layers) कहते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पौधों के कुल पोषकों की संख्या 13 लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पौधों को कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है: 3 वायु व जल से (C, H, O) तथा 13 मृदा से प्राप्त होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

इटैलियन मधुमक्खी का नाम एपिस सेरेना इंडिका लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एपिस सेरेना इंडिका भारतीय देशी मधुमक्खी है; इटैलियन मधुमक्खी का वैज्ञानिक नाम "एपिस मेलीफेरा" (Apis mellifera) है।

खाद्य संसाधन सुधार एवं संमिश्र मत्स्य संवर्धन चार्ट (Food Resources Management)

खाद्य संसाधन सुधार एवं संमिश्र मत्स्य संवर्धन NCERT / CBSE Board Class 9 Science Chapter 12 पौधों के 16 अनिवार्य पोषक तत्व वायु एवं जल (3): कार्बन (C), ऑक्सीजन (O), हाइड्रोजन (H) मृदा - वृहत् पोषक (Macro - 6): नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K) कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S) मृदा - सूक्ष्म पोषक (Micro - 7): आयरन (Fe), मैंगनीज (Mn), बोरॉन (B), जिंक (Zn) कॉपर (Cu), मोलिब्डेनम (Mo), क्लोरीन (Cl) खाद = जीवांश व उर्वरता | उर्वरक = NPK रासायनिक लवण संमिश्र मत्स्य संवर्धन (तालाब स्तर) 1. सतह भोजी (Surface Feeders): कतला (Catla) - प्लवकों का भक्षण 2. मध्य क्षेत्र भोजी (Middle Zone): रोहू (Rohu) - शैवाल व मध्य पादप 3. पेंदी भोजी (Bottom Feeders): मृगल (Mrigal) एवं कॉमन कार्प (Common Carp) ग्रास कार्प (Grass Carp) - जलीय खरपतवार शून्य प्रतिस्पर्धा → अधिकतम उत्पादन (10 गुना) संपोषणीय कृषि = जैविक खेती + फसल चक्र • इटैलियन मक्खी (एपिस मेलीफेरा) = उच्च शहद उत्पादन

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
खाद्यान्न सुरक्षा हेतु प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाना अनिवार्य है; हरित क्रांति (अनाज) व श्वेत क्रांति (दुग्ध) ने उत्पादन बढ़ाया।
मुख्य बिंदु 2
पौधों को 16 अनिवार्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है: 3 वायु व जल से तथा 13 मृदा से (6 वृहत् पोषक व 7 सूक्ष्म पोषक)।
मुख्य बिंदु 3
खाद प्राकृतिक कार्बनिक पदार्थ है जो मिट्टी को प्रचुर ह्यूमस देती है; उर्वरक कारखानों में बने रासायनिक लवण (NPK) हैं।
मुख्य बिंदु 4
मिश्रित फसल में दो फसलें एक साथ बिना कतार के, अंतराफसलीकरण में निश्चित कतारों में, तथा फसल चक्र में क्रमवार बदल कर उगाई जाती हैं।
मुख्य बिंदु 5
अनाज भंडारण में नमी तथा जैविक कारक (कीट, चूहे, कवक) हानि पहुँचाते हैं; धूप में सुखाना व धूम्रीकरण रोकथाम के उपाय हैं।
मुख्य बिंदु 6
पशुपालन में विदेशी नस्ल (लंबा दुग्धकाल) व देशी नस्ल (रोग प्रतिरोधक) का संकरण कराया जाता है।
मुख्य बिंदु 7
मुर्गियों में अंडों के लिए "लेयर्स" तथा मांस के लिए "ब्रॉयलर" का पालन किया जाता है।
मुख्य बिंदु 8
संमिश्र मत्स्य संवर्धन में कतला (सतह), रोहू (मध्य), मृगल व कॉमन कार्प (पेंदी) एक ही तालाब में बिना प्रतिस्पर्धा के पाली जाती हैं।
मुख्य बिंदु 9
इटैलियन मधुमक्खी (एपिस मेलीफेरा) शांत स्वभाव, कम डंक मारने तथा उच्च शहद संचय क्षमता के कारण सर्वश्रेष्ठ है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
वृहत् पोषक तत्व (Macro-nutrients) किसे कहते हैं? इनके नाम लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पौधों को जिन पोषक तत्वों की अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है, उन्हें वृहत् पोषक तत्व कहते हैं। ये 6 हैं: नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg) तथा सल्फर (S)।
2
फसल चक्र (Crop Rotation) में दलहनी फसलों को उगाना क्यों लाभदायक होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि दलहनी पौधों (चना, मटर, मूँग आदि) की जड़ों की ग्रंथियों में राइजोबियम जीवाणु पाए जाते हैं, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदलकर मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को समृद्ध कर देते हैं।
3
संमिश्र मत्स्य संवर्धन में रोहू और कतला किन-किन क्षेत्रों से भोजन लेती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कतला तालाब की सबसे ऊपरी सतह (Surface) से तथा रोहू तालाब के मध्य क्षेत्र (Middle Zone) से भोजन लेती है।
4
कुक्कुट पालन में ब्रॉयलर और लेयर के आहार में क्या अंतर होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ब्रॉयलर को शीघ्र शारीरिक वृद्धि और मांस हेतु विटामिन A और K युक्त उच्च प्रोटीन व वसायुक्त आहार दिया जाता है, जबकि लेयर को अंडों के उत्पादन हेतु पर्याप्त कैल्शियम युक्त संतुलित आहार दिया जाता है।
5
अनाज भंडारण से पूर्व दानों को धूप में अच्छी तरह क्यों सुखाया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ताकि बीजों में उपस्थित नमी की मात्रा 9-10% से कम हो जाए। अधिक नमी होने पर कवक (फफूंद), सूक्ष्मजीव एवं कीट तीव्रता से पनपते हैं जो बीजों को सड़ाकर उनकी अंकुरण क्षमता नष्ट कर देते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।