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CBSE • कक्षा 9 • Science • अध्याय 6
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

ऊतक (Tissues)

एककोशिकीय जीवों (जैसे अमीबा, पैरामीशियम) में जीवन की सभी मूलभूत जैविक क्रियाएँ—जैसे भोजन अंतर्ग्रहण, श्वसन, उत्सर्जन एवं गति—एक ही कोशिका द्वारा संपन्न की जाती हैं। परंतु बहुकोशिकीय जीवों (जैसे मनुष्य, वृक्ष, पक्षी) में लाखों-करोड़ों कोशिकाएं होती हैं। इन जीवों में शरीर के विभिन्न कार्यों को अधिकतम दक्षता के साथ संपन्न करने के लिए श्रम-विभाजन (Division of Labour) पाया जाता है। विशेष कार्यों को संपन्न करने के लिए विशिष्ट कोशिकाओं का समूह एक निश्चित स्थान पर व्यवस्थित रहता है। समान उत्पत्ति, समान संरचना तथा किसी विशिष्ट कार्य को एक साथ मिलकर संपन्न करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक (Tissue) कहा जाता है। उदाहरणार्थ, मनुष्यों में पेशीय ऊतक संकुचित व प्रसारित होकर गति उत्पन्न करते हैं, तंत्रिका ऊतक संदेशों का वहन करते हैं, और रक्त (तरल संयोजी ऊतक) ऑक्सीजन, भोजन व अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है। पौधों में संवहन ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) जल, खनिज लवणों तथा भोजन का पूरे पादप शरीर में संवहन करते हैं। पौधों और जंतुओं की जीवन शैली, गतिशीलता और वृद्धि प्रारूप में भारी अंतर होता है। पौधे स्थिर रहते हैं और उन्हें दृढ़ता व सहारा चाहिए, इसलिए उनके अधिकांश ऊतक मृत व यांत्रिक सहारा देने वाले होते हैं। पौधों की वृद्धि कुछ निश्चित क्षेत्रों (विभज्योतक) तक सीमित होती है। इसके विपरीत जंतु निरंतर गतिमान रहते हैं, उन्हें अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और उनकी वृद्धि संपूर्ण शरीर में एकसमान होती है। अतः पादप ऊतकों को विभज्योतक (Meristematic) एवं स्थायी ऊतकों (सरल: पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा, स्क्लेरेन्काइमा; एवं जटिल: जाइलम व फ्लोएम) में विभाजित किया जाता है, जबकि जंतु ऊतकों को चार प्रमुख वर्गों—उपकला (Epithelial), संयोजी (Connective: रक्त, अस्थि, उपास्थि, स्नायु, कंडरा), पेशीय (Muscular: रेखित, अरेखित, हृद पेशी) तथा तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) में वर्गीकृत किया जाता है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE Class 9) बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से 6 से 8 अंकों के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेष रूप से जाइलम एवं फ्लोएम में तुलनात्मक अंतर, सरल स्थायी ऊतक (मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक, दृढ़ोतक) में अंतर, तीन प्रकार के पेशी रेशों का सचित्र अंतर, न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) का नामांकित चित्र, तथा स्नायु (Ligament) एवं कंडरा (Tendon) में अंतर परीक्षा के प्रमुख आकर्षण बिंदु हैं।

🌳 क्या आपने कभी सोचा है: 100 मीटर ऊंचे सिकुआ (Redwood) पेड़ की सबसे ऊंची पत्ती तक 1000 लीटर पानी बिना किसी बिजली के मोटर के कैसे चढ़ जाता है?

हमारे घरों में केवल दूसरी या तीसरी मंजिल की पानी की टंकी तक जल चढ़ाने के लिए हमें 1 या 2 हॉर्सपावर की शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर चलानी पड़ती है।

परंतु कैलिफोर्निया के जंगलों में खड़े 300 से 350 फीट ऊंचे 'रेडवुड' (सिकुआ) के विशालकाय वृक्षों को देखिए! जमीन के सैकड़ों फीट नीचे से हजारों लीटर जल और खनिज लवण बिना किसी मोटर, बिना किसी तार और बिना एक यूनिट बिजली के खर्चे के दिन-रात निरंतर सबसे ऊंची चोटी की पत्तियों तक चढ़ते रहते हैं!

यह प्रकृति का कौन-सा अजूबा पंप है? यह कोई कृत्रिम मशीन नहीं, बल्कि पादपों का एक अदृश्य संवहन महामार्ग है जिसे जाइलम ऊतक (Xylem Tissue) कहते हैं! और पत्तियों में सूर्य की किरणों से बना मीठा भोजन गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध जड़ों तक कौन पहुँचाता है? वह है फ्लोएम ऊतक (Phloem Tissue)!

इसी प्रकार हमारे शरीर में दिल बिना थके 70-80 वर्षों तक धड़कता कैसे रहता है? और पैर के अंगूठे में कांटा चुभते ही $0.01$ सेकंड में मस्तिष्क तक चीखने का सिग्नल कौन पहुँचाता है? आइए, कोशिकाओं की इस संगठित सेना—ऊतकों के अद्भुत साम्राज्य का सजीव अध्ययन करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय आपकी शैक्षणिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों निर्णायक है?

  1. CBSE बोर्ड परीक्षा में निश्चित अंक: जाइलम बनाम फ्लोएम का 3-अंक का प्रश्न, न्यूरॉन का नामांकित चित्र (3 अंक), रेखित-अरेखित-हृद पेशी में अंतर, तथा रक्त की संरचना पर प्रश्न बोर्ड परीक्षा में हर वर्ष पूछे जाते हैं।
  2. Class 11 & 12 Biology (Anatomy of Plants & Animal Tissues) का आधार: 11वीं कक्षा का 'Anatomy of Flowering Plants' और 'Structural Organisation in Animals' शत-प्रतिशत इसी अध्याय के विस्तार हैं।
  3. मानव स्वास्थ्य एवं दैनिक उपयोगिता: नारियल के रेशे (स्क्लेरेन्काइमा), मस्कुलर क्रैम्प्स (पेशीय खिंचाव), मोच आना (स्नायु का टूटना), रक्त परीक्षण रिपोर्ट पढ़ना, और हड्डियों व जोड़ों के दर्द के वैज्ञानिक कारणों को समझना।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कोशिका की आधारभूत संरचना (कोशिका भित्ति, केंद्रक, कोशिका द्रव्य)।
  • पादप एवं जंतु कोशिका के बीच का अंतर।
  • पौधों में प्रकाश संश्लेषण एवं वाष्पोत्सर्जन की प्राथमिक समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ऊतक की वैज्ञानिक परिभाषा और बहुकोशिकीय जीवों में इसके महत्व की व्याख्या कर सकेंगे।
  • पादप ऊतकों के प्रमुख प्रकारों (विभज्योतक: शीर्षस्थ, अंतर्विष्ट, पार्श्वीय; तथा स्थायी ऊतक) का प्रवाह चार्ट बना सकेंगे।
  • सरल स्थायी ऊतक (पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा, स्क्लेरेन्काइमा) के संरचनात्मक व कार्यात्मक अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • जटिल स्थायी ऊतक—जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) के चार-चार घटकों एवं उनके संवहन कार्यों की विस्तृत तुलना कर सकेंगे।
  • जंतु ऊतकों के चारों वर्गों (उपकला, संयोजी, पेशीय, तंत्रिका ऊतक) के लक्षण एवं उदाहरण बता सकेंगे।
  • रक्त के घटकों (प्लाज्मा, RBC, WBC, प्लेटलेट्स) तथा अस्थि, उपास्थि, स्नायु व कंडरा के कार्यों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • रेखित (Skeletal), अरेखित (Smooth) और हृद पेशी (Cardiac) के मध्य सचित्र अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) का नामांकित चित्र बनाकर आवेग संचरण की प्रक्रिया को समझ सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पादप ऊतक: विभज्योतक (Meristemati...
2 2. जटिल स्थायी ऊतक: जाइलम (Xylem) ए...
3 3. जंतु ऊतक: उपकला ऊतक एवं संयोजी ऊ...
4 4. पेशीय ऊतक एवं तंत्रिका ऊतक (न्यू...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पादप ऊतक: विभज्योतक (Meristematic) एवं सरल स्थायी ऊतक

(क) विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)

पौधों में वृद्धि केवल कुछ विशिष्ट भागों में ही होती है। निरंतर विभाजित होने वाली कोशिकाओं के इस ऊतक को विभज्योतक (Meristem) कहते हैं। स्थान के आधार पर यह तीन प्रकार का होता है:

  1. शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): यह जड़ों एवं तनों के वृद्धि वाले शीर्ष भागों पर स्थित होता है तथा उनकी लंबाई में वृद्धि करता है।
  2. पार्श्वीय विभज्योतक / कैम्बियम (Lateral Meristem): यह तने अथवा जड़ की परिधि पर होता है और उसकी मोटाई (Girth / घेरा) में वृद्धि करता है।
  3. अंतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार में या टहनी की पर्वसंधियों (Nodes) के दोनों ओर स्थित होता है (उदा. घास व बांस में)।

विभज्योतक कोशिकाओं के अभिलक्षण: ये अत्यधिक सक्रिय होती हैं, इनका कोशिका द्रव्य सघन होता है, कोशिका भित्ति पतली (सेल्युलोज की) होती है, केंद्रक सुस्पष्ट व बड़ा होता है, तथा इनमें रसधानियाँ (Vacuoles) अनुपस्थित होती हैं (क्योंकि इन्हें भोजन संचय की नहीं, केवल तीव्र विभाजन की आवश्यकता होती है)।

(ख) सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissues)

विभज्योतक कोशिकाएं विभाजन की क्षमता खोकर एक निश्चित आकार, रूप और कार्य ग्रहण कर लेती हैं। इस प्रक्रिया को विभेदीकरण (Differentiation) कहते हैं। एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने ऊतक सरल स्थायी ऊतक कहलाते हैं:

गुणधर्म पैरेन्काइमा (मृदूतक) कॉलेन्काइमा (स्थूलकोण ऊतक) स्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ोतक)
1. कोशिका की प्रकृति जीवित कोशिकाएं, भित्ति पतली (सेल्युलोज निर्मित)। जीवित, लंबी कोशिकाएं, कोनों पर पेक्टिन का जमाव। मृत कोशिकाएं, लिग्निन (Lignin) के जमाव से अत्यधिक मोटी भित्ति।
2. अंतराकोशिकीय स्थान कोशिकाओं के बीच काफी रिक्त स्थान होता है। अंतराकोशिकीय स्थान बहुत कम या नगण्य होता है। अंतराकोशिकीय स्थान पूर्णतः अनुपस्थित होता है।
3. मुख्य कार्य भोजन का भंडारण, पौधों को सहारा देना। पौधों में लचीलापन (Flexibility) व यांत्रिक शक्ति प्रदान करना (हवा में बिना टूटे झुकना)। पौधों को कठोरता एवं मजबूती प्रदान करना (उदा: नारियल का रेशा/छिलका, बीज कवच)।
4. रूपांतरण - क्लोरेन्काइमा: जब इसमें क्लोरोफिल होता है, तो प्रकाश संश्लेषण करता है।
- एरेन्काइमा: जलीय पौधों में हवा की बड़ी गुहिकाएं जो तैरने में उत्पलावकता देती हैं।
पत्ती के डंठल (Petiole) तथा तने के एपिडर्मिस के नीचे पाया जाता है। तने में संवहन बंडल के समीप, पत्तियों की शिराओं तथा फलों/अखरोट के छिलकों में।

2. जटिल स्थायी ऊतक: जाइलम (Xylem) एवं फ्लोएम (Phloem)

एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने ऊतक, जो एक इकाई के रूप में मिलकर कार्य करते हैं, जटिल स्थायी ऊतक कहलाते हैं। पौधों में संवहन का कार्य करने के कारण इन्हें संवहन ऊतक (Vascular Tissues) भी कहा जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं:

(क) जाइलम (Xylem - दारू)

यह जड़ों द्वारा अवशोषित जल और घुलित खनिज लवणों का ऊर्ध्वमुखी संवहन (केवल ऊपर की ओर, Unidirectional) पत्तियों एवं अन्य भागों तक करता है। इसके 4 घटक होते हैं:

  1. वाहिनिकाएँ (Tracheids): लंबी, नलाकार मृत कोशिकाएं, जिनके सिरे नुकीले होते हैं। भित्ति पर लिग्निन का जमाव होता है। यह जल का संवहन करती हैं।
  2. वाहिकाएँ (Vessels): बेलनाकार नली के समान मृत कोशिकाएं, जो एक के ऊपर एक जुड़ी रहती हैं। आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में जल संवहन का मुख्य घटक हैं।
  3. जाइलम पैरेन्काइमा (Xylem Parenchyma): जाइलम का एकमात्र जीवित घटक है। यह भोजन का संचय करता है तथा जल के पार्श्वीय संवहन में मदद करता है।
  4. जाइलम फाइबर / रेशे (Xylem Sclerenchyma): मृत कोशिकाएं, जो पौधे को यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं।

(ख) फ्लोएम (Phloem - पोषवाह)

यह पत्तियों में बने घुलनशील कार्बनिक भोजन (सुक्रोज) का संवहन पौधे के सभी भागों (ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में, Bidirectional) में करता है। इस प्रक्रिया को स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं। इसके 4 घटक होते हैं:

  1. चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes): छिद्रित भित्ति (चालनी पट्टिका) वाली नलिकाकार कोशिकाएं। परिपक्व होने पर इनमें केंद्रक नहीं होता, किंतु कोशिका द्रव्य रहता है (जीवित)।
  2. साथी कोशिकाएं (Companion Cells): केंद्रक युक्त जीवित कोशिकाएं जो चालनी नलिकाओं के पार्श्व में सटकर उनके कार्यों का नियंत्रण करती हैं।
  3. फ्लोएम पैरेन्काइमा (Phloem Parenchyma): जीवित कोशिकाएं, जो भोजन व रेजिन का संचय करती हैं।
  4. फ्लोएम रेशे (Phloem Fibres / Bast Fibres): फ्लोएम का एकमात्र मृत घटक है (उदा. पटसन/जूट के रेशे)। यह यांत्रिक मजबूती प्रदान करता है।
तुलना का बिंदु जाइलम (Xylem) फ्लोएम (Phloem)
1. संवहित पदार्थ जल एवं अकार्बनिक खनिज लवण। पत्तियों में निर्मित भोजन (कार्बनिक पोषक)।
2. प्रवाह की दिशा केवल एकदिशीय—जड़ों से ऊपर पत्तियों की ओर (↑)। द्विदिशीय—पत्तियों से ऊपर तथा नीचे जड़ों दोनों ओर (↕)।
3. कोशिकाओं की जीवितता अधिकांश कोशिकाएं मृत होती हैं (केवल जाइलम पैरेन्काइमा जीवित)। अधिकांश कोशिकाएं जीवित होती हैं (केवल फ्लोएम रेशे मृत)।
4. ऊर्जा की आवश्यकता भौतिक बलों (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव) द्वारा होता है, ATP नहीं चाहिए। भोजन का स्थानांतरण सक्रिय होता है, जिसमें ATP ऊर्जा का उपयोग होता है।

3. जंतु ऊतक: उपकला ऊतक एवं संयोजी ऊतक

(क) उपकला ऊतक (Epithelial Tissue - संरक्षी आवरण)

यह जंतु शरीर को ढकने या बाह्य रक्षा प्रदान करने वाला ऊतक है। कोशिकाएं परस्पर सटी रहती हैं और इनके बीच कोई अंतराकोशिकीय स्थान नहीं होता।

  • शल्की उपकला (Squamous): चपटी, पतली कोशिकाएं (उदा: रक्त वाहिकाओं की भित्ति, फेफड़ों की कूपिकाएं, आहारनाल का अस्तर)। त्वचा की बहुस्तरीय शल्की उपकला को स्तरित शल्की कहते हैं जो कटने-फटने से बचाती है।
  • घनाकार उपकला (Cuboidal): घन जैसी कोशिकाएं (उदा: वृक्क नलिकाएं, लार ग्रंथि की नली)। यह यांत्रिक सहारा देती है।
  • स्तंभाकार उपकला (Columnar): खंभे जैसी लंबी कोशिकाएं (उदा: आंत का भीतरी अस्तर जहाँ अवशोषण होता है)। श्वास नली में इन पर सिलिया (रोम) होते हैं, जिसे पक्ष्माभी स्तंभाकार (Ciliated) कहते हैं।
  • ग्रंथिल उपकला (Glandular): जब उपकला कोशिकाएं भीतर की ओर मुड़कर विशिष्ट स्रावी ग्रंथियों का निर्माण करती हैं।

(ख) संयोजी ऊतक (Connective Tissue)

यह विभिन्न अंगों को आपस में जोड़ने, सहारा देने और बांधने का कार्य करता है। इसकी कोशिकाएं एक अंतराकोशिकीय आधात्री (Matrix) में ढीली धंसी रहती हैं:

  1. रक्त (Blood - तरल संयोजी ऊतक): इसके तरल आधात्री भाग को प्लाज्मा (Plasma) कहते हैं, जिसमें लाल रक्त कणिकाएं (RBC - हीमोग्लोबिन युक्त, $O_2$ का परिवहन), श्वेत रक्त कणिकाएं (WBC - रोगाणुओं से सुरक्षा), और प्लेटलेट्स (रक्त का थक्का जमाना) तैरते रहते हैं।
  2. अस्थि (Bone): कठोर, मजबूत संयोजी ऊतक जो शरीर का कंकाल बनाता है। इसकी आधात्री कैल्शियम तथा फॉस्फोरस के यौगिकों से बनी होती है।
  3. उपास्थि (Cartilage): लचीला संयोजी ऊतक जिसकी आधात्री प्रोटीन और शर्करा से बनी होती है। यह जोड़ों की सतह को चिकना बनाता है (उदा: नाक की नोक, कान का पिन्ना, श्वास नली, कंठ)।
  4. स्नायु एवं कंडरा (Ligament and Tendon - CBSE Board अति-महत्वपूर्ण):
    • स्नायु (Ligament): दो अस्थियों को आपस में जोड़ने वाला अत्यधिक लचीला एवं मजबूत ऊतक है। (इसमें बहुत कम आधात्री होती है; इसमें खिंचाव आने पर मोच आती है)।
    • कंडरा (Tendon): मांसपेशियों को अस्थि से जोड़ने वाला अत्यधिक मजबूत, सीमित लचीलेपन वाला रेशेदार ऊतक है।
  5. एरिओलर ऊतक (Areolar): त्वचा और मांसपेशियों के बीच, रक्त नलिकाओं व तंत्रिकाओं के चारों ओर स्थित। यह अंगों के आंतरिक रिक्त स्थानों को भरता है और ऊतकों की मरम्मत करता है।
  6. एडिपोज ऊतक (Adipose - वसा ऊतक): त्वचा के नीचे तथा आंतरिक अंगों के बीच वसा का संचय करता है। यह शरीर में ऊष्मीय कुचालक (Thermal Insulator) का कार्य करता है।

4. पेशीय ऊतक एवं तंत्रिका ऊतक (न्यूरॉन की संरचना)

(क) पेशीय ऊतक (Muscular Tissue) के तीन प्रकार

पेशीय ऊतक लंबी कोशिकाओं से बने होते हैं जिन्हें पेशी रेशा कहते हैं। इनमें एक विशेष संकुचनशील प्रोटीन (Contractile Protein - एक्टिन व मायोसिन) होता है जो गति उत्पन्न करता है:

लक्षण रेखित पेशी (Striated / कंकाल) अरेखित पेशी (Smooth / चिकनी) हृद पेशी (Cardiac Muscle)
1. इच्छा पर नियंत्रण ऐच्छिक (Voluntary)—हमारी इच्छानुसार गति करती हैं। अनैच्छिक (Involuntary)—स्वतः कार्य करती हैं, इच्छा के अधीन नहीं। अनैच्छिक—स्वतः जीवन भर लयबद्ध संकुचन करती हैं।
2. कोशिका का आकार लंबी, बेलनाकार, अशाखित। लंबी, दोनों सिरों से नुकीली (तर्कुरूप / Spindle-shaped)। बेलनाकार, शाखान्वित (Branched)।
3. पट्टियाँ (Striations) गहरे व हल्के रंग की एकांतर धारियाँ (पट्टियाँ) स्पष्ट दिखती हैं। कोई धारियाँ नहीं होतीं (चिकनी / अरेखित)। हल्की धारियाँ (Striations) उपस्थित होती हैं।
4. केंद्रक बहुकेंद्रकी (Multinucleate)—परिधि पर अनेक केंद्रक। एककेंद्रकी (Uninucleate)—मध्य में एक केंद्रक। एककेंद्रकी, मध्य में स्थित।
5. थकान (Fatigue) लगातार कार्य करने पर शीघ्र थक जाती हैं। थकती नहीं हैं। कभी नहीं थकतीं, आजीवन बिना रुके धड़कती हैं।
6. शरीर में स्थान हाथ, पैर, गर्दन की कंकाल से जुड़ी मांसपेशियां। आहारनाल, आमाशय, रक्त वाहिकाएं, आंख की परितारिका, मूत्रवाहिनी। केवल हृदय की भित्ति (Myocardium) में।

(ख) तंत्रिका ऊतक एवं न्यूरॉन (Neuron - तंत्रिका कोशिका)

मस्तिष्क, मेरुरज्जु तथा तंत्रिकाएं सभी तंत्रिका ऊतक से बनी हैं। तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को न्यूरॉन (Neuron) कहते हैं। यह मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका (1 मीटर तक लंबी) हो सकती है।

न्यूरॉन के तीन मुख्य भाग होते हैं:

  1. द्रुमिकाएं (Dendrites): कोशिका काय से निकलने वाले छोटे, बाल जैसी शाखाएं जो ग्राही अंगों से रासायनिक/विद्युत सूचनाएं ग्रहण करती हैं।
  2. कोशिका काय (Cell Body / Cyton): मुख्य भाग जिसमें केंद्रक और प्ररूपी कोशिका द्रव्य स्थित होता है।
  3. तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन - Axon): कोशिका काय से निकलने वाला एक बहुत लंबा रेशा, जो तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) को अगले न्यूरॉन तक ले जाता है। इसके अंतिम सिरे को तंत्रिका का अंतिम सिरा (Nerve Ending) कहते हैं। दो न्यूरॉनों के बीच के सूक्ष्म संधि-स्थल को सिनैप्स (Synapse) कहते हैं।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

ऊतक की वैज्ञानिक परिभाषा
समान संरचना, उत्पत्ति और विशिष्ट कार्य संपन्न करने वाली कोशिकाओं का समूह
पादप संवहन ऊतक (संवहन बंडल)
जाइलम (जल व खनिज) + फ्लोएम (पोषक भोजन)
रक्त के प्रमुख घटक
प्लाज्मा (55%) + रक्त कणिकाएं RBC, WBC, प्लेटलेट्स (45%)
स्नायु का कार्य (Ligament)
अस्थि को अस्थि से जोड़ना (Bone to Bone)
कंडरा का कार्य (Tendon)
मांसपेशी को अस्थि से जोड़ना (Muscle to Bone)
मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका
न्यूरॉन / तंत्रिका कोशिका (लगभग 1 मीटर तक लंबी)
जाइलम का जीवित घटक
जाइलम पैरेन्काइमा (अन्य तीनों वाहिनिका, वाहिका, फाइबर मृत हैं)
फ्लोएम का मृत घटक
फ्लोएम फाइबर / रेशे (अन्य तीनों चालनी नलिका, साथी कोशिका, पैरेन्काइमा जीवित हैं)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
CBSE बोर्ड मॉडल प्रश्न (3 अंक): जाइलम एवं फ्लोएम में कोई तीन प्रमुख अंतर लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

जाइलम एवं फ्लोएम में अंतर:

  1. संवहित पदार्थ: जाइलम जड़ों द्वारा अवशोषित जल और अकार्बनिक खनिज लवणों का संवहन करता है, जबकि फ्लोएम पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा बने कार्बनिक भोजन (शर्करा) का संवहन करता है।
  2. प्रवाह की दिशा: जाइलम में जल का प्रवाह केवल एकदिशीय (नीचे जड़ों से ऊपर पत्तियों की ओर) होता है, जबकि फ्लोएम में भोजन का स्थानांतरण द्विदिशीय (पत्तियों से ऊपर व नीचे दोनों दिशाओं में) होता है।
  3. कोशिकीय प्रकृति: जाइलम के अधिकांश घटक मृत होते हैं (केवल जाइलम पैरेन्काइमा जीवित है), जबकि फ्लोएम के अधिकांश घटक जीवित होते हैं (केवल फ्लोएम रेशे मृत होते हैं)।
उदाहरण 2
विभेदन कीजिए (3 अंक): स्नायु (Ligament) और कंडरा (Tendon) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अंतर सारणी:

  • स्नायु (Ligament):

    1. यह दो अस्थियों को परस्पर जोड़ता है (अस्थि से अस्थि)।
    2. यह अत्यधिक लचीला (High Elasticity) और मजबूत होता है।
    3. इसमें अंतराकोशिकीय आधात्री बहुत कम होती है।
    4. इसमें अचानक अत्यधिक खिंचाव आने पर 'मोच' (Sprain) आ जाती है।
  • कंडरा (Tendon):

    1. यह कंकाल पेशी को अस्थि से जोड़ता है (मांसपेशी से अस्थि)।
    2. यह मजबूत श्वेत रेशेदार ऊतक है जिसका लचीलापन सीमित होता है।
    3. यह मांसपेशियों के संकुचन बल को हड्डियों तक पहुंचाकर गति संभव बनाता है।
उदाहरण 3
सचित्र विवरण (3 अंक): न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) के तीन प्रमुख भागों के नाम एवं उनके कार्य लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

न्यूरॉन के तीन प्रमुख भाग:

  1. द्रुमिका (Dendrite): कोशिका काय से निकलने वाले शाखित रेशे हैं जो परिवेश या अन्य न्यूरॉन से सूचनाएं (उद्दीपन) विद्युत-रासायनिक संकेत के रूप में ग्रहण करते हैं।
  2. कोशिका काय (Cyton / Cell Body): इसमें केंद्रक और कोशिकांग स्थित होते हैं। यह प्राप्त उद्दीपनों को विद्युत आवेग (Impulse) में परिवर्तित करता है।
  3. तंत्रिकाक्ष (Axon): यह एक लंबा एकल प्रवर्ध है जो विद्युत आवेग को कोशिका काय से दूर अगले न्यूरॉन की द्रुमिका अथवा पेशी/ग्रंथि तक पहुंचाता है।
उदाहरण 4
कारण बताइए (2 अंक): नारियल का रेशा (छिलका) किस ऊतक का बना होता है और यह इतना कठोर क्यों होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

नारियल का छिलका (रेशा) स्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ोतक) ऊतक का बना होता है। वैज्ञानिक कारण: दृढ़ोतक की कोशिकाएं मृत, संकरी और लंबी होती हैं तथा इनकी कोशिका भित्ति पर लिग्निन (Lignin) नामक एक प्राकृतिक जल-अभेद्य रासायनिक सीमेंट का अत्यधिक मोटा जमाव होता है। लिग्निन के इस अत्यधिक जमाव के कारण ही नारियल का छिलका अत्यंत कठोर, मजबूत और जल-रोधी होता है।

उदाहरण 5
तुलना कीजिए (3 अंक): रेखित पेशी, अरेखित पेशी और हृद पेशी में कोई तीन अंतर लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अंतर:

  1. नियंत्रण: रेखित पेशी ऐच्छिक (इच्छानुसार गति) होती है; अरेखित पेशी और हृद पेशी दोनों अनैच्छिक (स्वतः कार्य करने वाली) होती हैं।
  2. संरचना: रेखित पेशी बेलनाकार, अशाखित व बहुकेंद्रकी होती है; अरेखित पेशी दोनों सिरों से नुकीली (तर्कुरूप) व एककेंद्रकी होती है; हृद पेशी बेलनाकार, शाखान्वित व एककेंद्रकी होती है।
  3. थकान: रेखित पेशी कार्य करने पर शीघ्र थक जाती है; जबकि हृद पेशी जीवन भर बिना थके लयबद्ध रूप से संकुचित व प्रसारित होती रहती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जाइलम में भोजन का संवहन लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जाइलम केवल जल और खनिज लवणों का संवहन करता है। भोजन (सुक्रोज) का संवहन केवल फ्लोएम करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

स्नायु और कंडरा के कार्यों को उल्टा लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सरल ट्रिक याद रखें: Ligament = Bone to Bone (हड्डी से हड्डी); Tendon = Muscle to Bone (मांसपेशी से हड्डी)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हृद पेशी को ऐच्छिक मान लेना क्योंकि वह निरंतर कार्य करती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

हृद पेशी पूर्णतः अनैच्छिक (Involuntary) है, हमारा अपनी हृदय गति पर कोई सीधा सचेत नियंत्रण नहीं होता।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

फ्लोएम के सभी घटकों को मृत समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

फ्लोएम का केवल 1 घटक (फ्लोएम रेशे) मृत होता है, शेष तीनों (चालनी नलिकाएं, साथी कोशिकाएं, फ्लोएम पैरेन्काइमा) जीवित होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

रक्त को उपकला ऊतक मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

रक्त एक विशिष्ट "तरल संयोजी ऊतक" (Fluid Connective Tissue) है, उपकला ऊतक नहीं।

पादप एवं जंतु ऊतकों का संपूर्ण वर्गीकरण चार्ट (Complete Tissue Classification Map)

पादप एवं जंतु ऊतकों का संपूर्ण वर्गीकरण NCERT / CBSE Board Class 9 Science Chapter 6 पादप ऊतक (PLANT TISSUES) 1. विभज्योतक • शीर्षस्थ (लंबाई) • पार्श्वीय (मोटाई/घेरा) • अंतर्विष्ट (पर्वसंधि) 2. स्थायी ऊतक अविभाजित कोशिकाएं विशिष्ट आकार व कार्य (सरल व जटिल) सरल स्थायी: • पैरेन्काइमा (भंडारण) • कॉलेन्काइमा (लचीलापन) • स्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ता) जटिल संवहन: • जाइलम (जल संवहन, ↑) • फ्लोएम (भोजन संवहन, ↕) (वाहिकाएं + चालनी नलिकाएं) जंतु ऊतक (ANIMAL TISSUES) 1. उपकला (Epithelial) • शल्की (Squamous) • घनाकार (Cuboidal) • स्तंभाकार (Columnar) 2. संयोजी (Connective) • रक्त (तरल Matrix) • अस्थि, उपास्थि • स्नायु, कंडरा, एडिपोज 3. पेशीय (Muscular) • रेखित (कंकाल, ऐच्छिक) • अरेखित (चिकनी, अनैच्छिक) • हृद पेशी (अथक धड़कन) 4. तंत्रिका (Nervous) • न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) • द्रुमिका, Cyton, Axon • विद्युत आवेग संचरण जाइलम = जल व खनिज (एकदिशीय) • फ्लोएम = भोजन (द्विदिशीय) • लिगामेंट = अस्थि से अस्थि • टेंडन = पेशी से अस्थि

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
समान संरचना, उत्पत्ति और किसी विशिष्ट कार्य को संपन्न करने वाली कोशिकाओं का समूह ऊतक कहलाता है।
मुख्य बिंदु 2
विभज्योतक तीन प्रकार के होते हैं: शीर्षस्थ (लंबाई), पार्श्वीय (तने की मोटाई/घेरा), तथा अंतर्विष्ट (पर्वसंधि पर)।
मुख्य बिंदु 3
सरल स्थायी ऊतक तीन हैं: पैरेन्काइमा (भोजन संचय), कॉलेन्काइमा (लचीलापन व यांत्रिक शक्ति), और स्क्लेरेन्काइमा (लिग्निन युक्त मृत, कठोर ऊतक)।
मुख्य बिंदु 4
जटिल संवहन ऊतक दो हैं: जाइलम (जल व खनिज का ऊपर की ओर संवहन) तथा फ्लोएम (भोजन का दोनों दिशाओं में संवहन)।
मुख्य बिंदु 5
जाइलम में केवल जाइलम पैरेन्काइमा जीवित है; फ्लोएम में केवल फ्लोएम रेशे मृत हैं।
मुख्य बिंदु 6
जंतु उपकला ऊतक संरक्षी आवरण है (शल्की, घनाकार, स्तंभाकार, ग्रंथिल)।
मुख्य बिंदु 7
रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जिसके प्लाज्मा में RBC, WBC तथा प्लेटलेट्स होते हैं।
मुख्य बिंदु 8
स्नायु (Ligament) अस्थि को अस्थि से जोड़ता है; कंडरा (Tendon) मांसपेशी को अस्थि से जोड़ता है।
मुख्य बिंदु 9
पेशीय ऊतक तीन प्रकार के होते हैं: रेखित (कंकाल/ऐच्छिक), अरेखित (चिकनी/अनैच्छिक) तथा हृद पेशी (अनैच्छिक, बिना थके धड़कने वाली)।
मुख्य बिंदु 10
तंत्रिका ऊतक की इकाई न्यूरॉन है जिसमें द्रुमिका (Dendrite), कोशिका काय (Cyton) तथा एक्सॉन (Axon) होते हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
विभज्योतक ऊतकों में रसधानियाँ (Vacuoles) क्यों अनुपस्थित होती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि विभज्योतक कोशिकाओं का एकमात्र कार्य निरंतर तीव्र विभाजन करना होता है। इन्हें भोजन या अपशिष्ट पदार्थों के संचयन की आवश्यकता नहीं होती, अतः इनमें रसधानियाँ नहीं पाई जातीं।
2
नारियल का छिलका किस ऊतक का बना होता है? इसके प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नारियल का छिलका स्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ोतक) का बना होता है। यह मृत कोशिकाओं से बना होता है, कोशिका भित्ति पर लिग्निन का मोटा जमाव होता है तथा कोशिकाओं के बीच कोई अंतराकोशिकीय स्थान नहीं होता।
3
फ्लोएम के चारों घटकों के नाम लिखिए। इनमें से कौन-सा घटक मृत है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: फ्लोएम के 4 घटक हैं: (1) चालनी नलिकाएं, (2) साथी कोशिकाएं, (3) फ्लोएम पैरेन्काइमा, तथा (4) फ्लोएम रेशे। इनमें केवल "फ्लोएम रेशे" (Phloem Fibres) मृत होते हैं, शेष तीनों जीवित हैं।
4
हृद पेशी (Cardiac Muscle) के दो विशिष्ट संरचनात्मक लक्षण लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (1) हृद पेशी की कोशिकाएं बेलनाकार, शाखान्वित (Branched) तथा एककेंद्रकी होती हैं। (2) ये जीवन भर बिना थके लयबद्ध संकुचन एवं प्रसार करती रहती हैं।
5
स्नायु (Ligament) के अत्यधिक खिंच जाने पर क्या होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: स्नायु दो अस्थियों को आपस में जोड़ता है। इसके अत्यधिक खिंच जाने अथवा आंशिक रूप से फट जाने पर तीव्र दर्द और सूजन होती है, जिसे सामान्य भाषा में "मोच" (Sprain) कहा जाता है।
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