रहस्यमयी बीमारी: आठ-नौ साल का मोहन तीसरी कक्षा में पढ़ता है। दोपहर को अचानक वह अपने पेट पर हाथ रखकर जोर-जोर से कराहने लगता है—"माँ ओ माँ, पेट में कुछ ऐसे-ऐसे होता है!" माँ घबराकर पूछती है कि दर्द कैसा है? क्या चुभन है या मरोड़? मोहन केवल एक ही रट लगाए रहता है—"बस ऐसे-ऐसे होता है!"
घरेलू उपचार और पिता की घबराहट: माँ उसे गरम पानी की बोतल से सेकती है, हींग, हींग-अजवाइन और नींबू का पानी देती है, पर दर्द कम नहीं होता। पिता बताते हैं कि इसने दफ्तर में केवल एक केला और एक संतरा खाया था, कोई उल्टी-सीधी चीज़ नहीं खाई। घबराकर पिता वैद्य जी और डॉक्टर साहब को फोन करते हैं।