जादूगर चंकी चंगलनबा की लोककथा: एक प्रसिद्ध नागा लोककथा के अनुसार, एक महान चतुर जादूगर था जिसका नाम चंकी चंगलनबा था। मृत्यु के समय उसने लोगों से कहा कि जब मैं मर जाऊँ तो मुझे किसी आम तरीके से मत दफनाना, मेरी कब्र को छठे दिन खोदना और देखना कि क्या मिलता है। जब लोगों ने छठे दिन उसकी कब्र खोदी, तो उस पर बाँस के अंकुर फूटे हुए मिले। जादूगर के अंगों से बाँस की टोकरियों के तरह-तरह के सुंदर आकार और डिजाइन बने थे!
साँस-साँस में बाँस: पूर्वोत्तर भारत में बाँस जीवन की हर धड़कन में बसा है—शिशु का पालना, बैठने की तिपाई, रहने का मकान, भोजन पकाने के बर्तन, मछली पकड़ने का जाल, मूसलाधार बारिश से बचाने वाली टोपी और मृत्यु के बाद अर्थी तक बाँस की बनाई जाती है।