नेहरू जी का संवाद: जब इंदिरा मसूरी में थीं और नेहरू जी इलाहाबाद की नैनी जेल में थे, तब वे आमने-सामने बातचीत नहीं कर सकते थे। इसलिए नेहरू जी ने पत्रों के माध्यम से दुनिया की कहानियाँ सुनाने का निश्चय किया।
प्रकृति के अक्षर: नेहरू जी समझाते हैं कि केवल अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू सीखने से पहले जैसे अक्षर सीखने पड़ते हैं, वैसे ही प्रकृति की कहानी जानने के लिए प्रकृति के अक्षरों को पढ़ना सीखना होगा। ये अक्षर हैं—चट्टानें, पहाड़, नदियाँ, समुद्र, सितारे, जीवाश्म और पुराने जानवरों की हड्डियाँ।