मित्र की परीक्षा: हेलेन केलर प्रायः अपने उन मित्रों की परीक्षा लेती थीं जो आँखों से संपन्न थे, यह जानने के लिए कि वे क्या देखते हैं। एक बार उनकी एक प्रिय सहेली जंगल की लंबी सैर करके लौटीं। जब हेलेन ने पूछा कि "आपने जंगल में क्या-क्या देखा?", तो सहेली ने अत्यंत सहज भाव से उत्तर दिया—"कुछ खास तो नहीं!"
हेलेन का विस्मय: हेलेन को इस उत्तर पर कोई अचरज नहीं हुआ, क्योंकि वे ऐसे उत्तरों की आदी हो चुकी थीं। वे सोच में पड़ गईं कि कोई व्यक्ति एक घंटे तक घने जंगल में घूमे और फिर भी उसे कोई विशेष चीज़ दिखाई न दे, यह कैसे संभव है? जबकि वे स्वयं, जो कुछ भी नहीं देख सकतीं, केवल छूने भर से सैकड़ों रोचक चीज़ें पहचान लेती हैं!