चक्की पीसना और अनाज बीनना: साबरमती आश्रम में गांधीजी कई ऐसे काम खुद करते थे जिन्हें आम तौर पर नौकर या मजदूर करते हैं। वे रोज सुबह जल्दी उठकर आश्रमवासियों के साथ चक्की पर आटा पीसते थे। आश्रम में गेहूं पीसने से पहले वे स्वयं गेहूं को फटकते और उसमें से कंकड़-पत्थर चुनकर अलग करते थे। जब एक बार एक कॉलेज के अहंकारी अंग्रेजी छात्र ने बापू से कोई काम माँगा, तो बापू ने उसे गेहूं बीनने का काम थमा दिया, जिससे उस छात्र का घमंड चूर हो गया!
रसोई और बर्तनों की सफाई: गांधीजी आश्रम की रसोई में स्वयं सब्जियाँ काटते और छीलते थे। वे पौष्टिकता के पक्के नियमपालक थे और बिना उबाले ककड़ी-टमाटर खाने के पोषक तत्वों को नष्ट होने से बचाते थे। बर्तनों की सफाई में बापू का कोई सानी नहीं था—वे राख और मिट्टी से रसोई के बड़े-बड़े काले पतीलों को तब तक रगड़ते थे जब तक कि वे चांदी की तरह चमक न उठें!